विचार

भारत में इस्लामोफोबिया कौन फैला रहा? वो अमेरिका और यूरोप जिन्होंने 14 इस्लामी देशों पर हमले किए

अमेरिका, यूरोप के बाद इस्लामोफोबिया का प्रयोग अब भारत के लिए भी! लगातार एक झूठ फैलाया जा रहा कि मुस्लिम भारत में सुरक्षित नहीं और हिंदू...

ऑपइंडिया और इनके सम्पादकों के हालिया उत्पीड़न पर CEO राहुल रौशन का संदेश

हमले हमें परेशान नहीं करते हैं, वास्तव में, अगर वे हम पर हमला नहीं करते हैं, तो हमें ऐसा लगता है कि हम कुछ सही नहीं कर रहे हैं, कुछ दमदार काम नहीं है। इसलिए सबसे पहले, ऐसे नफरत करने वालों को धन्यवाद, वे हम पर हमला करते रहें।

…जब जेल में महात्मा गाँधी का बेटा और नाथूराम गोडसे की हुई मुलाकात, और फिर लिखना पड़ा उन्हें एक पत्र

"महात्मा गाँधी के बेटे देवदास शायद इस उम्मीद में नाथूराम गोडसे से मिलने गए कि कोई डरावनी शक्ल वाला, खून का प्यासा कातिल दिखेगा, लेकिन..."

कोरोना संकट में भी सरकार का साथ देती नजर आई जनता, विपक्ष उलझा रहा राजनीति में

जनता ने इस महामारी से निपटने में जितनी समझदारी, संयम और सहयोग दिया है, विपक्षी राजनीतिक दलों की ओर से उतना ही असहयोगी रूख रहा है।

कोर्ट में बैठी जनता अगर न्याय करती तो गोडसे निर्दोष घोषित होते: याचिका की सुनवाई करने वाले जज खोसला

"गोडसे सिरफिरे इन्सान बिल्कुल भी नहीं थे। वो पुणे में रहते थे जहाँ देश विभाजन का कोई असर नहीं हुआ था। वो फिर भी गाँधी को मारने गए क्योंकि..."

मजदूरों के आँसू बेच रहा इंडिया टुडे, भरता है नैतिकता का दम्भ: दूसरों को पत्रकारिता सिखाने वालों का सच

कैपिटलिज़्म का मॉडल और सोशलिज्म का दिखावा... इंडिया टुडे को हम उनकी ही परिभाषाओं पर तौल रहे हैं, जो मजदूरों की तस्वीरें बेच कर कमा रहे।

ब्रा, पैंटी, योनि, सेक्स, लिंग, वीर्य से करियर बनाने वाले संपादक के पत्रकारिता वाले कुछ लल्लनटॉप प्रयोग

ब्रा, पैंटी, लिंग, लिपस्टिक.. इन जैसे ही कुछ मिलते-जुलते विषयों में अगर आप रूचि रखते हैं तो आपकी पहली मंजिल दिल्ली पालिका बाजार या सरोजिनी मार्किट नहीं बल्कि दी लल्लनटॉप होना चाहिए।

चूँकि हलाल कानूनी है, इसलिए दूसरे धर्मों द्वारा ‘हम समुदाय विशेष को काम नहीं देते’ लिखना भी जायज है

दुर्भाग्यवश खास समुदाय ने पीड़ितों की तरह रोने की आदत बना ली है, जबकि वो हर तरफ हावी हैं। भारतीय कानून एजेंसियों को इस तरह की आपत्तियों को बढ़ावा नहीं देना चाहिए, क्योंकि.....

रुबिका लियाकत के मजहब पर प्रिंट का हमला: मुस्लिम वो है जो देश से पहले मजहब देखे?

द प्रिंट जैसे वामपंथी पोर्टल की दिक्कत यह है कि रुबिका लियाकत मुस्लिम होकर भी 'मजहबी वजूद' के उनके एजेंडे को आगे नहीं बढ़ा रहीं।

ज़हर-ए-मुनव्वर राणा: महफिल नहीं मिल रही तो ट्विटर से फैला रहा है नफरत, हिन्दुओं को ले कर घृणा

उर्दू के मशहूर और विवादित शायर मुनव्वर राना ने एक विवादित ट्वीट में लिखा कि भारत में 35 करोड़ इंसान और 100 करोड़ जानवर रहते हैं।

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