Saturday, July 24, 2021
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नहीं होगा CBDT और CBIC का विलय, PIB ने बिजनेस स्टैंडर्ड की रिपोर्ट को बताया निराधार

पीआईबी का कहना है कि यह रिपोर्ट वित्त मंत्रालय के उक्त अधिकारियों से तथ्यों के सत्यापन किए बिना प्रकाशित किया गया है। ऐसे समय में जब सरकार टैक्सपेयर्स के लिए सुविधाजनक नीति बना रही है, इस तरह की रिपोर्ट पॉलिसी डिस्ट्रैक्शन पैदा करती है।

सोमवार (जुलाई 6, 2020) को प्रमुख अखबारों में से एक बिजनेस स्टैंडर्ड ने एक आर्टिकल प्रकाशित किया। इस आर्टिकल में दावा किया गया कि केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (CBDT) और केंद्रीय अप्रत्यक्ष एवं सीमा शुल्क बोर्ड (CBIC) का विलय होने जा रहा है।

इसमें लिखा गया है कि राजस्व में बढ़ती गिरावट के बीच कामकाज का खर्च सॅंभालने की चुनौती से जूझ रहे केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड एवं अप्रत्यक्ष कर बोर्ड के विलय पर चर्चा एक बार फिर शुरू हो गई है। साथ ही हरेक स्तर पर कर्मचारियों की संख्या में भारी कटौती का भी प्रस्ताव है।

बिजनेस स्टैंडर्ड में प्रकाशित लेख

रिपोर्ट में दावा किया गया कि यह विचार केंद्र की खर्च कम करने की कवायद के तहत किया जा रहा है। इसमें नई भर्तियों पर रोक, सेवानिवृत्ति के नियमों में बदलाव, नौकरियों की श्रेणियों को आपस में मिलाना, राजस्व अधिकारियों को दूसरे विभागों में भेजना और कुछ कर्मचारी श्रेणियों के लिए भत्तों में कटौती करना शामिल है।

सच क्या है

हालाँकि प्रेस इनफॉर्मेशन ऑफ ब्यूरो (PIB) ने इस खबर को पूरी तरह से नकार दिया। पीआईबी ने कहा कि यह खबर तथ्यात्मक रूप से गलत है। सरकार के पास केंद्रीय राजस्व अधिनियम, 1963 के तहत बनाए गए दो बोर्डों को विलय करने का कोई प्रस्ताव नहीं है।

पीआईबी का कहना है कि यह रिपोर्ट वित्त मंत्रालय के उक्त अधिकारियों से तथ्यों के सत्यापन किए बिना प्रकाशित किया गया है। ऐसे समय में जब सरकार टैक्सपेयर्स के लिए सुविधाजनक नीति बना रही है, इस तरह की रिपोर्ट पॉलिसी डिस्ट्रैक्शन पैदा करती है।

इसके अलावा रिपोर्ट में बताया गया है, उक्त विलय कर प्रशासन सुधार आयोग (TARC) की सिफारिशों में से एक था। पीआईबी ने इस पर कहा कि TARC की रिपोर्ट की सरकार द्वारा विस्तार से जाँच की गई और इस सिफारिश को स्वीकार नहीं किया गया। TARC की सिफारिशों पर की गई कार्रवाई को राजस्व विभाग की वेबसाइट पर भी डाला गया है, जो स्पष्ट रूप से दिखाता है कि यह सिफारिश स्वीकार नहीं की गई थी।

पीआईबी की तरफ से जारी स्पष्टीकरण मेंं कहा गया है कि यह स्पष्ट है कि इस भ्रामक लेख को लिखने के लिए किसी तरह की कोई मेहनत नहीं की गई है। न तो इसके लिए सार्वजनिक डोमेन में रखे गए रिकॉर्ड की जाँच की गई और न ही इस संदर्भ में ताजा जानकारी प्राप्त करने के लिए वित्त मंत्रालय से संबंधित किसी अधिकारी से संपर्क करने की कोशिश की गई।

इसमें आगे कहा गया हा कि यह न केवल पत्रकारिता की गुणवत्ता पर खराब प्रभाव डालता है, बल्कि उचित परिश्रम की पूरी उपेक्षा को भी दर्शाता है। यदि इस तरह की असत्यापित कहानी को फ्रंट-पेज पर लीड स्टोरी के रूप में जगह दिया जाता है, तो यह सभी समाचार पढ़ने वाले लोगों के लिए एक चिंता का विषय होना चाहिए। यह समाचार आइटम पूरी तरह से निराधार और असत्यापित के रूप में खारिज कर दिया गया है।

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ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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