अगले महीने से शुरू हो रहे वेस्ट इंडीज़ दौरे के लिए भारतीय क्रिकेट टीम में महेंद्र सिंह धोनी के चयन को लेकर काफी चर्चा हो चुकी है। कुछ लोग कहते हैं कि धोनी का बेहतरीन दौर उनके पीछे है और उन्हें समय रहते संन्यास ले लेना चाहिए। उनका तर्क है कि धोनी अब पहले की तरह मैच-जिताऊ खेल नहीं खेलते जिससे उनकी उपयोगिता कम होती जा रही है।
वर्ल्ड कप के शुरुआत से लोग यह भी सोच रहे थे कि धोनी इसके बाद क्रिकेट को अलविदा कह सकते है। वर्ल्ड कप ख़त्म हो चुका है और अगस्त के दौरे के लिए टीम चुनी जा रही है। इसी बीच खबर आई है कि धोनी ने चयनकर्ताओं को कहा है कि वो इस दौरे के लिए उपलब्ध नहीं हो पाएँगे क्योंकि उन्हें आने वाले दो महीने अपने आर्मी रेजिमेंट के साथ बिताने हैं।
टाइम्स ऑफ़ इंडिया के अनुसार, BCCI के एक सूत्र ने बताया है कि धोनी की अभी संन्यास लेने की कोई इच्छा नहीं है और उनके इस दौरे के लिए अनुपलब्ध रहने की बात मुख्य चयनकर्ता और कप्तान विराट कोहली को बता दी गई है।
दिल्ली पुलिस ने देश की राजधानी में चल रहे एक ऐसे ड्रग्स रैकेट का खुलासा किया है जिसके तार तालिबान से जुड़े हैं। स्पेशल सेल ने शुक्रवार (19 जुलाई 2019) को 150 किलो हेरोइन बरामद कर जाकिर नगर में चल रही एक हेरोइन फैक्ट्री का भंडाफोड़ किया। अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में जब्त हेरोइन की क़ीमत 600 करोड़ रुपए बताई जा रही है।
पुलिस ने 2 अफ़गानी रसायन विशेषज्ञों समेत 5 लोगों को गिरफ़्तार किया है। यह दिल्ली में जब्त की गई ड्रग्स की अब तक की सबसे बड़ी खेप है। स्पेशल सेल का कहना है कि यह रैकेट देश में अब तक 5000 करोड़ रुपए की हेरोइन ला चुका है।
Delhi Police: Special Cell arrested five persons including two Afghan chemical experts and seized around 150 kgs of Afghan origin heroin worth about Rs 600 crores in international market.
अफगानिस्तान से हेरोइन की तस्करी बेहद दिलचस्प तरीके से की जा रही थी। जूट की बोरियों को अफगानिस्तान में लिक्विड हेरोइन में भीगो दिया जाता था। सूखने के बाद बोरियों में मसाले भरकर दिल्ली भेजा जाता था। इसके बाद बोरियों को तस्कर दिल्ली के जाकिर नगर स्थित फैक्ट्री में ले जाकर कई तरह के केमिकल में भिगोते थे। फिर गीली बोरियों को सुखाकर इनके रेसों में चिपटी हेरोइन को खास तकनीक से पाउडर में बदला जाता था। इसके बाद बोरियों को जला दिया जाता था।
जूट की एक बोरी से कम से कम एक किलो हेरोइन निकलती थी। ख़बर के अनुसार, दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने 120 दिनों के लंबे अभियान के बाद यह सफलता हासिल की है। इस रैकेट में अफ़ग़ानिस्तान तालिबान का नेता और उसका पाकिस्तानी साथी भी शामिल है। लंबे ऑपरेशन के बाद दिल्ली पुलिस ने छह कारों में भरी लगभग 150 किलो हेरोइन ज़ब्त करने में सफल रही। सभी कारें दिल्ली और अमृतसर के आसपास विभिन्न मार्गों पर खड़ी थी। दिल्ली पुलिस के स्पेशल सेल के डीसीपी मनीष चंद्रा ने न्यूज 18 को बताया कि विशेष रूप से तैयार हेरोइन के घोल में जूट के रेशों को तस्कर भिगो देते थे।
ख़बर के अनुसार, हेरोइन को अफ़गानिस्तान से पाकिस्तान के रास्ते होते हुए दिल्ली लाया जाता था। पुलिस ने बताया कि पाकिस्तान-अफगानिस्तान के ड्रग तस्करों का यह सिंडिकेट ड्रग्स में डूबे जूट के धागों को जलालाबाद से पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर भेजता था। इसके बाद उसकी बोरियाँ बना दी जाती थीं। इसके बाद मसाले और अन्य सामान भरकर बोरियाँ दिल्ली में रह रहे कश्मीर के मसाला कारोबारियों तक पहुँचा दी जाती थीं। दिल्ली में बोरियाँ खाली की जातीं और स्मग्लर उन्हें अपने साथ ले जाते। इसके बाद जाकिर नगर की फैक्ट्री में बोरियों से हेरोइन अलग किया जाता था।
गिरफ़्तार किए गए आरोपितों में अफ़गानिस्तान से शिनवारी रहमत गुल और अख़्तर मोहम्मद शिनवारी है। भारतीय नागरिकों में बटला हाउस से वेकिल अहमद, फरीदाबाद का धीरज और दिल्ली के महारानी बाग का रईस खान शामिल है।
स्पेशल सेल के वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि ड्रग्स के गोरखधंधे से जुड़े लोगों की धर-पकड़ के लिए स्पेशल सेल की एक टीम काम कर रही थी। उन्होंने बताया कि हेरोइन फैक्ट्री से जुड़े 5 लोगों को हिरासत में लिया गया है, जिनमें 2 अफ़गानिस्तान मूल के हैं। आरोपितों के क़ब्जे से टोयटा, कैमी, होंडा सिविक, कोरोल जैसी लग्ज़री गाड़ियाँ भी बरामद की गई हैं।
महाराष्ट्र कॉन्ग्रेस की कार्यकारी अध्यक्ष यशमति ठाकुर शुक्रवार (19 जुलाई 2019) को सेंट जॉर्ज अस्पताल पहुँची, जहाँ उन्होंने अपनी दबंग छवि का खुला प्रदर्शन किया। दरअसल, वहाँ कॉन्ग्रेस विधायक श्रीमंत पाटिल का इलाज चल रहा है, उन्हीं से मिलने वो वहाँ पहुँची थी। इस दौरान वो वहाँ पुलिस से भिड़ गईं और उनसे काफ़ी कहासुनी हो गई।
इस घटना का एक वीडियो सामने आया है जिसमें वो काफ़ी तल्ख़ अंदाज़ में दिख रही हैं। इस वीडियो में वो पुलिस व डॉक्टर्स के साथ अपशब्द बोलती साफ़ नज़र आ रही हैं। अस्पताल की शांति को तार-तार करते हुए उन्होंने कई पुलिसकर्मियों के साथ ऊँची आवाज़ में बात तो की ही साथ वहाँ मौजूद महिला पुलिसकर्मियों को भी खरी-खोटी सुनाई। वायरल हुए इस वीडियो में महाराष्ट्र कॉन्ग्रेस की अध्यक्ष यशोमति ठाकुर एक सवाल करती दिख रही हैं कि अस्पताल में कॉर्डियक यूनिट नहीं है तो हृदय की बीमारी का इलाज कैसे किया जा रहा है?
#WATCH Mumbai:Altercation b/w Maharashtra Congress Working Pres Yashomati Thakur&police at St George’s Hospital where she tried to meet K’taka Congress MLA Shrimant Patil. She asks hospital admn ‘how’s he being treated for cardiac ailment when hospital doesn’t have cardiac unit? pic.twitter.com/qMCNRleRgM
यशोमति ठाकुर ने महिला पुलिसकर्मियों को लगभग लताड़ते हुए उन्हें छूने तक से मना कर दिया और कहा कि कोई उनसे बहस ना करे। माहौल बिगड़ता देख पुलिसकर्मियों ने जब उन्हें वहाँ से जाने के लिए कहा तो उन्होंने कहा, “नहीं जाऊँगी तो…।” यशोमती ने आरोप लगाते हुए यहाँ तक कह डाला, “वर्दी में आप लोग मदद कर रहे हो उन्हें पैसे खाने के लिए।”
ख़बर के अनुसार, कॉन्ग्रेस ने आरोप लगाया था कि उसके विधायक श्रीमंत पाटिल को गठबंधन सरकार गिराने की कोशिश के तहत अगवा कर लिया गया था। इस संदर्भ में बैंगलूरू पुलिस स्टेशन में शिक़ायत भी दर्ज कराई गई थी। कॉन्ग्रेस के अनुसार, पार्टी विधायकों के एक साथ रिजॉर्ट में होने के बाद श्रीमंत पाटिल अचानक ग़ायब हो गए थे। इसके बाद उनसे कोई सम्पर्क नहीं साध पाया था।
यह मामला उस वक़्त सामने आया जब विधानसभा में मुख्यमंत्री एचडी कुमारस्वामी के विश्वास प्रस्ताव पर चर्चा हो रही थी और वरिष्ठ नेता डीके शिवकुमार ने आरोप लगाते हुए बताया कि पाटिल को अगवा करके मुंबई के एक अस्पताल में भर्ती कराया गया है। इसके अलावा श्रीमंत पाटिल का एक फोटो भी सामने आया है जिसमें वो एक अस्पताल में लेटे और ईसीजी से जुड़ी जाँच कराते दिख रहे थे।
विधानसभा में इस मुद्दे को उठाते हुए शिवकुमार ने कहा, “मैं हाथ जोड़ कर अध्यक्ष से अपील करता हूँ कि मेरे पार्टी के विधायकों को अगवा किया गया है। मुझे परिजन का कॉल आया था। महोदय मैं चाहता हूँ कि आप उन्हें वापस लाएँ। हम पुलिस संरक्षण चाहते हैं।”
भू-माफिया घोषित किए गए सपा सांसद आजम खान ने फिर से विवादित बयान दिया है। उत्तर प्रदेश के रामपुर से सांसद आजम खान ने कहा है कि मुस्लिम देश के बँटवारे के वक्त पाकिस्तान न जाने की सजा भुगत रहे हैं। 1947 के बाद से ही मुस्लिम मॉब लिंचिंग का शिकार हो रहे हैं। अगर उस समय मुस्लिम पाकिस्तान चले गए होते तो उन्हें ये सजा नहीं मिलती। मुस्लिम यहाँ हैं, तो सजा तो भुगतेंगे ही।
Azam Khan,Rampur MP on mob lynching incidents:It’s the punishment Muslims are getting after 1947.Muslims will face it whatever may it be.Why didn’t our ancestors go to Pakistan?Ask this to Maulana Azad,Jawaharlal Nehru, Sardar Patel&Bapu.They had made promises to Muslims. (19.07) pic.twitter.com/RoRWpm8JqV
आजम खान का कहना है कि उनके पूर्वजों ने भारत को अपना वतन माना और अब उन्हें इसकी सजा भुगतनी पड़ रही है। उन्होंने कहा कि उनके पूर्वज पाकिस्तान क्यों नहींं गए, यह बात मौलाना आजाद, जवाहर लाल नेहरू, सरदार पटेल और बापू से पूछना चाहिए। उन्होंने मुस्लिमों से सुरक्षा का वादा किया था। आजम खान का कहना है कि मुस्लिम बँटवारे के हिस्सेदार नहीं थे, लेकिन फिर भी उन्हें बँटवारे की सजा मिल रही है।
गौरतलब है कि, उत्तर प्रदेश सरकार ने शुक्रवार (जुलाई 19, 2019) को आजम खान को भू-माफिया की लिस्ट में शामिल किया था। उन पर जमीन कब्जाने के करीब 23 मामले दर्ज हैं। जौहर विश्वविद्यालय के लिए किसानों की जमीन कब्जाने के आरोप में उन पर गिरफ्तारी की तलवार लटक रही है।
Ajay Pal Sharma,SP Rampur: Till date 23 FIRs have been registered against SP MP Azam Khan in connection with land encroachment. As per the complaints filed by farmers police officials used to threaten them &grab the land illegally.A team has been formed to investigate the matter. pic.twitter.com/IRWHu1aBU6
जिलाधिकारी आन्जनेय कुमार सिंह के मुताबिक भू-माफिया उन्हें घोषित किया जाता है जो दंबगई से जमीनों पर कब्जा करने के आदी हों, जो अवैध कब्जा छोड़ने के लिए तैयार न हों और जिनके नाम अवैध तरीके से जमीन हथियाने संबंधी मामले के मद्देनजर पुलिस केस में दर्ज हो। ऐसे लोगों का नाम उत्तर प्रदेश एंटी भू-माफिया पोर्टल पर दर्ज कराया जाता है और सरकार इनकी निगरानी करती है। भू-माफियाओं की पहचान इस पोर्टल की शुरुआत 2017 में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने की थी।
पंजाब के मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह ने मंत्री पद से नवजोत सिंह सिद्धू का इस्तीफा मंजूर कर लिया है। लेकिन, सिद्धू के पूर्व महकमे से महत्वपूर्ण फाइलें गायब होने की खबर सामने आई है। बताया जा रहा है कि इनमें से एक फाइल मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह से जुड़ी 1,144 करोड़ रुपए के लुधियाना सिटी सेंटर घोटाले से संबंधित है।
लोकल गवर्नमेंट डिपार्टमेंट से गायब हुई दूसरी फाइल लुधियाना में कृषि भूमि पर अनाधिकृत निर्माण से सम्बंधित है। वैसे, विजलेंस ब्यूरो पहले ही अमरिंदर सिंह, उनके बेटे रनिंदर सिंह व अन्य को लुधियाना सिंटी सेंटर घोटाले में क्लीन चिट दे चुकी है।
खबरों के अनुसार स्थानीय निकाय विभाग के नए मंत्री ब्रहम मोहिंद्रा ने गायब फाइलों के लिए विभागीय जांच का आदेश दिया है, जिसमें लुधियाना में लक्जरी अपार्टमेंट परियोजना को मंजूरी दिए जाने की भी फाइल है। मुख्यमंत्री ने भी मुख्य सचिव और विभागीय सेक्रेट्री से फाइलों का पता लगाने को कहा है।
गौरतलब है गायब हुई फाइलों में सबसे महत्तवपूर्ण फाइल सिटी सेंटर घोटाले की है। यह मामला अमरिंदर सिंह के पहले कार्यकाल से जुड़ा है। बादल सरकार ने इस मामले की विजिलेंस जाँच के आदेश दिए थे।
अमरिंदर सिंह के दोबारा सत्ता में आने के बाद विजिलेंस ने इसपर क्लोजर रिपोर्ट दे दी।
पंजाब की अमरिंदर सिंह सरकार से इस्तीफा दे चुके नवजोत सिंह सिद्धू के पूर्व विभाग से महत्वपूर्ण सरकारी फाइलें गायब हो चुकी हैं. https://t.co/bP5ifDa3J0
मीडिया खबरों की मानें तो इन फाइलों के गायब होने के बाद दो तरह की बहस छिड़ गई है कि क्या सिटी सेंटर घोटाले से संबंधित फाइल सचमुच नवजोत सिंह सिद्धू के पास है या उनके इस्तीफ़े की आड़ में उसे गायब कर दिया गया। लोगों का कहना है कि इस बहस का जवाब सिर्फ़ सिद्धू दे पाएँगे, लेकिन वे पिछले डेढ़ महीने से मीडिया से दूरी बनाए हुए हैं। उनसे कई बार संपर्क करने की कोशिश की गई, लेकिन मुमकिन नहीं हो पाया।
आपको बता दें नवजोत सिंह सिद्धू को 6 जून को लोकल सरकार व संस्कृति मामले के पोर्टफोलियों से हटा दिया गया था। कैबिनेट में फेरबदल करके उन्हें बिजली व नव एवं नवीकरणीय ऊर्जा स्रोत मंत्रालय दिया था। लेकिन, मतभेदों के चलते 14 जुलाई को सिद्धू ने मंत्रालय से इस्तीफ़ा दे दिया, जिसे मुख्यमंत्री ने अब स्वीकार किया है।
Punjab Chief Minister Captain Amarinder Singh accepts Navjot Singh Sidhu’s resignation as State Minister. CM has forwarded his resignation to Governor of Punjab Vijayender Pal Singh Badnore. pic.twitter.com/oOTWCLbgDm
उत्तर प्रदेश के सोनभद्र में जमीन विवाद में 10 लोगों की हत्या के मामले में सियासत गरम है। कॉन्ग्रेस महासचिव और पूर्वी उत्तर प्रदेश की प्रभारी प्रियंका गॉंधी चुनार गेस्ट हाउस में कार्यकर्ताओं के साथ धरने पर बैठी हैं। उन्होंने कहा है कि जब तक प्रशासन उन्हें पीड़ितों से मिलने की इजाजत नहीं देता वे यहीं डटी रहेंगी।
इधर, शनिवार को सोनभद्र जाने की कोशिश कर रहे टीएमसी सांसदों के प्रतिनिधिमंडल को पुलिस ने वाराणसी एयरपोर्ट पर ही रोक दिया। इससे नाराज सांसद डेरेक ओ ब्रायन, सुनील मंडल, अबीर रंजन बिस्वास और उमा सरेन एयरपोर्ट पर ही धरने पर बैठ गईं। घटना के बाद से ही सोनभद्र में धारा 144 लागू है।
Four-member Parliamentary delegation of Trinamool Congress (TMC) has been stopped by Varanasi police at Lal Bahadur Shastri International Airport in Babatpur, ahead of their visit to Sonbhadra where 10 people were killed in a land dispute incident on 17 July
Trinamool Congress (TMC) delegation sit on a dharna at Varanasi airport, after they were stopped by police at the airport. They were on their way to meet the victims of Sonbhadra’s firing case. pic.twitter.com/MS86BGTQDX
प्रियंका को शुक्रवार को जब सोनभद्र जाने से रोका गया तो वह सड़क पर ही बैठ गईं और जोर देने लगीं कि उन्हें आगे जाने की इजाजत दी जाए। इसके बाद वहां मौजूद अधिकारियों ने उन्हें हिरासत में ले लिया और उन्हें चुनार गेस्ट हाउस ले जाया गया। प्रशासन के आला अधिकारी उन्हें लगातार मनाने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन वह पीड़ित परिवारों से मिलने देने या फिर जेल भेजने की बात पर अड़ी हुईं हैं।
उन्होंने वारदात में मारे गए लोगों के परिजन को 25-25 लाख रुपये का मुआवजा और जमीन पर मालिकाना हक दिए जाने की भी मांग की।
Mirzapur: Congress General Secretary Priyanka Gandhi Vadra & party workers continue to sit on dharna at Chunar Guest House. She says, “It has been 24 hours. I am not going to leave until & unless I am allowed to meet the victims of Sonbhadra’s firing case.” pic.twitter.com/mXVDBxutma
सोनभद्र के घोरावल इलाके में बुधवार को जमीन पर कब्जे को लेकर ग्राम प्रधान और उसके लोगों ने गोंड आदिवासियों पर फायरिंग की थी। इस घटना में 10 लोगों की मौत हो गई थी जबकि 18 अन्य घायल हो गए थे।
उत्तर प्रदेश सरकार की ड्यूटी है अपराधियों को पकड़ना।
मेरा कर्तव्य है अपराध से पीड़ित लोगों के पक्ष में खड़े होना।
भाजपा अपराध रोकने में तो नाकामयाब है मगर मुझे मेरा कर्तव्य करने से रोक रही है।
मुझे पीड़ितों के समर्थन में खड़े होने से कोई रोक नहीं सकता।
कृपया अपराध रोकिए!
— Priyanka Gandhi Vadra (@priyankagandhi) July 19, 2019
हिरासत में लिए जाने के बाद प्रियंका गाँधी के तेवर और तेज हो गए। उन्होंने ट्विटर के माध्यम से बीजेपी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को निशाने पर लिया है। उन्होंने लिखा, “उत्तर प्रदेश सरकार की ड्यूटी है अपराधियों को पकड़ना। मेरा कर्तव्य है अपराध से पीड़ित लोगों के पक्ष में खड़े होना। भाजपा अपराध रोकने में तो नाकामयाब है, मगर मुझे मेरा कर्तव्य करने से रोक रही है। मुझे पीड़ितों के समर्थन में खड़े होने से कोई रोक नहीं सकता।”
मैंने न कोई क़ानून तोड़ा है न कोई अपराध किया है।बल्कि सुबह से मैंने स्पष्ट किया था कि प्रशासन चाहे तो मैं अकेली उनके साथ पीड़ित परिवारों से मिलने आदिवासियों के गाँव जाने को तैयार हूँ या प्रशासन जिस तरीके से भी मुझे उनसे मिलाना चाहता है मैं तैयार हूँ
— Priyanka Gandhi Vadra (@priyankagandhi) July 19, 2019
प्रियंका ने एक और ट्वीट करते हुए लिखा कि उन्होंने न तो कोई कानून तोड़ा है और न ही कोई अपराध किया है। उनका कहना है कि उन्होंने ये भी कहा था कि प्रशासन चाहे तो वो वो अकेली उनके साथ पीड़ितों के परिवार से मिलने के लिए आदिवासियों के गाँव जाने के लिए तैयार हैं। प्रियंका गाँधी ने कहा कि प्रशासन कह रहा है कि उन्हें 50,000 की जमानत देनी होगी,नहीं तो उन्हें 14 दिन के लिए जेल की सज़ा दी जाएगी, मगर वो उन्हें सोनभद्र नहीं जाने देंगे ऐसा उन्हें (पुलिसवालों को) ऊपर से ऑर्डर है।
The illegal arrest of Priyanka in Sonbhadra, UP, is disturbing. This arbitrary application of power, to prevent her from meeting families of the 10 Adivasi farmers brutally gunned down for refusing to vacate their own land, reveals the BJP Govt’s increasing insecurity in UP. pic.twitter.com/D1rty8KJVq
प्रियंका को पुलिस द्वारा रोके जाने का विरोध करते हुए राहुल गाँधी ने ट्वीट किया कि जब वो सोनभद्र जिले में हुए खूनी संघर्ष के पीड़ितों से मिलने जा रही थी, तो उन्हे गैरकानूनी रूप से गिरफ्तार किया गया। राहुल ने उत्तर प्रदेश की भाजपा सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि सत्ता का मनमाना इस्तेमाल उनकी बढ़ती असुरक्षा को उजागर करता है।
सोनभद्र हत्याकांड के पीड़ितों से मिलने जा रही कांग्रेस महासचिव श्रीमती @PriyankaGandhi की गिरफ्तारी अजय सिंह बिष्ट सरकार की तानाशाही का निकृष्टतम उदाहरण है। हम पीड़ितों को न्याय दिलाने के लिए दृढ संकल्पित हैं और भाजपा सरकार के इन ओछे हथकंडों से डरने वाले नहीं हैं।
कॉन्ग्रेस के आधिकारिक ट्विटर हैंडल से ट्वीट करते हुए लिखा गया कि सोनभद्र हत्याकांड के पीड़ितों से मिलने जा रही कॉन्ग्रेस महासचिव प्रियंका गाँधी की गिरफ्तारी अजय सिंह बिष्ट सरकार की तानाशाही का निकृष्टतम उदाहरण है।
ब्राजील में ‘मोटी’ महिलाओं के ख़िलाफ़ टिप्पणी करना एक पादरी को महंगा पड़ गया। यहाँ 50,000 से ज्यादा लोगों को उपदेश दे रहे पादरी की बात पसंद नहीं आने पर एक महिला ने उनको स्टेज से धक्का दे दिया।
जानकारी के मुताबिक ये घटना ब्राजील के साओ पाउलो में हुए धार्मिक समारोह के दौरान की है। जहाँ मशहूर पादरी मार्सेलो रॉसी ने उपदेश देते हुए मोटी महिलाओं पर विवादस्पद बयान दिया। दरअसल पादरी ने 50,000 लोगों की भीड़ में कहा, “मोटी महिलाओं को स्वर्ग नहीं मिलता।”
SEE IT: Woman in Brazil runs onstage and violently shoved famous priest during Mass in front of crowd of 50K
पादरी के इस बयान के बाद दर्शक दीर्घा में बैठी एक महिला को गुस्सा आ गया और वह मंच पर आ गई। सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल होते वीडियो में देखा जा सकता है कि 32 साल की ये महिला तेजी से पादरी की ओर दौड़ी और उन्हें जोर से धक्का मार दिया।
अचानक हुए इस हमले में धक्के के कारण पादरी मंच से नीचे गिर गए, लेकिन उन्हें ज्यादा चोटें नहीं आईं। मौक़े पर मौजूद मेडिकल स्टॉफ ने उनकी जाँच की और बाद में उन्होंने वापस स्टेज पर आकर अपना उपदेश दिया।
जानकारी के अनुसार महिला को उसकी हरकत के लिए गिरफ्तार कर लिया गया। लेकिन पादरी ने उस पर किसी तरह के आरोप नहीं लगाए। जिसके कारण उसे बाद में रिहा कर दिया गया। महिला की दोस्तों का कहना है कि वो मानसिक परेशानी से जूझ रही है।
कर्नाटक के हम्पी के करीब स्थित 16वीं सदी के संत व्यासराज स्वामी के वृंदावन का पुनर्निर्माण स्थानीय भक्तों और स्वयंसेवकों ने केवल 32 घंटे में कर दिया। संत व्यासराज विजयनगर के राजा कृष्णदेव राय के राजगुरु थे। वृंदावन में हाल ही में पवित्र स्थल पर बदमाशों ने तोड़फोड़ की थी। पुलिस ने इसके पीछे ‘खजाना खोजी’ बदमाशों का हाथ होने की आशंका जताई थी।
Reconstruction of Sri Vyasaraja Brundavana completed within just 32 hours. Sri Vyasaraja swamy stood even more tall this time. A clear message to those who are responsible for the damage. Hindus are not Sleeping. @ShefVaidya@AskAnshul@muglikar_@Tejasvi_Suryapic.twitter.com/mNd7jbJIou
नव-वृंदावन में गुरुवार (18 जुलाई, 2019) को आषाढ़ एकादशी के मौक़े पर अज्ञात बदमाशों ने तोड़फोड़ की थी। पवित्र स्थल की खुदाई और तोड़फोड़ से पहले बदमाशों ने कुछ कर्मकांड भी किया था।
ख़बर के अनुसार, पुनर्निर्माण के बाद माधव सम्प्रदाय के स्वामियों ने अनुष्ठान भी किए।
सोशल मीडिया यूजर्स ने बताया कि स्वयंसेवकों ने वृंदावन के पुनर्निमाण का काम करने के बाद जश्न भी मनाया। कई संतों और विद्वानों की देखरेख में विभिन्न स्थानों के 5000 से अधिक स्वयंसेवकों ने पुनर्निर्माण गतिविधि में हिस्सा लिया। साइट पर लगातार मंत्र जाप के बीच उन्होंने इस काम को अंजाम दिया।
Volunteers celebrating after Reconstructing the Vyasaraja Brundavana at Hampi.
दक्षिण बेंगलुरु के भाजपा सांसद तेजस्वी सूर्य ने शुक्रवार को इस मुद्दे को संसद में भी उठाया था। उन्होंने उपद्रवियों की तुरंत गिरफ्तारी की माँग की थी। इसके अलावा उन्होंने अतिरिक्त सुरक्षा उपायों जैसे सीसीटीवी कैमरे लगाने की भी सलाह दी थी।
वृंदावन हम्पी के पास अनेगुंडी में स्थित है, जो यूनेस्को की विश्व धरोहर स्थल है। नव वृन्दावन में माधव परंपरा के 9 संतों की समाधियाँ हैं। इस परंपरा के मानने वाले लोग ब्राह्मण हैं, जो तमिलनाडु और कर्नाटक से लेकर गोवा तक बसे हुए हैं।
हम्पी में इस तरह की यह पहली घटना नहीं हैं। इससे पहले फरवरी 2019 में, एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था जिसमें तीन लोगों को 14वीं शताब्दी के विष्णु मंदिर के खंभों को तोड़ते हुए दिखाई पड़े थे।
राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (एनआईए) ने तमिलनाडु समेत भारत के कई हिस्सों में आंतकी हमले की साजिश को नाकाम करते हुए 16 लोगों को हिरासत में लिया। इनमें से 14 की पहचान कर ली गई है। ये सभी लोग तमिलनाडु से हैं।
एनआईए के मुताबिक भारत में आतंकी हमले के लिए ये लोगों की भर्ती कर रहे थे। अपने समर्थकों को वीडियो और अन्य प्रोपेंगेंडा मटेरियल मुहैया करवाते थे। साथ ही हमले के लिए विस्फोटक, जहर, चाकू और गाड़ियों के इस्तेमाल की ट्रेनिंग दे रहे थे।
जानकारी के मुताबिक ये संदिग्ध वाहदत-ए-इस्लामी हिंद (तमिलनाडु का कट्टरपंथी संगठन) के सदस्य हैं। आतंकवादी संगठनों ISIS/दाएश, अल-कायदा और सिमी (स्टूडेंट्स इस्लामिक मूवमेंट ऑफ इंडिया) के प्रति झुकाव के कारण भारत के भीतर और बाहर हमले की साजिश रच रहे थे और आतंकवादी गिरोह ‘अंसारुल्ला’ का गठन करके भारत सरकार के खिलाफ युद्ध छेड़ने की तैयार कर रहे थे।
एनआईए द्वारा दी गई जानकारी के मुताबिक इस मामले में आईपीसी की धारा 12बी, 121ए और 122 के साथ गैरकानूनी गतिविधियों की धारा 17, 18, 18बी और 39 के तहत 9 जुलाई को मामला दर्ज किया गया है। एनआईए की मानें तो खुफिया जानकारी के आधार पर इस मामले में छापेमारी की गई थी। जिसमें उन्हें 15 सिमकार्ड, 7 मेमोरी कार्ड, 3 लैपटॉप, 5 हार्डडिस्क, 6 पेन ड्राइवर, 2 टैबलेट, 3 सीडी/डीवीडी, दस्तावेज, मैगजीन, बैनर, नोटिस, पोस्टर और पुस्तकें बरामद हुए थे। इस दौरान उन्होंने हसन अली और हरीश मोहम्मद नाम के दो लोगों को गिरफ्तार किया था।
दोनों ने पूरे नेटवर्क का खुलासा करते हुए बताया था कि इस्लामिक शासन स्थापित करने के मकसद से वे आतंकी हमले को अंजाम देने की फ़िराक में थे। इसके लिए उन्होंने पैसे की व्यवस्था और अन्य तैयारियाँ भी की थी।
गौरतलब है इस मामले में अन्य संदिग्धों को कुछ दिन पहले दुबई से भारत को सौंपा गया था। जिसके बाद इन्हें विशेष फ्लाइट से चेन्नई लाया गया और बाद में एनआईए की अदालत में पेश किया गया। कोर्ट ने इन्हें 25 जुलाई तक एजेंसी की हिरासत में भेजने का आदेश दिया।
दुबई से निकाले गए 14 लोगों की पहचान 58 वर्षीय मोहम्मद इब्राहिम,रफी अहमद (55), मोहिदीन सेनी शाहुल हमीद (59), उमर बरोक (48), मीरान गनी (33), गुलाम नबी असथ(37), मुंतशिर (39), फ़ारूक (26), मोहम्मद शेख मैथीन (40) , अहमद अजरुद्दीन (27), तौफीक अहमद (27), मोहम्मद इब्राहिम (36), मोहम्मद अफज़र (29), और फैज़ल शरीफ(44) के तौर पर की गई है।
राजस्थान के अलवर जिले में एक दलित युवक को इस कदर पीटा गया कि दिल्ली में इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। युवक का कसूर केवल इतना था कि उसके बाइक से एक मुस्लिम महिला को टक्कर लग गई थी।
मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक झिवाना गाँव निवासी हरीश जाटव मंगलवार (जुलाई 16, 2019) को अलवर जिले के चौपांकी थाना इलाके में फसला गाँव से गुजर रहा था। इसी दौरान उसकी बाइक से हकीमन नाम की महिला को टक्कर लग गई।
कथित तौर पर हादसे के बाद मौके पर मौजूद भीड़ ने हरीश की पिटाई शुरू कर दी। गंभीर हालत में उसे स्थानीय अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहाँ से उसे दिल्ली रेफर कर दिया गया। सफदरजंग अस्पताल में इलाज के दौरान उसने दम तोड़ दिया। पोस्टमॉर्टम के बाद शुक्रवार (जुलाई 19, 2019) को शव परिवार वालों को सौंपा गया।
टाइम्स ऑफ इंडिया की खबर के अनुसार घटना की सूचना मिलने पर पुलिस जब भिवाड़ी चोपांकी रोड पहुँची तो हकीमन और हरीश सड़क पर पड़े मिले। हकीमन को उसके घरवाले अस्पताल लेकर गए, जबकि हरीश को पुलिस ने हॉस्पिटल पहुँचाया। साथ ही उसके घरवालों को भी इस घटना की खबर दी। पुलिस ने बताया कि हरीश ट्रक ड्राइवर था। परिवार में उसकी पत्नी और चार बेटियों के अलावा पिता हैं जो देखने में समर्थ नहीं हैं।
हरीश की मौत के बाद उसके गाँव के भिवाड़ी सर्किल में पुलिस अलर्ट पर है। दोनों पक्षों की तरफ़ से गुरुवार (जुलाई 18, 2019) को बाइक से टक्कर और युवक की पिटाई को लेकर मामला दर्ज करवाया गया।
जाटव के परिजनों का कहना है कि उमर शेर नाम के शख्स ने हरीश को मार-मार के अधमरा कर दिया। आईपीसी की धारा 323, 343 और एससी/एसटी के तहत मामला दर्ज कर लिया गया है। वहीं, हकीमन के पति जमालुद्दीन ने भी आईपीसी धारा 279 के तहत एफआईआर करवाई है। उसने आरोप लगाया है कि बाइक चलाते वक़्त हरीश शराब के नशे में था। पुलिस ने बताया कि मामले की जाँच की जा रही है। कुछ रिपोर्टों में हरीश को मॉब लिंचिंग का शिकार बताया गया है, जिससे पुलिस ने इनकार किया है।