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बीवी करती थी निगरानी, मौलवी करता था बलात्कार… मस्जिद में दीनी तालीम के लिए जाने वाली बच्ची का अश्लील वीडियो भी बनाया, 2 महीने से हो रहा था यौन शोषण

उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले में एक मस्जिद के अंदर 10 साल की नाबालिग बच्ची से रेप किए जाने का मामला सामने आया है। बलात्कार का आरोप मस्जिद के मौलवी रिज़वान पर लगा है। पीड़िता रिज़वान से मज़हबी व दीनी तालीम लेने जाया करती थी। आरोप है कि रिज़वान की बीवी रिज़वाना भी इस अपराध में अपने शौहर का साथ देती थी। मौलवी ने नाबालिग छात्रा का अश्लील वीडियो भी बना लिया था जिसे वो वायरल करने की धमकी दे कर ब्लैकमेल भी कर रहा था। रविवार (16 जून, 2024) को मामले की शिकायत पुलिस में दर्ज करवाई गई है। मौलवी और उसकी बीवी को गिरफ्तार कर लिया गया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, घटना मेरठ के लोहियानगर थाना क्षेत्र की है। यहाँ रविवार को 10 वर्षीया बच्ची के परिजनों ने शिकायत दर्ज करवाई है। उन्होंने बताया कि उनके घर के पास ही एक मस्जिद है। इस मस्जिद में बने एक कमरे में मुज़फ्फरनगर जिले का मूल निवासी मौलाना रिज़वान अपनी बीवी रिज़वाना के साथ रहता है। वह आसपास के बच्चों को दीनी तालीम देता है जिसमें नाबालिग पीड़िता भी शामिल है। लगभग 2 महीने पहले रिज़वान ने नाबालिग लड़की से रेप किया।

आरोप है कि इस दौरान उसने पीड़िता की अश्लील वीडियो भी बना डाली। वीडियो बनाने में मौलवी की बीवी रिज़वाना ने अपने शौहर का साथ दिया। इसके बाद मौलवी पीड़िता से लगातार 2 महीने तक रेप करता रहा। विरोध करने पर उसका अश्लील वीडियो वायरल करने की भी धमकी दी जाती थी। काफी समय की ख़ामोशी के बाद आखिरकार शनिवार (15 जून, 2024) को पीड़िता ने अपने परिजनों को सारी बात बता दी। मौलवी को रंगे हाथों पकड़ने के लिए परिजनों ने रविवार को भी अपनी बच्ची को मस्जिद में भेजा और पीछे से खुद भी चुपके से पहुँच गए।

पीड़िता को देख कर मौलवी उसे अपने कमरे में ले गया। इस दौरान उसकी बीवी बाहर से निगरानी करने लगी। तभी लड़की के परिजन अंदर पहुँच गए। उन्होंने रिज़वाना से अपनी बेटी के बारे में पूछा तो वो कुछ जवाब नहीं दे पाई। लड़की के परिजनों का शोर सुन कर आसपास के लोग जमा हो गए। सभी ने जबरन रिज़वान का कमरा खुलवाया तो अंदर वह आपत्तिजनक हालत में पकड़ा गया। लोगों ने मौलवी की धुनाई कर दी। मामले की जानकारी पुलिस को हुई तो वो भी मौके पर पहुँची।

पीड़िता के परिजनों की शिकायत पर पुलिस ने मौलवी रिज़वान और उसकी बीवी रिज़वाना के खिलाफ नामजद FIR दर्ज कर ली। इन दोनों पर रेप और धमकी दी धाराओं के साथ पॉक्सो एक्ट के तहत भी कार्रवाई की गई है। मियाँ-बीवी के मोबाइल और लैपटॉप को भी जब्त कर लिया गया है। डिप्टी एसपी आशुतोष ने मीडिया से बताया कि मामले की जाँच व अन्य जरूरी कानूनी कार्रवाई की जा रही है।

रोज सुरंग से भारत में घुसते हैं 10 रोहिंग्या मुस्लिम, भाषा-हुलिया बदलने की ट्रेनिंग दे 14 राज्यों में बसाए जा रहे: रिपोर्ट में बताया- त्रिपुरा से चल रहा गिरोह

भारत घुसपैठियों की समस्या से जूझ रहा है, खासकर के बांग्लादेश-म्यांमार से आने वाले रोहिंग्या घुसपैठियों ने देश की नाक में दम कर रखा है। उन्हें हटाने के लिए जब भारत सरकार NRC जैसा कानून लेकर आती है तो विपक्षी दल इन इस्लामी घुसपैठियों के समर्थन में उठ खड़े होते हैं। एक अनुमान है कि भारत में 40,000 से अधिक रोहिंग्या घुसपैठिए बैठे हुए हैं। वहीं एक और अनुमान है कि प्रति महीने 200 से भी अधिक रोहिंग्या मुस्लिम घुसपैठियों को भारत में घुसाया जा रहा है।

देश के एक दर्जन से भी अधिक राज्यों में इन रोहिंग्या मुस्लिम घुसपैठियों को बसाया जा रहा है। एक अंतरराष्ट्रीय मानव तस्करी गिरोह भी इसमें लगा हुआ है। NIA की टीम ने हाल ही में इसके मास्टरमाइंड जलील मियाँ को गिरफ्तार किया है। अधिकतर रोहिंग्या म्यांमार के रखाइन प्रान्त से आते हैं। 1982 में ही वहाँ इन्हें नागरिकता से वंचित कर दिया गया था, 2015 के बाद इनमें से 9 लाख बांग्लादेश-भारत समेत कई देशों में भाग चुके हैं। 1 लाख का इनामी जलील मियाँ गिरोह के मुखिया जिबोन रूद्र पाल उर्फ़ सुमन का साथी है।

वो पहले ही NIA की शिकंजे में आ चुका था। वहीं इनके अन्य साथी जज मियाँ और शंतो अब तक फरार हैं। NIA इस गिरोह के 29 लोगों को गिरफ्तार कर चुका है। नवंबर 2023 में भी जलील मियाँ को गिरफ्तार करने की कोशिश की गई थी, लेकिन तब वह फरार हो गया था। रोहिंग्या मुस्लिमों को 10-20 लाख रुपए (14-28 लाख बांग्लादेशी टका) के पैकेज के तहत भारत में फर्जी दस्तावेज देकर बसाया जा रहा है। केंद्र सरकार इन्हें अवैध अप्रवासी बता चुकी है, साथ ही इन्हें राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा तक घोषित कर चुकी है।

हालाँकि, UN इन्हें शरणार्थी बताता है। रोहिंग्या घुसपैठियों को भारत में बसाने के लिए हिंदी-असमी जैसी भाषाओं का भी प्रशिक्षण दिया जाता है। बोलने के लहजे के कारण वो पकड़े न जाएँ, इसीलिए ऐसा किया जाता है। ये गिरोह प्रतिदिन 5-10 रोहिंग्या मुस्लिमों को भारत में घुसाता था। पहचान छिपाने के लिए घुसपैठियों का हुलिया तक बदल दिया जाता है। दिल्ली में ऐसे कई शिविर हैं, जहाँ रोहिंग्या रह रहे हैं। सिर्फ 2 वर्ष में भारत में रोहिंग्या मुस्लिमों की जनसंख्या दोगुनी हो गई है।

केंद्र सरकार कह चुकी है कि देश में रोहिंग्या शरणार्थियों के लिए किसी कैम्प की व्यवस्था नहीं है। मुस्लिम बहुल जम्मू कश्मीर में इनकी संख्या 10,000 बताई जाती है। कई अपराधों में भी ये रोहिंग्या शामिल रहे हैं। शाहन बाग़ और जफराबाद में CAA के खिलाफ हुए आंदोलन में इन्होंने बड़ी संख्या में हिस्सा लिया था। भारत पहले से ही दुनिया की सबसे अधिक जनसंख्या वाला देश भी है, ऊपर से आतंकवादी लगातार हमले की फिराक में रहते हैं। ऐसे में रोहिंग्या देश के लिए खतरे से कम नहीं।

बांग्लादेश से त्रिपुरा 856 किलोमीटर लंबी सीमा साझा करता है। करीब 16 महीने में अकेले त्रिपुरा से 1018 घुसपैठिए पकड़े गए हैं। 2023 में त्रिपुरा से पकड़े गए 337 बांग्लादेशियों में 93 औरतें और 24 बच्चे थे। साल 2023 में BSF ने 744 घुसपैठिए पकड़े थे। 2022 में 369 घुसपैठिए धराए थे। इसी तरह 2021 में 208 घुसपैठिए दबोचे गए थे, जिनमें 93 बांग्लादेशी थे। सुदूर दक्षिण में स्थित चेन्नई तक इन घुसपैठियों को बसाया जा रहा है।

सिग्नल पर नहीं रुकी मालगाड़ी, एक-दूसरे पर चढ़ गई ट्रेनें: कंचनजंगा एक्सप्रेस की बोगियों के उड़े परखच्चे, मृतकों में लोको पायलट और गार्ड भी

पश्चिम बंगाल के न्यूजलपाईगुड़ी में भीषण रेल हादसा हुआ है। यहाँ सोमवार (17 जून, 2024) रंगपानी स्टेशन के समीप खड़ी कंचनजंगा एक्सप्रेस ट्रेन में एक मालगाड़ी पीछे से टकरा गई। इस हादसे में 15 लोगों की मौत और 60 लोगों के घायल होने की सूचना है। मालगाड़ी के लोको पायलट और एक्सप्रेस के गार्ड की मौत भी इस हादसे में हो गई। घटनास्थल पर राहत बचाव का काम चल रहा है। हादसा का प्रारम्भिक कारण सिग्नल का अनदेखा किया जाना बताया गया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, यह हादसा सुबह 9 बजे हुआ जब सियालदह से अगरतला जाने वाले कंचनजंगा एक्सप्रेस (13174) रंगापानी स्टेशन के नजदीक खड़ी थी। इसी दौरान इसमें पीछे से आ रही एक मालगाड़ी ने टक्कर मार दी। इसके कारण एक्सप्रेस के तीन डिब्बे पटरी से उतर गए और भारी रूप से क्षतिग्रस्त हो गए।

हादसे के बाद एक डिब्बा मालगाड़ी के इंजन के ऊपर चढ़ गया। हादसे के बाद मौके पर राहत बचाव टीमें रवाना की गईं। हादसा इतना भयंकर था कि मालगाड़ी के इंजन में बैठे लोको पायलट की मौके पर ही दब कर मृत्यु हो गई। लोको पायलट के साथ एक्सप्रेस ट्रेन के गार्ड की भी मौत हो गई।

हादसे में अभी तक 15 लोगों की मौत और 60 लोगों के घायल होने की बात सामने आई है। घायलों को अस्पताल में भर्ती करवाया गया है। रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने घटना के बाद राहत बचाव की जानकारी दी है और खुद घटनास्थल पर रवाना हो गए हैं।

रेल मंत्री ने लिखा, “NFR जोन में दुर्भाग्यपूर्ण दुर्घटना हुई है। बचाव कार्य युद्ध स्तर पर जारी है। रेलवे, NDRF और SDRF मिलकर काम कर रहे हैं। घायलों को अस्पताल पहुँचाया जा रहा है। वरिष्ठ अधिकारी घटनास्थल पर पहुँच गए हैं।” उन्होंने इस घटना में मुआवजे का भी ऐलान किया है। हादसे में मरने वालों के आश्रितों को ₹10 लाख, गंभीर घायलों को ₹2.5 लाख जबकि कम घायलों को ₹50,000 का मुआवजा दिया जाएगा।

रेलवे बोर्ड की चेयरमैन जया वर्मा सिन्हा ने भी इस मामले में जानकारी दी है। उन्होंने कहा है कि प्रारम्भिक जाँच में मानव भूल का मामला सामने आया है। इस बात की संभावना है कि मालगाड़ी के लोको पायलट ने सिग्नल को अनदेखा कर दिया और इससे दोनों ट्रेनों की भिडंत हो गई। उन्होंने कहा कि आगे जाँच के बाद ही पूरी बात सामने आएगी।

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने भी इस घटना को लेकर दुख जताया है। उन्होंने कहा, “पश्चिम बंगाल के दार्जिलिंग में हुए रेल हादसे में लोगों की मौत की खबर बेहद दुखद है। मेरी संवेदनाएँ और प्रार्थनाएँ शोक संतप्त परिवारों के साथ हैं। मैं घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने और राहत एवं बचाव कार्यों की सफलता की कामना करती हूँ।”

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भी इस घटना को लेकर दुख जताया है। उन्होंने कहा, “पश्चिम बंगाल में रेल दुर्घटना दुखद है। जिन लोगों ने अपने प्रियजनों को खो दिया है, उनके प्रति संवेदना। मैं प्रार्थना करता हूँ कि घायल जल्द से जल्द ठीक हो जाएँ। अधिकारियों से बात करके स्थिति का जायजा लिया है। प्रभावितों की सहायता के लिए बचाव अभियान जारी है। रेल मंत्री श्री अश्विनी वैष्णव जी भी दुर्घटना स्थल पर जा रहे हैं।”

इस रेल दुर्घटना में घायल और मरने वालों की संख्या बढ़ने की आशंका है। घटना के मूल कारण की बात के लिए अब रेलवे जाँच करेगा।

जागरण समूह के अखबारों में झूठ फैलाने की प्रतिस्पर्धा, अब दैनिक जागरण ने मोहन भागवत-जेपी नड्डा पर छापी फर्जी खबर: EVM पर फेक न्यूज पकड़ाते पकड़ा गया था मिड-डे

ऐसा लगता है जागरण समूह के अखबारों में झूठी खबर छापने की प्रतिस्पर्धा है। पहले अंग्रेजी के मिड-डे अखबार ने ईवीएम पर झूठ फैलाया। अब हिंदी समाचार पत्र भी आरएसएस संघ प्रमुख पर फर्जी न्यूज देते पकड़ा गया है।

अपनी रिपोर्ट में दैनिक जागरण ने सरसंघचालक मोहन भागवत के नाम पर बयान छापा और जेपी नड्डा के संघ पर दिए बयान को व्यक्तिगत विचार कहा है। साथ ही उन्होंने कहा है कि देश में हर नागरिक को अपने विचार खुलकर रखने की स्वतंत्रता है। उनके बयान से संगठन का कोई सरोकार नहीं है। ऐसे में उनके बयान को पार्टी व संगठन की नीतियों से जोड़कर देखने की आवश्यकता नहीं है।

अब इसी खबर का अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख सुनील आंबेकर ने खंडन किया है। उन्होंने कहा है, “दैनिक जागरण में प्रकाशित यह समाचार पूर्णतः निराधार है। पूजनीय सरसंघचालक जी ने गोरखपुर में कोई सार्वजनिक वक्तव्य नहीं दिया है। वे वर्तमान में संघ के अंतर्गत प्रशिक्षण कार्यक्रम हेतु देशव्यापी प्रवास पर हैं।”

सुनील आंबेकर के ट्वीट के बाद जागरण ने अपने खबर में उनका बयान जोड़ा… बाकी कंटेंट वैसा ही रहने दिया। इसमें दावा किया गया कि संघ प्रमुख ने ये सारी बातें गोरखपुर में कहीं। इस दौरान उन्होंने धर्मांतरण, लव जिहाद पर बात रखी। साथ ही फेक न्यूज के खिलाफ सचेत रहने को भी कहा।

जेपी नड्डा ने क्या कहा था और क्या फैलाया गया

18 मई 2024 को प्रकाशित ‘द इंडियन एक्सप्रेस’ के इंटरव्यू बीजेपी राष्ट्रीय अध्यक्ष से पूछा गया था, “बीजेपी पिछले 10 वर्षों से सत्ता में है, और आरएसएस आपकी वैचारिक माता-पिता है। अब आप मजबूत हैं और देशभर में आपका व्यापक नेटवर्क है। बीजेपी-आरएसएस के बीच अब स्थिति क्या है? हमें सरकार में आरएसएस की अधिक उपस्थिति नहीं दिखती, और न ही यह नीतियों में नजर आती है, जैसा कि अटल बिहारी वाजपेयी सरकार में देखा गया था।”

इस पर जेपी नड्डा ने जवाब देते हुए कहा, “देखिए, हमने भी प्रगति की है। हर किसी का अपना-अपना काम है। आरएसएस एक सांस्कृतिक संगठन है और हम एक राजनीतिक संगठन हैं। शुरुआत में हम अक्षम होंगे, थोड़े कम होंगे, आरएसएस की जरूरत पड़ती थी… आज हम बढ़ गए हैं, सक्षम हैं… तो बीजेपी खुद को चलाती है। यही अंतर है।” (बयान में कहीं भी जेपी नड्डा ने ये नहीं कहा है कि उन्हें आरएसएस की जरूरत नहीं है।”

मिड-डे का ईवीएम पर झूठ

बता दें कि इससे पहले जागरण समूह के मिड डे ने ईवीएम पर झूठ छापा था। खबर का मूल था, “ईवीएम को फोन पर आए ओटीपी से अनलॉक किया जा सकता है।” हालाँकि बाद में रिटर्निंग ऑफिसर के बयान के बाद इस खबर को त्रुटि बताकर हटा दिया गया, लेकिन संस्थान ने फर्जी जानकारी फैलाने पर माफी नहीं माँगी जबकि इस रिपोर्ट के आधार पर विपक्षी नेता झूठ फैलाना शुरू कर चुके थे, लोकतंत्र पर सवाल उठाया जाने लगा था।

‘चाय-नाश्ता कर वापस जाएँ यादव-मुस्लिम, उनका काम नहीं करूँगा’: जानिए बिहार के एक सांसद ने MY से क्यों की तौबा

बिहार की सीतामढ़ी सीट से जेडीयू सांसद देवेश चन्द्र ठाकुर ने कहा है कि वह यादवों और मुस्लिम लोगों को का कोई काम नहीं करवाएँगे। उन्होंने यह बयान हालिया लोकसभा चुनाव में हुई वोटिंग को लेकर दिया है और आरोप लगाया है कि इन दोनों समाज ने उन्हें वोट नहीं दिया जबकि वह पूर्व में इन्हें फायदा पहुँचाते रहे हैं। देवेश ठाकुर का यह वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल है।

वायरल वीडियो में देवेश चन्द्र ठाकुर ने कहा, “कल ही सुबह में मुस्लिम समाज के एक व्यक्ति आए, उनका दुर्भाग्य था कि वह पहली बार मेरे पास आए। उन्होंने मुझे काम बताया। मैंने उनसे कहा कि अभी हाल ही में वोटिंग हुई है जिसमें आपने निश्चित रूप से लालटेन को वोट दिया होगा। उन्होंने यह बात स्वीकारी।”

देवेश चन्द्र ठाकुर ने इसके बाद कहा, “लालटेन को वोट देने के बाद भी आप मेरे पास हिम्मत करके आए हैं। किस विचार से आए हैं। मैं किसी को छोड़ता नहीं हूँ। आप पहली बार आए हैं इसलिए चाय मँगाता हूँ, मिठाई मँगाता हूँ और उसके बाद आपको विदा कर दूँगा, काम नहीं कर पाऊँगा।”

देवेश चन्द्र ठाकुर ने कहा कि उन्हें मुस्लिम वोट इसलिए नहीं मिला क्योंकि यह वोट पीएम नरेन्द्र मोदी को जाता। उन्होंने कहा कि ऐसे में वह उस व्यक्ति का काम करवाते समय उसमें लालू यादव की पार्टी का चुनाव चिन्ह लालटेन क्यों ना देखें।

पहली बार सांसद बने देवेश ठाकुर ने इस बात को लेकर दुख भी जताया कि उन्हें पहली बार ऐसा करना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि पिछले 20 वर्षों में उन्होंने हर व्यक्ति का काम करवाया है और व्यक्तिगत कामों के सबसे बड़े लाभार्थी मुस्लिम और यादव समाज रहे हैं।

उन्होंने यादवों और मुस्लिमों से अपील की कि वह उनसे मिलने आएँ लेकिन किसी काम को लेकर सिफारिश ना करें। देवेश ठाकुर ने कहा कि उन्हें अगर इस आधार पर कोई वोट ना दे कि उन्होंने कम काम किया है या किसी को कोई कष्ट पहुँचाया है तो ठीक भी है लेकिन सिर्फ इसलिए कि वह भाजपा से जुड़े हैं, इस आधार पर वोट ना देना सही नहीं है।

देवेश चन्द्र ठाकुर 2024 लोकसभा चुनाव में बिहार की सीतामढ़ी सीट से जेडीयू से सांसद निर्वाचित हुए हैं। उन्होंने राजद के अर्जुन राय को 51,356 वोट के अंतर से हराया है। उन्हें इस चुनाव में 5.15 लाख जबकि अर्जुन राय को 4.64 लाख वोट मिले हैं।

सांसद बनने तक देवेश चन्द्र ठाकुर बिहार विधान परिषद के अध्यक्ष थे। वह बिहार सरकार में कैबिनेट मंत्री भी रहे हैं। उन्हें जेडीयू ने इस बार सुनील कुमार पिंटू की जगह इस सीट से मौका दिया था। अब उनका यह बयान सामने आया है।

थाली में चावल और पनीर देख स्वरा भास्कर को मची चुल, कहा- बकरीद पर मत दिखाओ यह सदाचार: शाकाहारियों को बताया ‘आत्ममुग्ध’

बॉलीवुड अभिनेत्री स्वरा भास्कर लंबे समय बाद फिर चर्चा में आई हैं। कारण है बकरीद के दिन किया गया उनका ट्वीट। अपने ट्वीट में उन्होंने शाकाहारियों पर सवाल खड़े किए। साथ ही वेजिटेरियन खाने वाले को आराम से रहने को कहा क्योंकि बकरीद है। उन्होंने लोगों के वेजीटेरियन होने पर सवाल उठाए और एक्स यूजर नलिनी उनागर नाम की फूड ब्लॉगर की फोटो पर कमेंट करके अपनी भड़ास निकाली।

दरअसल, नलिनी ने एक शाकाहारी खाने की थाली को तस्वीर शेयर करते हुए लिखा था, “मुझे वेजीटेरियन होनेपर गर्व है। मेरी प्लेट आँसूओं, क्रूरता, पाप से मुक्त है।”

इसी पर कमेंट करते हुए स्वरा भास्कर ने लिखा, “सच कहूँ तो…मुझे वेजीटेरियन लोगों की आत्ममुग्धता समझ नहीं आती। आप लोगों की सारी डाइट गाय के नन्हें बछड़ों को उनकी माँ के दूध से वंचित करके, गायों को जबरन गर्भवती करके, फिर उन्हें उनके बच्चों से अलग कर देने और उनका दूध चुराने से बनती है। इसके अलावा आप जड़ वाली सब्जियाँ खाते हैं, इससे पूरा पौधा ही खत्म हो जाता है! बेहतर होगा आप लोग रिलैक्स करें क्योंकि आज बकरीद है!”

स्वरा भास्कर अपने इस ट्वीट में दिए तर्क के जरिए ये बताना चाहती थीं कि नॉनवेज खाना कितना सही होता है और शाकाहारी लोग बेवजह ही अपनी डाइट पर गर्व करते हैं। उनके इस ट्वीट के बाद तमाम तरह की प्रतिक्रियाएँ आना शुरू हो गईं। लोगों ने कहना शुरू किया कि स्वरा भास्कर को उड़ता तीर लेने की आदत हो गई है।

लोगों ने उनसे पूछना शुरू कर दिया तो क्या स्वरा भास्कर ये कहना चाहती हैं कि गायों का दूध लेना गलत है, लेकिन गाय को काट लेना और फिर माँस को पकाकर खाना सही है। कुछ लोग ये भी बता रहे हैं कि गाय से दूध लेने के लिए उसे काटने की जरूरत नहीं पड़ती, लेकिन मांसाहारियों को भोजन के लिए क्या करना पड़ता है ये सब जानते हैं इसलिए स्वरा ज्यादा ज्ञान न दें।

गौरतलब है कि स्वरा भास्कर ने पिछले साल फहाद अहमद से शादी की थी। कुछ समय बाद दोनों की बेटी हुई। हाल में स्वरा ने खुलासा किया था कि उन्हें उनके ओपिनियनों की वजह से काम मिलना बंद हो गया है। वहीं उनके शौहर भी उन्हें समझाते हैं कि स्वरा को फालतू के ओपिनियन देने के चक्कर में नहीं पड़ना चाहिए बल्कि फिल्मों में बतौर एक्ट्रेस काम करने पर ध्यान देना चाहिए।

‘आखिरकार पोप को मिला भगवान से मिलने का मौका’: ईसाइयों का मजाक उड़ाने के बाद केरल कॉन्ग्रेस ने माँगी माफी, PM मोदी से मुलाकात पर दिखाई थी घृणा

कॉन्ग्रेस ने एक्स (पहले ट्विटर) पर प्रधानमन्त्री नरेन्द्र मोदी और ईसाइयों के सबसे बड़े धर्मगुरु पोप को लेकर की गई एक पोस्ट को लेकर माफी माँगी है। इस पोस्ट में कॉन्ग्रेस की केरल शाखा ने पीएम मोदी को भगवान बताते हुए उनका और पोप का मजाक उड़ाया था। केरल कॉन्ग्रेस ने इसको लेकर 16 जून, 2024 को माफी माँग ली है।

केरल कॉन्ग्रेस ने इस विषय में लिखा, “इस देश की जनता जानती है कि किसी भी धर्म, धर्मगुरुओं और मूर्ति का अपमान करना भारतीय राष्ट्रीय कॉन्ग्रेस की परंपरा नहीं है। कॉन्ग्रेस एक ऐसा आंदोलन है जो सभी धर्मों और आस्थाओं को एक साथ जोड़ती है और लोगों को एक सौहार्द के माहौल में आगे बढ़ाती है।”

कॉन्ग्रेस ने कहा कि उसका कोई भी कार्यकर्ता पोप की बेइज्जती करने की बात सोच भी नहीं सकता। दूसरी तरफ पीएम मोदी को लेकर कॉन्ग्रेस ने कहा कि उसे पीएम मोदी का मजाक उड़ाने से कोई गुरेज नहीं है क्योंकि उन्होंने खुद को भगवान बताया था।

कॉन्ग्रेस ने लिखा, “कोई भी कॉन्ग्रेस कार्यकर्ता पोप का अपमान करने के बारे में दूर-दूर तक नहीं सोच सकता, जिन्हें दुनिया भर के ईसाई भगवान के समान मानते हैं। हालाँकि, कॉन्ग्रेस को नरेंद्र मोदी का मजाक उड़ाने में कोई हिचक नहीं है, जो खुद को भगवान बताकर इस देश के आस्तिकों का अपमान करते हैं।”

केरल कॉन्ग्रेस ने इसके बाद अपनी विवादास्पद पोस्ट लेकर भाजपा के आलोचना करने को ही गलत ठहरा दिया। कॉन्ग्रेस ने लिखा, “इस तरह से वह लोग मोदी और उनके साथी सुरेन्द्रन की सांप्रदायिक मानसिकता को समझ पाएँगे, जो नरेंद्र मोदी के राजनीतिक खेल को पोप के अपमान के रूप में चित्रित कर रहे हैं।”

आगे कॉन्ग्रेस ने मणिपुर के मुद्दे को इससे जोड़ दिया, “सुरेन्द्रन और उनके सहयोगी ईसाइयों को ऐसे लोगों के समूह के रूप में नीचा दिखाने की कोशिश कर रहे हैं जिनमें कोई आत्मसम्मान नहीं है। अगर ईसाई समुदाय के प्रति सच्चा प्रेम ही है तो मोदी और उनके साथी जो मणिपुर में उनके प्रार्थना स्थलों को जलाए जाने पर चुप रहे, उन्हें पहले ईसाई समुदाय से बिना शर्त माफी माँगनी चाहिए।”

गौरतलब है कि केरल भाजपा अध्यक्ष के सुरेन्द्रन ने रविवार (16 जून, 2024) को आरोप लगाया कि केरल कॉन्ग्रेस का एक्स हैंडल ‘कट्टरपंथी इस्लामवादियों’ या ‘अर्बन नक्सलियों’ द्वारा चलाया जा रहा है, जिसने राष्ट्रवादी नेताओं पर अपमानजनक पोस्ट करने के बाद अब पोप और ईसाई समुदाय का मजाक उड़ाना शुरू कर दिया है।

यह सब बयानबाजी करने के बाद केरल कॉन्ग्रेस ने माफी का जिक्र किया। पार्टी ने लिखा,”अगर इस पोस्ट से ईसाइयों को कोई भावनात्मक या मानसिक पीड़ा हुई है, तो हम बिना शर्त माफी मांगते हैं।” यह पूरा मामला केरल कॉन्ग्रेस द्वारा रविवार को एक एक्स पोस्ट साझा करने के बाद चालू हुआ, इसमें पीएम मोदी की एक तस्वीर शामिल थी जिसमें वह कैथोलिक ईसाइयों के सबसे बड़े धर्मगुरु पोप के साथ एक बातचीत कर रहे थे।

पोप फ्रांसिस के साथ नरेंद्र मोदी की तस्वीर के साथ केरल कॉन्ग्रेस ने मज़ाक उड़ाते हुए लिखा, ”आखिरकार, पोप को भगवान से मिलने का मौका मिल ही गया।” कॉन्ग्रेस यह लिखते वक्त भूल गई कि उसने पीएम मोदी की तुलना जीसस से कर दी, क्योंकि पोप के भगवान तो जीसस ही हैं।

पीएम मोदी और पोप की यह तस्वीर हाल ही में संपन्न जी7 शिखर सम्मेलन के दौरान ली गई थी, जिसमें पीएम नरेंद्र मोदी को भाग लेने के लिए इटली आमंत्रित किया गया था। पोप फ्रांसिस भी इस कार्यक्रम में शामिल हुए थे, क्योंकि उन्हें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के पक्ष और विपक्ष के बारे में बात करने के लिए आमंत्रित किया गया था।

5 कॉलम में EVM पर छापा झूठ, 5 लाइन के ‘स्पष्टीकरण’ में पूरी हो गई मिड डे की ‘पत्रकारिता’: बिन माफी माँगे ही आर्टिकल हटाया

EVM को ओटीपी के जरिए अनलॉक करने के मसले पर मिड-डे द्वारा फैलाई गई भ्रामक जानकारी पर समाचार पत्र ने सफाई दी है। उन्होंने बिना कोई माफी माँगे अपने अखबार के फ्रंट पेज के छोटे से कॉर्नर में लिखा है कि उन्होंने पहले जो रिपोर्ट प्रकाशित की थी ‘ईवीएम को फोन पर आए ओटीपी से अनलॉक किया जा सकता है’, वो गलत थी, ऐसा नहीं हो सकता है।

इसके अलावा उन्होंने बड़ी ही खामोशी से अपने ऑनलाइन वर्जन से भी इस स्टोरी को हटा लिया है। उन्होंने बिना कोई माफी माँगे मामले को रफा-दफा करने का प्रयास किया। अपनी हालिया रिपोर्ट में उन्होंने रिटर्निंग ऑफिसर वंदना सूर्यवंशी से बात करके एक छोटा सी रिपोर्ट की।

साइड कॉर्नर में प्रकाशित छोटी सी सफाई

इसमें वंदना सूर्यवंशी ने बताया कि ईवीएम एक नॉन प्रोग्रामेबल मशीन है और इस अनलॉक करने के लिए कोई ओटीपी जरूरी नहीं होता… इसी बयान के साथ बाद मिड ने अपनी रिपोर्ट के एकदम अंत में लिखा- उन्हें त्रुटि के लिए खेद है और अपनी रिपोर्ट खत्म कर दी।

रिपोर्ट को आधार बनाकर फैलाया गया झूठ

जिस रिपोर्ट को इतनी आसानी से मिड डे ने रफा दफा करने का प्रयास किया है वो कोई सामान्य रिपोर्ट नहीं थी। विपक्षी नेताओं ने उसका इस्तेमाल देश के लोकतंत्र पर सवाल खड़ा करने के लिए किया। 16 जून को मिड डे समाचार पत्र में प्रकाशित 5 कॉलम री रिपोर्ट में दावा किया गया था पुलिस ने अपनी जाँच में पाया है कि एनडीए के प्रत्याशी रवींद्र वायकर के रिश्तेदार ने मतदान के वक्त फोन इस्तेमाल कर रहे थे जो कि ईवीएम से कनेक्ट था। इस रिपोर्ट में पुलिस के हवाले से कहा गया था कि प्रत्याशी का रिश्तेदार ओटीपी के जरिए ईवीएम अनलॉक कर रहा था। पुलिस उसका फोन फॉरेंसिक जाँच को भेज चुकी है।

इसी रिपोर्ट के बाद राहुल गाँधी ने ईवीएम की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े करते हुए चुनावों में फ्रॉड होने की बात कही थी। साथ ही लोकतंत्र पर प्रश्न खड़े किए।

सुप्रिया श्रीनेत ने बिन किसी जानकारी के कहा कि मुंंबई की पश्चिम सीट से एनडीए प्रत्याशी रवींद्र वायकर 48 वोट से जीते क्योंकि उनके रिश्तेदार का मोबाइल फोन उससे जुड़ा था। इसी से ईवीएम अनलॉक हुई।

प्रियंका चतुर्वेदी ने इस मामले में निर्वाचन आयोग पर सवाल खड़े किए थे। कहा गया था कि एनडीए प्रत्याशी का रिश्तेदार फोन लेकर गया था। अगर चुनाव आयोग इस पर एक्शन नहीं लेता है तो ये बड़ा स्कैम हो सकता है।

इसी प्रकार अन्य नाम भी हैं जो इस रिपोर्ट के आधार पर झूठ फैला रहे थे और प्रश्न उठा रहे थे। हालाँकि, अब जब मिड डे द्वारा अपना आर्टिकल हटा लिया है तो लोग सवाल कर रहे हैं कि क्या राहुल गाँधी जैसे नेताओं पर बिन सच्चाई जानें झूठी खबर फैलाने के मामले में कार्रवाई होगी। वो लोग अखबार के साथ रिपोर्टर की मंशा पर भी सवाल खड़े कर रहे हैं।

चेक गणराज्य से अमेरिका लाया गया निखिल गुप्ता, खालिस्तानी आतंकी पन्नू की हत्या की साजिश रचने का है आरोप

खालिस्तानी आतंकी गुरपतवंत सिंह पन्नू को अमेरिका में मरवाने के लिए सुपारी देने के आरोपित भारतीय नागरिक निखिल गुप्ता को चेक गणराज्य से अमेरिका प्रत्यर्पित कर दिया गया है। निखिल गुप्ता को अमेरिका की एक जेल में रखा गया है। उसे अमेरिका के एक कोर्ट में पेश किया जाएगा।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, निखिल गुप्ता को इस सप्ताह के अंत (15-16 जून, 2024) में अमेरिका लाया गया है। अभी उसके विरुद्ध कानूनी कार्रवाई को आगे बढ़ाया जा रहा है। निखिल गुप्ता ने चेक गणराज्य से प्रत्यर्पण से बचने के लिए वहाँ के स्थानीय कोर्ट में याचिका भी लगाई थी लेकिन मई, 2024 में कोर्ट ने उसके प्रत्यर्पण का रास्ता साफ़ कर दिया था। इससे पहले फरवरी, 2024 में इस पर रोक लगाई गई थी।

कोर्ट ने इस दौरान कहा था कि गुप्ता को प्रत्यर्पित किए जाने से उनके मूलभूत अधिकारों को लेकर कोई खतरा नहीं उत्पन्न होता है, ऐसे में उन्हें प्रत्यर्पित जा सकता है। इसके बाद उनके अमेरिका जाने का रास्ता साफ़ हो गया था। अब यह खबर आई है कि उसे अमेरिका भेज दिया गया है। निखिल गुप्ता जून 2023 से ही चेक गणराज्य में था।

गौरतलब है कि अमेरिका के जस्टिस विभाग ने आरोप लगाए थे कि निखिल गुप्ता अमेरिका में खालिस्तानी आतंकी गुरवतपन्त सिंह पन्नू को मरवाने की साजिश में शामिल था। निखिल गुप्ता पर आरोप था कि उसने अमेरिका में पन्नू को मारने के लिए एक हत्यारे को सुपारी दी।

अमेरिका ने आरोप लगाया था कि निखिल गुप्ता ने 1 लाख डॉलर (लगभग ₹83 लाख) पन्नू को मारने के लिए दिए थे। निखिल गुप्ता पर अमेरिका की एजेंसियों की आरोप ने लगाया था कि वह भारतीय खुफिया एजेंसियों से मिल कर काम कर रहा था और और यह सुपारी उसने भारतीय एजेंटों के कहने पर ही दी थी। इसके लिए 15,000 डॉलर का अग्रिम भुगतान किया गया था।

निखिल गुप्ता ने जिसको पैसे दिए थे वह अमेरिकी खुफिया एजेंसियों का ही सदस्य था। इसी कारण से पूरा मामला खुलने की बात कही गई थी। निखिल गुप्ता के परिवार ने इस बीच आरोप लगाया था कि निखिल को बीफ और पोर्क खिलाया जा रहा था जो उनके धार्मिक मूल्यों के विरुद्ध है।

इस मामले में भारत ने अमेरिका के आरोपण को खारिज किया है कि वह पन्नू को मारने की साजिश जैसी कोई बात थी और इस पूरे मामले में जाँच के लिए एक कमेटी गठित की है। निखिल गुप्ता के अमेरिका प्रत्यर्पित किए जाने को लेकर विदेश मंत्रालय ने कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया है।

पहले उइगर औरतों के साथ एक ही बिस्तर पर सोए, अब मुस्लिमों की AI कैमरों से निगरानी: चीन के दमन की जर्मन मीडिया ने खोली पोल, सूअर का माँस तक खिला चुका है

चीन का सुरक्षा प्रशासन आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) कैमरों की मदद से उइगर ( अधिकांश मुस्लिमों) पर नजर बनाए हुए है। ये खुलासा जर्मन मीडिया के आउटलेट टेबल.मीडिया ने किया है। टेबल मीडिया के अनुसार जिस दस्तावेज के आधार पर वो ये बता रहे हैं वो दस्तावेज उन्हें शंघाई, झेजियांग प्रांत के विभिन्न शहरों तथा दक्षिण-पश्चिमी महानगर चेंगदू के पुलिस विभागों से प्राप्त हुए हैं। इनसे पुष्टि होती है कि एआई कैमरों के माध्यम से उइगरों पर निगरानी रखी जा रही है।

जानकारी के मुताबिक, प्राप्त दस्तावेज पिछले 6 सालों के हैं जिनमें सबसे हालिया 2023 का है। ये बताता है कि उइगरों के चेहरा एआई कैमरों की जरिए पहचानने के लिए प्रयास चल रहे हैं। इस दस्तावेज के मुताबिक राज्य में वर्षों से उइगरों की पहचान के लिए ऐसी कोशिशें हो रही हैं क्योंकि इस समुदाय के लिए चीन के मन में अब भी बहुत सी आशंकाएँ हैं।

इस मामले में वुर्जबर्ग विश्वविद्यालय के झिंजियांग विशेषज्ञ ब्योर्न अल्परमैन कहते हैं कि ‘उल्लेखित’ दस्तावेजों से साफ पता चलता है कि चीनी सुरक्षा अधिकारी व्यवस्थित रूप से उइगरों के साथ अपराधियों जैसा बर्ताव करते हैं और उन्हें दोयम दर्जे के नागरिक की तरह उनके साथ बर्ताव करते हैं।

बता दें कि एआई कैमरों के जरिए चीन के सुरक्षाकर्मी ये पहचानने का प्रयास करेंगे कि उइगर विशेष रूप से कहाँ-कहाँ हैं और वो किसके संपर्क में आते हैं। जुहूई में अकेल 3700 कैमरे इस संबंध में निगरानी कर रहे हैं जो तस्वीरें लेते हैं और प्रशासन को सचेत रखते हैं। निगरानी के दौरान चेहरे की तस्वीर और उसका पूरा डेटा आता है। चश्मा लगाए लोग और दाढ़ी बढ़ाकर भी कोई इन चीजों से नहीं बच सकता। एआई इस डेटा को कलेक्ट करके सारी इन्फॉर्मेशन निकालता है और फिर उनसे जुड़ी सारी जानकारी चीन के सुरक्षा अधिकारियों को देता है। फिलहाल जुहूई में ये सिस्टम14 पुलिस थानों, डिटेंशन सेंटर और ट्रैफिक पुलिस कार्यालयों में प्रयोग हो रहा है।

गौरतलब है की चीन में उइगर मुस्लिमों को खतरे की तरह देखा जाता है। इसके संबंध में 2019 से खबरें आ रही हैं कि चीन उइगर मुस्लिमों में से कट्टरपंथ निकालने के नाम पर डिटेंशन सेंटर में डालता है और वहाँ उन्हें अनगिनत प्रताड़नाएँ दी जाती हैं। कई विदेशी मीडिया इस मुद्दे पर रिपोर्ट भी कर चुके हैं, लेकिन चीन के खिलाफ आवाज उठाने का काम कोई इस्लामी मुल्क नहीं करता है।

इस समय चीन में जब हर विरासत का चीनीकरण करने के काम हो रहा है, तब मस्जिदों पर भी हथौड़े चलाकर उसके मीनार और गुंबद तोड़े जा चुके हैं। इसके अलावा मुस्लिम महिलाओं पर भी अत्याचार होते हैं। पुरानी रिपोर्ट में बताया गया था कि कैसे चीन में सुरक्षाकर्मी पुरुषों को डिटेंशन सेंटर में डालकर महिलाओं के साथ हमबिस्तर होने चले जाते थे। इसके अलावा महिलाओं की वहाँ जबरन नसबंदी करा दी जाती थी और शराब पिलाने और पोर्क खिलाने का काम भी होता था।