कहा जाता है कि भाजपा अध्यक्ष जे पी नड्डा के पास भाजपा बिहार के नेता यह समस्या ले कर गए थे कि नीतीश को मुख्यमंत्री न बनाया जाए। नड्डा ने विचार करने के बाद अमित शाह से चर्चा की, अमित शाह भी सहमत दिखे। फिर बात....
आखिर अस्सी-नब्बे के दशक में जो लोगों को अपने उपनाम छुपाने पड़े थे, वो किसे याद नहीं? एक कथित सेक्युलर चैनल के ईनामी पत्रकार भी तो अपना नाम 'कुमार' तक ही बताते हैं, पूरा नाम नहीं बताते ना? क्यों छुपाना पड़ा था, ये याद तो आता है!
मध्य प्रदेश में किसानों के बीच कृषि कानूनों को लेकर फैलाए जा रहे दुष्प्रचार से भाजपा ने कैसे निपटी? वो मुद्दा, जिसने कॉन्ग्रेस से किसानों का विश्वास छीन लिया।
एक 'जातउद्घोषक' सरकार में एक जाति विशेष की महिलाओं के चुन-चुन कर बलात्कार किए जाने की बात हो या बाहुबलियों की अतिशयोक्ति, बिहार की ललनाओं की परीक्षा सदियों तक चली।
जब बर्बरता तुम्हारी शिक्षा की आधारशिला है, हत्या तुम्हारे लिए एक सम्मानजनक कर्म है, बलात्कार पुण्य और काफिरों के धार्मिक स्थल तोड़ना जन्नत-उल-फिरदौस में कमरे रिजर्व करवाता है, फिर कोई सामान्य बुद्धि-विवेक वाला तुमसे या तुम्हारे मजहब को स्नेहाशिक्त भाव से कैसे देख सकता है?