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भगवान तुंगनाथ के दर पर पहुँचे UAE क्राउन प्रिंस के प्रतिनिधि व अरबपति कारोबारी अली राशिद, किया हवन

संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के क्राउन प्रिंस शेख खलीफा बिन जाएद अल नाहयान के प्रतिनिधि मोहम्मद अली राशिद अलबार ने उत्तराखंड के तुंगनाथ मंदिर में पूजा-अर्चना की। शनिवार को उन्होंने हवन कर भगवान को चाँदी की छतरी और छड़ी अर्पित किया। कारोबारी अली राशिद तुंगनाथ की भव्यता और सौंदर्य से अभिभूत नज़र आए। उन्होंने कहा कि तुंगनाथ के प्रति वह अगाध आस्था रखते हैं। अली राशिद चार्टर्ड हैलीकॉप्टर के जरिए यहाँ तक पहुँचे

ऊखीमठ पहुँचे अली राशिद के स्वागत के लिए बद्रीनाथ-केदारनाथ मंदिर पदाधिकारियों के साथ-साथ जिला प्रशासन के लोग भी मौजूद थे। इसके बाद वह कार से चोपता पहुँचे और फिर वहाँ से घोड़े से 3 किलोमीटर की चढ़ाई कर तुंगनाथ धाम दर्शन करने पहुँचे। असल में उन्हें देहरादून होकर तुंगनाथ जाना था, लेकिन वह दिल्ली से सीधे तुंगनाथ पहुँच गए। उन्होंने क़रीब 2 घंटे तक मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना की।

इस दौरान वहाँ भंडारे का भी आयोजन किया गया। शाम को क़रीब 5 बजे वह वापस दिल्ली के लिए रवाना हो गए। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक़, अली राशिद 829 मीटर की दुनिया की सबसे ऊंची इमारत बुर्ज खलीफा और द दुबई मॉल के डेवलपर भी हैं। उनकी गिनती यूएई के सबसे बड़े रियल इस्टेट कारोबारियों में होती है। वह 583 करोड़ डॉलर रेवेन्यू वाली कम्पनी ईमार प्रॉपर्टीज के संस्थापक भी हैं।

तुंगनाथ मंदिर पंच-केदार मंदिरों में सबसे अधिक ऊँचाई पर स्थित शिव मंदिर है। यह कई हज़ार वर्ष पुराना है। इस मंदिर की स्थापना की कहानी पांडवों से जुड़ी है और रामायण में भी इसका जिक्र मिलता है।

देहरादून ग्राउंड रिपोर्ट: ‘हमारे भगवा झंडे को देख कर मजहबी भीड़ ने हम पर आरी, चाकू, डंडों से हमला किया’

दिल्ली में दुर्गा मंदिर में हुई तोड़-फोड़ के विरोध में देहरादून में हिन्दू संगठनों की अगुवाई में आम लोगों ने विरोध प्रदर्शन किया। लेकिन देहरादून में हिन्दू संगठनों की शांतिपूर्ण रैली में मुस्लिम समाज के लोगों द्वारा अराजकता फैलाए जाने के बाद जमकर मारपीट हुई और इसमें कई लोग घायल हो गए। देहरादून में इनामुल्ला बिल्डिंग के पास मुस्लिम समुदाय के कुछ युवा इस रैली से भड़क गए और उन्होंने भीड़ की शक्ल में रैली कर रहे लोगों की पिटाई शुरू कर दी। इसके बाद हिंदूवादी कार्यकर्ताओं को जब इस घटना की सूचना मिली तो वो भी बिल्डिंग की तरफ बढ़ने लगे, जिन्हें पुलिस ने बलपूर्वक रोक दिया। इस कारण विवाद बढ़ता गया।

इस विवाद को लेकर पूरे दिन तनाव की स्थिति बनी रही क्योंकि मुस्लिम समाज द्वारा उत्तेजक नारे भी लगाए गए, जिसके जवाब में हिन्दू संगठनों के कार्यकर्ताओं ने आपत्ति जताई। इनामुल्ला बिल्डिंग के पास हिन्दू सगठनों के युवकों की स्थानीय मुस्लिम युवकों द्वारा पिटाई की गई। हिन्दू संगठनों द्वारा आयोजित इस शांतिपूर्ण रैली का नाम ‘प्रतिरोध रैली’ रखा गया था। इसी रैली में मुस्लिमों ने ‘अल्लाहु अकबर’ के नारे लगा कर बड़ों से लेकर बच्चों तक पर हमले किए। हिंसा करने के अलावा उत्तेजक नारे लगा कर हिन्दू कार्यकर्ताओं को भड़काने की कोशिश की गई।

स्थानीय लोगों का आरोप है कि यहाँ पुलिस ने उल्टा पीड़ित पक्ष अर्थात हिन्दुओं पर ही कार्रवाई शुरू कर दी। नीचे संलग्न की गई कुछ वीडियो में आप इस घटना के बारे में विस्तृत तरीके से समझ सकते हैं। घटना को 2 दिन हो गए लेकिन कोई भी इस बारे में कुछ भी साफ-साफ़ बोलने को तैयार नहीं है क्योंकि वे अभी भी डरे हुए हैं। इस बारे में अधिक जानकारी देते हुए सामाजिक कार्यकर्ता रोहित मौर्य ने हमसे बात करते हुए कहा:

“5 जुलाई को जिस प्रकार से हिन्दू संगठनों द्वारा एक प्रतिकार रैली का आयोजन किया गया और भारी संख्या में लोग परेड ग्राउंड में इकट्ठे होने जा रहे थे, तब मुस्लिम समुदाय के लोगों ने भारी संख्या में धारदार हथियारों एवं लाठी-डंडों से लोगों पर हमला कर दिया और क्षेत्र की आबो-हवा को बिगाड़ने का प्रयास किया। जिस तरह से दिल्ली में दुर्गा मंदिर तोड़ा गया और उत्तराखंड में मुस्लिमों द्वारा एक व्यक्ति की हत्या कर दी गई, उसके विरोध में हमने रैली निकाली थी।”

“यहाँ पर डर का माहौल उत्पन्न हो गया है। एक मौलवी काजी रईस ने यह बयान दिया है कि अगर यहाँ मुस्लिमों को फ्री कर दें तो वो पूरे देश में कत्लेआम मचा सकते हैं, हम उसी का विरोध कर रहे थे। भगवा रंग को देख कर हमारे कार्यकर्ताओं पर जानलेवा हमला किया गया। इसमें पुलिस का भी दोष है, उनकी गलती सबसे बड़ी है। अनुमति होने के बावजूद हमें रोका गया। पुलिस ने ही झड़प कराई, इसमें उनका ही सारा रोल है। इनामुल्ला बिल्डिंग के पास छोटे-छोटे बच्चों तक पर भी हमला किया गया, वो भी सिर्फ़ इसीलिए क्योंकि उनके हाथों में भगवा झंडा था।”

“एक सोची-समझी साजिश होने के बावजूद पुलिस ने उन्हें रोकने की बजाय हमें रोकने में ताक़त लगा दी। वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि पेचकश, आरी और चाकू जैसे हथियारों से हमला किया गया। बच्चों तक को नहीं बख़्शा गया। यह मुस्लिम बहुत क्षेत्र है और यहाँ ऐसी घटनाएँ होती रही हैं। पहाड़ी लोग सीधे-सादे होते हैं और देवभूमि में लैंड-जिहाद चलाया जा रहा है। क़ानूनी अनुमति न होने के बावजूद ये ज़मीन पर कब्ज़ा कर रहे हैं।”

“पुलिस ने हमें डीएम के पास जाकर ज्ञापन देने की अनुमति भी दे दी थी लेकिन फिर पुलिस ने हमें रोकने की भी कोशिश की, वो भी बैरिकेडिंग लगा कर। यानी हमें रैली करने की अनुमति भी दी गई और उल्टा मुक़दमे भी हम पर ही दर्ज किए गए। सिटी एसपी ने सैकड़ों लोगों के बीच हमें अनुमति देने की बात कही थी लेकिन फिर भी हमें रोकने का प्रयास किया गया। फिर भी किसी तरह हम जिलाधिकारी को ज्ञापन देने में कामयाब रहे।”

मुस्लिम भीड़ द्वारा हिन्दुओं पर किए गए हमले से जुड़ा वीडियो-1

वीडियो में आप देख सकते हैं कि कैसे मुस्लिम समुदाय के लोग हिन्दुओं पर हमले कर रहे हैं, पत्थरबाज़ी की जा रही है और कई तरह के भड़काऊ नारे लगाए जा रहे है। हमारा सवाल है कि स्थानीय लोगों में इतना भय क्यों व्याप्त है कि वे अभी तक इस घटना के बारे में कुछ भी बोलने से हिचक रहे हैं? क्या मुस्लिम समुदाय की बहुलता और उनको मिले पुलिस के संरक्षण (जैसा कि सामाजिक कार्यकर्ताओं ने बताया) के कारण स्थानीय हिन्दू कुछ खुल कर नहीं बोल रहे हैं? बच्चों के हाथ में भगवा झंडा देख कर उन पर मुस्लिमों की भीड़ ने हमला किया लेकिन फिर भी कार्रवाई हिन्दू संगठन के कार्यकर्ताओं पर ही क्यों की गई?

ऑपइंडिया ने वहाँ लोगों से बात करने के बाद यह पाया कि स्थानीय व्यापारी से लेकर अन्य आम लोग तक, सभी घटना को लेकर सहमे हुए हैं। दुकानदारों को डर है कि उनका नाम आने से उन्हें आर्थिक बहिष्कार से लेकर हिंसा तक का सामना करना पड़ सकता है। आपको बता दें कि यह वही इलाका है जहाँ क्रिकेट मैच में पाकिस्तान के जीतने के बाद मज़हबी नारे लगने और पटाखे छूटने जैसी घटनाएँ आम हैं।

हमारे रिपोर्टर ने क्षेत्र का दौरा कर कई पक्षों से बातचीत के बाद पाया कि पुलिस मुस्लिमों के आरोपित होने वाले मामलों में कार्रवाई से हिचकती है। साथ ही, वहाँ रिपोर्टिंग करते हुए लोगों से बातचीत करने के प्रयासों के दौरान भी ऑपइंडिया रिपोर्टर को डर का अनुभव हुआ क्योंकि लोग संदेह की निगाहों से देख रहे थे।

इस्लामी भीड़ द्वारा हिन्दुओं पर किए गए हमले से जुड़ा वीडियो-2

ख़बरों के अनुसार, ऐसा भी आरोप था कि हिन्दुओं ने पहले नारे लगाए जबकि इस रैली में हिन्दू संगठनों द्वारा पहले किसी भी प्रकार के भड़काऊ नारे नहीं लगाए गए, वो सिर्फ़ दिल्ली और उत्तराखण्ड की घटना पर अपना विरोध प्रदर्शित कर रहे थे और वे भगवा झंडे लेकर आगे बढ़ रहे थे। आयोजकों ने बताया कि उनके पास आयोजन के लिए पुलिस की भी अनुमति थी। फिर भी अराजक मुस्लिमों की भीड़ ने इतना उत्पात मचाया। स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ता ने बताया कि इस इलाके में मुस्लिमों द्वारा किए गए बड़े अपराध के बाद भी पुलिस उन पर कार्रवाई करने से डरती है और इसी वजह से ये लोग बेख़ौफ़ होकर पाकिस्तान समर्थित नारे भी लगाते रहे हैं।

बता दें कि यहाँ मुस्लिम समाज के लोगों ने ज़मीन पर कब्ज़ा कर मक़बरा इत्यादि बनाने का एक क्रम भी चालू कर दिया है, जिसे स्थानीय लोगों द्वारा ‘लैंड जिहाद’ कहा जा रहा है। हालाँकि, एक तरफ तो कहा जा रहा है कि मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने कहा है कि क़ानून व्यवस्था बिगाड़ने की इजाजत किसी को नहीं दी जाएगी और उन्होंने पुलिस की पीठ भी थपथपाई है। फिर भी खौफ, इतना ज़्यादा है कि इनामुल्ला बिल्डिंग के आसपास के हिन्दू लोग कुछ भी बोलने से डर रहे हैं, यहाँ तक कि वे पत्रकारों के सवालों के जवाब देने से भी बच रहे हैं।

तहसील चौक के पास इनामुल्ला बिल्डिंग एरिया

इस पूरे घटनाक्रम की मीडिया में बहुत कम रिपोर्टिंग हुई है। कहा जा रहा है कि आसपास मुस्लिम समुदाय की आबादी ज्यादा होने कारण मीडिया भी वहाँ फूँक-फूँक कर क़दम रख रहा है और इलाके की संवेदनशीलता को देखते हुए किसी से सवाल पूछने से बच रहा है।

तहसील चौक के पास इनामुल्ला बिल्डिंग एरिया

इतना कुछ होने के बाद भी प्रशासन और पुलिस हाथ पर हाथ धरे बैठी है। हिंदूवादी संगठनों ने अपने कार्यकर्ताओं की पिटाई करने वाले मुस्लिमों की पहचान कर उन्हें कड़ी सज़ा देने की माँग की है। हिंदूवादी संगठनों के पदाधिकारी इस बात को लेकर भी आक्रोशित हैं कि एक तो हिन्दुओं को पीटा गया और ऊपर से पुलिस दोषियों को पकड़ने की बजाय पीड़ित पक्ष अर्थात हिन्दू समुदाय के लोगों के ऊपर ही कार्रवाई कर रही है।

शेखर गुप्ता के The Print का रिपोर्टिंग के नाम पर फर्जीवाड़ा, लेखक ने अपने शब्दों के साथ खिलवाड़ पर लताड़ा

राजीव गाँधी को ‘डैशिंग यंग मैन’ और ‘बाल-बच्चों वाला प्रधानमंत्री’ होने के नाते आईएनएस विराट का इस्तेमाल ‘शाही छुट्टियों’ के लिए करने पर क्लीन चिट देने वाले शेखर गुप्ता का पोर्टल ‘द प्रिंट’ (एक बार फिर) विवादों के केंद्र में है। अबकी बार युवा लेखक नित्यांनद मिश्र ने पोर्टल पर अपनी बातों को तोड़-मरोड़कर पेश करने और रिपोर्ट में गलतबयानी का आरोप लगाया है। लेखक ने ट्विटर के जरिए द प्रिंट की कथित पत्रकार कृतिका शर्मा की कारस्तानी उजागर की है।

लेखक नित्यानंद मिश्र ने कहा है कि कृतिका शर्मा ने अपनी रिपोर्ट में उनकी बातों को तोड़-मरोड़कर पेश करने के लिए न केवल पत्रकारिता के नैतिक और व्यवसायिक मूल्यों को ताक पर रखा है, बल्कि सफ़ेद झूठ भी बोला है।

कृतिका की इस रिपोर्ट को प्रिंट की संपादकों में से एक रमा लक्ष्मी ने भी शेयर किया था। साथ ही लेखक के विचारों की तुलना पाकिस्तानी तानाशाह जिया-उल-हक से की थी।

‘मेरी मर्जी जो लिखूँ’

यह रिपोर्ट पिछले हफ़्ते दिल्ली के इंडिया इंटरनेशनल सेंटर में दिए गए नित्यानंद मिश्र के भाषण को लेकर है। रिपोर्ट झूठों का पुलिंदा है और इसमें कई तथ्यात्मक गलतियां है। लेखक के अनुसार, कथित पत्रकार ने उनकी बातों की गलत व्याख्या करने की बात मानने से इनकार करते हुए कहा कि वह (कृतिका) जो सही समझे, वैसा लिखने को स्वतंत्र है। खुद के शब्दों के साथ खिलवाड़ को लेकर नित्यानंद ने कृतिका को अपने भाषण पर बनाई गई एक पीपीटी (पावर पॉइंट प्रेजेंटेशन) भी भेजी। उन्होंने बार-बार फोन कर, ईमेल और वॉट्सऍप के जरिए कृतिका से इस पर गौर करने का निवेदन भी किया। लेकिन, बार-बार रजामंदी जताने के बावजूद कृतिका ने ऐसा नहीं किया।

गलतियों पर गलतियाँ क्या जान-बूझ कर की गई है ?

लेखक ने अपने भाषण में अरबी-फारसी शब्दों के इस्तेमाल से बचने और उनकी जगह हिन्दी का इस्तेमाल करने की सलाह दी थी। लेकिन, कृतिका शर्मा ने कई जगहों पर अपनी सहूलियत से फ़ारसी को ‘उर्दू’ कर दिया। नित्यानंद मिश्र का यह भी कहना है कि उन्होंने केवल “शासन/प्रभुत्व” बनाम “सरकार” शब्दों की बात की थी, लेकिन कृतिका ने रिपोर्ट को सनसनीखेज़ बनाने के लिए “मोदी” जोड़कर “मोदी सरकार” बनाम “मोदी शासन” कर दिया।

कृतिका ने यह भी झूठ कहा है कि मिश्र ने भाजपा को सलाह दी थी।

इसके अलावा, मिश्र के काम, उनके किताबों की संख्या और संस्कृत तथा हिन्दी को बढ़ावा देने के लिए वे कब से काम कर रहे हैं सहित कई अन्य तथ्यात्मक गलतियां भी रिपोर्ट में है।

जो मौजूद ही नहीं, उसने कैसे बनाई रिपोर्ट?

नित्यानंद मिश्र का कहना है कि जिस कार्यक्रम में उन्होंने प्रेज़ेंटेशन दिया था, उसमें कृतिका शर्मा मौजूद ही नहीं थीं। साथ ही द प्रिंट का कार्यक्रम में 150 लोगों की मौजूदगी का दावा भी गलत है, क्यूंकि वहां महज़ 40 लोग थे। उन्होंने कहा है कि द प्रिंट की नीयत पर उन्हें पहले से संदेह था। इसलिए, प्रेज़ेंटेशन सार्वजनिक तौर पर किया गया और जल्दी ही YouTube पर वीडियो भी अपलोड कर दिया जाएगा।

DGP की ‘फेक किडनैपिंग’ की बात को मेनस्ट्रीम मीडिया ने दिया मनचाहा ट्विस्ट

मध्य प्रदेश के डीजीपी वीके सिंह ने मध्य प्रदेश में बढ़ती अपहरण की घटनाओं पर कहा, “एक नया ट्रेंड आईपीसी 363 के रूप में दिखा है। लड़कियाँ स्वतंत्र ज़्यादा हो रहीं हैं, आज के समय में लड़कियों की बढ़ती स्वतंत्रता एक तथ्य है। ऐसे केसेज़ में इंक्रीज (इजाफ़ा) हुआ है जिसमें वो घर से चली जाती हैं और रिपोर्ट होती है किडनैपिंग की।”

बात पर ज़बान पकड़ने की ज़िद के बजाय अगर मर्म समझने का प्रयास करें तो यह साफ़ है कि उनके कहने का तात्पर्य था कि लड़कियों को आजकल शिक्षा और एक्सपोज़र की उच्चतम गुणवत्ता मुहैया है। उन्हें परिवारों से आज़ादी मिल रही है, जिससे उन्हें लड़कों से ज़्यादा घुलने-मिलने की आज़ादी मिल रही है। उनका इशारा उन कुछ चुनिंदा मामलों की ओर है, जिनमें वह माँ-बाप की इच्छा के खिलाफ शादी करने के लिए चली जातीं हैं, और उनके परिवार वाले लड़कों से बदला लेने के लिए नकली अपहरण का केस कर देते हैं।

यह बात पूरी तरह गलत भी नहीं है। कई मामलों में ऐसा हुआ है कि लड़कियों के भाग जाने के बाद उनका परिवार अपनी शान के खातिर लड़के के खिलाफ झूठा केस कर देते हैं। अक्सर ऐसा सामाजिक या आर्थिक रूप से विषम रिश्तों में, इंटर-कास्ट या विभिन्न मज़हबों वाली शादी में होता है।

और उनके इसी बात को तोड़-मरोड़कर टाइम्स नाउ, इंडिया टुडे ने पेश किया कि डीजीपी अपहरण के लिए लड़कियों के लड़कों से घुलने-मिलने को ही दोषी मान रहे हैं


जबकि कोई अगर उनके वक्तव्य के बारे में एक मिनट भी सोचे तो यह साफ़ हो जाएगा कि वह असली नहीं, नकली, फर्जी या झूठे निकलने वाले किडनैपिंग के मामलों की बात कर रहे थे।

कॉन्ग्रेस में उठा-पठक जारी, अब सिंधिया और देवड़ा ने दिया इस्तीफ़ा

लोकसभा चुनाव में क़रारी हार के बाद से ही कॉन्ग्रेसी खेमे में उठा-पठक जारी है। कॉन्ग्रेस अध्यक्ष राहुल गाँधी के इस्तीफ़े के बाद ज्योतिरादित्य सिंधिया और मिलिंद देवड़ा ने भी अपना पद छोड़ दिया है। सिंधिया पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव और देवड़ा मुंबई कॉन्ग्रेस के अध्यक्ष थे। दोनों की गिनती राहुल गाँधी के करीबियों में होती है।

सिंधिया ने ट्वीट कर कहा है, “जनादेश स्वीकार करते हुए और जवाबदेही लेते हुए कॉन्ग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव के पद से मैंने अपना इस्तीफा राहुल गाँधी को सौंप दिया है। पार्टी की सेवा का मौका देने के लिया मैं उनका आभारी हूँ।” मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव में जीत के बाद राहुल ने सिंधिया को पश्चिमी उत्तर प्रदेश का प्रभारी नियुक्त किया था। लेकिन, लोकसभा चुनाव में वे अपनी गुना सीट भी नहीं बचा पाए। उन्हें बीजेपी के केपी यादव ने 1,25,549 मतों से हराया था।  

इसी तरह, देवड़ा ने भी लोकसभा चुनाव में क़रारी हार की ज़िम्मेदारी लेते हुए रविवार (7 जुलाई) को अपने पद से इस्तीफ़ा दे दिया। इस्तीफ़ा देने के बाद उन्होंने कहा कि वो पार्टी को मज़बूत करने के लिए राष्ट्रीय स्तर पर भूमिका निभाना चाहते हैं। देवड़ा ने इस साल के आख़िर में होने वाले महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव के लिए कॉन्ग्रेस के तीन वरिष्ठ नेताओं की एक अस्थाई समिति गठित करने का सुझाव दिया है।

ख़बर के अनुसार, देवड़ा ने कहा है, “मैंने पार्टी को एकजुट करने के लिए एमआरसीसी की अध्यक्षता करना स्वीकार किया था। मैंने राहुल गाँधी से मिलने के बाद महसूस किया कि मुझे इस्तीफ़ा दे देना चाहिए।” इसके अलावा देवड़ा के कार्यालय ने रविवार को एक बयान जारी किया। इसमें कहा गया है कि राज्य में बीजेपी-शिवसेना का मुक़ाबला करना कॉन्ग्रेस के लिए चुनौतीपूर्ण है। पार्टी को वंचित बहुजन आघाड़ी के प्रभाव को भी स्वीकार करना होगा।

मुरली देवड़ा पहली बार 27 साल की उम्र में सांसद बने थे। 2004 के लोकसभा चुनाव में उन्होंने बीजेपी के जयवंतीबेन मेहता को 10,000 वोटों से हराया था। 2009 के लोकसभा चुनाव में देवड़ा को फिर से मुंबई दक्षिण निर्वाचन क्षेत्र से चुना गया। साल 2011 में उन्हें केन्द्र में संचार और सूचना प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री बनाया गया था।

कांस्टेबल तारिक अहमद गिरफ्तार, अमरनाथ यात्रा के दौरान स्नान कर रही महिला श्रद्धालुओं का बना रहा था वीडियो

जम्मू-कश्मीर में चल रही पवित्र अमरनाथ यात्रा के दौरान एक शर्मसार करने वाली घटना सामने आई है। जम्मू स्थित आधार शिविर में एक पुलिसकर्मी द्वारा स्नान कर रही महिला श्रद्धालुओं का वीडियो बनाने की बात उजागर हुई है। मामला सामने आने के बाद आरोपी कांस्टेबल को गिरफ्तार कर लिया गया। एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि भारतीय रिजर्व पुलिस की 19वीं बटालियन के सिपाही तारिक अहमद के खिलाफ त्रिकुटा नगर पुलिस स्टेशन में जम्मू-कश्मीर राज्य की रणबीर दंड संहिता की धारा 354 के तहत मामला दर्ज किया गया है।

हालाँकि बाद में उसे जमानत पर छोड़ दिया गया। कानूनी कार्रवाई के अलावे आरोपी पर विभागीय कार्रवाई भी की जाएगी। जानकारी के अनुसार, कांस्टेबल अहमद अपने मोबाइल से बुधवार (जुलाई 3, 2019) की रात रेलवे स्टेशन कैंप के बाथरूम के अंदर नहा रही महिलाओं का वीडियो रिकॉर्ड कर रहा था। 

महिलाओं को जैसे ही इसकी भनक लगी, उन्होंने शोर मचाया। शोर सुनकर मौके पर काफी लोग इकट्ठा हो गए और आरोपित को पकड़ कर पुलिस के हवाले कर दिया। पुलिस ने गिरफ्तार कर उसका मोबाइल जब्त कर लिया।

कड़ी सुरक्षा-व्यवस्था के बीच 1 जुलाई से अमरनाथ यात्रा चल रही है। यात्रा पर आतंकवादी संगठन जैश-ए-मोहम्मद के हमले की आशंका को देखते हुए बेहद कड़े सुरक्षा इंतजाम किए गए हैं। तीर्थयात्रियों की सुरक्षा के लिए 40,000 सुरक्षाकर्मी तैनात किए गए हैं।

हिन्दू बन कर चोरी करने वाला नसीम रंगे हाथों धराया, भीड़ ने पिटाई के बाद पुलिस को सौंपा

झारखण्ड के धनबाद में एक बंगाली मुस्लिम चोर धरा गया है, जो हिन्दू नाम रख कर वहाँ रह रहा था। उसे रंगे हाथों पकड़ा गया। ये घटना झारखंड के धनबाद जिले के चिरकुंडा स्थित तालडंगा हाउसिंग कॉलोनी की है, जहाँ उसे पकड़ा गया। चोरी करते हुए पकड़े जाने के बाद भीड़ ने उसकी पिटाई की। पूछने पर उसने अपना नाम राजू बताया। दैनिक जागरण में प्रकाशित ख़बर के अनुसार, वह हिन्दू नाम रख कर चोरी किया करता था। वह हिन्दू बन कर कल्पनाथ तिवारी के घर में चोरी कर रहा था।

जनता ने चोर की पिटाई करने के बाद उसे पुलिस के हवाले कर दिया। जिस कॉलोनी में यह घटना हुई, वहाँ आए दिन चोरी की वारदातें होती रहती हैं। उक्त चोर का असली नाम नसीम अंसारी है, जो तिवारी के घर में दीवार फाँद कर घुसने की कोशिश कर रहा था। जब लोगों की उस पर नज़र पड़ी तो हंगामा मच गया और लोगों ने उसे पकड़ लिया।

पिटाई शुरू होते ही चोर ने माफ़ी माँगनी शुरू कर दी। वह अपना नाम राजू बताता रहा। पुलिस ने बताया कि गिरफ़्तार चोर शातिर है और वह अपने साथी का नाम नहीं बता रहा है। जब भीड़ ने उसे खदेड़ना शुरू किया, तब वह दुर्गा मंदिर की ओर भागा। वह चोरी के आरोप में पहले भी जेल जा चुका है, ऐसा उसने स्वीकार किया है। गिरफ़्तार चोर के पास से एक मोबाइल फोन भी बरामद हुआ है।

महाराणा प्रताप की प्रतिमा तोड़ने से उबला क्षत्रिय समाज, 7 दिन का दिया अल्टीमेटम

राजस्थान के बांसवाड़ा में महाराणा प्रताप सर्कल स्थित महाराणा प्रताप की मूर्ति तोड़े जाने पर क्षत्रिय समाज ने गहरी नाराजगी जताई है। जानकारी के मुताबिक, शुक्रवार (जुलाई 5, 2019) दोपहर एक युवक चिल्लाते हुए लाठी लेकर प्रतिमा पर चढ़ गया। इससे पहले कि कोई कुछ समझ पाता युवक ने प्रतिमा का भाला तोड़ दिया। उसकी इस हरकत ने लोगों को चौंका दिया।

इसके बाद कुछ लोग प्रतिमा की तरफ दौड़े और युवक को नीचे उतारने की कोशिश करने लगे। लेकिन, युवक उन्हें लाठी दिखाकर डराने लगा। इससे पहले कि युवक और उत्पात मचाता बड़ी मुश्किल से कुछ लोगों ने उसे नीचे उतारा और थाने ले गए।

जैसे ही घटना का वीडियो वायरल हुआ, क्षत्रिय समाज के लोग भड़क उठे। राजपूत करणी सेना के कार्यकर्ताओं ने विरोध जताते हुए प्रदर्शन किया। करणी सेना ने कहा है कि इस घटना से क्षत्रिय समाज आहत है। ऐसा लगता है कि युवक को मोहरा बनाकर साजिशन महाराणा प्रताप की प्रतिमा के साथ तोडफोड़ की गई है। उन्होंने एसपी तेजस्विनी गौतम से दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की माँग की गई है।

करणी सेना ने नई प्रतिमा स्थापित करवाने की भी माँग की है। 7 दिनों में नई प्रतिमा स्थापित नहीं होने पर जन आंदोलन की चेतावनी दी है। इस दौरान क्षत्रिय समाज के जगमाल सिंह, राजपूत समाज के अध्यक्ष राजेंद्र सिंह आनंदपुरी और अन्य लोग भी थे। आरोपित के खिलाफ सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुँचाने का मामला दर्ज किया गया है। पुलिस का कहना है कि आरोपित की मानसिक हालत ठीक नहीं लगती। इसलिए, उसे मेडिकल परीक्षण के लिए भेजा गया है। आरोपित ने पहले सागर और फिर बाद में गंगासागर का निवासी होने का दावा किया। राजेंद्र सिंह आनंदपुरी ने इस घटना के पीछे किसी  साजिश की आशंका जताते हुए प्रशासन से मामले की गहराई से जाँच करने का आग्रह किया।

नहा रही युवतियों के साथ मोहम्मद समीर व जावेद ने की छेड़खानी, विरोध करने पर परिजनों को पीटा

उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर में महिलाओं से दुर्व्यवहार करने का मामला सामने आया है। भोपा क्षेत्र के रजबहे गाँव में जब कुछ युवतियाँ नहा रही थीं, तब मुस्लिम समुदाय के कुछ युवक वहाँ पहुँच गए और उन्होंने फब्तियाँ कसने के साथ-साथ अश्लील हरकतें की। इतना ही नहीं, इसके बाद ‘उलटे चोर कोतवाल को डाँटे’ को चरितार्थ करते हुए आरोपित युवक अपने साथियों के साथ गाँव में पहुँच गए और पीड़ित पक्ष के परिजनों के साथ मारपीट की। इस घटना में 2 महिलाओं समेत 3 लोग घायल हो गए। उक्त युवतियाँ गाँव की एक शादी में भाग लेने आई थीं और घूमने-फिरने के दौरान नहा रही थी, जब उनके साथ छेड़खानी हुई।

दो वर्गों के बीच का मामले होने के कारण गाँव में सांप्रदायिक तनाव व्याप्त है। पुलिस फ़ोर्स तैनात कर दी गई है। पुलिस को मौके पर स्थिति को शांत करने के लिए लाठियाँ तक भी भाजनी पड़ी। तनाव के कारण ख़ुद एसपी को घटनास्थल पर कैम्प करना पड़ा। पीड़ित पक्ष का आरोप है कि इस मामले में एकतरफा कार्रवाई करते हुए पुलिस ने पीड़ित पक्ष के ही तीन युवकों को हिरासत में ले लिया। ग्रामीणों ने जब थाना पहुँच कर विरोध प्रदर्शन किया और हिंदूवादी संगठनों ने आवाज़ उठाई, तब जाकर उक्त युवकों को छोड़ा गया।

हिंदूवादी संगठनों और पुलिस के बीच थाने में नोंकझोंक भी हुई क्योंकि संगठनों का आरोप था कि पुलिस उल्टा पीड़ित पक्ष पर ही कार्रवाई कर रही है। हिंदूवादी कार्यकर्ताओं ने एसएसपी से भी मुलाक़ात कर अपनी बात रखी। इसके बाद पुलिस ने आरोपितों पर कार्रवाई करने का आश्वासन दिया, तब जाकर ग्रामीण शांत हुए। गाँव में कई थानों की पुलिस पहुँची, तब जाकर मामला शांत हुआ। समीर व जावेद नामक युवकों के ख़िलाफ़ छेड़छाड़ का मामला दर्ज किया गया है। गाँव में अभी भी तनाव व्याप्त है और पुलिस कैम्प कर रही है।

जिन संगठनों ने पीड़ितों की ओर से पुलिस के ख़िलाफ़ विरोध प्रदर्शन कर मामले में सही तरीके से कार्रवाई करने की माँग की, उनमें विश्व हिन्दू परिषद, शिवसेना और हिन्दू संघर्ष समिति शामिल थी। इन सभी संगठनों के पदाधिकारियों व कार्यकताओं ने पीड़ितों का पूरा साथ दिया और पुलिस से भी बातचीत की। ग्रामीणों का कहना है कि यह मामला काफ़ी गंभीर है क्योंकि एक तो युवकों ने छेड़खानी की और ऊपर से महिलाओं सहित अन्य परिजनों की पिटाई भी की। इस बीच कुछ लोगों ने दोनों पक्षों में समझौता कराने की भी कोशिश की। हालाँकि, पुलिस इस बात से भड़क उठी।

पुलिस ने कहा कि अब इस मामले में समझौते का कोई सवाल ही नहीं है और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी। एसपी ने ख़ुद स्वीकार किया कि गाँव में इस तरह की घटनाएँ बढ़ गई हैं और इसलिए दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा। पीड़ित युवतियाँ लुधियाना से आई थी। वे गाँव में एक परिवार में रिसेप्शन में हिस्सा लेने आई थीं। ख़बर के अनुसार, छेड़खानी के आरोपित दोनों युवकों ने एक दर्जन के क़रीब ‘अपने लोगों’ के साथ लौट कर पीड़ित पक्ष की पिटाई की। पुलिस अभी भी मामले की जाँच में लगी हुई है।

पूर्व उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी ने पहचान उजागर कर खुफिया अधिकारियों का जीवन खतरे में डाला: पूर्व रॉ अधिकारी का दावा

भारतीय खुफिया एजेंसी रिसर्च एंड एनालिसिस विंग (रॉ) के एक पूर्व अधिकारी ने सनसनीखेज खुलासा किया है। इसके मुताबिक पूर्व उप राष्ट्रपति हामिद अंसारी ने 1990-92 के बीच ईरान में भारतीय राजदूत रहते तेहरान में रॉ के सेटअप को उजागर कर वहाँ काम कर रहे अधिकारियों की जिन्दगी को खतरे में डाल दिया था।

उन्होंने यह भी दावा किया है कि अंसारी ने आईबी के एडिशनल सेक्रेटरी रतन सहगल के साथ मिलकर 1992 बम धमाकों से पहले रॉ के गल्फ यूनिट को पंगु कर दिया था। (एडिटर्स नोट: शायद वे 1993 के धमाकों की बात कर रहे थे, लेकिन भूल से ट्वीट में गलत साल का उल्लेख कर दिया है।)

द संडे गार्डियन में प्रकाशित रिपोर्ट में दावा किया गया है कि पूर्व रॉ अधिकारियों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर तेहरान में राजदूत होने के दौरान “रॉ के अभियानों को नुकसान पहुँचाने” को लेकर अंसारी के खिलाफ जाँच की माँग की है। रिपोर्ट के अनुसार, अधिकारियों ने दावा किया है कि अंसारी न केवल भारत के राष्ट्रीय हितों की सुरक्षा करने में नाकाम रहे थे, बल्कि ईरान की सरकार और उसकी खुफिया एजेंसी एसएवीएके की मदद भी की थी, जिसके कारण रॉ और उसके अभियानों को गंभीर नुकसान पहुँचा। अधिकारियों के मुताबिक चार बार भारतीय दूतावास में कार्यरत अधिकारियों और राजनयिकों का एसएवीएके ने अपहरण किया और अंसारी ने जान-बूझकर भारत के राष्ट्रीय हितों का ख्याल नहीं रखा।

पूर्व रॉ अधिकारी सूद ने द संडे गार्डियन को मई 1991 में भारतीय अधिकारी संदीप कपूर के अगवा होने की घटना के बारे में बताया। सूद के मुताबिक, कपूर को एसएवीएके ने तेहरान एयरपोर्ट से अगवा कर लिया। उस वक्त तेहरान में तैनात अंसारी को इसके बारे में सूचना दी गई, लेकिन उन्होंने इसे गंभीरता से नहीं लिया। उन्होंने कपूर की तलाश में कोई कदम नहीं उठाया। भारतीय विदेश मंत्रालय को भेजी गई कॉन्फिडेंशियल रिपोर्ट में एसवीएके की संलिप्तता का उल्लेख करने की बजाए कपूर की गतिविधियों को संदेहास्पद बताते हुए कहा था कि एक स्थानीय महिला से उनके संबंध थे।

अगवा किए जाने के तीन दिन बाद एक अज्ञात कॉल से भारतीय दूतावास को सूचना दी गई कि कपूर सड़क किनारे पड़े हैं। कपूर को काफी ड्रग्स दिया गया था, जिसका सालों तक उन पर असर रहा।

अगस्त 1991 की एक अन्य घटना का उल्लेख करते हुए सूद ने द संडे गार्डियन ​को बताया ईरान के धार्मिक केंद्र कोम की नियमित तौर पर यात्रा करने वाले और हथियार चलाने की ट्रेनिंग ले रहे एक कश्मीरी युवा पर रॉ की नजर थी। रॉ के नए स्टेशन चीफ, डीबी माथुर को साथी अधिकारियों ने इसके बारे में अंसारी को जानकारी नहीं देने की सलाह दी। हालाँकि, माथुर ने इसकी सूचना अंसारी को दी। कथित तौर पर अंसारी ने इसकी जानकारी ईरान के विदेश विभाग को दी, जिससे एसएवीएके को इसकी भनक लग गई और ​फिर माथुर अगवा हो गए।

माथुर को वापस लाने के लिए जब अंसारी ने कोई ठोस कदम नहीं उठाया तो रॉ अधिकारियों ने गुपचुप तरीके से अटल बिहारी वाजपेयी को इसकी जानकारी दी। वाजपेयी ने तत्कालीन प्रधानमंत्री पीवी नरसिम्हा राव को इसके बारे में बताया। आखिरकार, अगवा होने के चार दिन बाद माथुर को एविन कारागार से छोड़ा गया और 72 घंटे के भीतर ईरान छोड़ने का फरमान सुनाया गया। रिहा होने के बाद माथुर ने बताया कि अंसारी ने ईरानी विदेश मंत्रालय को जो जानकारी दी उसके कारण एसएवीएके को उनके स्टेशन चीफ होने का पता चला। साथ ही एसवीके को सूद के बारे में भी जानकारी थी।

प्रधानमंत्री को लिखे खत में रॉ के स्टेशन चीफ रहे पीके वेणुगोपाल को एसएवीएके द्वारा अगवा करने और पीटने की घटना का भी उल्लेख है। पत्र में दावा किया गया है कि अंसारी ने ईरानी अधिकारियों के सामने कभी इस घटना को लेकर आपत्ति दर्ज नहीं कराई। पत्र में यह भी कहा गया है कि तेहरान में पाकिस्तानी राजदूत के साथ अपनी लंबी और नियमित मुलाकातों का ब्यौरा भी अंसारी ने विदेश मंत्रालय को नहीं दिया।

रॉ के अधिकारी चाहते हैं कि प्रधानमंत्री इस मामले की गहन जाँच कराएँ। पत्र में लिखा गया है, “दुबई, बहरीन और सउदी अरब के अपने अन्य समकक्षों के साथ अंसारी ने इस क्षेत्र में रॉ की ईकाइयों को नुकसान पहुॅंचाया। जब मुंबई में धमाके हुए थे, तब खाड़ी देशों में रॉ की गतिविधियों का भट्ठा बैठ चुका था।”

सूद का दावा है कि 1993 के मध्य में जब अंसारी का ईरान से तबादला हुआ तो भारतीय दूतावास में जश्न मनाया गया।

उप राष्ट्रपति के तौर पर अपना कार्यकाल पूरा करने के बाद से ही हामिद अंसारी विवादों में हैं। वे देश के हर जिले में शरीयत अदालत के गठन के विचार का समर्थन कर चुके हैं। उप राष्ट्रपति कार्यकाल पूरा होने के बाद उन्होंने एक बयान जारी कर कहा था कि बतौर नागरिक वे असुरक्षित और असहज महसूस कर रहे हैं। उनके बयान की समाज के सभी वर्गों ने निंदा की थी। उन्होंने इस्लामी कट्टरपंथी संगठन पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएपफआई) के कार्यक्रम में भी ​शिरकत की थी। राष्ट्रीय सुरक्षा एजेंसी (एनआईए) ने इस संगठन को केरल के विवादित ‘लव जिहाद’ मामलों में संलिप्त पाया है। अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय में जिन्ना की तस्वीर लगाने का समर्थन कर रहे छात्रों के पक्ष में भी वे खड़े हुए थे।

एस राधाकृष्णन के बाद अंसारी दूसरे ऐसे व्यक्ति थे, जिन्हें बतौर उपराष्ट्रपति लगातार दो कार्यकाल मिला था।