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मीडिया गिरोह ने RSS प्रमुख मोहन भागवत पर छापी Fake News, PCI के सामने हुए शर्मसार

कुछ समय पहले इंडियन एक्सप्रेस के स्तंभकार करन थापर और एक्सप्रेस समूह के मराठी दैनिक ‘लोकसत्ता’ के संपादक गिरीश कुबेर ने सरसंघचालक मोहन भागवत के ऊपर लेख लिखा था। इस लेख में सच्चाई को बिना जाने मोहन भागवत के वक्तव्य को तोड़ मरोड़ कर प्रकाशित किया गया था कि 2015 में हुई अख़लाक की मौत पर उन्होंने एक व्याख्यान के दौरान टिप्पणी की, कि वेदों में गाय की हत्या करने वालों को मारने का निर्देश है। जबकि मोहन भागवत ने ऐसी कोई बात नहीं कही थी। उस लेख पर डोंबीवली के स्थानीय श्री अक्षय फाटक ने शिकायत दर्ज की थी, जिसपर भारतीय प्रेस परिषद (Press Council of India) ने दोनों अखबारों के संपादकों के ख़िलाफ़ नोटिस जारी किया। इस घटना पर प्रेस परिषद ने दोनों अखबारों की कड़े शब्दों में निंदा की।

2018 में नई दिल्ली में संघ ने ‘भविष्य का भारत’ नामक तीन दिन की व्याख्यान शृंखला आयोजित की थी। इस दौरान संघ प्रमुख मोहन भागवत का बातचीत का सत्र रखा गया। जिसके बाद 21 सितंबर 2018 को लोकसत्ता में संपादकीय छपा जिसमें अखलाक़ की मौत पर मोहन भागवत के नाम पर झूठे बयान को प्रकाशित किया गया। इसमें लिखा था कि उन्होंने तीन दिन के व्याख्यान के बाद दुखद घटना पर ये प्रतिक्रिया दी है कि वेदों में गाय को मारने वाले की हत्या करने का आदेश है।

इसी दिन इंडियन एक्सप्रेस में भी ऐसा लेख छपा जिसमें थापर ने लेख का टाइटल दिया, “HAS THE GROUND SHIFTED.” जबकि मोहन भागवत ने वास्तविकता में अख़लाक़ मामले में हुई हिंसा और मॉब लिचिंग के प्रति कड़ी निंदा जाहिर की थी, लेकिन अखबारों ने इसे अपने विचारों में लपेटकर पेश करना उचित समझा।

जब इस मामले को 29 मार्च 2019 में प्रेस परिषद में सुना गया तो न्यूजपेपर की ओर से जवाब आया कि उन्हें लगा जो बयान उन तक पहुँचा वो सही बयान हैं, जबकि वास्तव में वह एक भूल थी। लेकिन प्रेस परिषद ने पाया कि यह कोई अनजाने में हुई गलती नहीं है। प्रेस परिषद द्वारा जाँच कमेटी की रिपोर्ट स्वीकार कर ली गई जिसमें कहा गया है कि गलती तब मानी जाती जब इसे कोई जूनियर पत्रकार करता।

तब इस सुनवाई को टाला जा सकता था, लेकिन इस मामले में गलती दिग्गज़ अनुभवी पत्रकारों से हुई है। इसलिए जाँच कमेटी का विचार है कि ये गलती ‘Bona-fide’ (अनजाने में की गई भूल) नहीं है। परिषद ने कहा कि वक्तव्य के तथ्य की जाँच की जा सकती थी। इस तरह के बयानों को आधार बनाते हुए स्तंभकारों को अधिक सावधानी बरतनी चाहिए, जिसमें दोनों संस्थानों के दिग्गज पत्रकार असफल रहे।

प्रेस परिषद ने दोनों अखबारों का माफीनामा भी खारिज कर दिया और शिकायतकर्ता की शिकायत पर कहा है कि पाठक को अधिकार है कि अगर वो अखबार में किसी तरह की गलती पाता है तो सीधे परिषद से संपर्क करे। परिषद ने इस मामले में इंडियन एक्सप्रेस और लोकसत्ता की कड़े शब्दों में निंदा की जिसकी एक कॉपी जनसंपर्क निदेशक, महाराष्ट्र सरकार और मुंबई के डिप्टी कमिशनर ऑफ पुलिस को भी दी जाएगी।

5 लाख डॉक्टर आज हड़ताल पर, बंद कमरे में नहीं मीडिया के सामने हो बातचीत: डॉक्टरों की माँग

पश्चिम बंगाल में जनहित को देखते हुए डॉक्टरों ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से मिलने के लिए तैयार हो गए हैं। लेकिन डॉक्टरों की शर्त है कि मुख्यमंत्री से उनकी मुलाकात बंद कमरे में न होकर, मीडिया के सामने हो। इस मीटिंग को लेकर अभी डॉक्टर या फिर सीएम की तरफ से कोई समय या स्थान की जानकारी नहीं दी गई है।

गौरतलब है इससे पहले शुक्रवार-शनिवार को डॉक्टरों ने सीएम से मुलाकात के निमंत्रण को ठुकरा दिया था। उनका कहना था कि इस मीटिंग को लेकर डॉक्टरों में काफ़ी डर है, जिसके कारण उनका कोई प्रतिनिधि सीएम से मुलाकात करने नहीं जाएगा। पहले डॉक्टरों की माँग थी कि ममता बनर्जी को एनआरएस मेडिकल कॉलेज और हॉस्पिटल आकर डॉक्टरों से बात करनी चाहिए लेकिन ममता ने डॉक्टरों का बात नहीं मानी और अपनी हठ पर अड़ी रहीं। उनकी इस हठ के कारण बिहार में भी 12,000 डॉक्टर आज हड़ताल पर हैं जहाँ AES से अब तक 100 से ज्यादा बच्चे मर चुके हैं।

हालाँकि इस बीच, इंडियन मेडिकल एसोसिएशन ने स्पष्ट किया है कि भले ही बंगाल में हड़ताल खत्म हो जाए, लेकिन वह डॉक्टरों की सुरक्षा की माँग के लिए सोमवार (जून 17, 2019) को देशभर में हड़ताल करेंगे। उनकी ये हड़ताल सेंट्रल एक्ट को लेकर होगी। आईएमए के मुताबिक इस मामले पर सालों से माँग चली आ रही है, लेकिन उन्हें बदले में केवल आश्वासन ही मिलता है।

ये हड़ताल आज सुबह 6 बजे से शुरू होकर कल (18 जून 2019) सुबह 6 बजे तक होगी। इन 24 घंटों में देशभर से 5 लाख डॉक्टर हड़ताल पर रहेंगे। वहीं युनाईटेड रेजिडेंट एंड डॉक्टर्स असोसिएशन इंडिया का कहना है कि उनकी हड़ताल तब तक जारी रहेगी जब तक उनकी माँग का कोई समाधान नहीं निकलता। इसी प्रकार डीएमए (दिल्ली मेडिकल एसोसिएशन) ने भी सभी निजी क्लिनिक और सेंटर से अपने अस्पताल, क्लिनिक और लैब बंद रखने की अपील की है।

हड़ताल के दौरान दिल्ली में मोहल्ला क्लिनिक में ओपीडी बेसिस पर इलाज संभव होगा। दिल्ली सरकार के डीजीएचएस डॉक्टर अशोक कुमार राणा ने बताया है कि मोहल्ला क्लीनिक में स्ट्राइक का असर नहीं होगा, यहाँ रुटीन में ही पहले की तरह इलाज होगा। इसके अलावा हड़ताल होने के बावजूद सभी सरकारी और निजी अस्पतालों में इमरजेंसी में इलाज होगा। इस हड़ताल में दिल्ली का एम्स शामिल नहीं होगा, यहाँ आम दिनों की तरह इलाज किया जाएगा। एम्स के मुताबिक, डॉक्टर इस आंदोलन के समर्थन में काली पट्टी बांधकर विरोध दर्ज कराएँगे लेकिन सोमवार को आम दिनों की तरह ओपीडी में मरीजों का इलाज करेंगे।

UP में नाबालिग किशोर के साथ गैंगरेप, वसीम व रहमान सहित 4 के ख़िलाफ़ मामला दर्ज

उत्तर प्रदेश में बलात्कार की घटनाएँ थमती नहीं नज़र आ रही हैं। अपराधियों का बोलबाला है। लड़कियाँ तो दूर की बात, अब बेख़ौफ़ दुष्कर्मी लड़कों तक को नहीं छोड़ रहे हैं। अब शाहजहाँपुर से गैंगरेप की नई घटना सामने आई है। ताज़ा मामले के अनुसार, शहर के पुवाया थानाक्षेत्र में एक नाबालिग किशोर के साथ सामूहिक बलात्कार किया गया। मामले में एक ही गाँव के 4 लोगों को आरोपित बनाया गया है। ये सभी जलजीरा पिलाने का प्रलोभन दे कर 13 वर्षीय किशोर को बगीचे में ले गए और फिर उसके साथ गैंगरेप किया। आरोपितों के नाम है- वसीम, रहमान रवि और गुल्ली।

पुलिस ने मामला दर्ज कर आरोपितों को धर-पकड़ के लिए प्रयास तेज़ कर दिया है। पुवाया के थाना प्रभारी जसवीर सिंह ने इस मामले में अधिक जानकारी देते हुए कहा, “13 वर्षीय किशोर को गाँव के ही 4 युवक शनिवार की शाम आम का जलजीरा पिलाने के बहाने गाँव के बाहर स्थित एक बगीचे में ले गए। इसके बाद चारों आरोपितों ने उसके साथ कुकर्म किया और किसी को कुछ भी न बताने की धमकी भी दी। किशोर ने घर आकर परिजनों को घटना के बारे में बताया।

सभी आरोपित घटना के बाद से फरार हैं। पीड़ित नाबालिग किशोर को मेडिकल जाँच के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया है। सभी आरोपितों ने बारी-बारी से किशोर के साथ बलात्कार किया था। परिजनों को जब पीड़ित नाबालिग ने अपनी आपबीती सुनाई, उसके बाद पुलिस में मामला दर्ज कराया गया।

हॉन्ग कॉन्ग के विशेषाधिकार पर प्रहार: चीन के ख़िलाफ़ 10 लाख लोगों ने किया बड़ा विरोध प्रदर्शन

हॉन्ग कॉन्ग में चीन द्वारा थोपे जा रहे क़ानून के ख़िलाफ़ बड़ी संख्या में लोगों ने सड़क पर उतर कर विरोध प्रदर्शन किया। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, क़रीब 10 लाख लोग काले कपड़ों में सड़कों पर उतरे। बीजिंग द्वारा प्रदेश पर थोपे जा रहे क़ानून के ख़िलाफ़ लोगों ने सड़कें जाम की। लोग उस क़ानून के विरोध में क्रोधित हैं, जिसमें कहा गया है कि किसी भी आरोपित को पहले मेनलैंड चीन ले जाया जाएगा और वहाँ पर उसके ख़िलाफ़ मामला चलाया जाएगा। चीन ने 1997 में इस पूरे क्षेत्र को नियंत्रण में लिया था, उसके बाद से लेकर आज तक विशेष दर्जा प्राप्त क्षेत्र के लिए यह सबसे कठिन समय है। जनता और सुरक्षा बलों के बीच झड़पें भी हुईं।

यह सब एक सप्ताह से चल रहा है। लोगों ने अपने बैनरों में प्रशासक कैरी लैम के इस्तीफे की माँग की। जनता कैरी से नाराज़ है और इस क़ानून को हॉन्ग कॉन्ग की स्वतन्त्रता और संप्रभुता पर हमले के रूप में देख रही है। जनता को आशंका है कि इस क़ानून के लागू हो जाने के बाद किसी भी आरोपित को चीन भेज कर उसके बाद बुरा बर्ताव किया जाएगा। ऐसे आरोपितों को प्रताड़ित कर के उसपर राजनीतिक षड़यंत्र के तहत सजा देने की कोशिश की जा सकती है। जनता का कहना है कि कैरी लैम इस्तीफा दें, पुलिस अपने ही लोगों के ख़िलाफ़ हिंसक रुख अख्तियार करने के लिए माफ़ी माँगे और यह प्रत्यर्पण क़ानून वापस लिया जाए

बीजिंग ने हॉन्ग कॉन्ग के मामले में ‘एक देश, दो सिस्टम’ वाली नीति अपनाने की बात हमेशा से की है लेकिन हॉन्ग कॉन्ग की जनता मानती है कि अब प्रदेश के सामाजिक, न्यायिक और राजनीतिक व्यवस्था पर शी जिनपिंग द्वारा धीरे-धीरे प्रहार किया जा रहा है। हालाँकि, कैरी ने इस क़ानून पर तत्काल के लिए रोक लगाने की बात कही है लेकिन फिर भी जनता ने सरकारी इमारतों का घेराव किया। चीन के विदेश मंत्रालय ने सफ़ाई देते हुए कहा, “हॉन्ग कॉन्ग के निवासियों के अधिकार और स्वतन्त्रता क़ानून के अनुसार पूरी तरह सुरक्षित है। हॉन्ग कॉन्ग की समृद्धि और स्थिरता को बनाए रखना ना केवल चीन के हित में बल्कि दुनिया के सभी देशों के हित में हैं।

मानवाधिकार के मामले में चीन के रवैये को देखते हुए हॉन्ग कॉन्ग के लोगों का डर जायज है। हॉन्ग कॉन्ग पहले ब्रिटिश शासन के आधीन था। हॉन्ग कॉन्ग को विशेष दर्जे के तहत कई अधिकार 50 वर्षों के लिए दिए गए थे, जो 2047 में ख़त्म होने वाला है। लेकिन, चीन की कम्युनिस्ट सरकार इसे पहले ही ख़त्म करना चाहती है। प्रशासक कैरी लैम को भी चीन समर्थक माना जाता है।

FATF के 27 में से 25 शर्तों पर फेल पाकिस्तान, पाई-पाई को मोहताज

Financial Action Task Force (FATF) से पाकिस्तान ने लश्कर और जैश को आर्थिक सप्लाई रोकने के लिए जो 27 वादे किए थे, उनमें से 25 वह पूरे करने में नाकाम रहा है। इसके अलावा वह मुखौटा संगठनों जैसे जमात-उद-दावा और फलह-ए-इंसानियत फाउंडेशन पर भी लगाम कसने में नाकाम रहा है। इसीलिए FATF की वह ‘ग्रे’ लिस्ट में बना हुआ है और उसकी आर्थिक हालत पतली है, जिसके चलते वहाँ की सेना को भी अपना बजट कम करना पड़ा है

IMF, World Bank, EU दिखाते रहेंगे ठेंगा

FATF की ग्रे लिस्ट में बने रहने का मतलब है पाकिस्तान को IMF, World Bank, EU जैसे बड़े ‘कर्जदाताओं’ से कर्ज मिलने की संभावना नहीं है। वह उसकी आर्थिक रेटिंग गिराते रहेंगे, जिससे पहले से पतली उसकी अर्थव्यवस्था चरमराने लगेगी। ऑपइंडिया ने यह खबर पहले भी प्रकाशित की थी कि इस आर्थिक संकट में पाकिस्तान को अपनी सेना का बजट भी कम करना पड़ा है

नहीं झोंक पाया धूल

पकिस्तान ने दुनिया की आँखों में धूल झोंकने के लिए लश्कर, जैश जैसे संगठनों के काडर को गिरफ्तार करने का नाटक किया था। लेकिन यह गिरफ़्तारी Anti-Terrorism Act, 1997 के अंतर्गत नहीं, Maintenance of Public Order (MPO) Act के अंतर्गत हुई थी। इसमें अधिकतम 60 दिन तक ही उन्हें जेल में रखा जा सकता है। पहले भी पाकिस्तान जिहाद के सरगनाओं मसूद अज़हर और हाफ़िज़ सईद को जेल में डालने का नाटक कर चुका है। लेकिन कभी भी उन्हें आतंक-रोधी धाराओं में मुकदमे चला कर सजा दे पाने में पाकिस्तान नाकाम ही रहा है।

इसके अलावा केवल गिरफ़्तारी ही FATF की माँग भी नहीं थी। FATF ने पाकिस्तान को खातों पर रोक, हथियारों तक पहुँच न होने देने और यात्रा प्रतिबंधों की भी शर्त रखी थी। इसके अलावा FATF चाहता था कि जिहादियों पर आर्थिक दंड भी इतनी बड़ी राशि का हो जो जिहाद से हतोत्साहित कर सके। MPO के अंतर्गत गिरफ्तारी से इनमें से कुछ भी नहीं किया जा सकता।

जिहादियों के मदरसों के लिए 70 लाख डॉलर?

FATF ने यह भी पूछा है कि क्या पाकिस्तान ने कोई जाँच इस मामले पर बिठाई है कि 70 लाख अमेरिकी डॉलर कथित रूप से जिहादियों से तकनीकी रूप से जब्त किए गए मदरसों, स्कूलों, अस्पतालों आदि को बदस्तूर जारी रखने और उनके रख-रखाव में खर्च हो रहे हैं। इसमें से 20 लाख डॉलर पाकिस्तानी पंजाब और बाकी 50 लाख डॉलर बाकी समूचे पाकिस्तान में खर्च हो रहे हैं

पाकिस्तान को FATF में ब्लैकलिस्ट किए जाने की भारत माँग करता रहा है। जवाब में पाकिस्तान में भारत को उसके एशिया-प्रशांत सह-चेयर पद से हटाए जाने की माँग की है। इसके लिए उसने दोनों देशों के बिगड़े संबंधों का हवाला दिया है।

धर-दबोचे 70+ आतंकी, उनके ठिकानें किए तबाह: भारत-म्यांमार के सेनाओं की संयुक्त कार्रवाई

भारत और म्यांमार ने साझा ऑपरेशन करते हुए उत्तर-पूर्वी राज्यों में कई आतंकी कैम्पों को तबाह कर दिया। दोनों देशों की सेनाओं ने मणिपुर, नागालैंड और असम में सक्रिय आतंकी संगठनों के कैम्पों को तबाह किया। यह सब कुछ एक दिन में नहीं हुआ बल्कि यह भागीदारी पूरे 3 सप्ताह तक चली। इससे पहले ऑपरेशन सनशाइन के तहत भी दोनों सेनाओं ने यह कार्रवाई की थी। भारत और मयांमार आपस में 1640 किलोमीटर की सीमा साझा करते हैं, ऐसे में दोनों देशों के बीच इस तरह की अंडरस्टैंडिंग होना सही है। ताज़ा ऑपरेशन को ‘ऑपरेशन सनशाइन 2’ कहा जा रहा है।

दोनों देशों की सेनाओं ने इस संयुक्त ऑपरेशन में जिन आतंकी संगठनों को निशाना बनाया गया, उनमें कामतापुर लिबरेशन ऑर्गेनाइजेशन (KLO), एनएससीएन (NSCN), उल्फा और नेशनल डेमोक्रेटिक फ्रंट ऑफ बोडोलैंड (NDFB) शामिल हैं। इस अभियान के दौरान 70 से भी अधिक आतंकियों को धर-दबोचा गया और उनके ठिकाने तबाह कर दिए गए। इस अभियान में असम राइफल्स के जवानों ने भी भाग लिया। दोनों देशों की ख़ुफ़िया एजेंसियाँ लगातार एक-दूसरे से जानकारियाँ साझा कर रही हैं और इसके आधार पर आगे भी ऐसी कार्रवाइयाँ की जा सकती हैं।

इससे पहले 2 से 26 फरवरी तक ऑपरेशन सनशाइन 1 चलाया गया था। तब भारतीय सेना ने अपनी सीमा में अराकान उग्रवादी समूह के ख़िलाफ़ कड़ी कार्रवाई करते हुए उसकी कमर तोड़ दी थी। 2015 में भी सेना ने एनएससीएन के खिलाफ इंडो-म्यांमार बॉर्डर पर ऑपरेशन चलाया था। यह ऑपरेशन इसलिए चलाया गया था क्योंकि आतंकियों के हमले के कारण मणिपुर में सेना के 18 जवान वीरगति को प्राप्त हो गए थे।

मिसाइलमैन के जन्म दिवस को ‘राष्ट्रीय छात्र दिवस’ घोषित करने की माँग

बीजेपी नेता और पूर्व राज्यसभा सांसद आनंद भास्कर रापोलू ने पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम के जन्म दिवस यानी 15 अक्टूबर को ‘राष्ट्रीय छात्र दिवस’ घोषित करने की माँग की है। उन्होंने मानव संसाधन विकास मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक को चिट्ठी लिखी है।

बीजेपी नेता रापोलू ने लिखा, “देश के युवाओं को इनोवेशन के रास्ते पर आगे बढ़ाने के लिए हमारी पार्टी ने डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम को राष्ट्रपति बनाने का एक महत्वपूर्ण फैसला लिया था। मैंने इस मुद्दे को पूर्व एचआरडी मिनिस्ट्री के सामने भी उठाया था।” इसके अलावा उन्होंने दिल्ली के औरंगजेब रोड का भी ज़िक्र किया, इस रोड का नाम बदलकर डॉ एपीजे अब्दुल कलाम रख दिया गया है।

अपनी चिट्ठी में उन्होंने इस बात पर भी ज़ोर दिया कि बीजेपी ने भारत के राष्ट्रपति के रूप में डॉ एपीजे अब्दुल कलाम को चुनने में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और केंद्र सरकार ने भी उनके साथ राष्ट्रीय राजधानी में एक महत्वपूर्ण सड़क का नाम देकर उनकी स्मृति को याद किया। उन्होंने मानव संसाधन विकास मंत्री से आग्रह किया कि वे इस दिन को उसी उत्साह के साथ मनाएँ, जिस तरह पूरा देश 21 जून को ‘विश्व योग दिवस’ और 7 अगस्त को ‘राष्ट्रीय हथकरघा दिवस’ के रूप में मनाता है। जिस दिन डॉ एपीजे अब्दुल कलाम का निधन हुआ, देश के कई विश्वविद्यालय और संस्थान 15 अक्टूबर को अपने तरीके से मनाते हैं।

वर्ष 2002 में डॉ एपीजे अब्दुल कलाम ने देश के 11वें राष्ट्रपति के रूप में पदभार संभाला था। देश उन्हें ‘मिसाइल मैन’ के नाम से भी याद करता है। भारत को मिसाइल तकनीक में आत्मनिर्भर बनाने के पीछे उनका बहुत बड़ा योगदान था।

आप नेता बंगाल में डाक्टरों के विरोध से अनजान, सांकेतिक विरोध पर उठाया सवाल, ट्विटर पर छिड़ा घमासान

यह दावा करने के बाद कि दिल्ली में AAP सरकार द्वारा प्रस्तावित मुफ्त मेट्रो यात्रा योजना से दिल्ली मेट्रो की आय बढ़ जाएगी, पार्टी के राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने अपनी अज्ञानता का प्रदर्शन किया। दरअसल, कोलकाता में डॉक्टरों पर हमला करने वाले गुंडों के ख़िलाफ़ कार्रवाई की माँग करते हुए डॉक्टरों की एक तस्वीर सोशल मीडिया पर छाई हुई है। इस फ़ोटों में सभी डॉक्टर्स ने अपने सिर पर जो पट्टी बाँधी है उसमें माथे पर लाल पैच (सांकेतिक चोट) लगा हुआ है।

न्यूज़ एजेंसी ANI द्वारा ख़बर स्वरूप इस फ़ोटो को शेयर किया गया जिस पर आप नेता संजय सिंह ने प्रतिक्रिया दर्ज की और लिखा, “ये ANI की फ़ोटो है या फिर फ़ोटो शाप है इसमें तो सारे डॉक्टर को एक ही जगह चोट लगी है।”

ऐसा लगता है कि AAP नेता को बंगाल में डॉक्टर्स की हड़ताल के बारे में कुछ नहीं मालूम है, और इसीलिए उन्हें यह भी नहीं मालूम है कि उन्हीं डॉक्टर्स के समर्थन में पूरे देश के डॉक्टर्स अपना विरोध दर्ज करा रहे हैं। इसके लिए उन्होंने प्रतीकात्मक स्वरूप माथे पर पट्टी बाँधी और सांकेतिक चोट के ज़रिए डॉक्टर्स पर हुए हमले का विरोध जताया। ग़ौरतलब है कि पश्चिम बंगाल में NRS अस्पताल में डॉक्टरों पर हमले के विरोध में, डॉक्टर अपने सिर पर लाल दाग वाली पट्टियाँ लपेट रहे हैं, और कुछ हेलमेट पहने हुए भी दिखाई दिए। संजय सिंह ने जिस फ़ोटो पर प्रतिक्रिया दी, वह एम्स की है, जहाँ डॉक्टर्स ने ऐसा ही किया। यह विरोध प्रदर्शनों में इस्तेमाल किए जाने वाले काले बैंड के उपयोग के समान है, और इस बारे में AAP सांसद को छोड़कर पूरे देश में सब जानते हैं।

एक डॉक्टर एक सहयोगी को पट्टी पर लाल दाग लगाने में मदद करते हुए


बाद में, संजय सिंह ने ट्वीट किया कि एक पत्रकार मित्र ने उन्हें सूचित किया है कि एम्स में डॉक्टर नकली पट्टियों के साथ विरोध कर रहे हैं, और कहा कि यह सही नहीं है। उन्होंने कहा कि डॉक्टरों को इस तरह के विरोध प्रदर्शनों से दूर रहना चाहिए क्योंकि इस तरह की फ़ोटो से यह भ्रम फैलने का डर है कि पूरे देश में डॉक्टर्स को पीटा जा रहा है।

अत: यह बात स्पष्ट हो गई है कि श्री सिंह विरोध में प्रतीकों के इस्तेमाल के बारे में कुछ नहीं जानते हैं, और उन्हें लगता है कि लोग डॉक्टर्स पर सच में हमले कर रहे हैं।

वन नेशन वन कार्ड: एक ही कार्ड से कर सकेंगे पूरे देश के मेट्रो में सफर

केंद्र सरकार जल्द ही एक नया स्मार्ट कार्ड लॉन्च करने जा रही है, जिसे देश के सभी मेट्रो में प्रयोग किया जा सकेगा। वन नेशन वन कार्ड की तर्ज पर एक शहर के मेट्रो जरिए देश में किसी भी शहर में सभी परिवहन सुविधा का लाभ उठाया जा सकता है। इस कार्ड की मदद से यात्रा के अलावा शॉपिंग भी की जा सकती है। फिलहाल लोगों को दूसरे शहर में जाने पर अलग से मेट्रो कार्ड या टोकन लेना पड़ता है, लेकिन सरकार जो नया कार्ड लॉन्च करेगी, उसका देश के किसी भी शहर में मेट्रो में इस्तेमाल किया जा सकता है, बस इसका इस्तेमाल करने से पहले उस शहर के काउंटर पर रिचार्ज कराना होगा। जानकारी के मुताबिक, शुरुआत में इस स्मार्ट कार्ड का उपयोग सिर्फ मेट्रो के लिए काम करेगा। फिर 2 महीने बाद डेबिट कार्ड व क्रेडिट कार्ड वाले फीचर भी शुरू कर दिए जाएँगे। एनएमआरसी की बसों में इसका इस्तेमाल डेबिट और क्रेडिट कार्ड की तरह किया जा सकेगा।

हालाँकि, इस स्मार्ट कार्ड का प्रयोग सीमित यात्राओं के लिए ही हो सकेगा। इन कार्ड को बनवाने के लिए Know Your Customer (KYC) प्रक्रिया अनिवार्य होगी और यह अलग-अलग बैंको से ही लिए जा सकेंगे। KYC प्रक्रिया को इसलिए अनिवार्य किया गया है, ताकि कार्ड का इस्तेमाल कोई दूसरा शख्स न कर सके। मेट्रो कार्ड एक तरह से क्रेडिट कार्ड या डेबिट कार्ड की तरह ही होगा। जिसका प्रयोग करना काफी आसान होगा। साथ ही ये भी व्यवस्था की जा रही है कि कार्ड के खो जाने या चोरी हो जाने पर इसे ब्लॉक करने के साथ ही नया कार्ड भी बनावाया जा सके।

कार्ड अगले 6 महीनों में लॉन्च किया जा सकता है। वन नेशन वन कार्ड प्रॉजेक्ट से जुडे़ एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि ऐसे लोग जो कम समय के लिए भारत आएँ हों या किसी शहर में उनके रुकने की अवधि बहुत कम हो, वो लोग वन नेशन वन कार्ड का प्रयोग नहीं कर सकेंगे। केवाईसी प्रक्रिया को पूरा किए बिना उनके लिए वन नेशन वन कार्ड जारी नहीं किया जाएगा। ऐसे लोगों के लिए एक वैकल्पिक कार्ड की व्यवस्था की जा रही है। जिसके लिए पासपोर्ट और आधार कार्ड जरूरी होगा। देश के नागरिकों को इस कार्ड के लिए आधार कार्ड की कॉपी तो वहीं विदेशी नागरिकों को पहचान पत्र के तौर पर पासपोर्ट की प्रति जमा करानी होगी।

पाकिस्तान से मिलने वाले रुपयों को लेकर आपस में झगड़ रहे हैं J&K के अलगाववादी

NIA द्वारा कश्मीरी अलगाववादियों के ख़िलाफ़ चलाई जा रही जाँच में कुछ अहम बातें पता चली हैं। जाँच एजेंसी ने कहा है कि कश्मीर के अलगाववादी नेताओं को विदेश से काफ़ी फंडिंग मिली लेकिन इन्होंने इन रुपयों का इस्तेमाल अपने व्यक्तिगत फायदों के लिए किया। अलगाववादी नेताओं ने अपने लिए अकूत संपत्ति का अर्जन किया और अपने बच्चों को विदेश पढ़ने भेजा। हुर्रियत कॉन्फ्रेंस व अन्य अलगाववादी संगठनों के कई नेताओं से पूछताछ के दौरान इन लोगों ने स्वीकार किया कि उन्हें कश्मीर में अलगाववाद फैलाने के लिए पाकिस्तान से फंडिंग मिलती है।

दुख़्तरन-ए-मिल्लत की नेत्री आसिया अंद्राबी के बेटे ने मलेशिया में पढ़ाई की है और टेरर फंडिंग मामले में गिरफ़्तार ज़हूर वटाली ने उसका पूरा ख़र्च वहन किया था। एनआईए ने इस मामले में अंद्राबी से पूछताछ की। अंद्राबी ने पूछताछ के दौरान स्वीकार किया कि वह और उनका संगठन विदेश से रुपए जुटाता है और फिर कश्मीर में महिलाओं द्वारा प्रदर्शन कराने के लिए इन रुपयों का इस्तेमाल किया जाता है। अंद्राबी के बेटे मोहम्मद बिन वसीम ने मलेशिया में रहते हुए जिन बैंक खातों का प्रयोग किया, उसके बारे में अधिक जानकारी जुटाने के लिए एनआईए पहले ही सम्बद्ध अधिकारियों से संपर्क कर चुकी है।

एक अन्य अलगाववादी नेता शब्बीर शाह से पहलगाम में उनके होटल सम्बंधित व्यापार को लेकर पूछताछ की गई। उस होटल के पाकिस्तान से प्राप्त किए गए रुपयों का इस्तेमाल कर के बनाए जाने की बात सामने आई है। पाकिस्तान के आकाओं और “ऑल पार्टी हुर्रियत कॉन्फ्रेंस” के नेताओं द्वारा हुर्रियत से जुड़े संगठनों के खातों में रुपए ट्रांसफर किए गए। एनआईए के पास इससे सम्बंधित सबूत हैं और इसे लेकर शब्बीर शाह से पूछताछ की गई। शब्बीर के जम्मू, श्रीनगर और अनंतनाग में भी व्यापार हैं।

एक और चौंकाने वाली बात यह सामने आई है कि विदेशी फंडिंग को लेकर अलगाववादी नेताओं में भी आपस में मतभेद है। कश्मीरी पत्थरबाजों के ‘पोस्टर बॉय’ मशरत आलम ने एनआईए को बताया कि हवाला के जरिए पाकिस्तान से रुपए अलगाववादियों को भेजे जाते हैं। इस फंडिंग और इसके प्रयोग को लेकर अलगाववादी नेता आपस में ही लड़ाई कर रहे हैं, ऐसा आलम ने दावा किया है। यासीन मलिक और वटाली अभी जाँच एजेंसी के कब्ज़े में है और सुप्रीम कोर्ट ने वटाली की जमानत याचिका खारिज़ कर दी थी। टेरर फंडिंग की जाँच कर रही एनआईए ने कई गिरफ्तारियाँ की है और अब मामले में सिर्फ़ कड़ियाँ जोड़ने का काम किया जा रहा है।

एनआईए ने कई अन्य अलगाववादियों को भी हिरासत में लेकर उनसे पूछताछ की है। कयास लगाए जा रहे हैं कि टेरर फंडिंग के मामले में उनकी निशानदेही पर कश्मीर घाटी से कुछ अन्य गिरफ्तारियाँ भी हो सकती हैं।