Homeविविध विषयमनोरंजन'आलिया नहीं हो पाएँगी सीता के रोल में फिट' : 'नई रामायण' की कास्टिंग...

‘आलिया नहीं हो पाएँगी सीता के रोल में फिट’ : ‘नई रामायण’ की कास्टिंग पर बोले सुनील लहरी, रणबीर को बताया- अच्छा ऑप्शन

सुनील लहरी ने कहा, "रणबीर, भगवान राम की भूमिका के लिए बहुत अच्छा ऑप्शन हैं और अच्छा प्रदर्शन कर सकते हैं। लेकिन आलिया सीता के किरदार के साथ इंसाफ कर पाएँगी, इसमें थोड़ी शक है।"

आदिपुरुष फिल्म के पर्दे पर आने के बाद जहाँ इसके डॉयलॉग्स और स्क्रीनप्ले के कारण फिल्म की फजीहत हुई। वहीं कास्टिंग को लेकर भी तमाम सवाल उठे। ऐसे में जब खबर आई कि नीतेश तिवारी भी रामायण पर एक फिल्म बनाने की सोच रहे हैं जिसमें राम-सीता का किरदार रणबीर-आलिया निभाएँगे तो इस पर एक्टर सुनील लहरी ने अपनी राय दी।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, रामानंद सागर की रामायण में लक्ष्मण का किरदार निभाने वाले सुनील लहरी ने कहा, “रणबीर, भगवान राम की भूमिका के लिए बहुत अच्छा ऑप्शन हैं और अच्छा प्रदर्शन कर सकते हैं। लेकिन आलिया सीता के किरदार के साथ इंसाफ कर पाएँगी, इसमें थोड़ी शक है।”

उन्होंने कहा, “आलिया भी प्रतिभाशाली हैं, मगर मुझे लगता है कि अगर उन्होंने पाँच साल पहले सीता की भूमिका निभाई होती तो वे इस किरदार के साथ ज्यादा न्याय कर पातीं।” सुनील लहरी ने कहा कि उन्हें लगता है कि आलिया पिछले कुछ वर्षों में बदल गई हैं इसलिए वह पक्का नहीं कह सकते कि आलिया अब सीता के रूप में आकर्षक लगेंगी या नहीं।

सुनील लहरी ने बड़े पर्दे पर रामायण लाने की सोचने वालों को सुझाव देकर कहा कि बड़े पर्दे पर रामायण लाते समय उसका आधार न बदला जाए। रामायण का व्यवहार शालीन और सम्मानजनक ही होना चाहिए। इसके साथ नया संस्करण बनाते समय उसके साथ प्रयोग नहीं किया जा सकता है।

उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि रामायण दिखाते हुए भाषा, पात्रों का चित्रण और दृश्य महाकाव्य के अनुरूप ही होना चाहिए। पात्रों को अच्छी तरह से परिभाषित किया जाना चाहिए। उनका शो रामायण के सार के प्रति सच्चा था। इसलिए सभी धर्मों, आयु समूहं और जनसांख्यिकी के लोग इससे जुड़े और पसंद किया।

Join OpIndia's official WhatsApp channel

  सहयोग करें  

'द वायर' जैसे राष्ट्रवादी विचारधारा के विरोधी वेबसाइट्स को कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

ऑपइंडिया स्टाफ़
ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

बेचे जाने और लीज पर देने का अंतर भूल बैठे हैं अखिलेश यादव, JPNIC ‘बिक गया’ या सिर्फ लीज पर गया? सपा प्रमुख के...

JPNIC विवाद में अखिलेश यादव के ‘बेचने’ के आरोप की पड़ताल पर जानिए योगी सरकार का लीज मॉडल, CAG की आपत्तियां और 265 करोड़ से 865 करोड़ तक कैसे पहुँचा प्रोजेक्ट।

UP में तेजी से बढ़ रही है ‘गो-इकोनॉमी’, दूध के साथ-साथ गोमूत्र भी बन रहा है रोजगार का साधन: शैम्पू, साबुन और ऑर्गेनिक फर्टिलाइजर...

सवाल उनसे है जो गाय, गोबर और गौमूत्र का नाम सुनते ही मजाक बनाने लगते हैं- जब यही व्यवस्था किसान का खर्च घटाकर उसकी आय बढ़ा रही है और तो उपहास किस बात का है?
- विज्ञापन -