आम आदमी पार्टी के समर्थकों या फिर प्रशंसकों के लिए अब केजरीवाल के नजदीक जाना काफी मुश्किल होगा। अब वो पहले की तरह करीब जाकर ना तो हाथ मिला सकते हैं और ना ही माला पहना सकते हैं। केजरीवाल के आस-पास सुरक्षाबलों का मजबूत घेरा होगा।
कारण जो भी हो पर, लोकतंत्र में जनता अपने नेता से कितनी भी नाराज क्यों न हो, फिर भी इस तरह से शारीरिक हिंसा पर उतर आना घोर निंदनीय है। अगर कोई पार्टी वास्तव में इसे पब्लिसिटी या चंदे का साधन बना कर प्रयोग कर रही है तो ये भी लोकतान्त्रिक व्यस्था का मजाक बनाना ही है।
सूत्रों का तो ये भी कहना है कि जब भी केजरीवाल को कहीं पर थप्पड़ या घूँसा पड़ता है, तब-तब आम आदमी पार्टी के चंदों में व्यापक उछाल आता है। भारत को अंग्रेजों से आजाद करवाने के लिए महात्मा गाँधी ने अनशन का मार्ग चुना था और संत केजरीवाल ने मोदी के चंगुल से देश को छुड़ाने के लिए अगर अपनी कुटाई करवाने का मार्ग चुना है तो इसमें बुराई है क्या?
पार्टी कार्यकर्ताओं का कानून अपने हाथ में लेकर आक्रोशित युवक की पिटाई करना भी उतना ही निंदनीय है। ये घटना केजरीवाल और आम आदमी पार्टी के नेताओं के सामने हुई इसलिए और भी निंदनीय है।
केंद्रीय मंत्री और भाजपा नेता विजय गोयल ने केजरीवाल पर कटाक्ष करने का फैसला किया और उन्होंने यह दावा किया कि AAP के 14 विधायक भाजपा के संपर्क में हैं जो भाजपा में शामिल होने के इच्छुक हैं।
2015 के 20 बड़े वादे। 2019 में वास्तविकता की पड़ताल करने पर हमें मिली वादाख़िलाफ़ी की 20 दास्तान। क्या कहा, क्या किया और कैसे पलट गए केजरीवाल! PPRC की रिसर्च रिपोर्ट की प्रमुख बातें, अन्य मीडिया रिपोर्टों के सबूत के साथ। लोकपाल बिल से लेकर पानी, बिजली और शिक्षा तक, सब कुछ।
AAP ने 20 नए डिग्री कॉलेजों के निर्माण का वादा किया था लेकिन अब तक एक पर भी काम शुरू नहीं कराया जा सका है। जितने शिक्षकों की ज़रुरत थी, उससे आधे से भी कम पदों पर नियुक्तियाँ की गई हैं। फ्री वाई-फाई सर्विस से लेकर सीसीटीवी योजना सब की हालत पंक्चर है।
"हम एक समय में कॉन्ग्रेस के साथ गठबंधन का सपना भी नहीं देख सकते थे। लेकिन देश में मौजूदा परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए, हमने एक तरह के टाई-अप के लिए कॉन्ग्रेस से संपर्क किया। हमने कॉन्ग्रेस को समझाया कि मोदी-शाह को हराना क्यों महत्वपूर्ण है।"