दंगाइयों से सख्ती दिखाने के लिए एक वर्ग यूपी पुलिस को बदनाम करने के लिए प्रोपेगेंडा रचने में लगा है। इस बीच रायबरेली से ऐसी तस्वीरें सामने आई है जो बताती है कि आगजनी करने वालों से नरमी नहीं दिखाने वाली यही पुलिस आग में फॅंसे लोगों के लिए जान पर खेल जाती है।
मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट कपिल कुमार ने जमानत याचिका खारिज करते हुए कहा कि आरोपितों को राहत देने के लिए उनके पास पर्याप्त आधार नहीं है। जिसके कारण उन्हें बेल नहीं दी जा सकती है।
उन्होंने इस बात को भी स्वीकार किया कि कि हमारे मुस्लिम में उतना पढ़ा-लिखा समाज नहीं है। इसके आगे उन्होंने कहा कि मुस्लिम
गुमराह हैं और इसलिए वो विरोध-प्रदर्शनों का हिस्सा बन जाते हैं और हाथ में हथियार उठा लेते हैं।
देश के उप-मुख्यमंत्री दिनेश शर्मा भी रविवार को मीडिया से बातचीच में कह चुके हैं कि हिंसा में शामिल लोग प्रतिबंधित संगठन सिमी से जुड़े पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएफआई) के हैं
Legal Righs Ptotection Forum ने घोषणा की कि उन्होंने पादरी के ख़िलाफ़ केंद्रीय गृह सचिव और FCRA प्रभाग (MHA) में ईसाई धर्मांतरण के सन्दर्भ में शिक़ायत दर्ज़ करवाई है। शिक़ायत में माँग की गई है कि ईसाई संगठन के FCRA लाइसेंस को रद्द किया जाए, साथ ही इसके बैंक खातों को ज़ब्त किया जाए
पंकज ने खुद को गौरी तिवारी का बेटा बता तहसीलदार को झॉंसा देने की कोशिश की। लेकिन, एक पुलिसकर्मी ने कहा- साहब यह भी पत्थरबाजी कर रहा था। इसे मैंने खुद देखा है। इसके बाद कथित पंकज ने मुॅंह खोला तो उसका भेद भी खुल गया।
ध्यान देने वाली बात यह है कि इन ज़िंदा व इस्तेमाल की गई कारतूसों की बरामदगी 'शांतिपूर्ण ढंग से कर रहे विरोधियों’ से हुई है। ऐसे में यह सवाल एकाएक ही उठ जाता है कि दंगाइयों का अगर यह ‘शांतिपूर्ण ढंग से किया गया विरोध-प्रदर्शन है, तो फिर अशांतिपूर्ण तरीक़ा क्या होगा?
वीडियो में उपद्रवियों की भीड़ को मंदिर में प्रवेश करते हुए और मूर्ति को तोड़ते हुए देखा जा सकता है। वीडियो में मौजूद शख्स बोलते हुए सुना जा सकता है, “हिंदुओं के साथ खिलवाड़ किया गया है। वो लोग हमारे मंदिर में घुसकर मूर्तियों को तोड़ रहे हैं।”
यमुनानगर में रहने वाले पाकिस्तानी हिंदुओं ने भूपेंद्र सिंह हुड्डा को चुनावों में अपना समर्थन दिया था, क्योंकि हुड्डा कहते थे कि उन्हें नागरिकता दिलवाएँगे, लेकिन आज जब मोदी सरकार ने बिल पास कर दिया है, तो वे इसका विरोध कर रहे हैं।
हयातुननिसा एक सरकारी उच्च प्राथमिक विद्यालय में शिक्षिका थी। उसने दो-दो बार कर्ज उठाकर शौहर मुस्तफा को बिजनेस के लिए दिया। लेकिन, मुस्तफा नहीं सुधरा। इस बात को लेकर अक्सर दोनों के बीच विवाद होता रहता था।