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TMC विधायक सुनील सिंह समेत 12 पार्षद होंगे BJP में शामिल, दिल्ली के लिए हुए रवाना

पश्चिम बंगाल में एक तरफ जहाँ डॉक्टरों के हड़ताल का मामला तूल पकड़ता जा रहा है, वहीं एक और बड़ी खबर आ रही है। दरअसल, लोकसभा चुनाव के नतीजे आने के बाद से तृणमूल कॉन्ग्रेस (टीएमसी) के नेताओं का भाजपा में शामिल होना लगातार जारी है। इसी कड़ी में अब बंगाल के नौपारा के टीएमसी विधायक सुनील सिंह ने ऐलान किया है कि वह 12 पार्षदों के साथ सोमवार (जून 17, 2019) को दिल्ली स्थित बीजेपी मुख्यालय में पार्टी में शामिल होंगे।

दिल्ली के लिए रवाना होने से पहले सुनील सिंह ने कहा, “पश्चिम बंगाल की जनता सबका साथ-सबका विकास चाहती है। दिल्ली में मोदी जी की सरकार है और हम चाहते हैं कि यही सरकार प्रदेश में भी बने। ताकि हम पश्चिम बंगाल का विकास कर सकें।”

इस बार के लोकसभा चुनाव में बंगाल में बीजेपी ने बड़ी जीत हासिल की है। 2014 में मात्र 2 सीटों पर सिमटी बीजेपी इस बार 18 सीटें जीत कर आई है। चुनाव परिणाम सामने आने के बाद टीएमसी के 3 विधायक और 50 से अधिक पार्षद टीएमसी का साथ छोड़कर भाजपा में शामिल हो चुके हैं। चुनाव प्रचार के दौरान पीएम मोदी ने बंगाल में एक रैली को संबोधित करते हुए कहा था कि चुनाव के नतीजों के बाद 40 विधायक भाजपा में शामिल होंगे। पीएम मोदी ने कहा था कि ये विधायक लगातार उनके संपर्क में हैं।

प्रधानमंत्री मोदी के अलावा भाजपा के बंगाल प्रभारी कैलाश विजयवर्गीय ने भी कहा था कि टीएमसी विधायक किश्तों में भाजपा ज्वाइन करेंगे। उन्होंने कहा था, “जैसे सात चरणों में लोकसभा का निर्वाचन हुआ, वैसे ही (दूसरी पार्टियों के नेताओं का) भाजपा में शामिल होना भी सात चरणों में होगा। आज तो केवल पहला चरण था।” नेताओं के पलायन के साथ ही पश्चिम बंगाल में राजनीतिक हत्याओं का दौर भी जारी है। टीएमसी के कार्यकर्ताओं द्वारा बीजेपी कार्यकर्ताओं की हत्याओं के मामले लगातार सामने आ रहे हैं।

योगी से सीख सकते हैं नीतीश कुमार: गोरखपुर में AES से हुई मौतों को इस तरह किया नियंत्रित

बिहार के मुजफ्फरपुर में 100 से भी अधिक बच्चे ASE (एक्यूट इंसेफेलाइटिस सिंड्रोम) के कारण जान गँवा चुके हैं और नीतीश सरकार व केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय इस त्रासदी को रोकने में नाकाम साबित हुए हैं। स्थानीय जनता के अनुसार, मरने वाले मासूमों की संख्या सरकारी आँकड़ों से कहीं ज्यादा है। पूरे उत्तर बिहार में फ़ैल चुके इस जापानी बुखार को लेकर प्रशासन अभी भी सुस्त बना हुआ है। आज से 2 वर्ष पहले तक योगी आदित्यनाथ की राजनीतिक व धार्मिक कर्मभूमि रहा गोरखपुर भी जापानी इंसेफेलाइटिस की चपेट में था।

2017 से पहले उत्तर प्रदेश (खासकर गोरखपुर में) में प्रति वर्ष हज़ारों बच्चों की मौतें होती थीं। 2017 में जब योगी आदित्यनाथ ने मुख्यमंत्री के रूप में उत्तर प्रदेश की सत्ता संभाली, तब उनके सामने इससे निपटने की सबसे बड़ी चुनौती थी, जो पिछली सरकारों की निष्क्रियता के कारण उन्हें विरासत में मिली थी। अकेले उसी वर्ष 500 से अधिक बच्चे अपनी जान गँवा चुके थे। गोरखपुर व आसपास के 14 जिले इस बीमारी की चपेट में थे। 2017 में गोरखपुर के अस्पताल में कई बच्चों की मौत के बाद यह एक बहुत बड़ा राजनीतिक मुद्दा भी बन गया था।

योगी आदित्यनाथ ने इस बीमारी से निपटने के लिए बड़े स्तर पर योजनाएँ तैयार कीं। इसके लिए उत्तर प्रदेश सरकार ने वर्ल्ड हेल्थ आर्गेनाईजेशन (WHO) और UNICEF जैसी अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं के साथ साझेदारी की और उनके साथ मिल कर एक एक्शन प्लान पर काम शुरू किया। एक बड़ा और व्यापक टीकाकरण अभियान शुरू किया गया। स्वास्थ्य व सफाई को लेकर जागरूकता फैलाने के तहत एक बड़ा अभियान चलाया गया। प्रभावित क्षेत्रों से सूअरों को अलग किया गया। फॉगिंग के लिए त्वरित प्रतिक्रया टीम को लगाया गया।

बच्चों के माता-पिता को घर-घर जाकर यह समझाया गया कि वे अपने बच्चों को मिट्टी की पुताई वाली जमीन पर न सोने दें। पीने का पानी के लिए इंडिया मार्क-2 वाटर पाइप का और हैंड पंप का प्रयोग करने की सलाह दी गई। इस बीमारी से जुड़े लक्षणों के बारे में हर परिवार को बताया गया और किसी भी आपात स्थिति में 108 एम्बुलेंस नंबर पर कॉल करने को कहा गया। इन सभी कार्यों के परिणाम भी अच्छे मिले। जापानी इंसेफेलाइटिस के कारण हुई मौतों में एक वर्ष के भीतर दो तिहाई की कमी आई। जहाँ 2017 में इस बीमारी से 557 जानें गई थीं, 2018 में यह आँकड़ा 187 रहा।

अगर 14 जिलों के आँकड़ों की बात करें तो 2017 में इस बीमारी को लेकर कुल 3817 मामले आए थे, 2018 में इसकी संख्या आधे से भी कम होकर 2043 पर पहुँच गई। जब इस बीमारी से पीड़ित होने वाले बच्चों की संख्या में कमी आई तो इसका अर्थ यह हुआ कि अस्पताल में भी कम बच्चे भर्ती होंगे। इससे डॉक्टरों को मृत्यु दर रोकने में मदद मिली। जहाँ 2017 में प्रत्येक 7 मरीज में से 1 की मृत्यु हो जाती थी, 2018 में हर 11 में से 1 बीमार की मृत्यु हुई। इस वर्ष फ़रवरी में जापानी इंसेफेलाइटिस की वजह से 1 भी बच्चे की जान जाने की बात सामने नहीं आई है।

अब चूँकि पूर्वी यूपी और उत्तरी बिहार के भौगोलिक हालात मिलते-जुलते हैं, बिहार सरकार को योगी प्रशासन से यह सीखना चाहिए कि उन्होंने कैसे इस बीमारी पर काबू पाने में सफलता हासिल की। हालाँकि, बिहार सरकार ने भी 2016 एवं 2017 में इस बीमारी से हुई मौतों में कमी लाने के प्रयास में सफलता पाई थी, लेकिन इस वर्ष हुई इतनी संख्या में मौतें सरकार की सुस्ती का परिणाम हैं।

BJP सांसद को नहीं मिली भोजपुरी में शपथ लेने की अनुमति, पूर्व केंद्रीय मंत्री ने जताई आपत्ति

आज सोमवार (जून 17, 2019) को संसद का नया सत्र शुरू हुआ। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सहित अन्य नव-निर्वाचित सांसदों को प्रोटेम स्पीकर वीरेंदर कुमार ने शपथ दिलाई। वहीं बिहार स्थित महराजगंज के सांसद जर्नादन सिंह सिग्रीवाल ने जब भोपजपुरी में शपथ ग्रहण करने की इच्छा जताई, तब उन्हें रोक दिया गया। लोकसभा महासचिव ने कहा कि नियमानुसार यह संभव नहीं है क्योंकि भोजपुरी भाषा संविधान की 8वीं अनुसूची में शामिल नहीं है और जो भाषाएँ इस अनुसूची में शामिल नहीं होती हैं, उसमें शपथ लेने की अनुमति नहीं दी जा सकती। पूर्व केंद्रीय मंत्री राजीव प्रताप रूडी ने इस नियम पर आपत्ति जताई।

सारण से सांसद चुने गए रूडी इस बात से नाराज़ थे कि भोजपुरी में शपथ लेने की कोई व्यवस्था नहीं है। इसके बाद दोनों ही सांसदों ने हिंदी में शपथ ली। उधर दूसरी तरफ छिंदवाड़ा से कॉन्ग्रेस के टिकट पर सांसद चुने गए नकुल नाथ को पहली संसद तक छोड़ने के लिए ख़ुद उनके पिता व मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ भी साथ में पहुँचे। इन सभी सांसदों को कार्यवाहक अध्यक्ष वीरेंदर कुमार ने शपथ दिलाई। इस दौरान संसद पहुँचे प्रधानमंत्री मोदी ने एक स्वस्थ लोकतंत्र में विपक्ष की भूमिका पर प्रकाश डालते हुए कहा कि विपक्ष को अपने संख्याबल को लेकर चिंता करने की ज़रुरत नहीं है, उनकी हर बात सरकार के लिए मूल्यवान है। उन्होंने कहा कि सभी पक्ष और विपक्ष को छोड़ निष्पक्ष होकर कार्य करें।

प्रधानमंत्री ने आशा जताई कि विपक्ष के नेतागण लोकसभा की बहसों में सक्रियता से भाग लेंगे और खुले मन से अपनी बात रखेंगे। पश्चिम बंगाल से जीत कर आए भाजपा सांसदों बाबुल सुप्रियो और देवाश्री चौधरी ने भी शपथ ली। इन दोनों के शपथ लेने के दौरान पूरे सदन में ‘जय श्री राम’ के नारे गूँजते रहे। सत्र शुरू होने के तुरंत बाद राष्ट्रगान हुआ और उसके बाद 2 मिनट का मौन रखा गया। सबसे पहले पीएम मोदी ने शपथ ली। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने कार्यवाहक अध्यक्ष को शपथ दिलाई।

दो दिनों के अंदर सभी 542 सांसदों को शपथ दिलाई जाएगी। बता दें कि टीकमगढ़ से सांसद चुने गए वीरेंद्र कुमार का लोकसभा में लम्बा अनुभव है और 1996 से लेकर अब तक वे 7 बार सांसद चुने जा चुके हैं। सत्र शुरू होने से पहले हुई सर्वदलीय बैठक में सरकार ने विपक्ष से मत्वपूर्ण बिलों को पारित कराने के लिए सहयोग माँगा। सभी सांसदों के शपथग्रहण के बाद लोकसभा में स्पीकर और डिप्टी स्पीकर का भी चुनाव होगा।

जिनके परदादा ने रखी थी UCO बैंक की नींव, आज वही घोषित हुए विलफुल डिफॉल्टर

बिड़ला सूर्या लिमिटेड के निदेशक यशोवर्धन बिड़ला को यूको बैंक ने रविवार (जून 17, 2019) को विलफुल डिफॉल्टर घोषित कर दिया। बिड़ला सूर्या लिमिटेड पर बैंक का 67.55 करोड़ रुपया बकाया है। यूको बैंक द्वारा दी गई सार्वजनिक सूचना में यशोवर्धन बिड़ला की तस्वीर भी प्रकाशित की गई।

नोटिस में बैंक ने बताया कि बिड़ला सूर्या लिमिटेड को मुंबई के नरीमन प्वाइंट कॉरपोरेट ब्रांच से 100 करोड़ रुपए की क्रेडिट लिमिट दी गई थी। इसमें 67.55 करोड़ का ब्याज न चुका पाने के कारण कंपनी को 3 जून को एनपीए घोषित कर दिया था। लेकिन नोटिस मिलने के बाद भी जब कंपनी ने कर्ज नहीं चुकाया तो बैंक ने निदेशक, प्रमोटर और गारंटर को विलफुल डिफॉल्टर घोषित कर दिया।

बता दें रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के निर्देशों के अनुसार विलफुल डिफॉल्टर को बैंकों या वित्तीय संस्थानों की ओर से किसी प्रकार का कोई कर्ज नहीं दिया जाता। इसके अलावा कंपनी पर पाँच साल तक नए उद्यम लाने पर रोक लग जाती है। कर्जदाता कंपनी या फिर डायरेक्टर्स के ख़िलाफ़ आपराधिक कार्रवाई भी शुरू कर सकते हैं।

जानने वाली बात ये है कि यूको बैंक की स्थापना यशोवर्धन के परदादा घनश्याम दास बिड़ला ने की थी। घनश्याम दास बिड़ला महात्मा गाँधी के भी करीब थे। उनका परिवार देश के प्रमुख औद्योगिक परिवारों में गिना जाता है जिन्होंने देश की आजादी के लिए गांधीजी के आह्वान के बाद आर्थिक मदद भी दी थी।

रमज़ान ने अपना नाम अखिलेश बताकर शादी की फिर तीन तलाक देकर बेघर किया

झारखंड में हज़ारीबाग के चरही थाना क्षेत्र में एक चौंकाने वाली ख़बर का ख़ुलासा हुआ है। एक मुस्लिम शख़्स ने ख़ुद को हिन्दू बताकर हिन्दू युवती से पहले तो शादी की और फिर बाद में अपनी असलियत बताकर युवती का धर्म परिवर्तन करा दिया। पाँच साल बाद मुस्लिम शख़्स ने ‘तीन तलाक़’ देकर उक्त महिला को दो बच्चों समेत घर से बाहर निकाल दिया। दर-दर की ठोकरें खाने को मजबूर महिला का नाम मनीषा यादव है जो उत्तर प्रदेश के आज़मगढ़ की रहने वाली है।

दैनिक जागरण की ख़बर के अनुसार, मनीषा यादव ने पुलिस से मौखिक शिक़ायत की जिसमें उन्होंने कहा कि पाँच साल पहले चरही के पिपरा का रहने वाला ट्रक ड्राइवर रमज़ान अंसारी ट्रक में कोयला लेकर आज़मगढ़ जाता था। वहीं दोनों में जान-पहचान हो गई। मनीषा ने बताया कि रमज़ान ने ख़ुद को हिन्दू बताते हुए अपना नाम अखिलेश यादव बताया था और फिर उससे प्रेम-विवाह कर लिया। बाद में पता चला कि अखिलेश ने उससे झूठ बोला था क्योंकि उसका असली नाम रमज़ान अंसारी है जो पहले से ही शादीशुदा था।

मनीषा ने इस बात की भी जानकारी दी कि शादी के बाद रमज़ान ने उसे चरही ले जाने की बजाए रांची में ही रखा। वहाँ उसने अपनी असलियत बताकर मनीषा का धर्म परिवर्तन करवाया और फिर उससे मुस्लिम रीति-रिवाज़ से पुन: निक़ाह किया। निक़ाह के बाद उसका नाम मनीषा से शबनम रख दिया।

मनीषा ने बताया कि उसके दूसरे बच्चे के जन्म से पहले से ही रमज़ान ने उसके साथ बदसलूकी करनी शुरू कर दी थी। रमज़ान उसे बात-बात पर ताने देता और तरह-तरह से उसे प्रताड़ित करता था। मनीषा ने जब इन सबसे तंग आकर उसका विरोध किया तो एक साथ तीन बार तलाक़ बोलकर उसने उसे घर से निकाल दिया।

ख़बर में इस बात का भी ज़िक्र किया गया कि मनीषा ने अपने पति के ख़िलाफ़ लिखित में कोई शिक़ायत दर्ज नहीं की है और न ही करेगी क्योंकि वो उससे सहानुभूति भी रखती है। मनीषा ने अपने पति रमज़ान अंसारी से प्रति माह तीन हज़ार रुपए बतौर गुज़ारा भत्ता और कमेटी का 40 हज़ार रुपए की माँग की है। रमज़ान ने यह रक़म देने पर मौखिक रूप से सहमति जताई है, इसलिए इस मामले में कोई मुक़दमा दर्ज नहीं किया जा रहा है।    

AES से 100+, गर्मी से 160+ मौतें: बिहार में इंसान की जान का कोई मोल नहीं, 450 अस्पताल में

बिहार से लगातार आ रही ख़बरों के मुताबिक़, वहाँ शायद अब जान की कोई क़ीमत नहीं रह गई है। चाहे बच्चें हों या बड़े, सभी की थोक में जानें जा रही हैं और प्रशासन अभी तक उदासीन रवैया अपनाए हुए है। ताज़ा ख़बरों के अनुसार, बिहार में ASE (एक्यूट इंसेफेलाइटिस सिंड्रोम) से मरने वालों की संख्या 100 पार हो गई है। अभी भी मुजफ्फरपुर के केजरीवाल अस्पताल और श्रीकृष्ण मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल (SKMCH) में 350 से भी अधिक बच्चे भर्ती हैं, जिनके इलाज की कोई समुचित व्यवस्था नहीं है। राजद सांसद मनोज झा ने ट्वीट कर इस मामले को संसद सत्र में उठाने की बात कही है, जो आज से शुरू हो रहा है। पिछले 24 घंटों में 17 बच्चे अपनी जान गँवा चुके हैं।

उधर AES से हो रही मासूमों की मौतें थमने का नाम नहीं ले रही, इधर बिहार में गर्मी व लू का ऐसा प्रकोप चला है कि 160 से भी अधिक लोगों को अपनी जान से हाथ धोना पड़ा। दक्षिण-पूर्वी बिहार में गर्मी का प्रकोप भयंकर तरीके से बढ़ गया है और मरने वालों में अधिकार बुज़ुर्ग हैं, जो मौसम की मार को बर्दाश्त नहीं कर पाए। अस्पतालों में गर्मी की मार से बीमार होने वालों के इलाज के लिए कोई व्यवस्था नहीं है और जानें लगातार जा रही हैं। अकेले रविवार (जून 16, 2019) को 61 लोगों की मौत गर्मी के कारण हो गई। अस्पतालों का कहना है कि लोग जब तक यहाँ पहुँच रहे हैं, तब तक उनकी हालत और ख़राब हो जा रही है।

औरंगाबाद, गया और नवादा ऐसे जिले हैं- जहाँ गर्मी से सबसे ज्यादा मौतें हुईं। वहीं ASE से अधिकार मौतें उत्तर बिहार के मुजफ्फरपुर में हो रही हैं। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉक्टर हर्षवर्धन ने स्थिति की समीक्षा करने के बाद कहा:

“केंद्र सरकार, राज्य सरकार को एईएस के प्रकोप के बाद स्थिति को नियंत्रित करने में मदद कर रही है। हम स्थिति को नियंत्रित करने हेतु उचित उपचार प्रदान करने और इसके लिए आवश्यक बुनियादी ढाँचा विकसित करने के लिए राज्य को वित्तीय मदद के साथ सभी संभव सहायता प्रदान करेंगे। यह स्तब्ध करने वाला व कष्टदायक है कि बच्चों की लगातार मृत्यु हो रही है। मैंने माता-पिता के दुःख-दर्द को अच्छी तरह महसूस किया है। बीमारी को नियंत्रित करने व इस पर रोक लगाने के लिए एक समय सीमा तय करने का निर्णय लिया गया है।”

मंत्रियों के लगातार पहुँचने के बावजूद स्थिति जस की तस बनी हुई है और बिहार के अस्पतालों में डॉक्टरों की भारी कमी है। वहाँ के मेडिकल कॉलेजों में शिक्षकों की भी काफ़ी कमी है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार द्वारा अभी तक मुजफ्फरपुर न जाने के कारण लोग उनसे भी नाराज़ हैं। इधर गर्मी के प्रकोप की बात करें तो नालंदा के पावापुरी अस्पताल में अभी भी 58 मरीज भर्ती हैं। कुल मिला कर 100 से भी अधिक लोगों के अस्पताल में भर्ती होने की बात कही जा रही है।

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने गर्मी से मरने वाले लोगों के परिजनों को 4 लाख रुपया बतौर मुआवजा देने की घोषणा की है। लोगों को राज्य सरकार द्वारा चेतावनी जारी की गई है कि वे दिन में बाहर न निकलें और निकलें भी तो उचित सावधानी के साथ।

Pak एयरस्पेस बंद होने से फँसे हजारों भारतीय छात्र, छुट्टियों में नहीं आ पा रहे घर

पाकिस्तान के ऊपर से भारत जाने और आने वाली उड़ानों के लिए हवाई क्षेत्र बंद हो जाने से हजारों भारतीय छात्र मध्य एशियाई देशों में फँस गए हैं। जून के महीने में अक्सर उच्च शिक्षण संस्थानों में छुट्टियाँ शुरू हो जाती हैं और वहाँ पढ़ रहे भारतीय छात्र घर आते हैं, लेकिन एयरस्पेस बंद होने के कारण इस बार छात्रों का टिकट रद्द हो रहा है और नए टिकटों की दरें सामान्य से 3-4 गुना तक महंगी है। इसके कारण छात्रों को काफ़ी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।

गौरतलब है IAF द्वारा बालाकोट पर हुई कार्रवाई के बाद से ही पाकिस्तान ने अपने एयरस्पेस को बंद किया हुआ है। हिंदुस्तान में छपी खबर के अनुसार किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक में स्टेट मेडिकल अकादमी से एमबीबीएस कर रहे एक छात्र ने उन्हें फोन पर बताया है कि उनका कॉलेज जून के आखिर में 2 महीने के लिए बंद होता है। इस दौरान वहाँ पढ़ रहे छात्र घर जाने और वापस आने के लिए पहले से ही टिकट बुक करवा लेते हैं, जिसमें करीब 20 हजार रुपए का खर्चा आता है।

हिन्दुस्तान से बातचीत में छात्र ने बताया कि इस बार अस्ताना और अन्य एयरलाइंस ने पाकिस्तान एयरस्पेस बंद होने का हवाला देकर जून की लगभग सभी उड़ाने निरस्त कर दीं, जिसके कारण उन्हें भारत आने के लिए दुबई से होते हुए आना होगा। इसमें खर्चा 60 हजार से भी अधिक आएगा। ऐसे में उनका सारा बजट बिगड़ रहा है क्योंकि इस खर्चे के बारे में उन्हें पहले से कोई भी जानकारी नहीं थी।

किर्गिस्तान के स्टेट मेडिकल अकादमी से करीब 4,000 भारतीय छात्र एमबीबीएस कर रहे हैं। वहाँ दूसरे विश्वविद्यालयों में भी बड़ी तादाद में भारतीय छात्र हैं। इसी प्रकार किर्गिस्तान के अलावा कजाखस्तान और उज्बेकिस्तान में भी ऐसे छात्र हैं जिन्हें एयरस्पेस बंद होने के कारण ऐसी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

बता दें पाकिस्तान का हवाई क्षेत्र 28 जून तक भारत के सभी विमानों की आवाजाही के लिए बंद रहेगा। इस बात की जानकारी नागरिक उड्डयन प्राधिकरण द्वारा जारी एक नोटिस में दी गई है।
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Pak की हार के बाद सोशल मीडिया पर टूटी चूड़ियाँ, फैंस ने कहा- हमें पता थी अपनी औकात

क्रिकेट वर्ल्ड कप 2019 में रविवार (जून 16, 2019) को हुए मैच में पाकिस्तान पर भारत की जीत पर फैन्स के साथ ही भारतीय नेताओं ने भी इंडियन क्रिकेट टीम को बधाई दी। केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने इस जीत की तुलना स्ट्राइक से की, तो वहीं अन्य नेताओं ने टीम इंडिया की परफॉर्मेंस की तारीफ करते हुए उन्हें भविष्य के मैचों के लिए भी शुभकामनाएँ दीं।

भारत ने इंग्लैंड के मैनचेस्टर स्टेडियम में पाकिस्तान को डीएलएस के आधार पर 89 रन से हरा दिया। पाकिस्तान की इस हार के बाद जहाँ भारत में जश्न का माहौल है, वहीं पाकिस्तान में मातम पसर गया है। पाकिस्तानी फैंस इससे काफी आहत नज़र आ रहे हैं। कई फैंस पाकिस्तानी क्रिकेटर को गालियाँ दे रहे हैं, तो कुछ फैंस ने तो गुस्से में अपने टीवी को ही तोड़ दिया।

सोशल मीडिया पर कई ऐसे वीडियो वायरल हो रहे हैं, जिसमें दिख रहा है कि पाकिस्तानी फैंस अपने टीवी तोड़ कर पाकिस्तानी क्रिकेटर्स पर अपनी भड़ास निकाल रहे हैं। ऐसा ही एक वीडियो सामने आया है जिसमें एक पाकिस्तानी लड़की पूरी पाकिस्तानी टीम को एक साथ खड़े करके मार देने की बात कहती है। वो कहती है कि जिस तरह से हिटलर ने अपनी पूरी टीम को एक साथ खड़ा करके मार दिया था, उसी तरह पूरी पाकिस्तानी टीम को एक साथ खड़े करके मार देना चाहिए।

इसके साथ ही उस लड़की ने ये भी कह दिया कि स्टेडियम में 90 फीसदी सीट भारतीय फैंस से भरे थे, क्योंकि उनको विश्वास था कि वो (भारत) मैच जीतेंगे और पाकिस्तानी फैंस इसलिए मैच देखने नहीं गए, क्योंकि उन्हें यकीन था कि पाकिस्तान मैच नहीं जीत पाएगी। उनकी औकात ही नहीं है मैच जीतने की।

वहीं एक विडियो में एक महिला पाकिस्तान की हार पर काफी आक्रोशित नज़र आ रही है। वो बुरी तरह से पाकिस्तानी टीम की फजीहत करती दिख रही है। महिला का कहना है कि पाकिस्तानी टीम को जहाँ भी भेजा जाता है, वो वहाँ से बेइज्जती करवाकर आ जाते हैं। भारत के सामने ये चूहे बन जाते हैं। भारत से तो ये कभी भी नहीं जीतते। पाकिस्तान की हार से खफा महिला मैच को ही बंद कर देने की बात कहती है। वो कहती है कि बल्ला, विकेट, गेंद, सबमें आग लगा देना चाहिए।

महिला सुबह से ही मैच देखने की आस लगाए बैठी थी। हालाँकि उनको भी पहले ये पता था कि उनके मुल्क की टीम जीतने वाले नहीं है, बेइज्जती करवाकर मुल्क की नाक कटवाएँगे। इसी तरह के कई और बेहद रोचक वीडियो और मीम्स सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं।

PM मोदी के दौरे के बाद चीन-मालदीव के बीच रद हो सकता है एक महत्वपूर्ण समझौता

अपने दूसरे कार्यकाल की शुरुआत के साथ ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 8 जून को पहले विदेशी दौरे पर मालदीव पहुँचे थे। इस दौरान पीएम मोदी को मालदीव का सर्वोच्च पुरस्कार ‘आर्डर ऑफ़ दी रूल ऑफ़ इज़्ज़ुद्दीन’ से सम्मानित किया गया था और अब भारत के लिए मालदीव से एक और अच्छी खबर आई है। दरअसल, मालदीव और चीन के बीच हिंद महासागर में एक वेधशाला बनाने के लिए समझौता हुआ था और अब पीएम मोदी के मालदीव दौरे के बाद ये संभावनाएँ जताई जा रही है कि चीन और मलदीव के बीच का ये समझौता रद्द हो सकता है। मौजूदा स्थिति में मालदीव के रिश्ते भारत के साथ मजबूत होते दिखाई दे रहे हैं।

खबर के मुताबिक, जब अब्दुल्ला यामीन मालदीव में राष्ट्रपति के पद पर आसीन थे, उस समय मालदीव और चीन के बीच की नजदीकियाँ बढ़ी थी और दोनों देश के बीच ‘प्रोटोकॉल ऑन इस्टेबलिशमेंट ऑफ ज्वाइंट ओशियन ऑब्जर्वेशन स्टेशन बिटवीन चाइना एंड मालदीव्स’ नाम का समझौता हुआ था। जिससे भारत को सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई थी। इस समझौते का मतलब चीन को मालदीव के मुकुनुथू में एक वेधशाला बनाने की इजाजत देना था। फिलहाल इस समझौते पर बातचीत रुक गई है।

इस समझौते पर विराम लगना भारत के लिए इसलिए अच्छी खबर है, क्योंकि ये जगह भारत की समुद्री सीमा के बेहद करीब है और यदि ये समझौता हो जाता तो चीनी आसानी से हिंद महासागर में अपनी पैठ बना सकते थे। इसके जरिए कई व्यापारिक और दूसरे जहाजों की आवागमन होता है। इस मुद्दे पर तत्कालीन भारतीय विदेश सचिव एस जयशंकर ने मालदीव के राजनयिक अहमद मोहम्मद से चर्चा की थी। जिसमें राजनयिक ने स्पष्ट किया था कि चीन केवल मौसम संबंधी महासागर अवलोकन केंद्र बनाना चाहता है।

हालाँकि, यामीन सरकार ने इस समझौते को कभी सार्वजनिक नहीं किया और जब मामला सामने आया तो चीन ने इस पर सफाई देते हुए कहा था कि वेधशाला का इस्तेमाल सैन्य उद्देश्य के लिए नहीं होगा। मालदीव दौरे के दौरान पीएम मोदी ने चीन पर निशाना साधते हुए कहा कि भारत की विकासात्मक साझेदारी दूसरों को सशक्त बनाने के लिए थी न कि उनकी भारत पर निर्भरता बढ़ाने और उन्हें कमजोर करने के लिए।

मिर्ची बाबा चले थे जल समाधि लेने, पुलिस ने होटल से ही नहीं निकलने दिया

लोकसभा चुनाव 2019 के दौरान बाबा वैराग्यनंद गिरी महाराज उर्फ़ मिर्ची बाबा ने यह दावा किया था कि अगर कॉन्ग्रेस उम्मीदवार दिग्विजय सिंह चुनाव हार जाएँगे तो वो जल समाधि ले लेंगे। लेकिन दिग्विजय सिंह, बीजेपी की उम्मीदवार साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर से 3.64 लाख से अधिक मतों से हार गए थे। अपना दावा झूठ साबित हो जाने पर मिर्ची बाबा अपने वादे के मुताबिक़ जल समाधि लेने भोपाल पहुँच गए।

ख़बर के अनुसार, जल समाधि लेने से रोकने के लिए मध्य प्रदेश पुलिस उन पर कड़ी निगरानी रख रही है। इससे पहले उन्होंने 14 जून को ज़िला कलेक्टर तरुण कुमार पिथोड़े को पत्र लिखकर रविवार (16 जून) को दोपहर में 2.11 मिनट पर जल समाधि की अनुमति माँगी थी। इसकी अनुमति न देते हुए भोपाल कलेक्टर ने उनकी सुरक्षा बढ़ाने को कहा, जिससे बाबा की जान को कोई हानि न पहुँच सके।

ज़िला कलेक्टर की अनुमति न मिलने पर मिर्ची बाबा रविवार दोपहर को अपने बताए मुहुर्त (2.11 मिनट) के समय जल समाधि लेने तालाब तक नहीं पहुँच सके। पुलिस ने उन्हें होटल से बाहर ही नहीं निकलने दिया। पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि बाबा को जल समाधि लेने नहीं दिया जा सकता और इसकी अनुमति नहीं दी जाएगी। इसकी सबसे बड़ी वजह यह है कि क़ानून में ऐसा कोई प्रावधान ही नहीं है कि ऐसी अनुमति दी जाए।

वहीं, मिर्ची बाबा का कहना है कि वो अपने वादे के अनुसार जल समाधि लेना चाहते हैं, लेकिन प्रशासन उन्हें इसकी अनुमति नहीं दे रहा है। ग़ौरतलब है कि दिग्विजय सिंह को चुनाव में जिताने के लिए बाबा वैराग्यनंद ने यज्ञ करते समय यह घोषणा कर दी थी कि अगर दिग्विजय सिंह भोपाल सीट से चुनाव नहीं जीते तो वो समाधि ले लेंगे। जानकारी के अनुसार, उनकी इस घोषणा के बाद निरंजनी अखाड़े ने उन पर राजनीति करने का आरोप लगाते हुए उन्हें अखाड़े से निष्कासित कर दिया था।

इसके अलावा, मिर्ची बाबा के अधिवक्ता माजिद अली ने कहा, “गुवाहाटी के कामाख्या मंदिर में तपस्या के बाद बाबा भोपाल हवाई अड्डे पर उतरे हैं और इसके बाद से ही पुलिस लगातार उनकी निगरानी कर रही है।”