महिला मड़ियांव की रहने वाली है। उसने पूछताछ में बताया कि युवकों ने उससे खुर्शेदबाग कॉलोनी का पता पूछा था। शुरुआती जॉंच के आधार परा पुलिस और एटीएस का कहना है कि तिवारी की हत्या से महिला का कोई संबंध नहीं है।
राशिद पठान दुबई की जिस कंपनी में काम करता था उसका मालिक पाकिस्तानी ही है। वह हाल ही में घर लौटा था। पठान सहित तीन को एटीएस ने सूरत से दबोचा है। अब एटीएस उसके पाकिस्तानी कनेक्शन को खंगाल रही है।
मनोज कुमार ने दावा किया कि उनकी हत्या का 2 बार प्रयास हो चुका है। कुमार ने बताया कि उन पर पूर्व में गोली भी चलाई जा चुकी है लेकिन वह किसी तरह बच निकले।
गुजरात पुलिस और योगी की पुलिस को शक की नज़र से देखने वाले यह भी कह सकते हैं कि सबूत मैन्युफैक्चर्ड है। ऐसे लोगों के लिए राँची के काँके में बिरसा मुंडा के नाम पर एक अस्पताल है। वहाँ अच्छी व्यवस्था है।
"कमलेश तिवारी के बड़े बेटे के लिए यूपी प्रशासन सरकारी नौकरी की अनुशंसा करेगी। आत्मरक्षा के लिए उसे लाइसेंसी हथियार भी प्रदान किया जाएगा। उन्हें उचित वित्तीय सहायता प्रदान किया जाएगा। इन सभी बातों पर एक समिति द्वारा विचार किया जा रहा है।"
कमलेश तिवारी ने फेसबुक पर एक पोस्ट अपनी मौत से करीब दो दिन पहले साझा किया था। उन्होंने उस पोस्ट में लिखा था कि कैसे उन्हें यूपी आईबी से फोन कर इस सन्दर्भ में बताया गया था। इसी से यह भी पता चलता है कि कमलेश पहले से ही जिहादियों के निशाने पर थे।
शर्मा को भूमाफियाओं से जान का खतरा था। करोड़ों रुपए की 70 बीघा ज़मीन को लेकर माफिया उन्हें कई बार जान से मरने की धमकी दे चुके थे। मेरठ पुलिस ने पाँच आरोपितों को गिरफ़्तार किया है।
सूरत के मौलवी मोसिन सलीम शेख, फैजान पठान और शमीम रशीद को हिरासत में लिया गया है। रशीद को कंप्यूटर का ज्ञान है और वो दर्जी का काम करता है। इस मामले में कुछ और लोगों को हिरासत लिया गया था जिन्हें...
“कमलेश तिवारी राह का काँटा था और जो कोई भी इस्लाम और मुस्लिमों की तरफ उँगली उठाएगा, उसका यही अंजाम होगा। अलहिंद ब्रिगेड जिम्मेदारी लेता है। और ज्यादा देखने के लिए तैयार हो जाओ। युद्ध शुरू हो गया है। अलहिंद ब्रिगेड कमलेश तिवारी की हत्या की जिम्मेदारी लेता है, जिसने इस्लाम और मुस्लिमों को बदनाम किया था।”
ज़्यादा संभावना इस बात की है कि पुलिस को मामले में किसी भी 'एंगल' के सबूत अब तक न मिले हों, जिसमें कोई आश्चर्य नहीं किया जा सकता, क्योंकि हत्या को अभी 24 घंटे भी नहीं हुए हैं। ऐसे में सबूत न मिलने को बहुत सम्भव है कि मीडिया में क्लीन चिट मिलने के रूप में दिखाया जा रहा है।