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कोर्ट ने माना नवाब मलिक के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप पहली नजर में सही, कहा- हिरासत में लेकर पूछताछ करना जरूरी

कुर्ला लैंड डील में नवाब मलिक के बेटे फराज भी शामिल थे। यह डील साल 1999 से 2003 के बीच में हुई थी। गिरफ्तारी के बाद कोर्ट ने बुधवार को मंत्री मलिक को 3 मार्च तक के लिए हिरासत में भेज दिया था।

मनी लॉन्ड्रिंग (Money Laundering) और आतंकी दाऊद इब्राहिम (Dawood Ibrahim) के साथ लिंक को लेकर प्रवर्तन निदेशालय (Enforcement Directorate- ED) द्वारा गिरफ्तार राष्ट्रवादी कॉन्ग्रेस पार्टी (NCP) के नेता और महाराष्ट्र सरकार में कैबिनेट मंत्री नवाब मलिक (Nawab Malik) की मुश्किलें बढ़ने वाली हैं। मनी लॉन्ड्रिंग से संबंधित मामले में विशेष अदालत ने प्रथम दृष्ट्या मामले को सही पाया है।

धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) कोर्ट के विशेष न्यायाधीश आर एन रोकडे (R N Rokade) ने कहा कि मलिक के खिलाफ आरोप ‘अच्छी तरह स्थापित’ हैं। इसलिए उनके हिरासत में पूछताछ आवश्यक है। उन्होंने यह भी कहा कि अपराध पिछले 20 वर्षों से चली आ रही है। इसलिए इस मामले की जाँच के लिए पर्याप्त समय दिए जाने की आवश्यकता है।

अदालत का यह भी कहना है कि आरोपित ने जाँच में सहयोग नहीं किया है। न्यायाधीश रोकडे ने कहा, “प्रथम दृष्ट्या यह मानने के लिए पर्याप्त आधार है कि धन शोधन अधिनियम के तहत आरोप अच्छी तरह स्थापित हैं।” कोर्ट ने माना कि जाँच अपने प्रारंभिक चरण में है, इसलिए आरोपित से अच्छी तरह पूछताछ कर सभी पहलुओं को सामने लाना आवश्यक है।

बुधवार को पेशी के दौरान जज ने अपने आदेश में कहा कि प्रथम दृष्टया यह साबित होता है कि इस प्रॉपर्टी पर नवाब मालिक का स्वामित्व है। ऐसे में बचाव पक्ष की यह दलील कि नवाब मलिक पर पीएमएलए के तहत मामला नहीं बनता है, यह गलत है। वहीं, खबर यह भी है कि नवाब मलिक जाँच में अधिकारियों को सहयोग नहीं कर रहे हैं। इतना ही नहीं, वे अधिकारियों को डरा-धमका भी रहे हैं।

बता दें कि कोर्ट ने बुधवार (23 फरवरी) को मंत्री मलिक को 3 मार्च तक के लिए ईडी की हिरासत में भेज दिया था, जिसकी रिपोर्ट शुक्रवार (25 फरवरी) को उपलब्ध कराई गई है। ईडी सूत्रों की माने तो कुर्ला लैंड डील में नवाब मलिक के बेटे फराज भी शामिल थे। यह डील साल 1999 से 2003 के बीच में हुई थी।

गौरतलब है कि कुछ महीने पहले पूर्व मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में नवाब मलिक के ऊपर गंभीर आरोप लगाए थे। उनका कहना था कि मलिक परिवार ने उस जमीन की कीमत को साढ़े तीन करोड़ रुपए दिखाया, जिससे उन्हें स्टैम्प ड्यूटी कम भरनी पड़े। जब इसका पेमेंट करने की बात आई तो इसकी कीमत 25 रुपए प्रति स्क्वायर फुट की दर से बताई गई लेकिन असल में पेमेंट 15 रुपए प्रति स्क्वायर फीट के रेट से हुई। मलिक पर आरोप है कि उन्होंने यह जमीन अंडरवर्ल्ड दाऊद के लोगों से खरीदी थी।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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