Homeदेश-समाजमोबाइल चोरी पर हल्ला मचाया, लूटेरे इब्राहिम शेख ने चलती ट्रेन से बाहर खींच...

मोबाइल चोरी पर हल्ला मचाया, लूटेरे इब्राहिम शेख ने चलती ट्रेन से बाहर खींच लिया, अस्पताल में…

पुलिस ने बताया कि इब्राहिम शेख नामक यह शख्श आदतन अपराधी है, तथा इसका साथी 48 साल का मो.अयूब शेख अभी फरार है।

बीते शुक्रवार को नानावती अस्पताल में काम करने वाले 32 वर्षीय संतोष कुमार मौर्य को काम पर जाते वक्त अँधेरी स्टेशन पर चलती हुई लोकल ट्रेन से, एक लुटेरे ने मोबाइल लूटने की कोशिश में प्लेटफॉर्म पर खींच लिया। चेहरे के बल गिरे संतोष को इस हादसे में कई चोटें आईं हैं।

रिपोर्ट्स के अनुसार प्लेटफॉर्म पर मौजूद पब्लिक ने लुटेरों में से एक 26 वर्षीय मो. इब्राहिम शेख को मौके से धर दबोचा, जिसे बाद में पुलिस के हवाले कर दिया गया। जबकि उसका साथी मौके से भागने में कामयाब हो गया। इब्राहिम शेख मुंबई के नालसोपाड़ा का रहने वाला है।

नालसोपाड़ा के ही रहने वाले मौर्या जो विलेपार्ले के नानावती अस्पताल में भर्ती हैं, घटना को याद करते हुए कहते हैं, “मैं लगभग 10 बजे अँधेरी स्टेशन पर फ़ास्ट लोकल से उतर विले पार्ले के लिए स्लो लोकल में बैठा ही था कि किसी ने चोर-चोर का हल्ला किया, यह सुनते ही मैंने अपना फोन तलाशा, जो गायब था… मैंने देखा कि उसने मेरा फोन लिया हुआ था, मैंने उसे कॉलर से पकड़ लिया, इससे पहले कि मैं कुछ समझ पाता, वह ट्रेन से कूद गया और साथ में मुझे खींच ले गया।”

बाद में मीडिया को पुलिस ने बताया कि इब्राहिम शेख नामक यह शख्श आदतन अपराधी है, तथा इसका साथी 48 साल का मो.अयूब शेख अभी फरार है।

Join OpIndia's official WhatsApp channel

  सहयोग करें  

'द वायर' जैसे राष्ट्रवादी विचारधारा के विरोधी वेबसाइट्स को कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

ऑपइंडिया स्टाफ़
ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

खून वही, बस नैरेटिव बदल गया: प्राचीन बलि से ईसाई संस्कार तक, इतिहास ने ये फर्क कैसे बनाया?

पश्चिम ने पुरानी सभ्यताओं को खून और बलि के नाम पर बर्बर कहा। ईसाई परंपरा को आध्यात्मिक ऊँचाई बताया। लेकिन चर्च के केंद्र में भी रोटी और वाइन के जरिए शरीर और रक्त का अनुष्ठान बैठा है। सभ्यता की कहानी इतनी साफ नहीं।

हमें पितृसत्ता की अधूरी कहानी क्यों सुनाई गई? Patriarchy? Think Again

भारत की शुरुआती वैदिक सभ्यता में महिलाओं का समाज में बहुत सम्मानजनक स्थान था, जहाँ उन्हें शिक्षा और धार्मिक अनुष्ठानों का पूरा अधिकार था। वैदिक साहित्य में गार्गी और मैत्रेयी जैसी महिलाओं के उदाहरण मिलते हैं, जो दार्शनिक चर्चाओं और बौद्धिक विमर्श में सक्रिय थीं।
- विज्ञापन -