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विलुप्त घोषित हो चुके कछुओं को मंदिर में मिला जीवन दान, लोग मानते हैं विष्णु का अवतार

विलुप्तप्राय जीव जंतुओं के लिए काम करने वाले अंतरराष्ट्रीय संगठन IUCN ने 17 साल पहले 2002 में घोषणा की थी कि मुलायम खोल (सॉफ्ट शेल) वाले काले कछुओं की प्रजाति असम से विलुप्त हो चुकी है। लेकिन, शुक्र है एक मंदिर में रहने वाले कुछ लोगों का जिन्होंने इस प्रजाति को दोबारा जीवन प्रदान किया।

जानकारी के मुताबिक IUCN की घोषणा के दो साल बाद ही पाया गया कि हयग्रीव माधव मंदिर (Hayagriva Madhav temple) में कुछ लोग सदियों पुराने तालाब में दर्जनों कछुओं को पाल रहे हैं। इन लोगों का कहना था उन्होंने कछुओं को संरक्षित इसलिए रखा हुआ है क्योंकि वो मानते हैं ये जीव भगवान विष्णु का पुनर्जन्म हैं।

खबरों के अनुसार जयाादित्य पुरकायस्थ जो जानवरों के संरक्षण के लिए काम करने वाला समूह ‘गुड अर्थ’ की ओर से मंदिर में कछुओं को बचाने का काम कर रहे हैं उन्होंने न्यूज़ एजेंसी एएफपी से बातचीत में बताया कि कछुओं की प्रजाति असम में दिन पर दिन कम होती जा रही थी। इसलिए उन्होंने सोचा कि उन्हें इन जीवों को बचाने के लिए कुछ उपाय करने चाहिए जिससे वो विलुप्त न हों। इसके लिए उन्होंने तालाब के पास रेत पर पड़े नए अंडो को इकट्ठा किया और इन्क्यूबेटर के जरिए तब तक गर्माहट पहुँचाई जब तक वो विकसित नहीं हो गया।

कछुओं के संरक्षण और उन्हें दोबारा वन्यजीव के रूप में दर्शाने के लिए turtle breeding proramme को लॉन्च किया गया। लेकिन इन कोशिशों को असली सफलता तब मिली जब जनवरी में संगठन ने 35 कछुओं के शिशुओं को स्थानीय जंगल के तालाबों में छोड़ा, इनमें से 16 मंदिर से लाए गए थे।

श्रीधरन से जवाब पाने के बाद केजरीवाल पुराने अंदाज में, कहा बीजेपी का आदमी है ये

दिल्ली मेट्रो के प्रिंसिपल एडवाइजर ‘मेट्रो मैन’ ई श्रीधरन ने मेट्रो में महिलाओं को मुफ़्त यात्रा के प्रस्ताव पर दिल्ली के उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया की चिट्ठी का जवाब दिया था। उन्होंने फ्री मेट्रो राइड को चुनावी पैंतरा बताया था। मेट्रो मैन की इस प्रतिक्रिया का जवाब आम आदमी पार्टी की ओर से दिया गया है। प्रेस कॉन्फ़्रेस के ज़रिए आप पार्टी की राष्ट्रीय प्रवक्ता आतिशी ने कहा कि श्रीधरन द्वारा लिखे गए पत्र की भाषा को देखने से, यह स्पष्ट रूप से लगता है कि भाजपा उनका इस्तेमाल एक राजनीतिक हथियार के रूप में कर रही है। वह वही कह रहे हैं जो बीजेपी कहना चाहती है, लेकिन वो खुलकर नहीं कह सकती क्योंकि वो बातें जन-विरोधी हो सकती हैं।

महिलाओं के लिए मेट्रो में मुफ़्त यात्रा योजना पर मेट्रो मैन की आपत्ति पर आतिशी ने कई सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि अगर महिलाओं की मुफ़्त यात्रा से दिल्ली मेट्रो पर अतिरिक्त आर्थिक भार पड़ेगा, तो जब केंद्र सरकार ने मेट्रो में वरिष्ठ नागरिकों और विद्यार्थियों के लिए किराए में छूट का प्रस्ताव रखा था तब श्रीधरन ने आपत्ति क्यों नहीं दर्ज कराई? आप प्रवक्ता ने यह भी कहा कि केंद्र सरकार के प्रस्ताव में क्रॉस सब्सिडी की बात कही गई थी यानी सीनियर सिटिजन और विद्यार्थियों को जो छूट दी जाएगी उसकी वसूली मेट्रो में यात्रा करने वाले दूसरे यात्रियों से की जाएगी। इस पर आतिशी ने कहा कि केंद्र सरकार के उस प्रस्ताव पर ई श्रीधरन ने आपत्ति क्यों नहीं जताई?

बता दें कि दिल्ली मेट्रो के पहले प्रबंध निदेशक और ‘मेट्रो मैन’ के नाम से मशहूर ई श्रीधरन ने मेट्रो में महिलाओं को मुफ़्त यात्रा की सुविधा देने की आम आदमी पार्टी सरकार की पहल को मेट्रो के लिए नुकसानदायक बताया था। उन्होंने सुझाव दिया कि छूट की राशि सीधे महिलाओं के खाते में ट्रांसफर की जाए। इस संबंध में उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को चिट्ठी भी लिखी थी।

दिल्ली मेट्रो के सलाहकार श्रीधरन द्वारा लिखी चिट्ठी पर दिल्ली के उप मुख्यमंत्री ने कड़ी आपत्ति जताते हुए जवाब में लिखा, “मुझे आश्चर्य के साथ-साथ आपकी चिट्ठी पर दुख भी है, जिसमें आपने मेट्रो में महिलाओं को फ्री यात्रा का खर्च दिल्ली सरकार द्वारा उठाने के प्रस्ताव का विरोध किया है।” बेशक, उस समय सिसोदिया और AAP सहित, उनके तमाम समर्थक मीडिया को वह सिसोदिया का मास्टर स्ट्रोक नज़र आया हो। लेकिन यह क़दम व्यवहारिक तो नहीं है, ऐसा कई विशेषज्ञों ने भी दावा किया था।

#MeToo में फँसे POTUS, न्यू यॉर्क की लेखिका ने लगाए यौन शोषण के आरोप

न्यूयॉर्क की लेखिका और लंबे समय तक महिलाओं के लिए एडवाइस कॉलम लिखने वाली ई जीन कैरोल ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पर यौन उत्पीड़न का आरोप लगाया है। कैरोल ने अपनी आने वाली किताब में घृणित पुरुष (hideous men) के बारे में लिखा है। जिसमें उन्होंने इस घटना के बारे में विस्तार से बताया है, जिसके अंश न्यूयॉर्क मैग्जीन में शुक्रवार (जून 21, 2019) को प्रकाशित किए गए हैं। इसमें कहा गया है कि मैनहट्टन के एक डिपार्टमेंटल स्टोर के ड्रेसिंग रूम में दो दशक पहले ट्रंप ने उनका यौन शोषण किया था।

कैरोल का दावा है कि उन्होंने जीवन भर पुरुषों की हिंसा का सामना किया है। इस किताब में कैरोल ने लिखा है कि 1995 या 1996 में बर्गडॉर्फ गुडमैन में उनकी दोस्‍ती ट्रम्प से हुई थी। उस समय ट्रम्प एक जाने-माने रियल एस्टेट डेवलपर थे और वो एक प्रसिद्ध पत्रिका लेखक और एक टेलीविज़न शो की होस्ट थी। इसी दौरान ट्रंप ने ड्रेसिंग रुम में उनके साथ ज़बरदस्ती शारीरिक संबंध बनाने की कोशिश की, लेकिन कैरोल ने ट्रंप को धक्का दिया और उनका सिर दीवार से जा टकराया। इसी दौरान मौका देखकर वो (कैरोल) किसी तरह से वहाँ से भागने में सफल रही।

हालाँकि, इस गंभीर आरोप को अमेरिकी राष्ट्रपति ने सिरे से खारिज कर दिया और कहा, “मैं अपने जीवन में इस महिला से कभी नहीं मिला।” अपने बयान में ट्रंप ने इस आरोप को फर्जी खबर बताया और सवाल किया कि इस घटना का कोई सबूत या गवाह क्यों नहीं है? ट्रंप ने कहा कि इससे जुड़ा न तो कोई सर्विलांस है, न ही वीडियो नहीं और न कोई तस्वीर। ऐसा इसलिए क्योंकि ये घटना कभी हुई ही नहीं।

गौरतलब है कि, ट्रंप पर इससे पहले भी यौन शोषण का आरोप लग चुका है। साल 2016 के राष्ट्रपति चुनाव प्रचार के दौरान, एक दर्जन से अधिक महिलाओं ने ट्रंप पर उनके द्वारा पहले के सालों में किए गए यौन शोषण का आरोप लगाया था। ट्रंप ने इन आरोपों से इनकार कर दिया था और कहा था कि महिलाएँ झूठ बोल रही है। 2005 में भी डेनाल्ड ट्रंप का ऐसा ही एक टेप सामने आया था।

अब 75 साल की हो चुकी कैरोल ने कहा कि उसने उस समय इस घटना के बारे में दो करीबी पत्रकार दोस्तों को बताया था। उनमें से एक ने पुलिस के पास जाने की सलाह दी, तो वहीं, दूसरी दोस्त ने ट्रंप के वकीलों की पहुँच को लेकर चुप रहने के लिए कहा था और कैरोल ने इस बारे में पुलिस विभाग में कोई रिपोर्ट दर्ज नहीं करवाई थी। कैरोल उस समय चुप रहने के लिए खुद को दोषी मान रही हैं। लेखिका ने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि उनकी कहानी से महिलाएँ सशक्त होंगी और ऐसी घटनाओं के मामले में आगे आएँगी।

CJI ने जजों की रिटायरमेंट आयु बढ़ाने के लिए PM को लिखा पत्र, दिए और सुझाव

सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट में 43 लाख से अधिक लंबित मामलों के निपटारे के लिए भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) रंजन गोगोई ने प्रधानमंत्री मोदी को तीन चिट्ठी लिखी हैं। इन चिट्ठियों में CJI गोगोई ने मोदी से सर्वोच्च प्राथमिकता के साथ दो संवैधानिक संशोधनों का अनुरोध करते हुए लिखा है कि एक तो सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीशों की संख्या में इज़ाफ़ा हो जिससे मामलों का निपटारा जल्द से जल्द किया जा सके और दूसरा हाईकोर्ट के न्यायाधीशों की आयु 62 से बढ़ाकर 65 वर्ष की जाए।

ख़बर के अनुसार, मुख्य न्यायाधीश गोगोई ने पीएम मोदी को लिखी तीसरी चिट्ठी में संवैधानिक व्यवस्था के तहत सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीशों के कार्यकाल की पुरानी परम्परा को पुनर्जीवित करने की माँग की है जिसमें जजों की सेवानिवृत्ति की आयु सीमा 65 वर्ष होती थी। ऐसा करने से वर्षों से लंबित मामलों का निपटारा किया जा सकेगा।

CJI ने बताया कि 1988 में, सुप्रीम कोर्ट में न्यायाधीशों की संख्या 18 से बढ़ाकर 26 कर दी गई थी और फिर 2009 में इसे 26 से बढ़ाकर 31 कर दिया गया था। जिस तरह 2009 में न्यायाधीशों की संख्या बढ़ाई गई थी उसी तरह अब यह संख्या 31 से बढ़ाकर 37 करने की माँग भी CJI ने अपनी चिट्ठी में की है। वर्तमान समय में, हाईकोर्ट में जितने पद स्वीकृत हैं उनमें से केवल 37% पद यानि 399 पद ही भरे हैं बाक़ी रिक्त हैं। मौजूदा समय में इन रिक्तियों को तुरंत भरने की आवश्यकता है।

सुप्रीम कोर्ट में 31 न्यायाधीश हैं जबकि कोर्ट में कुल 58,669 मामले लंबित हैं। इसके अलावा नए मामलों के आने इस संख्या में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। उन्होंने बताया कि 26 केस 25 वर्षों से, 100 केस 20 वर्षों से, 593 केस 15 वर्षों से और 4977 केस पिछले 10 वर्षों से सुप्रीम कोर्ट में लंबित हैं।

मंत्री ने खुद को बताया एक समुदाय का ‘देवता’ और CM को कहा ‘भगवान जगन्नाथ’

ओडिशा के राजस्व व आपदा प्रबंधन मंत्री सुदाम मरांडी ने शुक्रवार (जून 21, 2109) को एक बड़ा ही अटपटा बयान दिया है। अपने बयान में उन्होंने खुद को भगवान बताया है और ओडिशा मुख्यमंत्री नवीन पटनायक की तुलना भगवान जगन्नाथ से की है। सुदाम के इस बयान के बाद उनकी हर जगह आलोचना हो रही है।

मरांडी ने यह बयान हरिबलदेव मंदिर में दिया। यहाँ उन्होंने खुद को बथूडी समुदाय के देवता बादम बताया और मुख्यमंत्री नवीन पटनायक को भगवान जगन्नाथ की उपाधि दी। गौरतलब है मरांडी ने बुधवार (जून 19, 2019) को हुई एक बैठक के दौरान उन लोगों को लेकर बयान दिया है जो राज्य सरकार से अपनी 8 माँगे मनवाने के लिए बरीपाड़ा से नवीन निवास तक पदयात्रा करने जा रहे थे जिसे बाद में स्थगित कर दिया गया।

मरांडी ने बैठक के दौरान कहा कि लोगों को पदयात्रा करने से पहेल उनसे मिलना चाहिए। बंगीरीपोसी विधायक का कहना था कि उन्हें यहाँ का नेता चुना गया है इसलिए सबसे पहले लोगों को उनसे मिलना चाहिए। अगर उनके पास लोगों की समस्या का समाधान नहीं होता तब मुख्यमंत्री नवीन पटनायक के समक्ष अपनी बात रखनी चाहिए।

मरांडी के इन बयानों के बाद ओडिशा की जनता ने उनका जमकर विरोध किया है। हरिबलदेव मंदिर के पुजारी अरुण मिश्रा और कामेश्वर त्रिपाठी ने कहा है कि उन्हें इसकी सजा भगवान जगन्नाथ देंगे।

टाइम्स नॉउ की खबर के अनुसार सुदाम के इन बयानों के मद्देनजर विधायक सोरेन ने मरांडी पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा, “मंत्री जी को घमंड हो गया है। ये सही नहीं है। एक व्यक्ति कभी भी भगवान नहीं हो सकता है। यहाँ के लोग काफी गरीब हैं, उन्हें मूलभूत चिकित्सकीय सुविधाएँ भी नहीं मिल रही है। ऐसे में एक मंत्री विधायक कैसे खुद को भगवान बता सकता है। उन्हें पता नहीं किस बात का घमंड है।”

इसके अलावा भाजपा जिला अध्यक्ष कृष्ण चंद्र मोहापात्रा ने भी मरांडी के बयानों को शर्मनाक बताया है और झारखंड मुक्ति मोर्चा के नेता कलिंगा केसरी ने तो बयान को दुर्भाग्यपूर्ण करार देते हुए कहा कि वे मंत्री पद पर रहने के योग्य नहीं हैं।

मॉल में परिवार के साथ घूम रहे सरफराज़ के साथ पाकिस्तानी ने किया भद्दा मजाक

16 जून को भारत से मिली करारी हार के बाद पाकिस्तान क्रिकेट टीम और खासकर टीम के कैप्टन सरफराज अहमद को काफ़ी आलोचनाओं का सामना करना पड़ रहा है। सोशल मीडिया पर तरह-तरह के मीम बनाकर यूजर्स उन्हें ट्रोल कर रहे हैं। हर जगह उनसे उनकी फिटनेस और तैयारी को लेकर सवाल पूछे जा रहे हैं और लगातार भारत से मिली हार पर शर्मसार किया जा रहा है।

सोशल मीडिया पर तेजी से एक वीडियो वायरल हो रहा है, जिसमें सरफराज को बेइज्जत करने की कड़ी में एक लड़के ने सारी हदें पार दीं। इस लड़के ने मॉल में परिवार के साथ घूमते सरफराज का वीडियो बनाया। वीडियो में लड़का सेल्फी मोड में सरफराज से कहता नजर आ रहा है, “भाई, भाई आप सुअर की तरह इतने मोटे क्‍यों हो? आप सुअर जैसे मोटे हो कम डाइट लिया करो।”

शर्म की बात यह है कि जिस दौरान लड़के ने सरफराज से बदतमीजी की उस समय सरफराज अपने परिवार के साथ मॉल में मौजूद थे। लेकिन फिर भी उन्होंने उस लड़के को कुछ नहीं कहा और आगे बढ़ गए।

इस वीडियो के वायरल होने के बाद सोशल मीडिया पर कुछ लोगों ने लड़के की इस हरकत का विरोध किया । एक शख्स ने इस वीडियो को शेयर करते हुए कहा, “दो साल पहले चैंपियंस ट्रॉफी-2017 जीतने पर खुशी मना रहे थे और आज इनके साथ इस तरह बर्ताव कर रहे हैं। आप उनके प्रदर्शन पर सवाल उठा सकते हैं, लेकिन इस तरह नहीं।”

हालाँकि, अपनी इस हरकत पर लोगों की प्रतिक्रिया देखने के बाद लड़के ने सोशल मीडिया पर वीडियो डालकर माफी माँग ली है। लेकिन लोगों का गुस्सा उसके प्रति शांत नहीं हो रहा है। लड़के ने वीडियो में कहा है कि जो उसने सरफराज अहमद को मॉल में कहा वो जायज नहीं था और अपनी हरकत के लिए उसने माफी माँगी।

लड़के ने वीडियो में बताया कि घटना के बाद सरफराज जब गुस्से में उसके पास आए तो लड़के ने उनसे माफ़ी माँग ली थी और साथ ही वीडियो भी डिलीट किया था, लेकिन उसे नहीं मालूम ये वीडियो कैसे वायरल हो गया। उसने लोगों के गुस्से को देखते हुए माफी माँगी और बताया कि वो खुद पाकिस्तानी है, उसे नहीं मालूम था कि ये वीडियो ऐसे अपलोड होकर वायरल हो जाएगा।

भ्रष्ट अफसरों पर तनी योगी सरकार की तलवार, छाँटे गए 30 अधिकारियों के नाम

यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ ने गुरुवार (जून 20, 2019) को फरमान जारी करते हुए कहा कि भ्रष्ट और बेईमान अधिकारियों के लिए सरकार में कोई जगह नहीं है। उन्होंने कहा था कि ऐसे अधिकारी स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति लें, अन्यथा उन्हें सेवानिवृत्ति लेने के लिए बाध्य कर दिया जाएगा। मुख्यमंत्री के भ्रष्ट व लापरवाह अधिकारियों के खिलाफ कठोर कदम उठाए जाने की चेतावनी के बाद प्रशासन ने ऐसे मामलों में कार्रवाई शुरू कर दी है। प्रशासन ने शुक्रवार (जून 21, 2019) को बागपत जेल में माफिया मुन्ना बजरंगी की हत्या के मामले में दोषी पाए गए जेलर उदय प्रताप सिंह व मेरठ जेल में स्टिंग ऑपरेशन मामले में डिप्टी जेलर धीरेंद्र कुमार सिंह को बर्खास्त कर दिया है।

प्रमुख सचिव गृह अरविंद कुमार ने बताया कि जाँच में दोनों अधिकारी ड्यूटी में लापरवाही के दोषी पाए गए और कोई संतोषजनक उत्तर नहीं दे सके। दोनों अधिकारियों के कृत्यों से शासन व कारागार विभाग की छवि को गहरा आघात पहुँचा था, जिसके चलते यह कठोर कदम उठाया गया। यह बर्खास्तगी इस बात का संकेत है कि अब दूसरे विभागों के भ्रष्ट और नाकारा अफसरों पर भी तलवार तन गई है। जल्द ही कई और भ्रष्ट अफसरों पर बर्खास्तगी की गाज गिर सकती है।

खबर के मुताबिक, सीएम के सख्त रवैये के बाद सचिवालय प्रशासन द्वारा अनिवार्य सेवानिवृत्ति देने के लिए 30 भ्रष्ट अधिकारियों के नाम छांट लिए गए हैं। इन 30 अधिकारियों में 17 समीक्षा अधिकारी, 8 अनुभाग अधिकारी, 3 अनुसचिव और 2 उप सचिव शामिल हैं। इन सबके खिलाफ पूर्व में हुई जाँचों, कार्रवाई और आपराधिक मामलों के आधार पर अनिवार्य सेवानिवृत्ति दी जाएगी। जल्द ही इन अधिकारियों की सूची को सीएम योगी के पास अनुमोदन के लिए भेजा जाएगा।

गौरतलब है कि, मोदी सरकार हाल ही में जनहित में सीमा शुल्क और केंद्रीय उत्पाद विभाग के 15 अधिकारियों को समय से पहले सेवानिवृत्त कर चुकी है। इससे पहले इस महीने की शुरूआत में भारतीय राजस्व सेवा (आयकर) के 12 अधिकारियों को भी सेवा से बर्खास्त किया गया था।

बॉर्डर और LoC के रास्ते Pak भेज रहा हेरोइन: हजारों करोड़ की ड्रग्स ज़ब्त

भारत-पाकिस्तान सीमा पर सुरक्षा बलों की कड़ी निगरानी के कारण पाकिस्तान को आतंकियों की घुसपैठ कराने में मुश्किल का सामना करना पड़ रहा है इसलिए अब उसने अब भारत में अवैध रूप से ड्रग्स भेजना शुरू कर दिया है। हालाँकि इस तरह की कारस्तानी पाकिस्तान पहले भी करता रहा है लेकिन आजकल इसमें बढ़ोतरी दिखाई दे रही है।

अमर उजाला में प्रकाशित खबर के मुताबिक इंटरनेशनल बार्डर और एलओसी दोनों की ओर से ही बड़े पैमाने पर हेरोईन की सप्लाई आ रही है। जानकारी के अनुसार सिर्फ़ पिछले 2 सालों में 2500 करोड़ की हेरोईन पकड़ी जा चुकी है जिसमें नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो ने ही लगभग 1500 करोड़ की हेरोईन जब्त की है। जबकि बाकी हेरोईन पुलिस की कार्रवाई में पकड़ी गई है।

खबर के मुताबिक पहले हेरोईन की सप्लाई सिर्फ़ एलओसी के जरिए होती थी लेकिन अब इसकी तस्करी के लिए बॉर्डर का भी इस्तेमाल किया जा रहा है। सुंदरबनी और सुचेतगढ़ ऐसे बॉर्डर इलाके रहे हैं जहाँ एक ही तरह की प्लॉनिंग से हेरोईन तस्करी की कोशिश की गई हैं।

इस दौरान तस्करों ने प्लॉस्टिक कैन को फाड़ा, फिर पैकिंग करके उसे दोबारा जोड़ दिया और बाद में उसे भारतीय सीमा में फेंक दिया। बताया जा रहा है कि चौधरी अकरम पाकिस्तान में हेरोईन का सबसे बड़ा तस्कर है। अकरम भारतीयों के साथ लगातार संपर्क में रहता है और कठुआ से पुंछ तक नेटवर्क चलाता है। पाकिस्तानी रेंजर भी अकरम की इस काम में मदद करते हैं।

बता दें पिछले दो दिनों में ही जम्मू-कश्मीर में 13 किलो हेरोईन बरामद हुई। कल ही जम्मू कश्मीर के उधमपुर जिले में हेरोइन जैसा आठ किलोग्राम नशीला पदार्थ बरामद किया गया है। हालाँकि इस मामले में दो कथित ड्रग तस्करों की भी गिरफ्तारी हुई है। पुलिस ने बताया है कि इस मामले में काजीगुंड के निवासी सिराज अहमद और जावीद अहमद शाह को गिरफ्तार किया गया है।

इसके अलावा इस घटना से एक दिन पहले ही डीआरआई ने बीएसएफ के साथ एक संयुक्त अभियान में सुचेतगढ़ सीमा निगरानी चौकी के पास से पाँच किलोग्राम हेरोइन जब्त की थी।

दारुल उलूम देवबंद का फतवा: अब CCTV लगाना भी गैर इस्लामी

अपने अजीबो-गरीब फतवों के कारण चर्चा में रहने वाले उत्तर प्रदेश के सहारनपुर स्थित इस्लामिक शिक्षण संस्थान दारुल उलूम देवबंद का सोशल मीडिया पर एक फतवा खूब तेजी से वायरल हो रहा है। इस फतवे में दारूल उलूम देवबंद ने बताया है कि मकान के बाहर बेवजह सीसीटीवी लगाना गैर-इस्लामी है। हालाँकि फतवे में ये भी स्पष्ट किया गया है कि अगर बहुत अधिक जरूरत है तो ऐसी स्थिति में सीसीटीवी लगवाया जा सकता है।

नवभारत टाइम्स में प्रकाशित खबर के मुताबिक इस फतवे के बारे में पूछे जाने पर देवबंदी आलीम ने फतवे का समर्थन किया और बताया कि सोशल मीडिया में जो दारुल उलूम देवबंद का फतवा वायरल हो रहा है, वह लगभग एक साल पुराना है।

इस दौरान दारुल उलूम देवबंद की इफ्ता कमेटी से पूछा गया था कि लोग अपनी दुकान और मकान के बाहर सीसीटीवी कैमरे लगवा सकते हैं या नहीं। साथ ही यह भी पूछा गया था कि शरियत इस विषय के बारे में क्या कहती है। इसके जवाब में ही दारुल उलूम देवबंद ने बताया था कि अगर ज्यादा जरूरत है तो सीसीटीवी कैमरा लगाया जा सकता है। लेकिन बिना जरूरत सीसीटीवी कैमरा लगाने की इजाजत शरीयत के अंदर नहीं है।

जी न्यूज की खबर के मुताबिक फतवे में कहा गया है कि मकान और दूकान की सुरक्षा के लिए सीसीटीवी कैमरे लगाने के अलावा कई दूसरे जायज तरीके इस्तेमाल किए जा सकते हैं, क्योंकि सीसीटीवी कैमरे लगाने से तस्वीरें कैद होती हैं और इस्लाम धर्म में बिना जरूरत तस्वीरें खिंचवाना सख्त मना है।

गौरतलब है कि ये पहला मौक़ा नहीं है जब दारुल उलूम देवबंद की ओर से ऐसा अजीब फतवा जारी किया गया। इससे पहले भी कई विवादित फतवों के लिए दारुल-उलूम-देवबंद चर्चा में रहा है। पिछले साल 2018 की शुरुआत में ही दारुल ने मस्लिम महिलाओं के चमकीले और चुस्त कपड़े पहनने, नेल पेंट लगाने आदि पर फतवे जारी किए थे।

मोदी सरकार भ्रष्टाचार पर सख्त: सरकारी कर्मचारियों के कामकाज की होगी समीक्षा, छिन सकती है नौकरी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुवाई में एनडीए की दोबारा सत्ता में वापसी के बाद मोदी सरकार भ्रष्टाचारियों पर लगाम लगाने के लिए सख्ती के मूड में है। भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त कदम उठाते हुए सरकार ने नई पहल की है। इसके तहत केंद्र ने भ्रष्ट और नाकारा कर्मचारियों को बाहर का रास्ता दिखाने के लिए बैंकों, सार्वजनिक उपक्रमों एवं अपने सभी विभागों से अपने कर्मियों के सेवा रिकॉर्ड की समीक्षा करने को कहा है। इसकी शुरूआत 15 जुलाई 2019 से होगी।

पिछले दिनों टैक्स डिपार्टमेंट के 25 से ज्यादा वरिष्ठ अधिकारियों को जबरन रिटायरमेंट दी गई। कार्मिक मंत्रालय ने केंद्र सरकार के सभी विभागों से प्रत्येक श्रेणी के कर्मचारियों के कामकाज की समीक्षा सख्ती और पूरे नियम कायदे से करने के साथ यह भी सुनिश्चित करने को कहा है कि किसी कर्मचारी के खिलाफ जबरन सेवानिवृत्ति की कार्रवाई में मनमानी न हो। ये नियम सरकार को जनहित में उस सरकारी कर्मचारी को सेवानिवृत्त करने की अनुमति देता है जिसकी ईमानदारी संदेहास्पद है और जो काम के मामले में कच्चे हैं।  

इसमें कहा गया है कि सभी मंत्रालयों व विभागों से आग्रह है कि वे सार्वजिनिक उपक्रमों/बैंकों और स्वायत्त संस्थानों समेत अपने प्रशासनिक नियंत्रण में आने वाले विभागों के कर्मचारियों के कामकाज की ‘कायदे कानून और सही भावना’ के अनुसार समीक्षा करें। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने संसद के दोनों सदनों की संयुक्त बैठक को संबोधित करते हुए बृहस्पतिवार को कहा था कि सार्वजनिक जीवन और सरकारी सेवाओं से भ्रष्टाचार को हटाने का अभियान चलाया जाएगा। 

हर महीने की 15 तारीख को देनी होगी रिपोर्ट

रिपोर्ट्स के अनुसार, कार्मिक मंत्रालय ने कहा है कि मंत्रालयों या विभागों को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि एक सरकारी कर्मचारी को जनहित में समय से पहले सेवानिवृत्त करने जैसी निर्धारित प्रक्रिया का कड़ाई से पालन हो और ऐसा निर्णय मनमाना न हो। निर्देश के मुताबिक, “सभी सरकारी संगठनों को प्रत्येक महीने की 15 तारीख को निर्धारित प्रारूप में रिपोर्ट देने को कहा गया है। इसकी शुरूआत जुलाई 15, 2019 से होगी।”

कार्मिक मंत्रालय ने कहा कि मंत्रालयों या विभागों को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि एक सरकारी कर्मचारी को जनहित में समय से पहले सेवानिवृत्त करने जैसी निर्धारित प्रक्रिया का कड़ाई से पालन हो।

हाल ही में 27 ‘सुस्त’ अधिकारियों को सरकार कर चुकी है जबरन रिटायर

केंद्र सरकार ने हाल ही में जनहित में सीमा शुल्क और केंद्रीय उत्पाद विभाग के 15 अधिकारियों को समय से पहले सेवानिवृत्त कर चुकी है। इससे पहले इस महीने की शुरूआत में भारतीय राजस्व सेवा (आयकर) के 12 अधिकारियों को भी सेवा से बर्खास्त किया गया था।