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170 चुनाव हारने का बनाया रिकॉर्ड, खुद को कहते हैं ‘ऑल इंडिया इलेक्‍शन किंग’

चुनाव नज़दीक होने के कारण इन दिनों हर उम्मीदवार सिर्फ़ इसी जद्दोजहद में जुटा होगा कि किस तरह से मतदाताओं को आकर्षित करके जीत हासिल की जाए। इन दिनों कोई सपने में भी हारने की नहीं सोचता होगा। लेकिन भारतीय राजनीति में एक शख्स ऐसा भी है जो अब तक अपने जीवन में 170 चुनाव लड़ चुका है, लेकिन एक भी नहीं जीत पाया।

इस शख्स का नाम डॉ के पद्मराजन है। जिन्होंने लगातार चुनावों में हारने के बाद भी रिकॉर्ड कायम किया है। उनका नाम लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में ‘भारत के सबसे असफल उम्मीदवार’ के रूप में भी दर्ज हो चुका है।

तमिलनाडु के सलेम के रहने वाले डॉ पद्मराजन ने पहली बार चुनाव 1988 में लड़ा था, लेकिन उन्हें इसमें जीत हासिल नहीं हुई। लेकिन पद्मराजन हार से पस्त पड़ने वालों में से नहीं थे। नतीजन उनका जज़्बा कम नहीं हुआ। वह लगातार चुनावों में उतरे और हारते रहे। 60 साल के पद्मराजन अब तक 170 चुनाव लड़ चुके हैं लेकिन उन्हें एक में भी सफलता प्राप्त नहीं हुई है।

पेशे से डॉ पद्मराजन एक होम्योपैथिक डॉक्टर हैं, जोकि अब एक बिजनेसमैन भी बन चुके हैं। अब वह खुद को ऑल इलेक्शन किंग बोलता है। 1988 से लेकर अब तक वह स्थानीय चुनावों से लेकर लोकसभा चुनावों तक में अपना हाथ आजमा चुके हैं और हर जगह असफल हुए हैं।

आपको यह खबर थोड़ी हास्यास्पद लग सकती है लेकिन पद्मराजन ने अटल बिहारी वाजपेयी, मनमोहन सिंह, प्रणब मुखर्जी, एपीजे अब्दुल कलाम, जयललिता, पूर्व रक्षा मंत्री एके एंटनी, पूर्व राष्ट्रपति के. आर. नारायण, पूर्व विदेश मंत्री एसएम कृष्णा जैसे दिग्गजों के ख़िलाफ़ भी चुनाव लड़ा है। साथ ही 2017 में ये राष्ट्रपति पद के लिए भी चुनाव लड़ चुके हैं।

चुनाव आयोग का बड़ा फैसला, इस सीट पर EVM नहीं, बैलेट पेपर से होगा मतदान

लोकतंत्र के महापर्व यानी लोकसभा चुनाव का बिगुल बज चुका है। 11 अप्रैल से पहले चरण का मतदान शुरू हो जाएगा। हर बार चुनाव के दौरान इलेक्ट्रानिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) का मामला खूब जोर-शोर से उठता है और चुनाव हारने के बाद राजनीतिक पार्टियों द्वारा ईवीएम पर ठीकरा फोड़ना भी अब आम बात हो चुकी है। इसे लेकर समय-समय पर कुछ राजनीतिक पार्टियाँ ईवीएम की जगह फिर से मतपत्र से मतदान कराने की माँग करती रहती है। ऐसे में चुनाव आयोग ने देश की एक लोकसभा सीट पर मतपत्र से चुनाव कराने का निर्णय लिया है। हालाँकि, इसकी वजह राजनीतिक पार्टियों की आपत्ति या माँग नहीं, बल्कि कुछ और है, जिसने चुनाव आयोग को मतपत्रों का इस्तेमाल करने के लिए मजबूर कर दिया है।

चुनाव आयोग ने तेलंगाना राज्य के हैदराबाद की निजामाबाद लोकसभा सीट पर मतपत्र से चुनाव करने का निर्णय लिया है। इसकी वजह ये है कि यहाँ पर लोकसभा के उम्मीदवारों की सूची इतनी लंबी हो गई है कि ईवीएम के जरिए चुनाव करा पाना संभव नहीं है। काफी संख्या में नामांकन होने की वजह से चुनाव आयोग को यहाँ हर बूथ पर काफी संख्या में ईवीएम की जरूरत पड़ेगी, जो काफी मुश्किल है। इसलिए चुनाव आयोग ने इस लोकसभा सीट पर ईवीएम की जगह मतपत्र से मतदान कराने का निर्णय लिया है।

जानकारी के मुताबिक, निजामाबाद लोकसभा सीट पर कुल 185 उम्मीदवारों ने नामांकन दाखिल किया है। इसमें 178 किसान शामिल हैं। बता दें कि, निजामाबाद लोकसभा सीट से तेलंगाना के मुख्यमंत्री के. चंद्रशेखर राव की बेटी के. कविता लोकसभा चुनाव लड़ रही हैं। इसीलिए किसानों ने राज्य की सत्ताधारी पार्टी तेलंगाना राष्ट्र समिति की नाकाम नीतियों का विरोध करने के लिए यहाँ से नामांकन दाखिल किया है। बताया जा रहा है कि फसलों के लिए बेहतर मुआवजे की माँग कर रहे किसानों की योजना तो कम से कम एक हजार पर्चे भरने की थी।

दरअसल एक ईवीएम में अधिकतर 16 उम्मीदवारों के ही नाम दर्ज हो सकते हैं और एक कंट्रोल यूनिट अधिकतम 4 ईवीएम से जुड़कर इनका रिकॉर्ड दर्ज कर सकती है। यानी एक कंट्रोल यूनिट ज्यादा से ज्यादा 64 उम्मीदवारों के नाम पर ही मतदान के लिए इस्तेमाल की जा सकती है। अब ऐसे में जब निजामाबाद सीट पर 185 उम्मीदवार अपना राजनीतिक भविष्य तलाश रहे हैं, तो चुनाव आयोग के पास बैलेट पेपर के अलावा अन्य किसी तरीके से चुनाव कराने का कोई विकल्प नहीं रह जाता।

इस मामले पर मुख्य चुनाव अधिकारी ने कहा, “क्योंकि ईवीएम के जरिए मतदान कराना संभव नहीं है, इसलिए हम बैलेट पेपर का इस्तेमाल करेंगे। हमने इस मामले की जानकारी भारतीय निर्वाचन आयोग को दे दी है और उनके निर्देशों का इंतजार कर रहे हैं।” गौरतलब है कि राज्य में 1996 और 2010 में भी बैलेट पेपर का इस्तेमाल किया गया था। इसके साथ जनवरी 2019 में भी ग्राम पंचायत चुनाव में मतपत्रों से वोट पड़े थे।

नोटबंदी के दौरान टैक्स चोरी में लिप्त 3 लाख कम्पनियाँ जाँच के दायरे में: आयकर विभाग

केंद्र सरकार किसी भी तरह के भ्रष्टाचार के प्रति सख़्त रुख अपनाने के अपने वादे पर नोटबंदी के बाद से ही और कड़े कदम उठाने के लिए प्रतिबद्ध है। जिसका प्रमाण उसकी कार्यप्रणाली में भी नज़र आता है। आयकर विभाग ने तय किया है कि नोटबंदी के दौरान कर चोरी और मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में करीब तीन लाख कंपनियों के वित्तीय लेन-देन की जाँच होगी।

केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) ने आयकर विभाग को इन कंपनियों की जाँच करने का निर्देश दिया है। नोटबंदी के दौरान कई कम्पनियाँ संदिग्ध लेन-देन में लिप्त पाई गई थी। इसके बाद सरकार ने कार्रवाई करते हुए करीब तीन लाख कंपनियों का पंजीकरण रद्द कर दिया था।

सीबीडीटी ने पत्राचार में कहा, बोर्ड चाहता है कि मनी लॉन्ड्रिंग गतिविधियों में इन कंपनियों के संभावित दुरुपयोग का पता लगाने के लिए आयकर कार्यालय कंपनियों के बैंक खातों से निकासी और जमा की पड़ताल करें। खासकर कंपनियों के पंजीकरण रद्द होने की प्रक्रिया के समय और उससे पहले नोटबंदी के दौरान के वित्तीय लेनदेन को खंगाला जाए।

आयकर विभाग को इस बात का संदेह है कि इन कंपनियों में से अधिकांश ने अपने कॉरपोरेट ढाँचे का इस्तेमाल करते हुए नोटबंदी के दौरान नकदी को जमा कराने का काम किया। बता दें कि सीबीडीटी ने कर अधिकारियों से कॉरपोरेट मामलों के मंत्रालय की वेबसाइट पर मौजूद इन कंपनियों की जानकारी जुटाने के लिए कहा है और उसके बाद इनके आयकर रिटर्न की जाँच पड़ताल करने और बैंकों से उनके वित्तीय लेन-देन के बारे में जाँच करने के लिए कहा है।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि बोर्ड के पास जानकारी है कि इनमें से कई कंपनियों के कर से जुड़े अपराधों में लिप्त होने की आशंका है। यह साबित हो जाने पर आयकर विभाग कंपनियों के खिलाफ कर चोरी और मनी लॉन्ड्रिंग में लिप्त रहने के लिए कार्रवाई शुरू करेगा। उन्होंने कहा कि मनी लॉन्ड्रिंग के मामलों को प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के पास भी भेजा जाएगा।

सीबीडीटी ने कहा, अगर कंपनी या व्यक्ति के संदिग्ध लेनदेन का पता चलता है तो राष्ट्रीय कंपनी विधि न्यायाधिकरण (एनसीएलटी) के समक्ष अपील करके कंपनी की बहाली की माँग की जाएगी ताकि आयकर अधिनियम के प्रावधानों के तहत उचित कार्रवाई की जा सके।

सीबीडीटी ने देशभर के आयकर अधिकारियों को मनी लॉन्ड्रिंग में लिप्त कंपनियों की जाँच तय समय-सीमा के अंदर पूरा करने का निर्देश दिया है ताकि विभाग द्वारा रजिस्ट्रार ऑफ कंपनीज (आरओसी) में समय पर हस्तक्षेप किया जा सके और कंपनी बंद होने से पहले दोषी व्यक्ति पर कार्रवाई हो सके।

‘जिताऊ’ प्रत्याशी की तलाश में कॉन्ग्रेस ने की बड़ी गलती, सोशल मीडिया पर उड़ा जमकर मजाक

एक तरफ जहाँ चुनाव जीतने के लिए कॉन्ग्रेस हर मामले में उत्सुकता दिखा रही है। जगह-जगह जाकर अपनी जीत की पहले ही घोषणा कर रही है। वहीं कॉन्ग्रेस द्वारा टिकट बँटवारे में बहुत बड़ी गलती सामने आई है। जिसके कारण कॉन्ग्रेस की उत्सुकता का लोगों के बीच मजाक बन रहा है। इसे पार्टी के नेताओं की अपरिपक्वता भी कहा जा सकता है।

दरअसल, जिताऊ प्रत्याशी की तलाश में कॉन्ग्रेस ने यह गलतियाँ की है। गुरुवार (मार्च 28, 2019) को पार्टी ने यूपी की महराजगंज सीट से पूर्व मंत्री अमरमणि त्रिपाठी की बेटी तनुश्री त्रिपाठी को बिना यह जाने प्रत्याशी घोषित कर दिया कि उन्हें पहले से ही दूसरी पार्टी अपना उम्मीदवार बनाकर उतार चुकी है।

जी हाँ। जिन तनुश्री में कॉन्ग्रेस अपना जिताऊ प्रत्याशी तलाश रही थी, उन्हें शिवपाल सिंह यादव के नेतृत्व वाली प्रसपा ने महराजगंज से अपना प्रत्याशी बनाया हुआ है।

विधानसभा चुनाव में अमरमणि के बेटे अमनमणि ने भी कॉन्ग्रेस से चुनाव लड़ने की इच्छा जताई थी, लेकिन कॉन्ग्रेस ने उन्हें मना कर दिया। इसके बाद अमन ने निर्दलीय चुनाव लड़के जीत हासिल की। जिसके चलते कॉन्ग्रेस को उनकी बहन तनुश्री में जिताऊ प्रत्याशी का चेहरा दिखने लगा।

कॉन्ग्रेस का चुनावों को लेकर ऐसा गैर-जिम्मेदाराना बर्ताव देखकर, सोशल मीडिया ने कॉन्ग्रेस की जमकर चुटकी ली। जिसके कारण शुक्रवार (मार्च 29, 2019) की सुबह अपनी गलती मानते हुए वहाँ से पूर्व सांसद हर्षवर्धन सिंह की बेटी सुप्रिया श्रीनेट को टिकट दे दिया

यहाँ बता दें कि जिन तनुश्री को टिकट देने के लिए कॉन्ग्रेस ने इतनी आतुरता दिखाई है, उनके माता-पिता (अमरमणि त्रिपाठी और उनकी पत्नी मधुमणि) कवियत्री मधुमिता हत्याकांड में जेल में हैं।

23 मई की जगह 28 मई को आएँगे लोकसभा चुनाव के नतीजे, ये है वजह…

लोकसभा चुनावों की तारीखों के ऐलान के बाद एक बार फिर से ईवीएम और वीवीपैट मशीनों को लेकर बहसबाजी शुरु हो गई है। विपक्षी दलों की तरफ से चुनाव आयोग पर सवाल उठाए जा रहे हैं। विपक्षी दलों द्वारा ईवीएम और वीवीपैट पर्चियों का मिलान 50 फीसदी तक बढ़ाने की माँग अगर मान ली गई तो चुनाव नतीजे आने में तकरीबन 5 दिन ज्यादा लग सकते हैं।

चुनाव आयोग ने शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट को यह जानकारी दी है। चुनाव आयोग ने और भी कई चुनौतियों की बात कही है। आयोग के मुताबिक, गिनती के लिए बड़े पैमाने पर सक्षम स्टाफ की जरूरत होगी। इतना ही नहीं, ऐसे गिनती करने के लिए बड़े काउंटिंग हॉल्स की भी जरूरत होगी।

गौरतलब है कि, 21 विपक्षी दलों के नेताओं ने कोर्ट में याचिका दाखिल कर माँग की थी कि एक निर्वाचन क्षेत्र में कम से कम 50 प्रतिशत वीवीपैट पर्चियों की मिलान किया जाए, ताकि चुनावी प्रक्रिया की शुद्धता पर आँच न आए। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग से विचार करने को कहा था। इसके जवाब में चुनाव आयोग ने कहा, “अगर हर संसदीय या विधानसभा क्षेत्र की 50 प्रतिशत वीवीपैट पर्चियों का मिलान किया जाएगा, तो इससे गिनती करने का वक्त बढ़ेगा। इसमें करीब 5 दिन तक ज्यादा लग सकते हैं। ऐसे में लोकसभा चुनाव 2019 के नतीजों की घोषणा 23 मई की जगह 28 मई को हो पाएगी।”

इसके साथ ही चुनाव आयोग ने कोर्ट को बताया कि फिलहाल ऑटोमैटिक रूप से पर्चियों के मिलान का तरीका उपलब्ध नहीं है। आयोग ने कहा कि अभी फिलहाल कोई मकेनिकल सिस्टम नहीं है, क्योंकि वीवीपैट से निकल रही स्लिप पर कोई बारकोड नहीं लगा है। ऐसे में लोकसभा चुनाव के नतीजे 28 तो वहीं विधानसभा चुनाव के नतीजे 30 या 31 से पहले नहीं आ पाएँगे।

बता दें कि, वर्तमान में चुनाव आयोग प्रत्येक क्षेत्र से कोई भी एक ईवीएम का चुनाव करता है और उसकी पर्चियों का मिलान करने का काम करता है। फिलहाल देश में कुल 10.35 लाख पोलिंग स्टेशन हैं और अगर औसत की बात करें, तो एक असेंबली सीट में 250 पोलिंग स्टेशन है। आयोग की मानें तो, एक पोलिंग स्टेशन पर वीवीपैट काउंटिंग में फिलहाल एक घंटे का समय लगता है। लेकिन यदि इसे 50 प्रतिशत तक बढ़ा दिया गया, तो इसमें औसतन 5.2 दिन का वक्त लग जाएगा।

कश्मीर में सुरक्षाबलों ने तीन महीने में मार गिराए 48 आतंकी, अलगाववाद से लेकर आतंकवाद पर पैनी नज़र

लोकसभा चुनाव की घड़ियाँ नजदीक हैं। सरकार के पास इस समय कई चुनौतियाँ हैं। खासतौर से जम्मू-कश्मीर में जहाँ अभी भी कई आतंकी रह-रह कर सक्रीय भूमिका में आ रहे हैं। अलगाववादियों पर कार्रवाई के बाद से वो भी चुनाव में माहौल बिगाड़ने के लिए सक्रीय हैं। इस समय कश्मीर में सुरक्षा बल अपना दोहरा दायित्व निभा रहे हैं। एक तरफ घाटी में लोक सभा चुनाव और लोकतांत्रिक प्रक्रिया के लिए खतरा माने जा रहे आतंकियों को ढेर करने का सिलसिला जारी है। अब तक हुए सर्च अभियान और मुठभेड़ में तीन महीने में 48 आतंकियों को सुरक्षा बल मौत के घाट उतार चुके हैं।

दूसरी तरफ आम कश्मीरियों को सुरक्षाबल समझा और यकीन दिला रहे हैं कि उनके विकास और बेहतरी के लिए चुनाव प्रक्रिया में भाग लेना जरूरी है। किसी से भी डरने की जरूरत नहीं है। सुरक्षा बल से जुड़े एक अधिकारी ने कहा कि आम लोग चुनावों में दिलचस्पी ले रहे हैं लेकिन भय और दहशत का माहौल खत्म करना सुरक्षा बलों की पहली जिम्मेदारी है और हम इस अभियान में जुटे हैं।

घाटी में आतंकी गुटों का साथ देने वालों को भी स्पष्ट रूप से आगाह किया जा रहा है कि अगर वे मुख्यधारा से अलग सोच के साथ खड़े होंगे तो उन्हें दुष्परिणाम भुगतना पड़ेगा।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, सीआरपीएफ के हवाले से कहा गया कि तीन महीने में सुरक्षा बल उच्च स्तर से मिले संदेश के मुताबिक आतंकियों को ठिकाने लगाने में जुटे हैं। करीब 90 दिन के भीतर जिन 48 आतंकियों को मार गिराने में सफलता मिली है, उनमें जैश के अलावा स्थानीय आतंकी भी शामिल हैं।

सुरक्षा एजेंसियों को सूचना मिली है कि प्रतिबंधित जमात-ए-इस्लामी व जेकेएलएफ के सदस्यों ने नाम बदलकर गुपचुप तरीके से अपनी गतिविधि शुरू की है। वे स्थानीय लोगों को चुनाव से दूर करने की कोशिश कर रहे हैं और लोकतांत्रिक प्रक्रिया में शामिल होने पर परिणाम भुगतने की चेतावनी भी दी जा रही है।

रिपोर्ट के अनुसार, सुरक्षा बलों से जुड़े सूत्रों ने कहा कि चुनाव के दौरान आतंकवादी गुट अलगाववादी नेताओं के साथ मिलीभगत करके बड़े पैमाने पर हिंसा की साजिश रच रहे हैं। इसके चलते शांतिपूर्ण चुनाव कराना सुरक्षा बलों के लिए बड़ी चुनौती है। सुरक्षा एजेंसियों ने खुफिया एजेंसियों की मदद से पूरे घाटी में सघन अभियान शुरू किया है। हर इलाके में सक्रिय आतंकी व अलगाववादी गुटों की गतिविधि खंगाली जा रही है। जिस पर भी लोकसभा चुनाव के दौरान हिंसा या अराजकता फैलाने का संदेह है या जिनकी ऐसी हिस्ट्री रही है, उन्हें हिरासत में भी लिया जा रहा है।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, सुरक्षा बलों के अधिकारियों ने कहा कि घाटी में सुरक्षा बल आतंकियों व अलगाववादी गुटों की हर रणनीति का जवाब देने को तैयार हैं।

बालाकोट एयर स्ट्राइक का सबूत मिटा, 32 दिन बाद पाकिस्तान ने मीडिया को दिखाया आतंकी कैंप

पाकिस्तान के बालाकोट पर भारतीय वायु सेना द्वारा किए गए एयर स्ट्राइक के तकरीबन एक महीने बाद पाकिस्तान ने उस जगह पर मीडिया को जाने की इजाजत दी, जहाँं पर एयर स्ट्राइक किया गया था। बता दें कि 14 फरवरी, 2019 को जम्मू कश्मीर के पुलवामा में सेना के काफिले पर हुए हमले का भारतीय वायु सेना ने जिस तरह से जवाब दिया था, उससे आज भी पाकिस्तान डरा हुआ है। लेकिन सार्वजनिक तौर पर वो आज तक इसलिए नहीं बोल पा रहा क्योंकि उसे लगता है कि इससे उसकी बदनामी होगी।

सीआरपीएफ के काफिले पर हुए हमले के ठीक 12 दिन बाद 26 फरवरी को भारतीय वायुसेना ने बालाकोट में जैश के ठिकानों एयर स्ट्राइक किया था, जिसमें 300 से ज्यादा आतंकियों के मारे जाने का दावा किया गया। मगर पाकिस्तान इसे नकारता रहा। पाकिस्तान ने विदेशी मीडिया को भी उस जगह जाने की इजाजत नहीं दी, जिस जगह पर भारतीय वायु सेना ने एयर स्ट्राइक किया था। अब एयरस्ट्राइक के 32 दिन बार पाकिस्तानी सेना, पत्रकारों के एक ग्रुप को घटनास्थल पर लेकर गई।

हालाँकि सच जानने गए पत्रकारों को यहाँ भी निराशा ही हाथ लगी। बालाकोट के कुछ इलाके अभी भी पाकिस्तानी अर्द्धसैनिक बलों ने घेर रखे हैं। वहाँ पर किसी को जाने की इजाजत नहीं है। रक्षा मंत्रालय से जुड़े एक अधिकारी के मुताबिक, पाकिस्तान ने इन 32 दिनों में बालाकोट का हुलिया बदलकर दुनिया को ऐसा दिखाने को कोशिश की है, जैसे कि ये कोई आम मदरसा है। 28 मार्च को आठ मीडिया टीम के सदस्यों को बालाकोट कैंप के अंदर ले जाने से पहले 300 के करीब बच्चों को कैंप में बैठा दिया गया था और सभी बच्चों को पहले ही ये समझा दिया गया था कि उन्हें मीडिया के सामने क्या बोलना है।

इससे पहले मीडिया एजेंसी रॉयटर्स की टीम ने 28 फरवरी से लेकर 8 मार्च के बीच तीन बार बालाकोट में जाने की कोशिश की, लेकिन पाक सेना ने कभी खराब मौसम की बात कहकर तो कभी सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए तीनों ही बार उन्हें मना कर दिया।

जानकारी के मुताबिक, पाकिस्तान ने बालाकोट में हुए एयर स्ट्राइक के बाद से पाकिस्तानी सेना की फ्रंटियर कोर को तैनात कर दिया था। इसके बाद गुपचुप तरीके से आतंकियों के शवों को हटाया गया, तबाह हुए कैंप को सही किया गया और फिर मीडिया टीम को बालाकोट कैंप के अंदर ले जाया गया।


मोहम्मद रोशन के खिलाफ नाबालिग के यौन उत्पीड़न करने पर केस दर्ज, दर्ज हो सकता है PoCSO

कोल्लम की पुलिस टीम मार्च 18, 2019 दोपहर अपहरण की गई राजस्थानी लड़की को ओचिरा ले आई है। टीम ने उसे मंगलवार (मार्च 26, 2019)  को मुंबई के पनवेल में मुख्य आरोपित मुहम्मद रोशन के साथ पाया।

रोशन पर फिलहाल नाबालिग लड़की का अपहरण करने का आरोप है, यदि इसे यौन शोषण के साथ लगाया जाता है तो मामला गंभीर हो सकता है। रोशन को पनवेल की एक अदालत के सामने पेश किया गया और ट्रांजिट वारंट के तहत सड़क मार्ग से कोल्लम लाया गया।

मोहम्मद रोशन ने 3 अन्य साथियों के साथ मिलकर लड़की का 18 मार्च को ओचिरा में उसके किराए के घर से अपहरण कर लिया था। हालाँकि, लड़की ने पुलिस को बताया कि वह पिछले दो वर्षों से रोशन के साथ प्यार में थी और उसके साथ ही जीना चाहती है।

जबकि, पुलिस का कहना है कि लड़की नाबालिग है, मोहम्मद रोशन के रिश्तेदारों ने आरोप लगाया है कि लड़की के परिवार ने उसकी उम्र पर पुलिस को गुमराह किया था और वह नाबालिग नहीं थी।

पुलिस को उस लड़की के स्कूल ट्रांसफर सर्टिफिकेट की एक प्रति मिली, जिसमें उसकी जन्मतिथि सितंबर 2001 दर्ज की गई है, जिससे साबित होता है कि वह नाबालिग है। पुलिस राजस्थान के रामपुरा में उसके स्कूल का दौरा करेगी, जहाँ उसके बारे में अधिक जानकारी एकत्र की जा सकेगी।

चूँकि, अगवा की गई लड़की की उम्र सर्टिफिकेट अनुसार 18 वर्ष से कम हो गई है, इसलिए पुलिस सभी 4 आरोपितों को यौन अपराध से संरक्षण अधिनियम (PoCSO) अधिनियम, 2012 की धाराओं के साथ कार्रवाई करने पर विचार कर रही है। इस मामले में पेइन्कुझी के बिपिन (20), ओचिरा के मेमना साउथ के कानाट्टा के मुहम्मद रोशन (21) चांगंकुलंगरा के 20 साल के पियारी आरोपित हैं।

पुलिस के मुताबिक, मुहम्मद रोशन बच्ची को कोच्चि से ट्रेन में बेंगलुरु और फिर मुंबई ले गया था। पुलिस टीम ने आरोपितों को एक रिश्तेदार द्वारा मुंबई में उन्हें ट्रेस करने के लिए किए गए फोन कॉल द्वारा ट्रैक किया था। पुलिस टीम ने मुंबई में उन्हें पकड़ने से पहले राजस्थान और बेंगलुरु में जोर शोर से तलाशी की थी।

एक राजस्थानी दंपति की बेटी का मोहम्मद रोशन के नेतृत्व में एक गिरोह द्वारा कथित रूप से अपहरण कर लिया गया था। 18 मार्च की रात 10 बजे के आसपास एक किराए की कार में लड़की के माता-पिता की पिटाई की गई थी और उसके बाद नाबालिग लड़की का अपहरण कर लिया गया था।

राजस्थान का परिवार पिछले दो साल से ओचीरा में रह रहा है और रास्ते में मिट्टी की मूर्तियाँ बेचता है। आजकल वे ओचिरा-वलियाकुलंगारा क्षेत्र में अपनी मूर्तियाँ बेच रहे थे।

शुक्रिया TOI, ये बताने के लिए कि क्रिस गेल उर्फ़ कृष्ण गोयल ने BJP ज्वाइन नहीं की है!

हाल ही के कुछ वर्षों में ‘MEME संस्कृति’ ने इंटरनेट से लेकर लोगों के आम बोलचाल के तरीकों को बहुत हद तक प्रभावित किया है। व्यंग्य हो या फिर हंसी-मजाक के तौर पर अपनी बात रखनी हो, लोग MEME के माध्यम से राजनीति से लेकर सामाजिक गतिविधियों पर अपनी राय रखते नजर आते हैं।

इसी क्रम में भारतीय राजनीति में ये दौर तब शुरू हुआ जब उत्तर प्रदेश मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सोशल मीडिया MEME वायरल होने शुरू हुए। इन MEME में योगी आदित्यनाथ को लोगों को फोन कॉल पर इलाहाबाद से प्रयागराज की तर्ज पर उनके नाम बदलते हुए दिखाया जाता है।

MEME ही जीवन जैसे ‘Fun Liners’ को टाइम्स ऑफ़ इंडिया (TOI) ग्रुप ने सत्य मान लिया और एक कदम आगे जाते हुए MEME का भी फैक्ट चेक कर उसकी पुष्टि कर डाली। इसी तरह से ‘दी लल्लनटॉप‘ नाम की एक वेबसाइट ने भी एक बार MEME बनाने वाले फेसबुक पेजों पर निबंध लिखकर ब्राह्मणवाद से लेकर पितृसत्ता तक को गाली देकर पत्रकारिता में नए कीर्तिमान स्थापित किए थे।

लेकिन TOI जैसे मुख्यधारा के समाचार चैनलों द्वारा इस तरह की पहले से ही भंडाफोड़ ख़बरों का भंडाफोड़ करना हास्यास्पद और निराशाजनक है। TOI ने वेस्टइंडीज के क्रिकेटर क्रिस गेल की एक तस्वीर को ये कहते हुए बताया है कि यह आदमी कृष्णा गोयल नहीं बल्कि क्रिस गेल है और इन्होने बीजेपी जॉइन नहीं की है, ना ही क्रिस गेल भाजपा के लिए चुनाव प्रचार कर रहे हैं।

TOI द्वारा किए गए ‘फैक्ट चेक’ का स्क्रीनशॉट

यह बात एक औसत IQ वाला प्रत्येक व्यक्ति जनता है कि कौन-सी चीज हास्य के लिए और कौन-सी चीज गंभीर तरीके से इस्तेमाल की जा सकती है। इसी तरह की एक बेवकूफाना हरकत कुछ दिन पहले कुछ मीडिया गिरोहों द्वारा भी की गई थी। यह प्रमाणित करता है कि जिन लोगों को ये मीडिया गिरोह फैक्ट चेक के माध्यम से शिक्षित करने का प्रयास करते हैं, उनका हास्य और जानकारी का स्तर फैक्ट चेकर्स से कहीं ज्यादा है।

भगोड़े नीरव मोदी को नहीं मिली जमानत, गवाह को दी जान से मारने की धमकी, था भागने की फ़िराक़ में

पंजाब नैशनल बैंक (पीएनबी) घोटाले के मुख्य आरोपित भगोड़े हीरा कारोबारी नीरव मोदी की जमानत याचिका पर सुनवाई शुरू हुई। लंदन की वेस्टमिंस्टर कोर्ट में नीरव मोदी की जमानत पर सुनवाई लम्बे समय तक चली। अभी कोर्ट ने उसकी जमानत रद्द कर दी है।

टोबी कैडमैन ने अदालत में कहा कि नीरव मोदी भारतीय एजेंसियों के साथ सहयोग नहीं कर रहा है और उसके भाग जाने का डर है। टोबी ने कहा कि इस बात का डर भी है कि वह गवाहों को बरगला सकता है और सबूत नष्ट कर सकता है। कैडमैन ने अदालत में कहा कि नीरव मोदी ने एक गवाह आशीष को बुलाया और उसे जान से मारने की धमकी दी। 

भगोड़े हीरा कारोबारी नीरव मोदी दूसरी बार जमानत याचिका लेकर लंदन की वेस्टमिंस्टर की मजिस्ट्रेट अदालत के सामने पेश हुआ। अदालत में भारतीय जाँच एजेंसियों की ओर से पेश हुई क्राउन प्रोसेक्यूशन सर्विस ने कोर्ट में कहा कि नीरव मोदी ने गवाहों को धमकाते हुए एक गवाह को जान से मारने की धमकी दी है। क्राउन सर्विस ने PNB घोटाला केस के गवाह आशीष लड के फोन कॉल डिटेल्स के जरिए यह खुलासा किया है।

नीरव मोदी ने आशीष को फोन करके धमकी दी है कि अगर वह कोर्ट में उसके खिलाफ गवाही देगा तो जान से हाथ धो बैठेगा। नीरव की जमानत का विरोध करते हुए अभियोजन पक्ष ने कहा कि वह कोर्ट में गवाही से पहले गवाहों को प्रभावित कर सकता है। साथ ही, क्राउस एजेंसी ने कोर्ट के बताया कि नीरव कई मुल्कों की यात्रा कर चुका है। क्राउन एजेंसी ने कोर्ट को बताया कि नीरव मोदी उन देशों में निवेश करके नागरिकता लेना चाहता है, जिनके साथ भारत की प्रत्यर्पण संधि नहीं है।

इससे पहले लंदन के वेस्टमिंस्टर मजिस्ट्रेट की अदालत में भारतीय अधिकारियों की ओर से अभियोजन का प्रतिनिधित्व करने वाले टोबी कैडमैन ने समाचार एजेंसी ANI को बताया था कि नीरव मोदी को जमानत मिलने पर वो इसके खिलाफ उच्च न्यायालय में अपील करेंगे। उन्होंने विश्वास दिलाया कि वह सब कुछ करेंगे जिससे वह रिहा न हो सके।

भारतीय एजेंसियों का पक्ष रख रहे क्राउन प्रोसेक्यूशन सर्विस ने पहली सुनवाई के दौरान कहा था कि नीरव मोदी करीब 2 अरब डॉलर के मनी लॉड्रिंग और धोखाधड़ी के मामले में वॉन्टेड है। शुक्रवार (मार्च 29, 2019) की सुनवाई में क्राउन प्रोसेक्यूशन सर्विस का सहयोग सीबीआई और प्रत्यर्पण निदेशालय (ED) की एक टीम कर रही है।