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UP में RSS कार्यकर्ता की गोली मारकर हत्या, हथियार मौके पर ही छोड़कर बदमाश फरार

उत्तर प्रदेश में आम चुनाव से ठीक पहले एक संघ कार्यकर्ता की हत्या का मामला सामने आया है। उत्तर प्रदेश के सोनभद्र जिले के राबर्ट्सगंज कोतवाली क्षेत्र में शनिवार (मार्च 30, 2019) सुबह सैर करने के लिए निकले RSS के एक कार्यकर्ता डॉक्टर सुरेश यादव (62) की गोली मारकर हत्या कर दी गई। बताया जा रहा है कि वे एक इंटर कॉलेज के प्रधानाचार्य भी थे। घटना सोनभद्र जिले के राबर्ट्सगंज कोतवाली क्षेत्र का है।

पुलिस अधीक्षक एसटी पाटिल ने मीडिया को बताया कि स्थानीय आदर्श इंटर कॉलेज के प्रधानाचार्य डॉक्टर सुरेश यादव (62) को अज्ञात बदमाशों ने गोली मारकर हत्या कर दी। सुरेश यादव राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े हुए थे। परिजनों के अनुसार वे रॉबर्ट्सगंज के छपका स्थित वन विभाग कार्यालय के पास सुबह करीब साढ़े पाँच बजे टहलने के लिए निकले थे, इसी दौरान रास्ते में कुछ मोटरसाइकिल सवार बदमाशों ने उन्हें गोली मारी और हथियार वहीं छोड़कर भाग गए।

पुलिस ने जब घर वालों से पूछताछ की तो यादव के दामाद कृष्ण कांत ने बताया कि उनके ससुर का किसी से कोई विवाद नहीं था। एक तरफ पुलिस जहाँ इस हत्या को आपसी रंजिश के तौर पर देख रही है, वहीं संघ से संबंध के चलते इसे राजनीतिक दृष्टिकोण से भी देखा जा रहा है। पुलिस ने अज्ञात बदमाशों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर जाँच शुरू कर दी है। शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है।

जम्मू-कश्मीर: बनिहाल टनल पर कार में हुआ धमाका, पास से गुज़र रहा था सुरक्षाबलों का काफिला

जम्मू-कश्मीर में श्रीनगर-जम्मू हाइवे के पास एक कार धमाका हुआ है। धमाका जिस सैंट्रो कार में हुआ है, उसके नज़दीक से सुरक्षाबलों का एक काफ़िला गुज़र रहा था। काफ़िले में सीआरपीएफ जवानों की 6-7 बस थीं और उसमें करीब 40 जवान थे। हमले में किसी के हताहत होने की खबर नहीं हैं।

मीडिया खबरों के मुताबिक, बनिहाल टनल के रियाइशी इलाके से दूर एक सेंट्रो कार हाइवे पर खड़ी थी। सीआरपीएफ जवानों के काफिले के नज़दीक आते ही कार में धमाका हो गया। धमाके के दौरान कार में कोई भी मौजूद नहीं था।

इस घटना के बारे में सुरक्षा एजेंसियों ने कुछ दिन पहले ही अलर्ट किया था कि इस हाइवे पर पुलवामा जैसी घटना दोबारा दोहराई जा सकती है।

कुछ मीडिया खबर इसे कार सिलेंडर ब्लास्ट का मामला बता रहे हैं। लेकिन ड्राइवर के गायब होने से इस पूरे धमाके पर शक गहराता जा रहा है। ड्राइवर की खोज फिलहाल जारी है। धमाके के कारण बस को नुकसान पहुँचा है और साथ ही उसके शीशे टूट गए हैं। फिलहाल धमाके से हुई अफरा-तफरी के कारण सुरक्षाबलों ने इलाके को घेर लिया है और मामले की जाँच शुरू कर दी है।

यहाँ बता दें कि 14 फरवरी को भी सुरक्षाबल के जवानों पर एक गाड़ी की मदद से हुए फिदायीन हमलावर ने पूरी हादसे को अंजाम दिया था। जिसमें 40 से ज्यादा भारतीय सेना के जवान वीरगति को प्राप्त हुए थे।

‘वेश्या का बेटा’: PAK के अख़बार ने PM मोदी और उनकी माँ का अपमान करने का किया दुस्साहस

पाकिस्तान के एक उर्दू अख़बार ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को वेश्या का बेटा कहा है। सोशल मीडिया पर यह हेडलाइन सुर्ख़ियों में छाई हुई है।

यह हेडलाइन जो न केवल प्रधानमंत्री मोदी का अपमान करती है, बल्कि उनकी माँ के लिए भी भद्दे और अपमानजनक शब्दों का इस्तेमाल किया गया है।

कुछ पाकिस्तानियों ने इस हेडलाइन की निंदा की तो कुछ ने इस पर ख़ुशी ज़ाहिर की।

पुलवामा आतंकी हमले के जवाब में भारतीय वायु सेना द्वारा पाकिस्तानी क्षेत्र के भीतर हवाई हमले किए जाने के बाद से पाकिस्तान काफ़ी बौखलाया हुआ है। पाकिस्तान की सेना और उसके पाले आतंकी तो सामरिक सीमा का उल्लंंघन करने के अभ्यस्त हैं ही, और अब ऐसा प्रतीत होता है कि उनका मीडिया भी शिष्टाचार और शालीनता की सीमाओं को भूल चुका है और अपना असली रंग दिखा रहा है।

गाँधीनगर में BJP का शक्ति प्रदर्शन: अमित शाह NDA के सहयोगियों के साथ अपना नामांकन दाखिल करने पहुँचे

आगामी लोकसभा चुनाव के लिए भाजपा अध्यक्ष अमित शाह गांधीनगर संसदीय क्षेत्र के लिए अपना नामांकन दाखिल करने पहुँचे तो NDA के नेताओं में काफ़ी जोश देखने को मिला। शक्ति प्रदर्शन में उनके साथ गृह मंत्री राजनाथ सिंह, केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी, शिरोमणि अकाली दल के प्रकाश सिंह बादल, शिवसेना के उद्धव ठाकरे और लोक जनशक्ति पार्टी के रामविलास पासवान थे। शाह के साथ गुजरात के मुख्यमंत्री विजय रूपानी भी थे।

नामांकन दाखिल करने से पहले एक रैली को संबोधित करते हुए, शाह ने कहा, “मैंने अहमदाबाद के नारनपुरा में संघवी हाई स्कूल में एक बूथ कार्यकर्ता के रूप में अपनी राजनीतिक यात्रा शुरू की और वहाँ से मैं पार्टी का अध्यक्ष बना। अगर आप बीजेपी को मेरे जीवन से निकाल देंगे तो यह खाली हो जाएगा। मैंने पार्टी व देश के लिए हमेशा से समर्पित रहा हूँ।”

उन्होंने आगे कहा, “यह एक सम्मान है कि मैं एक ऐसे निर्वाचन क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करूँगा जिसका प्रतिनिधित्व कभी लालकृष्ण आडवाणी और अटल बिहारी वाजपेयी ने किया था। यह वही निर्वाचन क्षेत्र है जिसका मैंने राज्य विधानसभा में पाँच बार प्रतिनिधित्व किया। मैं लोगों का आभार व्यक्त करता हूँ।”

बता दें कि भाजपा अध्यक्ष अमित शाह आज आगामी लोकसभा चुनाव में गांधीनगर निर्वाचन क्षेत्र के लिए अपना नामांकन दाखिल करने के लिए गुजरात पहुँचे हैं।

यह कहते हुए कि भारत के लोग प्रधानमंत्री मोदी को फिर से चुनना चाहते हैं, उन्होंने कहा, “जब मैं पूछता हूँ कि राष्ट्र का नेतृत्व कौन करेगा? तो जनता इसका जवाब मोदी, मोदी कहकर देती है। मोदी एक ऐसे नेता हैं जिनका इंतज़ार 70 वर्षों से अधिक समय से किया जा रहा था। वो एक ही व्यक्ति है जो देश को सुरक्षा प्रदान कर सकता है, और वो हैं नरेंद्र मोदी।”

उन्होंने आगे कहा कि भाजपा 2014 की तरह राज्य की सभी 26 लोकसभा सीटों पर अपनी जीत दर्ज करेगी ताकि गुजरात का बेटा संसद में फिर से वापसी कर सके। साथ ही उन्होंने गाँधीनगर निर्वाचन क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करने वाले आडवाणी की विरासत को आगे बढ़ाने का वादा भी किया।

विचारधाराएँ समान हैं, हिंदुत्व और राष्ट्रवाद, हिंदुत्व हमारी ऑक्सीजन है, बिना ऑक्सीजन के हम नहीं रह सकते

आगामी लोकसभा चुनाव के लिए भाजपा अध्यक्ष अमित शाह आज जब गाँधीनगर निर्वाचन क्षेत्र के लिए अपना नामांकन दाखिल करने गुजरात के अहमदाबाद पहुँचे तो NDA के नेताओं में काफ़ी जोश देखने को मिला। इस दौरान उनके साथ गृह मंत्री राजनाथ सिंह, शिरोमणि अकाली दल के प्रकाश सिंह बादल, शिवसेना के उद्धव ठाकरे और लोक जनशक्ति पार्टी के रामविलास पासवान भी मौजूद थे।

दूसरी तरफ, एक जनसभा को संबोधित करते हुए शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे ने कहा कि भाजपा और शिवसेना के विचारों में अंतर था, लेकिन एक साथ बैठकर सभी मसलों को हल कर लिया गया है। उद्धव ने कहा, “हमारी विचारधाराएँ समान हैं, हिंदुत्व और राष्ट्रवाद। मेरे पिता ने कहा था कि हिंदुत्व हमारी ऑक्सीजन है। आप बिना ऑक्सीजन के कैसे रह सकते हैं?”

प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार के रूप में एक नेता का नाम बताने के लिए विपक्ष के महागठबंधन को चुनौती देते हुए उद्धव ठाकरे ने कहा, “विपक्ष ने केवल हाथ मिलाया है, विचारधाराओं से उसका कोई सरोकार नहीं। भाजपा और शिवसेना को अछूत माना जाता था, लेकिन हम भगवा झंडे के साथ आगे बढ़ गए और देखो कि हम कहाँ हैं। हम कभी पीछे नहीं हटे और न कभी हटेंगे।”

फरवरी में, भाजपा और शिवसेना ने लोकसभा के साथ-साथ महाराष्ट्र विधानसभा चुनावों के लिए अपने गठबंधन की घोषणा की थी। लोकसभा चुनाव में, भाजपा 25 सीटों पर चुनाव लड़ेगी, जबकि शिवसेना 23 सीटों पर चुनाव लड़ेगी। 2014 के लोकसभा चुनाव में महाराष्ट्र ने 48 सांसदों को लोकसभा भेजा, भाजपा ने 23 सीटें जीती थीं, जबकि शिवसेना ने 18 सीटें जीती थीं।

महाराष्ट्र चुनाव इस वर्ष के अंत में होगा, क्योंकि पिछला चुनाव अक्टूबर 2014 में हुआ था। 2014 में, भाजपा और शिवसेना ने सीट बँटवारे पर असहमति के बाद अलग से विधानसभा चुनाव लड़ा था। 288 सदस्यीय सदन में बीजेपी ने 122 सीटें जीती थीं, जो सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरी थी, लेकिन बहुमत से दूर थी, जबकि शिवसेना ने 63 सीटों पर जीत हासिल की थी। बाद में, दोनों दल राज्य में गठबंधन सरकार बनाने के लिए एक साथ आए। इसके बाद भाजपा की देवेंद्र फड़नवीस के नेतृत्व वाली सरकार बनी।

फैक्ट चेक: कॉन्ग्रेस, आप के नेता और उनके चाटुकार पत्रकारों ने रिटायर्ड NIA जज के BJP में शामिल होने की फर्जी खबरें फैलाईं

चुनाव के चलते पॉलिटिक्स से जुड़ी ‘फेक खबरें’ इन दिनों आपको सोशल मीडिया पर खूब ट्रेंड करती दिखती होंगी। जहाँ बिना किसी आधार पर एक पढ़े-लिखे समुदाय द्वारा नेटिजन्स को बरगलाने का काम किया जाता है। कुछ समय पहले प्रियंका की रैली में जनसैलाब दिखाकर भी ऐसा ही प्रोपेगेंडा चलाने की कोशिश की गई थी। और अब फिर एक बार पत्रकारों के गिरोह ने अपनी भेड़ चाल का एक प्रत्यक्ष सबूत दे दिया है।

दरअसल सोशल मीडिया पर एक फेक न्यूज आई कि मक्का मस्जिद बम मामले में स्वामी असीमानंद को बरी करने वाले सेवानिवृत्त एनआईए जज रविंद्र रेड्डी भाजपा में शामिल हो रहे हैं। इस खबर के पीछे की सच्चाई को बिना जाने इसे ‘शर्मनाक खबर’ बनाकर कई पत्रकारों ने अपनी खबरों के प्रति ‘गंभीरता’ का प्रत्यक्ष उदाहरण दिया।

वामपंथी विचारधारा से लबरेज स्क्रॉल वेबसाइट के ‘जागरूक पत्रकार’ सौरव दत्ता ने मंगलोर वॉयस का एक स्क्रीनशॉट शेयर किया। जिस पर ट्वीट करते हुए सौरभ ने लिखा कि असीमानंद को बरी करने वाले एनआईए जज रविंद्र रेड्डी, बीजेपी में शामिल हो गए हैं।

सौरव दत्ता के ट्वीट का स्क्रीनशॉट, जो अब डिलीट हो चुका है।

इस ट्वीट को सोशल मीडिया पर एक घंटे के भीतर 350 से ज्यादा बार रिट्वीट किया गया। इस सूची में कई दिग्गज पत्रकार भी शामिल थे।

झूठी खबरे फैलाते प्रेम पनिकर

किसी ने भी जानने की कोशिश नहीं कि क्या रेड्डी ने वाकई भाजपा ज्वाइन की है, या सब सिर्फ़ फेक न्यूज का हिस्सा है। इस सूची में समर हलरंकर का भी नाम शामिल है।

मिहिर शर्मा, जो आमतौर पर तथ्यों को तोड़-मरोड़कर पेश करने के लिए और तरह-तरह झूठ फैलाने के लिए पहचाने जाते हैं उन्होंने ने भी इसे रिट्वीट करते हुए ’बनाना रिपब्लिक’ का नाम दिया।

मिहिर शर्मा का स्क्रीनशॉट

इस खबर को देखते ही कई लोगों ने इस फेक न्यूज़ को फैलाने में सौरभ की मदद करते हुए सवालिया निशान लगाकर शेयर किया। अपने बड़े-बड़े सूत्रों से इस खबर की सच्चाई का पता लगाने की बजाए ट्वीट को शेयर करने में एक नाम स्वाति चतुर्वेदी का भी है। रिट्वीट करने के बाद स्वाति को रविंद्र रेड्डी नामक शख्स से हकीकत पता चलने के बाद उन्होंने भी इस ट्वीट को डिलीट किया।

स्वाति चतुर्वेदी का स्क्रीनशॉट, जो अब डिलीट हो चुकी है।

इस खबर की सच्चाई जानने की जगह इसे शेयर करने में एक नाम एनडीटीवी की जानी-मानी पत्रकार निधि राज़दान का भी है। जिन्हें स्वाति की तरह ही अपना ट्वीट बाद में डिलीट करना पड़ा था।

निधि राज़दान के रिट्वीट का स्क्रीनशॉट

इसके बाद वॉल-स्ट्रीट जर्नल के स्तंभकार, जो आमतौर पर हजार बार तब तक झूठ बोलना पसंद करते हैं, जब तक कि वह झूठ सच नहीं हो जाता। साथ ही सदानंद धुमे, ने भी दत्ता के ट्वीट के आधार पर ट्वीट किया है।


सोशल मीडिया पर थोड़ी देर तक ट्वीट-रिट्वीट का सिलसिला चलता रहा। थोड़ी देर बाद सौरव दत्ता ने अपनी गलती मानते हुए कहा कि दरअसल उन्होंने जॉन दयाल के एक फेसबुक पोस्ट के आधार पर ऐसा ट्वीट किया। दयाल भी समाज के उन जागरूक लोगों की श्रेणी के एक नाम हैं, जिन्होंने बिना खबर की सच्चाई को जाने सोशल मीडिया पर शेयर किया। जॉन के पोस्ट को भी फेसबुक पर 250 से ज्यादा शेयर मिले हैं।

इस पोस्ट को आधार बनाकार आम आदमी पार्टी के नेता संजय सिंह ने भाजपा पर निशाना साधने की पुरजोर कोशिश की।

अब आपको अंत में इस खबर की सच्चाई बता दें कि आखिर जिसे समाज के जागरूक तबके ने रेड्डी कहकर फेक न्यूज फैलाने की कोशिश की, वो दरअसल में रेड्डी न होकर वास्तव में छत्तीसगढ़ कॉन्ग्रेस के पूर्व कार्यकारी अध्यक्ष राम दयाल उइके का है जो पिछले साल अक्टूबर में भाजपा में शामिल हुए थे।

जिस रेड्डी के भाजपा में शामिल होने पर बीजेपी पर इतने सवाल उठाए गए, तरह-तरह की बातें की गईं। वो वास्तविकता में तेलंगाना जन समिति में शामिल हो गए हैं, जो कॉन्ग्रेस की सहयोगी है।

रविंद्र रेड्डी के टीजीएस में शामिल होने का सबूत

इस खबर के मूल हकीक़त को परखे बिना इसे सोशल मीडिया पर शेयर करना दिखाता है कि आजकल सोशल मीडिया का इस्तेमाल किस प्रकार फेक न्यूज को फैलाने के लिए किया जा रहा है।

भारत की ‘मिशन शक्ति’ की सफलता से बौखलाए चीन ने इस तरह निकाली भड़ास

भारत के वैज्ञानिकों ने ‘मिशन शक्ति’ को सफल बनाकर भारत को दुनिया के 4 सबसे बड़े शक्तिशाली देशों में शामिल कर दिया। भारत ने बुधवार (मार्च 27, 2019) को अंतरिक्ष इतिहास में बड़ी कामयाबी हासिल की है। इस कामयाबी को दुनिया के सभी देशों ने काफी गौर से देखा।

अमेरिका ने भारत की इस उपलब्धि पर बधाई दी और कहा कि वो अंतरिक्ष में भारत को और भी अधिक सहयोग करेगा। अमेरिका के इस रूख से चीन बौखला गया है। उसे भारत के द्वारा किए गए मिशन शक्ति के सफल परीक्षण से तो दुख है ही, मगर साथ ही इस बात का भी दुख हो रहा है कि भारत को इसमें अमेरिका का सहयोग मिल रहा है। बता दें कि, अमेरिका के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा, “हमने भारत की एंटी सैटेलाइट परीक्षण को देखा और उस पर पीएम मोदी के बयान को भी सुना है। भारत के साथ हम अपनी मजबूत रणनीतिक संबंधों को आगे भी जारी रखेंगे और अंतरिक्ष क्षेत्र में पहले से भी अधिक सहयोग करेंगे। हम अंतरिक्ष, विज्ञान व तकनीकी क्षेत्र में समान हितों के लिए आगे भी काम करते रहेंगे, ताकि अंतरिक्ष को पहले भी ज्यादा सुरक्षित बनाया जा सके।”

चीन को इस बात से भी दिक्कत है कि अमेरिका ने भारत को केवल इतनी सी चेतावनी दी है कि इस परीक्षण से अंतरिक्ष में जो मलबा फैला है, वह सही नहीं है। बता दें कि भारत के इस परीक्षण और पश्चिमी देशों के रुख पर चीन की सरकारी अखबार ग्‍लोबल टाइम्‍स ने लिखा है कि चीन की सरकार और यहाँ के लोग पश्चिम के दोहरे रवैये को काफी समय से देखते आए हैं, अब वह इसके आदी हो चुके हैं।

अखबार के मुताबिक, चीन 2007 में दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्‍यवस्‍था थी, जबकि भारत आज भी विकसित होने का ख्‍वाब संजोए है और विकासशील देशों की श्रेणी में आता है। इस अखबार का कहना है कि भारत के आर्थिक ढ़ाँचा कमजोर है और पश्चिमी देश भारत को चीन के खिलाफ खड़ा करने के लिए तैयार कर रहे हैं। इतना ही नहीं, इस अखबार ने तो यहाँ तक कह दिया कि भारत के लोगों को यह भी गलतफहमी है कि उसकी सैन्‍य क्षमता के बढ़ने से चीन और पाकिस्‍तान उससे डर जाएँगे। लेकिन भारत को यह समझना चाहिए कि चीन की बराबरी करने के लिए उसको लंबा समय लगेगा।

अखबार में छपे आर्टिकल को देखकर साफ जाहिर हो रहा है चीन भारत की सफलता से बौखला गया है और उससे भारत की उपलब्धि पचाई नहीं जा रही है। गौरतलब है कि जब चीन ने 2007 में पहली बार इसका परीक्षण किया था, तब अमेरिका समेत कई पश्चिमी देशों ने उसकी निंदा की थी। मगर भारत को अमेरिका और रूस का सहयोग मिल रहा है।

UK के जज ने किया खुलासा, वनुआटू की नागरिकता लेने के चक्कर में था भगोड़ा नीरव मोदी

पंजाब नेशनल बैंक के 13 हज़ार करोड़ रुपए के घोटाले में लिप्त भगोड़ा आर्थिक अपराधी नीरव मोदी का रुआसा चेहरा उस समय देखने लायक था जब ब्रिटेन के चीफ़ मजिस्ट्रेट एम्मा आरबुथनोट ने यह ख़ुलासा किया कि वो वनुआटू का नागरिक बनने की कोशिश कर रहा था। यह कोशिश उसने 2017 के आख़िर में की थी, लेकिन वनुआटू के अधिकारियों को इस बात की ख़बर लग गई थी कि नीरव के ख़िलाफ़ क़ानूनी जाँच चल रही है, इसलिए नीरव को नागरिकता प्रदान करने से इनकार कर दिया गया। इस बात की जानकारी भारत सरकार की तरफ से अदालत में पेश हुए वकील टोबी कैडमेन ने दी।

इसके अलावा टोबी कैडमेन ने यह भी बताया था कि नीरव ने एक गवाह को जान से मारने तक की धमकी भी दी है। यह धमकी आशीष नाम के शख़्स को फोन पर दी गई कि अगर वो कोर्ट में उसके ख़िलाफ़ गवाही देगा तो अपनी जान से हाथ धो बैठेगा।

ख़बर के अनुसार, वनुआटू की नागरिकता प्राप्त करने के लिए नीरव ने 13895843 रुपए देने की कोशिश की थी। बता दें कि जिस वनुआटू की बात हो रही है असल में वो दक्षिण प्रशांत महासागर का एक छोटा सा द्वीप है, जहाँ से नीरव मोदी अपना व्यापार चलाने की कोशिश में था।

इसके अलावा एक ख़बर यह भी है कि ब्रिटेन की अदालत में सुनवाई के दौरान जज अर्बनाट ने प्रॉसेक्यूशन से पूछा कि क्या विजय माल्या और नीरव मोदी दोनों को एक ही जेल में रखा जाएगा? इस पर भारत की ओर से बहस कर रहे क्राउन प्रॉसेक्यूशन सर्विस ने जवाब दिया गया कि प्रत्यर्पण के बाद नीरव मोदी को मुंबई लाया जाएगा और उसी आर्थर रोड जेल में रखा जाएगा जिसे माल्या के लिए तैयार किया गया है।

भारत ने यूके को इस बात से भीा अवगत कराया है कि भगोड़े विजय माल्या को जेल में दो मंजिला कॉम्प्लेक्स के हाई सिक्योरिटी बैरक में रखा जाएगा। आर्थर रोड जेल में हाई सिक्योरिटी सेल तैयार की गई है। इसी जेल में मुंबई हमले के दोषी आतंकी अजमल कसाब को भी रखा गया था।

बाबरी मस्जिद के याचिकाकर्ता इक़बाल अंसारी ने प्रियंका की ‘अयोध्या यात्रा’ को बताया एक चुनावी स्टंट

बाबरी मस्जिद के याचिकाकर्ता इक़बाल अंसारी ने आज प्रियंका गाँधी की अयोध्या यात्रा को लेकर कॉन्ग्रेस पार्टी पर ज़ोरदार वार किया है। ख़बरों के अनुसार, अंसारी ने शहर की यात्रा को चुनावी स्टंट बताया। उन्होंने कॉन्ग्रेस पार्टी पर दशकों तक शासन करने और फिर भी अयोध्या में कोई विकास कार्य नहीं करने का आरोप लगाया।

अंसारी ने मीडिया से कहा कि कॉन्ग्रेस के शासनकाल में, अयोध्या में कोई विकास नहीं हुआ। उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र में किसी भी तरह का कोई बुनियादी विकास नहीं हुआ है, फिर चाहे बात रोज़गार की हो या समृद्धि की।

अंसारी ने अयोध्या विवाद को कॉन्ग्रेस का उपहार बताया और उस पर हिंदू-मुस्लिमों को एक-दूसरे के ख़िलाफ़ खड़ा करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि प्रियंका गाँधी की अयोध्या यात्रा से कॉन्ग्रेस को कोई फ़ायदा नहीं होने वाला। इक़बाल अंसारी ने कॉन्ग्रेस द्वारा अपने 60 वर्षों के शासन के दौरान अयोध्या की अनदेखी पर हमला किया। उन्होंने कहा कि शहर में कॉन्ग्रेस द्वारा कोई विकास कार्य नहीं किया गया, न तो रोज़गार उत्पन्न हुआ और न ही कोई मिल या कारखाना स्थापित किया गया।

अंसारी ने कथित तौर पर यह भी कहा कि कॉन्ग्रेस की वजह से ही बाबरी मस्जिद और राम-जन्मभूमि विवाद अब तक नहीं सुलझ सका।

हालाँकि, अंसारी ने केंद्र और राज्य में भाजपा सरकार की प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि पीएम मोदी और सीएम योगी अयोध्या में विकास कार्य कर रहे हैं। उन्होंने विकास कार्यों की देखरेख के लिए शहर के नियमित दौरे के लिए सीएम योगी की प्रशंसा की। अंसारी ने वर्तमान भाजपा सरकार और शहर के विकास के लिए पिछली समाजवादी पार्टी सरकार को श्रेय दिया, लेकिन अपने शासन के दौरान विकास के नाम पर कुछ नहीं करने के लिए कॉन्ग्रेस पर हमला किया।

अंसारी ने कहा कि मतदाता जागरूक और शिक्षित हैं और प्रियंका गाँधी की अयोध्या यात्रा से कॉन्ग्रेस पार्टी को कोई वोट नहीं मिलने वाला है। इक़बाल ने इस बात ज़ोर दिया कि मतदाता आज स्मार्ट हैं, वे चुनाव के समय के स्टंट के धोखे में नहीं आने वाले।

लल्लनटॉप की राजनीतिक समझ को दीजिए खाज: लड़के की चीटिंग की खबर को जोड़ा 2019 चुनाव से

मारक मजा देने के चक्कर में इन्सान कब खुद अपना ही मजा ले लेता है, उसका उदाहरण है लल्लनटॉप जो कि हिटलर के लिंग नापने से लेकर मानवीय विष्ठा, नाक के अवशिष्ट और मलद्वार में अपनी पत्रकारिता घुसाए रहता है। जब विचित्र और विसंगत होना ही आपकी एकमात्र पहचान बन जाए तो आपके लिए आम खबर को विचित्र बना सकने वाली बातें हर दिन तो होंगी नहीं, इसलिए वो होता है जो लल्लनटॉप की पत्रकारिता को परिभाषित करता है। 

कल एक खबर आई कि गुजरात के किसी कॉलेज में चार लड़के BCA की परीक्षा में चोरी करते पकड़े गए। खबर यहाँ तक ठीक है। लेकिन इसमें ‘विचित्र’ वाला कम्पोनेंट नहीं मिला। जैसे कि ‘लिंग में बाँधकर ले गए थे पुर्ज़े’ या ‘मलद्वार में रखा था कागज को’। फिर खबर बनेगी कैसे जो लल्लनटॉप पत्रकार को मारक मजा दे दे! 

एक एंगल निकला, जो कि ‌अपनी जगह सही है। इन चार लड़कों में एक लड़का लल्लनटॉप के काम का निकला। वो लड़का है मीत वाघानी जो कि गुजरात भाजपा अध्यक्ष जीतू वाघानी का बेटा है। नेता का बेटा चोरी करता पकड़ाए, वो भी 27 पर्चियों के साथ, तो खबर बननी भी चाहिए। लेकिन सामान्य खबर से मजा तो मिलेगा नहीं, इसलिए विचित्र वाला एंगल लाया जाए। 

पहले तो वाक्यांशों को वाक्य बताते हुए टुकड़ों में खबर लिखी गई, फिर बताया गया कि लल्लनटॉप ऐसी क्रांतिकारी खबर क्यों कवर कर रहा है, फिर बताया

गया कि ये खबर उनके काम की खबर कैसे है। इससे पत्रकारिता के छात्र बहुत कुछ सीख सकते हैं, जैसे कि पत्रकारिता कैसे नहीं की जाए। 

शुरु में इस खोजी पत्रकार ने बताया कि ये जो खबर आ रही है वो मोटा भाई (नरेन्द्र मोदी) और छोटा भाई (अमित शाह) को परेशान कर सकती है। अपने विवेक का इस्तेमाल कीजिए और सोचिए कि जिस दो आदमी को नोटबंदी और जीएसटी पर विपक्ष की ग़लतबयानी और फ़रेब से फर्क न पड़ा हो, उसे गुजरात के किसी कॉलेज में एक क्षेत्रीय नेता के बेटे के चीटिंग करते हुए पकड़ लिए जाने पर फर्क पड़ जाएगा? 

आगे पत्रकार क्रिएटिव हो गया और उसने लिखा, “ऐसे वक्त में जब चुनाव आने ही वाले हैं, मोदी अपना चुनावी अभियान शुरू कर चुके हैं तो एक छोटा-सा मुद्दा, एक छोटी-सी चिंगारी भी आग बन सकती है। और यहाँ पर तो हम उस राज्य के बीजेपी हेड के सुपुत्र की बात कर रहे हैं जिस राज्य का उदाहरण देकर भाजपा 2014 में देश की सत्ता पर काबिज़ हुई थी। साथ ही विपक्ष इस घटना को मोदी की पंच लाइन ‘मैं भी चौकीदार’ के साथ जोड़कर भी देख सकता है।” 

जब पत्रकारिता, कॉलेज में चार लड़कों की चीटिंग से (मास चीटिंग नहीं) लोकसभा चुनाव पर प्रभाव छोड़ने की बात को साबित करने में समय लगाने लगे, तो ऐसे पत्रकारों को इंची टेप लेकर हिटलर का लिंग ही नापने पर लगा रहना चाहिए क्योंकि इनसे पत्रकारिता तो हो नहीं पाएगी, लिंग ज़रूर नाप लेंगे जिससे मारक मजा मिल जाए। जब लिंग नापना हो जाए तो चुड़ैलों को भी खिलाया जा सकता है जिसकी चर्चा लल्लनटॉप ने अपनी खोजी पत्रकारिता के ज़रिए की है। 

जब पत्रकार पर प्रेशर हो कि ‘कुछ नया एंगल ढूँढो’ तो बेचारा यही करता है। ‘सकता है’ पर अपना पूरा ध्यान लगाने को पत्रकारिता नहीं, नकली ज्योतिष कहते हैं। देश में मुद्दों की कमी नहीं है, भले ही विपक्ष को मिल न रहा हो। लल्लनटॉप की बात सही हो जाती अगर इसमें भाजपा अध्यक्ष द्वारा कॉलेज प्रशासन को धमका कर अपने बेटे को चीटिंग कराने की बात निकल आती। तब ये एक मुद्दा हो सकता था। हालाँकि, वो मुद्दा भी राष्ट्रीय राजनीति पर कोई छाप छोड़ पाता, ऐसा मानना मूर्खता है। बिहार में ‘टॉपर कांड’ हुआ था तो नितिश की थू-थू हुई थी, क्योंकि वो एक बड़ा मुद्दा था। 

यहाँ तो टॉप करना छोड़िए, परीक्षा में चीटिंग करते हुए ही पकड़ लिए गए लड़के। प्रिंसिपल ने कहा कि चार लड़के पकड़े गए हैं, लेकिन उनमें से कोई भाजपा अध्यक्ष का लड़का है, उन्हें नहीं पता। जिस बात को लल्लनटॉप लोकसभा चुनाव और गुजरात के विकास के समकक्ष खड़ा करके रख रहा है, उस बात का सही आकलन तो यह होना चाहिए कि राज्य में कॉलेज प्रशासन सख़्त हैं और उसके लिए चोरी करने वाले का बाप कौन है, इससे फर्क नहीं पड़ता। चोरी करने वाले पकड़ लिए गए। चौकीदारी यही तो है कि कोई भी चोरी न करे! 

ऐसी पत्रकारिता फ़ालतू बातों को इंटरनेट पर रखने की कोशिश भर है, और आप ऐसा इसलिए कर सकते हैं क्योंकि आपके पास समय है, और इंटरनेट पर जगह है।  

बाहरहाल, लल्लनटॉप को हिटलर के अलावा किसी और मृत व्यक्ति का लिंग नापने पर फ़ोकस करना चाहिए। जैसे कि माइकलएंजेलो की प्रसिद्ध मूर्ति ‘डेविड’ का लिंग छोटा क्यों है। इसके पीछे एक जानकारियों से परिपूर्ण कारण है। लल्लनटॉप के खोजी पत्रकार इंटरनेट से वो जानकारी तुरंत निकाल सकते हैं और मारक मजा ले सकते हैं।