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रेप, हत्या का दोषी ‘MSG’ पैरोल पर करना चाहता है ‘खेती’, जेलर और सरकार हैं इम्प्रेस्ड

डेरा सच्चा सौदा प्रमुख बलात्कारी, हत्यारा गुरमीत राम रहीम एक बार फिर चर्चा में हैं। शिष्याओं के साथ दुष्कर्म के मामले में 20 साल की सजा भुगत रहे राम रहीम ने पैरोल माँगी है। राम रहीम के पैरोल मामले पर सियासी सरगर्मी भी बढ़ गई है। जेल में निरूद्ध राम रहीम द्वारा सिरसा जिले में अपनी जमीन पर खेती करने लिए पैरोल के आवेदन को जेल प्रशासन ने स्वीकार भी कर लिया है। राम रहीम की रिहाई के लिए हरियाणा सरकार ने उसके ‘अच्छे आचरण‘ का हवाला दिया है। हालाँकि, राम रहीम की रिहाई पर अंतिम फैसला कमिश्नर कोर्ट करेगा।

जेल मंत्री कृष्ण पवार ने राम रहीम को पैरोल देने की पैरवी भी कर दी है। गृह विभाग ने सिरसा और रोहतक जिला प्रशासन से इस पर रिपोर्ट माँगी है। हालाँकि, राम रहीम को पैरोल अभी मिली नहीं, लेकिन आने वाले विधानसभा चुनाव को देखते हुए इसके सियासी संदेश जरूर तलाशे जाने लगे हैं।

इस सारे प्रकरण में सबसे हैरान कर देने वाली बात तो यह है हरियाणा की रोहतक जेल में सजा काट रहे डेरा सच्चा सौदा प्रमुख को लेकर जेल अधीक्षक ने कहा कि राम रहीम कोई हार्डकोर क्रिमिनल नहीं है और जेल के अन्दर उसका आचरण अच्छा रहा है। सिरसा जिला प्रशासन ने पैरोल देने या नहीं देने के लिए जेल अधीक्षक से राय माँगी है।

खेती करने के लिए चाहिए पैरोल

अधिकारियों ने बताया कि राम रहीम को लेकर सभी बातों का ध्यान रखकर ही उनके पैरोल की याचिका पर रिपोर्ट तैयार की जा रही है। गौरतलब है कि राम रहीम खेती करने के लिए पैरोल माँग रहा है। यह भी जाँच की जा रही है कि राम रहीम के पास कितनी जमीन है।

सेलिब्रिटी अपराधियों’ की ढाल बनती जा रही है पैरोल

डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम साध्वी यौन शोषण और पत्रकार हत्याकांड मामले में रोहतक की सुनारिया जेल में सजा काट रहा है। राम रहीम को जब सजा दी जा रही थी तो हरियाणा व पंजाब में जमकर हिंसा हुई थी, कई लोगों की जाने गई थी।

शासन और प्रशासन का ‘नामी अपराधियों’ के प्रति सॉफ्ट कॉर्नर एक आम बात होती जा रही है। ऐसे अपराधियों को पैरोल देने का उद्देश्य चाहे कुछ भी हो, लेकिन यह तो तय है कि कोई आदमी जब भी किसी अपराध में जेल जाता है तो उसके जेल पहुँचने से पहले उसकी पैरोल वहाँ पहुँच जाती है।

किस्सा चाहे गुरमीत राम रहीम का हो या फिर संजय दत्त जैसे लोगों का, यह पैरोल ताकतवरों का आसान हथियार साबित होती जा रही है, जिससे उन नामी अपराधियों के अपने हितों के साथ उनके ‘अच्छे आचरण’ का हवाला देने वालों के हित भी सलामत रहें।

बॉलीवुड अभिनेता संजय दत्त भी दिसंबर 2014 को अपनी पत्नी मान्यता की खराब तबियत का हवाला देकर बाहर आए और फिर उनकी यह पैरोल तीन बार बढ़ाई गई। इसे लेकर मीडिया में काफी सवाल भी उठे थे और यह विवाद इतना बढ़ा कि महाराष्ट्र सरकार ने पैरोल के नियम सुधारने के लिए प्रस्ताव भी सदन में रखा था।

सवाल यह है कि अपराधियों के ऐसे व्यक्तिगत कितने ही कारण हो सकते हैं जिनकी वजह से वह पैरोल लेकर खुला घूम सकता है। फिर चाहे किसी को अपने घर पर पानी की समस्या के लिए पैरोल चाहिए हो या फिर अपने बच्चे के साथ बैडमिंटन और चेस खेलने के लिए साथी की जरूरत हो और उसके पिता के अलावा उसका साथ देने वाला कोई न हो।

खैर, गुरमीत राम रहीम की पैरल ने सियासत से लेकर मीडिया में नई बहस तो छेड़ ही दी है। देखना यह बाकी है कि जिस खेती का गुरमीत राम रहीम हवाला दे रहे हैं वो कितने फल देती है।

आफताब और चाँद के बेटों ने मंदिर के पास की गोलीबारी, भजन करती महिलाओं में फैलाई दहशत

उत्तर प्रदेश के मेरठ में दिनदहाड़े गोलियाँ चलाई गईं। यह घटना मेरठ के प्रह्लादनगर थाने के पास की ही है। स्कूटी सवार 2 युवाकों ने फायरिंग की और उसके बाद भाग निकले। दरअसल, पास में ही कुटी के नजदीक एक प्राचीन मंदिर है, जहाँ महिलाएँ भजन-कीर्तन कर रही थी। इन युवाकों का इरादा उन्हें डराने-धमकाने का था। दोनों ही युवकों ने उस मंदिर के पास आकर फायरिंग की, जिससे भजन कर रही महिलाएँ दहशत में आ गईं। आरोपित का स्कूटी नंबर सीसीटीवी फुटेज में दर्ज हो गया, जिस आधार पर पुलिस ने ईदगाह चौक स्थित आशिक अली होटल के मालिक चाँद के बेटे को हिरासत में ले लिया।

आरोपितों की उम्र 18 वर्ष से कम है। एक के पिता का नाम चाँद है तो दूसरे के पिता का नाम आफताब है। आरोपितों ने न सिर्फ़ फायरिंग की बल्कि गाली-गलौज भी की। वहाँ उपस्थित लोगों के साथ गली-गलौज करते हुए ये भाग निकले। इलाक़े में तनाव फैलने से बचाने के लिए स्थानीय व्यापारियों व भाजपा नेताओं ने पुलिस को सूचना दी, जिसके बाद पुलिस ने कार्रवाई की। प्रह्लादनगर कॉलोनी के लोगों का कहना है कि क्षेत्र में छेड़छाड़ की घटनाएँ काफी बढ़ गई है। कॉलोनी में गेट लगाने की माँग के साथ लोगों ने थाना के बाहर प्रदर्शन भी किया।

आरोपितों ने पिस्टल लहराते हुए दो से तीन राउंड गोलीबारी की। दोपहर में हुई इस वारदात के बाद कुछ लोगों ने आरोपितों का पीछे भी किया लेकिन तब वे हाथ नहीं आए। इंस्पेक्टर नज़ीर अली ख़ान ने बताया कि आरोपितों द्वारा इस्तेमाल की गई बन्दूक नकली है और उसे मेले से ख़रीदा गया है। लेकिन, लोगों का कहना है कि उन पिस्टलों से असली बन्दूक की तरह धुआँ निकलता दिख रहा था। हिंदुस्तान में छपी एक रिपोर्ट के अनुसार, पुलिस के दावों में झूठ ज्यादा दिखाई दे रहा है। पुलिस ने दोनों किशोरों के पिता को थाने बुलाया।

प्रह्लादनगर में हाल ही में कुछ दिनों पहले समुदाय विशेष के लोगों द्वारा भाजपा नेता पर फायरिंग की गई थी, जिसके बाद इलाक़े के हिन्दू संगठनों ने कड़ा विरोध दर्ज कराया था। कॉलोनी में गेट लगाने की माँग की गई थी। स्थानीय अख़बारों के मुताबिक़, इलाक़े में हुई ताज़ा घटनाओं को देख कर लगता है कि यहाँ सांप्रदायिक तनाव कभी भी भड़क सकता है। भाजपा नेता पर गोलीबारी के बाद क्षेत्र में अफवाहों का बाज़ार गर्म हो गया था। भाजपा नेता व स्थानीय पार्षद ने ताज़ा गोलीबारी की घटना को लेकर कड़ा विरोध दर्ज कराया है।

स्थानीय पार्षद ने कहा कि सम्प्रदाय विशेष के लोग यहाँ अक्सर छेड़छाड़, लूटपाट, मारपीट और स्टंटबाज़ी की घटनाओं को अंजाम देते रहते हैं। अगर कोई सज्जन विरोध करता है तो ये मारपीट पर उतारू हो जाते हैं। पार्षद ने आगे कहा कि समुदाय विशेष के लड़के गलियों में गुटबंदी करते हैं और फिर सीटी बजाते हुए इधर-उधर मँडराते रहते हैं। ये लोग शोरशराबा भी करते हैं। अधिकारियों पर बार-बार शिकायत किए जाने के बावजूद मामले का संज्ञान नहीं लेने का आरोप लगाया गया है। पुलिस ने ताज़ा मामले में प्रयोग किए गए स्कूटर को भी ज़ब्त कर लिया है।

AAP विधायक मनोज कुमार को 3 महीने की जेल, ₹10 हजार का जुर्माना

दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने मंगलवार (जून 25, 2019) को कोंडली से आप विधायक मनोज कुमार को चुनाव प्रक्रिया में बाधा डालने के मामले में 3 महीने की सजा और ₹10 हजार जुर्माने की सजा सुनाई है। हालाँकि, आदेश को चुनौती देने के लिए विधायक मनोज कुमार को जमानत दे दी गई है। 

आप सांसद को कोर्ट ने 2013 विधानसभा चुनाव में पूर्वी दिल्ली के कल्याण पुरी इलाके में बने एक मतदान केंद्र पर चुनावी प्रक्रिया को बाधित करने का दोषी पाया। एडिशनल चीफ मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट समर विशाल ने 11 जून को मनोज कुमार को आईपीसी की धारा 186 और जनप्रतिनिधित्व कानून की धारा 131 के तहत दोषी ठहराया था। अदालत ने पुलिसवालों की गवाही को विश्वसनीय मानते हुए ये फैसला सुनाया था और बहस के लिए 25 जून की तारीख तय की गई थी।

गौरतलब है कि, ये मामला मनोज और उनके 50 समर्थकों द्वारा एमसीडी स्कूल के मेन गेट के बाहर हंगामा करने से संबंधित है। इन लोगों ने चुनाव प्रक्रिया के दौरान ही स्कूल का मेन गेट बंद कर दिया था। 4 दिसंबर 2013 को कल्याणपुरी थाने में दर्ज केस के मुताबिक, आप विधायक ने अपने समर्थकों के साथ मिलकर कल्याण पुरी स्थित एमसीडी प्राइमरी स्कूल पर बने पोलिंग स्टेशन पर उत्पात किया जहाँ दिल्ली विधानसभा के लिए मतदान हो रहा था। आप विधायक ने वहाँ चुनाव कराने में लगे पुलिस वालों के काम में रुकावट डाली, पुलिस कॉन्स्टेबल को धमकाया और पुलिवालों समेत चुनाव अधिकारियों को पोलिंग बूथ के अंदर बंद कर दिया। इतना ही नहीं, मनोज कुमार और उनके समर्थकों ने मतदान समाप्त होने के बाद भी अपना आंदोलन जारी रखा और बूथ के बाहर मतपेटियों को बाहर नहीं ले जाने दिया जिसके बाद मतपेटियों को दूसरे रास्ते से बाहर निकाला गया था।

Spice-2000 ‘अचूक’ बमों का इस्तेमाल, और 90 सेकंड में सब तबाह: ऐसे हुई थी बालाकोट पर एयर स्ट्राइक

एनडीटीवी से बात करते हुए बालाकोट पर हमला करने वाले भारतीय वायुसेना के पायलटों ने सीधे शब्दों में कहा कि उनका निशाना नहीं चूका था। पाकिस्तान अपने यहाँ हुए नुकसान को कमतर कर के दिखाने की कोशिश कर रहा है। नाम गुप्त रखने की शर्त पर हुए इस इंटरव्यू में जिन दो मिराज 2000 पायलटों ने अपनी बात रखी, उनमें से एक स्क्वाड्रन लीडर हैं। बालाकोट एयर स्ट्राइक 1971 की जंग के बाद पाकिस्तान पर भारत का पहला हवाई हमला था।

वीडियो फीड वाले बमों का इस्तेमाल होना था

पुलवामा हमले के जवाब में जैश-ए-मोहम्मद के बालाकोट स्थित ट्रेनिंग सेंटर पर कार्रवाई के तहत हुई एयर स्ट्राइक बारे में पायलटों ने बताया कि पूरा ऑपरेशन 2-2.5 घंटों में खत्म हो गया। बम गिरने के बाद जिहादी कैंप मात्र 90 सेकंड में पूरी तरह तबाह हो गए थे। दोनों पायलटों ने मिराज से 5 इज़राइली स्पाइस-2000 बमों से जिहादी प्रशिक्षण केंद्रों पर हमला किया था। 26 फरवरी को भारतीय वायु सेना ने कुल 12 मिराज-2000 जेटों को इन जिहादी कैम्पों को तबाह करने के लिए हमले का आदेश दिया था।

हमले में हालाँकि स्पाइस के अलावा क्रिस्टल मेज़ (Crystal Maze) नामक एक दूसरे तरह की हवा-से-सतह पर हमला करने वाली मिसाइल की 6 यूनिट का भी इस्तेमाल होना था लेकिन मौसमी परिस्थितियों की गड़बड़ी के चलते यह संभव नहीं हो पाया। क्रिस्टल मेज़ मिसाइल की खासियत यह है कि यह हमला करने के साथ-साथ वीडियो फीड भी भेजती है, अतः अगर इसका इस्तेमाल हो सकता तो वायु सेना के पास मिशन की सफलता का सबूत भी होता। 

‘इमारतों की सैटेलाइट तस्वीरें साफ़ नहीं हैं’

क्रिस्टल मेज़ बमों का इस्तेमाल न हो पाने और हमले की सफलता का कोई वीडियो सबूत न होने के बावजूद वायु सेना पायलटों के मन में मिशन की सफलता को लेकर कोई संदेह नहीं है। “मुझे स्पाइस बमों के निशाने पर गिरने में कोई संदेह नहीं है।” सैटेलाइट इमेजिंग कंपनी ‘डिजिटल ग्लोब’ ने तस्वीरें जारी की थीं जिनमें एयर स्ट्राइक का दावा जिस स्थान पर किया गया था, वहाँ पर इमारतें खड़ीं थीं। इस बात पर पायलटों ने बताया कि स्पाइस बमों की डिज़ाइन ऐसी है कि वह किसी ढाँचे (जैसे इमारत) से टकराने पर तुरंत धमाका नहीं करते।

उनकी विस्फ़ोटक सामग्री का धमाका ढाँचे को भेद कर मानव निशाने के निकटतम पहुँच कर होता है, ताकि दुश्मन के ज़िंदा बचने की संभावना न्यूनतम हो जाए। अतः अमूमन इस बम के इस्तेमाल पर निशाने के बाहरी ढाँचे की तबाही नहीं होती, लेकिन अंदर के मानव-लक्ष्य मारे जाते हैं। “सैटेलाइट से जारी तस्वीरें इतनी साफ़ नहीं हैं कि वह बमों के ढाँचे के अंदर घुसने से बने छेदों को दिखाएँ।”

पायलट आगे जोड़ते हैं, “स्पाइस 2000 चूकने वाला हथियार नहीं है। संभव है कि इमारतों की छतों पर जो नुकसान हुआ है, उसे छिपाने का प्रयास हो रहा हो।” NDTV का दावा है कि उसे निशाने पर रहीं इमारतों में से एक की अल्ट्रा-हाई रेज़ोल्यूशन की तस्वीर दिखाई गई है, जिसमें इमारत की छत पर तीन छेद साफ़ देखे जा सकते हैं। जिहादी रंगरूटों का हॉस्टल मानी जा रही यह इमारत पाकिस्तानी अधिकारियों ने उन विदेशी पत्रकारों और कूटनीतिज्ञों को नहीं दिखाई थी, जिन्हें वह बालाकोट स्ट्राइक के 43 दिन बाद ‘दौरे’ पर ले गए थे। 

मिशन जानने के बाद सिगरेट और चहलकदमी

भारतीय युद्धक विमान लाइन ऑफ़ कण्ट्रोल को पार कर 8 किलोमीटर अंदर गए थे उन बमों को दागने की पोज़ीशन पर आने के लिए। पायलटों ने अपने व्यक्तिगत अनुभव भी एनडीटीवी को बताए। स्क्वाड्रन लीडर के मुताबिक स्ट्राइक के पहले (तनाव कम करने के लिए) उन्होंने बहुत सारी सिगरेट पी थी, और मिशन से लौटकर भी उन्होंने कुछ और सिगरेट पी। “मिशन क्या है, यह ब्रीफिंग दिए जाने के बाद हम लगातार चहलकदमी कर रहे थे।” पायलटों ने बताया कि मिशन के दौरान इतना कुछ होता है करने के लिए कि दो घंटे कितनी तेज़ी से बीत गए, यह पता भी नहीं चला।

उन्होंने यह भी बताया कि मिशन के दौरान एक पाकिस्तानी जेट को भारतीय जेटों के हवाई व्यूह (फॉर्मेशन) की तरफ़ उड़ते हुए भी मिशन के बाकी जेटों का समन्वय और ऐसी ही परिस्थिति की चौकसी कर रहे जेट ने पकड़ा। अच्छी बात यह थी कि तब तक बम दागकर भारतीय योद्धा नुक्सान की सीमा के बाहर चुके थे। “स्पाइस 2000 को दागने के बाद उसके लास्की की तरफ बढ़ने के दौरान उस क्षेत्र में रुककर नहीं देखना पड़ता। यह दागिए-और-भूल-जाइए किस्म का है।” 

मेरी मौत के जिम्मेदार गहलोत और पायलट: कर्ज में डूबे किसान सोहनलाल के अंतिम शब्द

राजस्थान में जिला श्रीगंगानगर के एक गाँव ठीकरी में रविवार (जून 23, 2019) को एक किसान ने आत्महत्या कर ली। 45 वर्षीय किसान सोहनलाल ने कर्जमाफ़ी न होने के कारण जहर खाकर अपनी जान दे दी। सोहनलाल ने मरने से पहले एक वीडियो और दो पेज का सुसाइड नोट भी छोड़ा, जिसमें उन्होंने आरोप लगाया कि गहलोत सरकार चुनाव से पहले किए अपने वादों को पूरा करने में असफल रही और उन्हीं के कारण वह आत्महत्या कर रहे हैं।

सोहनलाल ने अपना वीडियो रविवार (जून 23, 2019) की सुबह रिकॉर्ड किया था और जहर खाने से पहले उसे सोशल मीडिया पर अपलोड किया था। अपने सुसाइड नोट में सोहन लाल ने पायलट और गहलोत का नाम लेकर भावनात्मक संदेश लिखा था। उन्होंने इस नोट में बताया था कि उन्हें ये भयानक कदम सिर्फ़ राजस्थान की वर्तमान सरकार के कारण उठाना पड़ रहा है, जो अपने वादे को पूरा करने और किसानों की कर्जमाफ़ी करने में असफल रही।

एनडीटीवी की खबर अनुसार अपने सुसाइड नोट में उन्होंने लिखा, “मैं आज अपनी जीवन लीला समाप्त करने जा रहा हूँ। इसमें किसी का कोई दोष नहीं है। इस मौत के जिम्मेदार गहलोत व सचिन पायलट हैं। उन्होंने बकायदा बयान दिया था कि हमारी सरकार आई तो 10 दिन में आप का कर्ज माफ कर देंगे। अब इनके वादे का क्या हुआ। सभी किसान भाइयों से विनती है कि मेरी लाश तब तक मत उठाना जब तक सभी किसानों का कर्ज माफ ना हो। आज सरकार को झुकाने का वक्त आ गया है। अब इनका मतलब निकल गया है।”

उन्होंने आगे लिखा, “सभी भाइयों से विनम्र निवेदन है कि सब किसान भाइयों के लिए मरने जा रहा हूँ। सबका भला होना चाहिए किसान की एकता को आज दिखाना है। मेरी मौत का मुकदमा अशोक गहलोत पर कर देना। मेरे गाँव ठाकरी के वासियों से भी विनती करता हूँ कि गाँव में एकता बनाए रखना। मेरा घर मेरा परिवार आप लोगों के भरोसे छोड़कर जा रहा हूँ। मेरे परिवार का ख्याल रखना… एक बात और अब की बार सरपंची गांव में रखना यह विनती है मेरी, आपका सोहन लाल कड़ेला ।”

जानकारी के मुताबिक वहाँ के कुछ लोगों ने बताया कि सोहनलाल पर ओरियंटल बैंक और सिंडीकेट बैंक का 3 लाख रुपए कर्ज बकाया था, जिसके लिए सोहन लगातार ब्याज देता था।

नेत्रहीन बच्ची कहती थी ‘मामा’, इमरान ने पहले रेप किया, फिर गला दबा कर मार डाला

दिल्ली के नरेला क्षेत्र से बलात्कार और हत्या की वारदात सामने आई है। एक व्यक्ति से अपनी दुश्मनी का बदला लेने के लिए मोहम्मद इमरान नामक शख़्स ने उसकी बच्ची का रेप कर हत्या कर दी। बता दें कि नरेला इंडस्ट्रियल एरिया स्थित वॉटर ट्रीटमेंट प्लांट के पास झाड़ियों में से मृत बच्ची का शव बरामद किया गया था। पुलिस को उसका शव एक सप्ताह पहले ही मिला था। पुलिस को पहले यह हत्या का मामला लग रहा था लेकिन इमरान से पूछताछ के बाद सच्चाई सामने आई। इमरान ने अपना जुर्म कबूलते हुए कहा कि उसने बच्ची के पिता से बदला लेने के लिए ऐसा किया। इमरान उस बच्ची के पड़ोस में ही रहता था।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक़, बच्ची नेत्रहीन थी। 15 जून को ही उसकी गुमशुदगी का मामला दर्ज कराया गया था, जिसके बाद पुलिस इसे अपहरण का मामला मान कर जाँच कर रही थी। परिजनों ने अपनी शिकायत में कहा था कि बच्ची खेलने लिए निकली थी, जिसके बाद वह वापस नहीं आई। पुलिस ने छानबीन के दौरान क़रीब 100 लोगों से पूछताछ की, जिससे पता चला कि पड़ोस में रहने वाला इमरान को उसके साथ आखिरी बार देखा गया था। बच्ची के परिवार के साथ इमरान की काफ़ी मित्रता थी और वह बच्ची के घर अक्सर आया-जाया करता था।

बच्ची इमरान को मामा कह कर बुलाया करती थी। उसे क्या पता था कि जिसे वह मामा कह कर बुला रही थी, वही एक दिन उसके साथ हैवानियत और दरिंदगी की सारी हदें पार कर देगा। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, इमरान ने दावा किया कि उसकी बहन के साथ बच्ची के पिता के अवैध सम्बन्ध थे और उसने उन दोनों को रंगे हाथों पकड़ लिया। इसके बाद इमरान उससे बदला लेना चाहता था, जिस कारण उसने इस कांड को अंजाम दिया। उसने फ्रूटी पिलाने के बहाने बच्ची को फुसलाया और फिर सुनसान सीवेज प्लांट के पास ले गया।

बच्ची के पिता ने अपनी साली से शादी कर ली थी, जिससे इमरान नाराज़ चल रहा था। एक और चौंकाने वाली बात यह सामने आई है कि 2 महीने पहले आरोपित इमरान के भाई गुड्डू ने भी बच्ची का बलात्कार करने की कोशिश की थी और उसे फुसला कर ले जा रहा था। वह बच्ची को रुपए का लालच देकर ले जा रहा था लेकिन तभी बच्ची की सौतेली माँ ने यह देख लिया और बच्ची को बचाया जा सका। दिल्ली पुलिस इमरान से पूछताछ कर यह जानने की कोशिश कर रही है कि उसने किस तरह इस घटना को अंजाम दिया।

पूछताछ में सारी जानकारी प्राप्त होते ही पुलिस आरोपित इमरान के ख़िलाफ़ चार्जशीट दायर करेगी। जाँच के दौरान इमरान ने बताया कि उसकी बीवी कुछ दिनों से घर नहीं आई थी और वह शराब के नशे में था। इमरान अक्सर बच्ची के घर जाता और टॉफी सहित अन्य खाने-पीने की चीजें दिया करता था। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में सामने आया था कि पहले तो बच्ची का रेप किया गया और फिर गला दबा कर मार डाला गया। बच्ची और उसका परिवार पहले शाहदरा में रहते थे, बाद में वे लोग नरेला में आकर बस गए।

₹34 लाख करोड़ का कालाधन तीस साल में बाहर गया: संसदीय समिति की रिपोर्ट

संसद की वित्तीय मामलों की स्थाई समिति ने संसद में प्रतिष्ठित आर्थिक और वित्तीय शोध संस्थानों का हवाला देते हुए रिपोर्ट प्रस्तुत कर यह सूचित किया है कि 1980 से 2010 के बीच भारतीयों ने $490 अरब (₹34 लाख करोड़) काला धन देश के बाहर भेजा है। रिपोर्ट के अनुसार इसके अलावा भारी मात्रा में काला धन रियल एस्टेट, कीमती धातुओं, गुटका, शिक्षा, मनोरंजन, खुदाई जैसे क्षेत्रों में भी ‘इन्वेस्टमेंट’ के रूप में जमा है। रिपोर्ट में तीन संस्थानों NIPFP (राष्ट्रीय सार्वजनिक नीति एवं वित्त संस्थान), NCAER (नेशनल काउन्सिल ऑफ़ एप्लाइड इकोनॉमिक रिसर्च), NIFM (राष्ट्रीय वित्तीय प्रबंधन संस्थान) द्वारा किए गए अध्ययनों के हवाले से यह बातें की गईं हैं।

2011 में तत्कालीन केंद्र सरकार ने भारतीयों द्वारा देश-विदेश में इकठ्ठा काले धन के अध्ययन के लिए तीनों संस्थानों के अध्ययन को प्रायोजित करने का निर्णय किया था। यह तीनों थिंक टैंक अपने-अपने आँकड़ों को सामने रख रहे हैं। NIPFP के हिसाब से 1997-2009 के कालखंड में भारत के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के 0.2% से 7.4% तक काला धन देश के बाहर गया है। NCAER ने 1980-2010 के बीच देश से बाहर गए काले धन का मूल्य $384 अरब (₹27 लाख करोड़) से $490 अरब (₹34 लाख करोड़) के बीच होने का अनुमान लगाया है। NIFM के हिसाब से भारत के बाहर 1990 से 2008 के बीच ~₹9.41 लाख करोड़ ($216 अरब) काला धन भारत से बाहर भेजा गया है। 

समिति की रिपोर्ट के मुताबिक देश के बाहर भेजा गया धन पैदा होने वाले काले धन का महज़ 10% है। “काले धन के उत्पादन या संग्रहण पर कोई विश्वसनीय अनुमान उपलब्ध नहीं है, और न ही ऐसे किसी अनुमान की गणना का कोई सर्वमान्य तरीका है।” समिति ने यह भी कहा कि उपरोक्त अनुमान भी महज़ अनुमान हैं, क्योंकि ऐसी किसी गणना को करने के किसी भी तरीके पर आम सहमति नहीं है। स्थाई समिति की यह रिपोर्ट पिछली लोकसभा में तत्कालीन स्पीकर सुमित्रा महाजन को लोक सभा भंग होने के ठीक पूर्व 28 मार्च को एक पैनल ने सौंपी थी, जिसके अध्यक्ष कॉन्ग्रेस नेता एम वीरप्पा मोईली थे। 

पैनल ने यह भी लिखा है कि उसके आँकड़े समयाभाव के चलते अंतिम रूप में नहीं, बल्कि आरम्भिक हैं। पैनल ने इन्हें अंतिम रूप देने के लिए और भी लोगों, खासकर कि विशषज्ञों की राय लेने की भी अनुशंसा की है। 

कॉन्ग्रेस की घटिया राजनीति: आज़ाद ने की हिन्दुओं और दलितों को अलग-अलग दिखाने की कोशिश

राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष गुलाम नबी आज़ाद ने अपने भाषण के दौरान हिन्दुओं व दलितों को अलग-अलग दिखाने की कोशिश की। आज़ाद बार-बार ‘हिन्दू और दलित’ बोलते रहे, ताकि ऐसा प्रतीत हो कि हिन्दू और दलित अलग-अलग हैं। गुलाम नबी आज़ाद ने अपने भाषण के दौरान कहा, “मुस्लिम और दलित के पाँव में काँटा चुभता था तो चुभन हिन्दू भाई के दिल में लगती थी, और अगर हिन्दू भाई की आँख में घास का छिलका (तिनका) जाता था तो आँसू मुस्लिम और दलित भाई की आँखों से निकलता था।” नीचे संलग्न किए गए वीडियो में आप आज़ाद के भाषण के उस अंश को देख सकते हैं।

यह पहली बार नहीं है जब कॉन्ग्रेस ने हिन्दू धर्म के अंतर्गत आने वाले समुदायों को अलग-अलग दिखाने या अलग करने की चेष्टा की हो। इससे पहले कर्नाटक में कॉन्ग्रेस ने लिंगायत समुदाय को अलग धर्म का दर्जा देकर उनका वोट लेने की कोशिश की थी लेकिन लिंगायत समुदाय के ही कई नेताओं व धर्मगुरुओं ने इसका विरोध किया था। हालाँकि, कॉन्ग्रेस पार्टी की यह चाल कामयाब नहीं हो पाई थी।

कई लोगों ने गुलाम नबी को ही क़ानून की याद दिलाई। लोगों ने कहा कि संविधान के अनुसार भी जाति और जनजाति हों या फिर सामान्य वर्ग के लोग, ये सभी हिन्दू धर्म के अंतर्गत ही आते हैं। सोशल मीडिया पर लोगों ने यह भी पूछा कि क्या आज़ाद हिन्दू-मुस्लिम करने से पहले भारत के संविधान से चीजें भूल गए हैं?

रद हो सकती है मेहुल चोकसी की एंटीगुआ की नागरिकता, भारत लाने का रास्ता साफ

पंजाब नेशनल बैंक (पीएनबी) को करोड़ों रुपए का चूना लगाकर विदेश फरार होने वाले हीरा कारोबारी मेहुल चोकसी पर शिकंजा कस गया है। भारत के दवाब में एंटीगुआ सरकार ने मेहुल चोकसी की नागरिकता को खारिज करने का फैसला करने की खबर आ रही है। चोकसी को भारत वापस लाने के लिए प्रत्यर्पण प्रक्रिया मार्च में शुरू हुई थी। इसके लिए भारत की तरफ से लगातार दबाव बनाया जा रहा था। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार एंटीगुआ के प्रधानमंत्री गैस्टन ब्राउन ने कहा कि मेहुल चोकसी को पहले एंटीगुआ की नागरिकता मिली थी, लेकिन अब इसे रद्द किया जा रहा है और भारत को प्रत्यर्पित किया जा रहा है। उन्होंने साफ-साफ कहा कि वो अपने देश को अपराधियों के लिए सुरक्षित ठिकाना नहीं बनने देंगे। 

गैस्टन ब्राउन ने कहा कि कानूनी प्रक्रिया जल्द से जल्द पूरा करके वो चोकसी को भारत भेजेंगे। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार चोकसी को भारत प्रत्यर्पित करने से पहले उसके हर कानूनी रास्ते आजमाने का इंतजार कर रही है। एंटीगुआ की एक कोर्ट अगले महीने चोकसी से जुड़े मामले की सुनवाई करेगा। उस समय तक काफी हद तक स्थिति साफ होने की उम्मीद है। हालाँकि, केंद्रीय विदेश मंत्री सुब्रमण्यम जयशंकर ने इस मामले पर किसी भी तरह की टिप्पणी करने से मना कर दिया है। उनका कहना है कि उन्हें इसके बारे में कोई जानकारी है।

गौरतलब है कि, चोकसी पिछले साल से ही एंटीगुआ में है। कुछ दिन पहले उसने एक स्थानीय टीवी चैनल से कहा था कि उसके डॉक्टर ने उसे यात्रा नहीं करने की सलाह दी है। उसने दावा किया था वह भारत से भागा नहीं था बल्कि हॉर्ट सर्जरी के लिए देश छोड़ा था। चोकसी ने कहा था कि वो जाँच में सहयोग करने के लिए तैयार है, लेकिन स्वास्थ्य कारणों की वजह से भारत की यात्रा नहीं कर सकता है। जिसके बाद भारतीय जाँच एजेंसियों ने एंबुलेंस के जरिए वापस लाने का प्रस्ताव भी दिया था।

ताजा जानकारी के मुताबिक, एंटीगुआ की तरफ से अभी तक मेहुल चोकसी की नागरिकता को रद्द करने की आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है। विदेश मंत्रालय के अनुसार अभी एंटीगुआ की सरकार द्वारा मेहुल की नागरिकता छीन लिए जाने की आधिकारिक पुष्टि होना बाकी है।

सोमवार (जून 24, 2019) को हाईकोर्ट ने मेहुल चोकसी के खिलाफ कड़ा रुख अपनाते हुए कहा था कि वो अपना स्वास्थ्य संबंधी जाँच के रिपोर्ट्स मुंबई के जेजे हॉस्पिटल को भेजे। अदालत ने कहा कि अस्पताल के मुख्य कॉर्डियोलॉजिस्ट रिपोर्ट की स्टडी और एनालिसिस करने के बाद अदालत को बताएंगे कि वह भारत की यात्रा करने के लिए फिट है या नहीं।

सरकारी बस में गए और चटाई पर सोए, फिर भी कुमारस्वामी ने ख़र्च किए ₹1 करोड़

कर्नाटक के मुख्यमंत्री एचडी कुमारस्वामी अपने बयानों व गठबंधन सरकार का मुखिया रहते हुए अपनी मजबूरियाँ गिनाने के लिए जाने जाते हैं। अब कुमारस्वामी एक अन्य वजह से विवादों में हैं। दरअसल, एक गाँव में एक रात बिताने के दौरान मुख्यमंत्री ने 1 करोड़ रुपए ख़र्च कर डाले। सीएम कुमारस्वामी अपने ‘विलेज स्टे’ कार्यक्रम के तहत कलबुर्गी के चंदरकी गाँव में ठहरे थे। वहाँ वे सरकारी विद्यालय में रुके, गद्दे को ठुकरा कर चटाई पर रात व्यतीत की और किसी महँगे रेस्टोरेंट से खाना भी नहीं मँगाया- फिर भी उनके इस कार्यक्रम का बजट 1 करोड़ रुपए के पार हो गया। इस ख़बर को सुन कर लोग हैरान हैं कि ऐसा कैसे हो सकता है!

सबसे बड़ी बात कि गाँव पहुँचने के लिए उन्होंने स्टेट ट्रांसपोर्ट कॉर्पोरेशन की बस का प्रयोग किया। कहा जा रहा है कि इन रुपयों में से ज्यादातर उनसे मिलने आने वाले महत्वपूर्ण लोगों व उनके साथ गए लोगों पर ख़र्च किया गया। ‘द न्यू इंडियन एक्सप्रेस’ के सूत्रों के अनुसार, 25 लाख रुपए सिर्फ़ उन लोगों के भोजन पर ख़र्च किए गए, जो यादगीर ज़िले के विभिन्न इलाक़ों से चंदरकी पहुँचे थे। इसके अलावा इतनी ही रक़म अधिकारियों द्वारा काउंटर बनाने व अन्य व्यवस्थाएँ करने पर ख़र्च की गई। ये काउंटर लोगों द्वारा याचिकाएँ लेने के लिए बनाए गए थे।

कुल 25,000 लोगों के लिए भोजन की व्यवस्था की गई थी, जिनमें से 10,000 लोग पहुँचे ही नहीं। क़रीब 500 विद्यार्थियों, शिक्षकों, नेताओं व अधिकारियों को खाना खिलाया गया। इसके अलावा उन्हें अगली सुबह के लिए टिफिन में भोजन दिया गया। अब सबसे प्रमुख ख़र्चे पर आते हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक़, 50 लाख रुपए सिर्फ़ स्टेज बनाने और मंच सम्बंधित अन्य व्यवस्थाएँ करने में ख़र्च की गईं। अपने ‘जनता दर्शन’ कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने कुल 4000 लोगों से मुलाक़ात की जबकि 1800 लोगों ने अपनी याचिकाएँ भेजने के लिए ऑनलाइन माध्यम का सहारा लिया।

मुख्यमंत्री एचडी कुमारस्वामी ने अधिकारियों को निर्देश दिया था कि उनके इस कार्यक्रम को एकदम सिम्पल रखा जाए और कोई तामझाम न किए जाएँ। लेकिन, कुमारस्वामी के साथ कई मंत्रियों, विधायकों और अधिकारियों का हुजूम भी चलता है, जिनके लिए व्यवस्थाएँ करनी होती है। तमाम सिम्पल व्यवस्था के दावों के बावजूद ज़मीनी स्तर पर कुछ और ही हुआ। कुमारस्वामी ने कहा कि ‘ग्राम वास्तव्य’ कार्यक्रम के दौरान मिल रही शिकायत याचिकाओं के निवारण के लिए एक अलग सेल का गठन किया गया है। इससे पहले 2006 में मुख्यमंत्रित्व काल के दौरान भी कुमारस्वामी इस तरह के कार्यक्रम कर चुके हैं।

कर्नाटक में नेता प्रतिपक्ष बीएस येदियुरप्पा ने कहा कि कुमारस्वामी ने 24 घंटे में कुल 1.22 करोड़ रुपए ख़र्च कर दिए। उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री ने रायचूर के एक गाँव में रुकने के दौरान भी 1 करोड़ रुपए ख़र्च किए थे। कर्नाटक भाजपा के अध्यक्ष येदियुरप्पा ने कुमारस्वामी से पूछा कि किसानों का लोन माफ़ करने वाले दावों की वास्तविकता क्या है? उन्होंने पूछा कि 1500 किसानों की आत्महत्या के बारे में सीएम का क्या कहना है? पूर्व मुख्यमंत्री येदियुरप्पा ने कहा कि मुख्यमंत्री कुमारस्वामी को अपने लाइफस्टाइल के लिए गाँवों में रुकने के बहाने इतने रुपए ख़र्च करने पर शर्म आनी चाहिए। वहीं अधिकारियों ने इन आरोपों का खंडन किया है।