आईसीसी ने एक जैसे रंग वाली जर्सी पहनने वाली टीमों को अलग कलर वाली जर्सी पहनने के लिए कहा है, ताकि मैच के दौरान सभी खिलाड़ी एक जैसे न दिखें। आईसीसी ने भारत की जर्सी का रंग भी बदलने को कहा और कलर चुनने के लिए बीसीसीआई को छूट दी। बीसीसीआई ने फाइनली केसरिया रंग की जर्सी का चयन किया है। आज रविवार (जून 30, 2019) को चल रहे मैच में भारत इंग्लैंड के खिलाफ अपनी नियमित नीली जर्सी की जगह केसरिया जर्सी पहनकर उतरेगा। लेकिन कुछ लोगों को इस रंग से भी आपत्ति हुई है और उनमें से ही एक नाम झूठे आँकड़ों की मदद से सरकार विरोधी प्रोपेगैंडा चलाने वाले ध्रुव राठी का भी है।
इसके बाद इंडियन आयल के पेट्रोल पम्प कर्मियों ने भारतीय क्रिकेट टीम की जर्सी का मज़ाक उड़ाने वालों को करारा जवाब दिया है। पेट्रोल पम्प कर्मचारियों ने कहा कि टीम इंडिया द्वारा इस जर्सी को पहनना उनके लिए गर्व की बात है और मज़ाक उड़ाने वालों को नज़रअंदाज़ करना चाहिए। नीचे संलग्न की गई वीडियो में आप देख सकते हैं कि कैसे टीम इंडिया की नई जर्सी के बारे में पेट्रोल पम्प कर्मी अपनी राय रख रहे हैं।
टीम इंडिया की नई जर्सी का मज़ाक बनाने वालों को पेट्रोल पम्प कर्मचारों का करारा जवाब
पेट्रोल पम्प कर्मचारियों ने टीम इंडिया की नई जर्सी को ‘प्रेट्रोल पम्प वालों’ की तरह बताने वालों को जवाब देते हुए कहा कि जब ये जर्सी पहन कर टीम इंडिया खेलने उतर रही है, ऐसे समय में उन्हें भी गर्व की अनुभूति हो रही है।
कर्मचारियों ने कहा कि इंडियन आयल की जर्सी पहन कर अगर भारतीय क्रिकेट टीम के खिलाड़ी खेलते हैं तो इससे न सिर्फ़ कम्पनी का, बल्कि उनका भी नाम होता है।
इंडियन ऑइल के कर्मचारियों की इस करारी जवाबी प्रतिक्रिया से किसी भी प्रोफेशन का मज़ाक बनाने वाले लोगों को सबक मिल ही गया होगा। देश में लैंगिक और धार्मिक समानता की बात करने वाले भूल जाते हैं कि प्रोफेशन कोई भी हो, किसी व्यक्ति को उसके जॉब की वजह से हेय दृष्टि से नहीं देखा जाना चाहिए।
रावलपिंडी के एक मदरसे में शिक्षक ने एक बच्चे को उलटा टाँग कर उसकी पिटाई की। इस वीडियो के सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद शिक्षक को गिरफ़्तार कर लिया गया है। नाबालिग को उलटा लटका कर पीटने के मामले में पाकिस्तान पुलिस ने उक्त मदरसे के शिक्षक को गिरफ़्तार किया। पाकिस्तान के काउंटर टेररिज्म डिपार्टमेंट ने इस फुटेज के वायरल होने के कुछ ही घंटों के अंदर मदरसे की लोकेशन का पता लगाया और शिक्षक नूर मोहम्मद को धर दबोचा। पीड़ित नाबालिग व उसके पिता को भी पुलिस ने ज़रूरी पूछताछ के लिए थाने बुलाया।
शुरुआती जाँच से पता चला है कि ये घटना पिछले वर्ष सर्दियों के दौरान की है। इस घटना के बाद पीड़ित पक्ष और मदरसे के बीच समझौता हो गया था, जिसके बाद पुलिस में कोई शिकायत नहीं की गई थी। कहा जा रहा है कि इस मदरसे का सम्बन्ध एक ऐसे व्यक्ति से है, जो आतंकवाद से जुड़ा हुआ है। पाकिस्तान सरकार ऐसे व्यक्तियों को चौथी अनुसूची में रखती है।
Notice how everything seems normal in the classroom, today it’s his turn, and yesterday it was someone else’s. This teacher should be put behind bars and the entire Madrassah should be shut down.
मई में तहरीक-ए-इंसाफ के नेतृत्व वाली सरकार ने 30,000 मदरसों में बड़े बदलाव करने की घोषणा की थी और कई ऐसे चैप्टर सिलेबस से हटाए गए थे, जिससे घृणा फैलती हो। इसके अलावा मदरसों में अंग्रेजी भाषा पर ज्यादा ज़ोर देने की बात भी कही गई थी।
इस्लाम के आधुनिकीकरण की वकालत करने वाली और इस्लामी रूढ़िवादिता का विरोध करने वाले इमाम तौहीदी ने ट्विटर पर इस वीडियो शेयर करते हुए लिखा कि उन्हें तो बचपन में मदरसे के शिक्षक उँगलियों के बीच पेन्सिल फँसा कर सज़ा देते थे, अब वे क़ुरान की आयतें याद न होने पर उलटा लटका कर मारते हैं। इमाम ने कहा कि आजकल मदरसों में यह आम बात हो गई है।
इजराइल की एक कम्पनी द्वारा शराब की बोतलों पर राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी की तस्वीर लगा कर बेचे जाने का मामला सामने आया है। माका ब्रेवरी नामक कम्पनी द्वारा शराब की बोतल पर गाँधीजी की तस्वीर लगाने का मामला सामने आने के बाद कई लोगों ने आपत्ति जताई है। केरल स्थित महात्मा गाँधी नेशनल फाउंडेशन के चेयरमैन एबी जे जोस ने इस मामले में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से शिकायत दर्ज कराई है। जोस ने इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू को भी पत्र लिख कर इस मामले से अवगत कराया है। उन्होंने शराब की बोतलों से गाँधीजी की तस्वीरों को हटाए जाने के साथ-साथ कम्पनी पर भी कड़ी कार्रवाई करने की माँग की है।
इस तस्वीर में महात्मा गाँधी को टी-शर्ट, स्टाइलिश काला चश्मा और ओवरकोट पहने हुए दिखाया गया है, जिस पर गाँधीवाड़ी संस्था ने आपत्ति जताई है। जोस का कहना है कि गाँधी की तस्वीर को यह सब पहनाना उनका मज़ाक बनाने के समान है। अमित की वेबसाइट ‘हिपस्ट्रॉरी डॉट कॉम’ पर भी इस तस्वीर को दिखाया गया है और कहा जा रहा है कि इसे अमित द्वारा ही डिज़ाइन किया गया है। जोस ने दावा किया कि इस वेबसाइट पर कई ऐसी चीजें बिक रही हैं, जिसमें गाँधीजी का मज़ाक उड़ाया गया है।
बता दें कि गाँधीजी शराब के प्रयोग के ख़िलाफ़ थे और शराब पीने के ख़िलाफ़ उन्होंने अभियान भी चलाया था। 30 जनवरी को उनकी पुण्यतिथि पर और 2 अक्टूबर को उनके जन्मदिवस पर पूरे भारत में शराबबंदी रहती है और शराब के सारे दुकानों को बंद रखा जाता है। ऐसे में गाँधी की तस्वीर लगा कर शराब बेचना सचमुच ग़लत है। महात्मा गाँधी पूरे देश में शराब पर प्रतिबन्ध की वकालत करते रहे थे। गाँधी जी का कहना था कि अल्कोहल लेने के बाद व्यक्ति किसी जानवर की तरह हो जाता है और वो अपनी पत्नी और बहन में भी फ़र्क़ महसूस करने में विफल होता है। इसीलिए, यह ग़लत है।
#Israel की शराब कंपनी माका ब्रेवरी ने राष्ट्रपिता #MahatmaGandhi का अपमान किया है। कंपनी ने अपनी शराब की बोतलों और केनों पर महात्मा गांधी के चित्र छापे हैं। कंपनी की करतूत पर कड़ी आपत्ति जताई गई है। https://t.co/6rMIdt0KPt
बिहार और छत्तीसगढ़ में शराब के ख़िलाफ़ चले अभियानों में गाँधीजी की शिक्षा का हवाला दिया गया। ऐसे में, सोशल मीडिया पर लोगों ने उनकी तस्वीर लगा कर शराब बेचने को अनुचित बताया। दरअसल, कम्पनी ने कई ऐतिहासिक महान व्यक्तित्व के तस्वीर लगा कर अलग-अलग बियर की बोतलें जारी की, जिनमें से एक में महात्मा गाँधी की भी तस्वीर है।
भोपाल की स्पेशल कोर्ट से शनिवार (जून 29, 2019) को जमानत मिलने के बाद भाजपा विधायक आकाश विजयवर्गीय रविवार (जून 30, 2019) को जेल से रिहा हो गए। जेल से बाहर आने के बाद आकाश ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि जेल में उनका समय अच्छा बीता। साथ ही बीजेपी विधायक ने कहा कि वह जनता की सेवा करते रहेंगे। आकाश ने कहा कि उनका कण-कण पल-पल जनता के लिए है।
Akash Vijayvargiya, BJP MLA: In such a situation when a woman was being dragged in front of police, I couldn’t think of doing anything else, not embarrassed at what I did. But I pray to god ‘ki vo dobara ballebazi karne ka avsar na de.’ #MadhyaPradeshpic.twitter.com/n9OJSfvgMR
जानकारी के मुताबिक, भोपाल की विशेष अदालत ने शनिवार को ही आकाश को जमानत दे दी थी, मगर लॉकअप के तय समय तक स्थानीय जेल प्रशासन को जमानत का अदालती आदेश नहीं मिल पाने के कारण उन्हें जेल में लगातार चौथी रात गुजारनी पड़ी। जेल से बाहर आने पर आकाश ने कहा, “मैं जनता की सेवा करता रहूंँगा। जेल में समय अच्छा बीता है। ऐसी स्थिति में जब पुलिस के सामने ही किसी महिला को घसीटा जा रहा था, मैं कुछ और करने की नहीं सोच सकता था। इसलिए मैंने जो कुछ भी किया उसे लेकर शर्मिंदा नहीं हूँ। हाँ, मैं भगवान से जरूर प्रार्थना करूँगा कि वह दोबारा मुझे ‘बल्लेबाजी’ करने का अवसर ना दे।”
Madhya Pradesh: Celebratory firing outside BJP MLA Akash Vijayvargiya’s office in Indore after he got bail in an assault case. (29-06) pic.twitter.com/d1j2d03hLY
जेल से बाहर आने पर समर्थकों ने माला पहनाकर उनका स्वागत किया। इससे पहले शनिवार शाम जमानत मिलने की खुशी में उनके समर्थकों ने भाजपा कार्यालय के बाहर हवाई फायरिंग भी की थी। इंदौर नगर निगम के अधिकारी की बल्ले से पिटाई और बिजली कटौती को लेकर बिना अनुमति प्रदर्शन करने के मामले में जज सुरेश सिंह ने आकाश को ₹70 हजार के मुचलके पर जमानत दी।
गौरतलब है कि बुधवार (जून 26, 2019) को इंदौर-3 विधानसभा सीट से पहली बार विधायक चुने गए आकाश विजयवर्गीय ने शहर के गंजी कम्पाउंड क्षेत्र में एक जर्जर भवन ढहाने की मुहिम के विरोध के दौरान बढ़े विवाद के बाद आकाश ने नगर निगम के एक अधिकारी को क्रिकेट के बैट से पिटाई कर दी थी, जिसके बाद उन्हें हिरासत में ले लिया गया।
बिहार से लेकर चेन्नई तक और जोहान्सबर्ग से दिल्ली तक पीने के पानी की किल्लत हो रही है। मोदी जी ने मंत्रालय बना दिया है। नितीश कुमार बाढ़ के इंतजार में हैं, और बाकी जनता लगातार पानी बर्बाद करने में जुटी हुई है। मंत्रालय तो इस देश में तीन-तीन हैं इस समस्या को लेकर, लेकिन पानी धरती के नीचे से गायब होता जा रहा है।
हाल ही में रवीश कुमार ने इस विषय पर लिखा भी और प्राइम टाइम शो भी किया जो कि बहुत अच्छी बात है क्योंकि बाकी एंकर तो वो भी नहीं कर रहे। रवीश कुमार ने फेसबुक पोस्ट में बिहार के पानी की किल्लत पर सबमर्सिबल पम्प पर लिखा कि कैसे पानी की बर्बादी हो रही है, लेकिन जब मैंने जानकार लोगों से इस पर जानकारी इकट्ठी करनी शुरु की तो पता चला कि पम्प लगाना तो बस कई भयावह कारणों में से एक ही कारण है।
इस सिलसिले में जब मैं उत्सुकतावश जानने के लिए लोगों को तलाशने लगा तो आजादी के एक साल पूर्व जन्मे, आईआईटी खड़गपुर से 1968 में बीटेक, और बाद में साउथ गुजरात यूनिवर्सिटी से पीएचडी किए हुए डॉ दिनेश मिश्रा जी से बातचीत हुई जो जल संरक्षण से लेकर पानी से जुड़े कई अन्य विषयों पर जमीनी स्तर पर दशकों से कार्य कर रहे हैं। इन्होंने कई पुस्तकें भी लिखी हैं।
डॉ दिनेश मिश्रा जी से बातचीत
बातचीत से पता चला कि मानवीय लोभ, सरकारी तंत्र में व्याप्त भ्रष्टाचार, अवैज्ञानिक जीवनशैली और बेकार की नीतियों ने हमारे बीच का जलसंकट पैदा किया है जो अब इस स्थिति में पहुँच गई है कि लोग सड़कों पर पानी के लिए मार-पीट करने लगेंगे।
डॉ मिश्रा ने इस बात को पौराणिक संदर्भ देते हुए कहा, “हमारे पुराणों में, धर्मग्रंथों में हमेशा इन बातों को जगह दी गई है कि जितना संसाधन हम उपयोग करते हैं, उसी अनुपात में हमें आने वाली पीढ़ियों के लिए भी तैयार करके जाना चाहिए। आप देखेंगे कि पहले के राजा, या धनाढ्य लोग कुआँ, नहरें, झील, सरोवर आदि खुदवाते थे और उसके एवज में यह कहा जाता था कि इसका पुण्य मिलता है। इसे आप धार्मिक दृष्टिकोण से न भी देखें तो भी, सामान्य बुद्धि यही कहती है कि जल के स्रोतों की व्यवस्था को गंभीरता से देखा जाता था।”
उसी बात पर आज की आम जनता को लाते हुए उन्होंने कहा कि आज हमने जमीन की सीमाएँ तो बना दी हैं, लेकिन उसके नीचे के जल पर तो कोई रेखा है नहीं। जिसके पास पैसे हैं, वो आपके हिस्से का भी पानी पम्प से खींच रहा है। कोई उससे ज्यादा अमीर होगा तो वो उसके भी हिस्से का खींचेगा।
“सरकारों ने इस समस्या को एक समग्र रूप से देखने की जगह और भयावह ही बना दिया है। आपको जल संरक्षण पर काम करना चाहिए, लेकिन आप पम्प लगवाने को प्रोत्साहित कर रहे हैं! और उसमें भी लेटलतीफी तो देखिए कि जब क्राइसिस हो जाती है, तब ये जगते हैं, फिर टेंडर निकलता है, फिर पाइप खरीदी जाती है, पम्प लाए जाते हैं, बिजली की व्यवस्था होती है, और तब तक बारिश आ जाती है। फिर सब लोग इस आपदा को भूल जाते हैं। यही चक्र के रूप में चलता रहता है।”
आज मोदी जी ने इस संदर्भ में बात करते हुए हैशटेग भी दिया है, और लोगों से पानी के इस्तेमाल पर अपनी समझदारी को ‘जनशक्ति और जलशक्ति’ से जोड़ते हुए फोटो अपलोड करने को कहा है। आशा है कि मोदी जी का यह अभियान ‘बेटी बचाओ’ और ‘स्वच्छता अभियान’ की तरह ही जागरुकता लाए, लेकिन इसमें सरकारों के मंत्रालयों के एक साथ काम करने पर ही कुछ बेहतर निकल कर आएगा।
इसी संदर्भ में डॉ दिनेश मिश्रा कहते हैं, “यहाँ तो तीन-तीन मंत्रालय हैं, लेकिन कोई मंत्रालय या उसके इंजीनियर की एक भी रिकॉर्डेड मीटिंग हुई हो, ऐसा मुझे नहीं लगता। जल संसाधन मंत्रालय है, लघु सिंचाई विभाग है और आपदा प्रबंधन विभाग है। इन तीनों का काम पानी से संबंधित है, लेकिन इनके इंजीनियरों ने कभी साथ बैठ कर बात नहीं की होगी कि पानी के संकट को आने से पहले ही कैसे रोका जाए। पहला मंत्रालय कुछ नहीं करता, तो दूसरा एक्शन में आता है, लेकिन वो भी कुछ नहीं करता और बात ‘आपदा’ बन जाती है।”
आखिर क्या कारण हैं कि पानी जमीन के नीचे से गायब होता जा रहा है? जब बाढ़ से इतना पानी आता है तो आखिर वो कहाँ जाता है? “हमने बाँध बनवा दिए हैं, तो उससे जो पानी, जिस मात्रा में खेतों, नहरों, जलाशयों के माध्यम से जमीन में जाता था, उसकी मात्रा कम हो गई है। दूसरी बात यह है कि अब हमारे मुहल्ले, गाँवों के घर, गलियाँ आदि सब पक्की होती जा रही हैं। हम पानी को जमीन पर गिरते ही, बाहर भेजने लगते हैं।”
“ऐसे में पानी बारिश से गिरता जरूर है, लेकिन वो बह कर नदी में चला जाता है, और वहाँ से समुद्र में। पानी को जमीन से रिस कर ग्राउंड वाटर बनने में सालों लगते हैं। हमारी जीवनशैली बदल रही है जिसमें पानी का उपभोग तो लगातार बढ़ रहा है, लेकिन उसको रीचार्ज करने के लिए हमने कुछ नहीं किया है।”
इसी बावत मुझे ध्यान आया कि एक महिला ने जमीन में जगह-जगह पाइप लगा कर बरसात के पानी को सीधे जमीन के नीचे पहुँचाने की तकनीक का भी इस्तेमाल किया था। ये एक नई तकनीक थी क्योंकि जमीन के नीचे पानी के उतरने में सालों लगते हैं, और उस चक्कर में जिस तेजी से आपदा आई है, उतना समय हमारे पास है नहीं।
अगर लोग बारिशों में जिस बोरवेल, या बोरिंग से पम्प आदि लगाते हैं, उसी के साथ एक ऐसी व्यवस्था कर लें कि बरसात में पानी सीधा एक सामान्य फिल्टरेशन के बाद (पाइप पर जाली लगा दें) सीधे नीचे जाता रहे, तो भी समस्या पर कुछ हद तक काबू पाया जा सकता है। साथ ही, अगर सरकारें सड़कों और फुटपाथ के किनारे ऐसी व्यवस्था करे कि पानी ग्राउंड वाटर को कृत्रिम रूप से रीचार्ज कर सके तो भी इस संकट से राहत मिल सकती है।
डॉ दिनेश मिश्रा सरकारों के उदासीन रवैये को लेकर काफी निराश दिखे क्योंकि उन्होंने लगातार इसी विषय पर काम किया है, “आप यह देखिए कि सरकारों ने सिंचाई की जिम्मेदारी खुद पर ले ली। पहले गाँव के लोग इन बातों पर बैठ कर विचार करते थे कि सिंचाई कैसे की जाए, कुओं का संरक्षण कैसे हो, तालाब को मरने न दिया जाए। फिर सरकार बीच में आ गई। योजनाएँ बन गईं, और अकाउंटिबिलटी शून्य है।”
“जब सारी चीजें सरकार अपने हाथों में ले लेती है तो आम जनता उस तरह से संसाधनों का ध्यान नहीं रख पाती जैसे पहले रखती थी। पहले वो उन्हें अपनी संपदा समझती थी, अब वो सरकारी हो गई। लोग पंप से खेत पटाने लगे, तालाबों की ज़रूरत खत्म होने लगी, तो वो सूखने लगे। कुओं को लोगों ने मूंदना शुरु कर दिया। सारा पानी नीचे से आने लगा, लेकिन नीचे जाने की व्यवस्थाएँ बंद हो गईं।”
जब हमने डॉ मिश्रा से कहा कि अब तो नया मंत्रालय भी बन गया है, तो वो बहुत उत्साहित नहीं दिखे, “मंत्रालय तो पहले भी थे, योजनाएँ भी हैं लोकिन जब तक आप जिम्मेदारी फिक्स नहीं करेंगे, मंत्रालय तो मंत्री, सेक्रेटरी, इंजीनियर जुटाने का जरिया बन कर रह जाएगा। लोगों को शामिल करने से पहले सरकार को इस आपदा को बहुत गंभीरता से लेना चाहिए।”
“एक कहावत है कि इस बार के हथिया से अगले साल के रोहिणी नक्षत्र की बारिश का अंदाजा हो जाता है। लेकिन सरकारें हर साल आपदा के इंतजार में रहती हैं। अगर आपको लोगों की परेशानी से इतना मतलब है तो आप आपदा के आने से तीन महीने पहले से ही क्यों काम शुरु नहीं करते? जागरुकता के लिए सरकार क्या करती है? अगर पक्की छतों के मकान और सीमेंट की सड़कों की गलियाँ बन रही हैं तो लोगों को जल संरक्षण के बारे में, बारिश के पानी को जमा करके, धरती में भेजने के लिए कौन प्रोत्साहित करेगा?”
पानी से जुड़े कई धार्मिक पर्वों को एक तरह का जागरुकता अभियान बताते हुए डॉ मिश्रा ने बताया कि कुम्भ मेला या गंगा दशहरा जैसे पर्व में लोग स्वयं ही आते हैं। उसका एक प्रयोजन हुआ करता था। अब सरकारों को इस पर युद्धस्तर पर जुड़ना चाहिए ताकि जनशक्ति से लेकर सरकार के मंत्री तक, मंत्रालयों के बीच सामंजस्य बिठा कर, इस संकट का निवारण करें। अगर ऐसा नहीं हुआ, तो जिसके पास पैसा होगा वो गहरा बोरिंग करता जाएगा और पानी खींचता रहेगा। गरीब पानी के लिए या तो गंदा पानी पीने को मजबूर होंगे, या फिर प्यास से मरेंगे।
कर्नाटक के खाद्य मंत्री बीजेड ज़मीर अहमद ख़ान को प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने समन भेजा है। यह समन आईएमए पोंज़ी स्कीम स्कैंडल से जुड़े मामले में भेजा गया है। 3 बार विधायक रहे ज़मीर कर्नाटक में जेडीएस के बड़े नेताओं में से एक हैं और इससे पहले जब एचडी कुमारस्वामी मुख्यमंत्री बने थे, तब उन्हें वक़्फ़ मंत्रालय दिया गया था। ज़मीर को 5 जुलाई से पहले जाँच टीम के समक्ष उपस्थित होकर पूछताछ में सहयोग करना होगा। दरअसल, ज़मीर ने चुनाव के दौरान दिए गए हलफनामे में आईएमए के भगोड़ा मैनेजिंग डायरेक्टर मंसूर ख़ान से 5 करोड़ रुपए की संपत्ति ख़रीदने की जानकारी दी थी। आईएमए स्कैंडल अब कई सौ करोड़ का हो चुका है और 40,000 से भी अधिक लोग इस मामले में शिकायत दर्ज करा चुके हैं।
The ED on Friday served a summons on Food and Civil Supplies Minister B Z Zameer Ahmed Khan, seeking to question him over the multi-crore IMA scam, reports Akram Mohammed.#imascam#imajewelshttps://t.co/Kk56E1wZmQ
‘द न्यूज़ मिनट’ के अनुसार, मंत्री के परिवार ने ईडी के नोटिस को स्वीकार करने से इनकार कर दिया था। जब जाँचकर्ताओं की टीम ने उनके आवास पर पहुँच कर नोटिस थमाई, तब मंत्री का परिवार उस नोटिस को लेने से हिचक रहा था। लेकिन, बाद में मंत्री ज़मीर ख़ान के कहने पर उन्होंने उस नोटिस को स्वीकार किया। ज़मीर ख़ान ने इस मामले में अपना पक्ष रखते हुए पत्रकारों से कहा:
“संपत्ति से ख़रीद सम्बन्धी मामले में आए इस नोटिस में क्या ग़लत है? मुझे बस अधिकारियों के समक्ष पेश होकर चीजें स्पष्ट ही तो करनी है। मेरे पास सारे काग़ज़ात हैं और मैं वो सब ईडी को दिखाऊँगा। मैं इस जाँच में पूरी तरह सहयोग करने के लिए तैयार हूँ और अगर पीड़ित निवेशकों को उनके रुपए वापस मिल जाते हैं तो मुझे ख़ुशी होगी। ये 5 करोड़ रुपए की संपत्ति एकमात्र ऐसी ख़रीद है, जो मैंने मंसूर ख़ान के साथ की है। अगर इस मामले में सीबीआई जाँच होती है तो मुझे इससे कोई दिक्कत नहीं होगी। मैं ईडी के सामने जाऊँगा और उनके सवालों का जवाब दूँगा। अगर सीबीआई जाँच होती है तो मुझसे ज्यादा ख़ुश कोई नहीं होगा। ग़रीब निवेशकों को उनके रुपए मिलने चाहिए।”
बता दें कि जाँच एजेंसियों ने इस मामले में कड़ी कार्रवाई की है और अभी तक आरोपित कम्पनी की 197 करोड़ रुपए की संपत्ति ज़ब्त की जा चुकी है। जाँच एजेंसियों ने कम्पनी के 52 बैंक खातों से 12 करोड़ रुपए अतिरिक्त भी ज़ब्त किए हैं। ईडी का कहना है कि आईएमए किसी भी प्रकार का बिजनेस नहीं कर रही थी बल्कि एक पोंजी स्कीम चला रही थी। मंसूर ख़ान के अभी यूएई में छिपे होने की आशंका है और उसके ख़िलाफ़ जल्द ही रेड कार्नर नोटिस जारी किया जाएगा।
ज़मीर अहमद ख़ान इससे पहले पीएम मोदी के बारे में विवादित बयान दे चुके हैं। उन्होंने चुनाव के दौरान पूछा था कि आख़िर लोग मोदी के चेहरे को देख कर क्यों वोट करते हैं? उन्होंने दावा किया था कि मोदी की एक ही पत्नी थी और उन्होंने भी मोदी को छोड़ दिया क्योंकि मोदी का चेहरा अच्छा नहीं है। उन्होंने आगे कहा था कि क्या आप इसी चेहरे को वोट करना चाहेंगे?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आकाशवाणी और दूरदर्शन पर प्रसारित होने वाले ‘मन की बात’ कार्यक्रम के तहत जनता से बात की। उन्होंने अपने दूसरे कार्यकाल में आज पहली बार ‘मन की बात’ कार्यक्रम के ज़रिए देशवासियों को संबोधित किया।
कार्यक्रम की इस कड़ी में यूँ तो उन्होंने कई मुद्दों पर बात की लेकिन इस बार कार्यक्रम की सबसे ख़ास बात यह रही कि उन्होंने मुंशी प्रेमचंद का ज़िक्र करते हुए बताया कि उन्हें हाल ही में किसी ने ‘प्रेमचंद की लोकप्रिय कहानियाँ’ नाम की पुस्तक दी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज मन की बात कार्यक्रम में प्रेमचंद्र की कहानी ‘ईदगाह’, ‘पूस की रात’ और ‘नशा’ का ज़िक्र किया। इन कहानियों का ज़िक्र करते हुए, इनमें छिपे संदेश बताते हुए वो हमें बता गए कि किताबें पढ़नी चाहिए। तो आखिर ये तीन कहानियाँ हैं किस संदर्भ में? आइए जानते हैं एक-एक कर।
मुंशी प्रेमचंद की कहानी ‘ईदगाह’
मुंशी प्रेमचंद की कहानी ‘ईदहगाह’ हामिद और उसकी दादी अमीना पर आधारित है। महज़ 7-8 साल का हामिद इस कहानी का नायक है, और वो अपने माता-पिता को खो चुका है। उसकी दादी अमीना उसकी परवरिश करती हैं। ग़रीबी की हालात में अमीना अपने पोते की देखरेख में कोई कोर-कसर नहीं छोड़तीं। तंगी की हालत के बावजूद अमीना अपने पोते हामिद को ईद के मौक़े पर तीन पैसे देती हैं।
ईद के मौक़े पर सभी बच्चे ईदगाह पहुँचते हैं और ईद की नमाज़ पढ़ने के बाद आपसे में गले मिलते हैं। इसके बाद बच्चों की टोली मेले से तरह-तरह के खिलौने और मिठाई ख़रीदती है। लेकिन हामिद के पास मात्र तीन ही पैसे होते हैं। इन पैसों से वो अपनी दादी के लिए चिमटा ख़रीदता है। इस बात पर उसके सभी दोस्त उसकी हँसी उड़ाते हैं। हामिद उन सभी दोस्तों के खिलौनों की निंदा करता है और अपने चिमटे को उनके खिलौनों से श्रेष्ठ बताता है।
घर आने पर जब उसकी दादी अमीना उसके हाथों में खिलौने की बजाए चिमटा देखती हैं तो काफ़ी ग़ुस्सा होती हैं और हामिद को डाँटती हैं। दादी की डाँट सुनने के बाद हामिद चिमटा लाने की असल वजह बताता है कि रोटी सेंकते समय दादी का हाथ कैसे जल जाता था तो इस पर दादी का ग़ुस्सा, प्यार में बदल जाता है। अपने पोते हामिद का अपने प्रति असीम प्यार और त्याग की भावना को देखकर दादी अमीना भावुक हो जाती हैं। अपनी नम आँखों से हामिद को गोद में उठाकर दुआएँ देने लगती हैं।
कहानी की विशेषता: ‘बाल मनोविज्ञान’ पर आधारित ‘ईदगाह’ कहानी प्रेमचंद की सबसे उत्कृष्ट रचना मानी जाती है। इस कहानी में मानवीय संवेदना और जीवनगत मूल्यों के तथ्यों को जोड़ा गया है। कुल मिलाकर यह कहना ग़लत नहीं होगा कि कहानीकार ने आर्थिक विषमता के साथ-साथ जीवन के आधारभूत यथार्थ को हामिद के माध्यम से सहज भाषा से पाठक के दिलो-दिमाग पर अंकित करने की अद्वितीय कोशिश की है।
मुंशी प्रेमचंद की कहानी ‘पूस की रात’
कहानी ‘पूस की रात’ में हल्कू के माध्यम से मुंशी प्रेमचंद ने भारतीय किसान की लाचारी का यथार्थ चित्रण किया है। उत्तर भारत के किसी एक गाँव में हल्कू नामक एक ग़रीब किसान अपनी पत्नी के साथ रहता था। किसी की जमीन पर खेती करता था, लेकिन आमदनी कुछ भी नहीं थी। उसकी पत्नी उससे खेती करना छोड़कर और कहीं मज़दूरी करने के लिए कहती है। एक बार हल्कू अपनी पत्नी (मुन्नी) से तीन रुपए माँगता है, लेकिन पत्नी पैसे देने से इनकार कर देती है और कहती है कि ये तीन रुपए जाड़े की रातों से बचने के लिए, कंबल ख़रीदने के लिए जमा करके रखे हैं।
पूस का महीना आया। अँधेरी रात थी और कड़ाके की सर्दी थी। हल्कू अपने खेत के एक किनारे ऊख के पत्तों की छतरी के नीचे बाँस के खटोले पर पड़ा था। अपनी पुरानी चादर ओढ़े ठिठुर रहा था। खाट के नीचे उसका पालतू कुत्ता जबरा पड़ा कूँ-कूँ कर रहा था, वो भी ठण्ड से ठिठुर रहा था। हल्कू के खेत के समीप ही आमों का बाग था, उसने बाग में पत्तियों को इकट्ठा किया और पास के अरहर के खेत में जाकर कई पौधे उखाड़ लाया, उसे सुलगाया, फिर हल्कू अपने कुत्ते के साथ आग तापने लगा। उसी समय नज़दीक में आहट पाकर जबरा भौंकने लगा। कई जानवरों का एक झुण्ड (नील गाय) खेत में आया था। उनके कूदने-दौड़ने की आवाज़ें कान में आ रही थीं। फिर ऐसा मालूम हुआ कि वे खेत में चर रही हैं। जबरा तो भौंकता रहा, लेकिन हल्कू का उठने का मन नहीं हुआ।
जबरा पूरी रात भौंकता रहा और नील गायें खेत का सफ़ाया करती रहीं। लेकिन हल्कू गर्म राख के पास शांत बैठा हुआ था और धीरे-धीरे चादर ओढ़कर सो गया। उधर, नील गायों ने रात भर खेत चरकर सारी फ़सल को बर्बाद कर दी। सुबह उसकी नींद खुली। उसकी पत्नी मुन्नी ने उससे कहा… तुम यहाँ आकर रम गए और उधर सारा खेत सत्यानाश हो गया। मुन्नी ने उदास होकर कहा- अब मजूरी करके पेट पालना पड़ेगा। हल्कू ने कहा- ‘रात की ठण्ड में यहाँ सोना तो नहीं पड़ेगा।’ उसने यह बात बड़ी प्रसन्नता से कही, उसे ऐसी खेती करने से मजूरी करना बहुत हद तक आरामदायक लगा। मजूरी करने में झंझट तो नहीं हैं।
कहानी की विशेषता: मुंशी प्रेमचंद की इस कहानी में कृषक जीवन की दुर्बलता और सबलता की झाँकी को स्पष्ट दिखाया गया है। कृषक यानी किसान एक दृष्टि से सबल होता है, वो कड़ी मेहनत करता है, एक-एक पैसा-पैसा काँट-छाँटकर बचाकर रखता है। फिर हर प्रकार के कष्ट सहन करता है। जाड़े में ठिठुरता है, ज़मींदार की गाली सुनता है, फिर भी काम करता जाता है, यही उसकी सबलता है।
मुंशी प्रेमचंद की कहानी ‘नशा’
मुंशी प्रेमचंद की कहानी ‘नशा’ ईश्वरी एवं बीर नामक दो युवकों की कहानी है। ईश्वरी एक धनवान ज़मींदार का बेटा है, और बीर एक निर्धन क्लर्क का। बीर ज़मींदारों का तीव्र आलोचक है, उनके विलास को वह अनैतिक बताता है। इस विषय पर उसका अक्सर ईश्वरी से वाद-विवाद हो जाता है। यूँ तो ईश्वरी के मिजाज़ में ज़मींदारों के बहुत सारे तेवर हैं, पर बीर के प्रति उसका व्यवहार मित्रों वाला है। बीर द्वारा की गई ज़मींदारों की आलोचना पर भी वह कभी उत्तेजित नहीं होता। एक बार छुट्टियों में ईश्वरी, बीर को अपने साथ अपने घर ले जाता है। वह बीर का परिचय एक ऐसे धनवान ज़मींदार के रूप में कराता है जो कि महात्मा गाँधी का भक्त होने के कारण धनवान होते हुए भी निर्धन सा जीवन व्यतीत करता है। इस परिचय से बीर की धाक जम जाती है; लोग उसे ‘गाँधीजी वाले कुँवर साहब’ के नाम से जानने लगते हैं। ईश्वरी के साथ-साथ बीर का भी भरपूर स्वागत-सत्कार किया जाता है।
ईश्वरी तो ज़मींदारी विलास का अभयस्त था, पर बीर को यह सम्मान पहली बार मिल रहा होता है। यद्यपि वह जानता है कि ईश्वरी ने उसका झूठा परिचय कराया है, पर स्वागत सत्कार में अन्धा होकर वह अपना आपा खो बैठता है। उसे नशा हो जाता है। पहले जिन बातों के लिए वह ज़मींदारों की निन्दा किया करता था – जैसे नौकरों से अपने पैर दबवाना, नौकरों से सारे काम करवाना – अब वह स्वयं भी उन आदतों में लिप्त होने लगता है। ईश्वरी चाहे थोड़ा काम अपने आप कर भी ले, पर ‘गाँधीजी वाले कुँवर साहब’ नौकरों का काम भला अपने हाथों से कैसे करते? नौकरों से ज़रा भी भूल हो जाती तो कुँवर साहब उन पर आग-बबूले हो उठते।
झूठ-मूठ के कुँवर साहब का नशा टूटते देर नहीं लगती। ईश्वरी के घर से लौटते समय रेलगाड़ी खचाखच भरी हुई होती है। अब नए-नवेले कुँवर साहब को ऐसी असुविधा कैसे बर्दाश्त होती? क्रोध में आकर वह अपने पास बैठे एक यात्री की पिटाई कर देते हैं, जिससे पूरे डब्बे में हंगामा मच जाता है। खिजा हुआ ईश्वरी, बीर को फटकार कर कहता है, “व्हाट ऐन ईडियट यू आर, बीर!”
कहानी की विशेषता: मुंशी जी की यह कहानी मनोरंजक तो है ही, इसमें समाज एवं मानव व्यवहार की वास्तविकताओं का भी भरपूर चित्रण है। जिसके पास (धन, सत्ता, संसाधन, सुविधा) हैं, वह उनका उपभोग अवश्य करता है। जिसके पास यह नहीं है, वह इस उपभोग की निन्दा करता है, उसको अनैतिक बताता है,और अधिकतर वह निन्दा इसीलिए करता है क्योंकि उसको वह सुविधा उपलब्ध नहीं है। यदि किसी कारण से वह सुविधा उपलब्ध हो जाती है, तो बीर की तरह निन्दक भी उसके उपभोग में पीछे नहीं रहता।
राजस्थान पुलिस ने शनिवार (जून 29, 2019) को पहलू खान के खिलाफ एक चार्जशीट दायर की, जिसमें उसे गो-तस्करी और गो-वध करने का अपराधी बताया गया। कथित तौर पर मॉब लींचिंग का शिकार हुए डेयरी किसान पहलू खान का नाम चार्जशीट में होने की बात पर राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने अपनी प्रतिक्रिया देते हुए नाराजगी जाहिर की और झूठ भी बोला। उन्होंने कहा कि दिसंबर 2018 में राज्य पुलिस की तरफ से फाइल की गई चार्जशीट में पहलू खान का नाम शामिल नहीं है।
News reported in Indian Express is factually incorrect. Name of Late #PehluKhan is not there in the chargesheet submitted by #Rajasthan Police in December 2018. 2/4
कॉन्ग्रेस के राजस्थान में सरकार बनाने के 13 दिन बाद 30 दिसंबर, 2018 को पहलू खान की हत्या से संबंधित मामले में चार्जशीट दायर की गई थी। सीएम अशोक गहलोत ने चार्जशीट में पहलू खान के नाम का उल्लेख नहीं किए जाने पर ज़ोर दिया और अपने कार्यकाल के दौरान दायर चार्जशीट के लिए पिछली भाजपा सरकार पर दोषारोपण किया। इसके साथ ही गहलोत ने ये भी कहा कि उनकी सरकार ये देखेगी कि पिछली सरकार के कार्यकाल में जाँच के दौरान कहीं किसी तरह की कोई अनियमितता तो नहीं बरती गई थी।
चार्जशीट
अशोक गहलोत द्वारा चार्जशीट में पहलू खान का नाम शामिल न होने की बात कहना सरासर गलत है। ऐसा हम नहीं, बल्कि राजस्थान पुलिस द्वारा दिसंबर 2018 में दायर की गई चार्जशीट कह रही है। ऑपइंडिया के पास इसकी प्रति है, जिसकी तस्वीर नीचे दी जा रही है। इसमें आप स्पष्ट रुप से देख सकते हैं कि दिसंबर 2018 में जब राजस्थान पुलिस ने चार्जशीट दायर की थी तो उसमें मारे गए अभियुक्त के रुप में पहलू खान के नाम का उल्लेख किया गया है। ये चार्जशीट गहलोत द्वारा बोले गए झूठ को सिरे से नकारता है।
इस चार्जशीट में पहलू खान और उनके दो बेटों- आरिफ और इरशाद के साथ उस पिकअप ट्रक के मालिक खान मोहम्मद का उल्लेख है, जिसमें गायों को तस्करी के लिए ले जाया जा रहा था। इन पर गो-तस्करी का आरोप लगाया गया है। जब पहलू खान अपने बेटों के साथ गायों को हरियाणा में अपने पैतृक गाँव ले जा रहे थे, तभी रास्ते में कुछ स्व-घोषित गो-रक्षकों की भीड़ ने ट्रक को रोका और फिर कथित तौर पर उनकी पिटाई की।
अलवर जिले के बहरोड़ कस्बे में 29 मई 2019 को बहरोड़ के एडिशनल चीफ जुडिशियल मजिस्ट्रेट की अदालत में यह चार्जशीट पेश की गई। इस चार्जशीट में पहलू खान और उनके बेटों पर राजस्थान गोवंशीय पशु (वध निषेध और अस्थायी प्रवासन या निर्यात पर प्रतिबंध) अधिनियम, 1995 की धारा 5, 8 और 9 के तहत चार्जशीट दायर की गई है।
55 वर्षीय पहलू खान 1 अप्रैल 2017 को अपने बेटों के साथ जयपुर के एक पशु मेले से मवेशियों को खरीद कर हरियाणा के नूंह स्थित अपने घर ला रहा था। इस दौरान भीड़ द्वारा उन्हें जयपुर-दिल्ली राष्ट्रीय राजमार्ग पर बहरोड़ के पास घेर लिया गया और मवेशियों की तस्करी के आरोप में पीटा। जिसके बाद खान को निजी अस्पताल में भर्ती करवाया गया, लेकिन गंभीर चोटों के कारण, दो दिन बाद अस्पताल में उसकी मृत्यु हो गई।
राजस्थान भाजपा के विधायक ज्ञान देव आहूजा ने कहा कि पहलू खान और उनके दोनों बेटे हरियाणा में गायों की तस्करी के अपराधी थे। इसके साथ ही उन्होंने गो-रक्षकों और हिंदू परिषद के खिलाफ लगाए गए आरोपों को भी खारिज किया।
दरअसल, राजस्थान पुलिस द्वारा दायर की गई चार्जशीट में पहलू खान को गो-तस्करी का आरोपित बताने के बाद से ही कुछ लोगों द्वारा राजस्थान कॉन्ग्रेस सरकार की आलोचना की जा रही है और ऐसा लग रहा है कि अशोक गहलोत उन्हीं लिबरलों के आँसू पोंछने के लिए झूठ बोल रहे हैं। गहलोत के झूठ बोलने का मकसद उन लिबरलों के आक्रोश को शांत करना था, जो कि चार्जशीट में आरोपित गो-तस्कर पहलू खान का नाम शामिल होने पर रो रहे हैं।
2016 की चर्चित स्पोर्ट्स फिल्म दंगल से बॉलीवुड में कदम रखने वाली ज़ायरा वसीम ने फिल्म-जगत को अलविदा कह दिया है। कारण – बॉलीवुड उन्हें उनके अल्लाह और उनके मज़हब इस्लाम से दूर कर रहा था। उन्होंने यह भी कहा कि हालाँकि बॉलीवुड ने उन्हें बहुत प्रेम और समर्थन दिया है, लेकिन उन्हें उनके ईमान से दूर कर दिया है।
इंस्टाग्राम-फेसबुक पर घोषणा
ज़ायरा ने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट और फेसबुक पेज पर इसकी घोषणा की है। घोषणा करते हुए उन्होंने पाँच पन्नों का एक नोट पोस्ट किया, जिसमें उनके फैसले को विस्तारपूर्वक समझाया गया है। उन्होंने कई जगह अपने मजहब की पवित्र किताब कुरान को उद्धृत करते हुए बताया है कि कैसे बॉलीवुड उन्हें कुरान के इल्म और सच के मार्ग से भटका रहा था। उन्होंने कबूल किया कि अपने पेशे से वह खुश नहीं हैं।
उनके मजहब के उनके फैंस के बीच भी उनके इस निर्णय को लेकर प्रतिक्रिया मिली-जुली ही है। जहाँ कुछ ने उनके इस निर्णय का केवल समर्थन किया, बल्कि इस पर ख़ुशी भी जताई, वहीं कुछ अन्य ने इस्लाम की उनकी विवेचना से अपनी असहमति प्रकट की है।
रील की उल्टी रियल लाइफ
यह एक विडंबना है कि ज़ायरा का यह निर्णय सिल्वर स्क्रीन पर उनके द्वारा जिए गए किरदारों के व्यक्तित्व से एकदम उलट है। ज़ायरा के संक्षिप्त करियर की तीनों फ़िल्में दंगल, सीक्रेट सुपरस्टार, और आने वाली ‘द स्काई इज़ पिंक’ महिला-केंद्रित और महिला-सशक्तिकरण पर आधारित हैं। इनमें से दंगल और सीक्रेट सुपरस्टार में वह सामाजिक रूढ़ियों को तोड़ कर आगे बढ़ने वाली महिलाओं के ही किरदार में रही हैं। सीक्रेट सुपरस्टार तो समुदाय विशेष के पिता की दकियानूसी सोच के ही खिलाफ एक लड़की के ग्लैमर जगत में प्रवेश करने और सफलता पाने की ही कहानी थी। ऐसे में उनके फैंस का हतप्रभ हो जाना समझा जा सकता है।
उत्तर प्रदेश के बाराबंकी में एक ऐसी जोड़ी का पर्दाफ़ाश हुआ है जिसका मक़सद कुँवारे लड़कों को शादी के नाम पर उल्लू बनाना होता था। दरअसल, यह जोड़ी कुँवारे लड़कों को शादी का झाँसा देकर उन्हें अपने जाल में फँसाती थी, उनसे पैसा ऐंठकर जल्द ही वहाँ से नौ दो ग्यारह हो जाती थी।
ख़बर के अनुसार, पुलिस ने एक महिला और उसके साथी को गिरफ़्तार किया है। शनिवार (29 जून) को एएसपी आरएस गौतम ने पुलिस लाइंस में इस गैंग का ख़ुलासा किया। एएसपी के मुताबिक़, एक शख़्स ने कुछ दिनों पहले कोतवाली पुलिस को बताया था कि उससे एक युवक ने सम्पर्क किया और उससे कम उम्र की लड़की से विवाह का प्रस्ताव दिया। इसके लिए उस युवक ने उसे होटल में बुलाया, जहाँ उसे लड़की दिखाई गई। शादी की बात आगे बढ़ी और युवक ने उस शख़्स से अपने बैंक अकाउंट में डेढ़ लाख रुपए मँगवाए। रकम मिलने के बाद शाम को वो युवक अपना फोन ऑफ़ करके वहाँ से फ़रार हो गया।
इसके बाद, शनिवार को फिर से ऐसा ही मामला सामने आया। इस बार युवक ने रकम के साथ एक शख़्स को बाराबंकी रेलवे स्टेशन पर बुलाया। विवाह का झाँसा देकर युवक ने फिर वही चाल चलने की कोशिश की जो उसने पहले चली थी। शक़ के बिनाह पर पुलिस उस शख़्स के पीछे पहुँच गई जो तय रकम लेकर रेलवे स्टेशन पहुँच गया था। रुपया लेने के इंतज़ार में खड़े युवक और युवती को पुलिस ने गिरफ़्तार कर लिया।
पुलिस की पूछताछ के बाद पता चला कि वो दोनों स्थानीय युवकों के ज़रिए पहले तो बड़ी उम्र के कुँवारे लड़कों की जानकारी जुटाते थे और फिर उनके पास शादी का प्रस्ताव भेजते थे। लड़की दिखाने के लिए कुँवारों को होटल बुलाया जाता था और फिर उनसे अकाउंट में रुपया जमा करवाने के लिए कहा जाता था। कई बार तो ऐसा भी होता था कि कभी एक रात के लिए युवती को भेजा भी जाता तो वो रात को ही वहाँ से फ़रार हो जाती। कुछ तो ऐसे में लोक-लाज के डर से शिक़ायत ही नहीं करते।
पुलिस के अनुसार, हिरासत में लिए गए युवक और युवती की पहचान बिहार के रूदल और फूलकुमारी के रूप में हुई है।