महाराष्ट्र की राजनीति में शनिवार (31 जनवरी 2026) को एक ऐतिहासिक पल आया, जब राज्यसभा सांसद सुनेत्रा पवार ने उपमुख्यमंत्री पद की शपथ ले ली। वह महाराष्ट्र की पहली महिला डिप्टी सीएम बन गई हैं। शपथ ग्रहण के दौरान समर्थकों ने ‘अजित दादा अमर रहे’ के नारे भी लगाए।
यह शपथ ग्रहण समारोह मुंबई में हुआ, जिसमें मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, उप मुख्यमंत्री एकनाश शिंदे और महायुति के अन्य नेता मौजूद रहे। दिवंगत अजित पवार की पत्नी सुनेत्रा पवार ने शाम 5.05 बजे इस पद पर अपने पति की जगह ली, जिनकी 28 जनवरी 2026 को बारामती में प्लेन क्रैश में दुखद मौत हो गई थी।
#WATCH | Mumbai, Maharashtra: Sunetra Pawar, leader of the NCP legislative party and wife of late Deputy CM Ajit Pawar, takes oath as Deputy CM of Maharashtra at the Lok Bhavan
— ANI (@ANI) January 31, 2026
Maharashtra CM Devendra Fadnavis, Deputy CM Eknath Shinde and other leaders present. pic.twitter.com/qL8IIvNeoR
सुनेत्रा पवार को डिप्टी सीएम बनाने के इस फैसले ने एनसीपी (अजित गुट) को मजबूती दी, लेकिन शरद पवार गुट में हैरानी और नाराजगी पैदा की। सूत्रों के मुताबिक, यह कदम सिर्फ पद भरने का नहीं, बल्कि पार्टी पर नियंत्रण बनाए रखने की रणनीति का हिस्सा है।
शपथ से पहले विधायक दल की बैठक में बनी सर्वसम्मति
मुंबई में शनिवार (31 जनवरी 2026) को दोपहर 2 बजे एनसीपी (अजित गुट) के विधायकों की बैठक विधान भवन में हुई। इसमें सुनेत्रा पवार को सर्वसम्मति से विधायक दल का नेता चुना गया। पार्टी नेता दिलीप वलसे पाटिल ने उनका नाम प्रस्तावित किया, जिसे सभी ने समर्थन दिया। इसके बाद मुख्यमंत्री को पत्र भेजकर सुनेत्रा को डिप्टी सीएम बनाने की सिफारिश की गई।
प्रफुल्ल पटेल, सुनील तटकरे और छगन भुजबल जैसे वरिष्ठ नेताओं ने यह प्रक्रिया तेजी से पूरी की। विधायक सना मलिक ने कहा, “पिछले दो दिनों से कार्यकर्ता और नेता यही माँग कर रहे थे कि सुनेत्रा को दादा (अजित पवार) की जगह लाया जाए।”
बहरहाल, सुनेत्रा पवार ने अब डिप्टी सीएम पद की शपथ ले ली है। उन्होंने शपथ ग्रहण से पहले राज्यसभा की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया। हालाँकि सुनेत्रा अभी विधानसभा या विधान परिषद की सदस्य नहीं हैं, इसलिए उन्हें 6 महीने में चुनाव लड़ना होगा।
NCP को शरद पवार गुट के कब्जे से बचाना मुख्य वजह
सूत्र बताते हैं कि सुनेत्रा को इतनी जल्दी सत्ता के केंद्र में लाने का बड़ा कारण एनसीपी (अजित गुट) को बचाना है। अजित पवार के निधन से पहले दोनों गुटों के विलय की बातें जोरों पर थीं। शरद पवार गुट के नेता जयंत पाटिल, एकनाथ खड़से और अनिल देशमुख ने दावा किया कि विलय लगभग तय था। अजित पवार खुद 12 फरवरी को घोषणा करने वाले थे।
अजित पवार के विमान हादसे में निधन के बाद महाराष्ट्र की राजनीति शोक में थी, लेकिन सियासी गलियारों में एक और चर्चा तेज हो चुकी थी। एनसीपी के दोनों गुटों के विलय की। एनसीपी (शरद पवार) गुट के वरिष्ठ नेताओं ने दावा किया कि यह सिर्फ चर्चा नहीं थी, बल्कि तीन-चार महीनों से बातचीत चल रही थी। यहाँ तक कहा गया कि अजित पवार की आखिरी इच्छा भी यही थी कि पार्टी एक हो और शरद पवार के जन्मदिन तक यह ‘तोहफा’ दिया जाए। सवाल ये है कि अजित पवार की मौत के तुरंत बाद उनकी आखिरी इच्छा को क्यों सामने रखा गया?
ऐसे में अजित गुट को डर था कि विलय हुआ तो पार्टी पर शरद पवार की पकड़ मजबूत हो जाएगी और उनका गुट हाशिए पर चला जाएगा। प्रफुल्ल पटेल और सुनील तटकरे जैसे नेता नहीं चाहते थे कि पार्टी फिर शरद पवार के हाथ में जाए। इसलिए सुनेत्रा को डिप्टी सीएम बनाकर गुट को मजबूत केंद्र दिया गया। यह महायुति की सोची-समझी रणनीति है, ताकि एनसीपी पर संतुलन बना रहे।
शरद पवार का हैरानी भरा बयान- मुझे कोई जानकारी नहीं
शरद पवार ने शपथ ग्रहण पर हैरानी जताई। उन्होंने कहा, “मुझे इस बारे में कोई जानकारी नहीं है। यह उनकी पार्टी का आंतरिक फैसला होगा। प्रफुल्ल पटेल और सुनील तटकरे ने शायद तय किया हो।” उन्होंने विलय पर कहा, “पिछले चार महीने से बात चल रही थी। अजित और जयंत पाटिल नेतृत्व कर रहे थे। अजित की इच्छा थी कि दोनों दल साथ आएँ, लेकिन अब कुछ कहा नहीं जा सकता।”
शरद पवार ने इशारा किया कि जल्दबाजी हुई है। उन्होंने कहा, “अजित के प्लेन क्रैश ने विलय की बात रोक दी।” शरद पवार और सुप्रिया सुले शपथ समारोह में नहीं गए। इससे परिवार में नाराजगी साफ दिखी। शरद पवार ने यह भी कहा कि परिवार की नई पीढ़ी विरासत आगे बढ़ाएगी, लेकिन सत्ता की मौजूदा संरचना में वे खुद हाशिए पर महसूस कर रहे हैं।
सिर्फ विलय रोकना ही नहीं, कई अन्य कारण भी हैं। सुनेत्रा पवार के डिप्टी सीएम बनने से 4 अहम संदेश NCP समर्थकों में गया है-
अजित पवार की राजनीतिक विरासत को परिवार में रखना। सुनेत्रा बारामती से जुड़ी हैं और 2024 लोकसभा चुनाव लड़ चुकी हैं। कार्यकर्ता उन्हें ‘वहिनी’ कहते हैं और उनकी माँग थी कि विरासत जारी रहे।
महायुति गठबंधन में स्थिरता। अजित के निधन से एनसीपी कमजोर हो सकती थी, जिसका फायदा विपक्ष को मिलता। सुनेत्रा को लाकर गठबंधन मजबूत हुआ।
महिला नेतृत्व को बढ़ावा। महाराष्ट्र में पहली महिला डिप्टी सीएम बनना बड़ा संदेश है।
- कार्यकर्ताओं का मनोबल मजबूत हुआ। शोक में डूबे कार्यकर्ताओं को नया चेहरा मिला।
सुनेत्रा पवार के बारे में 10 अहम बातें
- जन्म और पारिवारिक पृष्ठभूमि: सुनेत्रा पवार का जन्म 18 अक्टूबर 1963 को महाराष्ट्र के धाराशिव (पूर्व ओसमानाबाद) में एक राजनीतिक परिवार में हुआ था। उनके पिता और भाई पद्मसिंह पाटिल भी सक्रिय राजनेता रहे, जिससे बचपन से ही सार्वजनिक जीवन का माहौल मिला।
शिक्षा और शुरुआती जीवन: सुनेत्रा ने औरंगाबाद से कॉमर्स में स्नातक की डिग्री हासिल की। 1985 में अजित पवार से शादी के बाद वे बारामती में बस गईं और सामाजिक कार्यों में सक्रिय हुईं।
स्वच्छता और ग्रामीण विकास की शुरुआत: उन्होंने पवार परिवार के पैतृक गाँव काठेवाडी में स्वच्छता अभियान चलाया, जहाँ खुले में शौच की समस्या दूर की। बाद में निर्मल ग्राम अभियान के तहत 86 गांवों में सेल्फ हेल्प ग्रुप्स के जरिए स्वच्छता को बढ़ावा दिया।
पर्यावरण संरक्षण में योगदान: 2010 में एनवायरमेंटल फोरम ऑफ इंडिया एनजीओ की स्थापना की और इको-विलेज कॉन्सेप्ट को भारत में लोकप्रिय बनाया। पर्यावरण जागरूकता और सस्टेनेबल डेवलपमेंट पर उनका फोकस ग्रामीण क्षेत्रों में बड़ा बदलाव लाया।
टेक्सटाइल उद्योग में नेतृत्व: सुनेत्रा पवार बारामती हाई टेक टेक्सटाइल पार्क (2008) की चेयरपर्सन हैं, जहाँ 15,000 से ज्यादा लोगों को रोजगार मिला, ज्यादातर महिलाओं को। यह प्रोजेक्ट केंद्र सरकार की स्कीम से जुड़ा और महिलाओं के सशक्तिकरण का बड़ा उदाहरण बना।
शिक्षा क्षेत्र में भूमिका: सुनेत्रा पवार विद्या प्रतिष्ठान की ट्रस्टी हैं, जो शरद पवार द्वारा स्थापित संस्था है और हजारों छात्रों को शिक्षा देती है। साल 2017 से सावित्रीबाई फुले पुणे यूनिवर्सिटी की सीनेट मेंबर के रूप में शिक्षा सुधारों में योगदान दे रही हैं।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सक्रियता: सुनेत्रा पवार साल 2011 से फ्रांस के वर्ल्ड एंटरप्रेन्योरशिप फोरम की थिंक टैंक मेंबर हैं। वो सस्टेनेबल डेवलपमेंट और उद्यमिता पर वैश्विक चर्चाओं में भारत का प्रतिनिधित्व करती रही हैं।
राजनीति में प्रवेश: लंबे समय तक बैकग्राउंड में रहने के बाद 2024 में सक्रिय राजनीति में आईं। बारामती से लोकसभा चुनाव लड़ा, हालाँकि हार गईं, लेकिन पवार परिवार की विरासत को आगे बढ़ाया।
राज्यसभा सांसद के रूप में भूमिका: एनसीपी से राज्यसभा सांसद चुनी गईं और संसद में महाराष्ट्र के मुद्दों पर आवाज उठाती हैं। सामाजिक और पर्यावरण संबंधी मुद्दों पर उनकी सक्रियता संसदीय चर्चाओं में दिखती है।
वर्तमान में डिप्टी सीएम की जिम्मेदारी: अजित पवार के निधन के बाद महाराष्ट्र की पहली महिला उपमुख्यमंत्री बनीं। पार्टी और परिवार की विरासत को संभालते हुए ग्रामीण विकास, महिला सशक्तिकरण और पर्यावरण पर फोकस जारी रख रही हैं।
विलय की बात अब ठंडे बस्ते में, अब आगे क्या?
शपथ के बाद विलय की अटकलें थम गई हैं। अजित गुट चुप है, जबकि शरद गुट कह रहा है कि बात रुक गई। यह घटना महाराष्ट्र की राजनीति में नया मोड़ है। एक तरफ परिवार की विरासत सुनेत्रा पवार ने बचा ली है, तो दूसरी तरफ NCP के दोनों गुटों की दूरी और बढ़ गई है। वहीं, माना जा रहा है कि शरद पवार अब अपनी रणनीति के अगले पड़ाव को लेकर विचार कर रहे हैं।


