लोग नहीं चाहते कि नेहरूभक्त, गाँधीव्रता BBC अपने चक्रवर्ती सम्राट राहुल बाबा का बड्डे मनाए

राहुल गाँधी के बड्डे पर क्या गिफ्ट देंगे? BBC ने यह पूछ कर पत्रकारिता की वो मिसाल पेश की है, जिसे युगों-युगों तक याद रखा जाएगा। पाठक की गाली खाकर एकबार पोस्ट डिलीट करना और दोबारा पोस्ट करना इन्हें पत्थरकारिता का सिरमौर बनाती है।

स्वामिभक्ति और पत्नीव्रता जैसे शब्द बीते समय की बातें हो चुकी हैं। जहाँ तक मुझे याद है, बीबीसी जैसे ही किसी मीडिया ने धीरे-धीरे कर के लोगों को इसे पितृसत्तात्मक समाज का चेहरा बताकर ‘ओल्ड स्कूल थिंग्स’ की कैटेगरी में डाल देने का पूरजोर प्रयास किया है। ये अच्छी बात है अगर यह वाकई में पुरुषों द्वारा महिलाओं पर अधिकार जैसे तर्कों की वकालत करता है तो इसे नकार दिया जाना चाहिए। लेकिन यदि इन विशेषणों में बुराई थी तो BBC या ऐसा ही कोई लगभग-प्रगतिशील स्वयं क्यों इन विशेषणों से मोह त्याग नहीं पाया है?

मामला देश के ‘पहले’ युवा अध्यक्ष और नेहरूवियन सभ्यता के आखिरी खेवनहार राहुल गाँधी के जन्मदिन का है। ये वही राहुल गाँधी हैं, जिनके भगीरथ प्रयासों की बदौलत भाजपा इस बार के लोकसभा चुनावों में 300 का आँकड़ा अकेले अपने दम पर ले आने में सफल हुई। आज राहुल गाँधी का अवतरण दिवस है। एक ओर जहाँ देश ‘चमकी बुखार’ जैसी महामारी से आतंकित है, वहीं दूसरी ओर नेहरूघाटी सभ्यता में जन्मे कुछ मीडिया गिरोहों के कुछ बड़े स्तम्भों ने अपनी प्राथमिकता चुन ली।

जब नेहरूघाटी सभ्यता में जन्मे बुद्धिपीड़ितों का जिक्र आता है तो BBC का नाम सबसे पहले दिमाग में आना स्वाभाविक है। ये पत्रकारिता के कुछ ऐसे संस्थान हैं, जो भोजन शुरू करने से पहले अन्न का प्रथम अंश जवाहरलाल नेहरू और दूसरा अंश गाँधी परिवार के लिए रख देते हैं। कम ही लोग ये बात जानते हैं कि BBC जैसे मीडिया गिरोह गले में राहुल गाँधी द्वारा हर चुनाव नतीजों के बाद त्याग दिए गए जनेऊ धारण कर के ही कार्यक्षेत्र को रवाना होते हैं (व्यंग्य)। ऐसे में गाँधीव्रता, नेहरूभक्त BBC के लिए राहुल गाँधी का जन्मदिन किसी राष्ट्रीय त्यौहार से कम नहीं माना जा सकता है।

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आज राहुल गाँधी का जन्मदिन है, नेहरूघाटी सभ्यता में जन्मे सभी विचारकों ने अपनी-अपनी पोजीशन सुबह ब्रह्ममुहूर्त में ही ले ली थी। जहाँ NDTV टेलीविजन के माध्यम से बार बार लूप में राहुल गाँधी का वीडियो चला कर माहौल बना रहा था वहीं BBC ने सोशल मीडिया पर अपनी स्वामिभक्ति का प्रदर्शन चालू किया। NDTV ने पलट-पलटकर दिखाया कि किस तरह से कार्यकर्ताओं से घिरे राहुल गाँधी लड्डू से भरी हुई थाली मीडिया की ओर बढ़ाकर ‘आप भी खाइए’ ‘आप भी खाइए’ कहकर उत्सव मना रहे थे। हालाँकि, इस प्रगतिशील मुजरे के बाद थोड़ी देर मुजफ्फरपुर के बच्चों की अकाल मृत्यु की रिपोर्ट दिखाई गई।

BBC देना चाहता था राहुल गाँधी को गिफ्ट, पाठकों ने गरिया दिया

BBC हिंदी के फेसबुक पेज ने स्वामिभक्ति में खुदको पिछड़ता देख तुरंत भक्तिधारा में लिखी एक तस्वीर शेयर की, जिसका कैप्शन था- ” HAPPY BIRTHDAY RAHUL : आज राहुल गाँधी का जन्मदिन है, अगर आपको उन्हें कोई एक तौहफा देने का मौका मिले तो आप क्या देंगे?”

वो अभागा पोस्ट, जिसकी किस्मत में डिलीट होना था

काबा किस मुँह से जाओगे BBC?

लेकिन कुछ देर बाद BBC को यह पोस्ट डिलीट करना पड़ा। कारण यह था कि पाठकों ने BBC के राजकुमार को “30 दिन में बुद्धिमान कैसे बनें” जैसी किताबें तो सुझाईं साथ ही, अध्यक्ष जी के लिए कुछ ‘मन की बातें’ भी खुलकर लिख डालीं। यह BBC से देखा नहीं गया और पोस्ट को डिलीट कर दिया गया। लेकिन, जिस तरह से एक विभीषण रावण की लंका में भी था, उसी तरह से शायद कोई मार्गदर्शक विभीषण BBC की लंका में भी बैठा था जिसने सलाह दी कि गाली खाने का मतलब यह नहीं कि तुम अपनी भक्ताई में कमी ले आओ, और संभव है कि यह भी याद दिलाया हो कि ‘काबा किस मुँह से जाओगे?’

इसके बाद BBC के पत्थरकारों का हौंसला बढ़ा और करीब 2 घंटे बाद नई तस्वीर और हौंसले के साथ पाठकों से दोबारा पूरी बेशर्मी के साथ राहुल गाँधी के लिए गिफ्ट माँगने वाली पोस्ट साझा की गई। हालाँकि, पाठकों की प्रतिक्रियाएँ अभी भी रोचक ही हैं। लेकिन, होशियार BBC ने इस बार एक निवेदन भी जारी करते हुए तस्वीर शेयर की। यह दर्दभरा हृदय चीर देने वाला निवेदन आप अपनी गारंटी पर ही पढ़ें-

BBC जैसे मीडिया गिरोहों का अपने अन्नदाताओं के प्रति यह समर्पण मिसाल है उन सभी बड़े-छोटे मीडिया घरानों के लिए, जिन्हें अभी बहुत कुछ सीखना बाकी है। वैसे BBC को हमारी सलाह यह भी है कि आज की तारीख को यानी, जून 19 को ही गाँधी जयंती मनाना शुरू कर दे। गाँधी जी अब रहे नहीं, और एकमात्र उम्मीद अब सिर्फ राहुल गाँधी ही बाकी हैं।

BBC की स्वामिभक्ति की एक झाँकी निम्न तस्वीरों के माध्यम से समझें

दुःखद : यह चित्र आपको विचलित कर सकता है
2 घंटे तक चली उच्चस्तरीय वार्ता में लिया गया फिर से गिफ्ट माँगने का निर्णय :रुके न तू झुके न तू
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