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ओवैसी के लिए तीन तलाक़ और सबरीमाला की ‘परंपराएँ’ समान हैं… लेकिन ऐसा सच में है नहीं

तीन तलाक बिल लोक सभा में बृहस्पतिवार को रखा गया। राजग सरकार इस मुस्लिम कुप्रथा को मुस्लिम महिलाओं के अधिकारों की रक्षा के लिए आपराधिक बनाने का सतत प्रयास कर रही है। लेकिन विपक्ष मुस्लिम महिलाओं की रक्षा के इस कदम की लगातार आलोचना कर रहा है।

इस बार भी विपक्ष के नेताओं ने बिल की आलोचना की। शशि थरूर ने कहा कि बिल खुद संविधान का उल्लंघन है और यह भी जोड़ा कि पत्नी का परित्याग यदि आपराधिक कृत्य है तो यह एक ऐसे व्यापक कानून के रूप में सभी भारतीयों पर लागू होना चाहिए जो पत्नी और बच्चों का परित्याग करने को आपराधिक बनाए। जैसी उम्मीद थी, एआईएमआईएम नेता असदुद्दीन ओवैसी ने बिल का मुखर विरोध किया। उन्होंने कहा कि यह बिल संविधान का उललंघन करता है। “यह बिल संविधान के अनुच्छेदों का उललंघन करता है। संविधान ने व्यवस्था दी है कि यदि हम विभेदकारी कानून बनाते हैं तो उन्हें दो शर्तों को पूरा करना होगा- स्पष्ट विभेदक (इंटेलीजिबल डिफ्रेंशिया) और तर्कसंगत संबंध (रैशनल नेक्सस)। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट पहले ही कह चुका है कि शादी का अंत नहीं होगा। हमारे पास घरेलू हिंसा अधिनियम, मुस्लिम महिला सुरक्षा अधिनियम 1986 हैं। अतः आपका बिल स्पष्ट विभेदक की शर्त पूरी नहीं करता है।”

उसके बाद वह तीन तलाक और सबरीमाला की परम्पराओं में भ्रामक समानता बताने लगे, जहाँ रजस्वला आयु की महिलाओं का प्रवेश निषिद्ध है। उन्होंने कहा, “इसके ज़रिए मैं पूछना चाहूँगा सरकार से कि उन सबको मुस्लिम महिलाओं से बड़ा प्रेम है। क्यों नहीं उनके यही उद्गार केरल की हिन्दू महिलाओं के लिए हैं? आप सबरीमाला के खिलाफ क्यों हैं?”

सबरीमाला की परम्पराओं और तीन तलाक के बीच समानता बताने का यह प्रयास सेब और संतरों की तुलना के जैसा है। सबसे पहले, महिलाओं के जीवन पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता अगर वह किसी एक मंदिर विशेष में नहीं जा रहीं हैं। लेकिन अगर किसी औरत को उसका शौहर तीन तलाक दे दे तो यह उसकी पूरी ज़िंदगी को तहस-नहस कर देता है।

दूसरी बात, सबरीमाला की परम्पराएँ व्यापक नहीं हैं। यह भगवान अय्यप्पा के मंदिरों की भी व्यापक प्रथा नहीं है। अतः अगर किसी महिला को उनकी पूजा करनी है, वह उनके अन्य मंदिरों में जा सकती है, या तब तक प्रतीक्षा कर सकती है जब तक कि वह सबरीमाला के लिए उचित आयु की न हो जाए। तीन तलाक के मामले में ऐसा नहीं है। यह मुस्लिम प्रथा हर मुस्लिम महिला पर लागू होती है, और इससे उसके बचने का कोई उपाय नहीं है; यह तलवार की तरह उनकी गर्दन पर जीवन के हर क्षण टँगी रहती है।

तीसरी और सबसे महत्वपूर्ण बात, सबरीमाला की पम्पराओं में महिलाओं के दमन की क्षमता नहीं है, जबकि तीन तलाक की प्रथा में है। तीन तलाक के परिणामस्वरूप कई महिलाएँ निकाह हलाला जैसी निंदनीय परम्परा की शिकार होतीं हैं, जिसके अंतर्गत यौन उत्पीड़न के लिए मुस्लिम महिलाओं का मवेशियों की तरह मुस्लिम पुरुषों में आदान-प्रदान होता है।

इसलिए इन दोनों प्रथाओं के बीच समानता स्थापित करने के कोई भी प्रयास अत्यंत घृणित है और मुस्लिम महिलाओं द्वारा तीन तलाक के परिणामस्वरूप झेले जा रहे दमन के चरम की गंभीरता को कमतर करता है। लोक सभा में तीन तलाक पर हो रही बहस में यह भी दिख रहा है कि कैसे ‘सेक्युलर’ पार्टियाँ हमेशा मुस्लिम समुदाय के कट्टरपंथी धड़े का सशक्तिकरण करतीं हैं और मुस्लिम महिलाओं की चिंताओं को नज़रअंदाज़ कर देतीं हैं।

कन्हैया का मुजफ्फरपुर के अस्पताल पर ‘हमला’, डॉक्टरों ने नेताओं से हाथ जोड़े

कन्हैया कुमार ने मुज़फ्फरपुर के अस्पताल श्री कृष्णा मेडिकल कॉलेज और अस्पताल (SKMCH) में समर्थकों सहित दौरा किया है। रिपब्लिक टीवी की खबर के मुताबिक 100 से ज्यादा समर्थकों को साथ लेकर हालिया लोकसभा निर्वाचन में भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा) के उम्मीदवार रहे कन्हैया कुमार पूरे दल-बल के साथ ‘मरीजों का हालचाल लेने’ पहुँचे। कुछ मीडिया रिपोर्टों ने तो बाकायदा उनका वहाँ ‘माल्यार्पण’ होने की भी बात कही है।

कन्हैया के खिलाफ प्रदर्शन

एईएस से 170 मौतें हो जाने के बावजूद डॉक्टरों और अस्पताल प्रशासन पर पड़ रहे दबाव व तीमारदारों की मानसिक हालत की परवाह किए बगैर नेताओं का अस्पताल पहुँच कर अराजक स्थिति बनाना बदस्तूर जारी है। इसी शृंखला में पहुँचे कन्हैया की संवेदनहीनता से क्षुब्ध हो अस्पताल में भर्ती बीमारों के रिश्तेदारों और स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं ने उनके ख़िलाफ़ विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। प्रदर्शनकर्ताओं के मुताबिक कन्हैया के साथ आया हुजूम इतना बड़ा था कि अस्पताल के कर्मचारियों और सफाई कर्मचारियों के लिए भी अस्पताल में प्रवेश करना मुश्किल हो गया।

लेकिन मर रहे बच्चों के माहौल में हुए इस ‘शक्ति प्रदर्शन’ के बारे में जब कन्हैया कुमार से बात की गई तो उन्होंने पहले तो सवालों से कन्नी काटने का प्रयास किया, और जब ऐसा नहीं कर पाए तो कहते नज़र आए, “मैं अकेले आया हूँ। मेरे साथ कोई नहीं आया। ये अस्पताल है, यहाँ प्रार्थना कीजिए, कोई बात मत कीजिए।”

‘यहाँ आने से अच्छा गाँवों में जागरुकता फैलाएँ’

महज़ तीन दिन पहले ही SKMCH के अधीक्षक सुनील कुमार शाही ने राजनीतिक पार्टियों से आग्रह किया था कि अस्पताल में आकर अव्यवस्था फ़ैलाने और मरीजों व स्टाफ़ के लिए परेशानी खड़े करने से बेहतर होगा वे गाँवों में जाकर जागरुकता फैलाएँ। लेकिन इस अपील के बाद 20 जून की सुबह जब शरद यादव अस्पताल दौरे पर पहुँचे तो उन्हें VVIP सुविधा देने के लिए न केवल अस्पताल के दरवाज़े बंद कर दिए गए, बल्कि मरीजों तक को अस्पताल में प्रवेश के लिए संघर्ष करना पड़ा। शरद यादव को यह VVIP ट्रीटमेंट देने के पीछे राजनीतिक दबाव के कयास लगाए जा रहे हैं।

वहीं मरीजों का आरोप है कि शरद यादव का प्रतीकात्मक दौरा कतई ज़रूरी नहीं था क्योंकि अस्पताल की सुविधाएँ बनाए रखने में और भी समस्या हो गई। रिपब्लिक टीवी से बात करते हुए एक मरीज के घर वालों ने आरोप लगाया है कि डॉक्टरों ने चेतावनी दी है कि अगर कोई मीडिया से बात करेगा तो उसके बच्चों को अस्पताल से निकाल दिया जाएगा। क्रुद्ध प्रदर्शनकारियों ने अधिकारियों की असंवेदनशीलता का भी पर्दाफाश किया।

राज्य सरकार पर भी एईएस के बढ़ रहे मामलों और उसके परिणामस्वरूप हो रहीं मौतों का कोई असर पड़ता हुआ नहीं दिख रहा है। बिहार में इस जानलेवा बीमारी से हो रही मौतों पर असंवदेनशीलता के शर्मनाक प्रदर्शन में बिहार के स्वास्थ्य-मंत्री मंगल पांडे 17 जून को कैमरे के सामने राज्य की बदतर होती स्थिति की बजाय भारत-पाकिस्तान क्रिकेट मैच को लेकर ज्यादा चिंतित नज़र आए। इसके पहले पत्रकारों अंजना ओम कश्यप और TV9 भारतवर्ष के अजीत अंजुम को भी आईसीयू में घुस जाने को लेकर आलोचनाओं का सामना करना पड़ा था। बिहार सरकार अपने प्रबंधन की कमी और महामारी को रोक पाने में नाकामी को लेकर आलोचनाओं के केंद्र में है। आज ही संवेदनहीनता और लापरवाही की एक घटना सामने आई जब पोस्टमॉर्टम विभाग की लावारिस लाशों के कई कंकाल अस्पताल परिसर की पीछे पड़े मिले।

पाक PM के दोस्त ने सचिन को कहा इमरान खान तो लोगों ने बरखा दत्त को बताया इंजमाम, वजह दिलचस्प

भारतीय टीम के मशहूर क्रिकेटर सचिन तेंदुलकर की बचपन की एक तस्वीर ने पाकिस्तान और ट्विटर में बवाल मचा हुआ है। इसके पीछे कोई और नहीं बल्कि पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान के सबसे खास व्यक्ति जिम्मेदार हैं।

दरअसल, एक फोटो नईम उल हक नाम के ट्विटर हैंडल से शेयर की गई है और दावा किया गया है कि फोटो 1969 के समय में पाकिस्तान के वर्तमान प्रधानमंत्री इमरान खान की है। इस ट्विटर हैंडल को संचालित करने वाले को पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान का विशेष सहायक बताया जा रहा है। यहाँ तक कि खुद पाकिस्तान मीडिया ही उस फोटो को सचिन तेंदुलकर की बता रही है इसी वजह से पाकिस्तान के लोग ही अब उन्हें ट्रोल करने लग गए हैं।

जैसे ही नईम उल हक ने यह तस्वीर ‘पीएम इमरान खान 1969’ कैप्शन के साथ पोस्ट की, ट्विटर यूजर्स ने ट्रोलिंग शुरू कर दी। एक यूजर ने ट्रोल करते हुए विराट कोहली की बचपन की तस्वीर पोस्ट की और उस पर कैप्शन लिखा इंजमाम-उल-हक 1976। उसके बाद तो इस फोटो पर मीम्स की बाढ़ आ गई। यूजर्स ने एक के बाद एक ऐसे मीम्स भेजने शुरू कर दिए।

‘उनके’ पास दो स्वर्ग हैं, एक कश्मीर और दूसरा अच्छे मुस्लिम बने रहने पर मिलेगा: सत्यपाल मलिक

जम्मू-कश्मीर के राज्यपाल सत्यपाल मलिक ने कहा है कि हुर्रियत भारत सरकार के साथ बातचीत के लिए तैयार है जो एक सकारात्मक पहल है। जम्मू कश्मीर में बोलते हुए अपने संबोधन में राज्यपाल मलिक ने कहा कि शुक्रवार (21 जून) की प्रार्थना के बाद पथराव होना लगभग बंद हो गया है। हम युवाओं को मुख्यधारा में वापस लाना चाहते हैं। उसके लिए योजनाएँ बनाई जा रही हैं। लेकिन यह सच है कि अगर सामने से फायरिंग होती है तो आप गुलदस्ते नहीं दे सकते। जनरल साहब गोलियों का जवाब गोलियों से देंगे।

अपने संबोधन में मलिक ने युवाओं के नाम भी संदेश दिया जिसमें उन्होंने कहा, “हमें नेक इरादों के साथ काम करना चाहिए। जिस तरह से युवाओं को गुमराह किया जा रहा है कि वे स्वर्ग में जाएँगे… उनके पास वास्तव में दो स्वर्ग हैं, एक कश्मीर में, और दूसरा जो उन्हें बाद में मिलेगा यदि वे एक अच्छे मुस्लिम बने रहेंगे।”

सत्यपाल मलिक ने हुर्रियत (एम) के अध्यक्ष मीरवाइज़ उमर फ़ारुक के ड्रग के ख़तरे पर बोलने के लिए उनका धन्यवाद दिया और कहा, “मुझे ख़ुशी है कि मीरवाइज़ उमर फारूक ने ड्रग के ख़िलाफ़ बोला है, यह एक बड़ा ख़तरा है। यह बात यहाँ के युवाओं में फैल रही है। जम्मू में स्थिति ख़राब है, इसी वजह से पंजाब बर्बाद हो रहा है।”

ख़बर के अनुसार, हुर्रियत कॉन्फ्रेंस के अलगाववादी नेता मीरवाइज़ उमर फ़ारूक को शनिवार (22 जून) को श्रीनगर स्थित उनके ही घर में नज़रबंद कर दिया गया। मीरवाइज़ के नेतृत्व वाले हुर्रियत के एक प्रवक्ता ने बताया कि शहर के बाहरी इलाक़े में मीरवाइज़ उमर फ़ारूक के आवास पर एक पुलिस दल पहुँचा और उन्हें सूचित किया कि अब वह अपने घर से बाहर नहीं जा सकते। प्रवक्ता ने बताया कि पुलिस द्वारा मीरवाइज़ को नज़रबंद करने का कोई कारण नहीं बताया गया।

माननीया मंगते चुंगनेशांग मैरी कॉम: राज्य सभा सदस्या, ओलंपियन बॉक्सर, संसद में आकर्षण की केंद्र

अगर यह कहा जाए कि सचिन तेंदुलकर के बाद मैरी कॉम राज्य सभा में पहुँचने वाली सबसे बड़ी ‘स्पोर्ट्स स्टार’ हैं तो कोई अतिश्योक्ति नहीं होगी। लंदन ओलंपिक में काँस्य, एशियाड-कॉमनवेल्थ-विश्व चैम्पियनशिप में स्वर्ण तो हर किसी को पता हैं लेकिन मैरी कॉम की ‘प्रोफाइल’ इन सबसे भी गहरी और ज़्यादा है। वह पशु-अधिकारों के लिए काम करतीं हैं, वह ‘अमैच्योर’ श्रेणी में हो कर भी ‘प्रोफेशनल’ श्रेणी के भारतीय एथलीटों से ज्यादा कमाई करतीं हैं और महिला बॉक्सिंग में विश्व चैंपियनशिप सबसे अधिक (10 में से 6) बार उन्होंने ही जीती है। मणिपुर-निवासी मैरी कॉम शायद भाला फेंक या 400 मीटर दौड़ की धुरंधर होतीं, अगर उनके प्रेरणा-स्रोत और मणिपुर के ही निवासी डिंगको सिंह 1998 के एशियाड में स्वर्ण पदक न लाते। इनकी जीत के बाद मैरी का ध्यान मुक्केबाजी की ओर मुड़ा।

जैकी चैन, जेट ली की फिल्मों से पड़ा बीज

टेलीग्राफ को दिए गए साक्षात्कार में मैरी ने बताया कि बचपन से ही जैकी चैन और जेट ली की एक्शन फ़िल्में उन्हें बहुत आकर्षित करतीं थीं। उन्हें मुहम्मद अली की मुक्केबाजी देखना भी बहुत पसंद था, और जब 17-18 साल की उम्र में उन्होंने मुक्केबाजी में कैरियर बनाने का निश्चय किया, तो यह ठीक से पता भी नहीं था कि महिला बॉक्सिंग जैसा कोई खेल होता भी है या नहीं। कोई ‘मेंटर’ भी नहीं था- थी तो बस ‘ज़िद’। अपनी ज़िद के बारे में मैरी बतातीं हैं कि उनके राज्य स्तर पर चैंपियनशिप जीतने तक पिता को पता ही नहीं था कि वह क्या कर रहीं हैं, क्योंकि मैरी जानतीं थीं कि घर वाले सहायता नहीं कर पाएँगे।

अपने आप को साबित करने, लोगों को ‘दिखा देने’ की ललक का भी मैरी के कैरियर के शुरू होने से लेकर लम्बा खिंचने में बड़ा हाथ है। उन्होंने नकारात्मक आलोचकों को ‘दिखा दिया’, परिवार के सामने भी खुद को साबित करना पड़ा- राष्ट्रीय स्तर के लिए राज्य स्तर पर चयन होता है, और उसकी तैयारी इतनी खर्चीली होती है कि मैरी को परिवार से मदद लेनी ही पड़ गई, और उसके साथ ही यह दबाव भी आ गया कि हार गईं तो शायद दो और बच्चों के भविष्य की चिंता के तले दबा परिवार और मदद न कर पाए। लेकिन मैरी ने लड़कर दिखाया, जीतकर दिखाया।

पति ने पूरा साथ दिया, शादी के पहले किया वादा निभाया

मैरी कॉम अपने पति ओनलर कॉम और ससुर के योगदान को भी महत्वपूर्ण मानतीं हैं। फुटबॉल में रुचि रखने वाले ओनलर से उनकी मुलाकात भी मुक्केबाजी के चलते ही हुई। राष्ट्रीय खेलों के लिए पंजाब जाते हुए सामान खोने के बाद उस समय डीयू में कानून के छात्र और नार्थ-ईस्ट के छात्रों की संस्था के अध्यक्ष ओनलर ने उनकी सामान ढूंढ़ने आदि में सहायता की थी। लेकिन 2005 में शादी करने के पहले उन्होंने साफ़-साफ़ पूछ लिया कि शादी के बाद ओनलर बॉक्सिंग कैरियर को समर्थन दे पाएँगे या नहीं; साथ ही यह वादा भी किया कि अगर ओनलर हाँ करते हैं तो वह दिखा देंगी कि किस मिट्टी की बनीं हैं।

आज भी वह पति के समर्थन की कितनी ज़रूरत महसूस करतीं हैं, इसका पता इस बात से चलता है कि 2013 में उन्होंने 2016 के रियो ओलम्पिक को ही अपना आखिरी माना था, लेकिन आज पति और परिवार के अपने पीछे खड़े होने से उनकी एक और सुनहरे तमगे की ज़िद 2020 के टोक्यो ओलम्पिक के लिए उनसे तैयारी करा रही है। सी-सेक्शन सर्जरी, छोटी-बड़ी चोटें, दर्द, थकता शरीर- इन सबसे बड़ी जीतने की भूख है।

‘हाथी जंगल में अच्छे लगते हैं, हमारी बेड़ियों में नहीं’

यह कई लोगों के लिए अचरज का विषय हो सकता है, लेकिन मुक्केबाजी जैसे ‘हिंसक’ खेल में कैरियर बनाने और खुद माँसाहारी होने के बाद भी मैरी कॉम जानवरों के लिए काम करने वाली संस्था PETA (पीपल फॉर एथिकल ट्रीटमेंट ऑफ़ एनिमल्स) से जुड़ी हुईं हैं। उन्होंने सर्कसों में हाथियों के इस्तेमाल और उनके साथ होने वाले क्रूर व्यवहार के खिलाफ 2014 में आवाज़ उठाई थी। उन्होंने एक खुला पत्र लिख कर करुणा, मानवीयता और पशुओं का सम्मान करने को बच्चों की शिक्षा का अंग बनाए जाने की माँग की थी।

Mary Kom Knocks Out Circuses for Abusing Elephants
लोहे का मुक्का, कोमल दिल… cliche है, cheesy है, लेकिन सच है!

स्पष्टभाषी, थोड़ी-सी गुस्सैल

मैरी कॉम स्पष्टभाषी हैं- इस हद तक कि उनकी बात चुभ भी सकती है। वह टेलीग्राफ़ को दिए गए इंटरव्यू में नई पीढ़ी के एथलीटों में दीर्घकालिक जिजीविषा और जुझारूपन की कमी पर सीधे उँगली रख देतीं हैं (“मैं देखती हूँ कि युवा लड़के-लड़कियाँ पहला मेडल जीतने के बाद दूसरी बार के लिए कोशिश नहीं करते। ऐसा नहीं चल सकता। अगर लम्बे समय तक चलना है, तो यह मानसिकता नहीं चलेगी…”) वह बहुत जल्दी सफलता को सर पर चढ़ जाने देने वाले युवाओं को सीधे-सीधे कहतीं हैं, “प्रदर्शन में तुम मेरे सामने (फ़िलहाल) कुछ नहीं हो। मेरी उपलब्धियों की कोई बराबरी नहीं कर सकता।”

एशियाड में काँस्य जीतने वाली निखत ज़रीन की “मैरी कॉम से (इंडिया ओपन, मई 2019) मुकाबले में मैं अपना 100% दूँगी। उम्मीद है कि यह मुकाबला टूर्नामेंट का सबसे अच्छा मुकाबला होगा।” को जब मीडिया रिपोर्टों में उन्होंने ‘नई लड़की की चुनौती’ के रूप में पढ़ा तो झल्लाई हुई मैरी कॉम ने निखत को सेमीफाइनल में हराने के बाद नए मुक्केबाज़ों को नसीहत दी कि वह भाग्यशाली हैं कि उनके (मैरी) साथ मुकाबला कर सीखने का अवसर मिल रहा है, अतः बातें बाद में करें और खुद को पहले बॉक्सिंग रिंग में साबित करें।

ऑब्ज़र्वर की भूमिका में भी सक्रिय

2016 में तत्कालीन राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी द्वारा खेल के क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए राज्य सभा में नामित की जाने वालीं मैरी कॉम बॉक्सिंग के खेल में सरकार की ऑब्ज़र्वर भी हैं। और उनके लिए यह केवल एक दिखावटी पद या टाइटल नहीं रहा है, उन्होंने परिस्थिति के अनुसार इस भूमिका का सक्रिय निर्वहन भी की किया है- 2017 में महिला बॉक्सिंग के पहले विदेशी कोच स्टेफान कोट्टालोर्डा ने भुगतान में देरी और राष्ट्रीय संघ के गैर-पेशेवर रवैये का कारण बताकर नियुक्ति के कुछ ही महीनों में इस्तीफ़ा सौंप दिया तो मैरी कॉम ने न केवल व्यक्तिगत तौर पर मामले में हस्तक्षेप कर स्टेफान का फैसला बदलने की कोशिश की, बल्कि प्रधानमंत्री को पत्र भी लिखा मामले को लेकर।

पक्ष-विपक्ष सब कायल, संसद में सक्रियता ‘भगवान’ से अधिक

प्रधानमंत्री मोदी से लेकर विपक्ष के सबसे जाने-माने चेहरे डॉ. शशि थरूर तक मैरी कॉम के प्रशंसक राजनीति की हर धारा और विचार धारा में हैं।

वह संसद में सक्रिय भी खासी रहीं हैं- बावजूद इसके कि उनका कैरियर पूरे उफ़ान पर है, और उन्होंने खिताबी मुकाबले जीतना बंद नहीं किया है, वह संसद में पिछले साल के अगस्त तक 53% उपस्थित रहीं। और इस आँकड़े की महत्ता तब और बढ़ जाती है जब हम राज्य सभा में नामित होने के एक साल के भीतर अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से सन्यास ले लेने के बावजूद संसद में महज़ 8% उपस्थिति रखने वाले सचिन तेंदुलकर से तुलना करें।

कई संसदीय स्तरों में तो मैरी मँजे हुए नेताओं की तरह 70-75% तक मौजूद रहीं, और उन्होंने चार चर्चाओं में भाग भी लिया। वह भोजन, सार्वजनिक वितरण और उपभोक्ता मामलों में संसद की प्रवर समिति की भी सदस्या हैं।

Video: स्मृति ईरानी ने अपनी ऐंबुलेंस में महिला को पहुँचाया अस्पताल

उत्तर प्रदेश के अमेठी दौरे पर आईं स्थानीय सांसद और केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी का एक वीडियो सामने आया है। जिसमें वो एक बीमार युवती की मदद करती नजर आ रही हैं। केंद्रीय मंत्री बनने के बाद पहली बार अमेठी के दौरे पर आईं ईरानी का काफिला अमेठी के एक गाँव से गुजर रहा था तभी उन्होंने महिला को व्हीलचेयर पर अस्पताल जाते देखा। इसके बाद उन्होंने उसे अपने काफिले में सरकारी सेवा में लगे ऐंबुलेंस से अस्पताल पहुँचाया।

केंद्रीय महिला एवं बाल विकास व कपड़ा मंत्री स्मृति ईरानी अपने दो दिवसीय दौरे पर शनिवार (जून 22, 2019) को अमेठी पहुँची। अमेठी के तिलोई में स्मृति ईरानी ने जन कल्याण योजनाओं की शुरुआत की। अमेठी पहुँचने के साथ ही स्मृति ईरानी बरौलिया पहुँचीं। यहाँ उन्होंने पूर्व ग्राम प्रधान सुरेंद्र सिंह के परिजनों से मुलाकात की। इस दौरान स्मृति के साथ गोवा के मुख्यमंत्री डॉ प्रमोद सावंत, उत्तर प्रदेश के उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य और जिला प्रभारी मंत्री मोहसिन रजा भी मौजूद थे।

गौरतलब है कि, इससे पहले लोकसभा चुनाव के दौरान भी अमेठी के एक गाँव में लगी आग के दौरान ईरानी खुद आग बुझाने में लग गई थीं। उनका यह वीडियो भी सोशल मीडिया पर काफी वायरल हुआ था। इसके बाद बीजेपी कार्यकर्ता सुरेंद्र सिंह की हत्या हो जाने पर स्मृति का उनके शव को कंधा देने को लेकर भी उनकी काफी सराहना की गई थी।

एक 17 साल के लड़के को पुलिस ने मारी गोली, ऐसा बंगाल में ही हो रहा है: BJP नेता अहलूवालिया

पश्चिम बंगाल में लोकसभा चुनाव को दौरान शुरू हुई हिंसा रुकने का नाम नहीं ले रही है। बंगाल के उत्तर 24 परगना के भाटपारा में हुई हिंसा के बाद हालात का जायजा लेने के लिए शनिवार (जून 22, 2019) को भाजपा सांसद एसएस अहलूवालिया के नेतृत्व में तीन सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल भाटपारा पहुँचा। इस दौरान लोगों ने पुलिस और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। लोगों ने पुलिस और ममता बनर्जी के खिलाफ हाय-हाय के नारे लगाए।

जानकारी के मुताबिक, भाजपा प्रतिनिधिमंडल के वहाँ से वापस जाने के बाद पश्चिम बंगाल के भाटपारा में फिर से झड़पें हुईं, बम फेंके गए, हिंसा को रोकने के लिए पुलिस ने लाठीचार्ज भी किया। उत्तर 24 परगना के प्रभावित इलाकों में तनाव को देखते हुए धारा 144 लागू कर दी गई। एसएस अहलूवालिया ने कहा कि भाटपारा में हुई हिंसा से केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह काफी दुखी हैं। ऐसी घटनाएँ केवल पश्चिम बंगाल में हो रही हैं। वो इस बारे में संबंधित व्यक्तियों से बात करेंगे और गृह मंत्री को रिपोर्ट सौंपेंगे।

आगे अहलूवालिया ने कहा कि 17 साल के एक लड़के को उस समय गोली मारी गई जब वह कुछ खरीदने जा रहा था। पुलिस ने प्वाइंट ब्लैंक रेंज से उसके सिर में गोली मार दी। एक वेंडर की गोली लगने से मौके पर ही मौत हो गई। तीसरा अस्पताल में है। 7 लोगों को गोली लगी। पुलिस गुंडों के लिए डंडे और निर्दोष लोगों के लिए गोलियों का इस्तेमाल करती है। इसकी जाँच होनी चाहिए। पुलिस ने मासूम लोगों को गोली मार दी। पुसिल ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित कर कहा था कि उन्होंने हवाई फायरिंग का सहारा लिया था। अगर ऐसा था तो गोली लोगों के शरीर में के अंदर कैसे घुस गई? ये बड़े ही दुर्भाग्य की बात है। इससे छोटे विक्रेताओं के परिवार खत्म हो गए।

पश्चिम बंगाल के उत्तर 24 परगना जिले के भाटपाड़ा में तनावपूर्ण स्थिति बनी हुई है। धारा 144 लागू होने के बावजूद शुक्रवार (जून 21, 2019) को दो बाइक सवारों ने देसी बम फोड़कर तनाव और बढ़ा दिया। हिंसा के चलते भाटपाड़ा और काकीनाड़ा में कई लोग घर छोड़कर सुरक्षित जगहों पर चले गए हैं।

वहाँ पर इंटरनेट सेवाएँ बंद कर दी गई हैं और भारी तादाद में पुलिस व रैपिड एक्शन फोर्स को तैनात किया गया है। सत्तारूढ़ टीएमसी और भाजपा से संबद्ध दो गुटों के बीच बृहस्पतिवार (जून 20, 2019) को हुई हिंसा में दो लोगों की मौत हो गई थी और 11 घायल हो गए थे। भाजपा ने राज्य प्रशासन पर टीएमसी के कार्यकर्ताओं की तरह काम करने का आरोप लगाया है।

रेप आरोपित BSP सांसद ने वाराणसी कोर्ट में किया आत्मसमर्पण, 14 दिन की न्यायिक हिरासत

बलात्कार के आरोपित, बहुजन समाज पार्टी (बीएसपी) सांसद असुल राय ने आज (22 जून) वाराणसी की एक अदालत में आत्मसमर्पण कर दिया। अदालत ने अतुल राय को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया है। जानकारी के अनुसार, अतुल राय ने वाराणसी के जेएम प्रथम की अदालत में आत्मसमर्पण किया। दरअसल, मई (2019) में यूपी कॉलेज की एक पूर्व छात्रा ने उन पर केस दर्ज करवाया था। छात्रा ने यह आरोप लगाया था कि अतुल राय ने उसे अपनी पत्नी से मिलाने के बहाने अपने आवास पर बुलाया था और फिर मौक़े का लाभ उठाते हुए उसने छात्रा के साथ दुष्कर्म किया। पीड़िता ने इस बात का भी ख़ुलासा किया था कि अतुल राय ने उसे जान से मारने की धमकी भी दी थी।

ख़बर के अनुसार, मामला दर्ज होने के बाद न्यायिक मैजिस्ट्रेट ने राय की गिरफ़्तारी के आदेश दे दिए थे। इसके बाद अंतरिम ज़मानत के लिए राय ने सुप्रीम कोर्ट से गुहार लगाई थी, लेकिन वहाँ से भी उसे निराशा ही हाथ लगी। अतुल राय के ख़िलाफ लुक आउट नोटिस जारी किया गया था। साथ ही देश भर के एयरपोर्ट में भी अलर्ट जारी किया गया था। आख़िरकार, उसे वाराणसी की अदालत में आत्मसमर्पण करना ही पड़ा।

अतुल राय लोकसभा चुनाव प्रचार के समय से ही लापता था। पिछले दिनों संसद में शपथ ग्रहण के दौरान भी अतुल राय वहाँ मौजूद नहीं था, इसलिए भी वो चर्चा का विषय बना हुआ था। बीएसपी सांसद राय ने घोसी क्षेत्र में कोई चुनाव प्रचार नहीं किया था, बावजूद इसके, उसने लोकसभा चुनाव में प्रतिद्वंद्वी बीजेपी के हरिनारायण को एक लाख 22 हज़ार वोटों से हराया था। बता दें कि अतुल राय मतदान और रिज़ल्ट वाले दिन भी ग़ायब था।

जानकारी के अनुसार, अतुल राय ने वादा किया था कि वो जल्द ही जनता के समक्ष आएगा। उसने कहा था कि जनता की अदालत सबसे बड़ी अदालत होती है और जनता ने उसे निर्दोष करार दिया है। इसके अलावा उसने क़ानूनी दाँव-पेंच से जल्द मुक्त होने की बात भी कही थी। अतुल राय के आत्मसमर्पण के बाद बीजेपी ने बीएसपी सुप्रीमो मायावती पर निशाना साधा था। आत्मसमर्पण न करने पर पुलिस ने अतुल राय की सम्पत्तियों को ज़ब्त करना शुरू कर दिया था।

अलीगढ़ के बाद उन्नाव में मासूम की ईंट से कूचकर हत्या, रेप की आशंका

अलीगढ़ के बाद यूपी के उन्नाव से शुक्रवार (जून 21, 2019) देर रात दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है, जहाँ एक 11 वर्षीय नाबालिक बच्ची का रेप करने के बाद ईंट से कूँच-कूँच कर हत्या कर दी गई है। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार आरोपित बच्ची का रिश्ते में चाचा बताया जा रहा है। मामलें में पॉक्सो और सम्बंधित धाराओं में फिलहाल FIR दर्ज कर लिया गया है।

रिपोर्ट के अनुसार, सफीपुर के देवगाँव में घर के बाहर सो रही 11 वर्ष की बच्ची को रात के अंधेरे का फायदा उठाकर एक युवक उसे उठा ले गया और घर से करीब 50 कदम दूरी पर बच्ची के चेहरे पर कई वार कर मौत के घाट उतार दिया। सुबह बच्ची के घर पर ना होने से परिजन परेशान हो गए। खोजबीन के दौरान घर के पीछे ही एक बाग़ में बच्ची को नग्न अवस्था में व चेहरा बुरी तरह कुचला देखकर चारों तरफ मातम का माहौल है। बच्ची की स्थिति देखकर उससे दुष्कर्म की आशंका भी जताई जा रही है।

रिपोर्ट के अनुसार, अलीगढ़ की घटना से सबक लेते हुए तत्काल पुलिस सक्रिय हो गई है। सूचना मिलने पर सफीपुर कोतवाली पुलिस के अलावा एसपी व एएसपी भारी पुलिस बल के साथ मौके पर पहुँच गए। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर जाँच पड़ताल शुरू कर दी। बताया जा रहा है कि बच्ची के गर्दन, चेहरे और प्राइवेट पार्ट पर गहरे जख्म के निशान पाए गए हैं।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, पुलिस ने कहा है कि बच्ची के साथ दुष्कर्म और हत्या में रिश्ते के चाचा के शामिल होने के शुरूआती साक्ष्य मिले हैं जो फरार है और जिसकी गिरफ्तारी के प्रयास किए जा रहे हैं।

टाइम्स नाउ की रिपोर्ट के अनुसार, उन्नाव एसपी एमपी वर्मा ने टीमें गठित कर मामले के जल्द खुलासे की बात कही है। वही आईजी जोन ने घटना स्थल का निरीक्षण कर आरोपितों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का निर्देश दिया है। हालाँकि, बच्ची के साथ दुष्कर्म हुआ है कि नहीं के सवाल पर आईजी ने पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट के बाद ही कुछ भी बताने की बात कही है।

MP में परेशान ग्रामीणों ने पंचायत सचिव को बिजली के खंभे से बाँधा

मध्य प्रदेश में भीषण गर्मी के बीच बुनियादी सुविधाएँ (सड़क, पानी, नाली) न मिलने से परेशान भीमाखेड़ी गाँव के लोग इतना भड़क उठे कि उन्होंने गाँव की व्यवस्था देखने आए पंचायत सचिव को ही बिजली के खंभे से बाँध दिया। हालाँकि मौक़े पर पहुँची पुलिस ने उन्हें नाराज़ लोगों के चंगुल से छुड़ा लिया, लेकिन इस बीच किसी ने इस घटना की वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर डाल दिया, जो फिलहाल खूब वायरल हो रहा है।

खबरों के अनुसार रतलाम के भीमाखेड़ी गाँव में पंचायत सचिव ग्रामीणों की शिकायत सुनने पहुँचे थे, लेकिन मूलभूत जरूरतों के पूरा न होने के कारण लोगों का गुस्सा उनपर फूट पड़ा। इस बीच गाँव वालों और पंचायत सचिव के बीच बहस भी हुई जिसके बाद ग्रामीणों ने उन्हें खंभे से बाँध दिया।

अपने साथ हुई इस घटना पर पंचायत सचिव ने कहा, “गाँव में एक नाले का निर्माण किया जा रहा था, जिसका मूल्यांकन नहीं हुआ था, मैंने इंजीनियर से कार्यों के मूल्यांकन के लिए कहा था, लेकिन इस दौरान बदमाशों ने हमें ऐसा करने से मना कर दिया। वो लोग हमें उस जगह से दूर ले गए और बिजली के पोल से बाँध दिया। बाद में पुलिस ने मुझे बचाया।”

जनसत्ता में प्रकाशित खबर के मुताबिक भीमाखेड़ी गाँव के लोगों का कहना है कि उनके गाँव में विकास का कोई भी कार्य नहीं हुआ है। यहाँ तक कि सड़कों के गड्ढे पर और नालियों में पानी भरा हुआ है। ग्रामीणों का आरोप है कि वे लोग इस मुद्दे पर कई बार उच्चाधिकारियों से मिल चुके हैं लेकिन तब भी समस्या दूर नहीं हुई। अपनी परेशानियों के लिए ग्रामीणों ने सचिव को ही उत्तरदायी बताया है।