सामाजिक मुद्दे

‘हिन्दू’ शब्द पर इतिहास ज्ञान खराब है कमल हासन का, बस 2200 सालों से चूके हैं

फारसी साम्राज्य के राजा डैरियस-प्रथम के अभिलेखों में हिन्दू शब्द का ज़िक्र ईसा से 6 शताब्दी पूर्व का है, जबकि इस्लाम ईसा से 600 साल बाद का। और मुगलों का हिंदुस्तान में आगमन तो 16वीं शताब्दी में हुआ। यानि विशुद्ध तकनीकी रूप से भी कमल हासन 22 शताब्दियों की ‘मामूली’ सी चूक कर गए हैं।

ध्रुव त्यागी हत्याकांड: मीडिया, मज़हब और परिवार में पलती जिहादी सोच

हत्या करने के बाद आरोपित आलम सीधा मस्जिद भागता है। उसे यह आत्मविश्वास कहाँ से आया कि मस्जिद में छिपने से वह सज़ा से बच जाएगा? मीडिया से एक सवाल। अगर मारने वाले का कोई मज़हब नहीं तो बीच-बचाव करने वाले का मज़हब हाइलाइट करना ज़रूरी क्यों?

बलात्कारों को नॉर्मल मान चुका समाज और पत्थरों से मारने की बातें

ये लड़ाई हवसी मानसिकता को सुधारने की है, लड़कियों को समाज में भोग की वस्तु के बजाय सशक्त बनाने की है... शरिया के लागू होने का सुझाव सिर्फ़ आक्रोश में उचित लग सकता है, लेकिन एक सभ्य समाज में हर अपराध पर ऐसे कानून की बात करना अनुचित है।

प्रिय मीडिया गिरोह, हर दलित जीतेन्द्र की मौत जातिवाद के कारण नहीं होती

सामाजिक समारोह में इस प्रकार की झड़प और हिंसा जौनपुर-जौनसार में आम बात है और यही वजह है कि समय-समय पर यहाँ पर 10-15 गाँव मिलकर शादी-विवाह में शराब और DJ को प्रतिबंधित करते आए हैं लेकिन ऐसे में किसी व्यक्ति की मृत्यु होना बेहद चौंकाने वाला प्रकरण है।

उसने कहा कि ‘भ्रूण हत्या ही ठीक है, ये दुनिया आप पुरुषों को मुबारक’

ये मेरा ही तो रूप है जो बसों में उस पर गिर जाता है, जो गर्ल्स हॉस्टल की खिड़कियों की सीध में अपने लिंग पर हाथ फेरता है। वो मैं ही तो होता हूँ जो अपनी किसी जान-पहचान की बच्ची को चॉकलेट देकर कहीं ले जाता हूँ, और उसके साथ हैवानियत दिखाने के बाद उसकी हत्या भी कर देता हूँ।

जय श्री राम, हुह… जिस पत्रकार ने ऐसा कहा, वो एक नंबर का धूर्त है, बंगालियों के नाम पर कलंक है

माँ दुर्गा और भगवान श्रीराम के भक्तों को अलग-अलग देखते हुए क्षेत्र और श्रद्धा के नाम पर उन्हें लड़ने की कोशिश में लगे नंदी क्या यह नहीं जानते कि बंगाली रामायण के लेखक ने दुर्गा पूजा को बंगाल के घर-घर तक पहुँचाया? कृत्तिवासी ओझा के बारे में नहीं पता?

टैगोर ने महात्मा गाँधी की देशभक्ति और चरखा को विचारधारा का व्यापार बताया था

टैगोर लगातार अपने लेखन में महात्मा गाँधी की देशभक्ति की आलोचना करते नजर आते थे। उन्होंने लिखा कि किस तरह से कुछ लोगों के लिए यह उनकी आजीविका है, उसी तरह से कुछ लोगों के लिए राजनीति है, जहाँ वो अपने देशभक्ति की विचारधारा का व्यापार करते हैं।

‘काशी’ पर लिखा गया साहित्य: काशीनाथ सिंह के अलावा भी है बहुत कुछ

किताबों में रुचि होने की वजह से हमें वाराणसी के साथ-साथ 'काशी का अस्सी' भी याद आ जाती है। एक वामी मजहब के लेखक की इस किताब को पढ़ने के बाद शायद ही कोई उर्दू भाषा से प्रेरित गाली होगी, जिसे सीखना बाकी रह जाता होगा।

बिहार की बच्चियों का कोई माय-बाप नहीं: बलात्कार से हत्या तक सिर्फ़ एक चुप्पी है

हमारे आँगनों से हमारी बहनें, बेटियाँ अचानक से गायब हो जाती हैं। जब कोई ख़बर आती है कि कहीं बिना शिनाख़्त की कुछ बच्चियों की हड्डियाँ पोटली में मिली हैं, तो दिल बैठ जाता है। वो मेरी बहन हो सकती थी, वो किसी की बेटी रही होगी।

जावेद भाई, उस ‘आवरण’ का इस्तेमाल बम फोड़ने के लिए भी होता है… 11 से 4 ज़्यादा मुल्कों ने बैन किया है

बुर्क़े के भीतर आप बम बाँधे हो सकते हैं, RDX या IED बैग में लेकर घूम रहे हों, विस्फोटकों को एक जगह से दूसरी जगह ले जा रहे हों, लेकिन आप पर संदेह नहीं किया जा सकता। बुर्क़े के भीतर कुछ भी हो सकता है लेकिन आपको यही मानना होगा कि भीतर एक मजहबी महिला है जिसे उसका मज़हब इसी तरीके से उनके कल्चर को ढोने के लिए निर्देश देता है।

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