Homeदेश-समाजशौकत अली और राशिद ने दलित नेता हरि माँझी पर की जातिगत टिप्पणी, कहा-...

शौकत अली और राशिद ने दलित नेता हरि माँझी पर की जातिगत टिप्पणी, कहा- तुम फिर भी इनकी ‘लेटरिंग’ साफ करोगे

इसका जवाब देते हुए हरि माँझी ने ट्विटर पर लिखा था, "राशिद मियाँ लेटरिंग (लैट्रिन) साफ किया, लेकिन धर्म नहीं बदला हमारे पूर्वजों ने। कुछ लोग तो तलवार के डर से ही धर्म बदल लिए। ऐसे आपकी भाषा के लिए आपको सजा भी हो सकती है, लेकिन आपको माफ किया।"

सोशल मीडिया पर शौकत अली और राशिद द्वारा जातिसूचक और अपमानजनक टिप्पणी करने के मामले में बीजेपी नेता हरि माँझी ने दोनों के खिलाफ सोमवार (25 मई, 2020) को उत्तर प्रदेश पुलिस से कानूनी कार्रवाई करने की माँग की है।

बिहार के गया से बीजेपी के पूर्व सांसद हरि माँझी ने ट्विटर के माध्यम से शिकायत करते हुए उत्तर प्रदेश पुलिस और सीएम योगी आदित्यनाथ को टैग किया है।

साभार-ट्विटर

हरि माँझी का कहना है कि पहले राशिद मियाँ नाम के एक व्यक्ति ने उन्हें दलित होने के लिए अपमानित किया, लेकिन उन्होंने उसे समझाते हुए माफ कर दिया था। जिसके बाद राशिद मियाँ ने ट्विटर पर उनके खिलाफ अपमानजनक टिप्पणी की।

बता दें कि शौकत अली ने ट्विटर पर दो ट्वीट किया था। एक ट्वीट में उसने लिखा था, “चाहे कितनी भी चमचागीरी कर लो। राम मंदिर के पुजारी तो तुम बनने से रहे। किसी का कर्म छुपा ना धर्म, तुम्हें करना वही है जो तुम करते आए हो।”

वहीं दूसरे ट्वीट में लिखा था, “तुम फिर भी इनकी लेटरिंग (लैट्रिन) ही साफ करोगे दलित जी।”

इसका जवाब देते हुए हरि माँझी ने ट्विटर पर लिखा था, “राशिद मियाँ लेटरिंग (लैट्रिन) साफ किया, लेकिन धर्म नहीं बदला हमारे पूर्वजों ने। कुछ लोग तो तलवार के डर से ही धर्म बदल लिए। ऐसे आपकी भाषा के लिए आपको सजा भी हो सकती है, लेकिन आपको माफ किया।”

साभार-ट्विटर

इसके बाद शौकत अली द्वारा किए गए ट्वीट के खिलाफ हरि माँझी ने पुलिस से कानूनी कार्रवाई करने की माँग की।

इन दोनों द्वीट को लेकर अब हरि माँझी ने इस मामलो को देखने और दोनों के खिलाफ कार्रवाई करने की माँग की और शिकायत करते हुए लिखा, “कृपया इस मामले को देखें कैसे एक व्यक्ति मेरी धार्मिक भावना को ठेस पहुँचा रहा है। इससे पहले भी एक व्यक्ति ने किया, जिसे मैंने माफ कर दिया, अब ये शौकत अली उसी के संदर्भ में कहकर मेरी जाति और धर्म के खिलाफ बात कर रहा है। इसके खिलाफ कार्रवाई की जाए।”

Join OpIndia's official WhatsApp channel

  सहयोग करें  

'द वायर' जैसे राष्ट्रवादी विचारधारा के विरोधी वेबसाइट्स को कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

ऑपइंडिया स्टाफ़
ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

बेचे जाने और लीज पर देने का अंतर भूल बैठे हैं अखिलेश यादव, JPNIC ‘बिक गया’ या सिर्फ लीज पर गया? सपा प्रमुख के...

JPNIC विवाद में अखिलेश यादव के ‘बेचने’ के आरोप की पड़ताल पर जानिए योगी सरकार का लीज मॉडल, CAG की आपत्तियां और 265 करोड़ से 865 करोड़ तक कैसे पहुँचा प्रोजेक्ट।

UP में तेजी से बढ़ रही है ‘गो-इकोनॉमी’, दूध के साथ-साथ गोमूत्र भी बन रहा है रोजगार का साधन: शैम्पू, साबुन और ऑर्गेनिक फर्टिलाइजर...

सवाल उनसे है जो गाय, गोबर और गौमूत्र का नाम सुनते ही मजाक बनाने लगते हैं- जब यही व्यवस्था किसान का खर्च घटाकर उसकी आय बढ़ा रही है और तो उपहास किस बात का है?
- विज्ञापन -