उत्तराखंड के कोटद्वार में ‘मोहब्बत की दुकान’ चलाने का नाटक करने वाले जिम ट्रेनर ‘मोहम्मद दीपक’ की असलियत अब पूरी तरह खुल चुकी है। इस साल जनवरी 2026 में एक विवाद के बाद खुद को इंटरनेट सेंसेशन बताने वाले मोहम्मद दीपक अब अपनी कंगाली का रोना रो रहे हैं। वे मीडिया में जाकर विक्टिम कार्ड खेल रहे हैं कि उनका ‘आर्थिक बहिष्कार’ किया जा रहा है।
लेकिन असलियत यह है कि जब वे विवादों में आए थे, तब देश के बड़े-बड़े नेताओं और वामपंथी गैंग ने उनके पीछे पैसों की बरसात कर दी थी। उनके जिम की मेंबरशिप खरीदने के लिए होड़ मच गई थी। लाखों रुपए हाथ में आने के बाद मोहम्मद दीपक ने उस पैसे का इस्तेमाल अपने जिम को चलाने या किराया देने में नहीं किया।
उसने वह सारा पैसा अपने घर की EMI और बच्चों की फीस जैसी निजी चीजों में उड़ा दिया। अब जब मकान मालिक ने चार महीने से किराया न मिलने पर दुकान खाली करने को कहा, तो मोहम्मद दीपक इस पूरी कानूनी और व्यावहारिक बात को सांप्रदायिक रंग देने में जुट गए हैं।
जनता से मिला पैसा निजी खर्चों में उड़ाया, अब हिंदू मकान मालिक को बता रहे ‘विलेन’
पॉलिटिक्स और सोशल मीडिया की इस हवा के बाद मोहम्मद दीपक के जिम में आने वाले लोगों की संख्या 15 से बढ़कर सीधे 70 तक पहुँच गई। मेंबरशिप ड्राइव से उसके पास मोटा पैसा आया। लेकिन मोहम्मद दीपक की नीयत यहीं डोल गई। लोगों ने पैसा इसलिए दिया था ताकि उनका जिम बिना किसी रुकावट के चल सके। मगर दीपक ने उस पैसे से जिम का 40 हजार रुपए महीना किराया नहीं चुकाया।
दीपक ने खुद मीडिया के सामने कबूल किया है कि मेंबरशिप से मिले सारे पैसों को उन्होंने अपने घर के लोन की किश्तें (EMI) भरने और बच्चों की स्कूल फीस में उड़ा दिया। जब चार महीने तक मकान मालिक को एक रुपया किराया नहीं मिला, तो उसने स्वाभाविक रूप से जिम खाली करने का अल्टीमेटम दे दिया। अब अपनी इस बड़ी नाकामी और धोखेबाजी को छिपाने के लिए मोहम्मद दीपक अपने हिंदू मकान मालिक को ही विलेन साबित करने में तुला है। वे आरोप लगा रहा है कि मकान मालिक उसे इसलिए हटा रहा है क्योंकि उन्होंने मुस्लिमों का साथ दिया था।
यहाँ बड़ा सवाल यह उठता है कि अगर मकान मालिक इतना ही नफरती था, तो उसने चार महीने तक बिना किराए के दीपक को जिम चलाने की छूट क्यों दी? कोई भी आम इंसान कोर्ट-कचहरी के मामलों में फँसे किराएदार को एक महीने का भी समय नहीं देता, लेकिन मकान मालिक ने चार महीने तक सब्र किया।
राहुल गाँधी से लेकर स्वरा भास्कर तक ने बनाया था ‘फर्जी हीरो’
यह पूरा तमाशा 26 जनवरी 2026 को शुरू हुआ था। कोटद्वार में बजरंग दल के कार्यकर्ताओं ने एक मुस्लिम दुकानदार से अपनी दुकान के नाम से ‘बाबा’ शब्द हटाने को कहा था। वहाँ जिम चलाने वाले दीपक कुमार ने बीच में कूदकर मुस्लिम दुकानदार का पक्ष लिया। जब लोगों ने उनका नाम पूछा, तो उन्होंने खुद को ‘मोहम्मद दीपक’ बताया। बस फिर क्या था, देश के तथाकथित सेक्युलर और वामपंथी गैंग को देश को बदनाम करने का एक नया चेहरा मिल गया।
कॉन्ग्रेस नेता राहुल गाँधी ने तो 1st फरवरी को सोशल मीडिया पर पोस्ट लिखकर दीपक को देश का ‘हीरो’ और ‘नफरत के बाजार में मोहब्बत की दुकान‘ का जीता-जागता प्रतीक तक घोषित कर दिया। इसके बाद राहुल गाँधी ने मोहम्मद दीपक को दिल्ली में अपने घर पर भी बुलाया। वहाँ उन्होंने वीडियो शेयर करते हुए दीपक को शेर दिल योद्धा बताया और वादा किया कि वे कोटद्वार आकर उनके जिम की मेंबरशिप लेंगे। हालाँकि, राहुल गाँधी कभी वहाँ नहीं पहुँचे।

राहुल गाँधी के अलावा उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत, बॉलीवुड अभिनेत्री स्वरा भास्कर और एक्टिविस्ट हर्ष मंदर जैसे बड़े नामों ने भी सोशल मीडिया पर दीपक के सपोर्ट में कसीदे पढ़े।

इन सबने लोगों से दीपक के जिम की मेंबरशिप खरीदने की अपील की। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट के 15 सीनियर वकीलों ने 10-10 हजार रुपए देकर उनके जिम की सालाना मेंबरशिप खरीदी। CPIM के सांसद जॉन ब्रिटास ने भी खुद जाकर जिम की मेंबरशिप ली। यानी दीपक के पास पैसों की कोई कमी नहीं होने दी गई।
जिस समुदाय के लिए दीपक बना ‘मोहम्मद’, उसी ने फेर लिया मुँह
दीपक कुमार ने हिंदुओं को नीचा दिखाने और वामपंथियों से वाहवाही लूटने के लिए अपना नाम ‘मोहम्मद दीपक’ रख लिया था। उसने सोशल मीडिया पर यहाँ तक कह दिया था कि ‘मोहम्मद’ नाम में बहुत ताकत है। लेकिन सबसे मजेदार बात यह रही कि जिस मुस्लिम समुदाय का मसीहा बनने के चक्कर में उसने अपना नाम बदला, उसी मुस्लिम समुदाय ने मुसीबत के समय उनका साथ नहीं दिया।
इतने बड़े विवाद और सोशल मीडिया हाइप के बाद भी उसके जिम की मेंबरशिप केवल 70 तक ही सिमट कर रह गई। किसी भी स्थानीय मुस्लिम संगठन या व्यक्ति ने ग्राउंड पर आकर उनके जिम को बचाने के लिए आर्थिक मदद नहीं की। वे सिर्फ सोशल मीडिया पर बयानबाजी तक ही सीमित रहे।
संदिग्ध रहा है मोहम्मद दीपक का पुराना इतिहास
जाँच में यह भी सामने आया है कि मोहम्मद दीपक का इतिहास पहले से ही काफी विवादित और संदिग्ध रहा है। उसके संबंध दुबई के एक बिजनेसमैन चांद मौला बख्श से रहे हैं, जो उनके लिए बॉडीबिल्डिंग के इवेंट्स आयोजित कराता था। इसके अलावा दीपक यूथ कॉन्ग्रेस के जिला अध्यक्ष विजय रावत के भी बेहद करीबी रहा है। सोशल मीडिया पर उसके पुराने पोस्ट्स में बेहद आपत्तिजनक और भड़काऊ भाषा का इस्तेमाल देखने को मिलता रहा है।
मार्च के महीने में उनके खिलाफ पुलिस में FIR भी दर्ज हुई थी, जिसे रद्द कराने के लिए वे उत्तराखंड हाई कोर्ट पहुँचा था। तब हाई कोर्ट ने उसे फटकार लगाते हुए सोशल मीडिया पर किसी भी तरह के भड़काऊ वीडियो या मैसेज पोस्ट न करने की सख्त हिदायत दी थी।
जाहिर है कि पीड़ित होने का ढोंग करने वाला मोहम्मद दीपक असल में कोई पीड़ित नहीं हैं। उसने केवल एक घटना का फायदा उठाकर देश के बड़े नेताओं से पैसे और पब्लिसिटी बटोरी। जब वह पैसा खत्म हो गया और अपनी ही गलती से जिम बंद होने की कगार पर आ गया, तो वे एक बार फिर देश का माहौल खराब करने के लिए विक्टिम कार्ड खेल रहे हैं।


