कालकेय एक विलुप्त हुई भाषा का जानकार था। साउंड साइंटिस्ट डॉक्टर डैंग 'गूँज की गूँज' पर एक्सपेरिमेंट कर रहा था। थानोस जनसंख्या नियंत्रण विशेषज्ञ था। मोगैम्बो स्टाइलिश ड्रेस वाला केमिकल इंजीनियर था। गब्बर माँओं को उनके बच्चों को सुलाने में मदद करता था। बुल्ला एक कवि था। शाकाल पशुपालन का पितामह था।
शुभकामना संदेश को लेकर समुदाय विशेष के लोगों ने जहीर को किया ट्रोल। ट्रोल करने वाले उमर को राणा अय्यूब, निखिल वागले और सबा नकवी जैसे लिबरल पत्रकारों के साथ ही संजय निरुपम जैसे कॉन्ग्रेसी भी फॉलो करते हैं।
भीड़ में क़रीब 20 संदिग्ध लोग शामिल थे, जिन्होंने पटाखे उड़ाने से मना किया। जवाब में अमरेश व उनके दोस्तों के साथ उनकी कहासुनी हो गई। इसके बाद एक ने अमरेश के दोस्त की कनपट्टी पर बन्दूक रखा और अन्य ने धारदार हथियारों से हमला कर दिया।
शाहरुख द्वारा शेयर की इस तस्वीर को अपलोड किए कुछ वक़्त ही गुज़रा था कि एक यूज़र ने उन्हें "झूठा मुस्लिम (मुनाफिक)" कहा और उन्हें ईद की शुभकामनाएँ दीं। हैरानी इस बात पर होती है कि हिन्दू त्यौहार के लिए नफ़रत इतनी प्रबल है कि...
आइएस सरगना से सहानुभूति दिखाने वाला वाशिंगटन पोस्ट अकेला नहीं है। ब्लूमबर्ग ने भी बगदादी का महिमामंडन किया है। उसके मुताबिक, "बगदादी छोटे से गॉंव से आया ऐसा शख्स था जिसने कई बाधाओं को पार कर मुकाम हासिल किया।"
पुलिस ने अशफाक और मोइनुद्दीन का आमना-सामना आसिम से करवाया। देखते ही दोनों ने आसिम को पहचान लिया। अशफाक ने उससे कहा, "ये काम मैंने कर दिखाया।" आसिम ने ही दोनों को हत्या के लिए उकसाया था।
"वह एक दहशतगर्द था, जिसने हमेशा लोगों को डराने की कोशिश की। लेकिन अपनी ज़िंदगी के आख़िरी लम्हों में ख़ुद बेहद डरा और घबराया हुआ था। अमरीकी सेना ने उसका पीछा किया और मौत के मुॅंह तक पहुँचाया। वह सुरंग में गिरकर कुत्ते की मौत मरा।"
“बीजेपी रोटेशन आधारित सीएम पद के लिए सहमत नहीं होगी। उपमुख्यमंत्री का पद शिवसेना को दिया जा सकता है। आदित्य ठाकरे के लिए उपमुख्यमंत्री पद पर शिवसेना को मान जाना चाहिए। फडणवीस मुख्यमंत्री का पद सँभाले।”
"बकरा ईद पर, वे हमें अपना दरवाज़ा खुला रखने के लिए मजबूर करते हैं और वे हमारे घर के सामने बकरियों का वध करते हैं। लेकिन, मैंने कभी कुछ नहीं कहा क्योंकि यह उनका त्योहार है। क्योंकि हम हिन्दू हैं, हमारा मज़ाक उड़ाया जाता है, दबाव डाला जाता है और ऐसी स्थिति बनाई जाती है कि हम जल्द ही इस क्षेत्र को छोड़ दें।"
एक के सामने जाति की चादर ओढ़े प्रभावशाली राजनीतिक बिरादरी था, तो दूसरे के सामने धर्म की खाल में लिपटे दरिंदे हैं। बावजूद इसके इन्होंने जो जज्बा दिखाया वो बताता है कि हमें विरासत के नाम पर उड़ान भरती महिलाओं से ज्यादा इनके हौसले की दरकार है।