Home Blog Page 6080

AAP की विफलताओं को बेनक़ाब करने के लिए BJP ने शुरू किया ढोल आंदोलन

आम चुनावों के लिए अपने अभियान को तेज करते हुए, भारतीय जनता पार्टी ने रविवार (27-01-2019) को राजधानी में आम आदमी पार्टी के ख़राब शासन को बेनक़ाब करने के लिए ढोल आन्दोलन शुरू कर दिया।

अशोक रोड स्थित अपने आधिकारिक आवास से अभियान की शुरुआत करते हुए, केंद्रीय मंत्री विजय गोयल ने आरोप लगाया कि अरविंद केजरीवाल सरकार सभी मोर्चों पर विफल रही है।

अपने बयान में उन्होंने कहा कि अस्पतालों की स्थिति ख़राब है, मुहल्ला क्लीनिकों में कोई डॉक्टर नहीं हैं, सरकारी स्कूलों में छात्रों के नामांकन में गिरावट दर्ज़ की गई है और प्रदूषण का स्तर भी काफ़ी बढ़ गया है। टैंकरों के माध्यम से मलिन बस्तियों और पुनर्वास कॉलोनियों में दूषित पानी वितरित किया जा रहा है।

केंद्रीय मंत्री ने आगे कहा कि न्यूनतम बिजली शुल्क में वृद्धि की गई है। दिल्ली में AAP सरकार सभी मोर्चों पर विफल रही है। उन्होंने कहा कि भाजपा कार्यकर्ता हर पार्क और इलाक़े में जाएँगे और दिल्लीवासियों को इस बारे में सूचित करेंगे।

दिल्ली भाजपा प्रमुख मनोज तिवारी ने कहा कि दिल्ली में सात सांसदों ने लोगों के जीवन को बेहतर बनाने के लिए ज़बरदस्त काम किया है, जिसे हर दिल्ली की जनता को बताया जाना चाहिए था। तिवारी ने कहा, “दिल्ली में सड़क नेटवर्क को बेहतर बनाने के लिए हमें केंद्र से अतिरिक्त 55,000 करोड़ रुपए मिले।”

AAP के प्रवक्ता सौरभ भारद्वाज ने कहा कि मोदी के ख़िलाफ़ अपनी पार्टी के राष्ट्रव्यापी अभियान ने बीजेपी को केजरीवाल के ख़िलाफ़ अभियान शुरू करने के लिए प्रेरित किया है। “मतदाताओं के हित के लिए दिल्ली में एक ठोस बहस के लिए मैं तिवारी और गोयल जी को आमंत्रित करता हूँ। आइए एक-एक करके मोदी जी और केजरीवाल के चुनावी वादों की चर्चा करें।”

शर्मनाक! कॉन्ग्रेस के वरिष्ठ नेता और कर्नाटक के पूर्व सीएम ने की महिला के साथ अभद्रता

कर्नाटक में जहाँ गठबंधन की सरकार आपसी मुद्दे को निपटाने में जुटी है, वहीं कॉन्ग्रेस के पूर्व सीएम सिद्धारमैया अभी भी मुख्यमंत्री वाले अंदाज़ में ही जनता से मिल रहे हैं। अहम इतना हावी है कि एक महिला जब सिद्धारमैया से उन्हीं के बेटे की शिकायत लेकर उनके पास पहुँची, तो उन्होंने अभद्रता की। सिद्धारमैया ने महिला से अभद्रता करते हुए माइक छीन लिया और कंधा पकड़ जबरदस्ती बैठा भी दिया।

रिपोर्ट की मानें तो जमीला नाम की महिला उनके विधायक बेटे की शिकायत लेकर सिद्धारमैया के पास पहुँची थी। लेकिन जैसे ही उसने उनके सामने अपनी बात शुरू की, सिद्धारमैया भड़क गए और महिला से अभद्रता करते हुए उसके कंधे को झटकटे हुए उसे बैठा दिया।

बीजेपी ने की बर्खास्त करने की माँग

मामले के प्रकाश में आने के बाद बीजेपी ने कॉन्ग्रेस अध्यक्ष राहुल गाँधी से उन्हें बर्खास्त करने की माँग की है। बीजेपी ने इस बहाने कॉन्ग्रेस की पूर्व अध्यक्ष सोनिया गाँधी, महासचिव प्रियंका गाँधी और अध्यक्ष राहुल गाँधी पर सवालिया निशान भी खड़े किए। बता दें कि, सिद्धारमैया वर्तमान में कर्नाटक में प्रतिपक्ष के नेता हैं और इससे पहले राज्य के मुख्यमंत्री रह चुके हैं।

गरीबों को गारंटी करके न्यूनतम आमदनी देंगे: राहुल गाँधी का ‘ऐतिहासिक निर्णय’

राजस्थान और मध्य प्रदेश में आम जनता को कर्ज़माफ़ी के वायदे करके जीतने वाले राहुल गाँधी ने नया चुनावी दाव फेंका है। इस बार उन्होंने एक ‘ऐतिहासिक निर्णय’ लिया है कि 2019 चुनाव जीतने के बाद वो गारंटी के साथ हर गरीब व्यक्ति को एक न्यूनतम आमदनी दिलवाएँगे।

राहुल गाँधी की इस घोषणा को कॉन्ग्रेस पार्टी के हैंडल से ट्वीट किया गया जहाँ उन्होंने कहा, “कांग्रेस पार्टी ने एक ऐतिहासिक निर्णय लिया है कि 2019 चुनाव जीतने के एकदम बाद कांग्रेस पार्टी गारंटी करके न्यूनतम आमदनी देने जा रही है।”

‘यूनिवर्सल बेसिक इनकम’ एक ऐसा कॉन्सेप्ट है जहाँ सरकार अपने नागरिकों के लिए एक तय राशि उपलब्ध कराती है जिससे उनका जीवन चलता रहे और उन्हें बुनियादी परेशानियाँ न हों। इस सन्दर्भ में सिक्किम की सत्ताधारी पार्टी ने आगामी विधानसभा चुनाव के घोषणा पत्र में इसका ज़िक्र किया है।

राहुल गाँधी का यह कदम सतही तौर पर सुनने में अच्छा लगता है लेकिन उनके इस बयान से उनकी आर्थिक समझ पर भी सवाल खड़े होते हैं। जहाँ सरकारें लगातार फ़िस्कल डेफिसिट को तय दायरे में रखने में जूझती रही हैं, वहाँ इस तरह की बात करना लुभावनी खोखली घोषणा से ज़्यादा कुछ भी नहीं।

भारत में गरीबों के लिए सब्सिडी वाली तमाम योजनाएँ हैं जो उन्हें कम दाम पर अनाज से लेकर, घर, बिजली, पानी और गैस तक उपलब्ध करा रहे हैं। वैसे ही स्वास्थ्य के क्षेत्र में आयुष्मान योजना है जहाँ उनका मुफ़्त उपचार संभव है।

इसके ऊपर से इस तरह की बात करना, और कोई आँकड़ा न देना कि अगर ऐसा होता है तो वो इसे कैसे करेंगे, बताता है कि उनकी समझ में समस्या है। दूसरी बात यह भी है कि राहुल गाँधी के परिवार और पार्टी द्वारा शासित इस देश में आज भी ‘गरीबी हटाओ’ के वेरिएशन में नारे और घोषणाएँ क्यों हैं?

गरीब हैं इस देश में, और उन्हें मनरेगा के तहत रोज़गार देने से लेकर आवास, शौचालय, बिजली, अनाज, शिक्षा और स्वास्थ्य के लिए कई योजनाएँ हैं जो उन्हें धीरे-धीरे स्वाबलंबी बनाने की ओर ले जाने वाले हैं। जबकि, हमारे समाज में चुनावों में हर चीज फ़्री में देने के बाद, अब हर महीने एक तय राशि की गारंटी की बात करना न तो आर्थिक रूप से संभव दिखता है, न ही गरीबों के भविष्य के लिए सही होगा।

हाँ, अगर उन्हें दी जाने वाली सब्सिडी से इसके लिए पैसा उपलब्ध कराया जाए तो एक बार ऐसा सोचा भी जा सकता है। राहुल गाँधी को सिर्फ़ घोषणा करने की जगह पूरा प्लान बताना चाहिए कि ये संभव कैसे होगा। सिक्किम एक छोटा राज्य है, वहाँ की सामाजिक स्थिति अलग है, तो वहाँ की सरकार इस पर सोच सकती है। लेकिन, पूरे देश के गरीबों को ये सुविधा देना, अर्थ व्यवस्था पर बहुत ज़्यादा दबाव डाल सकता है।

शुरुआत के लिए उन्हें राजस्थान, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में इस योजना को लागू करना चाहिए, और फिर लोगों को समझाना चाहिए कि ये करना भी है, तो कॉन्ग्रेस की तरह करो।

Health बजट: देश की सेहत के लिए मोदी सरकार बढ़ा सकती है दायरा!

2019 का बजट कई मायनों में ख़ास होने वाला है चूँकि ये बजट 2019 लोकसभा चुनाव से पहले और सरकार के पाँच साल के अंत में पेश किया जाएगा। सरकार 1 फरवरी को अंतरिम बजट 2019-20 पेश करेगी। बजट में सरकार की प्रमुखता में स्वच्छता, निवेश, रेलवे, टैक्स, सड़कों के साथ किसानों की आय बढ़ाना है।

स्वच्छता और स्वास्थ्य को लेकर हमेशा से गंभीर रही मोदी सरकार इस बार भी लोगों के स्वास्थ्य का ख़याल रखते हुए देश के लोगों को कई सौगात दे सकती है। कहते हैं कि जिस राष्ट्र में लोग स्वस्थ्य होते हैं उस राष्ट्र का विकास तेजी से होता है। देश के नागरिकों के स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए मोदी सरकार स्वास्थ्य योजनाओं के दायरे में बदलाव कर सकती है, ऐसी सम्भावना व्यक्त की जा रही है।

‘आयुष्मान भारत योजना’ का बढ़ सकता है दायरा

मोदी सरकार अंतरिम बजट में प्राथमिक हेल्थ केयर के लिए आवंटित रकम में बढ़ोतरी कर सकती है। साथ ही ‘आयुष्मान भारत योजना’ के तहत 5,500 हेल्थ केयर सेंटरों की शुरुआत भी किया जा सकता है। बता दें कि सरकार 2017-18 के ₹52,800 करोड़ के स्वास्थ्य बजट में 5% की बढ़ोतरी कर सकती है। इसके अलावा निजी और सार्वजनिक क्षेत्र में ट्रॉमा और इमर्जेंसी सेवाओं की मजबूती को लेकर बड़ा कदम उठा सकती है।

‘जन आरोग्य योजना’ के बजट में भी हो सकता है इजाफ़ा

पिछले बजट की तुलना में इस बार प्रधानमंत्री ‘जन आरोग्य योजना’ के बजट को भी बढ़ाया जा सकता है। बता दें कि इस योजना के अंतर्गत 10 करोड़ परिवारों के 50 करोड़ लोगों को ₹5,00000 की स्वास्थ्य बीमा देने पर भी विचार किया जा सकता है। इस योजना पर ₹12,000 करोड़ खर्च किया जाना है। बता दें कि सरकार ने राष्ट्रीय स्वास्थ्य पॉलिसी के अनुसार स्वास्थ्य पर होने वाले खर्च को साल 2025 तक GDP के 1.15% हिस्से से बढ़ाकर 2.25% करने का लक्ष्य रखा है।

100 दिनों में 6 लाख से ज्यादा लोगों को मिल चुका है लाभ

बता दे कि योजना के लागू होने के लगभग 4 महीने के अंदर ही इस योजना के परिणाम दिखने शुरू हो गए थे। प्रमाण स्वरुप दुनिया की दिग्गज टेक्नॉलजी कंपनी माइक्रोसॉफ्ट के संस्थापक और गेट्स फाउंडेशन के को-चेयरमैन बिल गेट्स ने केंद्र सरकार की इस महत्वाकांक्षी ‘आयुष्मान भारत योजना’ की तारीफ़ की थी। बिल गेट्स ने इस योजना की लॉन्चिंग के 100 दिनों में 6 लाख से ज़्यादा मरीजों द्वारा लाभ उठाए जाने पर सुखद आश्चर्य प्रकट किया। उन्होंने सोशल मीडिया साइट ट्विटर पर स्वास्थ्य मंत्री जगत प्रकाश नड्डा ने के ट्वीट को रीट्वीट करते हुए लिखा था लिखा था, “आयुष्मान भारत के पहले 100 दिन के मौके पर भारत सरकार को बधाई। यह देखकर अच्छा लग रहा है कि कितनी बड़ी तादाद में लोग इस योजना का फ़ायदा उठा चुके हैं।”

ग़ौरतलब है कि मीडिया संस्थानों ने इसे ‘मोदीकेयर’ का नाम भी दिया है। आयुष्मान भारत के सीईओ डॉ. इंदु भूषण ने ट्वीट कर कहा था कि (जनवरी 16, 2019) तक तक़रीबन 8.50 लाख लोग आयुष्मान भारत योजना के तहत लाभान्वित हुए हैं।

मृतकों की ‘घर वापसी’ के लिए मोदी सरकार तैयार, 40% तक घटा किराया

किसी अपने को खो देने का एहसास बेहद दु:खद होता है। दु:ख के इस दौर से लगभग सभी परिचित हैं। यह दु:ख उन परिस्थितियों में और अधिक बढ़ जाता है, जब किसी अपने को खो देने के बाद उनके अंतिम दर्शन तो दूर अंतिम संस्कार की प्रक्रिया से भी कुछ परिवार वंचित रह जाएँ।

जिनके प्रियजनों की मृत्यु विदेशों में हो जाती थी, उनके परिवारों के लिए यह एक बड़ी समस्या थी क्योंकि उन्हें स्वदेश लाने की क़ीमत बहुत अधिक होती थी।

विदेश से शवों को लाने संबंधी समझौते पर सहमति

मध्य पूर्व में रह रहे भारतीयों के लिए यह चुनौती ज्यादा गंभीर है। यहाँ भारतीय आबादी लगभग 80 लाख है। इनमें ज्यादातर श्रमिक ही हैं। आधिकारिक अनुमान के अनुसार यहाँ हर दिन औसतन 10 लोगों की मृत्यु हो जाती है। यहाँ मृत्यु के अधिकतर कारणों में प्राकृतिक या सड़क दुर्घटनाएँ शामिल हैं।

इन परिवारों के दर्द को समझते हुए भारतीय समुदाय के नेता पिछले कई वर्षों से इस मामले को उठा रहे थे और इसके लिए विदेश मंत्रालय की एयर इंडिया से अनेकों बार बैठकें भी हुई थीं। अब जाकर इसके परिणामस्वरूप एक आम सहमति बनी और इस मामले को सुलझाया गया। सरकार ने एयर इंडिया से विदेश में मृत भारतीय नागरिकों को वापस स्वदेश लाने के लिए परिवार से उनका किराया फ्लैट रेट पर लेने को कहा है।

शवों को स्वदेश लाने का ख़र्च 40% कम

जनसंख्या की बात की जाए तो यूएई में 33 लाख, सऊदी अरब में 27 लाख, कुवैत में 9 लाख, ओमान में 8 लाख, क़तर में 6.5 लाख जबकि बहरीन में 3.5 लाख भारतीय रहते हैं। मिडिल-ईस्ट में इतनी बड़ी भारतीय जनसंख्या के होने का मतलब है, वहाँ से आने वाले मृतकों की संख्या भी अधिक होना। इसे देखते हुए केंद्र सरकार द्वारा एयर इंडिया से करार होने के बाद शवों को लाने में परिवार वालों को पहले के बजाय अब कम खर्च पड़ेगा। केंद्र सरकार ने एयर इंडिया से जो करार किया है, उसके कारण शवों को देश लाने में अब लगभग 40 प्रतिशत तक कम खर्च आएगा। जबकि 12 वर्ष से कम आयु के बच्चों के शव लाने में यह ख़र्च फ्लैट रेट का भी आधा होगा।

मिडिल ईस्ट के इन देशों से एयर इंडिया द्वारा स्वदेश लाए जाने वाले शवों का फ्लैट किराया भाड़ा अलग-अलग तय (करेंसी एक्सचेंज के वर्तमान रेट के आधार पर) किया गया है। पहले के मुकाबले शवों का फ्लैट किराया भाड़ा लगभग 40% तक कम है।

  • यूएई से ₹28,500
  • सऊदी अरब से ₹41,700
  • कुवैत से ₹40,900
  • ओमान से ₹29,400
  • क़तर से ₹42,800
  • बहरीन से ₹42,500

हाल ही में वाराणसी में हुए प्रवासी भारतीयों के कार्यक्रम में विदेश मंत्रालय के अधिकारी ने कहा कि विदेश से भारतीयों के शव को वापस लाना सरकार की प्राथमिकता है। 2016 से 2018 के बीच केंद्र सरकार द्वारा गरीब और ज़रूरतमंद परिवारों के सगे-संबंधियों के 486 शवों को भारत लाने में अब तक कुल ₹1.6 करोड़ ख़र्च किए जा चुके हैं।

इसके अलावा अधिकारी ने जानकारी दी कि एयरलाइंस वज़न के अनुसार किराया लेती है। ऐसे में हर शव का किराया तक़रीबन ₹50,000 से ₹1 लाख तक चला जाता है। एयरलाइंस इस वजह से भी अधिक किराया वसूलती है क्योंकि शवों को यात्रियों के सामानों के साथ कारगो में नहीं रखा जाता बल्कि इसके लिए अगल से व्यवस्था करनी पड़ती है। इस लिहाज़ से शव को अधिक जगह देने की व्यवस्था की जाती है।

कमलनाथ के कैबिनेट मंत्री ने 3 चुनाव में 3 हलफ़नामे दायर किए, सभी में दी अलग-अलग जानकारी

मध्य प्रदेश में कमलनाथ की सरकार में कैबिनेट मंत्री इमरती देवी एक बार फिर से विवादों में फँस गई हैं। इमरती देवी मध्य प्रदेश के कमलनाथ सरकार में महिला एवं बाल विकास मंत्री हैं। दैनिक भास्कर ने अपने एक रिपोर्ट में लिखा है कि प्रदेश की कैबिनेट मंत्री इमरती देवी ने 12वीं की परीक्षा कब और कहाँ से पास की, इसकी कोई स्पष्ट जानकारी नहीं है।

भास्कर के रिपोर्ट में इस बात का दावा किया गया है कि तीनों ही विधानसभा चुनाव के दौरान इमरती देवी के हलफ़नामे में गलत शैक्षणिक जानकारी दी गई है।

कैबिनेट मंत्री इमरती देवी ने 2018 में मध्यप्रदेश के डबरा विधानसभा से चुनाव लड़े। इस चुनाव के हलफ़नामे में उन्होंने अपने शैक्षणिक योग्यता के बारे में बताया है कि उन्होंने 2009 में भिंड के एक सरकारी स्कूल से राज्य ओपन बोर्ड की हायर सेकेंडरी परीक्षा पास की है। इमरती देवी ने यही जानकारी 2013 विधानसभा चुनाव के दौरान भी दी थी।

हालाँकि, 2008 विधानसभा चुनाव में इमरती देवी ने शैक्षणिक योग्यता से जुड़ी बिल्कुल अलग जानकारी दी थी। इस समय इमरती देवी ने बताया था कि उन्होंने 12वीं की पढ़ाई ओपन बोर्ड के हायर सेकेंडरी से करने के बजाय माध्यमिक शिक्षा मंडल से किया है। इस चुनाव में इमरती देवी ने अपने पासिंग ईयर का भी जिक्र नहीं किया है। ऐसे में साफ़ ज़ाहिर है कि मंत्री ने अपनी
शैक्षणिक योग्यता से जुड़ी जो जानकारी तीन अलग-अलग हलफ़नामें में दी है, वह हर जगह सही नहीं है।

इसके अलावा भास्कर ने रिपोर्ट में यह भी दावा किया कि मंत्री ने रिपोर्टर को जो जवाब दिया है वह निर्वाचन आयोग को दी गई जानकारी से बिल्कुल अलग है।

इस वजह से मंत्री के शैक्षणिक योग्यता पर उठा सवाल

– कैबिनेट मंत्री इमरती देवी ने रिपोर्टर को बताया कि उन्होंने 12वीं 2007 में ही भितरवार के एक सरकारी स्कूल से पास कर लिया था। ऐसे में यह सवाल उठता है कि यदि मंत्री ने 2007 में ही परीक्षा पास कर ली थी तो 2008 के हलफ़नामें में पासिंग ईयर का जिक्र क्यों नहीं किया?

– इमरती देवी ने 2008 या 2018 में से किस चुनाव के हलफ़नामे में शैक्षणिक योग्यता से जुड़ी सही जानकारी दी है? इमरती देवी ने सरकारी स्कूल के राज्य ओपन वोर्ड से पढ़ाई की है या फिर माध्यमिक शिक्षा मंडल भोपाल से हायर सेकेंडरी परीक्षा पास की  

– रिपोर्टर के एक सवाल के जवाब में इमरती देवी ने बताया कि मैंने 2007 में ही भितरवार से हायर सेकंडरी कर ली थी, जब मैं जिला पंचायत सदस्य थी। भिंड तो कभी पढ़ने गई ही नहीं। जबकि यह जानकारी अपने किसी चुनावी हलफ़नामे में नहीं दी है।   

आपसी रंजिश के चलते BJP नेता की हत्या

बीजेपी नेताओं की हत्या का सिलसिला लगातार रफ़्तार पकड़ता दिख रहा है। एक और बीजेपी नेता की हत्या का मामला सामने आया है जो उत्तर प्रदेश का है। दरअसल उत्तर प्रदेश में भदोही के गोपीगंज क्षेत्र में जौनपुर इलाक़े में एक शादी के समारोह का आयोजन था और इसी शादी में बीजेपी नेता दिनेश चंद्र मिश्र (48 वर्ष) अपने छोटे भाई सुनील कुमार मिश्र के साथ शामिल होने गए थे। जहाँ उन्हीं के पट्टीदार वीरेंद्र मिश्र ने लाइसेंसी रिवॉल्वर से बीजेपी नेता को गोली मार दी।

गोली बीजेपी नेता की बाईं आँख पर जा लगी जिससे उनकी मौक़े पर ही मृत्यु हो गई। मौक़े पर पहुँची पुलिस ने जानकारी दी कि रविवार (27-01-2019) को जौनपुर में सुरेरी क्षेत्र के कोहरौड़ा गाँव के निवासी एक युवक की बारात भदोही में गोपीगंज क्षेत्र के धनीपुर गाँव में जानी थी। द्वारचार के बाद जनवासे में बाराती बैठे थे। इस बीच उन्हीं के पट्टीदार वीरेंद्र मिश्र ने अपनी लाइसेंसी रिवॉल्वर से बीजेपी नेता को गोली मार दी।

अचानक गोली चलने से वहाँ मौजूद सभी बारातियों में हड़कंप मच गया। हमलावर को पकड़ने के लिए कई बाराती उसकी ओर भागे, लेकिन अँधेरा होने की वजह से हमलावर रिवॉल्वर समेत फ़रार होने में क़ामयाब रहा। बता दें कि घटना के बाद बीजेपी नेता दिनेश चंद्र मिश्रा के परिजन शव को लेकर गोपीगंज थाने पहुँचे।

मृतक के छोटे भाई सुनील कुमार मिश्र ने सुरेरी क्षेत्र के कोहरौड़ निवासी वीरेंद्र उर्फ़ बद्री नारायण के ख़िलाफ़ मुक़दमा दर्ज़ कराया दिया है। बीजेपी नेता के छोटे भाई सुनील कुमार मिश्रा ने बताया कि लाइसेंसी रिवॉल्वर आरोपी के बड़े भाई नरेंद्र मिश्र की है और वो रोजी-रोटी के सिलसिले में अक्सर बाहर रहते हैं।

इसके अलावा उन्होंने यह भी बताया कि आरोपी शख़्स हमेशा रिवॉल्वर को लेकर घूमता रहता था और जान से मारने की धमकी भी देता था। फ़िलहाल बीजेपी नेता के शव को पोस्टमार्टम के लिये भेज दिया गया है और पुलिस मामले की खोजबीन में जुटी हुई है।

बता दें कि इससे पहले भी बीजेपी नेताओं के साथ इस तरह की जानलेवा घटना को अंजाम दिया जा चुका है जिसमें मध्य प्रदेश के बीजेपी नेता प्रह्लाद बंधवार और मनोज ठाकरे मुज़्जफ़्फरपुर के बीजेपी नेता बैजू प्रसाद गुप्ता शामिल हैं।

उत्तर प्रदेश में लड़ाकू विमान क्रैश, पायलट ने सूझ-बूझ से ग्रामीणों की बचाई जान

यूपी के कुशी नगर में वायुसेना का लड़ाकू विमान क्रैश हुआ है। मिली जानकारी के अनुसार यह घटना हेतिमपुर गाँव की है। इस अचानक हुई दुर्घटना में संतोषजनक बात यह है कि इस घटना के होने से पहले ही पायलट ने पैराशूट की मदद से इमरजेंसी गेट से निकलकर ख़ुद को सुरक्षित बचा लिया।

इस हादसे की वज़ह से इलाके में उठे भयंकर धुएँ के गुबार से घटना की बिकरालता का अंदाज़ा लगाया जा सकता है। रिपोर्ट के अनुसार, इस लड़ाकू विमान ने गोरखपुर से उड़ान भरी थी। बीच रास्ते में इस ख़तरे का अंदाजा लगने के बाद पायलट ने अपनी सूझ-बूझ का परिचय देते हुए विमान को आबादी वाले क्षेत्र से दूर ले गए।

बता दें कि ये विमान खेत में क्रैश हुआ है। पायलट की समझदारी की वजह से किसी प्रकार की कोई जनहानि नहीं हुई है। राहत एवं बचाव कार्य के उद्देश्य से हेलीकॉप्टर ने समय से पहुँचकर विमान में लगी आग पर क़ाबू पा लिया और घटना से प्रभावित क्षेत्रों में आम लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित की।

अभी विमान में आई ख़राबी की वज़ह पता नहीं लग पाई है। इस दुर्घटना की जाँच के लिए कोर्ट ऑफ इंक्वायरी का आदेश दिया गया है।

बता दें कि दुर्घटनाग्रस्त जगुआर विमान, लड़ाकू विमान है और इसका निर्माण फ्रांस में हुआ है। ये विमान कम ऊँचाई पर उड़ान भरने में सक्षम युद्धक विमान है। इसमें दो इंजन होते हैं। यह
1350 किमी प्रति घंटे की रफ़्तार से उड़ान भर सकता है। रिपोर्ट के अनुसार, इस हादसे के पहले, 2018 के जून महीने में दो जगुआर विमान क्रैश हुए थे।

समुदाय विशेष की हिंसा के पीड़ित बच्चों से मिलने खुजनेर जाएंगे शिवराज सिंह चौहान

मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने राजगढ़ के खुजनेर में हुई घटना को वीभत्स बताया है। बता दें कि खुजनेर में गणतंत्र दिवस समारोह के दौरान बच्चे गदर फ़िल्म के एक गाने को प्रस्तुत कर रहे थे। इसी दौरान ‘विशेष संप्रदाय’ कुछ लोगों ने देश विरोधी नारे लगाने शुरू कर दिए। उन्होंने डांस कर रहे बच्चों पर हमला कर दिया जिस से कई बच्चों को चोट भी आई। इस मामले में 16 लोगों को गिरफ़्तार किया गया है।

गिरफ़्तार किए गए आरोपितों में ‘संप्रदाय विशेष’ के समद खां, बल्ला खां, सेठा उर्फ जाकिर खां, अबरार खां, शाकिर खां, अय्यूब खां, इम्तियाज खां एवं समीर खां शामिल हैं। अब पूर्व मुख्यमंत्री चौहान ने इस घटना पर अपनी प्रतिक्रया दी है। उन्होंने कहा कि वह कल शाम को खुजनेर जा कर पीड़ित बच्चों से मुलाक़ात करेंगे और उनका हालचाल जानेंगे।

इस घटना की कड़ी निंदा करते हुए शिवराज सिंह ने कहा कि असामाजिक तत्व सर उठा रहे हैं, अराजकता पैदा कर रहे हैं और दोषियों पर कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है। पूर्व मुख्यमंत्री को इस घटना की जानकारी दिल्ली भाजपा के प्रवक्ता तेजिंदर बग्गा ने दिया। उन्होंने ‘मामा’ शिवराज से ‘भांजी’ की मदद करने की अपील की, जिस पर शिवराज ने उपर्युक्त ऐलान किया।

मामले की और जानकारी लेने के लिए ऑपइंडिया की टीम ने राजगढ़ पुलिस स्टेशन को फोन किया। अफ़सोस, सरकारी वेबसाइट पर जो नंबर दिया गया है, डायल करने पर वो इनवैलिड बताता है।

आपको बता दें कि मध्य प्रदेश में जब से कमलनाथ सरकार आई है, तब से राजनीतिक हत्याओं का दौर जारी है। लेकिन गणतंत्र दिवस पर बच्चों पर हमला अक्षम्य अपराध है, पाप है। ऑपइंडिया ने इस घटना के संबंधित दो रिपोर्ट प्रकाशित किए हैं। पहली रिपोर्ट में घटना की जानकारी दी गई है, वहीं दूसरी रिपोर्ट में आरोपितों की गिरफ़्तारी की ख़बर है।

हम छेड़ते नहीं, और कोई छेड़े तो छोड़ते भी नहीं: PM मोदी

नरेंद्र मोदी ने देश की राजधानी में आयोजित नेशनल कैडेट्स कॉर्प्स (एनसीसी) की रैली में देश भर के कैडेट्स को संबोधित किया। इस मौके पर एनसीसी कैडेट्स द्वारा प्रधानमंत्री को गार्ड ऑफ ऑनर भी दिया गया। प्रधानमंत्री ने अपने भाषण की शुरुआत में ही कहा, “जब मैं आप सबों के बीच आता हूँ तो मेरी पुराने दिनों की यादें ताजा हो जाती है।”

प्रधानमंत्री ने अपने पुराने दिनों को याद करते हुए कहा, “आज जिस समय को आप जी रहे हैं, कभी मैंने भी इस समय को आपके तरह ही जिया है।” अपने भाषण के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि हमारे देश के सैनिकों की एक ख़ासियत है कि हम किसी को छेड़ते नहीं हैं, लेकिन यदि हमें कोई छेड़ता है तो हम उसे छोड़ते भी नहीं हैं। प्रधानमंत्री ने अपने भाषण में यह भी कहा कि हम शांति पसंद मुल्क हैं, लेकिन यदि बात राष्ट्र की रक्षा तक पहुँचती है तो हम किसी तरह के कदम उठाने से नहीं चूकेंगे।

एनसीसी कैडेट्स को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री

प्रधानमंत्री ने इस कार्यक्रम में एनसीसी कैडेट्स को प्रोत्साहन देते हुए कहा, “आप ही के बीच से निकली हिमा दास ने दुनिया में नाम किया है। कई एनसीसी कैडेट्स ने पर्वतारोहन व ट्रैकिंग में शानदार उपलब्धि को अपने नाम किया है। ऐसे में मैं जब भी एनसीसी के बीच आता हूँ तो मेरा उत्साह बढ़ता है। मैं खुद को पहले से अधिक उर्जावान महसूस करता हूँ।”

प्रधानमंत्री ने कार्यक्रम के दौरान केरल बाढ़ के दौरान अपनी जान पर खेलकर राज्य के लोगों के जान-माल की रक्षा करने के लिए एनसीसी के जवानों को बधाई दी।