पाकिस्तानी फौज दो फाड़: आर्मी चीफ बाजवा के खिलाफ 7 लेफ्टिनेंट जनरल, सेवा विस्तार पर रोक का किया समर्थन

इमरान खान की सरकार ने जनरल बाजवा को छह महीने का विस्तार दिया था। सुप्रीम कोर्ट ने इस पर रोक लगा दी है। फिलहाल जनरल बाजवा को छह महीने का सेवा विस्तार मिला है।

पाकिस्तान आर्मी चीफ कमर जावेद बाजवा के खिलाफ उनकी ही सेना के सात लेफ्टिनेंट जनरल ने मोर्चा खोल दिया है। इन लेफ्टिनेंट जनरलों ने बाजवा के सेवा विस्तार पर सुप्रीम कोर्ट के रोक का समर्थन किया है। इसके कारण पाकिस्तानी फ़ौज दो फाड़ होती दिख रही है। फ़ौज में विद्रोह के हालात बन गए हैं। इमरान खान की सरकार ने आर्मी चीफ जनरल बाजवा को तीन साल का सेवा विस्तार दिया था। सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस आसिफ सईद खोसा ने इस पर रोक लगाते हुए फिलहाल महज 6 महीने के सेवा विस्तार की अनुमति दी है।

जिन अफसरों ने पाकिस्तान सुप्रीम कोर्ट के फैसले का समर्थन किया है, उनमें मुल्तान कॉर्प्स के कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल सरफराज सत्तार, लेफ्टिनेंट जनरल नदीम रजा, लेफ्टिनेंट जनरल हुमायूँ अजीज, लेफ्टिनेंट जनरल नईम अशरफ, लेफ्टिनेंट जनरल शेर अफगान और लेफ्टिनेंट जनरल काजी इकराम शामिल हैं।  

लेफ्टिनेंट जनरल सरफराज सत्तार को लेफ्टिनेंट जनरल बाजवा के रिटायर होने पर आर्मी चीफ का सबसे बड़ा दावेदार बताया जा रहा था। लेकिन पाकिस्तान सरकार द्वारा बाजवा को सेवा विस्तार देने के बाद कथित तौर पर उन्होंने इस्तीफा दे दिया। इस तरह वो पूरी तरह से आर्मी चीफ की रेस से बाहर हो गए हैं। बताया जाता है कि सत्तार की कुछ हफ्ते पहले बाजवा के साथ बहस भी हो गई थी। उन्होंने बाजवा पर पाकिस्तान आर्मी की छवि धूमिल करने का आरोप लगाया था।

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वहीं बाजवा को 3 साल सेवा विस्तार देने के फैसले का असर दूसरे जनरलों पर भी पड़ा है और यही कारण है कि अब इन अफसरों ने एकसाथ सुप्रीम कोर्ट के फैसले का समर्थन किया है। बता दें कि सत्तार मिलिटरी इंटेलिजेंस चीफ, इन्फेंट्री स्यालकोट कमांडिंग ऑफिसर की जिम्मेदारी निभा चुके हैं।

जानकारी के मुताबिक जनरल (रिटायर्ड) राहिल शरीफ ने आर्मी चीफ के पद से रिटायरमेंट के पहले उनकी जगह लेने वालों में सत्तार का भी विकल्प दिया था। अगर बाजवा नियम के मुताबिक रिटायर हो जाते तो अभी उनकी जगह सत्तार पाकिस्तान के आर्मी चीफ होते, क्योंकि नियम के अनुसार  29 नवंबर को ही बाजवा को आर्मी चीफ के पद से रिटायर हो जाना चाहिए था। 

पाकिस्तान के राजनीतिक विश्लेषक अली सलमान अदानी ने इकोनॉमिक टाइम्स को बताया, “यदि बाजवा को तीन साल का सेवा विस्तार मिल जाता है तो मौजूदा वरिष्ठ जनरलों के आर्मी चीफ बनने की संभावना खत्म हो जाएगी। अगले महीने रिटायर होने जा रहे जस्टिस खोशा ने जनरल बाजवा को छह महीने का विस्तार देकर गेंद को संसद के पाले में डाल दिया है।” उन्होंने बताया कि यकीनन जनरल बाजवा पाकिस्तान में सर्वशक्तिमान हैं, लेकिन ऐसे कई लोग और भी हैं।

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