जिस हिंदुत्व का रोना रोकर पाकिस्तान से लेकर भारत तक वाममार्गी इसे खतरनाक जताने की कोशिश करते हैं उसका न तो दहशतगर्दी का अतीत है, न वर्तमान। फिर भी वही है खतरा।
ऑल्टन्यूज़ अभी भी अपने इस दावे पर खड़ा है कि इसमें मुस्लिम नजरिए जैसी कोई बात नहीं थी और यह मुस्लिमों को निशाना बनाने के लिए गढ़ी गई, साथ ही यह भी रिपोर्ट को 'डेवलपिंग स्टोरी' बताते हुए खत्म किया है।
किसी भी राज्य की पुलिस, हमारे पीछे अपनी राजनैतिक मजबूरियों के कारण भले ही लग जाए, लेकिन वो ऑपइंडिया से खबरें डिलीट नहीं करवा सकते। कानूनी रूप से लड़ोगे, हम पहले से ज्यादा तैयार हैं। हम यहाँ टिकने आए हैं, खबरें डिलीट करने नहीं।
ज्योतिरादित्य सिंधिया ने अपने ट्विटर बॉयो से कभी BJP लिखा ही नहीं। लेकिन, मेनस्ट्रीम मीडिया ने झूठी खबर के बहाने बीजेपी से मनमुटाव का प्रोपेगेंडा रच दिया।
प्रशासन भले इसे पटाखे बनाने के दौरान हुआ विस्फोट बता रहा हो, लेकिन मीडिया रिपोर्टों से कई सवाल खड़े हो रहे हैं। नजीर के बच्चों के बयान भी मेल नहीं खा रहे।
ये अरविंद केजरीवाल की सरकार है। महिला पत्रकार को हेयर कटिंग की शुभकामना मिल रही है। पर उनकी व्यथा अनसुनी है जो कोरोना टेस्ट के लिए भटक रहे। जिन्हें अस्पताल एडमिट नहीं कर रहे।
इस कलाकार के इरादे इस दिशा में तब और मजबूत हुए, जब 19 जनवरी को उन्होंने कश्मीरी पंडितों के साथ हुए अत्याचार पर 30 साल बीत जाने पर भी लोगों को चुप देखा।