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मरने के बाद मेरी ‘इस’ तस्वीर पर चढ़ाना माला: ट्विंकल खन्ना की प्रबल इच्छा

बॉलीवुड अभिनेत्री ट्विंकल खन्ना ने भले ही फिल्मों में काम करना छोड़ दिया है, लेकिन वो सोशल मीडिया पर काफी एक्टिव रहती हैं। ट्विंकल खन्ना अपने ह्यूमरस अंदाज के लिए बी-टाउन से लेकर फैंस के बीच काफी पॉपुलर हैं। वह अक्सर अपने परिवार की तस्वीरें सोशल मीडिया पर शेयर करती रहती हैं। वे अपने ट्वीट्स को लेकर अक्‍सर सुर्खियों में बनी रहती हैं। वे कई सामाजिक मुद्दों पर खुलकर अपने विचार प्रकट करती हैं। अब ट्विंकल खन्‍ना ने अपने इंस्टाग्राम पर एक तस्वीर पोस्‍ट कर एक अजीबोगरीब ख्‍वाहिश जाहिर की है। उन्‍होंने अपनी एक ब्‍लैक एंड व्‍हाइट फोटो शेयर कर अपनी दिल की बात फैंस के साथ शेयर की है।

अभिनेत्री ने कैप्‍शन में लिखा, “उम्‍मीद करती हूँ कि मेरी यह नई तस्वीर आप सबको पसंद आएगी। यह बहुत दुर्लभ क्षण है,जब फोटोग्राफर ने उस पल को कैद किया है, जो मेरी आत्मा कहना चाहती है। मैं उम्‍मीद करती हूँ कि जब मैं मरूँगी तो इस तस्वीर को बड़े फैंसी फ्रेम में सजाया जाएगा और उसके चारो तरफ लोग फूलों की मालाएँ चढ़ाएँगे और मेरी प्रार्थना सभा में शामिल होंगे।” इस तस्वीर के पीछे लिखा हुआ नजर आ रहा है- डेंजर, कीप आउट।

इंस्टाग्राम पर ट्विंकल खन्ना द्वारा शेयर की गई फोटो

ट्विकंल खन्ना अक्सर ऐसी तस्वीरें साझा कर पति अक्षय कुमार का मजाक उड़ाया करती हैं। हाल ही में उन्होंने एक तस्वीर साझा की थी, जिसमें वे बोट चलाती नजर आ रही हैं और बगल में अक्षय कुमार बैठे हैं। फोटो के कैप्शन में उन्होंने लिखा था, ”एक ही पेज पर नहीं बल्कि अक्सर एक ही नाव में, भले ही मैं स्टीयरिंग व्हील पर हूं।”

गौरतलब है कि ट्विंकल खन्ना ने अक्षय कुमार से शादी के बाद एक्टिंग करियर को अलविदा कह दिया था। वे आखिरी बार फिल्म ‘लव के लिए साला कुछ भी करेगा’ में नजर आई थी। इन दिनों वे पूरी तरह से राइटर और प्रोड्यूसर के तौर पर काम कर रही हैं। ट्विंकल खन्ना अब तक तीन किताबें लिख चुकी हैं और नियमित तौर पर कॉलम लिखी रहती हैं। इस कॉलम का नाम ‘मिसेज फनीबोन्स’ है।

बुर्क़े में रहने दो, बुर्क़ा जो उठ गया तो भेद खुल जाएगा: बलियान ने किया फर्जी वोटिंग का दावा

देश की 91 लोकसभा सीटों पर गुरुवार (अप्रैल 11, 2019) को मतदान का पहला चरण सम्पन्न हुआ। इस बीच एक तरफ जहाँ आंध्र प्रदेश के टीडीपी नेता की मौत के कारण सुर्खियाँ बनी, वहीं यूपी की 8 सीटों पर बुर्का पहनकर मतदान करने आई औरतों को लेकर विवाद हुआ।

मुजफ्फरनगर में भाजपा सांसद संजीव बलियान जिनका मुकाबला इस बार आरएलडी प्रमुख अजीत सिंह से है, उन्होंने बुर्का पहनकर मतदान करने आई औरतों के चेहरे की जाँच नहीं किए जाने का मुद्दा उठाया है। यहाँ संजीव ने फर्जी मतदान का आरोप लगाते हुए कहा कि मतदान केंद्र में मतदाताओं के चेहरे की ठीक से जाँच नहीं की जा रही है। उन्होंने सवाल किया कि अगर ऐसा ही रहा तो एक मतदाता को बार-बार मतदान करने से कैसे रोका जाएगा।

संजीव का आरोप है कि 25-26 मतदान केंद्रों पर एक भी महिला कांस्टेबल को तैनात नहीं किया गया जो बुर्के वाली औरतों के चेहरे की जाँच कर सकें। उनका कहना है कि गाँव में एक भी महिला कॉन्स्टेबल की ड्यूटी नहीं लगी थी।

संजीव ने अपना मत रखते हुए कहा कि अगर किसी प्रत्याशी को अपने मजहब के कारण चेहरा दिखाने में आपत्ति है तो बेहतर है वो मतदान करने न आए। इतना ही नहीं उनका कहना है कि मतदान केंद्र में कुछ महिलाओं को मतदाता सूची पर बिना हस्ताक्षर किए ही मतदान देने की अनुमति दी गई है। वहीं कैराना से सांसद और गठबंधन की उम्मीदवार तबस्सुम हसन ने बलियान पर पलटवार करते हुए कहा है कि बलियान बुर्के पर सवाल नहीं उठा सकते क्योंकि जब भी जरूरत पड़ती है बुर्का हटाकर चेहरे की जाँच की जाती है।

आपको बता दें संजीव बलियान के इस आरोप पर विपक्ष ने जमकर निशाना साधा है और साथ ही उन्हें अपने दिमाग का इलाज करवाने की सलाह तक दी है। ऐसे में सोशल मीडिया पर कुछ यूजर्स संजीव के समर्थन में ऐसी तस्वीरों को साझा कर रहे हैं, जिनमें एक लड़का बुर्के में नज़र आ रहा है। जिसके मद्देनज़र सवाल बना हुआ है कि आखिर सच्चाई क्या है?

सियाचिन पर तैनात जवानों ने डाला वोट: देश के प्रहरियों के लिए EC ने किए खास इंतजाम

ख़राब मौसम और दुर्गम परिस्थितियों के बावजूद भारतीय सेना के जवानों ने लोकतंत्र की प्रक्रिया में हिस्सा लेते हुए अपने मताधिकार का प्रयोग किया। सियाचिन ग्लेशियर और जम्मू-कश्मीर में नियंत्रण रेखा (LoC) पर तैनात जवानों ने गुरुवार (अप्रैल 11, 2019) को सशस्त्र बल मतदाता के तौर पर मतदान किया।

रक्षा विभाग के प्रवक्ता ने जानकारी दी कि भारतीय सेना के जवानों ने मतदान प्रक्रिया में हिस्सा लेकर एक ज़िम्मेदार नागरिक होने का कर्तव्य पूरा किया। इसके अलावा उन्होंने बताया कि नई पहल के तहत चुनाव आयोग ने दूरदराज़ इलाक़ो और दुर्गम स्थानों में तैनात भारतीय सैनिकों के लिए ऑनलाइन मतपत्र डाउनलोड करके, मतदान करने और उन्हें अपने संबंधित निर्वाचन अधिकारी को पोस्ट करने की सुविधा दी गई है। भारतीय सैनिकों ने वोट डालकर देश लोकतांत्रिक प्रक्रिया की मज़बूती को दर्शाया है।

11 अप्रैल को पहले चरण के मतदान की प्रक्रिया शुरू हुई जिसके तहत देश के 18 राज्यों और दो केंद्रशासित प्रदेशों की 91 सीटों पर वोटिंग हुई। पहले चरण में सबसे ज़्यादा उत्साह पश्चिम बंगाल और त्रिपुरा के मतदाताओं में दिखा। वहीं ख़बर यह भी है कि बिहार में सबसे कम वोटिंग हुई और जम्मू-कश्मीर की दो सीटों पर 54.49% तक मतदान हुआ।

JMI को मिली पहली महिला कुलपति: दिल्ली में किसी भी केंद्रीय विश्वविद्यालय में भी पहली

जामिया मिल्लिया इस्लामिया विश्विद्यालय के इतिहास में पहली बार कोई महिला कुलपति बनी है। प्रोफेसर नजमा अख्तर जामिया मिल्लिया इस्लामिया की पहली महिला कुलपति बनने वाली हैं। गौरतलब है कि साल 2018 में मणिपुर की राज्यपाल व पूर्व केंद्रीय अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री डॉ. नजमा हेपतुल्ला को कुलाधिपति (चांसलर) नियुक्त किया गया था। फिलहाल देश के किसी भी विश्वविद्यालय के दोनों सर्वोच्च पदों पर महिलाएँ नहीं हैं। शिक्षण संस्थानों के इतिहास में यह एक महत्वपूर्ण निर्णय माना जा रहा है, जो जामिया के लिए भी गौरव की बात है।

एक सरकारी आदेश में कहा गया है कि जामिया मिल्लिया इस्लामिया अधिनियम 1988 के तहत प्राप्त अधिकारों का इस्तेमाल करते हुए भारत के राष्ट्रपति ने जामिया के विजिटर की हैसियत से नई दिल्ली स्थित NIEPA में कार्यरत प्रोफेसर नजमा अख्तर को 5 साल के लिए जामिया मिलिया इस्लामिया का कुलपति नियुक्त किया है।

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान बना चुकीं प्रो नजमा को चार दशक के लंबे शैक्षणिक नेतृत्व का अनुभव है। वह NIEPA में 130 देशों के वरिष्ठ अधिकारियों के अंतरराष्ट्रीय शैक्षिक प्रशासक पाठ्यक्रम के 15 वर्षों तक सफल नेतृत्व के लिए जानी जाती हैं। देश में शैक्षिक प्रशासक तैयार करने के लिए प्रयागराज में पहले प्रदेश स्तर के प्रबंधन संस्थान को स्थापित व सफलतापूर्वक विकसित करने का श्रेय भी नजमा अख्तर को जाता है। इन्होंने दो किताबें भी लिखी हैं।

इसके साथ ही प्रो नजमा ने अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय में परीक्षा नियंत्रक व अकादमिक कार्यक्रमों की निदेशक सहित कई शीर्ष संस्थानों की अहम जिम्मेदारियाँ बखूबी निभाई हैं। इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय (इग्नू) में उन्होंने कई राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर के डिस्टेंस एजुकेटर कैपेसिटी बिल्डिंग पाठ्यक्रमों की अगुवाई की है।

अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय की स्वर्ण पदक विजेता प्रो नजमा अख्तर मेधावी विद्यार्थी भी रही हैं। उन्होंने राष्ट्रमंडल छात्रवृत्ति सहित कई अंतरराष्ट्रीय प्रशस्तियाँ अपने नाम की हैं। प्रो नजमा ने प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय संस्थानों जैसे वारविक विश्वविद्यालय व नाटिंघम विश्वविद्यालय के अलावा शैक्षिक योजना के अंतरराष्ट्रीय संस्थान (आईआईईपी) यूनेस्को, पेरिस से भी शिक्षा प्राप्त की है। वह विकसित व विकासशील देशों के कई साझा अनुसंधान कार्यों में भी शामिल रही हैं। सफल नेतृत्वकर्ता के रूप में उन्होंने युवा शिक्षकों को स्वतंत्र नेतृत्वकर्ता बनने के लिए प्रोत्साहित व सहयोग किया है।

इसके साथ ही चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय, मेरठ के प्रोफेसर संजीव कुमार शर्मा को मोतीहारी विश्वविद्यालय, बिहार का कुलपति बनाया गया है तो वहीं बीएचयू के प्रोफेसर रजनीश शुक्ला को महात्मा गाँधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय, वर्धा के कुलपति का भार सौंपा गया है।

गौरतलब है कि जामिया के पूर्व वीसी प्रफेसर तलत अहमद के पिछले साल जुलाई 2018 में जामिया से इस्तीफा देकर कश्मीर विश्वविद्यालय के प्रमुख के तौर पर ज्वॉइन करने के बाद से यह पद खाली पड़ा था।

‘गठबंधन है PM की मौत का पैगाम’: सपा प्रत्याशी शफीकुर्रहमान के बिगड़े बोल

कैला देवी में गुरुवार (अप्रैल 11, 2019) को अखिलेश यादव की चुनावी जनसभा के दौरान सपा से संभल के प्रत्याशी शफीकुर्रहमान बर्क ने प्रधानमंत्री मोदी के बारे में विवादित बयान दिया। सभा में अखिलेश की मौजूदगी में बर्क ने सपा-बसपा-रालोद के गठबंधन को नरेंद्र मोदी के लिए मौत का पैगाम बताया है जिसके बाद मामले ने तूल पकड़ा और प्रशासन ने प्रत्याशी के ख़िलाफ़ नोटिस जारी कर दिया।

अखिलेश यादव शफीकुर्रहमान बर्क के समर्थन में चुनाव प्रचार करने आए थे जहाँ अखिलेश की अनुमति से ही बर्क को बोलने का मौका मिला। अपनी पाँच मिनट की बातचीत में ही बर्क ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लिए जहर उगला और यूपी में गठबंधन को लेकर अटूट विश्वास दिखाया।

संभल के एसडीएम दीपेंद्र यादव ने इस मामले को गंभीर बताया। साथ ही बर्क के बयान वाली वीडियो का भी परीक्षण हुआ। प्रमाणिकता की पुष्टि होने के बाद उन्हें नोटिस जारी किया गया और साथ ही तीन दिन में जवाब माँगा गया। इस मामले में प्रत्याशी के पोते जियाउर्रहमान बर्क का कहना है कि मामले को तोड़-मरोड़ के पेश किया जा रहा है। उन्हें अभी तक कोई नोटिस नहीं मिला है।

प्रधानमंत्री पर इस तरह की विवादित टिप्पणी करके बर्क एक बार फिर सुर्खियों में आ गए। बता दें कि मुस्लिम बहुल इलाके के सपा प्रत्याशी शफीकुर्रहमान बर्क वंदे मातरम के विरोध में संसद से वॉक ऑउट भी कर चुके हैं। इस दौरान बर्क ने राष्ट्रगीत वंदे मातरम का खुलकर विरोध करते हुए इसे गैर-इस्लामिक करार दिया था जिसके कारण विभिन्न संगठनों ने उनका विरोध भी किया था।

बर्क के इस बयान के बाद सोशल मीडिया पर उनके खिलाफ़ कई आवाजें उठ रही हैं। लोग यहाँ तक सवाल कर रहे हैं कि क्या मायावती ने इसलिए मुसलमानों को एकजुट होकर गठबंधन को वोट देने की बात कही थी।

TMC नेता कार्यकर्ताओं को मतदान केंद्र पर कब्जा करने का आदेश दे रहे थे, ऑडियो क्लिप लीक

लोकसभा चुनावों का पहला चरण आज शुरू हो चुका है। इसी बीच खोकन मियाँ (कूचबिहार, ब्लॉक नंबर 1) नाम के एक TMC नेता का एक ऑडियो क्लिप वायरल हो गया है। रिपोर्ट्स के अनुसार, इस ऑडियो में वो अपने कार्यकर्ताओं को बूथ पर पार्टी के पक्ष में 100% वोट सुनिश्चित करने का निर्देश दे रहे हैं। इसमें मियाँ वोटर्स को किसी अन्य पार्टी को वोट न देने की चेतावनी देते हुए सुना जा सकता है। भाजपा द्वारा चुनाव आयोग को क्लिप सौंपकर उचित कार्रवाई की माँग की गई है।

इस मामले पर भाजपा नेता उत्पल कुमार देब ने कहा, “यह स्पष्ट है कि खोखोन मियाँ का अपनी पार्टी की बैठक में दिए गए निर्देशों में क्या लक्ष्य है। लेकिन ऐसे लोग सफल नहीं होंगे क्योंकि लोग उन्हें रोकेंगे।”

मियाँ इस लीक हुए ऑडियो में यह कहते हुए सुने जा रहे हैं कि पार्टी ने निर्देश दिया है कि किसी भी अन्य पार्टी को कोई वोट नहीं मिलना चाहिए और किसी अन्य पार्टी को वोट देने की कोशिश करने वालों की पहचान की जाएगी। मियाँ का कहना है, “TMC  को 100% वोट मिलना चाहिए, अन्य पार्टियों को वोट नहीं मिलना चाहिए। उनका कहना है कि अगर कोई किसी अन्य पार्टी को वोट देने की कोशिश करता है, तो उनकी पहचान की जाएगी। यह पार्टी का निर्देश है।”

मियाँ ने आगे कहा कि केंद्रीय बल कुल 100 में से केवल 40 बूथों पर मौजूद होंगे और सभी सरकारी कर्मचारी उनके नियंत्रण में हैं। “पुलिस से लेकर बीडीओ तक, सभी हमारे नियंत्रण में हैं। वे सरकारी कर्मचारी हो सकते हैं, लेकिन वे मेरे अधीन हैं।”

कूचबिहार निर्वाचन क्षेत्र में चुनावों को एक कठिन लड़ाई बताते हुए उसने बूथ कार्यकर्ताओं से पीठासीन अधिकारियों के साथ, अगर आवश्यक हो तो, कुछ ‘सेटिंग’ करने का आग्रह किया, लेकिन पहले यह सुनिश्चित करें कि सभी बूथ कवर किए गए हैं। मियाँ ने कार्यकर्ताओं को वोटों में हेराफेरी करने की सलाह भी दी।

चुनाव के दौरान पश्चिम बंगाल में पहले ही दिन भारी हिंसा और हिंसा की खबरें आईं हैं। पिछले साल के विधानसभा चुनावों के दौरान TMC के गुंडों द्वारा की गई हिंसा को याद करके लोग मतदान करने से भी डरने लगे थे। भाजपा ने आरोप लगाया था कि TMC एजेंट नियमों का उल्लंघन करते हुए मतदान केंद्रों पर मौजूद थे और भाजपा एजेंटों को धमकी दी गई थी।  यही नहीं, पिछली रात उनके घरों पर हमला किया गया था।

हैरान करने वाली बात यह है कि कुछ दिनों पहले TMC नेता अनुब्रत मोनल ने चुनाव आयोग के अधिकारियों से खुलेआम अपील की थी कि वे प्रति बूथ 500-600 वोटों का प्रबंधन करके लोगों को चुनावों में धांधली करने दें।

‘बहन जी’ कहने पर अंजना ने कहा कॉन्ग्रेस नेता को ‘आंटी जी’, TV पर ही हो गया राड़ा, देखें वीडियो

टीवी डिबेट पर आजकल नेताओं और प्रवक्ताओं का एक-दूसरे से बहस में उलझना आम बात होती जा रही है। कभी कोई किसी के सर पर पानी गिरा देता है, तो कभी कोई आपस में थप्पड़ रसीद देता है। लोकसभा चुनाव के लिए चुनाव प्रचार के दौरान नेताओं के बीच बहस होना काफी आम बात है। टीवी पर होने वाली डिबेट में भी नेता एक दूसरे के खिलाफ कटाक्ष करने का कोई मौका नहीं चूकते हैं। इस बार मामला बहुत करीबी हो गया जब बात एक न्यूज़ एंकर पर ही आ गई।

एक टीवी बहस के दौरान कॉन्ग्रेस प्रवक्ता प्रियंका चतुर्वेदी ने आज तक चैनल की एंकर अंजना ओम कश्यप को ‘बहनजी’ कह दिया। इस ‘बहन जी’ शब्द से अंजना इतनी आहत हुई कि उन्होंने तुरंत कॉन्ग्रेस प्रवक्ता को बदले में ‘आंटी जी’ कह दिया। हालाँकि, प्रियंका चतुर्वेदी ने कहा कि उन्हें इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता कि उन्हें क्या कहकर संबोधित किया जाता है। इस ‘बहनजी’ और ‘आंटीजी’ वाले प्रकरण को आप इस यूट्यूब लिंक पर देख सकते हैं।

यह निंदनीय प्रकरण तब हुआ जब टीवी पर ‘राफेल डील की लीक दस्तावेज में क्या है?’ इस मुद्दे को लेकर बहस चल रही थी। बहस में शामिल होने के लिए कॉन्ग्रेस की तरफ से प्रियंका चतुर्वेदी मौजूद थीं। वहीं भाजपा की तरफ से इस मुद्दे पर पार्टी का पक्ष रखने के लिए गौरव भाटिया स्टूडियो में मौजूद थे।

भाजपा प्रवक्ता ने कॉन्ग्रेस की पूर्ववर्ती सरकार पर एयरफोर्स की जरूरत के अनुसार लड़ाकू विमानों के आने को लेकर देरी पर सवाल उठाते हुए कॉन्ग्रेस की पहले की सरकारों को निकम्मी, निठल्ली और भ्रष्टाचारी सरकार कह डाला। उन्होंने कॉन्ग्रेस सरकार पर सौदे में अपना कमीशन तय करने का आरोप भी लगाया। उन्होंने कहा कि नरेंद्र मोदी सत्ता में आए और सिर्फ 16 महीने में ही डील हो गई और इस साल सितंबर में राफेल विमान भी आ जाएँगे।

गौरव भाटिया ने राहुल गाँधी के लिए कहा कि पाँचवी क्लास का बालक पीएचडी की थीसिस नहीं पढ़ सकता, इसी तरह राहुल गाँधी भी राफेल को लेकर सुप्रीम कोर्ट का जजमेंट नहीं पढ़ सकते। इसके बाद प्रियंका चतुर्वेदी ने भाजपा के प्रवक्ता का जवाब देते हुए जज्बातों में बहकर बातचीत के दौरान एंकर को ‘बहनजी’ कहकर संबोधित कर दिया। इस पर ही आजतक की महिला एंकर भड़क गईं। इस ‘आंटी जी-बहन जी’ संवाद के बाद प्रियंका चतुर्वेदी ने बेहद नाराज स्वर में कहा कि हम यहाँ अपना अपमान करवाने नहीं आते हैं।

मोदी सरकार दोबारा आई, तो टुकड़े-टुकड़े गैंग टुकड़े- टुकड़े होकर बिखर जाएगा: PM मोदी

लोकसभा चुनाव के लिए बृहस्पतिवार (अप्रैल 11, 2019) को बिहार के भागलपुर में एक चुनावी रैली में पीएम नरेंद्र मोदी ने कॉन्ग्रेस पर तीखा प्रहार करते हुए दावा किया कि 23 मई को देश में मोदी की सरकार दोबारा बननी तय है। भागलपुर में एक चुनावी जनसभा को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि यह NDA की नीति है कि आतंकवाद और नक्सलवाद से निपटने के लिए जवानों को खुली छूट दी जाएगी।

मोदी ने अपने भाषण में कहा, “महामिलावटी कह रहे हैं कि जवानों के पास जो विशेष अधिकार हैं, उसे भी हटा देंगे। उन्हें जवाब देना चाहिए कि वे देश के वीर जवानों के साथ हैं या आतंकवादियों के साथ।”

PM मोदी ने विरोधियों पर निशाना साधते हुए कहा कि इन्हें सिर्फ अपना अस्तित्व बचाना है। उन्हें डर है कि मोदी फिर से आएगा तो इनकी भ्रष्टाचार की सारी दुकानें बंद हो जाएँगी। इनकी जाति-धर्म की राजनीति बंद हो जाएगी। टुकड़े-टुकड़े गैंग टुकड़ों में बिखर जाएँगे।

मोदी ने कहा कि एक समय था कि जब पाकिस्तान की धमकियों का जवाब नहीं दिया जाता था और आज घर में घुसकर आतंकियों को खत्म किया जा रहा है। 

उन्होंने कहा, “विपक्ष कह रहा है कि आतंकवादी को खत्म करने के लिए पाकिस्तान से बात की जाएगी। ये लोग खुद डरे हैं, अविश्वास से घिरे हुए हैं, इसलिए देश में डर फैला रहे हैं। महामिलावटी ये डर भी फैला रहे हैं कि मोदी फिर से आ जाएगा तो चुनाव खत्म हो जाएगा, आरक्षण समाप्त हो जाएगा।” प्रधानमंत्री ने दावा करते हुए कहा कि ये आपका चौकीदार आरक्षण को मजबूत बना रहा है।

आतंकियों के खिलाफ कार्रवाई का मुद्दा उठाते हुए पीएम ने कहा, “2014 के पहले का भारत याद कीजिए। तब पाकिस्तान आतंकियों को भेजता था और बाद में धमकी भी देता था। कॉन्ग्रेस की सरकार सिर्फ कागजी कार्रवाई तक सीमित रह जाती थी। पर, हमने उनके घर में घुसकर मारा। आज स्थिति यह है कि पाकिस्तान दुनिया भर में घूमकर रोना रो रहा है लेकिन उसे कोई घास तक नहीं डाल रहा।”

इस दौरान पीएम ने केंद्र की योजनाओं का जिक्र करते हुए कहा कि पिछले 70 सालों में जो चीजें नामुमकिन थीं, हमने उन सबको मुमकिन कर दिखाया है। पीएम ने कहा, “आज मैं जो कुछ भी कर पाया हूँ, वह सिर्फ आपके आशीर्वाद और सहयोग से संभव हुआ है। देश को मजबूत करने और नई ऊँचाइयों तक ले जाने के लिए आगे भी आपके सहयोग और आशीर्वाद की जरूरत है।”

बिहार में बुनियादी सुविधाओं को लेकर अपनी सरकार और सहयोगियों की ओर इशारा करते हुए कहा, “नेताओं को अपने आँगन तक चकाचक सड़क पहुँचाते तो आपने बहुत देखा, बिहार के गाँव-गाँव तक सड़कें पहुँचाने का बीड़ा इस चौकीदार और उसके साथियों ने उठाया है।”

प्रधानमंत्री ने लोगों से NDA के पक्ष में मतदान करने की अपील करते हुए कहा कि आपका एक-एक वोट इस चौकीदार की ताकत बढ़ाएगा। आपका वोट सीधे-सीधे मोदी के खाते में जाएगा। हम सब चौकीदार मिलकर देश को नई ऊंचाई पर ले जाएँगे।

मनमोहन सिंह जो अपने समुदाय के लिए नहीं कर सके वह नरेंद्र मोदी ने करने का वादा किया है

भारतीय जनता पार्टी ने कुछ दिन पहले जारी किए अपने चुनावी ‘संकल्प पत्र’ में अनुच्छेद 370 के अतिरिक्त अनुच्छेद 35-A को भी हटाने की बात कही है। चुनाव आने पर लोक लुभावनी घोषणाएँ करना, जनता को वचन देना और बाद में मुकर जाना यह हर पार्टी करती है इसमें कोई दो राय नहीं, और भाजपा कोई अपवाद नहीं। उदाहरण के लिए राम मंदिर और अनुच्छेद 370 के मुद्दे को ही लिया जाए तो हर बार भाजपा अपना संकल्प दोहराती है कि सत्ता में आने पर 370 हटाएंगे और राम मंदिर बनाएंगे। लेकिन आज तक जम्मू कश्मीर राज्य के लिए संविधान में अनुच्छेद 370 यथावत है और भगवान राम अयोध्या में टेंट में विराजमान हैं।

बहरहाल, 2019 के लोकसभा निर्वाचन में कुछ अलग हुआ है। भारत के इतिहास में पहली बार किसी पार्टी के घोषणापत्र में अनुच्छेद 35-A को समाप्त करने की बात कही गई है। साथ में यह भी कहा गया कि यदि भाजपा सत्ता में आती है तो पश्चिमी पाकिस्तान, छम्ब और पाक-अधिक्रान्त जम्मू कश्मीर से आए शरणार्थियों को आर्थिक सहायता प्रदान की जाएगी। अनुच्छेद 35-A और उपरोक्त शरणार्थियों के बीच सीधा संबंध है जिस पर आगे विस्तार से चर्चा की जाएगी।

वास्तव में अनुच्छेद 35-A के कारण ही जम्मू कश्मीर राज्य में शरणार्थियों की समस्याएँ उत्पन्न हुईं जिन्हें हल करने का प्रयास करना तो दूर उनकी बात तक कोई नहीं करता। ऐसे में भाजपा द्वारा इस मुद्दे को अपने संकल्प पत्र में स्थान देना अन्य राजनैतिक पार्टियों के लिए एक नई चुनौती खड़ा करने जैसा है। ध्यान से देखें तो भाजपा ने अपने संकल्प पत्र में तीन प्रकार के शरणार्थियों का उल्लेख किया है।

इनमें एक वे हैं जो 1947 में विभाजन के समय पश्चिमी पाकिस्तान से आए थे, दूसरे जो उसी समय पाक-अधिक्रान्त जम्मू कश्मीर से आए थे और तीसरे वे हैं जो 1965 और 1971 युद्ध के पश्चात कारण छम्ब से विस्थापित हुए थे। इनमें सर्वाधिक संख्या पाक अधिक्रान्त जम्मू कश्मीर या ‘PoJK’ से आए शरणार्थियों की है। वाधवा कमीशन की रिपोर्ट के अनुसार 1947 में पश्चिमी पाकिस्तान से आए 5,764 परिवारों (कुल 47,215 लोग) ने जम्मू में शरण ली थी। उसी समय PoJK से विस्थापित हुए 31,619 परिवारों ने शरण ली थी। सन 1965 और 1971 के युद्ध के कारण छम्ब से लगभग 17000 परिवार विस्थापित हुए थे।

वैसे तो 35-A के कारण इन तीनों प्रकार के शरणार्थियों को जम्मू कश्मीर राज्य की सुविधाओं का लाभ नहीं मिल पाता। लेकिन विडंबना यह भी है कि भारत द्वारा इन सभी शरणार्थियों को अपना नागरिक मानने के बावजूद जम्मू कश्मीर राज्य में बसने के बाद इन्हें समान रूप से राहत नहीं दी गई। छम्ब और PoJK से विस्थापित हुए लोगों को समय-समय पर मुआवजा और कई कनाल (जम्मू कश्मीर में भूमि क्षेत्रफल मापने की इकाई) कृषि और ग़ैर-कृषि भूमि दी गई। लेकिन पश्चिमी पाकिस्तान से आकर जम्मू कठुआ और राजौरी में बसे शरणार्थियों को कुछ नहीं मिला। उन्हें अस्थाई तौर पर रहने के लिए जो भूमि मिली थी उसी पर आज भी रह रहे हैं।

पश्चिमी पाकिस्तान से जम्मू कश्मीर में आए शरणार्थी (West Pakistani Refugees)

सन 1947 में जब देश को स्वतंत्रता की भारी कीमत चुकानी पड़ी थी। यह कीमत थी विभाजन से उपजी एक ऐसी त्रासदी जिसमें लगभग डेढ़ करोड़ लोगों को विस्थापित होना पड़ा था। वह भयानक दंगों, मारकाट और विप्लव का कालखंड था। पश्चिमी भारत में वस्तुतः पंजाब का विभाजन हुआ था। पंजाब के 16 ज़िले, जिनमें 55% जनसंख्या रहती थी और जो पूरे पंजाब का 62% क्षेत्रफल था, उसे पाकिस्तान को सौंप दिया गया था और भारत के हिस्से में पंजाब के 13 ज़िले आए थे जिनमें 45% जनसंख्या थी।

रैडक्लिफ रेखा का निर्णय होते ही अधिक से अधिक संख्या में हिन्दुओं और सिखों का पलायन नवनिर्मित पाकिस्तान से भारत की ओर होने लगा। जिसको जो साधन उपलब्ध हुआ उसी से चलकर वह भारत की तरफ भागा। लाल कृष्ण आडवाणी और भूतपूर्व प्रधानमंत्री डॉ मनमोहन सिंह भी अपने परिजनों समेत पश्चिमी पाकिस्तान से भाग कर भारत आए थे।

पलायन और अराजकता के उस दौर में किसी को कुछ समझ में नहीं आता था कि कहाँ जाएँ क्या करें। हमारे नेताओं को भी इतने बड़े स्तर पर पलायन की आशा नहीं थी। उन भयावह परिस्थितियों में पश्चिमी पाकिस्तान स्थित सियालकोट से भारत में प्रवेश करने वाले लोगों के लिए अमृतसर या गुरदासपुर से ज्यादा निकट जम्मू था। इसलिए उन्होंने जम्मू में शरण लेना उचित समझा। कुछ लोगों को यह भी लगा कि जम्मू कश्मीर राज्य के राजा हिन्दू हैं इसलिए वहाँ शरण लेना ठीक होगा। कुछ लोगों के सगे संबंधी जम्मू में रहते थे इसलिए वे वहाँ चले गए।

जम्मू कश्मीर में शरण लेने वालों में से कुछ तो आगे बढ़ गए और दिल्ली पंजाब आदि में चले गए लेकिन विस्थापितों की अधिकांश जनसंख्या को शेख अब्दुल्ला ने रोक लिया और उन्हें यह भरोसा दिलाया कि उन्हें राज्य में सब कुछ दिया जाएगा। सब कुछ देने के नाम पर पश्चिमी पाकिस्तान से आए शरणार्थियों को 1954 में अनुच्छेद 35-A का संवैधानिक छल उपहार स्वरूप दिया गया।

अनुच्छेद 35-A जम्मू-कश्मीर राज्य को यह निर्णय लेने का अधिकार देता है कि राज्य के स्थाई निवासी कौन होंगे। अर्थात यह राज्य तय करेगा कि स्थाई निवास प्रमाण पत्र किसको देना है और किसे नहीं। जम्मू-कश्मीर राज्य को जब यह अधिकार दिया गया तब तक राज्य का संविधान भी नहीं बना था। बाद में राज्य का संविधान बनते ही उसमें यह लिख दिया गया कि जम्मू-कश्मीर के स्थाई निवासी का दर्ज़ा उन्हें ही दिया जाएगा जो 1944 या उसके पहले से राज्य में रह रहे हैं।  

लेकिन पश्चिमी पाकिस्तान से आए शरणार्थी तो 1947 में अपनी जान बचाकर आए थे इसलिए आजतक उन्हें जम्मू-कश्मीर का स्थाई निवासी नहीं माना गया और उन्हें स्थाई निवास प्रमाण पत्र- जिसे PRC कहा जाता है- नहीं दिया गया। स्थाई निवास प्रमाण पत्र न होने से वे शरणार्थी जम्मू कश्मीर राज्य में भूमि नहीं खरीद सकते, उनके बच्चे कक्षा 9 से आगे पढ़ाई नहीं कर सकते, वे लोकसभा के लिए तो वोट कर सकते हैं लेकिन विधानसभा के लिए मतदान नहीं कर सकते।

दूसरे शब्दों में वे भारत के नागरिक तो हैं लेकिन उन्हें जम्मू कश्मीर राज्य द्वारा प्रदान किए जाने वाली किसी भी सुविधा का लाभ नहीं मिलता। एक अनुमान के मुताबिक पश्चिमी पाकिस्तानी शरणार्थियों की संख्या आज बढ़कर सवा से डेढ़ लाख के करीब हो गई है लेकिन उनकी सुनने वाला कोई नहीं है। पश्चिमी पाकिस्तान से आए शरणार्थियों में 80% अनुसूचित जाति, 10% अन्य पिछड़ा वर्ग और मात्र 10% सामान्य वर्ग के लोग हैं। यह राज्य सभा में प्रस्तुत की गई जॉइंट पार्लियामेंट्री कमिटी की रिपोर्ट में दर्ज़ है। डॉ मनमोहन सिंह जो स्वयं पश्चिमी पाकिस्तान से विस्थापित होकर भारत आये थे और दस वर्षों तक देश के प्रधानमंत्री रहे उन्होंने पश्चिमी पाकिस्तानी शरणार्थियों की समस्याओं पर कभी कुछ नहीं बोला न उन्हें सुलझाने का कभी प्रयास किया।   

हिंदू लड़कियों का अपहरण और धर्मांतरण मामले में इस्लामाबाद हाईकोर्ट ने उन्हें पतियों के पास वापस भेजा

पाकिस्तान के सिंध में घोटकी से दो हिंदू लड़कियों, रीना और रवीना, जिनका कथित तौर पर अपहरण कर लिया गया, फिर उन्हें जबरन इस्लाम में परिवर्तित कर दिया गया। इतना ही नहीं जबरन उनकी शादी उनकी उम्र से बड़े मुस्लिमों से करा दी गई। इस मामले में इस्लामाबाद हाईकोर्ट में दोनों बहनों को अपने मुस्लिम पतियों सफ़दर अली और बरक़त अली के साथ रहने का आदेश दिया है।

ख़बर के अनुसार, अपनी एक अर्जी में दोनों बहनों ने यह दावा किया था कि वे घोटकी (सिंध) के एक हिंदू परिवार से ज़रूर हैं लेकिन उन्होंने इस्लामिक उपदेशों से प्रभावित होकर अपना धर्म बदला था।

इस्लामाबाद हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश अथर मिनल्लाह की अगुवाई वाली एक उच्च न्यायालय की पीठ ने पाँच सदस्यीय आयोग की रिपोर्ट पेश करने के बाद यह निर्णय लिया, जिसमें यह जाँच करने का काम सौंपा गया था कि क्या हिंदू बहनों का इस्लाम में धर्मांतरण मजबूर किया गया था। उच्च न्यायालय ने पहले भी आदेश दिया था कि सुनवाई पूरी होने तक दोनों बहनों को इस्लामाबाद के एक आश्रय गृह में स्थानांतरित कर दिया जाए।

आयोग ने अदालत को सूचित किया कि कथित चिकित्सा परीक्षणों से यह साबित हो गया था कि दोनों लड़कियाँ नाबालिग नहीं थी क्योंकि उनमें से एक 18 और दूसरी 19 वर्ष की थीं, इसलिए उन्हें नाबालिग नहीं कहा जा सकता।

दरअसल, 20 मार्च को, होली की पूर्व संध्या पर दो नाबालिग हिंदू लड़कियों, 13 वर्षीय रवीना और 15 वर्षीय रीना का अपहरण करके उन्हें पाकिस्तान के सिंध प्रांत में अपने उम्र से बहुत बड़े मुस्लिम पुरुषों से जबरन शादी करने के लिए मजबूर किया गया। हिन्दू किशोरियों पर हुए इस अत्याचार ने पूरे विश्व में लोगों को पाकिस्तान में हिन्दुओं के हालात पर सोचने के लिए मजबूर कर दिया।

इस घटना के कुछ दिनों के भीतर ही मेघवार समुदाय की एक अन्य हिंदू नाबालिग लड़की को भी पाकिस्तान के सिंध प्रांत में बाडिन ज़िले के टांडो बाघो से कथित तौर पर अगवा कर लिया गया था।

इस घटना को गंभीरता से लेते हुए केंद्रीय विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने पाकिस्तान स्थित भारतीय उच्चायोग से रिपोर्ट माँगी। पाकिस्तान के सिंध में होली की शाम हुई इस दुर्भाग्यपूर्ण घटना को लेकर गंभीर सुषमा स्वराज ने ट्वीट करते हुए भारतीय उच्चायोग को टैग किया और इस सम्बन्ध में एक रिपोर्ट देने का निर्देश दिया। इसके बाद इस मामले में 7 लोगों की गिरफ़्तारी भी हुई।

इस मामले में पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ पार्टी के हिन्दू सांसद रमेश कुमार वंकवानी ने कहा था कि जबरन धर्मांतरण के ख़िलाफ़ तैयार किए गए विधेयक को प्राथमिकता के आधार पर असेंबली में पेश एवं पारित कराया जाना चाहिए। उन्होंने कहा, “धर्म के नाम पर नफ़रत की शिक्षा देने वाले सभी लोगों से प्रतिबंधित धार्मिक संगठनों की तरह निपटा जाना चाहिए।