Saturday, April 4, 2026
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कौन थे ईरान के सुप्रीम लीडर अली खामेनेई, जिन्होंने चार दशक तक इस्लामी मुल्क की सत्ता संभाली: अमेरिका-इजरायल विरोध को बनाया नीति, जानें सब कुछ

अमेरिका-इजरायल के संयुक्त हमले में ईरान के सुप्रीम लीडर अली खामेनेई की मौत के बाद देश में सत्ता परिवर्तन, उत्तराधिकार संकट और क्षेत्रीय अस्थिरता की आशंकाएँ तेज हो गईं।

ईरान के नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की इजरायल और अमेरिका के संयुक्त हमले में मौत हो गई है। ईरानी की सरकारी मीडिया ने रविवार (1 मार्च 2026) को उनके मौत की पुष्टि की।

खामेनेई की मौत का दावा करते हुए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर लिखा, “इतिहास के सबसे क्रूर लोगों में से एक, खामेनेई, मर चुका है। यह न केवल ईरान के लोगों के लिए न्याय है, बल्कि सभी महान अमेरिकियों और दुनियाभर के उन कई देशों के लोगों के लिए भी न्याय है, जिन्हें खामेनेई और उसके खूनी गुंडों के गिरोह ने मार डाला या क्षत-विक्षत कर दिया।”

खामेनेई की मौत ऐसे समय पर हुई है जब ईरान पहले से ही आर्थिक संकट, अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों और अंदरूनी विरोध प्रदर्शनों से जूझ रहा था। खामेनेई की मौत 50 साल के इतिहास का सबसे बड़ा सत्ता परिवर्तन माना जा रहा है।

हालाँकि यह साफ नहीं है कि इससे तुरंत शासन परिवर्तन होगा या नहीं। ईरान में राष्ट्रपति चुना हुआ होता है, लेकिन असली ताकत सुप्रीम लीडर के पास ही रहती है। वर्तमान में राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियन हैं, पर अंतिम निर्णयों का अधिकार खामेनेई के पास था।

उनके संभावित उत्तराधिकारियों में उनके बेटे मोजतबा खामेनेई का नाम लिया जा रहा है। इससे पहले पूर्व राष्ट्रपति इब्राहिम रईसी को उत्तराधिकारी माना जा रहा था, लेकिन 2024 में हेलिकॉप्टर दुर्घटना में उनकी मौत हो गई थी।

कौन थे खामेनेई?

अयातुल्ला अली खामेनेई 1989 से ईरान का सर्वोच्च नेता है। उन्होंने यह पद अयातुल्ला रुहोल्लाह खोमैनी की मौत के बाद संभाला था, जिन्होंने 1979 की इस्लामी क्रांति का नेतृत्व किया था। खामेनेई ने पहले ईरान-इराक युद्ध के दौरान राष्ट्रपति के रूप में देश का नेतृत्व किया। उन्होंने 1999 के छात्र आंदोलनों, 2009 के विवादित चुनावों के बाद हुए बड़े प्रदर्शनों और 2019 के आर्थिक विरोधों का सामना किया। 2022

उनका जन्म 1939 में मशहद में हुआ था। कम उम्र से ही उन्होंने इस्लामी शिक्षा प्राप्त की और शाह के शासन के खिलाफ आंदोलन में शामिल हो गए। उन्हें कई बार गिरफ्तार किया गया। 1981 में एक हमले में उनका दाहिना हाथ बेकार हो गया था।

सुप्रीम लीडर बनने के बाद उन्होंने ईरान की सैन्य और सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत किया। इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) को उन्होंने बड़ी ताकत दी, जो बाद में देश की राजनीति और अर्थव्यवस्था में भी प्रभावशाली बन गई।

उनके छह बच्चे बताए जाते हैं, जिनमें मोजतबा खामेनेई को सबसे प्रभावशाली माना जाता है। परिवार के कुछ सदस्य, जिनमें उनकी बहन बद्री भी शामिल हैं, बाद में उनके आलोचक बन गए थे।

शासन, विवाद और क्षेत्रीय रणनीति

खामेनेई के शासन में ईरान ने प्रतिरोध की धुरी यानी मिडिल ईस्ट में अपने सहयोगी समूहों का नेटवर्क मजबूत किया। लेबनान में हिज़्बुल्लाह, गाजा में हमास, यमन में हूती और इराक-सीरिया के कई गुटों को समर्थन दिया गया। इस रणनीति का उद्देश्य अमेरिका और इजरायल के खिलाफ फॉरवर्ड डिफेंस बनाना था।

हालाँकि उनके शासन में कई बार बड़े विरोध प्रदर्शन भी हुए। 2009 के चुनाव विवाद, 2019 में पेट्रोल की कीमतों में बढ़ोतरी और 2022 में महिलाओं के अधिकारों को लेकर हुए प्रदर्शनों को सुरक्षा बलों ने कड़ी कार्रवाई से दबा दिया। मानवाधिकार संगठनों के अनुसार इन कार्रवाइयों में सैकड़ों लोग मारे गए।

सुरक्षा कारणों से उनकी सार्वजनिक मौजूदगी बेहद सीमित रहती थी। वे कभी विदेश यात्रा पर नहीं गए, सिवाय 1989 में उत्तर कोरिया की आधिकारिक यात्रा के, जहाँ उन्होंने किम इल-सुंग से मुलाकात की थी।

2015 में ईरान ने परमाणु समझौता (JCPOA) किया, लेकिन बाद में अमेरिका के समझौते से हटने के बाद तनाव फिर बढ़ गया। खामेनेई ने परमाणु कार्यक्रम को जारी रखा, हालाँकि उन्होंने परमाणु हथियारों के खिलाफ फतवा भी जारी किया था।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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