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1 लाख लोगों ने किया अमरनाथ दर्शन, नाराज़ अब्दुल्ला-महबूबा ने कहा ‘कश्मीरियों को दिक्कत हो रही’

अमरनाथ यात्रा को लेकर इस बार काफ़ी पुख्ता इंतजाम किए गए हैं और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने व्यक्तिगत रूप से अधिकारियों के साथ बैठक कर व्यवस्थाओं का जायजा लिया था। आँकड़ों के अनुसार, अब तक कुल 96 हज़ार से भी अधिक श्रद्धालुओं ने अमरनाथ धाम के दर्शन किए हैं। अकेले रविवार (जुलाई 7, 2019) को 14 हज़ार से भी अधिक श्रद्धालुओं ने दर्शन किया। अस्थिर मौसम के बीच सुरक्षा बलों के जवान लगातार यात्रियों के लिए सुगम व्यवस्था करने में लगे हुए हैं। राज्यपाल सत्यपाल मलिक ने कई बार अधिकारियों के साथ बैठक कर स्थिति की जानकारी ली।

इस बीच जम्मू कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ़्ती ने अजीब बयान दिया है। उन्होंने कहा कि अमरनाथ यात्रा की वजह से स्थानीय कश्मीरियों को परेशानी हो रही है। बाबा बर्फानी की यात्रा को लेकर किए गए पुख्ता इंतजामों ने परेशान पीडीपी सुप्रीमो ने कहा:

“अमरनाथ यात्रा वर्षों से होती आ रही है। लेकिन, दुर्भाग्य से जो इंतजाम इस साल किए गए हैं, वह कश्मीर के लोगों के ख़िलाफ़ हैं। इससे स्थानीय लोगों को अपनी रोजमर्रा की ज़िंदगी में काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। मैं राज्यपाल से इस मामले पर संज्ञान लेने के लिए अनुरोध करती हूँ।”

इसी तरह की कुछ चिंताएँ पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने भी ज़ाहिर की है। अब्दुल्ला ने कहा कि वे यात्रियों की सुरक्षा व सुविधा के लिए चिंतित हैं लेकिन सत्यपाल मलिक के नेतृत्व में ऐसा पहली बार हो रहा है जब यात्रियों के लिए यातायात रोक दिया जा रहा है और हाइवे व रेलवे लाइन्स को बंद कर दिया जा रहा है। उन्होंने यह बयान ‘द कश्मीर मॉनिटर’ की उस ख़बर के आधार पर दिया, जिसमें राज्यपाल के हवाले से कहा गया था कि कश्मीरियों को यात्रियों की सुविधा का ध्यान रखते हुए ट्रैफिक पाबंदियों का पालन करना चाहिए।

राज्यपाल सत्यपाल मलिक श्री अमरनाथजी श्राइन बोर्ड के अध्यक्ष भी है। उन्होंने रविवार को पन्था चौक शिविर में स्थापित एक शिविर का दौरा कर यात्रियों के लिए की गई व्यवस्था का जायजा लिया। यात्रियों के लिए इस बार चिकित्सा, भोजन, निवास, बिजली-पानी, स्वच्छता, यातायात और सुरक्षा से सम्बंधित कई व्यवस्थाएँ की गई हैं जो इस बार की यात्रा को बाकी वर्षों से अलग खड़ा करती है। अनंतनाग के सांसद हसनैन मसूदी ने भी इस यात्रा को लेकर कश्मीर को हो रही कथित दिक्कतों का रोना रोया। मसूदी ने कहा कि यात्रा के लिए किए गए ट्रैफिक इंतजामों से राज्य की अर्थव्यवस्था पर बुरा प्रभाव पड़ रहा है।

बारामुला के सांसद अकबर लोन ने कहा कि इससे कश्मीरी व्यापारियों व यहाँ आने वाले पर्यटकों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि अगर यही स्थिति रही तो जनता दबाव में आ जाएगी। हालाँकि, पूर्व मुख्यमंत्री फ़ारूक़ अब्दुल्ला ने बालटाल स्थित अमरनाथ बेस कैम्प का दौरा कर यात्रियों को दी जा रही सुविधाओं को देखा था। उन्होंने दावा किया था कि कश्मीरी लोग कई वर्षों से इस यात्रा को अच्छी तरह संचालित करने के लिए अपना सहयोग देते रहे हैं। अब्दुल्ला ने आशा जताई थी कि यहाँ आने वाले यात्री शांति का सन्देश लेकर वापस जाएँगे

सबरीमाला के उलट मस्जिद में महिलाओं के प्रवेश की याचिका SC में ख़ारिज, कहा याचिकाकर्ता मुस्लिम नहीं

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार (8 जुलाई) को मुस्लिम महिलाओं के मस्जिद प्रवेश और उन्हें पर्दा प्रथा से मुक्ति दिलाने की अपील करने वाली याचिकाएँ ख़ारिज कर दीं। उच्चतम न्यायालय ने कारण यह बताया कि याचिकाकर्ता खुद मुस्लिम नहीं है, इसलिए केरल उच्च न्यायालय के फैसले के खिलाफ दायर इस याचिका पर सुनवाई का कोई औचित्य नहीं है। सुप्रीम कोर्ट का यह रुख सबरीमाला मामले में उसके फैसले के ठीक उलट है। तब सुप्रीम कोर्ट ने
याचिकाकर्ताओं में से केरल (जहाँ सबरीमाला मंदिर स्थित है) के निवासी नहीं होने के बावजूद और न ही मंदिर की परम्पराओं की जानकार होने के बावजूद भी उनकी याचिका सुनी थी। न सिर्फ सुनी थी बल्कि मंदिर की प्राचीन परम्पराओं को तोड़ कर रजस्वला आयु की महिलाओं के प्रवेश को अनुमति भी प्रदान की थी।

चीफ जस्टिस ख़ारिज करने वाली पीठ का हिस्सा

इस याचिका को ख़ारिज करने वाली पीठ में सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई भी शामिल थे। उनके अलावा न्यायमूर्ति अनिरुद्ध बोस और दीपक गुप्ता भी हिन्दू महासभा द्वारा दायर इस याचिका को ख़ारिज करने वाली पीठ में थे। याचिका को ख़ारिज करते हुए सीजेआई ने कहा, “पहले किसी मुस्लिम महिला को आने दो, फिर हम (इस पर) सोचेंगे।” सुप्रीम कोर्ट में दायर की गई यह याचिका एक स्पेशल लीव पेटिशन थी, जो केरल हाई कोर्ट के 11 अक्टूबर के निर्णय के खिलाफ दायर की गई थी। केरल उच्च न्यायालय में इसे ख़ारिज करने वाले जस्टिस एके जयशंकरण और उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश हृषिकेश रॉय थे।

ख़ारिज करने के कारण अलग-अलग

यहाँ गौर करने लायक बात यह है कि जहाँ सुप्रीम कोर्ट ने मामले के विषय (मस्जिद और मुस्लिम महिलाओं) से याचिकाकर्ताओं के संबंध को ही न मानते हुए याचिका को ख़ारिज किया, वहीं उच्च न्यायालय ने मामले को ख़ारिज मुख्य रूप से इसलिए किया था कि याचिकाकर्ता हिन्दू महासभा उसे यह आश्वस्त नहीं कर पाई थी कि महिलाओं को मस्जिदों में प्रवेश से रोका जा रहा है। इसके अलावा ‘सस्ती लोकप्रियता’ के लिए याचिका दायर करने की टिप्पणी भी उच्च न्यायालय ने याचिकाकर्ताओं पर याचिका ख़ारिज करते समय की थी। उच्च न्यायालय ने कहा था कि उसके मतानुसार अनुच्छेद 226 का दुरुपयोग ऐसे कारणों के लिए नहीं किया जा सकता

वन्दे भारत ट्रेन से लैपटॉप-मोबाइल चुराने वाले एज़ाज़ और सद्दाम GRP के हत्थे चढ़े

वन्दे भारत ट्रेन में यात्रियों के लैपटॉप, मोबाइल आदि चुराने वाले दो चोरों को रेलवे पुलिस (जीआरपी) ने नई दिल्ली में गिरफ्तार कर लिया। शनिवार को हुई इस गिरफ़्तारी में आरोपितों के नाम पुलिस ने मीडिया को एज़ाज़ अहमद मलिक और सद्दाम हुसैन बताए हैं। रेल मंत्री पीयूष गोयल ने अंग्रेजी अख़बार में छपी खबर की फोटो ट्वीट कर जानकारी दी।

सीसीटीवी से हुए गिरफ़्तार, गोयल ने कहा, ‘पैसा वसूल’

रेल मंत्री ने खबर ट्वीट करते हुए साथ में यह टिप्पणी भी की कि कोच के अंदर सीसीटीवी लगाना काम आया। बता दें कि चोरों में से एक एज़ाज़ की शिनाख्त सीसीटीवी कैमरे से ही हुई। उसे सीसीटीवी फुटेज में एक शिकायतकर्ता का लैपटॉप बैग लेकर जाते हुए देखा गया था, जिसके बाद पुलिस ने अपने मुखबिरों में उसकी तस्वीर सर्कुलेट कर दी। जल्दी ही उसकी पहचान पुलिस को मिल गई।

एक कश्मीरी, एक जामा मस्जिद से

डिप्टी कमिश्नर (रेलवे) डीके गुप्ता ने मीडिया से बात करते हुए यह बताया कि जहाँ एज़ाज़ कश्मीर के पुलवामा से ताल्लुक रखता है, वहीं सद्दाम हुसैन केंद्रीय दिल्ली के जामा मस्जिद इलाके का रहने वाला है। पकड़े जाने के बाद एज़ाज़ ने बताया कि उसने चुराए हुए लैपटॉप को सद्दाम को बेच दिया था। गुप्ता ने यह भी बताया कि उन्हें उक्त यात्री का लैपटॉप वन्दे भारत एक्सप्रेस से चोरी होने की शिकायत 20 मई को मिली थी। इसके अलावा शताब्दी एक्सप्रेस के एक यात्री की भी शिकायत मिली थी। सद्दाम और एज़ाज़ की निशानदेही पर तीन लैपटॉप और दो मोबाइल फ़ोन बरामद हुए। कुल सात लैपटॉप-मोबाइल चोरी के केस जीआरपी ने इन दोनों की गिरफ़्तारी से सुलझा लिए हैं।

राम मंदिर पर इंग्लैंड में हमला, प्रतिमाएँ तोड़ी गईं, 3 महीने में तीसरी घटना

इन दिनों समुदाय विशेष द्वारा हिंदू मंदिरों को तोड़ने या फिर मंदिरों में तोड़-फोड़ करने की कई घटनाएँ सामने आ रही है। अभी पिछले ही दिनों दिल्ली के चाँदनी चौक स्थित दुर्गा माता के मंदिर में मुस्लिमों ने तोड़-फोड़ की थी और ‘अल्लाहु अकबर’ के नारे भी लगाए थे। ऐसे ही हिंदू मंदिरों को तोड़ने की घटना लंदन में भी देखने को मिली।

यहाँ पर भी हिंदू मंदिरों को तोड़ा गया। खबर के मुताबिक, वेस्ट मिडलैंड के वालसाल में 19 जून 2019 को श्री राम मंदिर के बाहर एक शख्स द्वारा चार मूर्तियों को बुरी तरह से तोड़ दिया गया। सीसीटीवी फुटेज में साफ तौर पर देखा जा सकता है कि ब्लैक हुडी पहने एक शख्स हाथ में क्रिकेट बैट या फिर हॉकी स्टिक लेकर आता है और उन मूर्तियों पर भयानक तरीके से प्रहार करता है, फिर साइड में कार में बैठे अपने एक साथी से जाकर कुछ बातें करता है और फिर वापस आकर मूर्तियों पर काफी बुरी तरीके से हिट करता है, जिससे मूर्तियाँ क्षत-विक्षत हो जाती है।

वालसाल के श्री राम मंदिर के बाहर मंदिर के साथ की गई तोड़-फोड़ (फोटो आभार: metro)

पुलिस ने इस घटना की पुष्टि करते हुए कहा कि वो फिलहाल मामले की जाँच कर रहे हैं और जानकारियाँ इकट्ठा करने का प्रयास कर रहे हैं। एक पुलिस अधिकारी का कहना है कि पुलिस को वलसाल के प्लेक इलाके में फोर्ड स्ट्रीट पर एक सामुदायिक हॉल और मंदिर के बाहर मूर्तियों को आपराधिक क्षति पहुँचाने की दो रिपोर्ट मिली हैं। उन्होंने बताया कि पहली घटना 10 जून 2019 को सुबह के 10 बजे से पहले हुई। इस दौरान मूर्तियों को तोड़ा गया। वहीं, दूसरी घटना 19 जून को रात के 11 बजे के बाद हुई। इस घटना में भी मूर्तियों को क्षति पहुँचाई गई। उसे क्षति पहुँचाई गई। हालाँकि पुलिस की जाँच में अभी तक किसी की पहचान उजागर नहीं हुई है।

फोटो साभार: metro

फोर्ड स्ट्रीट स्थित पूजा स्थल के एक सदस्य जगू पटेल ने कहा कि ये 3 महीने में घटी तीसरी घटना है, जब मंदिरों पर हमला किया गया। इस घटना से वहाँ के लोग काफी डरे हुए हैं। उनका कहना है कि कुछ लोगों द्वारा उनलोगो को निशाना बनाया जा रहा है। उन्हें समझ में नहीं आ रहा है कि लोग इस तरह की घटना को क्यों अंजाम देते हैं। इससे उन्हें कुछ भी हासिल नहीं होने वाला है। ये सिर्फ उनके संवेदनहीनता को दर्शाता है।

फोटो साभार: metro
फोटो साभार: birminghammail

गौरतलब है कि, कुछ समय पहले, लंदन के हैरो स्थित मंदिर श्री कच्छ सत्संग स्वामीनारायण मंदिर को तोड़ा गया और फिर विल्सडन लेन, ब्रेंट स्थित श्री स्वामीनारायण मंदिर से तीन बहुमूल्य मूर्तियाँ और नकदी की चोरी की गई। इस घटना को हिंदू पर्व दिवाली के दो दिन बाद ही अंजाम दिया गया था। दो दिन पहले हिंदू समुदाय ने इस मंदिर में दिवाली और नए साल की शुरुआत का जश्न मनाया था।

जानकारी के मुताबिक, पिछली जनगणना के समय यूके में 817,000 हिंदू, 157 मंदिर और 7 हिंदू स्कूल थे, लेकिन दिवाली के बाद दो मंदिरों को तोड़ दिया गया। ब्रेंट काउंसिल के समुदाय और कल्याण जाँच समिति के अध्यक्ष केतन सेठ ने इस घटना पर अफसोस जताते हुए कहा कि चोरों को शायद एहसास तक नहीं था कि वे क्या ले जा रहे थे। उन्होंने कहा कि चोरी की गई गोल्ड प्लेटेड पीतल की मूर्तियाँ पैसे से मूल्यवान नहीं थी, अपितु वो तो आध्यात्मिक रुप से, धार्मिक आस्था की दृष्टि से बहुमूल्य हैं। हिंदू समुदाय को अभी भी उम्मीद मूर्तियों के वापस आने की उम्मीद है।

104 Vs 105: कर्नाटक में BJP का पलड़ा भारी, निर्दलीय विधायक नागेश ने बिगाड़ा कुमारस्वामी का ‘मंत्री खेल’

कर्नाटक के राजनैतिक गलियारे में इन दिनों खूब हलचल मची हुई है। 13 विधायकों के इस्तीफे़ के बाद यहाँ निर्दलीय विधायक नागेश ने भी कुमारस्वामी सरकार से अपना समर्थन वापस ले लिया है। सदन में आँकड़े की बात करें तो गठबंधन सरकार (कॉन्ग्रेस-जेडीएस) अल्पमत में आ चुकी है। सरकार समर्थित विधायकों की संख्या अब मात्र 104 रह गई है जबकि भाजपा को समर्थन देने वाले विधायकों की संख्या 105 हो गई है।

विधायकों की इस तेज उछल-कूद के बीच कयास लगाए जा रहे हैं कि भाजपा राज्य में सरकार गठन करने की कोशिश कर सकती है क्योंकि निर्दलीय विधायक नागेश ने भी यह स्पष्ट किया है कि अगर भाजपा उनसे समर्थन माँगती है, तो वह पार्टी के साथ हैं।

इस्तीफ़ा देने के बाद नागेश मुंबई के लिए रवाना हो चुके हैं। इधर भाजपा ने भी आज (जुलाई 8, 2019) शाम को नेताओं की बैठक बुलाई है, जिसमें वे राज्य के मौजूदा हालातों पर चर्चा करेंगे। खबरों की मानें तो बीजेपी अभी स्थिति के स्पष्ट होने का इंतजार कर रही है। क्योंकि छुट्टी पर होने के कारण अभी स्पीकर द्वारा विधायकों के इस्तीफों को नहीं स्वीकारा गया है। अगर मंगलवार को स्पीकर इन विधायकों के इस्तीफ़े स्वीकार कर लेते हैं, तो मुमकिन है कि भारतीय जनता पार्टी राज्य में सरकार बनाने का दावा करे। माना जा रहा है कि राज्य सरकार की ओर से अभी और भी इस्तीफ़े आ सकते हैं।

गौरतलब है कि डिप्टी सीएम जी. परमेश्वर समेत कॉन्ग्रेस कोटे के सभी मंत्रियों ने प्रदेश अध्यक्ष दिनेश गुंडू राव को अपना इस्तीफा सौंप दिया है। मुख्यमंत्री कुमारस्वामी ने अपने सभी 21 मंत्रियों से इस्तीफा दिलवाया कर राजनैतिक दाव तो खेल दिया है लेकिन देखना यह होगा कि नाराज चल रहे विधायक मंत्री पद से संतुष्ट होते हैं या अपना विरोधी रवैया बरकरार रखते हैं।

पहले इस मसले पर कॉन्ग्रेस को लग रहा था कि इस्तीफ़ा देने के बाद नाराज़ विधायक सरकार में वापस आ जाएँगे लेकिन फिलहाल ऐसा कुछ भी होता नहीं दिख रहा है। सभी विधायक इस्तीफ़े की जिद पर अड़े हुए हैं और मुंबई के रिजॉर्ट में बंद हैं। लेकिन फिर भी कर्नाटक सरकार में मंत्री ज़मीर अहमद खान का कहना है कि जिन 10 विधायकों ने इस्तीफा दिया है, उसमें से 6-7 विधायक शाम तक वापस आ जाएँगे।

सिकंदर ख़ान मतलब ‘यौन भक्षक’: 60-65 लोगों के साथ किया बलात्कार – 25 बच्चे-बच्चियाँ, 40 पुरुष व किन्नर

जयपुर में एक नाबालिग बच्ची से रेप के आरोपित सिकंदर उर्फ़ जीवाणु को गिरफ़्तार कर लिया गया है। पुलिस ने उसे एक ‘सेक्सुअल प्रिडेटर’ कहा है, जिसका अर्थ हम हिंदी में ‘यौन भक्षक’ या ‘यौन शिकारी’ के रूप में निकाल सकते हैं। पुरुष, किन्नर, बच्चे-बच्चियाँ व महिलाएँ- वह इन सभी को अपनी दरिंदगी का शिकार बनाया करता था। 34 वर्षीय सिकंदर ख़ान अब तक 25 नाबालिग बच्चे-बच्चियों के साथ दुष्कर्म कर चुका है और इसके अलावा उसने 40 के क़रीब पुरुषों व किन्नरों को भी अपने यौनाचार का शिकार बनाया है। उसने अपने बारे में यह बताया है कि वह न्यायिक अभिरक्षा में अन्य क़ैदियों तक को भी नहीं छोड़ता था

सिकंदर ख़ान हिंसक प्रवृति का है और वह यौनाचार के दौरान हिंसा पर उतारू हो जाता था। हालिया वारदात के बाद वह फुटपाथ पर सोया हुआ था। इस मामले ने राजस्थान पुलिस व प्रशासन की भी पोल खुल गई है। पुलिस ने चारों तरफ़ नाकाबंदी का दावा किया था लेकिन तब भी आरोपित जयपुर से कोटा जा पहुँचा। उसने पुलिस की चौकसी के लाख दावों के बीच बाइक से बेख़ौफ़ कोटा तक का सफर पूरा किया। इतना ही नहीं, उसने रास्ते में देवली क्षेत्र में हवाई फायर कर एक शराब की दुकान में लूटपाट भी की।

उक्त शराब की दूकान से उसने 20 हज़ार रुपए लूट लिए व कुछ गहनें भी ले गया। कोटा में वह अपने दोस्त बाबू ख़ान के पास रुका हुआ था। इस बीच पीड़ित बच्चियों के परिजनों ने आरोपित को फाँसी देने की माँग की है। सिकंदर के एक दोस्त के बारे में भी पता चला है, जिसका नाम रफीक है। रफीक और सिकंदर मिल कर चोरी किया करते थे। दोनों के बीच इस बात को लेकर प्रतिस्पर्द्धा रहती थी कि एक रात में कौन सबसे ज्यादा चोरी की घटनाओं को अंजाम देता है! सिकंदर मुक़ाबले में हमेशा जीत जाता था, इसीलिए उसका नाम जीवाणु और रफ़ीक का नाम कीटाणु पड़ा।

सिकंदर ख़ान मादक पदार्थों की सप्लाई भी किया करता था। एक बच्ची के परिजन ने बताया कि जीवाणु जब उनकी कॉलोनी में रुका हुआ था, तब उसकी नज़र उक्त 10 वर्षीय बच्ची पर थी और वह बच्ची को नई सैंडल दिलाने और फ़िल्म दिखाने के बहाने बाहर ले जाने की फ़िराक़ में रहता था। बच्ची की अम्मी ने बताया कि सिकंदर ख़ान बच्ची को ‘राजा’ कह कर बुलाया करता था। समय रहते बच्ची को सिकंदर के पास जाने से मना कर दिया गया था, जिससे वह बच गई। सिकंदर ख़ान पिस्तौल दिखा कर बच्चों को डराया भी करता था। वह अब तक कई बार जेल जा चुका है।

सिकंदर ख़ान ने 2004 में एक बच्ची के साथ दुष्कर्म करने के बाद उसकी हत्या करने की बात स्वीकार की है। मुरलीपुरा थाना क्षेत्र में एक लड़के को उसने ब्रेड खिलाने के बहाने ले जाकर उसके साथ अप्राकृतिक यौनाचार किया और उसकी हत्या कर शव को पानी की टंकी में फेंक दिया था। इस मामले में उसे उम्रकैद की सज़ा मिली थी। 2015 में वह जेल से बाहर आया। 1 जुलाई 2019 को 7 साल की बच्ची से बलात्कार वाले मामले से पहले वह 22 जून को भी एक 4 वर्षित बच्ची के साथ बलात्कार कर चुका है। जून 2017 में उसने एक सार्वजनिक स्थान पर लोगों के बीच ही 2 बच्चियों के साथ दुर्व्यवहार किया और जब एक पुलिस कॉन्स्टेबल ने उसे रोकने की कोशिश की तो उसके सिर पर वार किया था।

जून 2019 से अब तक: देश भर के मंदिरों में तोड़-फोड़, पेशाब करने, गंदी फोटो लेने की 10 घटनाएँ

30 जून को पुरानी दिल्ली के एक मंदिर में मुस्लिमों की भीड़ ने जमकर उत्पात मचाया। इस ख़बर से राष्ट्रीय राजधानी में हड़कंप मच गया। लेकिन यह अपने-आप में अनोखी घटना हुई हो, ऐसा नहीं है। मंदिरों को तोड़ने और उसमें उत्पात मचाने की ये ख़बर किसी एक मंदिर की नहीं है, बल्कि देश में इस तरह की घटनाओं को कई बार अंजाम दिया जा चुका है। इस तरह के हमलों से हिन्दुओं की भावनाएँ तो आहत होती ही हैं, साथ ही साम्प्रदायिक तनाव का माहौल भी बनता है। इस लेख में, हम जून 2019 से लेकर जुलाई के पहले सप्ताह तक देश भर के मंदिरों पर हुए हमलों के बारे में बताएँगे।

1. बंदा वीर बहादुर सिंह बैरागी की प्रतिमा और किशोरदास मंदिर पर हमला, हरियाणा

3 जून की रात असामाजिक तत्वों ने खाड़ा गाँव में किशोरदास मंदिर और वीर योद्धा की प्रतिमा पर हमला किया। मंदिर में घोड़े की मूर्ति के पैरों को तोड़ दिया गया और योद्धा के हाथों से तलवार को हटा दिया, उसे एक तरफ फेंक दिया। ऐसा करके ग्रामीणों की धार्मिक भावनाओं को चोट पहुँचाई गई। इससे गाँव में साम्प्रदायिक तनाव का माहौल बन गया।

2. चामुंडा मंदिर और शिव मंदिर में मुर्तियों को तोड़ा गया, बिजनौर

जून के दूसरे सप्ताह में सबदलपुर तेली गाँव में चामुंडा मंदिर में मुर्तियों को असामाजिक तत्वों द्वारा तोड़ा गया। पिपलसाना गाँव के शिव मंदिर में मुर्तियों को बर्बरतापूर्वक गिरा दिया गया। इससे ग्रामीणों की धार्मिक भावनाएँ स्वाभाविक रूप से आहत हुईं। पुलिस ने वादा किया कि अपराधियों की पहचान की जाएगी और सज़ा दी जाएगी।

3. भगवान हनुमान और गणेश की मूर्तियों पर किया पथराव, हरियाणा

राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या-19 पर मितरोल गाँव में, तुलसी कुंडम मंदिर में मुर्तियों को असामाजिक तत्वों द्वारा बर्बरतापूर्वक गिराया गया। महंत सूबेदार दुबे ने पुलिस को सूचित किया कि 1-2 जून की रात को अज्ञात तत्वों ने भगवान हनुमान और गणेश की मूर्तियों पर पथराव किया था। इस घटना से ग्रामीण काफ़ी नाराज़ थे और आरोपितों की जल्द गिरफ़्तारी की माँग की।

4. भगवान शिव और हनुमान की मूर्तियों को तोड़ा, राजस्थान

दौसा जिले के बिनवाला ढाणी गाँव में अज्ञात बदमाशों ने एक स्थानीय मंदिर में भगवान हनुमान और भगवान शिव की मूर्तियों को तोड़ा। इस घटना से आहत ग्रामीणों ने आरोपितों की तत्काल गिरफ़्तारी की माँग की। पुलिस ने अपराधियों के ख़िलाफ़ सख़्त कार्रवाई का वादा किया।

5. मूसा ने भगवान हनुमान की मूर्ति तोड़ने का प्रयास किया, मंदिर के शीशे तोड़े- उत्तर प्रदेश

जुलाई में एक मुस्लिम युवक ने खतोली के एक मंदिर में प्रवेश किया और वहाँ स्थापित हनुमान जी की मूर्ति को तोड़ने का प्रयास किया। उसने मंदिर में पूजा करने वाले भक्तों के साथ दुर्व्यवहार भी किया। घटनास्थल पर मौजूद लोग अपराधी को पकड़ने में क़ामयाब रहे, लेकिन वह उसे मंदिर के शीशे को तोड़ने से नहीं रोक सके। पुलिस ने आकर उसे गिरफ़्तार किया। आरोपी की पहचान मूसा के रूप में हुई।

6. मंदिर में तोड़-फोड़ करने के बाद मूर्तियों को साथ ले गए, उत्तर प्रदेश

जून के पहले सप्ताह में, उत्तर प्रदेश के पीलीभीत के रोहनिया गाँव में एक मुस्लिम भीड़ द्वारा लाउडस्पीकर का विरोध करने पर एक मंदिर में तोड़-फोड़ की गई, जिसके बाद इलाक़े में साम्प्रदायिक तनाव फैल गया। भीड़ ने लाउडस्पीकर को तोड़ दिया और मंदिर की मूर्तियों को अपने साथ ले गए। इस घटना में महबूब, मोनिस, इज़राइल, आज़ाद और अलनूर को गिरफ्तार किया गया।

7. भक्ति गीत बजाने पर दलित समूह की पिटाई और मंदिर पर हमला, उत्तर प्रदेश

जून के अंतिम सप्ताह में मुस्लिमों की एक भीड़ ने मेरठ के घसौली गाँव में एक मंदिर में प्रवेश किया और दलित आदमियों के एक समूह की पिटाई की, क्योंकि उन्होंने भक्ति गीत बजाने के लिए मंदिर में लाउडस्पीकर लगाए थे। मुस्लिम समुदाय ने मंदिर परिसर में लगे लाउडस्पीकर पर आपत्ति जताई थी, क्योंकि वो एक मस्जिद के पास है।

बाद में, मुस्लिम भीड़ ने मंदिर पर हमला किया और दलितों को लाठियों और डंडों से पीटा। मंदिर के अंदर मौजूद आधा दर्जन से अधिक लोग घायल हो गए और इलाक़े में साम्प्रदायिक तनाव और भय का माहौल बन गया। इस घटना में अकरम, क़रीम, सद्दाम, जुल्फ़िकार सईद, सईद, अब्दुल रहीम पुद्दह नवाबुद्दीन, आरिफ़ और रियाज़ुद्दीन को गिरफ़्तार किया गया।

8. मुज़ीबुर रहमान जिसने मूर्तियों के साथ अश्लील तस्वीरें पोस्ट की, तमिलनाडु

तमिलनाडु के त्रिची पुलिस ने जून के दूसरे सप्ताह में मुजीबुर रहमान नाम के एक 28 वर्षीय व्यक्ति को अश्लील तस्वीरें पोस्ट करने के आरोप में गिरफ़्तार किया था। उसने तंजावुर (तंजौर) स्थित बृहदेश्वर मंदिर में एक हज़ार साल पुरानी वास्तुकला की प्राचीन मूर्तियों के साथ अश्लील मुद्रा में तस्वीरें खिंचवाई और फिर उसे अपने फेसबुक पेज पर पोस्ट कर दिया।

भारत के सबसे पुराने मंदिरों में से एक बृहदेश्वर मंदिर में देवी की मूर्तियों के साथ अश्लील फ़ोटो खिंचवाने पर जनता और हिन्दू संगठन के कार्यकर्ताओं ने कड़ी आपत्ति दर्ज करते हुए मुज़ीबुर रहमान के ख़िलाफ़ पुलिस में शिक़ायत दर्ज कराई, जिसके बाद रहमान को गिरफ़्तार कर लिया गया।

9. अम्मन मंदिर में 25 मूर्तियों को तोड़ा, तमिलनाडु

तमिलनाडु पुलिस ने तिरुवरूर ज़िले के पेरियानायकी अम्मन मंदिर में 25 मूर्तियों को तोड़ने के ज़ुर्म में पाँच नाबालिग लड़कों को गिरफ्तार किया। पुलिस ने नाबालिग लड़कों को मंदिर से लोहे की छड़ें चुराने के बाद पकड़ा, जिन्हें वो शराब ख़रीदने के लिए बेचने की फ़िराक में थे।

यह घटना मंदिर में होने वाले अभिषेक समारोह से पहले हुई थी। जिन मूर्तियों को नष्ट किया गया, उनमें भगवान मुरुगन, पेरियानायकी, काल भैरव शामिल थे, जबकि जिन मूर्तियों को क्षतिग्रस्त किया, वो अलग-अलग जानवरों की थीं।

10. शिवलिंग पर इरशाद ने किया पेशाब, बुलंदशहर

जुलाई के पहले हफ्ते में, शहर के जहाँगीराबाद के महादेव मंदिर में शिवलिंग पर इरशाद उर्फ़ ईरानी नाम के एक व्यक्ति ने पेशाब किया। प्राचीन शिव मंदिर की पवित्रता को तार-तार करने वाले इरशाद के ख़िलाफ़ बजरंग दल के सदस्यों ने पुलिस में शिक़ायत दर्ज की। इसके बाद बुलंदशहर पुलिस ने उसे तुरंत गिरफ़्तार कर लिया।

बुलंदशहर पुलिस ने इस घटना की पुष्टि करते हुए ट्वीट किया कि आरोपित इरशाद को भारतीय दंड संहिता धारा-295 के तहत (धर्म का अपमान करने के इरादे से पूजा स्थल क्षतिग्रस्त करना) और धारा-153 ए (विभिन्न धार्मिक समूहों के बीच दुश्मनी को बढ़ावा देना) के तहत मामला दर्ज किया गया है और उसे तुरंत जेल भेज दिया गया।

…अब शिवमंदिर में तोड़-फोड़: वसीम, सराफत, नासिर, राशिद ने चलाया फावड़ा, शिवलिंग भी क्षतिग्रस्त

उत्तर प्रदेश के लखीमपुर से खबर आई है कि वहाँ फरधान थाना क्षेत्र के गौरिया गाँव में इस्लामी भीड़ ने शिव मंदिर पर हमला किया है। गली के बीच से नाली निकालने को लेकर यह विवाद हुआ बताया जा रहा है, जिस पर हिंदू संगठनों द्वारा काफ़ी नाराज़गी जताई है। हालाँकि पुलिस के अनुसार मुकदमा दर्ज कर आगे की कार्रवाई की जा रही है, लेकिन स्थानीय हिन्दुओं में असंतोष बरकरार है।

मंदिर के सामने निकाली नाली

मिल रही जानकारी के अनुसार शनिवार (जुलाई 6, 2019) को मंदिर के पड़ोस में रहने वाले नासिर खान और शराफत खान गाँव के शिव मंदिर की ओर नाली खोदने लगे, जिस पर सूघर सिंह ने विरोध किया। सूघर सिंह ने शिव मंदिर पर दो महीने पहले ही प्लास्टर करवाया था। पत्रिका की खबर के अनुसार मामले को बिगड़ता देख नासिर खान और शराफत खान ने इसे सम्प्रदायिक रूप दे दिया, जिसके बाद समुदाय विशेष के लोग वहाँ फावड़ा लेकर आ गए और मंदिर पर हमला करने लगे। वहीं, सुदर्शन न्यूज के मुताबिक वसीम, शराफत और नासिर नामक हमलावरों ने मंदिर को न केवल क्षतिग्रस्त किया बल्कि मंदिर के शिवलिंग को भी बाहर फेंक दिया।

इसके अलावा सुदर्शन न्यूज द्वारा पोस्ट किए गए वीडियो में सूघर सिंह ये बताते हुए दिख रहे हैं कि घटनास्थल पर वसीम खान नाम का एक शख्स आया था। सूघर सिंह के मुताबिक वसीम ने बोला, “मंदिर तोड़ दो। न ये झंझट (मंदिर) रहेगा और यहाँ का झंझट (नाली का) भी चला जाएगा।” इसके बाद ही समुदाय विशेष के लोगों ने मंदिर पर फावड़ा चलाया, और मंदिर का एक छज्जा टूट गया। सुदर्शन न्यूज़ को एक स्थानीय निवासी ने बताया कि पुलिस के पहुँचने पर उन लोगों ने जगह की लीपा-पोती कर दी, लेकिन जब मीडिया पहुँची तो वहाँ वही क्षतिग्रस्त हालत थी।

सुदर्शन न्यूज़ के इस वीडियो में एक और स्थानीय निवासी इस घटना की जानकारी देते हुए बता रहे हैं कि मंदिर पर इससे पहले भी बहुत बार हमले हो चुके हैं, जिनके बाद पुलिस आई भी, और उसने नाली के विवाद को सुलझाते हुए पानी के निकास की व्यवस्था भी करवाई। लेकिन वसीम नामक शख्स (जिसे आपराधिक प्रवृत्ति का भी बताया जा रहा है) ने समुदाय विशेष के लोगों को इकट्ठा करके मंदिर पर पुनः हमला करवा दिया। आरोप के अनुसार, वसीम ने कहा, ” इस मंदिर को जड़ से उखाड़ दो, जब मंदिर ही नहीं बचेगा तो विवाद खत्म हो जाएगा।” उस पर यह भी आरोप है कि उसने वहाँ बचे-खुचे एक-दो घरों में बसे हिंदुओं को भी भगा देने और घर पर कब्जा कर लेने की भी ललकार लगाई।

पुलिस कार्रवाई से लोग असंतुष्ट

खेड़ी पुलिस ने मामले पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए बताया है कि मामले से संबंधित शिकायत के आधार पर वे अभियोग पंजीकृत करके विधिक कार्यवाही कर रहे हैं।

लेकिन फिर भी लोगों में घटना के बाद बहुत गुस्सा और निराशा है। क्षुब्ध लोग पुलिस और प्रशासन पर अपना गुस्सा निकाल रहे हैं।

हिन्दू युवा वाहिनी के एक स्थानीय कार्यकर्ता ने भी ट्विटर पर मामले को लेकर क्षोभ जताया।

बछड़ा चुराया, काटा और अपनी बेटी की शादी में परोस दिया: सलीम को 10 साल की सजा, ₹1 लाख का जुर्माना

देश में शायद पहली बार ऐसी खबर सुनने में आई है जब गौवंश की हत्या के मामले किसी व्यक्ति को 10 साल की सजा सुनाई गई हो। जी हाँ, ये मामला गुजरात के धोराजी का है। यहाँ राजकोट की एक अदालत ने गोकशी के मामले की सुनवाई करते हुए सलीम मकरानी नाम के शख्स को 10 साल की सजा सुनाने के साथ उस पर 1 लाख रुपए का जुर्माना भी लगाया है।

कोर्ट द्वारा दोषी करार दिए गए सलीम पर बछड़ा चुराकर हत्या करने का आरोप था। उसके ख़िलाफ़ इसी साल की शुरुआत में सत्तार कोलिया नाम के एक व्यक्ति ने शिकायत करते हुए एफआईआर करवाई थी। इस FIR में शिकायतकर्ता ने सलीम पर बछड़ा चुराने और उसकी हत्या करके अपनी बेटी की शादी के दावत में परोसने का आरोप लगाया था।

शिकायत के आधार पर पुलिस ने मामले की फॉरेंसिक जाँच कराई थी। जाँच में यह पाया गया कि मामला वाकई में गौकशी से जुड़ा हुआ था। इसके बाद पुलिस ने सलीम के ख़िलाफ़ मिले तमाम सबूतों को कोर्ट में पेश कर दिया। जिसके आधार पर अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायधीश एचके दवे ने शनिवार (जुलाई 6, 2019) को सलीम मकरानी नाम के आरोपित को गुजरात पशु संरक्षण (संधोधन) अधिनियम 2017 के तहत यह सजा सुनाई

आपको बता दें कि गुजरात देश का पहला राज्य है, जिसने गोकशी को रोकने के लिए इतना सख्त कानून पारित किया है। इस कानून के तहत 10 साल से लेकर उम्रकैद तक की सजा और 5 लाख रुपए तक के जुर्माने का प्रावधान है। यह कानून साल 2017 में गोवंश की सुरक्षा के लिए विधानसभा में पास किया गया था। संभवतः यह देश का पहला ऐसा मामला है, जिसमें गोहत्या में सजा हुई हो।

BJP सदस्य बनने पर गुलिस्तां को मकान मालिक सुल्तान ने घर से निकाला, लगाया किराया नहीं देने का आरोप

उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ में एक मुस्लिम महिला को भाजपा की सदस्यता लेने के कारण उसके मकान मालिक ने घर से बाहर का रास्ता दिखा दिया। जानकारी के मुताबिक ये मामला शाहजमाल एडीए कॉलोनी का है। जहाँ गुलिस्तां (33 वर्ष) नाम की महिला ने शनिवार (जुलाई 6, 2019) को भाजपा सदस्यता अभियान के तहत पार्टी में सदस्यता ली थी। लेकिन जैसे ही इसका पता उसके मकान मालिक सुल्तान को चला, उसने तुरंत महिला को उसका घर छोड़ने को कह दिया। आरोप यह भी है कि मकान मालिक की पत्नी मदीना (60 साल) और उसके बेटे सलमान ने गुलिस्तां के साथ मारपीट भी की और घर से न निकलने पर उन्हें जान से मारने की धमकी भी दी।

खबरों के मुताबिक गुलिस्तां, भाजपा महिला मोर्चा महावीरगंज मंडल की मंत्री रूबी आसिफ खान के साथ रघुनाथ पैलेस में हुए भाजपा के कार्यक्रम में शामिल हुई थीं। जहाँ वे मिस्ड काल के माध्यम से भाजपा की सामान्य सदस्य बनीं।

यही फोटो अखबार में प्रकाशित हुई, जिसके बाद गुलिस्तां (लाल घेरे में) को उसके मकान मालिक द्वारा घर से निकालने के लिए प्रताड़ित किया गया

अगले दिन इस राजनीतिक कार्यक्रम की खबर अखबार में प्रकाशित हुई। प्रकाशित खबर में फोटो भी लगी हुई थी। अखबार में गुलिस्तां की फोटो (वो भी भाजपा सदस्यता लेते हुए) देखकर मकान मालिक भड़क गया और उन्हें अपशब्द बोलने लगा। इसके तुरंत बाद उन्हें घर से निकलने का फरमान सुना डाला।

पीड़ित महिला ने इस मामले से संबंधी शिकायत देहलीगेट थाने में दर्ज करवा दी है। महिला की शिकायत के आधार पर मदीना और उसके बेटे सलमान के ख़िलाफ़ पुलिस ने धारा 323, 504, 506 क तहत मामला दर्ज कर लिया और आगे की कार्रवाई जारी है।

TV9 भारतवर्ष में गुलिस्तां के साथ हुई ज्यादती पर की गई रिपोर्टिंग

इस घटना पर अलीगढ़ के एसएसपी आकाश कुलहरि ने बताया कि किराए के पैसों को लेकर एक विवाद सामने आया है। जिसमें शिकायतकर्ता गुलिस्तां की तहरीर के अनुसार वह बीजेपी की सदस्य हैं और इस बात को लेकर उसके मकान मालिक सलमान ने उनसे गाली गलौज करके घर से निकाल दिया है। दोनों पार्टियों को इस मामले पर बुलवाकर पूछताछ की गई है। गुलिस्तां की ओर से मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। बाकी अग्रिम जाँच के बात स्पष्टीकरण कर कार्यवाही की जाएगी।

दूसरी ओर आरोपित मकान मालिक सलमान का कहना है कि घर में गुलिस्तां समेत और भी अन्य किराएदार रह रहे हैं। लेकिन गुलिस्तां ने पिछले 6 महीनों से किराए का पैसा नहीं दिया है। वह पिछले 5 साल से यहाँ रह रही हैं। खुद का घर होते हुए भी घर खाली नहीं कर रही हैं। जब गुलिस्तां से घर के किराए को लेकर कहासुनी हुई तो गुलिस्ताना खुद को बीजेपी की सदस्य होने की धमकी देने लगी। जबकि सलमान का कहना है कि वो खुद भी बीजेपी का समर्थक है।