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Exclusive अहमदाबाद कोर्ट में हिंदू लड़कियों-मुस्लिम लड़कों की शादियों का नेटवर्क? मैरिज रजिस्ट्रार MM सैयद पर गंभीर आरोप: पढ़ें- कैसे काम करता था ये पूरा रैकेट

मुस्लिम युवक और हिंदू युवती वाले ये जोड़े देश में कहीं भी हो, अगर उन्हें शादी करने में दिक्कत होती थी तो वो अहमदाबाद में आकर शादी करते थे। इसमें सीधे-सीधे मैरिज रजिस्ट्रार MM सैयद की भूमिका सामने आई है।

ऑपइंडिया ने गुजरात के अहमदाबाद में ऐसे रैकेट का भंडाफोड़ किया है, जहाँ प्लानिंग करके हिंदू लड़कियों की शादी मुस्लिम युवकों से कराई जाती थी। ये मामला सीधे-सीधे बड़े प्लानिंग की ओर इशारा करता है। ये रैकेट अहमदाबाद में घी-काँटा की कोर्ट में चल रहा था, जहाँ काम करने वाला मुस्लिम मैरिज रजिस्ट्रार MM सैयद ऐसी शादियों की व्यवस्था करता था, जिसमें लड़का मुस्लिम और लड़की हिंदू होते थे।

मुस्लिम युवक और हिंदू युवती वाले ये जोड़े देश में कहीं भी हो, अगर उन्हें शादी करने में दिक्कत होती थी तो वो अहमदाबाद में आकर शादी करते थे। इसमें सीधे-सीधे मैरिज रजिस्ट्रार MM सैयद की भूमिका सामने आई है। सैयद ने बीते कुछ माह में एक दर्जन से अधिक ऐसी शादियाँ कराई। यही नहीं, इस कोर्ट में अगर हिंदू लड़के और मुस्लिम लड़की की शादी का मामला होता, तो MM सैयद उसमें अड़ंगा लगा देता था।

इस मामले का खुलासा तब हुआ, जब कुछ दिन पहले मुस्लिम युवक और एक हिंदू लड़की वकील के भेष में शादी के रजिस्ट्रेशन के लिए पहुँचे थे। उन्होंने वकीलों के कपड़े इसलिए पहने, ताकि कोर्ट में उनकी पहचान एक जोड़े के रूप में न हो सके। इस मामले की जाँच के दौरान ही इस बड़े रैकेट का खुलासा हुआ, जिसकी अहम कड़ी मैरिज रजिस्ट्रार MM सैयद से जुड़ रही है।

आरोप है कि रजिस्ट्रार एम एम सैयद ने दोनों को निर्धारित समय से करीब दो घंटे पहले ही विवाह पंजीकरण कार्यालय के पिछले दरवाजे से अंदर प्रवेश करने दिया था। इस घटना के बाद सामने आई एक जमीनी रिपोर्ट में चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि सैयद न केवल अहमदाबाद में बल्कि अन्य जिलों और राज्यों से आने वाले मुस्लिम युवकों को भी हिंदू लड़कियों से शादी कराने में से मदद करता था।

यह मामला बुधवार (4 मार्च 2026) को सामने आया, जिसके बाद लगातार नए खुलासे हो रहे हैं। पीड़ित हिंदू लड़की की माँ का आरोप है कि आरोपित सलमान, जो पेठापुर का रहने वाला है, कुछ महीने पहले उनकी बेटी का अपहरण कर ले गया था। जब 2026 में दोनों विवाह पंजीकरण कराने पहुँचे तो यह भी सामने आया कि लड़की गर्भवती थी और सलमान उस पर शादी करने के लिए दबाव बना रहा था।

मुंबई-UP के मुस्लिम युवक और हिंदू लड़की की शादी का रजिस्ट्रेशन यहीं

इस मामले में और जानकारी जुटाने के लिए ऑपइंडिया की टीम अहमदाबाद के घी कांटा कोर्ट पहुँची, जहाँ कई चौंकाने वाले खुलासे सामने आए। पिछले चार महीनों के रिकॉर्ड की जाँच में पता चला कि विवाह रजिस्ट्रार एम एम सैयद कथित तौर पर हिंदू लड़कियों की मुस्लिम युवकों से शादी कराने के मामलों में सक्रिय रूप से शामिल था।

दिसंबर 2025 से जनवरी 2026 के आँकड़ों की पड़ताल करने पर सामने आया कि सिर्फ इन दो महीनों में ही सैयद ने ऐसी 11 शादियों का पंजीकरण कराया, जिनमें लड़का मुस्लिम और लड़की हिंदू थी।

मामला यहीं तक सीमित नहीं रहा। जाँच में यह भी सामने आया कि इन शादियों में कुछ मामले ऐसे थे, जिनमें एक पक्ष उत्तर प्रदेश से और दूसरा मुंबई से आकर सैयद के पास विवाह पंजीकरण कराने पहुँचा था।

गौरतलब है कि यह मामला सामने आने के बाद वकीलों ने इस संबंध में शिकायत दर्ज कराई है। शिकायत में एम एम सैयद को सह-आरोपित बनाने और उसे पद से बर्खास्त करने की माँग की गई है। इसी सिलसिले में ऑपइंडिया ने शिकायत दर्ज कराने वाले एक वकील से भी बातचीत की।

इस मामले में ऑपइंडिया ने जिस वकील से बात की, उनका नाम सुधा क्रिश्चियन है, जो घी कांटा कोर्ट में नोटरी और अधिवक्ता के रूप में कार्य करती हैं। सुधा क्रिश्चियन ने बताया कि घटना वाले दिन सुबह करीब 10 बजे हिंदू लड़की के परिवार के लोग कोर्ट के बाहर पहुँचे और उनसे रजिस्ट्रार कार्यालय जाने के लिए कहने लगे। उस समय रजिस्ट्रार की ओर से कहा गया कि कार्यालय सुबह 11 बजे खुलता है।

हालाँकि लड़की के परिवारवालों का दावा था कि उनकी बेटी पहले से ही कार्यालय के अंदर मौजूद है। इसी बीच, सुधा क्रिश्चियन को भी रजिस्ट्रार कार्यालय में कुछ काम था, इसलिए वह अंदर चली गईं।

जब एक महिला वकील शादी रोकने गई तो दफ्तर में ताला लगा हुआ

सुधा क्रिश्चियन ने बताया कि जब वह कार्यालय के अंदर पहुँचीं तो उन्होंने देखा कि रजिस्ट्रार के दफ्तर में वकील के कपड़े पहने एक हिंदू लड़की और एक मुस्लिम युवक खड़े थे। उनके साथ मनीषा नाम की एक महिला वकील और एक पुलिसकर्मी भी मौजूद था।

सुधा के अनुसार, जब उन्होंने पूछा कि एक हिंदू लड़की को वकील के भेष में कार्यालय में कैसे आने दिया गया और रजिस्ट्रार इस पर आपत्ति क्यों नहीं कर रहे हैं, तो वहाँ मौजूद पुलिसकर्मी ने तुरंत कार्यालय का दरवाजा बंद कर दिया। पुलिसकर्मी ने कहा कि शादी पूरी होने तक दरवाजा नहीं खुलेगा, क्योंकि दरवाजा खुलने पर बाहर हंगामा हो सकता है।

इसके बाद सुधा क्रिश्चियन ने अपनी मित्र वकील मीना बरोट को इसकी जानकारी दी। सूचना मिलने पर मीना बरोट वहाँ पहुँचीं और लोगों को बताया कि एक लड़की वकील का भेष बनाकर रजिस्ट्रार कार्यालय आई है। उन्होंने आरोप लगाया कि यह पूरी योजना रजिस्ट्रार एम एम सैयद और वकील मित्तल जडेजा ने मिलकर बनाई थी। योजना के तहत दोनों को वकील के वेश में लाया गया, ताकि कोई उन पर सवाल न उठाए और शादी शांतिपूर्वक संपन्न हो जाए।

सुधा क्रिश्चियन ने यह भी आरोप लगाया कि वकील मित्तल जडेजा ने ही विवाह प्रमाण पत्र वापस लिया था। उनके अनुसार, यह स्पष्ट रूप से धोखाधड़ी का मामला था, क्योंकि कोर्ट परिसर में केवल लाइसेंस प्राप्त वकीलों को ही वकील का कोट पहनने की अनुमति होती है।

उन्होंने आगे कहा कि लड़की के माता-पिता बाहर मौजूद होने के बावजूद रजिस्ट्रार एम एम सैयद ने लड़की को उनसे मिलने नहीं दिया। सुधा के मुताबिक, जब उन्होंने मौके की तस्वीरें खींचकर अन्य लोगों को भेजीं, तब वहाँ लोग इकट्ठा हो गए और मामले की जानकारी सार्वजनिक हो गई, जिसके बाद इस पूरे प्रकरण का खुलासा हुआ।

वकील का चोला पहनकर धोखाधड़ी करना

एक अन्य महिला वकील और नोटरी रागिनी दवे ने इस मामले में वकीलों द्वारा दायर शिकायतों और आवेदनों के बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि घटना वाले दिन लड़की के माता-पिता, परिवार के सदस्य, कई वकील और कुछ हिंदू संगठन के लोग भी कोर्ट परिसर में मौजूद थे। उनके अनुसार, यह केवल शादी का मामला नहीं था, बल्कि वकीलों का भेष धारण कर की गई धोखाधड़ी का मामला था।

रागिनी दवे ने बताया कि उस दिन करंज पुलिस, मधुपुरा पुलिस और शाहपुर पुलिस भी मौके पर मौजूद थीं। बड़ी संख्या में वकीलों ने इस घटना का विरोध किया था। उन्होंने कहा कि इन तीनों थानों के मुख्य जाँच अधिकारी और उप-मुख्य जाँच अधिकारी भी वहाँ मौजूद थे, जिनके सामने आरोपित के खिलाफ कार्रवाई की माँग रखी गई थी।

उन्होंने बताया कि जब इस पर सवाल उठे तो संबंधित युवक यह दावा करने लगे कि उन्होंने जो कोट पहना है वह वकील का नहीं बल्कि वेटर का कोट है। हालाँकि दवे के अनुसार, वेटर और वकील के कोट में स्पष्ट और बड़ा अंतर होता है, इसलिए यह तर्क स्वीकार करने योग्य नहीं था।

दवे ने आगे बताया कि उसी दिन वकील समुदाय के लोगों ने आरोपितों के खिलाफ कार्रवाई की माँग करते हुए एक याचिका भी सौंपी। यह आवेदन करंज पुलिस स्टेशन में दिया गया, जिसमें आरोपित के खिलाफ FIR दर्ज करने की माँग की गई थी।

उन्होंने कहा कि सामान्यतः शादी के दिन लड़कियाँ चोली-साड़ी या पारंपरिक कपड़े पहनती हैं, इसलिए कोई भी व्यक्ति काले कोट या वर्दी में शादी नहीं करता। रागिनी दवे ने आरोप लगाया कि यह पूरी साजिश वकील मित्तल जडेजा द्वारा रची गई, जिसने दोनों की शादी करवाई और लोगों को गुमराह करने के इरादे से यह योजना बनाई।

ग्रीन कॉरिडोर के भीतर रची गई एक साजिश

रागिनी दवे ने आगे बताया कि सामान्यतः जब कोई जोड़ा विवाह पंजीकरण के लिए आता है, तो उन्हें रजिस्ट्रार एम एम सैयद के काँच के केबिन के बाहर खड़ा रखा जाता है। लेकिन इस मामले में दोनों को सीधे केबिन के अंदर बैठाया गया, जो नियमों के विपरीत था। उन्होंने कहा कि उन्हें एक ग्रीन कॉरिडोर में बुलाया गया था और उस दौरान न तो किसी वकील को अंदर जाने दिया गया और न ही लड़की को अपने परिवार से मिलने की अनुमति दी गई।

वहीं, वकील सुधा क्रिश्चियन ने बताया कि वकीलों द्वारा दायर आवेदन में IPC की धारा 319(2) का उल्लेख किया गया है। इस धारा के तहत बार काउंसिल में अनुशासनात्मक कार्रवाई की जा सकती है और धोखाधड़ी से जुड़ी शिकायत दर्ज कराई जाती है।

सुधा क्रिश्चियन ने कहा कि फर्जी वकील बनकर कोर्ट परिसर में प्रवेश करना गंभीर अपराध है और इसके लिए सजा मिलनी चाहिए। उन्होंने सवाल उठाया कि रजिस्ट्रार ने ऐसे अज्ञात लोगों को उस कार्यालय में कैसे प्रवेश करने दिया, जहाँ सामान्य तौर पर वकीलों को भी जाने की अनुमति नहीं होती और जहाँ महत्वपूर्ण दस्तावेज रखे जाते हैं।

बिल का भुगतान निर्धारित समय सीमा समाप्त होने के 2 घंटे बाद किया गया

रागिनी दवे ने आगे कहा कि इस मामले में एक और सवाल यह है कि शाम 4 बजे के बाद के बकाया चालान आखिर शाम 6 बजे कैसे जमा कर दिए गए। उनके अनुसार यह भी जाँच का विषय है। उन्होंने बताया कि इस पूरे प्रकरण में वसीम नाम का एक व्यक्ति भी सामने आया है, जो पहले यहाँ काम करता था लेकिन अब उसका तबादला हो चुका है। दवे के मुताबिक वह सैयद का प्रशासक रहा है।

उन्होंने आरोप लगाया कि रजिस्ट्रार एम एम सैयद और वकील मित्तल जडेजा ने मिलकर यह पूरी साजिश रची, इसलिए दोनों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए और उन्हें नौकरी से बर्खास्त किया जाना चाहिए। दवे ने यह भी कहा कि संभव है कि इस तरह की साजिशों में कुछ अन्य रजिस्ट्रार और वकील भी गुमराह होकर शामिल होते हों।

रागिनी दवे ने आगे बताया कि लड़की के माता-पिता करीब एक महीने से लगातार कोर्ट आकर रजिस्ट्रार से यह अनुरोध कर रहे थे कि अगर उनकी बेटी वहाँ आए तो उन्हें तुरंत सूचित किया जाए। उस समय सैयद ने उन्हें भरोसा दिलाया था कि वह ऐसा करेंगे।

हालाँकि, जब लड़की वास्तव में कोर्ट परिसर में आई, तो उसे हरे गलियारे में रोक दिया गया और उसे अपने माता-पिता से मिलने तक की अनुमति नहीं दी गई।

अगर मामला एक मुस्लिम लड़की और एक हिंदू लड़के का होता तो रजिस्ट्रार सैयद उस मामले को बिगाड़ देते

इसके अलावा ऑपइंडिया को यह भी जानकारी मिली कि यदि रजिस्ट्रार एम एम सैयद के सामने ऐसा कोई मामला आता था जिसमें लड़की मुस्लिम और लड़का हिंदू होता, तो वह शादी होने नहीं देते थे। बताया जाता है कि ऐसे मामलों में वह किसी न किसी तरह मुस्लिम लड़की के माता-पिता या परिवार को सूचना दे देते थे, जिसके बाद अधिकतर मामलों में शादी रुक जाती थी।

इस तरह के ही एक मामले के गवाह एडवोकेट अभि राजपूत से ऑपइंडिया ने बात की। उन्होंने बताया कि करीब दो महीने पहले एक हिंदू युवक और एक मुस्लिम युवती उनके पास आए थे और दोनों अपनी मर्जी से शादी करना चाहते थे। लेकिन संयोग से 30 दिन की पूर्व सूचना अवधि समाप्त हो चुकी थी और शादी की तारीख नजदीक थी। इसी दौरान लड़की के माता-पिता को उकसाया जाने लगा कि वे अपनी बेटी की शादी उस हिंदू युवक से न होने दें।

अभि राजपूत के अनुसार, शादी के दिन जब दूल्हा-दुल्हन रजिस्ट्रार कार्यालय पहुँचे, तभी लड़की के माता-पिता अचानक वहाँ आ गए और उसे अपने साथ ले गए। उन्होंने कहा कि लड़का आर्थिक रूप से मजबूत नहीं था, इसलिए उसने आगे कोई कानूनी कार्रवाई नहीं की और मामला वहीं समाप्त हो गया।

राजपूत ने यह भी कहा कि जब कोई व्यक्ति रजिस्ट्रार जैसे द्वितीय श्रेणी के पद पर होता है, जहाँ लोग न्याय और निष्पक्षता की अपेक्षा रखते हैं, तो केवल धर्म के आधार पर एकतरफा फैसला लेकर किसी मामले को प्रभावित नहीं किया जाना चाहिए।

अगर कोई मुस्लिम लड़की और एक हिंदू लड़का हो तो सैयद को आ जाता गुस्सा

अधिवक्ता अभि राजपूत ने कहा कि इस तरह की घटनाओं से लोगों के मौलिक अधिकारों का भी उल्लंघन होता है। उन्होंने कहा कि यदि कोई रजिस्ट्रार धर्म के आधार पर पक्षपातपूर्ण रवैया अपनाता है, तो उसे उसके पद से हटाया जाना चाहिए और उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए।

अभि राजपूत के अनुसार, इस अनुभव के बाद उन्होंने अपना एक वीडियो सोशल मीडिया पर साझा किया, जिस पर कई अन्य अधिवक्ताओं ने भी टिप्पणी की। उनका कहना था कि जब भी किसी मामले में लड़की मुस्लिम और लड़का हिंदू होता है, तो रजिस्ट्रार अक्सर किसी न किसी तरीके से मामले को उलझा देते हैं।

उन्होंने आरोप लगाया कि ऐसे मामलों में रजिस्ट्रार दस्तावेजों को लेकर अनावश्यक आपत्तियाँ उठाते हैं और प्रक्रिया को जटिल बनाकर लोगों को परेशान करते हैं। अभि राजपूत ने दावा किया, “मुझे जानकारी मिली है कि अलग-अलग स्थानों से आने वाले मुस्लिम लड़कों और हिंदू लड़कियों की कई शादियाँ इसी पंजीकरण कार्यालय में दर्ज कराई गई हैं”

इस पूरे मामले से यह संकेत मिलता है कि कुछ सरकारी अधिकारी और बिचौलिए विवाह पंजीकरण की मौजूदा प्रक्रिया की खामियों का लाभ उठाकर व्यवस्था का दुरुपयोग कर रहे हैं। जब सरकारी पद पर बैठे लोग धर्म के आधार पर भेदभाव करने लगते हैं और कानून से जुड़े पेशे जैसे वकीलों की वर्दी का इस्तेमाल  धोखाधड़ी के लिए किया जाता है, तो इससे कानूनी व्यवस्था पर सवाल खड़े होते हैं।

इसी संदर्भ में, गुजरात सरकार द्वारा प्रस्तावित नए विवाह पंजीकरण कानून और संशोधन को ऐसी अनियमितताओं को रोकने के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। विवाह पंजीकरण प्रक्रिया में अधिक पारदर्शिता, अभिभावकों को सूचना देने की व्यवस्था और रजिस्ट्रार की शक्तियों पर स्पष्ट सीमाएँ जैसे प्रावधान संभावित दुरुपयोग को रोकने में सहायक हो सकते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस प्रक्रिया को अधिक स्पष्ट और सख्त नहीं बनाया गया, तो अदालत परिसर जैसे संवेदनशील स्थानों का दुरुपयोग होने की आशंका बनी रह सकती है।
(मूल रूप से ये रिपोर्ट गुजराती में प्रकाशित है। मूल रिपोर्ट पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें।)


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લિંકન સોખડિયા
લિંકન સોખડિયા
Journalist | Editor | Multimedia Producer Bridging the gap between ground reality and digital storytelling. Specializing in hard-hitting regional news, investigative reports, and high-impact digital media production.

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