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₹3.8 लाख करोड़ का निवेश, 50+ समझौते और 6 दिन में 5 देशों का दौरा: जानें- PM मोदी की यात्रा में किस देश से हुई क्या डील और कैसे मिलेगा ‘मेक इन इंडिया’ को बढ़ावा

प्रधानमंत्री मोदी के यूएई, नीदरलैंड, स्वीडन, नॉर्वे और इटली दौरे का मकसद भारत में विदेशी निवेश लाना, नई तकनीक और मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देना है। इन देशों में हुए समझौतों से यह साफ है कि आने वाले वर्षों में भारत में करीब ₹3.5 लाख करोड़ निवेश होंगे। इस दौरान PM मोदी ने अलग-अलग सेक्टरों की 50 से अधिक ग्लोबल कंपनियों के CEO और सीनियर अधिकारियों से मुलाकात की।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 15 मई से 21 मई तक यानी 6 दिनों में 5 देशों- यूएई, नीदरलैंड, स्वीडन, नॉर्वे और इटली का दौरा किया। इसका मकसद भारत में विदेशी निवेश यानी एफडीआई, नई तकनीक और मैन्युफैक्चरिंग लाना था। इन देशों में हुए समझौतों से यह साफ है कि आने वाले वर्षों में भारत में करीब ₹3.8 लाख करोड़ निवेश हो सकते हैं।

पीएम मोदी के दौरे का मुख्य फोकस ऊर्जा सुरक्षा, रक्षा, नई तकनीक, सेमीकंडक्टर, ग्रीन एनर्जी और यूरोप के साथ व्यापार बढ़ाना रहा। इस दौरे में भारत ने कई महत्वपूर्ण समझौते किए, जिनसे आने वाले वर्षों में अर्थव्यवस्था, रोजगार, तकनीक और रणनीतिक ताकत बढ़ने की उम्मीद है।

इस दौरे के दौरान PM मोदी ने अलग-अलग सेक्टरों की 50 से अधिक ग्लोबल कंपनियों के CEO और सीनियर अधिकारियों से मुलाकात की। इनमें से कई कंपनियों की भारत में पहले से ही मौजूदगी है। पीएम मोदी के साथ बैठक के बाद भारत में उनका कुल निवेश करीब 180 अरब डॉलर होने का अनुमान है।

यूएई दौरे से ‘ऊर्जा सुरक्षा’ को फायदा

पीएम मोदी सबसे पहले यूएई गए। यहाँ करीब 3 घंटे रुके और 7 एमओयू पर हस्ताक्षर किए। इसमें सबसे अहम था – स्ट्रैटजिक पेट्रोलियम रिजर्व एग्रीमेंट। इसके तहत अबुधाबी नेशनल ऑयल कंपनी अब भारत के लिए 3 करोड़ बैरल कच्चा तेल का भंडारण करेगी। तेल संकट के दौरान इस ऑयल पर पहला दावा भारत का होगा। यूएई इस रिजर्व का किराया भी देगा। इसके अलावा भारत के लिए फुजेराह में भी पेट्रोलियम रिजर्व की क्षमता बढ़ाई जा रही है।

संयुक्त अरब अमीरात ने भारत के विभिन्न क्षेत्रों में 5 अरब डॉलर यानी करीब ₹48000 करोड़ से अधिक के निवेश की घोषणा की है। यह निवेश दोनों देशों के बीच व्यापार, ऊर्जा सुरक्षा और रक्षा संबंधों को मजबूत करने के लिए किया गया है। इनमें सबसे अहम है गुजरात के वडीनगर में जहाज रिपेयरिंट सेंटर का बनाया जाना, जहाँ नाविकों को ट्रेनिंग दी जाएगी।

दरअसल भारत का मुख्य फोकस ऊर्जा और रक्षा क्षेत्र था। UAE पहले से भारत का बड़ा निवेशक है और भारत का तीसरा सबसे बड़ा ट्रेड पार्टनर भी है। MEA के अनुसार, यूएई भारत में पिछले 25 वर्षों में सबसे बड़े निवेशकों में रहा है। पीएम मोदी के इस दौरे से खाड़ी देशों में काम कर रहे 45 लाख से अधिक भारतीयों के हित मजबूत होंगे।

यूएई के साथ भारत ने रणनीतिक पेट्रोलियम रिजर्व, एलपीजी सप्लाई और रक्षा सहयोग से जुड़े समझौते किए। इसके तहत भारत ने तेल भंडारण यानी स्ट्रेटजिक पेट्रोलियम रिजर्व बढ़ाने पर समझौता किया। एलपीजी और LNG सप्लाई बढ़ाने पर सहमति बनी, रक्षा उद्योग, साइबर सुरक्षा और समुद्री सुरक्षा में सहयोग को लेकर समझौते हुए। यूएई की भारतीय बैंकिंग और ऊर्जा सेक्टर में निवेश में दिलचस्पी है।

भारत के साथ ऑयल की डील को काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इससे मिडिल ईस्ट संकट के बीच भारत की ऊर्जा सुरक्षा मजबूत होगी। खास बात यह है कि इन तेल टैंकरों को होर्मुज स्ट्रेट से होकर नहीं गुजरना पड़ेगा। यूएई से मिलने वाले कच्चे तेल में से 1.37 करोड़ बैरल भारत में स्टोर होगा, बाकी यूएई के फुजैराह में होगा। इससे भारत का स्ट्रैटजिक रिजर्व ऑयल 14-15 दिनों का हो जाएगा, जो अभी मात्र 9 दिन का है। इससे तेल की कीमतों में अचानक उछाल का असर कम होगा। देश को सस्ता और स्थिर ईंधन सप्लाई चेन मिल जाएगा।

नीदरलैंड दौरे में 17 समझौतों पर हुए हस्ताक्षर

यूरोपीय देश भारत में ग्रीन हाइड्रोजन, सौर ऊर्जा और पवन ऊर्जा, इलेक्ट्रिक गाड़ियाँ, ईवी सप्लाई चेन में निवेश करने जा रहा है। इससे भारत में ऊर्जा आयात में कमी आएगी, इलेक्ट्रिक व्हीकल उद्योग तेज होगा, नई फैक्ट्रियाँ लगेंगी और रोजगार के अवसर बढ़ेंगे।

नीदरलैंड दौरे के दौरान सेमीकंडक्टर और ग्रीन टेक्नोलॉजी काफी अहम रहे हैं। इसको लेकर भारत ने नीदरलैंड के साथ 17 समझौते किए। सबसे बड़ा फोकस सेमीकंडक्टर सेक्टर पर रहा। नीदरलैंड की कंपनी ASML दुनिया की सबसे बड़ी चिप मशीन निर्माता कंपनी है। भारत चाहता है कि गुजरात और अन्य राज्यों में बनने वाले चिप प्लांट्स को डच तकनीक और सपोर्ट मिले।

इसको देखते हुए सेमीकंडक्टर सहयोग, ग्रीन हाइड्रोजन, जल प्रबंधन, रक्षा और तकनीक का सहयोग, माइग्रेशन एंड मोबिलिटी समझौते हुए। चिप बनाने की लिथोग्राफी तकनीक में एएसएमएल कंपनी का एकाधिकार है। ये कंपनी टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स के 91 हजार करोड़ रुपए से बनाई जा रही देश के पहले सेमीकंडटर प्लांट तैयार करने में मदद करेगी।

आने वाले वर्षो में भारत में सेमीकंडक्टर फैब्रिकेशन, चिप मशीनरी, इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग, AI हार्डवेयर जैसे क्षेत्रों में निवेश होगा। इन समझौतों से भारत की सेमीकंडक्टर इंडस्ट्री को बड़ा समर्थन मिलेगा। चिप निर्माण में चीन जैसे देशों पर निर्भरता घटेगी। ग्रीन एनर्जी सेक्टर में नई तकनीक आएगी। जल संकट और कृषि प्रबंधन में डच विशेषज्ञता का लाभ मिलेगा। भारतीय छात्रों और पेशेवरों को यूरोप में ज्यादा अवसर मिलेंगे। चीन और ताइवान पर निर्भरता कम होगी। हाई-टेक नौकरियाँ बढ़ेंगी और मेक इन इंडिया को मजबूती मिलेगी।

चोल वंश की तांबे की प्लेटें भारत को लौटाई– नीदरलैंड ने चोल राजवंश के समय की तांबे की प्लेटें भारत को वापस की। इसमें तमिल भाषा में चोल वंश के बारे में बताया गया है। 18वीं सदी में डच इसे उठाकर ले गए थे। ये ऐतिहासिक प्रमाण देश की संस्कृति के लिए काफी अहम है।

स्वीडन दौर में 6 द्विपक्षीय समझौते

पीएम मोदी का स्वीडन दौरा भी खास रहा। स्वीडन ने अपने सर्वोच्च राष्ट्रीय सम्मान से नवाजा और स्ट्रेटजिक साझेदारी के तहत 6 समझौते हुए। स्वीडन यात्रा में पीएम मोदी ने यूरोप की बड़ी कंपनियों और इंडस्ट्री के सीईओ से मुलाकात की। इस दौरान एआई, 6जी और इंडस्ट्री पर जोर रहा। यूरोपीय कंपनियों का भारत में निवेश होने से भारत का ऊर्जा आयात कम होगा। इलेक्ट्रिक व्हीकल उद्योग तेज होगा, नई फैक्ट्रियाँ लगेगी और रोजगार के अवसर बढ़ेंगी।

भारत और स्वीडन ने आने वाले 5 सालों में यानी 2026-2030) के बीच द्विपक्षीय व्यापार और निवेश को दोगुना करने पर सहमति जताई है। 2025 में भारत और स्वीडन के बीच द्विपक्षीय व्यापार 7.75 अरब डॉलर यानी 64625 करोड़ रुपए पहुँच चुका है। यह अगले 5 सालों में बढ़कर करीब 15 अरब डॉलर पहुँचाने का लक्ष्य रखा गया है।

AI यानी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस सहयोग, 6G रिसर्च, ग्रीन इंडस्ट्रियल टेक्नोलॉजी में सहयोग से भारत को काफी फायदा होगा। यहाँ स्किल डेवलपमेंट के साथ साथ रोजगार के नए अवसर मिलेंगे। भारत में नई कंपनियाँ लगने से मेक इन इंडिया और मैन्युफैक्चरिंग को सपोर्ट मिलेगा और सबसे अहम है कि भारत यूरोप के सप्लाई चेन नेटवर्क का हिस्सा बन जाएगा।

स्वीडन दौरे के दौरान एक अहम बात ये हुई कि मदर ऑफ ऑल डील यानी यूरोपीय यूनियन के साथ हुए मुक्त व्यापार समझौते को लागू करने पर सहमति बनी। यूरोपीय यूनियन की प्रेसिडेंट उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने वादा किया है कि साल 2026 के अंत तक इसपर साइन वो कर देंगी।

पीएम मोदी का नॉर्वे दौरा

यूरोप का अहम देश नॉर्वे पीएम मोदी का चौथा अहम पड़ाव रहा। 43 साल बाद भारत का प्रधानमंत्री नॉर्वे पहुँचा था। इस दौरान 12 समझौते हुए।इनमें सबसे अहम ‘Triangular Development Cooperation’ समझौता है। इसके तहत नॉर्वे भारत में ग्रीन एनज्री के क्षेत्र में निवेश करेगा।

इसके अलावा सौर उर्जा, पवन ऊर्जा, पनबिजली जैसे क्लीन ऊर्जा में निवेश करेगा। भारत का लक्ष्य 2030 तक 500 गीगावाट क्लीन एनर्जी उत्पादन का लक्ष्य है। वर्तमान में सिर्फ 283.46 गीगावाट का क्लीन एनर्जी का उत्पादन देश में होता है।

भारत के साथ हुए समझौतों के अंतर्गत ग्लोबल साउथ देशों में संयुक्त विकास परियोजनाएँ, ब्लू इकोनॉमी और समुद्री सहयोग, आर्कटिक रिसर्च, ग्रीन टेक्नोलॉजी से जुड़ा समझौता शामिल है।

पीएम मोदी की इस यात्रा के दौरान EFTA व्यापार समझौते के तहत अगले 15 वर्षों में भारत में 100 अरब डॉलर यानी लगभग 8.4 लाख करोड़ रुपए निवेश का लक्ष्य रखा गया है। इससे करीब 10 लाख नई नौकरियाँ पैदा होंगी।

भारत को इससे काफी फायदा होने जा रहा है। इससे भारत की वैश्विक नेतृत्व भूमिका मजबूत होगी। समुद्री व्यापार और रिसर्च में नई संभावनाओं का द्वार खुलेगा। भारत को यूरोप के ग्रीन फंड और तकनीक तक पहुँच हो पाएगी।

यूरोप का सबसे बड़ा तेल उत्पादक देश होने के नाते नॉर्वे से भारत तेल और गैस भी खरीदता रहा है। भारत ने एलपीजी की खरीद भी इनदिनों नॉर्वे से बढ़ाई है।

इटली दौरे के दौरान अहम समझौता

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपनी यात्रा के अंतिम पड़ाव इटली पहुँचे, जहाँ प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी के बीच हुई द्विपक्षीय वार्ता के दौरान 10 महत्वपूर्ण समझौतों पर हस्ताक्षर किए। पीएम मोदी और पीएम जॉर्जिया मेलोनी की केमेस्ट्री ने भी दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींचा।

पीएम की इटली यात्रा के दौरान दोनों देशों ने 20 अरब यूरो यानी करीब 1 लाख 80 हजार करोड़ रुपए से अधिक के व्यापार लक्ष्य को 2029 तक हासिल करने का संकल्प लिया है। फिलहाल ये 14 अरब यूरो है। द्विपक्षीय संबंधों को ‘विशेष रणनीतिक साझेदारी’ यानी स्पेशल स्ट्रेटजिक पार्टनरशिप तक अपग्रेड किया गया है, जो काफी अहम है।

इटली के साथ जो समझौते हुए हैं उनमें रक्षा उत्पादन और को-डेवलपमेंट क्रिटिकल मिनरल्स सहयोग और IMEC कॉरिडोर यानी इंडिया मिडिल ईस्ट यूरोप कॉरिडोर शामिल है। शिक्षा, कृषि और विज्ञान में सहयोग के साथ-साथ आर्थिक अपराध रोकने में सहयोग पर सहमति बनी है।

भारत को इसका फायदा यह होगा कि रक्षा निर्माण में यूरोपीय तकनीक मिलेगी। चीन के मुकाबले यूरोप में वैकल्पिक सप्लाई चेन बनेगी। इससे भारतीय निर्यात बढ़ेगा। IMEC कॉरिडोर से भारत-यूरोप व्यापार में जबरदस्त इजाफा होने की उम्मीद है। इलेक्ट्रिक गाड़ियों और बैटरी उद्योग के लिए जरूरी मेटल्स सप्लाई सुरक्षित होगी

इस पूरे दौरे से भारत को 5 बड़े रणनीतिक फायदे मिलते दिख रहे हैं। सबसे अहम ऊर्जा सुरक्षा को मजबूती मिल रही है। ऑयल संकट से निपटने के लिए आगे आने वाले दिनों में तेल और गैस सप्लाई अधिक सुरक्षित हो जाएँगे। सेमीकंडक्टर और AI टेक्नोलॉजी समेत दूसरे सेक्टर में टेक्नॉलोजी तेजी से आने वाले हैं। मेक इन इंडिया को बल मिलेगा और रक्षा निर्माण के क्षेत्र में आत्मनिर्भर भारत के लिहाज से आधुनिक हथियार और तकनीक उत्पादन बढ़ेगा।

चीन के बजाय यूरोप के साथ व्यापार भारत के हित में होगा। मुक्त व्यापार समझौते के लागू होने के बाद भारत-EU आर्थिक संबंध दुनिया में नई आर्थिक परिभाषा लिखेगी। इससे सप्लाई चेन और तकनीकी विकल्प के क्षेत्र में भारत मीलों आगे बढ़ जाएगा।

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रुपम
रुपम
रुपम के पास 20 साल से ज्यादा का पत्रकारिता का अनुभव है। जामिया मिलिया इस्लामिया विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में पीजी डिप्लोमा। जी न्यूज से टेलीविज़न न्यूज चैनल में कामकाज की शुरुआत। सहारा न्यूज नेटवर्क के प्रादेशिक और नेशनल चैनल में टेलीविज़न की बारीकियाँ सीखीं। सहारा प्रोग्रामिंग टीम का हिस्सा बनकर सोशल मुद्दों पर कई पुरस्कार प्राप्त डॉक्यूमेंट्री का निर्माण किया। एडिटरजी डिजिटल हिन्दी चैनल में न्यूज एडिटर के तौर पर काम किया।

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