कंगना रनौत 'महिला-विरोधी' हैं, क्योंकि वो बलात्कारियों का समर्थन नहीं करतीं। वामपंथी गैंग नाराज़ है, क्योंकि वो चाहता है कि कंगना अँग्रेजों के तलवे चाटे और महाभारत को 'मिथक' बताएँ। न्यूज़लॉन्ड्री निर्भया की माँ को उपदेश देकर कह रहा है ये 'न्याय' नहीं बल्कि 'बदला' है।
एससी/एसटी कमीशन के चेयरमैन ने बताया कि भारत में जिन शरणार्थियों को सीएए के तहत नागरिकता मिलने वाली है। उनमें 70 से 75 प्रतिशत दलित, ओबीसी और गरीब है। जिन्हें अफगानिस्तान, पाकिस्तान और बांग्लादेश से भगाया गया था।
"सहारनपुर जिले में महिलाओं का हलाला करवाने के लिए मदरसों में लड़कों को रखा जाता है। यही नहीं, उम्र और सुन्दरता के अनुसार वो महिलाओं के हलाला का पैसा लेते हैं।" अब सोचिए, इनकी स्थिति कितनी बदतर है। लेकिन फिर भी आवाज़ उस पर उठानी है, जिस पर इनका समुदाय इजाजत दे।
आज विधु कहते हैं कि सब कुछ भुलाकर उन लोगों से कश्मीरी पंडितों को गले मिल लेना चाहिए, प्रेम करना चाहिए और सब भुला देना चाहिए। एनडीटीवी पत्रकार रवीश कुमार कहते हैं कि निर्देशक ने वर्षों की इस चुप्पी को तोड़ने के लिए सिर्फ एक 'सॉरी' की गुज़ारिश की है, उन्होंने बहुत ज्यादा तो नहीं माँगा।
अरविन्द केजरीवाल ने लोगों को मुफ्त बिजली और पानी देने के बहाने साफ़ पानी, बिजली की निरंतरता, सस्ता इलाज और अच्छी शिक्षा जैसे कई अन्य बुनियादी जरूरतों की ओर ध्यान ही नहीं जाने दिया है। वहीं भाजपा दिल्ली में सरकार बनाने के एक मौके के इन्तजार में है।
ये किसी फिल्म के दृश्य नहीं हैं जहाँ नाटकीयता के लिए आरी से किसी को काटा जाता है, किसी की खोपड़ी में लोहे का रॉड ठोक दिया जाता है, किसी की आँखें निकाल ली जाती हैं, किसी के दोनों गाल चाकू से चमड़ी सहित छील दिए जाते हैं, किसी के तिलक लगाने वाले ललाट को चाकू से उखाड़ दिया जाता है…
चुनावी बिगुल बजने से पहले दिल्ली सरकार ने करोड़ों खर्च कर दिल्ली के कोने-कोने में 3 स्कूलों के विज्ञापन टँगवाए। ये स्कूल हैं- वेस्ट विनोद नगर, खिचड़ीपुर और राउज एवेन्यू। वेस्ट विनोद नगर और खिचड़ीपुर, दोनों सिसोदिया के विधानसभा क्षेत्र पटपड़गंज का हिस्सा है। वहीं, राउज एवेन्यू दिल्ली के पॉश इलाके में।
इस वीडियो को देखकर शायद ही किसी के मन में यह सवाल नहीं उठेगा कि फ़िल्म ‘छपाक’ में एसिड हमले की शिकार हुई जिस लक्ष्मी अग्रवाल का किरदार दीपिका ने निभाया, उसे गंभीरता से लिया भी होगा या नहीं?
खतरा गली-गली पसर गया है। नहीं चेते तो आज का कोई अशफाक कल आपके कमलेश का गला रेत जाएगा। मजहबी कट्टरपंथ को आज दफन नहीं किया तो बात हिंदुत्व के कब्र खुदने जैसे नारों पर ही नहीं रुकेगी। समाज के तौर पर इससे लड़ना ही होगा।
इन वीडियो में 'लिबरल्स' की भीड़ बच्चों को कन्धों पर बिठाकर जो नारे लगवा रही है, वो स्पष्ट करता है कि इस सारे हंगामे का कारण कोई कानून नहीं बल्कि कुछ चुनिंदा लोगों का सत्ता में होना। वीडियो में बच्चा नारे लगाते हुए कहता है- 'हम ले के रहेंगे आज़ादी, तेरा बाप भी देगा आज़ादी, तेरी माँ भी देगी आज़ादी।"