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‘बड़े का गोश (गोश्त) खाओ, कलेजी खाओ… गरमी-गरम चीजें खाएँगे तो फिर ज्यादा बच्चे तो…’

अभिनेता अजाज़ खान ने यूट्यूब पर वीडियो जारी कर अभिनेत्री पायल रोहतगी पर हमला बोला है। ‘हिन्दू राष्ट्रवादी’ अभिनेत्री के तौर पर चर्चित पायल रोहतगी को सम्बोधित करते हुए इस वीडियो में उन्होंने पायल को नसीहत दी कि वह ‘औरतों जैसी’ ही बातें करें। उन्होंने साथ ही यह भी धमकी दी कि इंशाल्लाह एक दिन ‘ज़ुल्म सहता मुस्लिम’ जब ‘फटेगा’ तो पूरी दुनिया अल्लाह को मानने लगेगी।

शुरू में पायल निशाने पर, बाद में गियर बदला

शुरू में अजाज़ केवल पायल रोहतगी को निशाने पर लेकर चल रहे थे। उन्होंने दावा किया कि अपने दोस्त और पहलवान संग्राम सिंह की पत्नी होने के नाते वह पायल की बहुत इज़्ज़त करते थे और उन्होंने वॉइस नोट भेजकर पायल को कई बार यह समझाने की कोशिश की कि वह (पायल) समुदाय विशेष के खिलाफ बोलना छोड़ दें। लेकिन चूँकि पायल रोहतगी की गतिविधियों पर कोई अंतर नहीं पड़ा है, इसलिए अब वह पायल को भाभी नहीं बोलेंगे।

https://www.youtube.com/watch?v=ZlufqVJcF7U

उन्होंने पायल रोहतगी को ‘सी-ग्रेड की एक मानी हुई एक्ट्रेस’ कहा। वह इस बात से भी खासे नाराज़ दिखे कि पायल रोहतगी ने शबाना आज़मी को ‘वेश्या’ कहा। हालाँकि सच्चाई यह है कि पायल रोहतगी ने खुद शबाना आज़मी को ‘वेश्या’ नहीं कहा था बल्कि दावा किया था कि जब शबाना आज़मी के मज़हब के ही एक कट्टरपंथी मौलवी ने उन्हें (शबाना को) यह अपशब्द कहा था। पायल रोहतगी ने इसी वाकये को याद दिलाकर शबाना आज़मी को पहले इस्लामी समाज में सुधार करने की नसीहत दी थी।

इसके बाद अजाज़ ने इस पर भी सवाल उठाए कि आखिर एक औरत होकर पायल रोहतगी अयोध्या के रामजन्मभूमि स्थल पर राम मंदिर बनाने की बात कैसे कर सकती हैं। उन्होंने यह भी कहा कि अब “मोदी प्रधानमंत्री बन गया, बन गया… अब क्या ज़रूरत है ये सब (राम मंदिर?) करने की?” उन्होंने रोहतगी को “औरतों जैसी बात (??)” करने की भी नसीहत दी।

उन्होंने पायल रोहतगी से यह भी कहा, “मैं जानता हूँ आप अहमदाबाद से हैं, और आपके काफी ‘अच्छे-अच्छे’ मुस्लिम लड़के ‘दोस्त’ भी रहे हैं। उन्होंने कुरान का ज़िक्र कर ये भी कहा कि कुरान के अनुसार “इंशाल्लाह” पूरी दुनिया मुस्लिम हो जाएगी। उन्होंने धमकी दी कि जिस दिन ‘ज़ुल्म सहता’ मुस्लिम ‘ज्वालामुखी की तरह फटेगा’ उस दिन पूरी दुनिया कलमा पढ़ेगी।

‘अजाज़ सलमान की सस्ती कॉपी’

पायल रोहतगी ने भी यूट्यूब पर ही एक वीडियो जारी कर अजाज़ पर पलटवार किया है। उन्होंने कटाक्ष किया कि खुद को सलमान खान समझने वाले अजाज़ खुद उनकी (पायल की) फिल्म में साइड-रोल कर चुके हैं, और सलमान खान की सस्ती कॉपी हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि अजाज़ ड्रग्स और महिलाओं से दुर्व्यवहार (मोलेस्टेशन) के मामलों में गिरफ्तार हो चुके हैं, और अजाज़ को ‘फ्रस्ट्रेटेड इंडियन मुस्लिम’ कहा।

पायल ने अजाज़ को चेतावनी दी कि शबाना आज़मी मामले में पायल अपनी बात को गलत तरीके से पेश करने के लिए, misquote करने के लिए अजाज़ के खिलाफ पुलिस में भी जाने का अधिकार रखती हैं। उन्होंने यह भी कहा कि वह उन भारतीय मुस्लिमों से प्यार करती हैं, जो भारत से प्यार करते हैं। उन्होंने अजाज़ खान को ‘जिहादी’ भी कहा, और चेतावनी दी कि अगर अजाज़ ने उन्हें (पायल को) एक बार और misquote किया तो वह उनके खिलाफ पुलिस में जाएँगी।

‘तबरेज के बदले’ पर हसनैन का नफरत फैलाने वाला TikTok वीडियो, Zee Music ने कर दी छुट्टी

टिकटॉक ऐप इन दिनों युवाओं में सबसे पॉपुलर ऐप है। लेकिन आज इस ऐप का प्रयोग घृणा, नफ़रत और यहाँ तक की कुछ बिगड़े युवा माहौल बिगाड़ने और भड़काने के लिए भी कर रहे हैं। वैसे आमतौर पर शहर से लेकर गाँव कस्बों तक फिल्मी डायलॉग्स और गानों के जरिए अपनी कला का प्रदर्शन इस प्लैटफॉर्म का उद्देश्य रहा है। और अधिकांश ने इसका इसी कार्य में उपयोग भी किया है, लेकिन, कुछ लोगों ने इसके जरिए अपनी ओछी मानसिकता का भी प्रमाण दिया है। मामला क्या है इसकी चर्चा आगे है।

हाल ही में इस प्लैटफॉर्म पर एक वीडियो डाली गई, जिसमें कुछ लड़कों ने तबरेज की मौत के बदले वाले संदेश को जस्टिफाई करने की कोशिश की। इस वीडियो में हसनैन खान नाम का लड़का अपने अन्य चार दोस्तों के साथ मिलकर धमकी भरे शब्दों में ज़हर उगल रहा है, “मार तो दिया तुमने उस बेकसूर तबरेज अंसारी को… लेकिन जब कल उसकी औलाद बदला ले…तो ये मत कहना हर मुस्लिम आतंकवादी होता है।”

हसनैन के अकॉउंट पर डाली गई यह टिकटॉक वीडियो सोशल मीडिया पर खूब वायरल हुई, जिसके बाद हसनैन को ट्रॉल किया जाने लगा। हालाँकि, हसनैन ने अब अपने अकाउंट से इस वीडियो को डिलीट कर दिया है, लेकिन फिर भी कुछ अन्य टिकटॉक यूजर्स ऐसे वीडियो बनाते दिख रहे हैं। जिसमें एक नाम मिस्टर फैजू नाम के टिकटॉक ‘सेलिब्रिटी’ का भी है।

हसनैन द्वारा बनाई गई ऐसी वीडियो के बाद सोशल मीडिया पर कुछ लोगों ने इस पर मुंबई पुलिस और जी म्यूजिक कंपनी का ध्यान केंद्रित करने की कोशिश की और वे उसमें सफल भी हुए।

दरअसल, हसनैन द्वारा बनाई गई इस वीडियो में फैजू भी था, जिसने जी म्यूजिक कंपनी के साथ मिलकर एक पंजाबी एल्बम ‘तेरे बिन किवे’ की थी। जिसके कारण लोग जी म्यूजिक कंपनी को भी सवालों के घेरे में ले रहे थे। हसनैन के टिकटॉक वीडियो का मालूम चलते ही कंपनी ने अपने प्लैटफॉर्म से उसका म्यूजिक वीडियो हटा दिया और उस यूजर को बाकायदा शुक्रिया कहा जिसने उन्हें टैग करके इसपर ध्यान केंद्रित करवाया था। जी म्यूजिक ने अपने ट्वीट में स्पष्ट किया है कि अब ये लोग जी म्यूजिक के को-आर्टिस्ट नहीं हैं।

हसनैन के टिकटॉक पर 12.6 मीलियन फॉलोवर्स हैं और उसकी वीडियो को एक दिन में मीलियन लोगों द्वारा देखा जाता है। इसी तरह फैजू नाम के यूजर के टिकटॉक पर 24.1 मिलियन यूजर हैं, जिसके कारण वह टिकटॉक सेलेब्रिटी माना जाता है। ऐसे में इन लोगों की इस तरह के वीडियो को हल्के में लेना बहुत गलत है। क्योंकि मिलियन की तादाद में फॉलोवर बनाकर ये लोग ‘बदले’ जैसे संदेश को एक ब्रॉड प्लैटफॉर्म पर वायरल कर रहे हैं, बिना ये सोचे, कि इसका असर टिकटॉक के लिए पागल युवाओं की मानसिकता पर क्या पड़ेगा?

मंदिर पर हमला, शिवलिंग पर पेशाब, मूर्तियों को तोड़ना, पत्थरबाजी: ये ‘डरे हुए लोग’ चाहते क्या हैं?

कुछ घटनाएँ जो बीते दिनों में हुई हैं वो हमें इस्लामी आक्रांताओं के उस दौर को याद दिलाती हैं जब लुटेरों, बलात्कारियों और आतंकियों की एक भीड़ सीमा लाँघते आती थी, मंदिरों को तोड़ती थी, मूर्तियों को तहस-नहस करती थी, पुस्तकालयों में आग लगाती थी, तलवार की नोक पर मज़हब की शपथ दिला कर इस्लाम कबूल करवाती थी, और अपने आतंक की छाप छोड़ कर चली जाती थी।

दौर बदल चुका है लेकिन कुछ लोगों में वही आतंकी प्रवृत्ति अभी भी है। आज भी कश्मीर से लेकर सूरत तक इस्लामी भीड़ पत्थरबाजी करती है। लगातार, एक के बाद एक जगहों से मंदिरों के तोड़ने की ख़बरें आ रही हैं। हाल ही में बुलंदशहर में शिवलिंग पर एक कट्टरपंथी ने पेशाब कर दिया। उससे पहले दिल्ली में दुर्गा मंदिर में न सिर्फ़ मंदिर पर पत्थरबाजी हुई, बल्कि मूर्तियाँ विखंडित की गईं, और वहाँ भी मंदिर में पेशाब करने की ख़बर आई। साथ ही, सिर्फ़ जून के महीने में कम से कम दस जगहों पर मंदिरों पर हमले की घटनाएँ सामने आई हैं।

तीन जून को हरियाणा के खड़ा गाँव वीर बहादुर सिंह वैरागी की मूर्ति तोड़ दी गई और किशोरदास मंदिर पर हमला किया गया। बिजनौर के सबदलपुर गाँव में पहले चामुण्डा देवी मंदिर में उत्पात की घटना सामने आई, उसके कुछ घंटों बाद पीपलसना गाँव के शिव मंदिर की मूर्तियाँ विखंडित की गईं। पुलिस अपराधियों की तलाश में है। हरियाणा के मित्रोल गाँव के तुलसी कुंडम मंदिर में हनुमान जी और गणेश जी की मूर्तियों पर अज्ञात लोगों ने पत्थर फेंके। ये घटना एक और दो जून के बीच की रात की है।

राजस्थान के दौसा ज़िले में बिनावाला गाँव के स्थानीय मंदिर के भगवान हनुमान और महादेव की मूर्तियों पर हमले की घटना ख़बरों में आई। उत्तर प्रदेश के खतोली गाँव में इसी महीने मूसा नाम के एक दुसरे समुदाय के नवयुवक ने भगवान हनुमान की मूर्ति तोड़ने की कोशिश की लेकिन वो उसके आगे लगे शीशे को तोड़ने के बाद पकड़ लिया गया। उसने वहाँ पूजा कर रहे लोगों को गालियाँ भी दी।

जून के पहले सप्ताह में पीलीभीत के रोहन्या गाँव में इस्लामी भीड़ ने मंदिर में लाउडस्पीकर के बजने को लेकर तोड़-फोड़ की। इन लोगों ने न सिर्फ़ लाउडस्पीकर तोड़ा, बल्कि मंदिर की मूर्तियाँ तक साथ लेकर चले गए। जून के आखिरी सप्ताह में, मेरठ के घसौली गाँव में एक दलित को इस्लामी भीड़ ने इसलिए पीट दिया क्योंकि उसने मंदिर पर लाउडस्पीकर लगाए, जो कि मस्जिद से थोड़ी ही दूरी पर था। इसके बाद इस भीड़ ने मंदिर पर हमला किया, पत्थरबाजी की और धारदार हथियारों का भी इस्तेमाल किया जिससे आधा दर्जन हिन्दू घायल हुए।

जून के दूसरे सप्ताह में तमिलनाडु के त्रिचि पुलिस द्वारा मुजीबुर रहमान को तंजावुर के बृहदेश्वर मंदिर में देवी की हज़ार साल पुरानी मूर्तियों के साथ अश्लील तस्वीरें लगाने के लिए गिरफ्तार किया। हाल ही में इसी राज्य के तिरुवरुर ज़िले के पेरियानायकी अम्मन मंदिर की 25 मूर्तियों को तोड़ दिया गया। पुलिस ने पाँच नाबालिगों को गिरफ्तार किया है।

गत सप्ताह, इरशाद ने बुलंदशहर के जहांगीराबाद इलाके के महादेव मंदिर में स्थापित शिवलिंग पर पेशाब कर दिया। दिल्ली के हौज़ क़ाज़ी में दुर्गा मंदिर में क्या हुआ ये सबको पता ही है कि कैसे ‘हिन्दुओं ने एक युवक को ‘जय श्री राम’ न कहने पर मार डाला’ कह कर भीड़ जुटाई गई और मंदिर पर धावा बोल दिया। तरीका, वही फेवरेट- पत्थरबाजी, नारा-ए-तदबीर और भीड़ द्वारा मंदिर में घुस कर मूर्तियों को तोड़ देना। मतलब, इन्हें जब बहाना भी नहीं मिलता तो, ये ख़ुद ही अफ़वाह फैला कर बहाना पैदा कर लेते हैं।

बात सिर्फ़ भारत की ही नहीं है, इंग्लैंड में भी गत माह की 10 और 19 तारीख को वालसॉल के फोर्ड स्ट्रीट में गुजरातियों के कल्चरल सेंटर और ‘श्री राम मंदिर’ के बाहर एक अपराधी ने तीन मूर्तियाँ तोड़ दी। वहाँ की मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार तीन महीने में यह तीसरी ऐसी घटना है और हिन्दुओं का कहना है कि चूँकि वो प्रशासन से अपनी बात हो-हल्ला करते हुए नहीं कहते, उसका फ़ायदा उठाया जा रहा है।

ये बस पिछले चालीस दिनों की कुछ घटनाएँ आपके सामने हैं जिनमें से कई मामले में समुदाय विशेष के नाम वालों की करतूतें हैं, और बाकियों में ये लोग अज्ञात हैं जिसकी तलाश पुलिस कर रही है। आप इन सभी में एक पैटर्न देख सकते हैं कि ये लोग मूर्तियाँ तोड़ते हैं, पत्थरबाजी करते हैं, और भीड़ का रूप लेकर मंदिरों में पूजा करने वालों को डराते हैं।

हाल ही में देहरादून में एक घटना के विरोध में कुछ हिन्दू संगठनों ने विरोध प्रदर्शन हेतु, अनुमति के साथ, रैली निकाली तो उस रैली पर आरी, पेंचकस, चाकुओं और डंडों से इनामुल्ला बिल्डिंग में मौजूद इस्लामी भीड़ द्वारा हमला किया गया। इसी के उलट, गुजरात के सूरत में झारखंड के कथित तौर पर चोर कहे जा रहे तबरेज़ की कथित भीड़ हत्या पर प्रशासनिक अनुमति न मिलने के बावजूद, इस्लामी भीड़ नमाज़ के बाद मस्जिद से निकलती है, और नारेबाजी करते हुए अराजकता फैलाती है। पुलिस जब उन्हें रोकना चाहती है तो क्या होता है? वही पुराना पैटर्न- पत्थरबाजी। पुलिस पर हमला किया जाता है, पाँच पुलिसकर्मी घायल होते हैं, उनकी गाड़ियों को ‘शांतिप्रिय’ भीड़ आग के हवाले कर देती है।

ये सब तो वो मामले हैं जिनके बारे में रिपोर्ट बनी हैं। वरना, ऐसे कई मामले होते हैं जब इस तरह की बात होती है और स्थानीय पुलिस दोनों समुदायों को बिठा कर समझा देती है। किसको कितना समझ में आता है, वो बात और है, लेकिन मुद्दा तो यह है कि दिन में पाँच बार लाउडस्पीकर से अजान देने वालों को मंदिर में दो बार भजन बजाने से आपत्ति कैसे हो जाती है? ये किस तरह की सोच है कि तुम्हारे लाउडस्पीकर से आती आवाज़ इलाके का हर कान, चाहे या न चाहे सुनेगा ही, लेकिन दूसरे समुदाय ने भजन बजाया तो तुम मंदिर में घुस कर मूर्ति उखाड़ कर ले जाते हो!

मूर्तिभंजक तो इस्लामी लुटेरे शुरू से रहे हैं। लेकिन जब हज़ार सालों में लूटपाट छोड़ने के बाद, सभ्य समाज में रहते हुए, जिन्हें हर जगह के बहुसंख्यक ने बसने दिया, इनकी भीड़ दोबारा उसी बर्बर मोड में क्यों जाना चाहती है? आज के दौर में पत्थरबाजी और आगजनी कर के ये भीड़ क्या साबित करना चाहती है? नमाज पढ़ने के बाद कुछ जगहों के शांतिप्रिय हाथ में पत्थर लिए क्यों घूमते हैं? और ये जो ‘वो अच्छे मुस्लिम नहीं हैं’ वाला भद्दा मजाक इनके मज़हबी नुमाइंदे करते हैं, वो कब तक ऐसी वाहियात लाइन बोल कर इन आतंकी वारदातों को इग्नोर करते रहेंगे?

ये सब बहुत क्यूट लगता है जब आप एक कथित चोर, जिसका बाप भी चोर था, उसकी भीड़ द्वारा की गई पिटाई और कुछ दिन के बाद हुई मौत पर जुलूस निकालते हुए एक पाँच साल के बच्चे के हाथ में बैनर थमा देते हैं जिस पर खराब हिन्दी में यह लिखा होता है कि ‘हम मोहब्बत से कलमा पढ़ा कर गले लगा लेते हैं, और तुम ज़बरदस्ती जय श्री राम कहला कर क़त्ल कर देते हो। क्या यही है हिन्दू धर्म? स्टॉप भगवा टेरर।’

इस बच्चे को पता भी नहीं कि इसे कट्टर बनाने की तैयारी हो चुकी है

अरे भाई, पहली बात तो ये है कि हमें नहीं पढ़ना तुम्हारा मोहब्बत वाला कलमा। वो अपने पास रखो, आपस में पढ़ो ताकि तुम्हें और तुम्हारे पूरे समुदाय को मोहब्बत शब्द का अर्थ समझ में आए और यह भी कि गले मिल कर प्रेम से रहने का सही अर्थ यह नहीं कि भीड़ बना कर मंदिरों पर हमला करो। दूसरी बात, एक अपराध का सामान्यीकरण करना बंद करो वरना हर ऐसे तबरेज़ पर दस हिन्दू नाम गिना दिए जाएँगे। तुम्हारी आतंकी बमबारी से पूरी दुनिया और मज़हबी उन्माद से पूरा बंगाल दहल रहा है।

तुम ऐसे छोटे बच्चों का इस्तेमाल करना बंद करो। क्या सिखा रहे हो उसे? वो मानने लगे कि ‘भगवा आतंक’ है। फिर तो उसे यह भी बताते होगे कि ये जो मंदिरों पर उसके भाई-बापों की भीड़ हमला करती है वो इस्लामी आतंक है। फिर तो तुम उसके हाथ में यह बैनर भी देते होगे जहाँ वो यह समझ सके कि ‘जय श्री राम’ कह कर किसी को पीटने और ‘अल्लाहु अकबर’ चिल्लाते हुए सैकड़ों की जान ले लेने में बहुत ज्यादा अंतर है। अगर भगवा वाला ही तुम्हारे लिए आंतक है, तो उस बच्चे को इस्लामी आतंक समझाने के लिए तो नए शब्द बनाने पड़ेंगे! कम से कम बच्चों को तो अपने फ़रेब और अजेंडे से दूर रखो।

जब बात नैरेटिव बनाने की ही है, जहाँ ‘हिन्दू टेरर’ के नाम पर एक चुनाव लड़ा गया, असहिष्णुता के डिबेट से दूसरा, ‘डरा हुआ मुस्लिम‘ से तीसरा, वहीं अब सारे नुस्खे असफल होने पर ‘जय श्री राम’ के उद्घोष को ऐसे रिपोर्ट किया जा रहा है जैसे लोग बाजारों में बम बाँध कर ‘अल्लाहु अकबर’ की जगह यही बोल कर फट रहे हैं।

आप गौर से देखिए कि किस तरह के पैरेलल बनाए जा रहे हैं। पूरी दुनिया इस्लामी आतंक से परेशान है, और कॉन्ग्रेस तथा वामियों के कामपंथी तंत्र ने क्या टर्म बनाया! भगवा आतंक। इससे पहले इस्लामी आतंक, आतंक का कोई मज़हब नहीं होता और हर कट्टरपंथी द्वारा किया दंगा, हत्या, मारपीट, आगजनी ‘समुदाय विशेष’ के नाम पर छुपाया जाता रहा। असहिष्णुता यह है कि तुम जानबूझकर गाय काटते हो, जबकि वो ग़ैरक़ानूनी है, असंवैधानिक है और हिन्दुओं की पूज्या है। ये भड़काने के लिए काटी जाती है।

लेकिन, जब गौतस्करों को कुछ लोग रोकते हैं, तो उसे असहिष्णु कहा जाता है। हाँ, इसमें हत्याएँ भी हुई हैं लेकिन हत्या तो उन पुलिस वालों की भी हुई हैं जिन पर ये गौतस्कर ट्रक चढ़ा कर भाग निकले। उन पुलिस वालों की जान का क्या? लेकिन असहिष्णु कौन है! हिन्दू! दुर्गा विसर्जन से लेकर रामनवमी के जुलूसों पर पत्थरबाजी कौन करता है? तिरंगा यात्रा के जुलूस पर कासगंज के चंदन को गोली कौन मारता है? जी, यही है वो डरा हुआ ‘शांतिप्रिय’ जिसके हाथ डर से इतने जोर से काँपते हैं कि वो कहीं बम, कहीं पत्थर, कहीं गोली, कहीं रॉड चला बैठता है। क्योंकि वो बहुत डरा हुआ है।

फिर नया पैरेलल गढ़ा जा रहा है ‘जय श्री राम’ का। इसे वही स्पिन दिया जा रहा है, जो इस्लामी आतंकी आईसिस से लेकर भारत की कई गलियों, चौराहों पर ‘नारा-ए-तदबीर’ के बाद गुनगुनाते हुए कभी बम तो कभी पत्थर फेंकते हैं। ‘जय श्री राम’ बुलवा कर अभी तक सिर्फ़ पीटने की ख़बरें आई हैं, जो कि अक्षम्य है, ग़लत हैं, ग़ैरक़ानूनी हैं। तबरेज़ भले ही चोर रहा हो, लेकिन किसी भीड़ को न तो उसे पीटने की ज़रूरत है, न ही ‘जय श्री राम’ कहलवाने की।

लेकिन, इसे इतना तूल देना कि ऐसा लगे कि हर हिन्दू, हर ‘शांतिप्रिय’ को राह चलते पीट रहा है, और उससे जबरन ‘जय श्री राम’ बुलवा रहा है, ग़लत है और ग़ैरज़रूरी भी। हमें इन घटनाओं पर उसी तरह से पुलिस पर विश्वास दिखाना चाहिए जैसे हम ‘नारा-ए-तदबीर’ कह कर दुर्गा मंदिर पर हमला करती भीड़ पर दिखाने को कहते हैं। जबकि दोनों में एक और लाख का फ़र्क़ है, फिर भी हिन्दुओं ने इतनी सहिष्णुता हमेशा दिखाई है।

यही कारण है लोग पक चुके हैं मीडिया की दोगली रिपोर्टिंग से। बुद्धिजीवियों को उनके वाल पर, टाइमलाइन पर और कमेंट पर गालियाँ पड़ रही हैं क्योंकि सोशल मीडिया के दौर में हर गाँव के टूटते मंदिर की वीडियो नाम-पते के साथ सेकेंडों में उपलब्ध हो जाती है। सूचना पर नियंत्रण, मीडिया का गेटकीपर अब अप्रासंगिक हो चुका है क्योंकि समय अब ड्रोनों का है। अब सूचना का एडिटर की आइडियोलॉजी या संस्थान के मुखिया के राजनैतिक झुकाव से कोई लेना-देना नहीं है, वो कहीं से भी अपने कच्चे स्वरूप में, बिना किसी ट्रीटमेंट के टपक जाती है।

इससे मुखौटे उतर रहे हैं। आप ध्यान दीजिए तो अब आपको वो अपराध भी दिखेंगे जो आप कभी सुनते ही नहीं थे। आपको वो शब्द सुनाई देंगे जिनके पर्याय के रूप में समुदाय विशेष कह कर उनकी विशेषताओं को हमेशा यही गेटकीपर और एडिटर छुपा लिया करता था। इनकी दबंगई, दंगाई प्रवृत्ति और घृणाजन्य अपराधों की रेल निकल रही है। ये डरे हुए तो बिलकुल नहीं हैं। ये मिनटों में अपनी दंगाई भीड़ जुटाने की क्षमता, अपने प्रागैतिहासिक काल के हथियारों और टिकटॉक से लेकर मीडिया स्टूडियो, अकादमिक संस्थानों और सत्ता के गलियारों में बैठे वैचारिक आतंकियों की शह पर विश्वास रखते हैं।

लेकिन, ये बंद होना चाहिए और ये बंद होगा। भारत ने अपनी अस्मिता, क्षेत्र, संसाधन, धन और संस्कृति तक पर वृहद स्तर के हमले झेले हैं। इन महलों का स्वरूप बदलता है लेकिन रेसिपी वही है। छोटे स्तर पर भीड़ जुटा कर, मूर्ति तोड़ कर, पत्थरबाजी करके पायलट प्रोजेक्ट किया जाता है ताकि देखा जाए कि हिन्दू कितना सोया है, कितना जगा हुआ है। छोटी मूर्ति टूटने पर अगर हिन्दू नहीं बोलता, विसर्जन के जुलूस पर ईंट फेंके जाने पर वो नहीं बोलता, रामनवमी के जुलूस पर चप्पल फेंके जाने पर वह नहीं बोलता तो, यह भीड़ एक क़दम और आगे बढ़ाती है।

तब यह भीड़ बड़े मंदिर तोड़ती है, तब यह भीड़ बड़े स्तर पर दंगे करती है, तब यह भीड़ शिवलिंग पर पेशाब कर देती है। इस भीड़ को पायलट प्रोजेक्ट के ही स्तर पर रोकना जरूरी है वरना गाय छोड़ कर मंदिरों को लूटने वाले तो इस देश ने बहुत देखे हैं।

चीखते रहे दरोगा लेकिन कार से 5Km तक घसीटता रहा युसूफ, ATM ठगी रैकेट का है सदस्य

अलीगढ़ में क़ानून व्यवस्था को धता बताते हुए एक कार चालक ने दरोगा को ही घसीट डाला। इस दौरान दरोगा की जान पर भी ख़तरा आ गया। दरअसल, टप्पल थाना के दरोगा एटीएम से रुपए चुराने वाले बदमाशों को पकड़ने निकले थे। इस दौरान थाने के सामने ही गुंडों ने उनके ऊपर गाड़ी चढ़ाने का प्रयास किया। दरोगा किसी तरह बचते हुए कार से लटक गए, जिसके बाद बदमाश उन्हें चलती कार में पूरे 5 किलोमीटर तक घसीटते चले गए। बाद में एक पशु के कार के सामने आने के बाद कार धीमी हुई, तब दरोगा किसी तरह कार से उतरने में कामयाब हुए।

इस दौरान पुलिस भी उक्त गाड़ी का पीछा करती रही और जैसे ही दरोगा कार से छूटने में सफल हुए, पुलिस ने बदमाश को धर दबोचा। हालाँकि, पुलिस की घेराबंदी के बावजूद चालक का साथी भागने में सफल हो गया लेकिन चालक युसूफ को गिरफ़्तार कर लिया गया। नूरपुर निवासी युसूफ के पिता का नाम नजीब है। पुलिस अन्य बदमाशों की अभी तलाश कर रही है। यह घटना रविवार (जुलाई 7, 2019) की है, जब दरोगा जितेंद्र सिंह तेवतिया एटीएम से रुपए उड़ाने वाले बदमाशों के आने की सूचना मिलने के बाद उनकी तलाश में निकले थे।

इस दौरान उन्होंने सामने से आ रही रिटीज़ कार को रोकने का प्रयास किया, लेकिन बेख़ौफ़ कार चालक ने भागने की कोशिश में दरोगा के ऊपर ही कार चढ़ाने का प्रयास किया। इसके बाद दरोगा ने किसी तरह ख़ुद को संभाला और कार का बोनट पकड़ कर लटकने में कामयाब रहे। इस घटना को देख तलाशी ले रहे अन्य पुलिसकर्मियों ने भी उक्त कार का पीछा किया।

इसके बाद पुलिस ने घेराबंदी कर चालक युसूफ को दबोचा और कार को जब्त कर लिया। चालक के ख़िलाफ़ जानलेवा हमला करने का मामला दर्ज किया गया है। उससे पुलिस पूछताछ कर रही है। जब ये सब चल रहा था, तब क्षेत्र में दरोगा के अपहरण की अफवाह उड़ गई, जिसके बाद अधिकारियों तक के होश उड़ गए। हालाँकि, दरोगा के लौटने और चालक के दबोचे जाने के बाद प्रशासन ने चैन की साँस ली। आरोपित युसूफ एटीएम से रुपए उड़ाने वाले गिरोह का सदस्य निकला। वह भोले-भाले लोगों को अपना शिकार बनाता था।

युसूफ के ख़िलाफ़ आगरा के थाने में भी मामला दर्ज है और उसके आपराधिक इतिहास की छानबीन की जा रही है। दरोगा जितेंद्र की इलाक़े में तारीफ हो रही है क्योंकि कार के मिट्टी के टीले में जा घुसने के बाद वह दूर जा गिरे थे लेकिन इसके बावजूद उन्होंने बदमाश को पकड़ने में कामयाबी पाई।

1 लाख लोगों ने किया अमरनाथ दर्शन, नाराज़ अब्दुल्ला-महबूबा ने कहा ‘कश्मीरियों को दिक्कत हो रही’

अमरनाथ यात्रा को लेकर इस बार काफ़ी पुख्ता इंतजाम किए गए हैं और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने व्यक्तिगत रूप से अधिकारियों के साथ बैठक कर व्यवस्थाओं का जायजा लिया था। आँकड़ों के अनुसार, अब तक कुल 96 हज़ार से भी अधिक श्रद्धालुओं ने अमरनाथ धाम के दर्शन किए हैं। अकेले रविवार (जुलाई 7, 2019) को 14 हज़ार से भी अधिक श्रद्धालुओं ने दर्शन किया। अस्थिर मौसम के बीच सुरक्षा बलों के जवान लगातार यात्रियों के लिए सुगम व्यवस्था करने में लगे हुए हैं। राज्यपाल सत्यपाल मलिक ने कई बार अधिकारियों के साथ बैठक कर स्थिति की जानकारी ली।

इस बीच जम्मू कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ़्ती ने अजीब बयान दिया है। उन्होंने कहा कि अमरनाथ यात्रा की वजह से स्थानीय कश्मीरियों को परेशानी हो रही है। बाबा बर्फानी की यात्रा को लेकर किए गए पुख्ता इंतजामों ने परेशान पीडीपी सुप्रीमो ने कहा:

“अमरनाथ यात्रा वर्षों से होती आ रही है। लेकिन, दुर्भाग्य से जो इंतजाम इस साल किए गए हैं, वह कश्मीर के लोगों के ख़िलाफ़ हैं। इससे स्थानीय लोगों को अपनी रोजमर्रा की ज़िंदगी में काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। मैं राज्यपाल से इस मामले पर संज्ञान लेने के लिए अनुरोध करती हूँ।”

इसी तरह की कुछ चिंताएँ पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने भी ज़ाहिर की है। अब्दुल्ला ने कहा कि वे यात्रियों की सुरक्षा व सुविधा के लिए चिंतित हैं लेकिन सत्यपाल मलिक के नेतृत्व में ऐसा पहली बार हो रहा है जब यात्रियों के लिए यातायात रोक दिया जा रहा है और हाइवे व रेलवे लाइन्स को बंद कर दिया जा रहा है। उन्होंने यह बयान ‘द कश्मीर मॉनिटर’ की उस ख़बर के आधार पर दिया, जिसमें राज्यपाल के हवाले से कहा गया था कि कश्मीरियों को यात्रियों की सुविधा का ध्यान रखते हुए ट्रैफिक पाबंदियों का पालन करना चाहिए।

राज्यपाल सत्यपाल मलिक श्री अमरनाथजी श्राइन बोर्ड के अध्यक्ष भी है। उन्होंने रविवार को पन्था चौक शिविर में स्थापित एक शिविर का दौरा कर यात्रियों के लिए की गई व्यवस्था का जायजा लिया। यात्रियों के लिए इस बार चिकित्सा, भोजन, निवास, बिजली-पानी, स्वच्छता, यातायात और सुरक्षा से सम्बंधित कई व्यवस्थाएँ की गई हैं जो इस बार की यात्रा को बाकी वर्षों से अलग खड़ा करती है। अनंतनाग के सांसद हसनैन मसूदी ने भी इस यात्रा को लेकर कश्मीर को हो रही कथित दिक्कतों का रोना रोया। मसूदी ने कहा कि यात्रा के लिए किए गए ट्रैफिक इंतजामों से राज्य की अर्थव्यवस्था पर बुरा प्रभाव पड़ रहा है।

बारामुला के सांसद अकबर लोन ने कहा कि इससे कश्मीरी व्यापारियों व यहाँ आने वाले पर्यटकों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि अगर यही स्थिति रही तो जनता दबाव में आ जाएगी। हालाँकि, पूर्व मुख्यमंत्री फ़ारूक़ अब्दुल्ला ने बालटाल स्थित अमरनाथ बेस कैम्प का दौरा कर यात्रियों को दी जा रही सुविधाओं को देखा था। उन्होंने दावा किया था कि कश्मीरी लोग कई वर्षों से इस यात्रा को अच्छी तरह संचालित करने के लिए अपना सहयोग देते रहे हैं। अब्दुल्ला ने आशा जताई थी कि यहाँ आने वाले यात्री शांति का सन्देश लेकर वापस जाएँगे

सबरीमाला के उलट मस्जिद में महिलाओं के प्रवेश की याचिका SC में ख़ारिज, कहा याचिकाकर्ता मुस्लिम नहीं

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार (8 जुलाई) को मुस्लिम महिलाओं के मस्जिद प्रवेश और उन्हें पर्दा प्रथा से मुक्ति दिलाने की अपील करने वाली याचिकाएँ ख़ारिज कर दीं। उच्चतम न्यायालय ने कारण यह बताया कि याचिकाकर्ता खुद मुस्लिम नहीं है, इसलिए केरल उच्च न्यायालय के फैसले के खिलाफ दायर इस याचिका पर सुनवाई का कोई औचित्य नहीं है। सुप्रीम कोर्ट का यह रुख सबरीमाला मामले में उसके फैसले के ठीक उलट है। तब सुप्रीम कोर्ट ने
याचिकाकर्ताओं में से केरल (जहाँ सबरीमाला मंदिर स्थित है) के निवासी नहीं होने के बावजूद और न ही मंदिर की परम्पराओं की जानकार होने के बावजूद भी उनकी याचिका सुनी थी। न सिर्फ सुनी थी बल्कि मंदिर की प्राचीन परम्पराओं को तोड़ कर रजस्वला आयु की महिलाओं के प्रवेश को अनुमति भी प्रदान की थी।

चीफ जस्टिस ख़ारिज करने वाली पीठ का हिस्सा

इस याचिका को ख़ारिज करने वाली पीठ में सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई भी शामिल थे। उनके अलावा न्यायमूर्ति अनिरुद्ध बोस और दीपक गुप्ता भी हिन्दू महासभा द्वारा दायर इस याचिका को ख़ारिज करने वाली पीठ में थे। याचिका को ख़ारिज करते हुए सीजेआई ने कहा, “पहले किसी मुस्लिम महिला को आने दो, फिर हम (इस पर) सोचेंगे।” सुप्रीम कोर्ट में दायर की गई यह याचिका एक स्पेशल लीव पेटिशन थी, जो केरल हाई कोर्ट के 11 अक्टूबर के निर्णय के खिलाफ दायर की गई थी। केरल उच्च न्यायालय में इसे ख़ारिज करने वाले जस्टिस एके जयशंकरण और उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश हृषिकेश रॉय थे।

ख़ारिज करने के कारण अलग-अलग

यहाँ गौर करने लायक बात यह है कि जहाँ सुप्रीम कोर्ट ने मामले के विषय (मस्जिद और मुस्लिम महिलाओं) से याचिकाकर्ताओं के संबंध को ही न मानते हुए याचिका को ख़ारिज किया, वहीं उच्च न्यायालय ने मामले को ख़ारिज मुख्य रूप से इसलिए किया था कि याचिकाकर्ता हिन्दू महासभा उसे यह आश्वस्त नहीं कर पाई थी कि महिलाओं को मस्जिदों में प्रवेश से रोका जा रहा है। इसके अलावा ‘सस्ती लोकप्रियता’ के लिए याचिका दायर करने की टिप्पणी भी उच्च न्यायालय ने याचिकाकर्ताओं पर याचिका ख़ारिज करते समय की थी। उच्च न्यायालय ने कहा था कि उसके मतानुसार अनुच्छेद 226 का दुरुपयोग ऐसे कारणों के लिए नहीं किया जा सकता।

वन्दे भारत ट्रेन से लैपटॉप-मोबाइल चुराने वाले एज़ाज़ और सद्दाम GRP के हत्थे चढ़े

वन्दे भारत ट्रेन में यात्रियों के लैपटॉप, मोबाइल आदि चुराने वाले दो चोरों को रेलवे पुलिस (जीआरपी) ने नई दिल्ली में गिरफ्तार कर लिया। शनिवार को हुई इस गिरफ़्तारी में आरोपितों के नाम पुलिस ने मीडिया को एज़ाज़ अहमद मलिक और सद्दाम हुसैन बताए हैं। रेल मंत्री पीयूष गोयल ने अंग्रेजी अख़बार में छपी खबर की फोटो ट्वीट कर जानकारी दी।

सीसीटीवी से हुए गिरफ़्तार, गोयल ने कहा, ‘पैसा वसूल’

रेल मंत्री ने खबर ट्वीट करते हुए साथ में यह टिप्पणी भी की कि कोच के अंदर सीसीटीवी लगाना काम आया। बता दें कि चोरों में से एक एज़ाज़ की शिनाख्त सीसीटीवी कैमरे से ही हुई। उसे सीसीटीवी फुटेज में एक शिकायतकर्ता का लैपटॉप बैग लेकर जाते हुए देखा गया था, जिसके बाद पुलिस ने अपने मुखबिरों में उसकी तस्वीर सर्कुलेट कर दी। जल्दी ही उसकी पहचान पुलिस को मिल गई।

एक कश्मीरी, एक जामा मस्जिद से

डिप्टी कमिश्नर (रेलवे) डीके गुप्ता ने मीडिया से बात करते हुए यह बताया कि जहाँ एज़ाज़ कश्मीर के पुलवामा से ताल्लुक रखता है, वहीं सद्दाम हुसैन केंद्रीय दिल्ली के जामा मस्जिद इलाके का रहने वाला है। पकड़े जाने के बाद एज़ाज़ ने बताया कि उसने चुराए हुए लैपटॉप को सद्दाम को बेच दिया था। गुप्ता ने यह भी बताया कि उन्हें उक्त यात्री का लैपटॉप वन्दे भारत एक्सप्रेस से चोरी होने की शिकायत 20 मई को मिली थी। इसके अलावा शताब्दी एक्सप्रेस के एक यात्री की भी शिकायत मिली थी। सद्दाम और एज़ाज़ की निशानदेही पर तीन लैपटॉप और दो मोबाइल फ़ोन बरामद हुए। कुल सात लैपटॉप-मोबाइल चोरी के केस जीआरपी ने इन दोनों की गिरफ़्तारी से सुलझा लिए हैं।

राम मंदिर पर इंग्लैंड में हमला, प्रतिमाएँ तोड़ी गईं, 3 महीने में तीसरी घटना

इन दिनों समुदाय विशेष द्वारा हिंदू मंदिरों को तोड़ने या फिर मंदिरों में तोड़-फोड़ करने की कई घटनाएँ सामने आ रही है। अभी पिछले ही दिनों दिल्ली के चाँदनी चौक स्थित दुर्गा माता के मंदिर में मुस्लिमों ने तोड़-फोड़ की थी और ‘अल्लाहु अकबर’ के नारे भी लगाए थे। ऐसे ही हिंदू मंदिरों को तोड़ने की घटना लंदन में भी देखने को मिली।

यहाँ पर भी हिंदू मंदिरों को तोड़ा गया। खबर के मुताबिक, वेस्ट मिडलैंड के वालसाल में 19 जून 2019 को श्री राम मंदिर के बाहर एक शख्स द्वारा चार मूर्तियों को बुरी तरह से तोड़ दिया गया। सीसीटीवी फुटेज में साफ तौर पर देखा जा सकता है कि ब्लैक हुडी पहने एक शख्स हाथ में क्रिकेट बैट या फिर हॉकी स्टिक लेकर आता है और उन मूर्तियों पर भयानक तरीके से प्रहार करता है, फिर साइड में कार में बैठे अपने एक साथी से जाकर कुछ बातें करता है और फिर वापस आकर मूर्तियों पर काफी बुरी तरीके से हिट करता है, जिससे मूर्तियाँ क्षत-विक्षत हो जाती है।

वालसाल के श्री राम मंदिर के बाहर मंदिर के साथ की गई तोड़-फोड़ (फोटो आभार: metro)

पुलिस ने इस घटना की पुष्टि करते हुए कहा कि वो फिलहाल मामले की जाँच कर रहे हैं और जानकारियाँ इकट्ठा करने का प्रयास कर रहे हैं। एक पुलिस अधिकारी का कहना है कि पुलिस को वलसाल के प्लेक इलाके में फोर्ड स्ट्रीट पर एक सामुदायिक हॉल और मंदिर के बाहर मूर्तियों को आपराधिक क्षति पहुँचाने की दो रिपोर्ट मिली हैं। उन्होंने बताया कि पहली घटना 10 जून 2019 को सुबह के 10 बजे से पहले हुई। इस दौरान मूर्तियों को तोड़ा गया। वहीं, दूसरी घटना 19 जून को रात के 11 बजे के बाद हुई। इस घटना में भी मूर्तियों को क्षति पहुँचाई गई। उसे क्षति पहुँचाई गई। हालाँकि पुलिस की जाँच में अभी तक किसी की पहचान उजागर नहीं हुई है।

फोटो साभार: metro

फोर्ड स्ट्रीट स्थित पूजा स्थल के एक सदस्य जगू पटेल ने कहा कि ये 3 महीने में घटी तीसरी घटना है, जब मंदिरों पर हमला किया गया। इस घटना से वहाँ के लोग काफी डरे हुए हैं। उनका कहना है कि कुछ लोगों द्वारा उनलोगो को निशाना बनाया जा रहा है। उन्हें समझ में नहीं आ रहा है कि लोग इस तरह की घटना को क्यों अंजाम देते हैं। इससे उन्हें कुछ भी हासिल नहीं होने वाला है। ये सिर्फ उनके संवेदनहीनता को दर्शाता है।

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गौरतलब है कि, कुछ समय पहले, लंदन के हैरो स्थित मंदिर श्री कच्छ सत्संग स्वामीनारायण मंदिर को तोड़ा गया और फिर विल्सडन लेन, ब्रेंट स्थित श्री स्वामीनारायण मंदिर से तीन बहुमूल्य मूर्तियाँ और नकदी की चोरी की गई। इस घटना को हिंदू पर्व दिवाली के दो दिन बाद ही अंजाम दिया गया था। दो दिन पहले हिंदू समुदाय ने इस मंदिर में दिवाली और नए साल की शुरुआत का जश्न मनाया था।

जानकारी के मुताबिक, पिछली जनगणना के समय यूके में 817,000 हिंदू, 157 मंदिर और 7 हिंदू स्कूल थे, लेकिन दिवाली के बाद दो मंदिरों को तोड़ दिया गया। ब्रेंट काउंसिल के समुदाय और कल्याण जाँच समिति के अध्यक्ष केतन सेठ ने इस घटना पर अफसोस जताते हुए कहा कि चोरों को शायद एहसास तक नहीं था कि वे क्या ले जा रहे थे। उन्होंने कहा कि चोरी की गई गोल्ड प्लेटेड पीतल की मूर्तियाँ पैसे से मूल्यवान नहीं थी, अपितु वो तो आध्यात्मिक रुप से, धार्मिक आस्था की दृष्टि से बहुमूल्य हैं। हिंदू समुदाय को अभी भी उम्मीद मूर्तियों के वापस आने की उम्मीद है।

104 Vs 105: कर्नाटक में BJP का पलड़ा भारी, निर्दलीय विधायक नागेश ने बिगाड़ा कुमारस्वामी का ‘मंत्री खेल’

कर्नाटक के राजनैतिक गलियारे में इन दिनों खूब हलचल मची हुई है। 13 विधायकों के इस्तीफे़ के बाद यहाँ निर्दलीय विधायक नागेश ने भी कुमारस्वामी सरकार से अपना समर्थन वापस ले लिया है। सदन में आँकड़े की बात करें तो गठबंधन सरकार (कॉन्ग्रेस-जेडीएस) अल्पमत में आ चुकी है। सरकार समर्थित विधायकों की संख्या अब मात्र 104 रह गई है जबकि भाजपा को समर्थन देने वाले विधायकों की संख्या 105 हो गई है।

विधायकों की इस तेज उछल-कूद के बीच कयास लगाए जा रहे हैं कि भाजपा राज्य में सरकार गठन करने की कोशिश कर सकती है क्योंकि निर्दलीय विधायक नागेश ने भी यह स्पष्ट किया है कि अगर भाजपा उनसे समर्थन माँगती है, तो वह पार्टी के साथ हैं।

इस्तीफ़ा देने के बाद नागेश मुंबई के लिए रवाना हो चुके हैं। इधर भाजपा ने भी आज (जुलाई 8, 2019) शाम को नेताओं की बैठक बुलाई है, जिसमें वे राज्य के मौजूदा हालातों पर चर्चा करेंगे। खबरों की मानें तो बीजेपी अभी स्थिति के स्पष्ट होने का इंतजार कर रही है। क्योंकि छुट्टी पर होने के कारण अभी स्पीकर द्वारा विधायकों के इस्तीफों को नहीं स्वीकारा गया है। अगर मंगलवार को स्पीकर इन विधायकों के इस्तीफ़े स्वीकार कर लेते हैं, तो मुमकिन है कि भारतीय जनता पार्टी राज्य में सरकार बनाने का दावा करे। माना जा रहा है कि राज्य सरकार की ओर से अभी और भी इस्तीफ़े आ सकते हैं।

गौरतलब है कि डिप्टी सीएम जी. परमेश्वर समेत कॉन्ग्रेस कोटे के सभी मंत्रियों ने प्रदेश अध्यक्ष दिनेश गुंडू राव को अपना इस्तीफा सौंप दिया है। मुख्यमंत्री कुमारस्वामी ने अपने सभी 21 मंत्रियों से इस्तीफा दिलवाया कर राजनैतिक दाव तो खेल दिया है लेकिन देखना यह होगा कि नाराज चल रहे विधायक मंत्री पद से संतुष्ट होते हैं या अपना विरोधी रवैया बरकरार रखते हैं।

पहले इस मसले पर कॉन्ग्रेस को लग रहा था कि इस्तीफ़ा देने के बाद नाराज़ विधायक सरकार में वापस आ जाएँगे लेकिन फिलहाल ऐसा कुछ भी होता नहीं दिख रहा है। सभी विधायक इस्तीफ़े की जिद पर अड़े हुए हैं और मुंबई के रिजॉर्ट में बंद हैं। लेकिन फिर भी कर्नाटक सरकार में मंत्री ज़मीर अहमद खान का कहना है कि जिन 10 विधायकों ने इस्तीफा दिया है, उसमें से 6-7 विधायक शाम तक वापस आ जाएँगे।

सिकंदर ख़ान मतलब ‘यौन भक्षक’: 60-65 लोगों के साथ किया बलात्कार – 25 बच्चे-बच्चियाँ, 40 पुरुष व किन्नर

जयपुर में एक नाबालिग बच्ची से रेप के आरोपित सिकंदर उर्फ़ जीवाणु को गिरफ़्तार कर लिया गया है। पुलिस ने उसे एक ‘सेक्सुअल प्रिडेटर’ कहा है, जिसका अर्थ हम हिंदी में ‘यौन भक्षक’ या ‘यौन शिकारी’ के रूप में निकाल सकते हैं। पुरुष, किन्नर, बच्चे-बच्चियाँ व महिलाएँ- वह इन सभी को अपनी दरिंदगी का शिकार बनाया करता था। 34 वर्षीय सिकंदर ख़ान अब तक 25 नाबालिग बच्चे-बच्चियों के साथ दुष्कर्म कर चुका है और इसके अलावा उसने 40 के क़रीब पुरुषों व किन्नरों को भी अपने यौनाचार का शिकार बनाया है। उसने अपने बारे में यह बताया है कि वह न्यायिक अभिरक्षा में अन्य क़ैदियों तक को भी नहीं छोड़ता था।

सिकंदर ख़ान हिंसक प्रवृति का है और वह यौनाचार के दौरान हिंसा पर उतारू हो जाता था। हालिया वारदात के बाद वह फुटपाथ पर सोया हुआ था। इस मामले ने राजस्थान पुलिस व प्रशासन की भी पोल खुल गई है। पुलिस ने चारों तरफ़ नाकाबंदी का दावा किया था लेकिन तब भी आरोपित जयपुर से कोटा जा पहुँचा। उसने पुलिस की चौकसी के लाख दावों के बीच बाइक से बेख़ौफ़ कोटा तक का सफर पूरा किया। इतना ही नहीं, उसने रास्ते में देवली क्षेत्र में हवाई फायर कर एक शराब की दुकान में लूटपाट भी की।

उक्त शराब की दूकान से उसने 20 हज़ार रुपए लूट लिए व कुछ गहनें भी ले गया। कोटा में वह अपने दोस्त बाबू ख़ान के पास रुका हुआ था। इस बीच पीड़ित बच्चियों के परिजनों ने आरोपित को फाँसी देने की माँग की है। सिकंदर के एक दोस्त के बारे में भी पता चला है, जिसका नाम रफीक है। रफीक और सिकंदर मिल कर चोरी किया करते थे। दोनों के बीच इस बात को लेकर प्रतिस्पर्द्धा रहती थी कि एक रात में कौन सबसे ज्यादा चोरी की घटनाओं को अंजाम देता है! सिकंदर मुक़ाबले में हमेशा जीत जाता था, इसीलिए उसका नाम जीवाणु और रफ़ीक का नाम कीटाणु पड़ा।

सिकंदर ख़ान मादक पदार्थों की सप्लाई भी किया करता था। एक बच्ची के परिजन ने बताया कि जीवाणु जब उनकी कॉलोनी में रुका हुआ था, तब उसकी नज़र उक्त 10 वर्षीय बच्ची पर थी और वह बच्ची को नई सैंडल दिलाने और फ़िल्म दिखाने के बहाने बाहर ले जाने की फ़िराक़ में रहता था। बच्ची की अम्मी ने बताया कि सिकंदर ख़ान बच्ची को ‘राजा’ कह कर बुलाया करता था। समय रहते बच्ची को सिकंदर के पास जाने से मना कर दिया गया था, जिससे वह बच गई। सिकंदर ख़ान पिस्तौल दिखा कर बच्चों को डराया भी करता था। वह अब तक कई बार जेल जा चुका है।

सिकंदर ख़ान ने 2004 में एक बच्ची के साथ दुष्कर्म करने के बाद उसकी हत्या करने की बात स्वीकार की है। मुरलीपुरा थाना क्षेत्र में एक लड़के को उसने ब्रेड खिलाने के बहाने ले जाकर उसके साथ अप्राकृतिक यौनाचार किया और उसकी हत्या कर शव को पानी की टंकी में फेंक दिया था। इस मामले में उसे उम्रकैद की सज़ा मिली थी। 2015 में वह जेल से बाहर आया। 1 जुलाई 2019 को 7 साल की बच्ची से बलात्कार वाले मामले से पहले वह 22 जून को भी एक 4 वर्षित बच्ची के साथ बलात्कार कर चुका है। जून 2017 में उसने एक सार्वजनिक स्थान पर लोगों के बीच ही 2 बच्चियों के साथ दुर्व्यवहार किया और जब एक पुलिस कॉन्स्टेबल ने उसे रोकने की कोशिश की तो उसके सिर पर वार किया था।