प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 2 दिन के दौरे पर तुर्की जाने वाले थे लेकिन वहाँ के राष्ट्रपति द्वारा संयुक्त राष्ट्र जनरल असेंबली में अनुच्छेद 370 निरस्त करने के ख़िलाफ़ दिए गए बयान को भारत ने गंभीरता से लिया है क्योंकि यह भारत का आंतरिक मामला है।
अर्थशास्त्री बनर्जी ने कॉन्ग्रेस को झटका देते हुए कहा है कि वो नहीं मानते हैं कि 'न्याय योजना' एक अच्छी तरह तैयार की गई योजना थी। साथ ही उन्होंने इस योजना की रूपरेखा तैयार करने के लिए ख़ुद को ज़िम्मेदार बताने से भी इनकार कर दिया। उन्होंने कहा कि इसे लागू करने के लिए इनकम टैक्स बढ़ाना होता।
ED ने रतुल पुरी के खिलाफ चार्जशीट दायर की है। इसके मुताबिक लेनदेन के पैसे भारत और विदेशों के महँगे होटलों में ऐशो-आराम पर खर्च किए गए। प्रोवोकेटर नाम के नाइटक्लब में तो एक ही रात में उसने 11,43,980 डॉलर खर्च कर दिए थे।
पहले वीडियो में वह कमरा है जहॉं संदिग्ध हत्यारे ठहरे थे। यहीं से पुलिस ने खून लगा कुर्ता बरामद किया है। दूसरा वीडियो उस समय का है जब अशफ़ाक़ और मोईनुद्दीन होटल में कमरा लेने पहुॅंचे थे। तीसरा वीडियो कमलेश तिवारी के कार्यालय जाने के लिए होटल से निकलने के वक्त का है।
घुसपैठ में नाकाम रहने पर पाकिस्तानी सेना ने सीजफायर का उल्लंघन करते हुए भारी गोलाबारी की। सेना की जवाबी कार्रवाई में पाकिस्तान को भारी नुकसान उठाना पड़ा। घाटी के लोगों ने भी पाकिस्तान को मुॅंहतोड़ जवाब देने की अपील की है।
होटल से हत्यारे भगवा कपड़ा पहनकर कमलेश तिवारी से मिलने पहुॅंचे। हत्या के बाद होटल आये और कपड़े बदल कर फरार हो गए। होटल मालिक के पास से आरोपियों की आईडी भी मिली है, जिस पर नाम के साथ सूरत का पता दर्ज है।
हिन्दू ये देख कर सिनेमा नहीं देखता कि उसमें पांडे है कि खान। हिन्दू ये देख कर सामान नहीं खरीदता कि दुकानदार चौधरी है कि मलिक। हिन्दुओं का कोई हलाल सिस्टम है ही नहीं जहाँ बकरे के पैदा होने से ले कर, उसके कटने, छिलने, पैक होने और दुकान में रखे जाने तक बस एक ही मजहब के लोग हैं।
महिला मड़ियांव की रहने वाली है। उसने पूछताछ में बताया कि युवकों ने उससे खुर्शेदबाग कॉलोनी का पता पूछा था। शुरुआती जॉंच के आधार परा पुलिस और एटीएस का कहना है कि तिवारी की हत्या से महिला का कोई संबंध नहीं है।
हाल ही में ख़बर आई थी कि पाकिस्तान ने हिज़्बुल, लश्कर और जमात को अलग-अलग टास्क सौंपे हैं। एक टास्क कुछ ख़ास नेताओं को निशाना बनाना भी था? ऐसे में इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता कि कमलेश तिवारी के हत्यारे किसी आतंकी समूह से प्रेरित हों।
करीब दशक भर पहले कॉन्ग्रेस की राजनीति से तौबा कर लेने वाला 'विरार का छोरा' फिर से लौटा है। भगवा तिलक लगाकर, भगवा पार्टी के कैंडिडेट का प्रचार करने के लिए, भगवा गमछा गले में टाँगे।