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राफेल डील में कॉन्ग्रेस अध्यक्ष राहुल कर रहे हैं एयरक्राफ्ट कंपनी एयरबस की लॉबिंग: जावड़ेकर

केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने राफेल डील मामले में एक बड़ा बयान दिया है। जावड़ेकर ने कहा कि राहुल गाँधी एयरक्राफ्ट कंपनी एयरबस के एजेंडे को आगे बढ़ा रहे हैं। राफेल डील में राहुल द्वारा सरकार पर खड़े किए गए सवाल के जवाब में जावड़ेकर ने कहा कि कॉन्ग्रेस अध्यक्ष राहुल गाँधी को एयरक्राफ्ट कंपनी एयरबस का ईमेल कैसे मिला, किसी और के पास तो रक्षा सौदे से जुड़ा यह ईमेल नहीं है।

केंद्रीय मंत्री जावड़ेकर ने कहा कि राहुल एयक्राफ्ट बनाने वाली इस कंपनी में एजेंट की तरह काम कर रहे हैं। जावड़ेकर ने अपने बयान में कहा कि एयरबस का एक ही एजेंडा है कि किसी तरह इस रक्षा सौदे को रद्द कर दिया जाए। ऐसा इसलिए क्योंकि एयरबस एकमात्र राफेल की प्रतिस्पर्धी कंपनी है।

8 साल की बच्ची ने राफेल पर राहुल को दिया था जवाब

विपक्ष द्वारा राफेल डील पर मचा कोहराम आए दिन कुछ नया ही करतब दिखाता रहता है या यूँ कह लीजिए कि इन करतबों में कॉन्ग्रेस का हमलावर और आक्रामक रुख़ कभी थमने का नाम ही नहीं लेता है।

ऐसे में अब सवाल यह उठता है कि क्या सच में राफेल डील करतबों का मैदान बन चुका है या इसे अब तक बेवजह ही हवा दी जाती रही है। आम जनता और कॉन्ग्रेस समर्थकों के लिए भले ही यह समझ पाना मुश्किल हो कि इस डील के तहत राफेल की क़ीमत में इतना उतार-चढ़ाव क्यों है। लेकिन पिछले दिनों एक 8 साल की बच्ची ने राफेल के गुणा-गणित को क़ाबिल-ए-तारीफ़ अंदाज में समझाकर राहुल के आरोपों के जवाब दिया था।

आपको बता दें कि, 9 जनवरी को ‘एक भारत श्रेष्ठ भारत’ के ट्विटर हैंडल से एक ऐसा वीडियो शेयर हुआ था , जिसमें 8 साल की बच्ची अपनी दो ज्यॉमेट्री बॉक्स के माध्यम से यह समझाने का प्रयास कर रही है कि क्या फ़र्क है मोदी जी के राफ़ेल में और राहुल गाँधी के राफेल में। इस बच्ची ने एक बेहतर ढंग से राफेल जैसे विवादित मुद्दे को जितनी सरलता से परिभाषित किया था, वो एक मिसाल है।

RSS कार्यकर्ता हत्या के आरोपित वसीम अहमद को जेल में चाहिए ‘इंग्लिश टॉयलेट’, इसलिए माँग रहा है जमानत

आरएसएस कार्यकर्ता की हत्या के आरोपित ने अपनी जमानत की ऐसी वजह बताई कि उच्च अदालत को भी सोचना पड़ गया। 35 वर्षीय राष्ट्रीय स्यवं सेवक संघ (आरएसएस) नेता रुद्रेश की हत्या के आरोपित वसीम अहमद ने बेंगलुरू के परप्पन जेल और विक्टोरिया अस्पताल में वेस्टर्न टॉयलट नहीं होने का आधार बनाकर जमानत के लिए अनुरोध किया था। वसीम अहमद ने NIA की स्पेशल कोर्ट में अपने बाएँ घुटने में परेशानी की बात कही थी और कहा था कि उसे ‘इंडियन टॉयलट’ में बैठने पर परेशानी होती है इस कारण उसके इलाज के लिए जमानत दी जाए। लेकिन, स्पेशल कोर्ट ने उसकी जमानत याचिका खारिज कर दी। इसके बाद उसने फरवरी 06, 2019 को हाईकोर्ट से गुहार लगाई।

वसीम ने कहा कि उसे घुटने की सर्जरी की सख्त जरूरत है और विक्टोरिया अस्पताल में भी वेस्टर्न कमोड नहीं है। लिहाजा, उसे जमानत दी जाए, ताकि वह निजी खर्च पर प्राइवेट अस्पताल में इलाज करा सके। हाईकोर्ट ने विक्टोरिया अस्पताल के साथ-साथ जेल में वेस्टर्न कमोड होने की तफ्तीश कराई और अधिकारियों को रिपोर्ट सौंपने के लिए कहा। बाद में इस बात की पुष्टि हुई कि दोनों जगहों पर वेस्टर्न कमोड से लैस टॉयलट मौजूद थे। जिसके आधार पर हाईकोर्ट ने वसीम की जमानत याचिका खारिज कर दी।

यदि परप्पन अग्रहारा केंद्रीय कारागार और विक्टोरिया अस्पताल में वेस्टर्न टॉयलट नहीं होते तो शायद वसीम को जमानत मिल जाती। मीडिया के अनुसार, जिस जेल में वसीम अहमद बंद है, उसकी बैरकों और ब्लॉक में 10 के करीब टॉयलट हैं। वहीं, अस्पताल के वार्ड में भी चार वेस्टर्न टॉयलट हैं। जस्टिस केएन फनींद्र और जस्टिस नटराजन ने एनआईए की विशेष अदालत के फैसले को बरकरार रखते हुए अधिकारियों को आरोपित वसीम को इलाज संबंधी सुविधा सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।

सरकारी वकील के मुताबिक यह कोई साधारण मामला नहीं है, वसीम अहमद पर आतंक जैसे गंभीर आरोप भी हैं। गौरतलब है कि अक्टूबर 16, 2016 को ‘पॉप्युलर फ्रंट ऑफ इंडिया’ के सदस्य वसीम अहमद ने मामले में सह-अभियुक्त मोहम्मद सादिक के साथ मिलकर RSS कार्यकर्ता रुद्रेश की बीच सड़क पर धारदार हथियार से हमला कर हत्या कर दी थी। रुद्रेश उस वक्त आरएसएस की वर्दी में थे और अपने दोस्त के साथ शिवाजीनगर के एक मेडिकल स्टोर पर खड़े थे। अदालत में एनआईए ने कहा था कि वसीम ने रुद्रेश की बेरहमी से हत्या करने के बाद भड़काऊ नारेबाजी भी की थी, उसने आरएसएस नेता की हत्या इसलिए की ताकि हिन्दुओं में डर पैदा हो सके।

बिहार बजट: 11 मेडिकल कॉलेज के साथ किसानों को 1420 करोड़ रुपए का अनुदान

बिहार के उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने विधानसभा में बजट 2019-20 पेश किया। सुशील कुमार मोदी इससे पहले भी नौ बार सरकार की तरफ़ से विधानसभा में बजट पेश कर चुके हैं।

इस बार लोकसभा चुनाव 2019 से पहले बिहार सरकार ने अपने बजट में कई बड़ी व महत्वपूर्ण घोषणा की है। सरकार की तरफ़ से उपमुख्यमंत्री ने कुल 2 लाख 501 करोड़ रुपए का बजट पेश किया है।

इस बार सरकार द्वारा पेश किए गए बजट में प्रदेश के 11 जिलों में मेडिकल कॉलेज खोलने की मंजूरी दी गई है। इसके अलावा बजट में ये महत्वपूर्ण घोषणाएँ सरकार द्वारा की गई हैं-

  • प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के लिए 1074 करोड़ रुपए।
  • हर घर बिजली पहुँचाने वाला आठवाँ राज्य बना बिहार।
  • इस साल दीनदयाल ग्राम ज्योति योजना के तहत हर किसान को मिलेगी बिजली, 5827 करोड़ स्वीकृत।
  • 24 जिलों के 280 प्रखंडों को सूखाग्रस्त घोषित किया गया।
  • 13.40 लाख किसानों को 1430 करोड़ रुपए का अनुदान।
  • 15 लाख किसानों को 195 करोड़ रुपए डीजल अनुदान।
  • सड़कों की मरम्मत के लिए 6654 करोड़ रुपए का प्रावधान।
  • उग्रवाद प्रभावित इलाके के लिए 1228 करोड़ रुपए आवंटित किए गए।
  • जर्जर बिजली तारों को बदलने के लइए 2827 करोड़ रुपए स्वीकृत।
  • 2019-20 बालिका साइकिल योजना के लिए 207 करोड़, बालिका प्रोत्साहन योजना के लिए 274 करोड़ रुपए स्वीकृत।
  • सर्व शिक्षा अभियान के लिए 14352 करोड़ और मध्याह्न भोजन के लिए 2374 करोड़ रुपए का प्रावधान।
  • साइकिल के लिए राशि 2500 रुपए से बढ़ाकर 3 हजार रुपए की गई।
  • सैनिटरी नैपकीन के लिए 56.20 करोड़ रुपए आवंटित।
  • बिहार के सभी जिलों में इंजीनियरिंग कॉलेज खोलने का लक्ष्य।
  • आयुष्मान भारत योजना के लिए 335 करोड़ रुपए का प्रावधान।
  • पीएमसीएच को विश्वस्तरीय अस्पताल बनाने के लिए 5540 करोड़ रुपए स्वीकृत।
  • 11 जिलों में खुलेगा मेडिकल कॉलेज, नालंदा में डेंटल कॉलेज खोलने की मंजूरी।
  • आईजीआईएमएस में 100 बेड के स्टेट कैंसर संस्थान का होगा निर्माण।
  • सब्जी प्रसंस्करण के लिए 1750 करोड़ रुपए की स्वीकृति।

आज शाम से अगले पाँच दिनों तक मासिक पूजा के लिए खुला रहेगा सबरीमाला मंदिर

देश के प्रसिद्ध सबरीमाला मंदिर को एक बार फिर से पूजा के लिए खोल दिया गया है। मलयालम महीना कुंबम के दौरान मासिक पूजा के लिए सबरीमाला मंदिर 12 फ़रवरी से 17 फ़रवरी तक खुला रहेगा।

सबरीमाला मंदिर के मुख्य पुजारी वासुदेवन नंपूतिरि मंगलवार शाम को मंदिर का पट खोलेंगे। पूजा के दौरान मंदिर के पुजारी कंडारारू राजीवरु भी मौजूद रहेंगे। मंदिर खुलने पर हिंदूवादी संगठनों के संभावित विरोध प्रदर्शन को ध्यान में रखते हुए, पुलिस ने आसपास के क्षेत्रों में सुरक्षा बढ़ा दी है।

परंपरा तोड़ने के आरोप में कनकदुर्गा को ससुराल वालों ने निकाला

बता दें कि पिछले दिनों 800 वर्षों की परंपरा को तोड़ कर सबरीमाला मंदिर में प्रवेश करने वाली कनकदुर्गा को ससुराल वालों ने घर से निकाल दिया था। इतना ही नहीं, उसके मायके वालों ने भी उसे घर में घुसने की इजाज़त नहीं दी थी। पुलिस जब कनकदुर्गा को लेकर उसके ससुराल पहुँची तो पाया कि कनकदुर्गा के पति घर में ताला लगा कर बच्चों संग कहीं और चले गए थे।

कनकदुर्गा के परिवार ने कहा था कि उसके ‘कृत्य’ से पूरे समुदाय को शर्मसार होना पड़ा है और लाखों श्रद्धालुओं की भावना को ठेस पहुँची है। उसके सरकारी कर्मी पति ने कहा था कि वे उसे तब तक नहीं स्वीकार करेंगे, जब तक कि वह अपने पाप का प्रायश्चित नहीं कर लेती है।

बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने सितम्बर 2018 में महिलाओं को सबरीमाला मंदिर में प्रवेश करने की इजाज़त दे दी थी जिसके बाद श्रद्धालुओं ने विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया था। उच्चतम न्यायालय के उस निर्णय के बाद कनकदुर्गा सबरीमाला मंदिर में प्रवेश करने वाली पहली महिला थी। 39 वर्षीय कनकदुर्गा ने एक अन्य महिला के साथ सबरीमाला की सैकड़ों साल पुरानी परंपरा को धता बताते हुए मंदिर में प्रवेश किया था।

वन्दे भारत एक्सप्रेस का किराया रेलवे ने कम किया

नई दिल्ली से वाराणसी के बीच चलने के लिए तैयार देश की सबसे तेज गति वाली सेमी स्पीड ट्रेन ‘वन्दे भारत एक्सप्रेस’ का किराया घटा दिया गया है। बता दें कि 15 फरवरी को प्रधानमंत्री मोदी इस ट्रेन का उद्घाटन करने वाले हैं।

सोमवार (फ़रवरी 11, 2019) को वन्दे भारत एक्सप्रेस के किराए को लेकर ख़बर आई थी कि इसके चेयर कार का किराया शताब्दी एक्सप्रेस के मुकाबले 1.5 गुना और एग्जीक्यूटिव क्लास का 1.4 गुना ज़्यादा था। अब इस ट्रेन का किराया और घटा दिया गया है।

दिल्ली से वाराणसी के बीच चलने वाली इस ट्रेन का प्रस्तावित किराया चेयर कार के लिए 1850 रुपए से घटाकर 1760 रुपए और एक्जीक्यूटिव क्लास के लिए 3520 से घटाकर 3310 रुपए कर दिया गया है। यह आदेश भारतीय रेलवे ने दिया है।

वापसी में वाराणसी से दिल्ली आते वक़्त चेयर कार की दर 1795 से घटाकर 1700 रुपए और एग्जीक्यूटिव क्लास का टिकेट 3470 से कम कर 3260 रुपए तय की गई है। सेमी हाई स्पीड ट्रेन का किराया शताब्दी से थोड़ा ही ज़्यादा है।

चेयरकार और एग्जीक्यूटिव क्लास में सुबह का चाय, नाश्ता और लंच की दर दोनों श्रेणियों के लिए अलग-अलग है। दिल्ली से वाराणसी की यात्रा में एग्जीक्यूटिव क्लास के लिए यह 399 रुपए है जबकि चेयर कार के लिए यह 344 रुपए। वाराणसी से नई दिल्ली की यात्रा में यह दर घट कर 349 रुपए और 288 रुपए ही है। कम दूरी की यात्रा जैसे नई दिल्ली से कानपुर और प्रयागराज तक के लिए यह दर क्रमशः 155 रुपए और 122 रुपए है। उपरोक्त सभी दरें किराए में शामिल हैं।

भावुक चल रहे रॉबर्ट वाड्रा ने खेला विक्टिम कार्ड, इस बार बूढ़ी माँ के लिए लिखा पोस्ट

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने बीकानेर जिले में जमीन घोटाले के संबंध में मंगलवार (फरवरी 12, 2019) को जमानत पर चल रहे कॉन्ग्रेस अध्यक्ष राहुल गाँधी के बहनोई रॉबर्ट वाड्रा और उनकी माँ मौरीन वाड्रा से पूछताछ की। रॉबर्ट वाड्रा से यह पूछताछ करीब 3 घंटे तक चली, जबकि उनकी माँ मौरीन करीब डेढ़ घंटे में ही ईडी कार्यालय से बाहर आ गई थीं। वाड्रा अपनी माँ मौरीन के साथ सुबह ही ईडी के क्षेत्रीय कार्यालय पहुँचे।

ईडी कार्यालय द्वारा चल रही पूछताछ के कारण प्रियंका गाँधी के पति रॉबर्ट वाड्रा इन दिनों काफी भावुक नजर आ रहे हैं। अपनी पत्नी ‘P’ के नाम अश्रुपूरित पोस्ट लिखने के बाद ही लगातार दूसरे दिन भी उन्‍होंने फेसबुक पर बेहद इमोशनल पोस्‍ट किया है। यह पोस्‍ट उन्‍होंने प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के सामने अपनी माँ मौरीन वाड्रा के साथ पूछताछ के लिए पेश होने से पहले किया। वाड्रा ने इस पोस्‍ट में अपनी माँ के साथ एक फोटो भी पोस्‍ट की।

रॉबर्ट वाड्रा ने फेसबुक पर अपनी बुर्जुग माँ के साथ फोटो साझा करते हुए पोस्‍ट में लिखा, “मैं अपनी 75 वर्षीय माँ के साथ जयपुर में ईडी के समक्ष पेश होने के लिए आया हूँ। समझ में नहीं आ रहा कि सरकार क्‍यों एक वरिष्‍ठ नागरिक के साथ बदले की भावना से काम कर रही है। उस महिला के साथ, जिसने अपने परिवार के तीन-तीन लोगों को खोया है। कार दुर्घटना में उनकी बहन की और डाइबिटीज से उनके भाई और पिता की मौत हुई। इसके बाद से मैं अपनी माँ को अपने साथ रखता हूँ, ताकि उनकी देखभाल कर सकूँ और साथ रहकर उनका दर्द बाँट सकूँ। इसी वजह से उनकी माँ भी अभियुक्‍त बना दी गई हैं। मेरे साथ रहने के लिए माँ को भी पूछताछ के लिए बुलाया जा रहा है।”

इसके साथ ही रॉबर्ट वाड्रा ने मोदी सरकार और प्रवर्तन निदेशालय की मंशा पर सवाल उठाते हुए लिखा, “मुझसे लगातार 3 दिन दिल्‍ली में ईडी के हेडक्वार्टर में पूछताछ हो चुकी है। यदि कोई मामला बनता है तो आम चुनाव का प्रचार शुरू होने से ठीक 1 महीने पहले पूछताछ के लिए बुलाने में सरकार को 4 साल 8 महीने क्‍यों लगे? क्‍या वे सोचते हैं कि देश के लोग इसे चुनावों से जोड़कर नहीं देखते हैं?”

वाड्रा का कहना है कि वह कानून का सम्‍मान करते हैं और सच जरूर सामने आएगा। उन्‍होंने इसके आगे लिखा, “मैं कानून को मानने वाले एक अनुशासित व्यक्ति हूँ। मैं घंटों की पूछताछ का सामना करने का दम रखता हूँ क्‍योंकि मेरे पास छिपाने के लिए कुछ भी नहीं है। मैं सवाल का सम्‍मान के साथ जवाब देने के लिए तैयार हूँ। यह वक्‍त भी जल्‍द ही खत्‍म हो जाएगा, लेकिन जाते-जाते मुझे मजबूत कर जाएगा। आखिरकार सच सामने आ ही जाएगा, ईश्‍वर हमारे साथ हैं।”

क्या है मामला:

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) रॉबर्ट वाड्रा की कंपनियों द्वारा बीकानेर के महाजन फील्ड फायरिंग रेंज में जमीन खरीद मामले में पूछताछ कर रही है। बीकानेर महाजन फील्ड फायरिंग रेंज की जमीनों की खरीदी के मामले में प्रवर्तन निदेशालय द्वारा की गई जाँच में कई अनियमितताएँ सामने आई हैं। ईडी द्वारा की गई जाँच के बाद जमीनों की सौदेबाजी में दलाल रहे जयप्रकाश को भी गिरफ्तार भी किया गया था। दलाल जयप्रकाश की गिरफ्तारी और जमीनों की सौदेबाजी में सामने आई अनियमितताओं के बाद ईडी ने इन संपत्तियों को जब्त कर लिया है।

कुख्यात आतंकी नवीद जट को भगाने वाले हिज़्बुल आंतकवादी को सेना ने किया ढेर

हिजबुल के आतंकवादी हिलाल अहमद राठेर को जम्मू-कश्मीर पुलिस ने मंगलवार (फरवरी 12, 2019) को मार गिराया है। इस एन्काउंटर की जानकारी देते हुए अधिकारियों ने बताया कि दक्षिण कश्मीर के पुलवामा जिले के रत्नीपोरा में मुठभेड़ के दौरान सेना का एक जवान भी शहीद हुआ है।

इस बात की जानकारी पुलिस महानिरिक्षक स्वयं प्रकाश पाणि ने कहा है कि पिछले साल लश्कर-ए-तैयबा के ख़तरनाक आतंकवादी नवीद जट को श्रीनगर के अस्पताल से भगाने की साजिश में हिलाल मुख्य आरोपित था।

बता दें कि नवीद जट की ट्रेनिंग अजमल कसाब के साथ हुई थी। वो पाकिस्तान के मुल्तान का निवासी था, साथ ही लश्कर-ए-तैयबा का कमांडर भी था। जम्मू-कश्मीर में नवीद का खौफ बहुत ज़्यादा था, वह बेहद क्रूर था, मात्र 16 साल की उम्र में उसने कश्मीर में घुसपैठ के बाद से ही दक्षिण कश्मीर में उसने कई छोटे बच्चों के गले रेते थे।

साथ ही वो कई अन्य लोगों की हत्याओं का भी मुख्य आरोपित था। शुजरात बुखारी हत्याकांड का मास्टरमाइंड भी नवीद को बताया जाता है। 28 नवंबर 2018 को हुई मुठभेड़ में नवीद जट मारा गया।

BJP नेता मुकुल रॉय की जान को TMC कार्यकर्ताओं से है ख़तरा

लोकसभा चुनाव से पहले बंगाल में TMC कार्यकर्ताओं द्वारा लगातार भाजपा नेताओं पर हमले की ख़बर आ रही है। मंगलवार को पूर्व केंद्रीय मंत्री और भाजपा नेता मुकुल राय ने गृह मंत्री राजनाथ सिंह से मिलकर सुरक्षा देने की माँग की है। मुकुल राय ने गृहमंत्री से मिलकर यह आरोप लगाया है कि टीएमसी कार्यकर्ताओं से उनकी जान को खतरा है।

जानकारी के लिए बता दें कि चुनाव नजदीक आते ही प्रदेश में टीएमसी कार्यकर्ताओं द्वारा भाजपा समेत विभिन्न राजनीतिक दलों के कार्यकर्ताओं के पर हमले की घटनाएँ सामने आ रही हैं।

पिछले दिनों टीएमसी कार्यकर्ताओं ने मुर्शिदाबाद के बीजेपी जिला अध्यक्ष गौरी शंकर घोष और उनके समर्थकों के साथ मारपीट की। इसी तरह हुगली के आरामबाग में भी एसडीओ ऑफिस के सामने टीएमसी के लोगों ने भाजपा कार्यकर्ताओं के साथ मारपीट की। इसी तरह पश्चिम बंगाल के टीएमसी कार्यकर्ताओं ने वीरभूम जिले के भाजपा इंचार्ज के साथ जिला न्यायाधीश दफ्तर में मारपीट की।

जब प्रदेश भर में टीएमसी कार्यकर्ताओं द्वारा गुंडागर्दी की घटनाओं को अंजाम दिया जा रहा है, ऐसे समय में मुकुल राय का डरना जायज़ ही है। आपको बता दें कि मुकुल राय भाजपा में आने से पहले टीएमसी के ही नेता थे।

ममता के हिटलरशाही व्यवहार से तंग आकर भाजपा में शामिल होने के बाद मुकुल राय टीएमसी नेताओं की नजर में आ गए। इसके बाद मुकुल राय को न सिर्फ टीएमसी के लोगों द्वारा धमकी मिल रही हैं बल्कि हत्या जैसे संगीन मामले में भी मुकुल राय को आरोपित भी बनाया गया है।

जम्मू-कश्मीर में लद्दाख को अलग डिवीज़न बनाने के क्या मायने हैं

सन 1947-48 में विश्व का सबसे बड़ा भूराजनैतिक परिवर्तन हो रहा था और इस परिवर्तन की धुरी था भारत का जम्मू कश्मीर राज्य। नवंबर 1948 में पाकिस्तानी फ़ौज की अगुआई में कबाईलियों ने ज़ोजिला दर्रे पर कब्जा कर लिया था जिसके कारण श्रीनगर से कारगिल द्रास होते हुए लेह तक जाने का मार्ग कट गया था। तब भारतीय सेना ने 11,500 फ़ीट की ऊँचाई पर टैंकों की तैनाती की और (तत्कालीन) मेजर जनरल थिमैय्या के नेतृत्व में भीषण युद्ध हुआ जिसे ‘बैटल ऑफ़ ज़ोजिला’ कहा जाता है।  

लगभग एक महीने तक चले इस युद्ध को जीतने के बाद ज़ोजिला दर्रे से पाकिस्तानियों को मार भगाया गया और लद्दाख पाकिस्तान के कब्जे में जाने से बच गया। ज़ोजिला की लड़ाई में केवल भारतीय सेना ने ही बलिदान नहीं दिया था अपितु लद्दाख के बौद्ध लामा 19वें कुशोक बकुला रिनपोछे ने युद्ध के समय महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। पाकिस्तानी आक्रमण के समय लद्दाखी जनता घबराई हुई कुशोक बकुला की ओर देख रही थी क्योंकि उसी समय से शेख अब्दुल्ला की मौकापरस्त राजनीति में लद्दाख कहीं नहीं था।

भारतीय सेना को ज़ोजिला की लड़ाई में स्थानीय युवकों की अत्यंत आवश्यकता थी क्योंकि वे लद्दाख के पहाड़ों के दुर्गम रास्तों से परिचित थे। कुशोक बकुला ऐसे समय आगे आए और उन्होंने लद्दाख के युवाओं का एक संगठन बनाया जो नुब्रा गार्ड्स के नाम से प्रसिद्ध हुआ। नुब्रा गार्ड्स के सैनिकों ने पाकिस्तानी तोपें तबाह करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। उन्होंने पाकिस्तानियों को नुब्रा घाटी में आगे बढ़ने से रोके रखा।

इस प्रकार लद्दाख भारत का अंग बना रहा। यही नहीं सन 1962 के युद्ध में कुशोक बकुला ने बौद्ध मठों को भारतीय सेना के लिए अस्पताल बनाने की मंज़ूरी दे दी थी। जब कभी कश्मीर का एक वर्ग अलगाववाद और जनमत संग्रह की बात करता तब कुशोक बकुला उसका विरोध करते और कहते कि लद्दाख पाकिस्तान के साथ कभी नहीं जाएगा।  

उपरोक्त वर्णन से स्पष्ट है कि लद्दाख क्षेत्र का भारत से भौगोलिक ही नहीं सांस्कृतिक जुड़ाव भी गहरा है। किंतु जम्मू कश्मीर राज्य की पूरी राजनीति सदैव कश्मीर केंद्रित रही है जिसका ख़ामियाज़ा लद्दाख को भुगतना पड़ा है। यह स्थिति आज से नहीं बल्कि आधुनिक लद्दाख के निर्माता कहे जाने वाले कुशोक बकुला के समय से है। वास्तव में लद्दाख का क्षेत्रफल कश्मीर से अधिक है किंतु वहाँ की जनसंख्या बहुत कम है। लद्दाख की भौगोलिक स्थिति शेष जम्मू कश्मीर राज्य से भिन्न और अनोखी है इसीलिए उसे अलग केंद्र शासित प्रदेश बनाने की मांग लंबे समय से चल रही है।

जनसंख्या के आधार पर पूरे जम्मू कश्मीर राज्य को दो डिवीज़न में बाँटा गया था- जम्मू और कश्मीर। पहले लद्दाख के दो ज़िलों- कारगिल और लेह- का प्रशासन भी कश्मीर डिवीज़न द्वारा ही चलाया जाता था। श्रीनगर में बैठे डिविज़नल कमिश्नर मनमानी करते थे और लद्दाख की समस्याओं पर ध्यान नहीं देते थे। सन 2010 में जब बादल फटा था और लद्दाख में बाढ़ आ गई थी तब राहत सामग्री के लिए लेह और कारगिल में बैठे दोनों डिप्टी कमिश्नर तब तक इंतज़ार करते रहे जब तक श्रीनगर से डिविज़नल कमिश्नर का आदेश नहीं आ गया।

दरअसल डिवीज़नल कमिश्नर के पास ही सारे अधिकार होते हैं और जब तक वहाँ से फंड रिलीज़ नहीं होता तब तक डिवीज़न में कोई विकास या राहत कार्य नहीं हो सकता। लद्दाख की भौगोलिक स्थिति ऐसी है कि छह महीने वहाँ बर्फ गिरती है जिसके कारण बाहरी दुनिया से सम्पर्क टूट जाता है। ऐसे में किसी भी प्रशासनिक आदेश के लिए लंबी प्रतीक्षा करनी पड़ती है।

लद्दाख में रोजगार के अवसर कम हैं क्योंकि यह क्षेत्र शेष कश्मीर से अधिक पिछड़ा हुआ है। यहाँ फंड की कमी है जिसके कारण विकास कार्य बाधित होते हैं। विकास परियोजनाओं की चाभी श्रीनगर में बैठे डिविज़नल कमिश्नर के पास होती है जो कश्मीर घाटी की अलगाववादी राजनीति से प्रभावित होती है।

अब जब लद्दाख को एक अलग डिवीज़न बना दिया गया है तब वहाँ कश्मीर से अलग एक डिविज़नल कमिश्नर होगा, प्रत्येक विभाग का अलग डायरेक्टरेट होगा तथा वरीयता और अन्य मापदंडों के आधार पर प्रोन्नति में बाधा नहीं आएगी। सबसे बड़ी बात कि अब लद्दाख के लोगों को किसी भी प्रशासनिक कार्य के लिए श्रीनगर का मुँह नहीं देखना होगा। पहले श्रीनगर में बैठे अधिकारी अपने हिसाब से लद्दाख का प्रशासनिक कामकाज देखते थे और लद्दाख की समस्याओं की अनदेखी करते थे।  

राज्यपाल की मुहर के बाद अब लद्दाख डिविज़न का प्रशासनिक और रेवेन्यू मुख्यालय लेह में होगा जिसके बनने की तैयारी शुरू कर दी गई हैं। अब लेह में एक अलग डिविज़नल कमिश्नर और इंस्पेक्टर जनरल ऑफ पुलिस का पद और कार्यालय होंगे। साथ ही प्रिंसिपल सेक्रेटरी के निगरानी में एक टीम बनायी गई  है, जो अन्य प्रशासनिक विभागों के डिविज़नल ऑफिस, उसके अधिकारियों और स्टाफ की नियुक्ति और लागू करने का काम देखेंगे। इससे न सिर्फ लोगों को सुविधा होगी, बल्कि क्षेत्रीय विकास में बढोत्तरी होगी। मुख्यालय खुलने से आसपास बिज़नेस की संभावनाएं भी बढ़ेंगी।

राज्यपाल के लद्दाख को अलग डिवीज़न बनाने के निर्णय के विरुद्ध कश्मीर के नेताओं की बिलबिलाहट भी दिखने लगी है। एक तरफ तो उनका वर्चस्व टूटा है दूसरी तरफ वे इससे खुलकर असहमति भी नहीं जता पा रहे हैं। आनन-फानन में नेताओं और पत्रकारों ने ट्वीट कर बेमन बधाई तो दी लेकिन असली भड़ास इन “किन्तु-परन्तु” और “but” जैसे शब्दों के साथ निकालनी शुरू कर दी गई हैं। अब इन्हें चेनाब और पीर पंजाल की याद भी आने लगी है।

JNU प्रोफ़ेसर ने हिंदी को ‘सांप्रदायिक भाषा’ साबित करने पर शोध करने को कहा, रिसर्च स्कॉलर पहुँचा हाई कोर्ट

विवादों के कारण अक्सर चर्चा में रहने वाले शिक्षण संस्थान JNU में नया विवाद सामने आया है। 35 वर्षीय रिसर्च स्कॉलर आशुतोष कुमार रॉय ने दिल्ली हाई कोर्ट की मदद ली है। रिसर्च स्कॉलर ने आरोप लगाया है कि उस पर दबाव बनाया जा रहा है कि वह हिंदी को सांप्रदायिक भाषा बताते हुए उस पर रिसर्च करे। मामले की सुनवाई कर रहे जस्टिस सी हरी शंकर ने विश्वविद्यालय और सह-प्राध्यापक को नोटिस जारी करते हुए इस पर 23 अप्रैल तक जवाब माँगा है।

रिपोर्ट्स के अनुसार, JNU में इतिहास विषय से पीएचडी कर रहे आशुतोष कुमार रॉय ने अपने वकील के दिब्यांशु पांडे के जरिए आरोप लगाया है कि उनसे जबरन उनका विषय बदलकर हिंदी को सांप्रदायिक बताते हुए रिसर्च करने का दबाव बनाया गया है। रॉय ने संविधान के तहत मौलिक अधिकारों के हनन की दलील देते हुए विश्वविद्यालय से 2019 के शीतकालीन सेमेस्टर के लिए पीएचडी सुपरवाइजर की माँग की है।

दायर की गई याचिका में विश्वविद्यालय द्वारा रजिस्ट्रेशन के लिए मना करने और हिंदी पब्लिक स्फियर(1870-1970) और राष्ट्रवाद पर रिसर्च कर बहस के जरिए हिंदी की छवि खराब करने को लेकर जाँच की माँग की गई है।

याचिका में कहा गया है कि रॉय दिसंबर 2017 से लेकर जून 2018 तक तीन बार नए सुपरवाइजर की नियुक्ति की अपील कर चुके हैं, लेकिन विश्वविद्यालय की तरफ से कोई सकारात्मक जवाब नहीं मिला। रॉय ने खुद अध्ययन करते हुए बिना किसी मदद के जुलाई 2018 में शोध प्रारूप दिया।

रॉय के इस शोध प्रारूप को जब कमेटी ऑफ एडवांस स्टडी एंड रिसर्च में प्रस्तुत किया गया तो प्राध्यापक ने शोध प्रारूप अपने पास रख लिया और कहा, “यहाँ हिंदी के पक्ष में रिसर्च करने के लिए कोई जगह नहीं है, बेहतर होगा आप दिल्ली विश्वविद्यालय चले जाइए और वहाँ जाकर भारतेंदु हरिश्चंद्र का गुणगान कीजिए।”

याचिका में कार्यवाहक सुपरवाइजर और अन्य लोगों पर आरोप है कि उन्होंने रॉय पर दबाव बनाया कि वह हिंदी की छवि खराब करने को लेकर रिसर्च करे, साथ ही हिंदी के दिग्गजों के खिलाफ भी ऐसा ही करे। इतना ही नहीं, रॉय को आगे की पीएचडी भी करने से रोका जा रहा है। याचिकाकर्ता ने इसे अपने मौलिक अधिकारों का हनन बताते हुए कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है।

वर्ष 2012 में JNU आए रॉय ने पुराने रिसर्च सुपरवाइजर के इस्तीफे के बाद बिना देरी के नए रिसर्च सुपरवाइजर की नियुक्ति की माँग की है। उनका कहना है कि विश्वविद्यालय की तरफ से नया सुपरवाइजर ना मिलने के चलते उनकी पढ़ाई में भी रुकावट आ रही है। विश्वविद्यालय की तरफ से उनकी रिसर्च के लिए रिसर्च एडवाइजरी कमेटी का भी गठन नहीं किया जा रहा है।