लल्लनटॉप 2.0 : 9 महीने पुरानी फेक न्यूज़ का फैक्ट चेक कर आरोप कर दिया साबित

फेकिंग न्यूज़ की एक खबर का फैक्ट चेक किए हुए अभी महीना भी नहीं बीता था कि हिटलर के लिंग की नाप-छाप रखने वाला और महिलाओं की योनि में कसाव पर 'गद्य' लिखने वाले 'दी लल्लनटॉप' नामक पत्रकारिता के संक्रामक रोग ने एक नया कीर्तिमान रचा है।

दी लल्लनटॉप की हालत देखकर बचपन की याद आती है, जब मेले में शाम ढलते ही आइसक्रीम, खिलौनों, चूड़ियों और मिठाई वाला चिल्लाता था – “बिक गया माल” और इस ‘बिक गया माल’ में वो 1 आइसक्रीम माँगने वाले को भी अपना सारा बचा हुआ स्टॉक भी थमाकर बस किसी भी तरह से वहाँ से भाग जाना चाहता था।

फेकिंग न्यूज़ की एक खबर का फैक्ट चेक किए हुए अभी महीना भी नहीं बीता था कि हिटलर के लिंग की नाप-छाप रखने वाला और महिलाओं की योनि में कसाव पर ‘गद्य’ लिखने वाले ‘दी लल्लनटॉप’ नामक पत्रकारिता के संक्रामक रोग ने एक नया कीर्तिमान रचा है। इस बार अपने पाठकों को मारक मजा देने की कसम को निभाते हुए दी लल्लनटॉप ने बहुत ही चतुराई से फेकिंग न्यूज़ की खबर का फैक्ट चेक तो नहीं किया लेकिन ‘वायरल’ ख़बरों के कच्चे माल के अभाव में एक ऐसी वेबसाइट की खबर का फैक्ट चेक किया जो व्यंग्य लेख लिखती है। इस वेबसाइट का नाम है ‘द फॉक्सी।’

सितंबर 12, 2018 को द फाक्सी द्वारा प्रकाशित किया गया यह व्यंग्य लेख फ़ूड ब्लॉगर्स पर लिखा गया था। लेकिन द फॉक्सी को तब शायद यह विचार नहीं आया होगा कि जर्नलिज़्म में दी लल्लनटॉप नाम की मीडिया गिरोहों की इस घातक टुकड़ी ने अपने पाठकों की तार्किक क्षमता को हल्के में लेकर मारक मजा देने की कसम खा रखी है।

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फैक्ट चेक के लिए बाजार जब कोई खबर ना हो तो लल्लनटॉप और उन्हीं की तरह की एक विचाधारा रखने वाले स्टाकर से फैक्ट चेकर बने ऑल्ट न्यूज़ ने यह सबसे आसान तरीका बना लिया है कि फेकिंग न्यूज़ का ही फैक्ट चेक कर के जीवनयापन किया जाए। वैसे भी चुनाव नतीजों से हतोत्साहित दी लल्लनटॉप को फैक्ट चेक के नाम पर गोभी के पत्तों में कीड़ों तक को ढूँढता हुआ भी देखा गया है।

क्या है मामला?

हास्य-व्यंग्य लिखने वाली वेबसाइट द फॉक्सी ने अपनी वेबसाइट पर सितंबर 12, 2018 को एक लेख लिखा जिसका शीर्षक था – “Delhi Police Arrests Food Blogger; Accused Of Enjoying Meals Without Even Having A Food Blog” यानी, दिल्ली पुलिस ने एक ऐसे व्यक्ति को गिरफ्तार किया, जो अपने आप को फ़ूड ब्लॉगर बताकर कैफे और रेस्टॉरेंट्स से फ्री में खाना खाता था, जबकि उसका कोई फ़ूड ब्लॉग था ही नहीं।

इस हेडलाइन को देखकर ही प्रथमद्रष्ट्या यह स्पष्ट हो जाता है कि यह कोई व्यंग्य होगा। लेकिन जब बात ‘दी लल्लनटॉप’ की आती है तो मामला जरा दूसरा हो जाता है। दी लल्लनटॉप ने इस हेडलाइन को चुनाव के बाद समय निकालकर बेहद मार्मिक तरीके से इसका फैक्ट चेक अपने कर्मचारी से करवाया और फिर उसे यह यूट्यूब पर पढ़वाया भी गया क्योंकि अगर पकड़े भी गए तो दी लल्लनटॉप शायद जानता है कि जवाब में अपने पाठकों को ‘ही ही ही’ कर के अपनी विश्वसनीयता साबित कर सकता है और साहित्यिक तरीके से अपने पाठक को वो कसम याद दिला सकता है, जिसमें उन्हें मारक मजा दिलवाने की अटूट कसम खाई थी।

लगभग नौ महीने पुरानी इस फेकिंग न्यूज़ को दी लल्लनटॉप ने गंभीरता से लेते हुए इसे यूट्यूब पर भी बेचकर अपने पाठकों को जमकर उल्लू बनाया है। द फॉक्सी द्वारा अपने लेख में लिखे गए काल्पनिक नाम, स्वाति आदि को बेहद मार्मिक तरीके से दी लल्लनटॉप ने पड़ताल करते हुए अंत में निष्कर्ष भी निकालते हुए बताया कि इस फ़ूड ब्लॉगर को ऐसा करने के लिए जेल भी हुई।

निम्न तस्वीरों में आप ‘फैक्ट चेक’ की निर्मम हत्या होते हुए अपनी नग्न आँखों से देख सकते हैं

फैक्ट चेक हम शर्मिंदा हैं
ओह !! बेहद क्रिएटिव था, हालाँकि महँगा पड़ा। ही ही ही …
खोजी स्तर – जेम्स बॉन्ड तृतीय

बता दें कि दी लल्लनटॉप में ऐसा चलता रहता है। अक्सर इन्हें ट्रैफिक जुटाने के लिए MEME बनाने वाले पेजों पर 10 पेजों के गद्य लिखते हुए भी पाया जाता है, जिसमें किसी न किसी तरीके से ये ब्राह्मणवाद से लेकर पितृसत्ता और मनुवाद को ठूँसकर ज्ञान देते हुए पाए जाते हैं। इसी तरह से हाल ही में दी लल्लनटॉप ने फेकिंग न्यूज़ की भी एक खबर का फैक्ट चेक किया था और अपने पाठकों को समझाया था कि यह फेकिंग न्यूज़ उन्हें फेक लगी इसलिए इसका फैक्ट चेक किया गया।

इसी तरह से गाड़ियों पर EVM भरकर ले जाने का भी झूठ दी लल्लनटॉप ने जमकर बेचा लेकिन फिर भी राहुल गाँधी की EVM हैक होने से नहीं रोक पाए। यह मीडिया का इतना बेशर्म पहलू है कि स्पष्टीकरण के बाद भी दी लल्लनटॉप के द्वारा यह खबर सोशल मीडिया से लेकर बाकायदा यूट्यूब तक पर दिखाकर जमकर भ्रांतियाँ, अफवाह और फेक न्यूज़ फैलाई गई।

हमारी सलाह

दी लल्लनटॉप को एवेंजर्स से समय में पीछे जाने वाली मशीन लाकर हिटलर और तमाम समकालीन लोगों के अंग विशेष की नाप-छाप पर ही ध्यान देना चाहिए और इस फैक्ट चेक के टंटे में नहीं पड़ना चाहिए। या फिर अपना नाम भी फेकिंग न्यूज़ वर्जन 2.0 कर लेना चाहिए। फिर भी अगर समय बिताने के लिए कुछ काम करना ही हो तो जेसीबी की खुदाई देखकर जीवनयापन कर सकते हैं। यदि हिटलर के लिंग की नाप रखने से दी लल्लनटॉप को फुरसत मिले, तो उसे समय निकालकर नरेंद्र मोदी द्वारा जारी की गई कुछ योजनाओं का लाभ भी उठाना चाहिए, (यदि नरेंद्र मोदी की योजनाओं को इस्तेमाल करने में उन्हें कोई आपत्ति ना हो तभी) और प्रधानमंत्री मुद्रा योजना द्वारा कुछ लोन लेकर स्वरोजगार की राह अपनानी चाहिए। लोन के लिए अप्लाई करने की विस्तृत प्रक्रिया इस लिंक पर पढ़ सकते हैं।

अभी हटा ली वीडिओ और अपडेट कर दिया आर्टिकल

हालाँकि, अब लल्लनटॉप ने विडियो हटा दिया है और आर्टिकल को भी अपडेट किया है। लेकिन, मूर्खता पकड़े जाने पर भी उन्होंने अपनी प्रकृति नहीं त्यागी और खुद को दोष देने की जगह फेक न्यूज़ के फैलाव पर दोष मढ़ा। जो लोग meme तक के फैक्ट चेक करते हों, उनके द्वारा ऐसा लंगड़ा कुतर्क रखना ठगी ही है। आप भी मूर्खतापूर्ण ‘नोट’ को यहाँ पढ़ लीजिए कि अपने आलस्य से इन्होंने न सिर्फ सितम्बर 2018 की ‘ख़बर’ का फैक्ट चेक किया बल्कि, ये भी नहीं देखा कि जब फैक्ट चेक कर रहे हैं तो कम से कम उसका उद्गम तो जान लें। फैक्ट चेक के समय तो आम लेख से कहीं ज्यादा सतर्कता होनी चाहिए, लेकिन लल्लनटॉप को क्या, वो तो मारक मज़ा देते हैं।

खेद प्रकट करते हुए भी दे दिया मारक मज़ा
लल्लनटॉप का वो मार्मिक वीडियो, जिसकी वजह से फैक्ट चेक समाज में उनकी निंदा हो रही है
जादू देखोगे ? – एक… दो …तीन… आया मारक मज्जा?
क्या दी लल्लनटॉप ने आदित्य के पास जाकर उसे बताया कि उन्होंने आदित्य की भावनाओं के साथ खिलवाड़ किया है?
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