Thursday, July 18, 2024
Homeदेश-समाज'भारतीय लोकाचार के विरुद्ध है समलैंगिक विवाह, माँग खारिज हो' : केंद्र ने दिया...

‘भारतीय लोकाचार के विरुद्ध है समलैंगिक विवाह, माँग खारिज हो’ : केंद्र ने दिया SC में हलफनामा, कहा- याचिकाओं में विचार लायक कुछ नहीं

56 पेजों के हलफनामे में सरकार ने समलैंगिक विवाह से जुड़ी 15 याचिकाओं को खारिज करने की पैरवी की। उन्होंने कहा कि याचिका में सुनने लायक कुछ भी नहीं है। मेरिट के आधार पर उसे खारिज किया जाना ही उचित है। अब इस मामले में सुनवाई 13 मार्च को की जाएगी।

केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में आज (12 मार्च 2023) समलैंगिक विवाह की माँग करने वाली याचिका का विरोध किया। भारतीय लोकाचार के विरुद्ध बताते हुए केंद्र ने मामले में हलफनामा दायर किया। इसमें उन्होंने बताया कि समान सेक्स के लोगों का पार्टनर बनकर साथ रहना और समलैंगिक संबंध बनाने को भारतीय परिवार की अवधारणा से नहीं तोला जा सकता जहाँ एक महिला और पुरुष के बीच शादी के संबंध से बच्चे का जन्म होता है।

केंद्र ने कहा कि शुरुआत से ही विवाह की धारणा अनिवार्य रूप से अपोजिट सेक्स के दो व्यक्तियों के बीच एक मिलन को मानती है। यह परिभाषा सामाजिक, सांस्कृतिक और कानूनी रूप से विवाह के आइडिया और कॉनसेप्ट 6 में शामिल है और इसे विवादित प्रावधानों के जरिए खराब नहीं किया जाना चाहिए।

केंद्र ने जवाबी हलफनामे में कहा है कि आईपीसी की धारा 377 का गैर-अपराधीकरण समलैंगिक विवाह के लिए मान्यता प्राप्त करने के दावे को पैदा नहीं कर सकता।

बार एंड बेंच की रिपोर्ट के अनुसार, दो लोगों में शादी ऐसी व्यवस्था का निर्माण करती है जिसका अपना सार्वजनिक महत्व है। इसी के चलते कई अधिकार और दायित्व मिलते हैं। अपने 56 पेजों के हलफनामे में सरकार ने समलैंगिक विवाह से जुड़ी 15 याचिकाओं को खारिज करने की पैरवी की। उन्होंने कहा कि याचिका में सुनने लायक कुछ भी नहीं है। मेरिट के आधार पर उसे खारिज किया जाना ही उचित है। अब इस मामले में सुनवाई 13 मार्च को की जाएगी।

उल्लेखनीय है कि समान सेक्स के बीच विवाह की याचिका कई हाईकोर्ट में लंबित थी। ऐसे में मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़, जस्टिस नरसिम्हा और जेबी परदीवाला ने इन मामलों को खुद ही सुप्रीम कोर्ट में ट्रांसफर करवा लिया था। इसके बाद केंद्र से इस बाबत जवाब माँगा गया और अब हलफनामा दायर करते हुए केंद्र सरकार ने साफ कहा है कि इस तरह समान सेक्स के लोगों की शादी को मान्यता देना मौजूदा कानूनों में उल्लंघन होगा।

बता दें कि इन याचिकाओं को दायर करने वालों में एक सुप्रियो चक्रवर्ती और अभय दांग (गे कपल) द्वारा दायर की गई थी। इन दोनों ने कोविड की सेकेंड वेव के बाद शादी करने की सोची, लेकिन ये शादीशुदा लोगों वाले अधिकारों का लाभ नहीं उठा पाए…इसीलिए उन्होंने इस संबंध में याचिका दी। इसी तरह एक याचिका पार्थ फिरोज मेहरोत्रा और उदय राज द्वारा डाली गई। उन्होंने दलील दी कि इस तरह समलैंगिक विवाह को मान्यता न देना आर्टिकल 14 के तहत गुणवत्ता के अधिकार और आर्टिकल 21 के तहत जीने के अधिकार का उल्लंघन है।

Join OpIndia's official WhatsApp channel

  सहयोग करें  

एनडीटीवी हो या 'द वायर', इन्हें कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

ऑपइंडिया स्टाफ़
ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

साथियों ने हाथ-पाँव पकड़ा, काज़िम अंसारी ने ताबतोड़ घोंपा चाकू… धराया VIP अध्यक्ष मुकेश सहनी के पिता का हत्यारा, रात के डेढ़ बजे घर...

घटना की रात काज़िम अंसारी ने 10-11 बजे के बीच रेकी भी की थी जो CCTV में कैद है। रात के करीब डेढ़ बजे ये लोग पीछे के दरवाजे से घर में घुसे।

प्राइवेट नौकरियों में 75% आरक्षण वाले बिल पर कॉन्ग्रेस सरकार का U-टर्न, वापस लिया फैसला: IT कंपनियों ने दी थी कर्नाटक छोड़ने की धमकी

सिद्धारमैया के फैसले का भारी विरोध भी हो रहा था, जिसकी वजह से कॉन्ग्रेसी सरकार बुरी तरह से घिर गई थी। यही नहीं, इस फैसले की जानकारी देने वाले ट्वीट को भी मुख्यमंत्री को डिलीट करना पड़ा था।

प्रचलित ख़बरें

- विज्ञापन -