विचार

अयोध्या: स्मृतियों को सहेजने की जरूरत ताकि दुनिया भूल न सके हिंदुओं का दमन

अयोध्या की पुण्यभूमि की खुदाई शुरू हो गई है। भव्य राम मंदिर निर्माण के लिए इसे तैयार किया जा रहा है। भारत का वास्तविक इतिहास प्रस्फुटित होने लगा है।

हिन्दूघृणा की फैक्ट्री है पाताल लोक: अजीत भारती का रिव्यू | Ajeet Bharti on PaatalLok and Hinduphobia in Bollywood

पाताल लोक वेबसीरीज की पटकथा लिखने वाले ने पहले ही सोच लिया था कि किस तरह का प्रोपेगेंडा फैलाना है और फिर इसी के इर्द-गिर्द कहानी रच दी गई।

TikTok में पोर्न, रेप, हिंसा: पूर्व कर्मचारी ने चाइनीज कम्पनियों की गुलाम बनाती मानसिकता का किया पर्दाफाश

चाइनीज कम्पनियाँ भारतीय कर्मचारियों की नहीं सुनतीं, उन पर अपना आदेश थोपती हैं। TikTok विवाद के बीच समझें उनके कामकाज की पूरी सच्चाई।

Zee न्यूज की मरकज के साथ तुलना केवल कुंठा… जमात के गुनाहों पर पर्दा डालने का और तरीका तलाशो लिबरलों

Zee न्यूज के कर्मचारियों का कोरोना संक्रमित होना वह संकट है, जिससे पूरी दुनिया आज जूझ रही है। जमातियों की तरह उन्होंने इसे छिपाने की कोशिश नहीं की।

भारत में इस्लामोफोबिया कौन फैला रहा? वो अमेरिका और यूरोप जिन्होंने 14 इस्लामी देशों पर हमले किए

अमेरिका, यूरोप के बाद इस्लामोफोबिया का प्रयोग अब भारत के लिए भी! लगातार एक झूठ फैलाया जा रहा कि मुस्लिम भारत में सुरक्षित नहीं और हिंदू...

ऑपइंडिया और इनके सम्पादकों के हालिया उत्पीड़न पर CEO राहुल रौशन का संदेश

हमले हमें परेशान नहीं करते हैं, वास्तव में, अगर वे हम पर हमला नहीं करते हैं, तो हमें ऐसा लगता है कि हम कुछ सही नहीं कर रहे हैं, कुछ दमदार काम नहीं है। इसलिए सबसे पहले, ऐसे नफरत करने वालों को धन्यवाद, वे हम पर हमला करते रहें।

…जब जेल में महात्मा गाँधी का बेटा और नाथूराम गोडसे की हुई मुलाकात, और फिर लिखना पड़ा उन्हें एक पत्र

"महात्मा गाँधी के बेटे देवदास शायद इस उम्मीद में नाथूराम गोडसे से मिलने गए कि कोई डरावनी शक्ल वाला, खून का प्यासा कातिल दिखेगा, लेकिन..."

कोरोना संकट में भी सरकार का साथ देती नजर आई जनता, विपक्ष उलझा रहा राजनीति में

जनता ने इस महामारी से निपटने में जितनी समझदारी, संयम और सहयोग दिया है, विपक्षी राजनीतिक दलों की ओर से उतना ही असहयोगी रूख रहा है।

कोर्ट में बैठी जनता अगर न्याय करती तो गोडसे निर्दोष घोषित होते: याचिका की सुनवाई करने वाले जज खोसला

"गोडसे सिरफिरे इन्सान बिल्कुल भी नहीं थे। वो पुणे में रहते थे जहाँ देश विभाजन का कोई असर नहीं हुआ था। वो फिर भी गाँधी को मारने गए क्योंकि..."

मजदूरों के आँसू बेच रहा इंडिया टुडे, भरता है नैतिकता का दम्भ: दूसरों को पत्रकारिता सिखाने वालों का सच

कैपिटलिज़्म का मॉडल और सोशलिज्म का दिखावा... इंडिया टुडे को हम उनकी ही परिभाषाओं पर तौल रहे हैं, जो मजदूरों की तस्वीरें बेच कर कमा रहे।

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