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स्कूलों बच्चों को धार्मिक शिक्षा और सात्विक भोजन: कर्नाटक में अगले शैक्षणिक सत्र से होगी शुरुआत, पाठ्यक्रम में शामिल होंगे ग्रन्थ-साहित्य

"बैठक में शामिल हुए सभी लोगों की राय है कि स्कूलों में मूल्य शिक्षा को लागू करने की तत्काल आवश्यकता है। बैठक में भाग लेने वाले लगभग सभी लोगों से ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों तरह से राय ली गई।"

कर्नाटक में, स्कूली बच्चों के मन में भगवान की भक्ति को बढ़ावा देने के लिए धार्मिक शिक्षा व सात्विक भोजन देने की कवायद शुरू हो गई है। इसके लिए, राज्य के सभी स्कूलों में नैतिक शिक्षा की कक्षाओं में धार्मिक ग्रंथों की जानकारी देने की बात कही जा रही है। स्कूल शिक्षा मंत्री बीसी नागेश ने कहा है कि अगले शैक्षणिक सत्र से इसकी शुरुआत करने की कोशिश करेंगे।

दरअसल, पाठ्यक्रम में नैतिक शिक्षा को शामिल करने के लिए सोमवार (9 जनवरी, 2023) को बेंगलुरु में बैठक आयोजित की गई थी। इस बैठक में स्कूल शिक्षा और साक्षरता मंत्री बीसी नागेश के अलावा श्री श्री रविशंकर समेत कई धार्मिक व सामाजिक संगठन के लोग भी मौजूद थे। इस बैठक को लेकर बीसी नागेश ने कहा है कि पाठ्यक्रम में बदलाव करने के लिए जल्द ही एक समिति का गठन किया जाएगा।

स्कूल शिक्षा व साक्षरता मंत्री बीसी नागेश ने कहा, “धार्मिक संतों, शिक्षाविदों और स्कूल मैनजेमेंट के सदस्यों ने मूल्य-आधारित शिक्षा लागू करने के लिए व्यावहारिक सुझाव दिए हैं। पाठ्यक्रम में बदलाव करने के लिए जल्द ही विशेषज्ञों की एक समिति बनाई जाएगी। साथ ही अगले शैक्षणिक वर्ष से इस पाठ्यक्रम को लागू करने की कोशिश करेंगे।”

उन्होंने आगे कहा है, “बैठक में शामिल हुए सभी लोगों की राय है कि स्कूलों में मूल्य शिक्षा को लागू करने की तत्काल आवश्यकता है। बैठक में भाग लेने वाले लगभग सभी लोगों से ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों तरह से राय ली गई। इस बैठक में व्यक्त किए गए बिंदुओं के आधार पर विभागीय स्तर पर आयोजित बैठकों में मूल्य शिक्षा को लागू करने के तरीकों पर चर्चा कर अंतिम रूप दिया जाएगा।”

बीसी नागेश ने यह भी कहा है कि इस बैठक का उद्देश्य बच्चों को अच्छे स्वास्थ्य और मूल्यों को अपनाने में सक्षम बनाना तथा ईश्वर की भक्ति सिखाना था। वहीं, इस बैठक में स्कूलों में सात्विक भोजन शुरू करने पर भी विचार किया गया। दरअसल, मध्याह्न भोजन में अंडे दिए जाने का कुछ नेताओं द्वारा विरोध किया गया था। इसलिए, बैठक में सात्विक भोजन दिए जाने का मुद्दा भी चर्चा का विषय रहा। इस बैठक में, श्रीसोंडा स्वर्णवल्ली मठ के गंगाधरेंद्र सरस्वती स्वामी ने कहा, “तामसिक या राजसिक भोजन बच्चों के बीच नकारात्मक व्यवहार में वृद्धि कर रहे हैं। भोजन बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। बच्चों को सात्विक भोजन दिया जाना चाहिए। सरकार को दूध और घी के वितरण पर भी ध्यान देना चाहिए।”

NTIE ने अपनी रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से कहा है कि स्कूल के पाठ्यक्रम में धार्मिक ग्रंथों की शिक्षा को शामिल किया जाएगा। इसमें, केवल श्रीमद्भगवद्गीता ही नहीं, बल्कि कुरान और बाइबिल जैसे अन्य धार्मिक ग्रंथ भी शामिल होंगे।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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