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दिल्ली पुलिस को पाइपलाइन की रखवाली के लिए लगाना चाहती है AAP सरकार, कमिश्नर को आतिशी ने लिखा पत्र: घोटाले का आरोप लगा BJP ने किया प्रदर्शन

दिल्ली जल संकट के बीच राजनीतिक घमासान भी तेज हो गया है। दिल्ली की जल मंत्री आतिशी ने बड़ा आरोप लगाते हुए कहा है कि दिल्ली में पाइपलाइन काटने की साजिश हो रही है। आतिशी ने दिल्ली के कमिश्नर को पत्र लिखकर दिल्ली आने वाली पाइपलाइन्स को पुलिस सुरक्षा देने की माँग की है। वहीं, बीजेपी ने अरविंद केजरीवाल पर गंभीर आरोप लगाए हैं। बीजेपी ने कहा कि अरविंद केजरीवाल ने जब से दिल्ली जल बोर्ड की कमान संभाली, उसके एक साल में जमकर धाँधली हुई और दिल्ली जल बोर्ड को बर्बाद कर दिया गया और दिल्ली जल बोर्ड की ऑडिट रिपोर्ट भी उसी समय की गायब है।

पानी की पाइपों की सुरक्षा करेगी दिल्ली पुलिस!

दिल्ली की जल मंत्री आतिशी ने कमिश्नर को पत्र लिखकर कहा है कि दिल्ली की जनता के साथ साजिश हो रही है। उन्होंने कहा कि साउथ दिल्ली की पाइपलाइन में साजिशन 6 बोल्ट काटे गए थे। दिल्ली में पानी की परेशानी बढ़ाने के लिए षड्यंत्र हो रहा है और इस षड्यंत्र के कारण ही साउथ दिल्ली में 25% पानी की कमी हुई है।

आतिशी ने पत्र में लिखा है, “मैं अगले 15 दिनों के लिए हमारी प्रमुख पाइपलाइनों की सुरक्षा और गश्त के लिए पुलिसकर्मियों की तैनाती का अनुरोध कर रही हूं, ताकि शरारती तत्वों या गलत इरादे वाले लोगों को पानी की पाइपलाइनों से छेड़छाड़ करने से रोका जा सके, जो अब दिल्ली की जीवनरेखा बन गई हैं। इस समय कोई भी गड़बड़ी और तोड़फोड़ दिल्ली के लोगों के सामने पहले से ही मौजूद पानी की किल्लत को और बढ़ा देगी।”

बीजेपी का जोरदार प्रदर्शन, केजरीवाल पर गंभीर आरोप

दिल्ली जल संकट के बीच बीजेपी ने आम आदमी पार्टी के संयोजक और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल पर गंभीर आरोप लगाए हैं। दिल्ली बीजेपी ने जोरदार प्रदर्शन करते हुए कहा केजरीवाल पर दिल्ली जलबोर्ड में घोटाले का आरोप लगाया। दिल्ली बीजेपी के अध्यक्ष वीरेंद्र सचदेवा ने कहा कि जब अरविंद केजरीवाल मुख्यमंत्री बने तो दिल्ली जल बोर्ड करोड़ों रुपये के मुनाफे में था।

सचदेवा ने कहा, “अरविंद केजरीवाल करीब एक साल दिल्ली जल बोर्ड के अध्यक्ष रहे। उनके अध्यक्ष बनने से पहले दिल्ली जल बोर्ड फायदे में था, लेकिन एक साल में ही दिल्ली जल बोर्ड भारी कर्ज में चली गई और उस समय की ऑडिट रिपोर्ट भी गायब है।” उन्होंने कहा, “आप सरकार के मंत्रत्री पानी की चोरी कर रहे हैं और दिल्ली में टैंकर माफिया चला रहे हैं।”

मौलाना की हत्या के बाद मुस्लिम भीड़ ने हिंदू परिवारों को बनाया निशाना, घरों में घुसने की कोशिश की: प्रतापगढ़ में डर से कई ब्राह्मण परिवारों ने गाँव छोड़ा

उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ जिले में 7 जून 2024 को मौलाना फारुक नाम के एक मदरसा संचालक की हत्या कर दी गई थी। हत्या की वजह पैसों का लेन-देन था। हत्या का आरोप हिन्दू समुदाय के कुछ लोगों पर लगा था। तब मुस्लिम भीड़ ने कानून को हाथ में लेते हुए न सिर्फ पुलिस पर पत्थरबाजी की, बल्कि आरोपितों के घरों में भी घुसने की कोशिश की थी।

पुलिस ने बल प्रयोग करके जैसे-तैसे हालत सँभाले थे। उपद्रव को देखते हुए गाँव में हिन्दू समुदाय के कई लोग दहशत में घर छोड़ कर भाग गए हैं। पुलिस द्वारा दिए जा रहे तमाम आश्वासन के बावजूद भी वो लौटने को तैयार नहीं हैं। गाँव छोड़ने वालों के नाम दिनेश चंद्र पांडेय, जयप्रकाश पांडेय, राजेश चंद्र पांडेय, अनिल कुमार पांडेय, रमाकांत पांडेय व लाला पांडेय आदि के नाम बताए जा रहे हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, मामला प्रतापगढ़ के जेठवारा थाना क्षेत्र के सोनपुर गाँव का है। यहाँ 7 और 8 जून को हुई हिंसा के बाद मुस्लिम भीड़ ने पत्थरबाजी की थी। हमलावर भीड़ आरोपितों के घरों में घुसने की कोशिश की थी। तब से गाँव में पुलिस तैनात है। माहौल को देखते हुए हिन्दू समुदाय के कई लोग घरों में ताला लगा कर अपने दोस्तों-रिश्तेदारों के यहाँ चले गए हैं।

डर से शरणार्थी बन चुके इन परिवारों को जिला प्रशासन कई बार सुरक्षा देने व सुरक्षित रहने का भरोसा दे चुका है। इसके बावजूद कई परिवार घर लौटने को तैयार नहीं है। हिंदुओं के घरों में तोड़फोड़ करने वालों पर भी अभी तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है। आरोप यह भी है कि हिंसक भीड़ ने उन हिन्दुओं के घरों को भी निशाना बनाया था, जिनका मौलाना फारुक की हत्या से कोई भी लेना-देना नहीं था।

मौलाना के ही घर गए सपाई

इस बीच प्रशासन के लाख समझाने व पुलिस की तमाम पाबंदियों के बावजूद समाजवादी पार्टी के सदस्य मृतक मौलाना फारुक के घर पहुँच गए। शनिवार (15 जून) को उन्होंने पहले पुलिस की बैरिकेड तोड़ी फिर पगडंडी के रास्ते मृतक के घर पहुँचे। सपा के इस प्रतिनिधि मंडल में पूर्व मंत्री कमाल अख्तर और पूर्व MLC उदयवीर सिंह मौजूद थे। हालाँकि, पीड़ित हिंदुओं के घर किसी ने जाने की कोशिश नहीं की।

हिन्दू संगठनों ने दी एकतरफा कार्रवाई न करने की चेतावनी

इस बीच हिन्दू संगठनों ने भी इस मामले में दखल देना शुरू कर दिया है। प्रतापगढ़ के हिन्दू संगठनों ने एकजुट होकर एलान किया है कि किसी भी रूप में एकतरफा कार्रवाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने गाँव के हिन्दुओं की सुरक्षा भी तय करने की प्रशासन से अपील की है। हिन्दू संगठनों ने एकपक्षीय आवाज उठाने का आरोप लगा कर समाजवादी पार्टी को भी आड़े हाथों लिया और कठोर शब्दों के साथ उनकी निंदा की। प्रतापगढ़ पुलिस का कहना है कि उनकी हालातों पर नजर है और संबंधित अधिकारियों को जरूरी दिशा-निर्देश दिए गए हैं।

अब तक 1 महिला सहित 3 गिरफ्तार

मौलाना हत्याकांड में अब तक पुलिस ने कुल 3 आरोपितों को गिरफ्तार किया है। इनमें एक महिला भी शामिल है। गिरफ्तार आरोपितों के नाम देवी प्रसाद पांडेय, चंद्रमणि तिवारी और उनकी पत्नी सीता तिवारी हैं। इन सभी पर भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 147, 148, 302 व 34 के तहत कार्रवाई की गई है।

साम्प्रदायिक नहीं, बल्कि जमीन व पैसों के विवाद में हुई थी हत्या

मौलाना फारूक की हत्या के बाद सोशल मीडिया के तमाम इस्लामी व वामपंथी हैंडलों ने इसे साम्प्रदायिक रंग देने की कोशिश की थी। कई हैंडलों ने इसे उत्तर प्रदेश में मुस्लिम स्कॉलर्स की टारगेट किलिंग के तौर पर दिखाने की कोशिश की थी। इस पूरे समूह ने उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद, शामली और प्रतापगढ़ जिलों में विभिन्न कारणों से मारे गए मज़हबी गुरुओं को एक साथ जोड़ कर नया रूप दिया।

वहीं, पुलिस जाँच में स्पष्ट हो गया है कि इनमें से एक भी हत्या टारगेट किलिंग या साम्प्रदायिक मंशा से नहीं हुई थी। शामली के केस में तो औलाद ने ही अपने अब्बा की हत्या की थी। इस मामले में भी पुलिस की जाँच में हत्या की वजह पैसों और जमीन का विवाद निकला। पुलिस की पूछताछ में 11 जून को गिरफ्तार आरोपित चंद्रमणि तिवारी ने बताया कि वह बेहद गरीब परिवार से है।

तिवारी ने कहा कि दूध बेचकर और थोड़ी-बहुत खेती करके परिवार का गुजारा होता है। आरोपित और मृतक मौलाना के बीच अच्छे संबंध थे। पैसों के अभाव में आरोपित ने मौलना को अपनी लगभग 10 बिस्वा जमीन बेच दी थी। इसी लेन-देन में पैसे व जमीन आदि को लेकर विवाद हुआ था। इसकी वजह से आरोपित ने आवेश में आकर मौलाना की फावड़े से मारकर हत्या कर दी थी।

नूहं में हिन्दुओं और पुलिस पर हमला करने वाला खालिद गिरफ्तार, 11 माह से दे रहा था चकमा: डिप्टी एसपी बन कर रहा था ठगी, साथी आकिल भी पकड़ाया

हरियाणा के नूहं जिले में फर्जी पुलिस अधिकारी बनकर ठगी करने वाले खालिद और आकिल को पुलिस ने शनिवार (15 जून 2024) को गिरफ्तार कर लिया। दोनों आरोपित खुद को डिप्टी एसपी बताकर लोगों पर न सिर्फ रौब झाड़ते थे, बल्कि उनसे पैसों की वसूली भी करते थे। इनके निशाने पर खासतौर से वर्तमान व पूर्व सरपंच हुआ करते थे। खालिद पिछले साल 31 जुलाई को नूहं में हिन्दुओं की शोभा यात्रा पर हुए हमले में भी शामिल बताया जा रहा है। तब से वह फरार चल रहा था।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह मामला नूहं जिले के साइबर थाने का है। 3 दिन पहले एक पूर्व सरपंच दिलबाग ने पुलिस में शिकायत दर्ज करवाई थी। शिकायत में उन्होंने बताया था कि 2-3 दिन पहले उनके मोबाइल पर एक अनजान नंबर से कॉल आई थी। कॉलर ने खुद का परिचय डिप्टी एसपी शमशेर सिंह के तौर पर दिया था। कॉलर ने अपनी व्हाट्सएप डीपी भी वर्दी पहने शमशेर सिंह की लगा रखी थी।

इस कॉलर ने दिलबाग से बेहद जरूरी काम बताते हुए 95 हजार रुपयों की माँग की। पैसे जमा करने के लिए उसने स्टेट बैंक ऑफ़ इंडिया (SBI) का खाता नंबर भी भेजा। दिलबाग ने बताया कि डिप्टी एसपी शमशेर सिंह उनके पूर्व परिचित थे। उन्होंने झाँसे में आकर उस खाते में 95 हजार रुपए ट्रांसफर कर दिए। पैसे भेजने के बाद अगले दिन फिर से उसी नंबर से दिलबाग को कॉल आई।

कॉलर ने दिलबाग से और ज्यादा पैसों की माँग की। तब दिलबाग को एहसास हुआ कि उनके साथ ठगी हो गई है। उन्होंने कॉलर के स्क्रीनशॉट और रिकार्डिंग आदि लेकर साइबर थाने को सम्पर्क किया। शिकायत के आधाार पर पुलिस ने FIR दर्ज कर ली है। उसके बाद दोनों आरोपितों की तलाश में जुट गई है। पुलिस ने जाँच की तो जालसाजी के इस रैकेट में 2 लोग शामिल मिले।

इन दोनों के नाम खालिद और आकिल हैं। ये दोनों मेवात के रहने वाले हैं। मुख्य आरोपित खालिद है, जबकि आकिल उसका सहयोगी है। जाँच में पता चला कि खालिद 31 जुलाई 2023 को नूहं में बृजमंडल यात्रा के दौरान हिंदुओं पर हुए हमले में भी शामिल था। उसने न सिर्फ हिन्दू श्रद्धालुओं पर पत्थरबाजी की थी, बल्कि आगजनी में भी शामिल था। वह साइबर थाने पर हमले में भी शामिल था।

खालिद पिछले 11 महीनों से पुलिस को चकमा दे रहा था। वह पुलिस के हत्थे नहीं चढ़ रहा था। आखिरकार जालसाजी के मामले में वह कानून के घेरे में फँस गया। पुलिस ने गिरफ्तार करने के बाद आकिल को जेल भेज दिया है। वहीं, खालिद को व्यापक पूछताछ के लिए एक दिन की कस्टडी रिमांड पर लिया है। पुलिस कस्टडी में दोनों कान पकड़कर माफ़ी माँगते नजर आए।

दाढ़ी बनवाने सैलून आया था ग्राहक, थूक लगाकर चेहरे पर मसाज करने लगा मोहम्मद जैद: पंडित आशीष ने दर्ज कराया मुकदमा, शामली का भी वीडियो हुआ था वायरल

उत्तर प्रदेश के शामली के बाद अब राजधानी लखनऊ में थूक लगाकर ग्राहक के चेहरे का मसाज करने का मामला सामने आया है। थूक लगाकर मसाज करने का वीडियो शनिवार (15 जून 2024) को सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। इसमें सैलून चलाने वाला मोहम्मद जैद ग्राहक पंडित आशीष कुमार के चेहरे पर थूक मल रहा था। इसके बाद ग्राहक ने सुशांत गोल्फ सिटी थाने में मुकदमा दर्ज कराया है।

दरअसल, राजधानी लखनऊ के सुशांत गोल्फ सिटी इलाके में मोहम्मद जैद सैलून चलाता है। यह सैलून पीड़ित जहाँं काम करता है, उसके पास में ही है। उन्नाव के रहने वाले पंडित आशीष कुमार ने बताया कि वह पृथ्वीपुरम में एक कैंटीन में काम करते हैं। मंगलवार (11 जून 2024) को वह जैद के यहाँ दाढ़ी बनवाने गए थे। दाढ़ी बनवाने के दौरान उन्होंने जैद से चेहरे पर मसाज करने को कहा।

मसाज करने के दौरान मोहम्मद जैद ने चेहरे पर क्रीम लगाई और मसाज करने लगा। इस दौरान जैद बार-बार अपने हाथ पर थूकता और उसे चेहरे पर लगाकर मसाज करता। यह पूरा घटना सैलून में लगे सीसीटीवी कैमरे में कैद हो गया। शनिवार की रात यह वीडियो इंटरनेट पर वायरल हो गया। इसके बाद आशीष को इसकी जानकारी मिली।

आशीष ने इस संबंध में मोहम्मद जैद से पूछा तो वह वह धमकी देने लगा। इसके बाद आशीष ने सुशांत गोल्फ सिटी थाने में जाकर मोहम्मद जैद के खिलाफ तहरीर दी। इंस्पेक्टर अंजनी कुमार मिश्रा ने बताया कि तहरीर के आधार पर आरोपित मोहम्मद जैद के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। 

बता दे कि 8 जून 2024 को यूपी के शामली से भी ऐसा ही मामला सामने आया था। इसके वायरल वीडियो में मुस्लिम नाई अमजद मसाज के दौरान ग्राहक के चेहरे पर थूक लगाते हुए दिख रहा था। वीडियो प्रसारित होने के बाद शामली के एसपी अभिषेक ने थानाभवन थाना प्रभारी सतीश कुमार को जाँच कर विधिक कार्रवाई करने के निर्देश दिए थे। इसके 6 घंटे के अंदर पुलिस ने अमजद को दबोच लिया।

पुलिस का कहना था कि वीडियो वायरल करने वाले व्यक्ति ने नाई का नाम अमजद बताया है। वीडियो की जब पड़ताल की गई तो पता चला कि यह घिनौना काम करने वाला गाँव के बस स्टैंड पर सैलून चलाने का काम करता है। अमजद भनेड़ गाँव का रहने वाला है और उसके अब्बा का नाम इरफान बताया जा रहा है। पुलिस ने इस मामले में मुकदमा दर्ज कर लिया है।

इस तरह के कई मामले सामने आ चुके हैं। तीन साल पहले शामली कोतवाली के फव्वारा चौक के निकट तंदूर पर थूक लगाकर रोटी सेंकने का वीडियो वायरल हुआ था। तब पुलिस ने आरोपित को गिरफ्तार कर लिया था। इसी तरह गाजियाबाद के लोनी के एक होटल में मुस्लिम युवक द्वारा तंदूरी रोटी में थूक लगाकर रोटी पैक करने का वीडियो वायरल हुआ था। उसे भी गिरफ्तार किया गया था।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और कंगना रनौत की शेयर की एडिटेड वीडियो: इजहार आलम पर लखनऊ में FIR दर्ज, राहुल गाँधी और कॉन्ग्रेस का है प्रशंसक

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और भाजपा की सांसद कंगना रनौत की एडिटेड वीडियो शेयर करने पर लखनऊ में FIR दर्ज की गई है। यह FIR इजहार आलम नाम के युवक पर दर्ज हुई है। इजहार ने अपने X हैंडल @izharalam00786 से रविवार (9 जून 2024) को यह आपत्तिजनक वीडियो शेयर की थी। पुलिस मामले की जाँच कर रही है।

रिपोर्ट के मुताबिक, लखनऊ के गोमतीनगर थाना क्षेत्र के रहने वाले रवि प्रकाश ने थाने में तहरीर देकर बताया कि इजहार आलम नाम का व्यक्ति मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के एक बयान को एडिट करके भ्रामक तौर पर शेयर कर रहा है। इसके अलावा, भाजपा सांसद कंगना रनौत का भी एक एडिटेड वीडियो साझा किया है। इन दोनों वीडियो में इजहार ने बयानों को काट-छाँट कर आधा अधूरा ट्वीट किया है।

पुलिस अधिकारी रवीना त्यागी ने मीडिया से बताया कि दोनों मामलों में FIR दर्ज कर ली गई है। आरोपित के यूजर आईडी को खंगाला जा रहा है। मामले की जाँच और अन्य जरूरी कार्रवाई की जा रही है। ऑपइंडिया ने इजहार आलम के हैंडल की पड़ताल की। इजहार ने अपनी लोकेशन के तौर पर बिहार लिख रहा है। वह अक्सर राहुल गाँधी के प्रचार वाली वीडियो को रिपोस्ट करता है। आए दिन इजहार के हैंडल से भाजपा और उसके तमाम नेताओं के विरोध वाली वीडियो शेयर होती हैं।

9 जून को शेयर किया गया वीडियो इजहार ने अभी तक डिलीट नहीं किया। उसने कैप्शन के तौर पर लिखा, “चुनाव नतीजे के बाद सबके तेवर बदल गए हैं। जिसको भी देखो मुसलमानों की ही तरफदारी कर रहे हैं। बेचारा अंडभक्त का कोई नाम लेने वाला ही नही है।”

इस वीडियो में योगी आदित्यनाथ के उस बयान को काटा-छाँटा गया था, जिसमें वो देश के संसाधनों पर मुस्लिमों के पहले अधिकार वाले मुद्दे पर कॉन्ग्रेस की आलोचना कर रहे थे। वीडियो को कुछ ऐसे एडिट किया गया था कि जैसे खुद CM योगी ही ये बयान दे रहे हों।

गलत वीडियो डालने वाले अब नहीं बचेंगे: संसद के अगले सत्र में ‘डिजिटल इंडिया बिल’ ला सकती है मोदी सरकार, डीपफेक पर लगाम की तैयारी

डीपफेक एक बहुत बड़ी समस्या बनकर उभरा है। इस पर काबू पाने के लिए सरकार लगातार प्रयास कर रही है। नरेंद्र मोदी सरकार आगामी संसद सत्र में AI-जनरेटेड डीपफेक वीडियो और यूट्यूब कंटेंट को लेकर एक विधेयक पेश कर सकती है। इसे डिजिटल इंडिया बिल (Digital India Bill) के नाम से पेश किया जाएगा।

सूत्रों के हवाले से मीडिया रिपोर्ट में कहा जा रहा है कि डीपफेक पर रोक और यूट्यूब समेत विभिन्न ऑनलाइन माध्यमों पर कंटेंट को रेग्यूलेट करने के लिए आगामी सत्र में बिल पेश किया जाएगा। यह सत्र 24 जून से शुरू होकर 3 जुलाई तक चलेगा। इसके बाद मानसून सत्र 22 जुलाई से शुरू होगा और संभवतः 9 अगस्त तक चलेगा।

इस बिल पर सरकार सभी दलों से चर्चा करेगी और आम सहमति बनाने का प्रयास करेगी। पिछले साल की शुरुआत में तत्कालीन केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी राज्यमंत्री राजीव चंद्रशेखर ने भी विधेयक के बारे में संकेत दिया था। उन्होंने कहा था कि इसे अगली सरकार द्वारा अधिनियमित और क्रियान्वयन के लिए लिया जाएगा।

चंद्रशेखर ने कहा था, “हमें इसके बारे में बहुत सारे परामर्श और चर्चा की जरूरत है, लेकिन हमारे पास एक रोडमैप है कि कानून क्या है, हमारे नीतिगत लक्ष्य क्या हैं और सुरक्षा और विश्वास के लिए नीतिगत सिद्धांत क्या हैं। डीपफेक एक ऐसी तकनीक है, जिसने मिसलीडिंग कॉन्टेंट को लेकर चिंता पैदा की हैं। इसके जरिए गलत जानकारी का प्रसार और सार्वजनिक हस्तियों के फर्जी वीडियो का निर्माण व्यक्तिगत गोपनीयता का उल्लंघन शामिल है।”

चंद्रशेखर के मंत्रालय इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) ने फेसबुक, इंस्टाग्राम और यूट्यूब सहित सभी सोशल मीडिया प्लेटफार्मों को 24 घंटे के भीतर डीपफेक कंटेंट हटाने की सलाह दी थी। इसको लेकर सरकार ने साफ कहा था कि ऐसा न करने पर इन प्लेटफॉर्म पर भारतीय कानूनों के तहत आपराधिक और न्यायिक कार्रवाई की जाएगी।

पिछले साल दिवाली मिलन समारोह में पत्रकारों से बातचीत के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी डीपफेक पर चर्चा की थी। भाजपा के दिल्ली स्थित मुख्यालय में दिवाली मिलन समारोह के दौरान मौजूद लोगों को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने भारत को ‘विकसित भारत’ बनाने का आह्वान किया था। इसके साथ ही उन्होंने डीपफेक पर गहरी चिंता जताई थी।

पीएम मोदी ने वहाँ मौजूद पत्रकारों से डीपफेक के संकट के बारे में लोगों को शिक्षित करने के लिए आग्रह किया था। गौरतलब है कि बॉलीवुड अभिनेत्री रश्मिका मंदाना, फिल्म स्टार अमिताभ बच्चन से लेकर कई बड़ी हस्तियाँ डीपफेक का शिकार हो चुकी हैं। इस तरह के कंटेंट को लेकर उन्होंने चिंता जताई थी।

बताते चलें कि बॉलीवुड अभिनेत्रियों से लेकर सेलिब्रेटी तक डीपफेक (DeepFake) का शिकार हो रही हैं। रश्मिका मंदाना, सारा तेंदुलकर, कैटरीना कैफ, ऐश्वर्या राय के बाद अब काजोल इसकी शिकार बनी हैं। बॉलीवुड अभिनेत्री काजोल का एक अश्लील वीडियो सामने आया है। इस वीडियो में वो कैमरे के सामने कपड़े बदलती नजर आ रही हैं।

अपनी डीपफेक वीडियो वायरल होने के बाद अभिनेत्री रश्मिका मंदाना ने दिल्ली पुलिस में प्राथमिकी भी दर्ज कराई थी। दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल इंटेलिजेंस फ्यूजन एंड स्ट्रैटेजिक यूनिट ने इसे लेकर अज्ञात लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर अपनी जाँच शुरू की थी।

अपने इस वीडियो को लेकर रश्मिका मंदाना ने अपने एक्स हैंडल पर लिखा था, “मुझे अपने ऑनलाइन फैलाए जा रहे डीप फेक वीडियो पर बात करते और इसे शेयर करते हुए बेहद दुख हो रहा है। ईमानदारी से कहूँ तो ऐसा कुछ, न केवल मेरे लिए, बल्कि हममें से हर एक के लिए बेहद डरावना है, जो आज तकनीकी के बेजा इस्तेमाल की वजह से खतरे में हैं।”

आतंकवाद का बखान, अलगाववाद को खुलेआम बढ़ावा और पाकिस्तानी प्रोपेगेंडा को बढ़ावा : पढ़ें- अरुँधति रॉय का 2010 वो भाषण, जिसकी वजह से UAPA में चलेगा केस

विवादास्पद लेखिका अरुँधति रॉय के खिलाफ दिल्ली के उप-राज्यपाल ने UAPA मामले में केस चलाने की मंजूरी दे दी है। अरुँधति रॉय के खिलाफ जिस भाषण को लेकर केस चलाया जा रहा है, वो भाषण 21 अक्टूबर 2010 को दिल्ली में आयोजित ‘आजादी: द ओनली वे’ नाम के सेमिनार में दिया गया था, जिसमें भारत विरोधी सैयद अली शाह गिलानी, शेख शौकत हुसैन, वरवर राव जैसे लोग मौजूद थे।

इस सेमिनार का आयोजन दिल्ली में CRPP ने किया था। इस सेमिनार में 15 मिनट लंबा भाषण दिया था, जिसमें उन्होंने भारत देश के खिलाफ जमकर जहर उगला था। ऑपइंडिया के पास अरुँधति रॉय का दिया पूरा भाषण मौजूद है। जिसमें भारत विरोधी उसके भाषण पर उसके समर्थक जमकर तालियाँ बजा रहे थे। इसमें से 8 मिनट का वीडियो यहाँ देख सकते हैं।

अपने भाषण में अरुँधति रॉय दावा कर रही है कि भारत सरकार ने गरीबों के खिलाफ जंग छेड़ा हुआ है। देश के आदिवासी इलाकों में असंतोष को हवा देते हुए तत्कालीन यूपीए सरकार पर निशाना साधते हुए अरुँधति ने कहा, “मैं हप्ते या 10 दिन पहले राँची में थी, जहाँ ऑपरेशन ग्रीन हंट के खिलाफ पीपल्स ट्रिब्यूनल चल रहा है। ऑपरेशन ग्रीन हंट देश के सबसे गरीब लोगों के खिलाफ भारत राज्य की लड़ाई है।”

इस दौरान जब पत्रकारों ने जम्मू-कश्मीर पर उसके रुख को लेकर सवाल पूछा, तो अरुँधति ने कहा, “कश्मीर कभी भारत का आंतरिक हिस्सा नहीं रहा है। चाहे आप मुझसे कितनी भी आक्रामकता से और कितनी भी बार यह पूछें।” ये वही लाइन है, जो पाकिस्तान लेता रहा है। साफ है अरुँधति यहाँ पाकिस्तानी प्रोपेगेंडा को आगे बढ़ाती नजर आई।

देश में जातीय और सांप्रदायिक मतभेद पैदा करने की कोशिश

इस दौरान अरुँधति रॉय ने दावा किया कि भारतीय राज्य सैन्य हस्तक्षेप के माध्यम से भारत के कुछ हिस्सों पर कब्ज़ा कर रहा है। जिसमें अल्पसंख्यकों और कुछ जातीय समूहों को ‘उच्च जाति हिंदू राज्य’ द्वारा ‘उत्पीड़ित’ किया जा रहा है।

“अंग्रेजों ने 1899 में भारत का नक्शा बनाया। जैसे ही वो आजाद हुआ, वो खुद औपनिवेशिक ताकत (अंग्रेजों की तरह) बन गया। भारतीय राज्य ने मणिपुर, नागालैंड, मिजोरम, कश्मीर, तेलंगाना, नक्सलवाड़ी असंतोष, पंजाब, हैदराबाद, गोवा, जूनागढ़ में हस्तक्षेप किया। भारत राज्य, भारत का अमीर वर्ग और भारत के अमीर लोग नक्सलियों पर युद्ध छेड़ने के आरोप लगाते हैं, लेकिन खुद भारत राज्य ने अपने ही लोगों के खिलाप 1947 से लगातार युद्ध छेड़ा हुआ है। चाहे वो नगा हों, मिजो हों, मणिपुरी हो, असल के लोग हों, हैदराबाद, कश्मीर या पंजाब हो। हमेशा अल्पसंख्यों, जिसमें मुस्लिम, आदिवासी, ईसाई और दलित, वनवासी हैं, उनके खिलाफ उच्च जाति के हिंदू राज्य ने युद्ध छेड़ा हुआ है। यही हमारे देश का आधुनिक इतिहास है।”

भारत के आंतरिक लोगों को भड़काने के बाद विवादास्पद लेखिका ने खुलेआम जम्मू-कश्मीर को भारत संघ से अलग करने की वकालत की। उसने ‘आजादी’ के पाकिस्तानी नरेटिव को आगे बढ़ाता और बताया कि कैसे भारत ने कश्मीर और कश्मीरियों पर कब्जा किया है।

एक पत्रकार के साथ 2007 की बातचीत को याद करते हुए, अरुंधति रॉय ने कहा, “भारत को कश्मीर से आजादी की उतनी ही जरूरत है जितनी कश्मीर को भारत से आजादी की जरूरत है।” और जब मैंने भारत कहा, तो मेरा मतलब भारतीय राज्य से नहीं था, मेरा मतलब भारतीय लोगों से था क्योंकि मुझे लगता है कि कश्मीर पर कब्जा – आज 12 मिलियन लोगों की उस घाटी में 700,000 सुरक्षाकर्मी तैनात हैं – यह दुनिया का सबसे अधिक सैन्यीकृत क्षेत्र है – और हमारे लिए, भारत के लोगों के लिए, उस कब्जे को बर्दाश्त करना हमारे रक्तप्रवाह में एक तरह के नैतिक क्षरण को अनुमति देने जैसा है।”

यह जानते हुए भी कि उसके राजधानी दिल्ली में दिए भड़काऊँ भाषण से कश्मीर घाटी में लॉ एंड ऑर्डर की समस्या पैदा हो सकती है, उसने आगे कहा, “कश्मीरी बिना एक-47 की नाल से निकलते धुएँ के साँस भी नहीं ले सकते। बहुत कुछ यहाँ किया गया है। हर बार एक चुनाव होता है। लोग वोट देते हैं और भारत सरकार वहाँ जाकर बोलती है, ‘तुम्हें रेफरेंडम क्यों चाहिए? यहाँ लोग भारत के लिए वोटिंग करते हैं।”

कश्मीरी अलगाववाद की भारत की आजादी की लड़ाई से तुलना गलत

अरुँधति रॉय ने एक बेहद गलत व्याख्या करते हुए दावा किया कि कश्मीर में ‘आजादी’ की लड़ाई भारत देश की औपनिवेशिक ताकत ब्रिटेन के खिलाफ लड़ी गई लड़ाई की तरह ही है। अरुँधति रॉय ने कहा, “अब, कभी-कभी यह जानना बहुत मुश्किल होता है कि औपचारिक रूप से भारत के नागरिक के रूप में कोई व्यक्ति किस स्थान पर खड़ा है, कोई क्या कह सकता है, उसे क्या कहने की अनुमति है, क्योंकि जब भारत ब्रिटिश उपनिवेशवाद से आज़ादी के लिए लड़ रहा था – कश्मीर में आज़ादी की समस्याओं को लेकर लोग जो भी तर्क देते हैं, वे निश्चित रूप से भारतीयों के खिलाफ़ इस्तेमाल किए गए थे। मोटे तौर पर कहें तो, “मूल निवासी आज़ादी के लिए तैयार नहीं हैं, मूल निवासी लोकतंत्र के लिए तैयार नहीं हैं।”

“औपनिवेशिक राज्य चाहे वो भारत में ब्रिटिश राज्य रहा हो या कश्मीर, नगालैंड या फिर छत्तीसगढ़ में भारतीय राज्य, उसके एलीट लोग इस कब्जे को मैनेज करते हैं। तो तुम्हें अपने दुश्मनों और उन्हें कैसे जवाब देना है, इस बारे में पता होना चाहिए। तुम होशियार हो, चाहे वो इंटरनेशनल लेवल पर राजनीति की बात हो या स्थानीय स्तर पर किसी भी स्तर पर, तुम्हें अपने साथी बनाने होंगे। वर्ना तुम लोग टैंक में फँसी मछलियों जैसे होंगे, जो टैंक की दीवारों पर बमबारी कर के थक जाओगे, क्योंकि दीवारें बहुत मजबूत हैं।”

बता दें कि अक्टूबर 2010 में विवादास्पद लेखिका द्वारा भाषण दिए जाने के तुरंत बाद, सुशील पंडित (उस समय अरुण जेटली के सहयोगी) की शिकायत के आधार पर उनके खिलाफ मामला दर्ज किया गया था। इस मामले के संबंध में 29 नवंबर 2010 को प्रथम सूचना रिपोर्ट (एफआईआर) दर्ज की गई थी। अरुँधति रॉय पर भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धाराओं 124 ए (राजद्रोह), 153 ए (वर्गों के बीच दुश्मनी को बढ़ावा देना), 153 बी (राष्ट्रीय एकता के लिए हानिकारक दावे), 504 (शांति भंग करने के लिए उकसाना) और 505 (विद्रोह पैदा करने के इरादे से अफवाह फैलाना) के तहत मामला दर्ज किया गया था। लगभग 14 साल मामले में कोई डेवलपमेंट न होने के बाद शुक्रवार (14 जून 2024) को दिल्ली के उप-राज्यपाल ने अरुँधति रॉय के खिलाफ गैरकानूनी गतिविधियाँ (रोकथाम) अधिनियम, 1967 की धारा 13 के तहत मुकदमा चलाने की मंजूरी दे दी।

(यह लेख मूल रूप से अंग्रेजी भाषा में प्रकाशित किया गया है। मूल लेख पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें।)

जबड़ा तोड़ा, खोपड़ी फोड़ी, रॉड से दागा, नाले में बहाया शव… ‘पति, पत्नी और वो’ की कहानी में फैन की एंट्री के बाद कन्नड़ स्टार बना ‘हत्यारा’, इंस्टाग्राम से कनेक्शन

कर्नाटक में रेणुका स्वामी नामक शख्स की हत्या का मामला पिछले कई दिनों से चर्चा में बना हुआ है, क्योंकि इस हत्याकांड में 27 वर्षों से तेलुगु फिल्म इंडस्ट्री में सक्रिय दर्शन तुगुदीप का नाम आया है। आखिर इतना बड़ा स्टार अपराधी कैसे हो गया? फैंस इसी सवाल का जवाब तलाश रहे हैं। ये पूरा मामला दर्शन तुगुदीप और उसकी गर्लफ्रेंड अभिनेत्री पवित्रा गौड़ा से जुड़ा हुआ है। मृतक रेणुका स्वामी, दर्शन तुगुदीप का बहुत बड़ा फैन भी था। वो अभिनेता के जीवन की गहरी जानकारी रखता था।

दर्शन तुगुदीप शादीशुदा हैं। उन्होंने 2003 में विजयलक्ष्मी से शादी की थी। दर्शन के पिता तुगुदीप श्रीनिवास कन्नड़ फिल्म इंडस्ट्री में विलेन के किरदारों के लिए जाने जाते थे। रेणुका स्वामी हत्याकांड में पुलिस ने 15 लोगों को गिरफ्तार किया है। असल में रेणुका स्वामी अपने फेवरिट स्टार दर्शन का नाम पवित्रा से जुड़ने से नाराज़ था। उसने अभिनेत्री के सोशल मीडिया पोस्ट्स पर आपत्तिजनक कमेंट्स किए, जिस बारे में पवित्रा ने अपने बॉयफ्रेंड को बताया।

पवित्रा और दर्शन उसकी इस हरकत से काफी नाराज़ हुए। फिर 9 जून, 2024 को रेणुका स्वामी की लाश पुलिस को कामाक्षीपाल्या के एक नाले से मिली। इसके बाद 2 लोग थाने पहुँचे और उन्होंने रेणुका स्वामी की हत्या का जुर्म कबूलते हुए कहा कि लेनदेन का विवाद बढ़ने के कारण उन्होंने ऐसा किया। लेकिन, जब पुलिस ने खँगाला तो पाया कि इन दोनों ने कई बार दर्शन से बात की थी। साथ ही हत्या वाले दिन आरोपितों और दर्शन तुगुदीप की लोकेशन सेम मिली।

चित्रदुर्ग में रहने वाला रेणुका स्वामी एक फार्मेसी कंपनी में कार्यरत था। उसे लगता था कि दर्शन तुगुदीप के जीवन में पवित्रा गौड़ा की एंट्री के कारण अभिनेता की शादीशुदा ज़िन्दगी में दिक्कतें आ रही हैं। इसीलिए, उसने पवित्रा को अपनी फेक आईडी से कई बार मैसेज-कमेंट्स कर के कहा कि वो दर्शन को छोड़ दे। दर्शन तुगुदीप ने चित्रदुर्ग के अपने फैन-क्लब कोऑर्डिनेटर रघुवेन्द्र से बात कर के रेणुका स्वामी की डिटेल्स निकलवाई थी। एक कमेंट में रेणुका स्वामी ने पवित्र गौड़ा से पूछा था कि अभिनेता दर्शन तुगुदीप उसके साथ क्यों ट्रेवल नहीं करते?

साथ ही उसने ये तंज भी कसा था कि दर्शन अपनी पत्नी विजयलक्ष्मी के साथ ही अक्सर दिखते हैं। उसने लिखा था, “रहने दो, समाज में तुम रखैल ही रहोगी।” वह गौड़ा को अपनी प्राइवेट पार्ट की तस्वीर भेज कर कहता था कि ये दर्शन से अधिक दमदार है। पत्नी सहाना ने बताया कि रेणुका स्वामी को राघवेंद्र नामक शख्स लेकर गया था और अपहरण कर के एक झोपड़ी में रखा गया। वहाँ दर्शन ने रेणुका को बेल्ट से पीटा। फिर अपने गुर्गों से उसकी हत्या कर देने को कह कर निकल गया।

दर्शन तुगुदीप के जाने के बाद उसके गुर्गों ने रेणुका स्वामी को लोहे की रॉड से दागा, लाठियों से पीटा और दीवार से दे मारा। शाकाहारी रेणुका स्वामी को मांस भी जबरन खिलाया गया। उसका जबड़ा तोड़ा गया, जीभ और नाक काट दी गई। हत्या के बाद शव को नाले में बहा दिया गया। 30 लाख रुपए की सुपारी लेकर गुंडों ने ये काम किया। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में पता चला कि रेणुका की कई हड्डियाँ टूटी हुई थीं, 15 घाव थे। खोपड़ी की हड्डी में भी फ्रैक्चर था। पोस्टमॉर्टम करने वाले डॉक्टरों को भी 1 करोड़ रुपए ऑफर किए गए थे, ताकि इस हत्या को प्राकृतिक मौत दिखाई जा सके।रॉड से

‘इस बार माफ़ी दे दो बाबूजी, कभी ऐसा नहीं होगा’: गायों की तस्करी करता था सूफियान, फायरिंग कर भागा तो टाँग में लगी यूपी पुलिस की गोली

उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर में एक संदिग्ध गौ-तस्कर एनकाउंटर के बाद पकड़ा गया है। पकड़े गए बदमाश का नाम सूफियान है। उस पर कई मामले दर्ज हैं और पुलिस उसकी हिस्ट्रीशीट खंगाल रही है। उसने पुलिस द्वारा चेकिंग के दौरान रोके जाने पर पुलिस पर ही गोली चला दी थी और फरार हो गया, जिसके बाद पुलिस ने मुठभेड़ में इसके पैरों में गोली मार दी। इस दौरान उसका एक वीडियो सामने आया है, जिसमें वो खुद को बचाने की गुहार लगा रहा है और कह रहा है ‘मुझसे इस बार गलती हो गई, आगे नहीं होगी। मुझे माफ कर दो।’

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, मुजफ्फगरनगर की कोतवाली पुलिस और एसओजी की टीम ने काली नदी के पास चेकिंग अभियान चलाया था। इस दौरान एक बाइक सवार युवक को रोकने का इशारा किया गया तो वह रुका नहीं, बल्कि पुलिस पर फायरिंग कर भागने लगा। पुलिस की टीम ने बदमाश का पीछा और एनकाउंटर में उसे घायल कर पकड़ लिया।

एनकाउंटर के बाद पकड़े गए अभियुक्त का नाम सोफियान है जो जनपद शामली के तीन थानों से वांछित है। वो गौतस्करी के मामले में भी लिप्त रहा है। रॉयल बुलेटिन की खबर में उसे गौतस्कर बताया जा है। इस बीच, उसका एक वीडियो वायरल हो रहा है, जिसमें वो पुलिस वालों से उसे छोड़ने की गुजारिश कर रहा है। इस वीडियो में सूफियान बोलता दिख रहा है, ‘गलती हो गई साहब, एक बार माफी दे दो। आगे से ऐसा नहीं होगा बाबू जी।’

पुलिस ने बताया है कि बदमाश के पास से तमंचा, कारतूस और मोटरसाइकिल बरामद हुई है। बदमाश के ऊपर शामली जिले के थानों में गोकशी व चोरी के मुकदमें दर्ज है। फिलहाल बदमाश की हिस्ट्रीशीट निकाली जा रही है।

मध्य प्रदेश में गौतस्करों पर छापेमारी में मिला 150 किलो गोमाँस, जिंदा गौवंश भी छुड़ाए : प्रशासन ने की बुलडोजर कार्रवाई, ढहाए 11 अवैध घर

मध्य प्रदेश के मंडला जिले में एक गाँव से लगातार गौवंश की हत्या, तस्करी और गौमाँस के व्यापार की सूचना मिल रही थी, जिसके बाद प्रशासन ने अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई की। शुक्रवार (14 जून 2024) को प्रशासन ने गौतस्करी से जुड़े गाँव में छापेमारी की, जिसमें 11 घरों से गौवंश के अवशेष बरामद हुए। इन घरों में फ्रिज में भी भरकर गौवंश के अवशेष रखे गए थे। वहीं, 150 जिंदा गौवंश को भी मुक्ति कराया गया, इसके बाद प्रशासन ने बुलडोजर कार्रवाई को अंजाम दिया और सभी 11 घरों को ढहा दिया।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, मंडला जिले के नैनपुर थाना इलाके के भैंसवाही गाँव में मुखबिर की सूचना के आधार पर शुक्रवार की देर रात छापेमारी की गई थी, जिसमें 11 घरों में गौवंश के अवशेष बरामद हुए। इस मामले में पुलिस ने 11 एफआईआर दर्ज करते हुए एक आरोपित को गिरफ्तार भी किया था, बाकी अंधेरे का फायदा उठाते हुए फरार हो गए थे, लेकिन शनिवार को प्रशासन ने राजस्व विभाग की टीम के साथ मिलकर आरोपितों के घरों को बुलडोजर से ढहा दिया।

पुलिस की कार्रवाई के दौरान घरों के आसपास खेतों और तबेले में लगभग 150 की संख्या में जीवित गौवंश मिले। जिन्हें पुलिस टीम द्वारा मुक्त कराया गया एवँ 85 पशुओं को प्रशासन के सहयोग से सुरक्षित गोशाला पहुँचाया गया है।

प्रशासन ने पाया कि ये सभी घर अवैध रूप से सरकारी जमीनों पर बने हुए थे, जिसके बाद सरकारी जमीन को मुक्त कराने के लिए शनिवार (15 जून 2024) को बुलडोजर अभियान चलाया गया। बता दें कि इस गाँव में लंबे समय से गो तस्करी व वध करने के आरोप लगते रहे है। पहले भी कार्रवाई हुई है। लेकिन इस बार गो तस्करों के विरुद्ध बड़ी कार्रवाई पुलिस ने की है।

जानकारी के मुताबिक, पुलिस अधीक्षक मंडला के निर्देशन पर एसडीओपी नैनपुर नेहा पच्चसिया के नेतृत्व में थाना प्रभारी नैनपुर निरीक्षक बलदेव सिंह मुजालदा द्वारा थाना नैनपुर की पुलिस टीम ने इस कार्रवाई को अंजाम दिया और 11 आरोपितों के विरूद्ध थाना नैनपुर में पशु क्रुरता अधिनियम व गौवंश वध प्रतिषेध अधिनियम के तहत अपराध पंजीबद्ध किया। पुलिस टीम द्वारा दबिश में गिरफ्तार एक आरोपित से पूछताछ जारी हैं। बाकियों की गिरफ्तारी के लिए टीम का गठन किया गया है।