हाल ही में ख़बर आई थी कि पाकिस्तान ने हिज़्बुल, लश्कर और जमात को अलग-अलग टास्क सौंपे हैं। एक टास्क कुछ ख़ास नेताओं को निशाना बनाना भी था? ऐसे में इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता कि कमलेश तिवारी के हत्यारे किसी आतंकी समूह से प्रेरित हों।
गौरी लंकेश की हत्या के बाद पूरे राइट विंग को गाली देने वाले नहीं बता रहे कि कमलेश तिवारी की हत्या का जश्न मना रहे किस मज़हब के हैं, किसके समर्थक हैं? कमलेश तिवारी की हत्या से ख़ुश लोगों के प्रोफाइल क्यों नहीं खंगाले जा रहे?
गुजरात पुलिस और योगी की पुलिस को शक की नज़र से देखने वाले यह भी कह सकते हैं कि सबूत मैन्युफैक्चर्ड है। ऐसे लोगों के लिए राँची के काँके में बिरसा मुंडा के नाम पर एक अस्पताल है। वहाँ अच्छी व्यवस्था है।
जब अभियुक्त हिन्दू हो, पीड़ित कट्टरपंथी तब ये शरियत से चलते हैं। तब फतवा निकलता है, तब इसी राष्ट्र के संविधान की होली जला कर कट्टरपंथी वही करता है जो एक बड़ा कट्टरपंथी कहीं से बैठ कर आदेश देता है।
भगवान राम को दारूबाज बताने वाला 5 बार मुख्यमंत्री रहा। 'सेक्सी दुर्गा' अभिव्यक्ति की आज़ादी है। एमएफ हुसैन ने भारत माता की नंगी तस्वीर बनाई। ओवैसी ब्रदर्स लगातार हिन्दुओं को ललकारते हैं। ज़ाकिर नाइक ने भगवान गणेश का अपमान किया। लेकिन, गला रेता गया कमलेश तिवारी का।
वे पर्दे के पीछे से साजिश रचेंगे और डराने के लिए खून भी बहाएँगे। वे चाहेंगे कि माहौल बिगड़े ताकि मंदिर निर्माण टलता रहे। वे नक्शे को फाड़ेंगे, क्योंकि वे जानते हैं कि जिस दिन हिंदू जगेगा उनका इतिहास हर गली-नुक्कड़ पर फाड़ा जाएगा।
वरिष्ठ पत्रकार रवीश कुमार मेक्सिको और अमेरिका के झगड़े पर बात करते रहे। डोनाल्ड ट्रम्प से लेकर मानव तस्करी तक, रवीश कुमार ने इस मुद्दे को मथ कर रख दिया लेकिन पूरे 'प्राइम टाइम' के दौरान उन्हें कमलेश तिवारी पर बात करने के लिए एक मिनट भी नहीं मिला।
सत्ता के परिवर्तन और समय के चक्र से कभी-न-कभी कॉन्ग्रेस, माकपा, हिन्दू कारसेवकों पर गोली चलवाने वाले 'मुल्ला मुलायम' की सपा जैसे लोग वापिस आ ही जाएँगे। उस समय अगर राम मंदिर सरकारी नियंत्रण में रहे तो क्या होगा, ये कभी सोचा है?
चूँकि भाषाई बाध्यता है कि इस नृशंस हत्या का जश्न मनाने वाले जिहादी मानसिकता के मुसलमानों को आप एक स्तर तक ही कुछ कह सकते हैं वरना इनकी परवरिश तो नाली के कीचड़ में मिली विष्ठा में लोटते उस जीव की तरह ही है जिसका नाम लेना मैं चाहता नहीं।