Thursday, October 1, 2020
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इस्लामी कट्टरपंथियों के बाद ऑल्टन्यूज ‘फैक्टचेक’ के बहाने चीनी प्रोपेगेंडा को क्यों दे रहा है बढ़ावा

चीनी सैनिकों के मरने या हताहत होने की सम्भावना यदि 43 नहीं है तो यह 43 से कम भी नहीं है इसकी सौ प्रतिशत सम्भावना है, क्योंकि यह पचास से सौ और दो सौ के बीच कुछ भी हो सकती है। यह अन्य बात है कि चीन की सरकार ने ऑल्टन्यूज़ को व्यक्तिगत रूप से कुछ आँकड़े थमा दिए हों, जिनके आधार पर वह चीनी सेना के प्रवक्ता के रूप में पेश आ रहा है।

यदि आप सोच रहे हैं कि सिर्फ चीन ही अपने मारे गए सैनिकों पर बात नहीं करना चाहता है, तो आप गलत हैं। इस्लामिक विचारधारा की समर्थक वेबसाइट ऑल्टन्यूज़ भी नहीं चाहता है कि भारतीय मीडिया और सेना इन आँकड़ों पर बात करे। इस प्रकार यदि देखा जाए तो ऑल्टन्यूज़ ‘फैक्ट चेक’ नामक विधा के चायनीज संस्करण से अधिक कुछ नहीं है। चीन की ही तरह यह भी नहीं चाहता कि चीनी सैनिकों के घायल होने या उनके मारे जाने की ख़बरों पर बात की जाए।

यह तो स्पष्ट है कि भारत अंतरराष्ट्रीय सीमाओं पर पाकिस्तान के साथ तो संघर्षरत था ही लेकिन पिछले कुछ समय से हम चीन के साथ भी एक किस्म का युद्ध लड़ रहे हैं। लेकिन इससे भी बड़ा वैचारिक युद्ध कुछ लोगों के बीच इस विवाद को लेकर चल रहा है कि उन्हें पाकिस्तान और चीन में से किसे अपना आधिकारिक अन्नदाता स्वीकार करना है।

क्योंकि, जिस तेजी से ऑल्ट न्यूज़ जैसे तथाकथित फैक्ट चेकर्स अपने अन्नदाताओं को संतुष्ट करने के लिए कभी पाकिस्तान तो कभी चीन की सत्ता के हितों में काम करते देखे जाते हैं, यह आश्चर्य होता है कि आखिर एक ही समय में इस्लामिक विचारधारा और कम्युनिस्ट विचारधारा में से किसी एक को चुनना कितना मुश्किल होता होगा। हालाँकि, तब भी ‘भारत विरोध’ कम से कम एकसूत्रीय एजेंडा जरुर है, जो उन्हें उनके वास्तविक मसकद से बाँधे रखता है।

क्या है मामला

ऑल्ट न्यूज़ ने भारत और चीन की सेना के बीच हुए हिंसक संघर्ष में चीनी सत्ता के मुखपत्र के रूप में काम करते हुए भारतीय जवानों के बलिदान और चीनी सैनिकों की मौत की खबरों पर अपने एजंडे को सर्वोपरी रखा है। इस क्रम में ऑल्ट न्यूज़ द्वारा 2 ‘फैक्ट चेक’ किए गए।

पहले फैक्ट चेक में ऑल्ट न्यूज़ ने यह साबित करने का प्रयास किया कि भारतीय सेना नहीं बल्कि चीनी मुख पत्र ग्लोबल टाइम्स और उनके रिपोर्टर्स की बदलती जुबान के आँकड़े ज्यादा स्पष्ट और विश्वसनीय हैं। जबकि दूसरे फैक्ट चेक में ऑल्ट न्यूज़ ने चीन के हताहत या मरे गए सैनिकों की गिनती के लिए भारतीय मीडिया को गलत ठहराया है।

दरअसल, भारतीय सैनिकों की मौत की ख़बरों के बाद चीनी मुखपत्र ग्लोबल टाइम्स की रिपोर्टर वांग वेनवेन ने एक ट्वीट में लिखा कि भारत ही नहीं बल्कि चीनी सैनिक भी इस झड़प में मारे गए हैं। उसने लिखा कि इस झड़प के दौरान 5 चीनी सैनिक मारे गए और 11 घायल हुए। इस खबर को कई भारतीय पत्रकारों और मीडिया घरानों ने प्रकाशित किया था।

यह भी ध्यान देने की बात है कि ग्लोबल टाइम्स की रिपोर्टर द्वारा जारी की गई इस सूचना के आने तक यह पुष्टि हो चुकी थी कि भारत ने इस झड़प में 3 सैनिकों को खो दिया था, जिसमें बटालियन के एक कमांडिंग ऑफिसर भी शामिल थे।

अब, यदि ग्लोबल टाइम्स की मुख्य रिपोर्टर, जो कि एक चीनी शासन का मुखपत्र है, अपने देश के हताहत सैनिकों की संख्या को ट्वीट करती है, तो इस सूचना पर आखिर क्यों नहीं विश्वास किया जाना चाहिए? लेकिन मानो ग्लोबल टाइम्स और कम्युनिस्ट चीनी शासन इस खबर को बाहर नहीं आने देना चाहता था और फ़ौरन बाद ग्लोबल टाइम्स के आधिकारिक ट्विटर हैंडल से एक और ट्वीट करते हुए लिखा गया कि हालाँकि, वह पुष्टि नहीं करता है किन्तु इस झड़प में उनके भी ‘कुछ’ सैनिक हताहत हुए हैं।

इसके बाद ग्लोबल टाइम्स की रिपोर्टर वांग वेनवेन ने तुरंत अपने ट्वीट को हटा दिया और बिना सोचे समझे भारतीय मीडिया को उनकी ‘गलत सूचना’ के लिए दोषी ठहराते हुए दावा किया कि उनका ट्वीट भारतीय मीडिया पर आधारित था।

दिलचस्प बात यह है कि ग्लोबल टाइम्स द्वारा ‘स्पष्टीकरण’ चंद मिनट पहले ही उनकी रिपोर्टर द्वारा ट्वीट में भारत की मीडिया को गैर जिम्मेदाराना बताया गया था।

यह ध्यान में रखना आवश्यक है कि पत्रकार वांग वेनवेन और ग्लोबल टाइम्स – ये दोनों ट्विटर पर चीन सरकार की विशेष स्वीकृति के बाद ही हैं, क्योंकि माइक्रो ब्लॉगिंग वेबसाईट ट्विटर चीन में प्रतिबंधित है। ऐसे में काम शुरू होता था ऑल्ट न्यूज़ का, जिसे कि चीन के कम्युनिस्ट राज्य द्वारा फैलाई जा रही गफलत और अस्पष्टता को भारतीय मीडिया के खिलाफ इस्तेमाल करने की ‘जिम्मेदारी’ मिल गई।

ऑल्टन्यूज़ ने फ़ौरन चीनी मुखपत्र के ट्वीट के आधार पर भारतीय मीडिया को अपने ‘फैक्ट चेक’ के माध्यम से झूठा साबित करने का प्रयास शुरू कर दिया। यह भारत-चीन फेस ऑफ़ के दौरान ऑल्टन्यूज़ का पहला कारनामा था।

ऑल्टन्यूज़ द्वारा प्रकाशित दूसरे लेख (फैक्ट चेक) का शीर्षक था – “भारत-चीन विवाद: 43 चीनी सैनिक मारे गए? मीडिया के आउटलेट और पत्रकार गुमराह कर रहे हैं।”

इस ‘फैक्ट चेक’ में ऑल्टन्यूज़ ने उन समाचारों को झूठा साबित करने का प्रयास किया जिसमें बताया जा रहा था कि चीन ही नहीं बल्कि भारत ने भी चीन के सैनिकों को हताहत किया है, जिसमें 43 चीनी सैनिकों के हताहत होने की खबरें सामने आई हैं। मीडिया ने बताया कि ये उन चीनी सैनिकों की संख्या है जो स्पष्ट तौर पर गायब, घायल, गंभीर रूप से ज़ख्मी और मारे गए हैं।

लेकिन मानों ऑल्टन्यूज़ को चीनी सैनिकों के घायल होने या उनके मारे जाने की खबरें ज्यादा पसंद नहीं आईं और उन्होंने इसका भी फैक्ट चेक करते हुए भारतीय मीडिया को फर्जी साबित करने का प्रयास किया है।

यहाँ पर ध्यान देने की बात यह है कि ये वही ऑल्टन्यूज़ है, जो फलों पर थूक लगा रहे शेरू मियाँ के वीडियो का फैक्ट चेक यह कहते हुए सनसनीखेज तरीके से पेश करता है कि शेरू मियाँ इस फरवरी में नहीं बल्कि 1857 की फरवरी में अंग्रेजों को मारने के लिए फलों पर थूक लगा रहे थे और इस क्रांति के सूत्रधार इस कारण शेरू मियाँ ही थे (इस तथ्य का फैक्ट चेक करने के लिए ऑल्टन्यूज़ स्वतंत्र है।)

इसके अलावा, जिस प्रकार से यह ऑल्टन्यूज़ पत्थर को वॉलेट साबित करने का अनोखा हुनर रखता है, चीन को वास्तव में इसके संस्थापकों की पीठ थपथपानी चाहिए। वैसे भी यह ऑल्टन्यूज़ ‘फैक्ट चेक’ नामक विधा के चायनीज संस्करण से अधिक कुछ नहीं है।

पहला तथ्य तो यहाँ पर यही है कि कोरोना वायरस की महामारी के जनक चीन की सत्ता ने ना तो कोरोना वायरस के कारण हुई मौत के आँकड़े आज तक सामने रखे हैं ना ही वह लद्दाख में हुई झड़प पर आँकड़े सामने रखने का साहस जुटा पा रहा है।

पहले ऑल्टन्यूज़ खुद तय करे कि ग्लोबल टाइम्स विश्वसनीय है या नहीं

ऐसे में चीनी सैनिकों के मरने या हताहत होने की सम्भावना यदि 43 नहीं है तो यह 43 से कम भी नहीं है इसकी सौ प्रतिशत सम्भावना है, क्योंकि यह पचास से सौ और दो सौ के बीच कुछ भी हो सकती है। यह अन्य बात है कि चीन की सरकार ने ऑल्टन्यूज़ को व्यक्तिगत रूप से कुछ आँकड़े थमा दिए हों, जिनके आधार पर वह चीनी सेना के प्रवक्ता के रूप में पेश आ रहा है।

कम से कम यह तो स्पष्ट है कि ऑल्टन्यूज़ की मंशा सत्य को सामने लाने की नहीं बल्कि भारत-विरोध के अपने एकसूत्रीय एजेंडा के द्वारा इस्लामिक विचारधारा के तले चीनी सत्ता की नजरों में आना है या फिर कम से कम उनका काम आसान करना है।

ऑल्टन्यूज़ के लिए कितना बड़ा द्वन्द है कि पहले फैक्ट चेक में अपनी सुविधानुसार जहाँ भारतीय मीडिया के उस दावे को वह झूठा बताने का प्रयास करता है, जिसमें भारतीय मीडिया ने ग्लोबल टाइम्स के ही चीफ रिपोर्टर को आधार स्रोत बनाया है, वही दूसरे फैक्ट चेक में ऑल्टन्यूज़ उसी झूठे ग्लोबल टाइम्स के दावों को सूचना का अंतिम स्रोत साबित करने का प्रयास करता नजर आता है।

ऑल्टन्यूज़ के इस तथाकथित फैक्ट चेक में भारतीय स्रोतों को ‘दावा’ कहकर सामने रखा गया है जबकि चीन के विदेश मंत्रालय के हवाले से लिखा गया है कि उन्होंने भारत पर इस झड़प का दोष लगाया है।

ऑल्टन्यूज़ के ‘फैक्ट चेक’ से लिया गया स्क्रीनशॉट

हो सकता है, लेखन शैली से इसमें कुछ भी गलत नजर ना आए, लेकिन इसे पढ़ते हुए लगता है कि आप चीनी मुखपत्र ग्लोबल टाइम्स के प्रोपेगेंडा को पढ़ रहे हों। यह तय है कि पाकिस्तान और चीन में से यदि ऑल्टन्यूज़ को कुछ चुनना होगा, तो वह निश्चित रूप से भारत विरोध को ही चुनेगा।

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आशीष नौटियाल
पहाड़ी By Birth, PUN-डित By choice

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