अंतरराष्ट्रीय राजनीति के विद्वान जोसेफ नाइ के सॉफ्ट पॉवर की परिभाषानुसार प्रधानमंत्री मोदी भारत की वैश्विक पहुँच में बदलाव के वाहक बने हैं। PM मोदी ने अपनी विदेश नीति के 5 स्तंभों के माध्यम से भारत की सांस्कृतिक कूटनीति को बढ़ावा देने के लिए एक सफल प्रयास किया है। ये 5 स्तंभ - सम्मान, संवाद, समृद्धि, सुरक्षा एवं संस्कृति और सभ्यता हैं।
कौन हैं वो 'मसीहा पत्रकार', जिनकी पूर्ववर्ती सरकारों में अच्छी-ख़ासी मौज रहती थी? मोदी के आने से उन्हें दिक्कत क्यों हुई? 'इंडिया टीवी' के न्यूज़ एंकर सुशांत सिन्हा से समझिए कि अवार्ड-वापसी और 'लिंचिंग' की कैसे रची गई पूरी साज़िश। लुटियंस गैंग की तिलमिलाहट का पोस्टमॉर्टम।
प्रधानमंत्री मोदी गणतंत्र दिवस से पहले गणतंत्र दिवस के परेड में शामिल होने वाले करीब 1730 आदिवासी कलाकारों, NCC कैडेटों, NSS वोलियंटर और झाँकी में शामिल होने वाले कलाकारों से ‘ऐट होम’ कार्यक्रम में मुलाकात कर रहे हैं।
"भारत लोकतंत्र सूचकांक में 10 स्थान लुढ़क गया। पिछले दो साल के राजनीतिक घटनाक्रमों पर नजदीकी नजर रखने वाला कोई भी व्यक्ति यह जनता है कि लोकतंत्र को कुचला गया है और लोकतांत्रिक संस्थाओं को शक्तिहीन किया गया है।"
मोहम्मद इरफान नामक एक युवक ने भी
इस वीडियो को शेयर किया है। जिसने अपने ट्वीट में लिखा है कि उसने शाहीन अब्दुल्ला एवं जामिया और जेएनयू के छात्रों के साथ मिलकर दिल्ली मेट्रो के अंदर नारे लगाए।
भारत को 1 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने में 60 साल लगे। इसके अगले 12 वर्षों में देश के 2 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने का गौरव प्राप्त किया। इसके बाद भारत ने अभूतपूर्व छलांग लगाते हुए मात्र 5 वर्षों में 3 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बन कर दुनिया को चौंका दिया।
तनवीर जैसे अन्य कई 'बुद्धिजीवियों' ने सरेआम सड़कों पर उनके पोस्टर जलाए, उनके ख़िलाफ़ नारे लगाए गए, उनके मरने-मारने तक की बातें हुईं। लेकिन किसी ने भी एक बार नरेंद्र मोदी सरकार के उन कार्यों पर नजर नहीं डाली। जिसे प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में वर्तमान सरकार ने सिर्फ़ अल्पसंख्यक समुदाय को समाज में ऊपर उठाने के लिए किया।
गजब की सांगठनिक क्षमता, टारगेट को पूरा करने का मिशनरी अंदाज और मिलनसार व्यक्तित्व की वजह से ही बीजेपी के सामूहिक नेतृत्व द्वारा कई कद्दावर नेताओं को दरकिनार कर जेपी नड्डा को अमित शाह का उत्तराधिकारी चुना गया।
"सिर्फ परीक्षा के अंक जिंदगी नहीं हैं। कोई एक परीक्षा पूरी जिंदगी नहीं है। ये एक महत्वपूर्ण पड़ाव है। लेकिन यही सब कुछ है, ऐसा नहीं मानना चाहिए। मैं माता-पिता से भी आग्रह करूँगा कि बच्चों से ऐसी बातें न करें कि परीक्षा ही सब कुछ है।"
"कन्हैया कुमार सिर्फ मीडिया वालों के लिए लोकप्रिय है, आम जनता कन्हैया कुमार का नाम भी सुनना नही चाहती है, लोगों का खून खोल उठता है, लोग उसे देशद्रोही और गद्दार, टुकड़े टुकड़े गैंग का आदमी बुलाते हैं, और यह भी कहते हैं लोग जो देश का नहीं वह किसी का नहीं हो सकता है।"