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धार्मिक भावनाओं को आहत करने के लिए केजरीवाल के ख़िलाफ़ शिक़ायत दर्ज

दिल्ली के मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी (आप) के संयोजक अरविंद केजरीवाल का विवादों से गहरा नाता है, जिसे वो बख़ूबी निभाते हैं। अपने एक ट्वीट के चलते एक नया विवाद और उनसे जुड़ गया है जिसकी चौतरफा आलोचना होना अनिवार्य है। बता दें कि हिन्दुओं के धार्मिक चिन्ह ‘स्वस्तिक’ पर एक ट्वीट करने के बाद अरविंद केजरीवाल पर हिंन्दुओं की धार्मिक भावनाओं को आहत करने का आरोप लग रहा है।

इसी मामले में केजरीवाल के ख़िलाफ़ एक केस भी दर्ज कराया गया है। स्वस्तिक के अपमान किए जाने संबंधी ट्वीट की बीजेपी ने कड़ी आलोचना की थी। बीजेपी का कहना था कि मुख्यमंत्री ने अपने इस अभद्र कृत्य से धार्मिक आस्था को तो चोट पहुँचाया ही है साथ ही आचार संहिता कता उल्लंघन भी किया है।

बता दें कि केजरीवाल ने अपने ट्विटर हैंडल से एक फोटो शेयर की थी जिसमें एक आदमी स्वस्तिक चिन्ह के पीछे झाड़ू लिए हुए है दौड़ रहा है। इस तस्वीर को लेकर केजरीवाल ने लिखा, “मुझे किसी ने ये भेजा है।”

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अपने एक अन्य ट्वीट में उन्होंने बीजेपी पर आरोप मढ़ते हुए लिखा कि उसने उनकी रैली रद्द करवा दी। साथ ही सवालिया होते हुए लिखा कि 5 वर्षों में भाजपा की कितनी रैलियाँ रद्द हुई हैं। केजरीवाल ने दावा करते हुए लिखा कि दिल्ली में सातों सीटें बीजेपी हार जाएगी, इस बात को वो मान ले।

जहाँ एक तरफ केजरीवाल लोगों को हिंसा में लिप्त होने के लिए प्रोत्साहित करते दिख रहे हैं, वहीं हिंदू प्रतीक स्वस्तिक के अपमान से प्रतीत होता है कि वो बेहद ओछी राजनीति को हवा दे रहे हैं।

राहुल की रैली में चली कुर्सियाँ; अध्यक्ष जी ने कहा, हमारी सरकार आने दो तब चलेगा पता

पश्चिम बंगाल के मालदा में कॉन्ग्रेस अध्यक्ष राहुल गाँधी ने शनिवार (मार्च 23, 2019) को एक रैली को संबोधित किया। लेकिन यह रैली 2 बातों के लिए विशेष तौर पर अहम रही। पहली यह कि रैली में अध्यक्ष राहुल गाँधी के समर्थकों ने जमकर कुर्सियाँ फेंकी और VIP के लिए लगी बैरिकेडिंग तोड़ डाली और राज्य इकाई के कॉन्ग्रेस नेताओं के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। दूसरी यह कि कॉन्ग्रेस अध्यक्ष राहुल गाँधी ने ममता बनर्जी के लिए कहा कि वह भाषण देने के अलावा कुछ नहीं करतीं।

पहले घटनाक्रम में, जब राहुल गाँधी रैली स्थल पर मौजूद नहीं थे, तब कॉन्ग्रेस कार्यकर्ताओं ने जमकर बवाल काटा और भारी उत्पात मचाया। इस बवाल के दौरान रैली स्थल पर जमकर कुर्सियां फेंकी गईं और नेताओं के लिए लगी VIP बैरिकेडिंग भी तोड़ दी गई। मालदा की रैली में जब यह बवाल चल रहा था, तब राहुल बिहार के पूर्णिया में दूसरी रैली को संबोधित कर रहे थे।

दरअसल, पड़ोसी जिलों से कॉन्ग्रेस के कार्यकर्ताओं का एक हुजूम रैली स्थल पर पहुँचा और मैदान के भीतर प्रवेश करने की कोशिश की। इस दौरान कार्यकर्ताओं ने नाराजगी जाहिर करते हुए कॉन्ग्रेस की राज्य इकाई के नेतृत्व के खिलाफ नारेबाजी भी की।

मालदा पहुँचने के बाद रैली स्थल पर राहुल गाँधी ने कहा कि ममता बनर्जी ने पिछले कई सालों में सिर्फ लंबे-लंबे भाषण दिए हैं। उन्होंने प्रदेश के लिए कुछ नहीं किया है। राहुल गाँधी ने अपनी रैली में कहा, “यहाँ (पश्चिम बंगाल) कॉन्ग्रेस कार्यकर्ताओं को मारा-पीटा गया। वे पार्टी के लिए दिन-रात संघर्ष कर रहे हैं। हमारी सरकार को दिल्ली में आने दो, तब आप देखेंगे कि आगे क्या होगा। ममता बनर्जी ने राज्य के लिए कुछ भी नहीं किया। उन्होंने सिर्फ लंबे भाषण दिए हैं।”

कॉन्ग्रेस से 895 करोड़ रुपए की संपत्ति वाले सबसे अमीर उम्मीदवार कौन हैं?

लोकसभा चुनाव में नामांकन भरने की प्रक्रिया शुरू हो गई है और नेताओं की अकूत संपत्ति के खुलासे होने लगे है। तेलंगाना की चेवेल्ला लोकसभा सीट से कॉन्ग्रेस पार्टी के उम्मीदवार कोंडा विश्वेश्वर रेड्डी ने अपने हलफनामे में 895 करोड़ रुपए की संपत्ति की घोषणा की है। इस घोषणा के बाद वह दोनों तेलुगू राज्यों में सबसे अमीर राजनेता बन कर उभरे हैं।

इंजीनियर से राजनेता बने रेड्डी ने शुक्रवार (मार्च 22, 2019) को नामांकन भरने के दौरान अपने और अपने परिवार की संपत्ति की घोषणा की।

रेड्डी के हलफनामे के अनुसार, उनके पास चल संपत्ति के रूप में 223 करोड़ रुपए की संपत्ति है, जबकि अपोलो अस्पताल की संयुक्त प्रबंध निदेशक और उनकी पत्नी के. संगीता रेड्डी की चल संपत्ति 613 करोड़ रुपए के रूप में है। उन पर आश्रित बेटे की चल संपत्ति का उल्लेख करीब 20 करोड़ रुपए की गई है।

फिर भी, परिवार के किसी भी सदस्य के पास न ही कार है और ना ही कोई अन्य वाहन है। अचल संपत्ति की बात करें तो विश्वेश्वर रेड्डी के पास 36 करोड़ रुपए की, जबकि उनकी पत्नी के पास 1.81 करोड़ रुपए की अचल संपत्ति है।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, 2014 के लोकसभा चुनाव में, रेड्डी ने अपने हलफनामे में 528 करोड़ रुपए की पारिवारिक संपत्ति की घोषणा की थी। 2014 में उन्होंने तब तेलंगाना राष्ट्र समिति के उम्मीदवार के तौर पर चुनाव लड़ा था और जीत दर्ज की थी। रेड्डी पिछले साल दिसंबर विधानसभा चुनाव से पहले कॉन्ग्रेस पार्टी में शामिल हो गए थे।

इतना ही नहीं कई और कॉन्ग्रेसी नेताओं की संपत्ति भी चौकाने वाली है। आंध्र प्रदेश के कैबिनेट मंत्री पी. नारायण ने अपना नामांकन दाखिल करते वक्त 667 करोड़ रुपए की संपत्ति की घोषणा की।

स्वयं आंध्रप्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चन्द्रबाबू नायडू की पारिवारिक संपत्ति 574 करोड़ रुपए है, जबकि वाईएसआर कॉन्ग्रेस के प्रमुख वाई.एस. जगमोहन रेड्डी और उनकी पत्नी की संपत्ति 500 करोड़ रुपए है।  

नारीवाद की आड़ में कामुकता बेचने वाले लल्लनटॉप, आप किसी की मदद नहीं कर रहे

जब हम नारीवाद, स्त्रीत्व जैसे मुद्दे छूते हैं तो हमारे शब्द, उनके भाव, उनका संदर्भ, हमारा दौर और दुनिया की आधी आबादी के प्रति सम्मान अपनी पूर्णता में प्रदर्शित होने चाहिए। अगर आप इस विषय को लेकर, इसके दायरे और प्रभाव को लेकर चिंतित हैं, तो आपके शब्दों से ऐसा झलकना चाहिए।

पिछले साल की होली के दौरान लिखा एक आर्टिकल इस साल लल्लनटॉप नामक वेबसाइट से दोबारा शेयर किया गया जिसका शीर्षक ‘वीर्य का त्योहार ख़त्म, अब भीगी हुई लड़कियों की तस्वीरें देखें’ है। आपको शायद ध्यान में आया होगा कि ‘वीर्य का त्योहार’ से क्या मतलब है लिखने वाले का। पिछले साल एक ख़बर फैलाई गई कि कुछ लड़कियों पर वीर्य भरे ग़ुब्बारे फेंके गए थे, जबकि कुछ ही समय में ये ख़बर झूठी साबित हुई थी।

आमतौर पर वामपंथी लम्पटों और पत्रकारिता का समुदाय विशेष हर हिन्दू त्योहार पर, अगर कुछ घटना हो जाए तो ठीक, वरना अपनी कहानी बनाकर उस पूरे त्योहार और हिन्दू धर्म को लपेट लेते हैं। हर बार ऐसी ख़बरें बनाई जाती हैं जिससे कि एक धर्म कटघरे में दिखे। ख़ैर, ये तो बिलकुल ही अलग विषय है, और इसमें ज़्यादा जाने की ज़रूरत भी नहीं।

इस ख़बर को लल्लनटॉप ने दोबारा क्यों शेयर किया जबकि उनके हेडलाइन का पहला हिस्सा पिछले ही साल ग़लत साबित हो चुका था? लल्लनटॉप को मैं कोई आदर्श पत्रकारिता करने के लिए नहीं कह रहा हूँ, क्योंकि वैसा करना किसी से संभव नहीं! पिछले साल, हो सकता है कि ये ख़बर आर्टिकल लिखने तक न मिली हो कि वीर्य के ग़ुब्बारे कुछ लड़कियों की फ़र्ज़ी शिक़ायत थी, लेकिन इस साल ये शेयर क्यों हो रहा है? क्योंकि वीर्य, ग़ुब्बारा, ‘लड़कियों की भीगी तस्वीरें’ वाली हेडलाइन देखकर भीड़ जुटती है साइट पर।

अजीब बात यह है कि पहले पैराग्राफ़ से ही पत्रकार ने स्त्रीत्व जैसे शब्दों से ज्ञान देना शुरू किया है और शायद अपनी हेडलाइन पढ़ना भूल गई। आगे आधे आर्टिकल में जो होली के नाम पर यौन शोषण की बात की गई है, उस पर चर्चा की जा सकती है। साथ ही, यौन शोषण को ही होली का प्रतिनिधि नहीं कहा जा सकता। होली पर छेड़-छाड़ की छिटपुट घटनाएँ होती हैं, लेकिन होली को बलात्कारियों की चलती भीड़ जैसा बता देना, प्रपंच है।

होली के नाम पर लड़कियों के साथ छेड़-छाड़ की घटनाएँ ख़ूब होती हैं, ये न तो झुठलाने की बात है, न ही आँख मूँदकर आगे बढ़ने की। लेकिन जब आप ऐसे मुद्दों पर इस तरह से लिखकर, एक ग़लत ख़बर को हेडलाइन का हिस्सा बनाकर, एक साल बाद दोबारा शेयर करते हैं तो फिर आपकी मंशा स्त्रीत्व के समर्थन से ज़्यादा की-वर्ड्स से ट्रैफिक लाने की होती है।

पोर्टल पर ट्रैफिक लाने के लिए लल्लनटॉप ने हिटलर के लिंग नापने से लेकर चुड़ैलों द्वारा लिंग खा जाने और तमाम तरह की वाहियात ख़बरें बनाई और शेयर की हैं। पत्रकारिता में नए आयाम रचने के लिए समाज इसके लिए लल्लनटॉप का आभारी रहेगा। लेकिन ये तो नॉर्मल रिपोर्ट्स थे जिसे पढ़वाने के लिए एडिटर ने जो ‘कैची हेडलाइन’ सुझाया होगा, वो नीचे के लोगों ने लगाया होगा।

लेकिन, ये शीर्षक बहुत ही चालाकी से चुना गया है। कहने को तो इसे ‘कटाक्ष’ वाला हेडलाइन कह दिया जाएगा लेकिन बात जब ‘यौन हिंसा’ और ‘स्त्रीत्व’ को लेकर शुरू हो रही हो, तो ऐसे हेडलाइन न सिर्फ़ मुद्दे को बौना बना देते हैं, बल्कि उन लोगों को भी ठगते हैं जो कुछ और सोचकर ऐसे आर्टिकल पढ़ते हैं।

ये बहुत ही धूर्त एडिटर का कमाल होता है जब वो लड़की के वक्षस्थल को घूरने को ‘ग़लत बात’ कहते हुए हेडलाइन बनाता है, और इमेज में वैसी ही तस्वीर लगाता है। इस आलोचना से वो अपने आप को इम्यून करना चाहता है कि ‘मैं तो इस तरह के इमेज को शेयर न करने की सलाह दे रहा था’।

इस आर्टिकल में यही हुआ है। लड़कियों के शरीर के ऑब्जेक्टिफिकेशन की बात बाद में की गई, और पूरा शीर्षक फ़्लैट टोन में यही कह रहा है कि ‘आइए, भीगी लड़कियों की तस्वीरें देखिए’। ऐसा नहीं है कि इस पोर्टल पर आपको ये ख़बर एक ही बार मिलेगी। लगभग इसी हेडलाइन के साथ इस ख़बर के बारह दिन पहले एक और ख़बर शेयर की गई, “होली आ गई, भीगी लड़कियों की हॉट तस्वीरें नहीं देखोगे?”

इस कीवर्ड ‘भीगी लड़कियों की तस्वीरें’ से लल्लनटॉप को विशेष प्रेम है

क्यों देखेंगे?

फेमिनिज्म और उससे जुड़े तमाम मुद्दों को जब तक इस तरह से शेयर किया जाता रहेगा, इस समाज में इस विषय पर स्वस्थ चर्चा संभव ही नहीं। ये पूरे इशू को ट्रिवियल बनाने का एक तरीक़ा है जहाँ केन्द्र में नारी शरीर, उससे जुड़ी यौन कुंठा, उसे पुकारते हुए कामुकता जगाने वाले शब्दों की स्टफिंग होती है न कि मुद्दे पर चर्चा आगे बढ़ाने की। 

ऐसे शब्द उसी कामुकता को हवा देते हैं जिसकी बात पत्रकार ने भीतर कही है। यही वो शब्द हैं जिससे दो सेकेंड का वही उन्माद ऐसे लड़कों को मिलता है जिसकी बात पत्रकार ने अपने 22 फ़रवरी वाले आर्टिकल में की है। इसलिए, ये अपने आप में विरोधाभासी है।

नारीवाद का मुद्दा वीर्य के ग़ुब्बारों से निकल कर पीरियड्स के धब्बों तक समेटने के लिए नहीं बना है। न ही इस तरह की शेयरिंग से इसे कोई समर्थन मिलता है। अच्छे विषय को ग़लत शब्दों के साथ लिखकर, झूठी ख़बर का हिस्सा बनाकर जस्टिफाय करना बेकार की कोशिश है। लल्लनटॉप बेशक इस कार्य से ट्रैफिक लाने में सफल हो रहा होगा लेकिन लिखने वाली ये कैसे जस्टिफाय करेंगी कि उसने रंगो के त्योहार को ‘वीर्य का त्योहार’ कहा है?

पाकिस्तान में दो हिन्दू बहनों पर बरपा क़हर, जबरन धर्मान्तरण के बाद कराया निकाह

रंगों के त्योहार होली को लोग बड़े ही हर्षोल्लास के साथ मनाते हैं, फिर चाहे वो देश की सीमा के अंदर हों या बाहर। लेकिन पाकिस्तान में दो हिन्दू बहनों के लिए होली की शाम किसी अभिशाप से कम नहीं रही। होली की शाम को दोनों बहनों को अगवा कर उनका धर्म परिवर्तन कर उन्हें न सिर्फ़ मुस्लिम बनाया गया बल्कि जबरन उनका निकाह भी करा दिया गया।

यह क्रूरता भरी घटना सिंध के घोटकी ज़िले की है, जहाँ दोनों हिन्दू बहनों को जबरन मुस्लिम बना दिया गया। इस हरक़त का हिन्दू समुदाय पर गहरा असर पड़ा है इसलिए उन्होंने विरोध प्रदर्शन कर सभी अपराधियों के ख़िलाफ़ कड़ी कार्रवाई की माँग की है।

कराची से पाकिस्तान हिन्दू सेवा वेलफेयर ट्रस्ट के अध्यक्ष संजेश धंजा ने बताया कि 13 साल की रवीना और 15 साल की रीना को कथित तौर पर अपहरण करके उनकी शादी करवाने के बाद उन्हें इस्लाम क़बूल करवा दिया गया। वहीं पाकिस्तान ट्रस्ट के प्रमुख ने आरोप लगाया कि अल्पसंख्यक समुदाय (हिन्दू) ने सड़क पर उतर कर विरोध प्रदर्शन किया जिसके परिणामस्वरूप पुलिस ने FIR दर्ज कर ली है।

बता दें कि हाल ही में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान ख़ान ने भारत के ख़िलाफ़ ट्वीट किया था कि जैसा भारत में होता है उसके उलट हम अल्पसंख्यकों को समान अधिकार देंगे क्योंकि यह नया पाकिस्तान, जिन्ना का पाकिस्तान है। इमरान के इस ट्वीट का काफ़ी विरोध हुआ था।

भारत को लेकर किया गया यह ट्वीट किस बुनियाद पर रखा है इसका अंदाज़ा इसी बात से लग जाता है कि वहाँ आए दिन हिन्दू समुदाय यातनाओं का शिकार होता रहता है। ऐसी ही एक घटना 20 मार्च को सामने आई थी जब तरण बाई नाम की हिन्दू महिला को उसके घर से अगवा कर लिया गया था, जो बहुत ग़रीब थी और निर्दोष होने के बावजूद अपराधियों ने उन पर चाकू से वार किया था। इसके बाद जब उन्हें घायल अवस्था में अस्पताल ले जाया गया तो डॉक्टर ने उनका इलाज करने से इनकार कर दिया था।

पाकिस्तान जिस शांति और व्यवस्था की बात करता है उसका तो कोई ओर-छोर ही नहीं है। हैरानी इस बात की होती है कि जो पाकिस्तान ख़ुद अपनी कथनी-करनी की मंशा को पाक-साफ़ रखने में अक्षम है वो भारत के ख़िलाफ़ अपनी प्रतिक्रिया देने की हिमाक़त किस मुँह से करता है उसकी दाद देनी चाहिए। हिन्दुओं को सहिष्णुता का पाठ पढ़ाने वाले पाकिस्तान को भारत के संदर्भ में किसी भी मामलों में कोई टीका-टिप्पणी करने से पूर्व ख़ुद के दामन पर लगे अनगिनत दागों पर गौर कर लेना चाहिए।

नीरव मोदी की गिरफ़्तारी के बाद माल्‍या पर भी कसता शिकंजा, सम्पत्ति कुर्क करने का आदेश

नीरव मोदी की गिरफ़्तारी के बाद अब विजय माल्या पर भी शिकंजा कसता हुआ नज़र आ रहा है। दिल्ली की एक अदालत ने FERA उल्लंघन से संबंधित एक मामले में शराब कारोबारी और भगोड़ा विजय माल्या की बेंगलुरू में स्थित संपत्तियों को कुर्क करने का आदेश दिया है।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, बेंगलुरू पुलिस ने प्रवर्तन निदेशालय के विशेष लोक अभियोजक एन के मत्ता और वकील संवेदना वर्मा के जरिए इस संबंध में अदालत के पहले के आदेश को लागू करने के लिए और समय की माँग की थी। इसके बाद मुख्य मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट दीपक शेरावत ने ताजा निर्देश जारी किए।

बता दें कि अदालत ने बेंगलुरु पुलिस को 10 जुलाई तक आर्थिक भगोड़े अपराधी विजय माल्या की सम्पत्तियों को कुर्क करने के निर्देश दिए हैं और उसी दिन इस मामले पर अगली सुनवाई भी होगी।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, बेंगलुरू पुलिस ने अदालत को सूचित किया था कि उसने माल्या की 159 संपत्तियों की पहचान कर ली है, लेकिन वह इनमें से किसी को भी कुर्क नहीं कर पाई है।

बता दें कि अदालत ने इस मामले में पिछले वर्ष चार जनवरी को माल्या को भगोड़ा अपराधी करार दिया था। अदालत ने पिछले साल आठ मई को बेंगलुरू पुलिस आयुक्त के जरिए इसी मामले में माल्या की संपत्तियाँ कुर्क करने का निर्देश दिया था और इस पर रिपोर्ट माँगी थी।

एक नज़र पिछले घटनाक्रम पर, विजय माल्या 2 मार्च, 2016 को देश छोड़कर लंदन भाग गया था। माल्या को कड़ा झटका देते हुए मुंबई की धनशोधन निरोधक क़ानून (पीएमएलए) की विशेष अदालत ने उसे भगोड़ा ‘आर्थिक अपराधी’ घोषित कर दिया था। लंदन की एक अदालत ने 10 दिसंबर, 2018 को उनके प्रत्यर्पण का आदेश दिया था। ब्रिटेन के गृहमंत्री साजिद जावीद ने चार फ़रवरी 2019 को माल्या को करारा झटका देते हुए उसे भारत प्रत्यर्पित करन के आदेश पर हस्ताक्षर किए। माल्या को वहाँ के हाईकोर्ट में अपील करने के लिए 14 दिनों का समय दिया गया था।

अदालत और सरकार जिस तरह से सक्रीय है, उससे ऐसे आर्थिक अपराधियों के हौसले पस्त होने और ऐसे अपराधों पर लगाम लगने की उम्मीद जगती है।

‘भीम आर्मी को मिलती है RSS फंडिंग’ कहने वाली मायावती नहीं उठा रही ‘रावण’ का फोन

उत्तर प्रदेश में खुद को दलित वोटबैंक की ‘फर्स्ट लेडी’ मानने वाली नेता BSP प्रमुख मायावती के सामने एक नया चेहरा चिंता बनता जा रहा है। वर्ष 2017 में यूपी के सहारनपुर में दलितों भड़का कर उत्पात मचाने से हुई हिंसा में एक दलित नेता का नाम बड़ी तेजी से उभरा है। वह नाम है ‘भीम आर्मी’ चीफ चंद्रशेखर आजाद (रावण)।

सहारनपुर में हुई इस हिंसा में 2 लोगों की मौत हो गई थी और कई लोग घायल हुए थे। करीब 3 हफ्ते बाद यह हिंसा पूरी तरह से रुक सकी थी। इस हिंसा के दौरान दलित समुदाय का नेतृत्व इसी चंद्रशेखर आजाद ने किया था। बाद में उत्तर प्रदेश सरकार ने चंद्रशेखर आजाद को गिरफ्तार कर राष्ट्रदोह के मुकदमे के तहत जेल में डाल दिया था। हालाँकि, बाद में चंद्रशेखर पर लगा राष्ट्रदोह का मुकदमा हटा दिया गया था और 16 माह बाद चंद्रशेखर की जेल से रिहाई हुई। अब चंद्रशेखर आजाद और उनकी भीम आर्मी पब्लिक रैलियाँ कर भाजपा और मोदी सरकार के खिलाफ माहौल बनाने का प्रयास कर रहे हैं, लेकिन मायावती फिर भी चिंतित नजर आ रही हैं।

BSP नेता मायावती, चंद्रशेखर ‘रावण’ की बढ़ती हुई लोकप्रियता से थोड़ी संशकित नजर आती हैं। मायावती लगातार चंद्रशेखर आजाद को BJP का एजेंट बता रही हैं और उनका आरोप है कि भीम आर्मी की फंडिंग RSS द्वारा की जाती है। मायावती का कहना है कि अगर वह (चंद्रशेखर आजाद) दलित एकता और उनके अधिकारों के लिए इतना ही गंभीर है, तो उसे अलग से भीम आर्मी बनाने के बजाए BSP में शामिल हो जाना चाहिए था।

वहीं, दूसरी तरफ भीम आर्मी चीफ ‘रावण’ के अनुसार, “मोदी-योगी के कार्यकाल में उन्हें 16 महीने के लिए जेल में डाला गया, मेरे खिलाफ 43 झूठे केस लगाए गए। ऐसे में मैं कैसे उस पार्टी के लिए काम कर सकता हूंँ, जिसने मुझे तबाह करने की कोशिश की।”

चंद्रशेखर ने कहा, “मैं मायावती की बहुत इज्जत करता हूंँ और ऐसा कुछ भी नहीं करूँगा, जिससे उनका या बहुजन समाज का नाम खराब हो, लेकिन उन्हें मुझमें विश्वास दिखाना होगा।” चंद्रशेखर का कहना है कि वो मायावती को समर्थन के लिए 5 बार फोन चुके हैं, लेकिन अभी तक उनकी तरफ से कोई भी जवाब नहीं आया है।

हाल ही में जमीन घोटाला मामले में रोजाना ED ऑफिस के चक्कर काट रहे रॉबर्ट वाड्रा की पत्नी प्रियंका गाँधी ने भी चंद्रशेखर से अस्पताल में मुलाकात की थी, इसके बाद भी मायावती की नाराजगी सामने आयी थी। माना जा रहा है कि कॉन्ग्रेस, पश्चिमी उत्तर प्रदेश में दलित वोटबैंक में सेंध लगाने के लिए चंद्रशेखर को अपने पाले में करना चाहती है।

कश्मीर: आतंकियों ने 12 साल के नाबालिग को बनाया ढाल, फिर गला घोंटकर की हत्या

कश्मीर के हाजिन में एनकाउंटर के दौरान 12 वर्षीय आतिफ मीर की हत्या कर दी गई, जिसे आतंकियों ने बंधक बना लिया था। आतंकियों ने पहले तो उसे ढाल के रूप में इस्तेमाल किया, फिर तालिबानी अंदाज़ में गला घोंटकर उसकी हत्या कर दी।

मामले से जुड़ा एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। इस वीडियो में एक बुजुर्ग लश्कर-ए-तैयबा के दो आतंकवादियों से आतिफ मीर को रिहा करने की अपील कर रहा है। वो आतंकियों से कहता है कि वो जो कुछ भी कर रहा है, वो ‘जिहाद’ नहीं, ‘जहालत’ है। मगर आतंकियों पर इसका कोई असर नहीं पड़ता है। बता दें कि ये वीडियो नाबालिग आतिफ की हत्या से पहले की है।

पुलिस अधिकारियों ने बताया कि यह घटना श्रीनगर से 33 किमी दूर हाजिन के मीर मोहल्ला में हुई, जहाँ आतंकवादियों ने बंदूक का डर दिखाकर बच्चे के घर में पनाह ली थी। उन्होंने बताया कि आतंकवादी उसकी बहन से जबरन शादी करना चाहता था, लेकिन परिवार वाले उसे भगाने में कामयाब रहे। इससे बौखलाए आतंकियों ने आतिफ और उनके एक बुजुर्ग रिश्तेदार हमीद सहित परिवार के सदस्यों को पीटना शुरू कर दिया।

परिवार के चिल्लाने की आवाज सुन स्थानीय लोगों ने पुलिस को इसकी जानकारी दी। जिसके बाद पुलिस ने परिवार को बचाने का काम शुरू किया। आतंकवादियों के उन पर हमला करने तक आतिफ के माता-पिता और परिवार के अन्य सदस्यों को बचा लिया गया, मगर बच्चा और उसके चाचा अब्दुल हमीद अंदर ही रह गए। बाद में पुलिस हमीद को बाहर निकालने में कामयाब हो गई, लेकिन बच्चे को नहीं बचा पाई।

पुलिस ने बताया कि आतंकवादियों पर दबाव बढ़ने पर उन्होंने आतिफ की हत्या कर दी। जिसके बाद पुलिस ने अभियान तेज कर दोनों पाकिस्तानियों को मार गिराया। पुलिस के एक प्रवक्ता ने कहा कि लश्कर-ए-तैयबा के दो आतंकवादी हाजिन मुठभेड़ में मारे गए।

Video: 10 सालों में राहुल गाँधी की आय 1600% कैसे बढ़ी? FTIL और Unitech से क्या है सम्बन्ध?

राहुल गाँधी की संपत्ति 2004 में 55,38,123 रुपए से बढ़कर 2009 में 2 करोड़ और आखिरकार, 2014 में 9 करोड़ रुपए से अधिक हो गई। यहाँ यह भी बताना ज़रूरी है कि 2011-12 में, राहुल गाँधी आय से अधिक इनकम के एक मामले में आरोपित थे। राहुल को AJL के माध्यम से 155 करोड़ रुपए के मामले में, आईटी विभाग ने राहुल गाँधी और सोनिया गाँधी को 100 करोड़ रुपए का टैक्स नोटिस भेजा था।

ऑपइंडिया द्वारा राहुल गाँधी के खुलासे के बाद, कॉन्ग्रेस ने स्वीकार किया था कि राहुल गाँधी ने एचएल पाहवा से जमीन खरीदी थी। हालाँकि, उन्होंने कहा था कि भूमि तब प्रियंका गाँधी वाड्रा को उपहार में दी गई थी। प्रियंका के पास एचएल पाहवा के साथ कई जमीन सौदे और भी हैं जो प्रियंका को कम दाम पर जमीन बेचता था और फिर उसी जमीन को बहुत ऊँचे मूल्य पर खरीद लेता था। Backops की डायरेक्टरशिप भी उस समय प्रियंका गाँधी को हस्तांतरित की गई थी।

क्या प्रियंका गाँधी वाड्रा 2019 में चुनाव इसलिए नहीं लड़ रही हैं, क्योंकि चुनाव शपथ पत्र में ये सारी बातें बाहर आ जाएँगी?

अमेठी के समीकरणों से परेशान कॉन्ग्रेस, राहुल को केरल से भी लड़ाने की अटकलें

साल 2014 के लोकसभा चुनाव में प्रधानमंत्री मोदी ने दो सीटों से चुनाव लड़ा था ठीक उसी तर्ज पर इस बार कॉन्ग्रेस अध्यक्ष राहुल गाँधी दो सीट से लोकसभा चुनाव लड़ने की तैयारी में हैं। राहुल गाँधी के केरल की वायनाड सीट से चुनाव लड़ने की जानकारी केरल के कॉन्ग्रेस अध्यक्ष मुल्लापल्ली रामचंद्रन ने दी।

उन्होंने बताया कि राहुल गाँधी द्वारा दूसरी सीट से चुनाव लड़ने पर पिछले क़रीब एक महीने से विचार किया जा रहा था। हालाँकि इस बात का ख़ुलासा हुआ है कि दो सीट से चुनाव लड़ने के लिए राहुल तैयार नहीं थे, लेकिन काफ़ी समझाने-बुझाने के बाद राहुल इस सीट से लड़ने के लिए तैयार हो गए।

बता दें कि लोकसभा का परिसीमन होने के बाद साल 2008 में केरल की वायनाड सीट अस्तित्व में आई थी। यह सीट कन्नूर, मलाप्पुरम और वायनाड संसदीय क्षेत्र को मिलाकर बनी है। इससे पहले कॉन्ग्रेस के एमएल शाहनवाज़ इस सीट पर दो बार अपनी जीत दर्ज कर चुके हैं।

राहुल के अलावा उनकी दादी इंदिरा गाँधी और माँ सोनिया गाँधी दोनों ही दक्षिण से लोकसभा चुनाव लड़ चुकी हैं। 1978 में इंदिरा गाँधी ने केरल की चिकमगलूर से लोकसभा चुनाव लड़ा था और जीत हासिल की थी। अपनी सास के नक्शेक़दम पर चलते हुए, राजनीति में आने के तुरंत बाद, सोनिया गाँधी ने 1999 का लोकसभा चुनाव दो सीटों- कर्नाटक की बेल्लारी और उत्तर प्रदेश में अमेठी से लड़ा। उन्होंने बेल्लारी से भाजपा नेता सुषमा स्वराज और अमेठी से संजय सिंह को हराया था।

फ़िलहाल, राहुल द्वारा केरल की सीट पर चुनाव लड़ने को एक डर की तरह देखा जा रहा है कि कहीं उन्हें अपने गढ़ में हारने की संभावना तो नहीं जिससे कॉन्ग्रेस उन्हें दो जगहों से चुनाव लड़ने की जुगत की जा रही है।