मियाँ मोहम्मद अकरम उस्मान ने इस पोस्टर में मुहम्मद अली जिन्ना और पकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान की तस्वीर लगाई है। इसके साथ ही, पोस्टर में भारत के झंडे तिरंगा को भी दिखाया गया है, जिस पर 'क्रॉस' का निशान लगाया गया है।
एंकर कहती है कि 1992 में जब हिंदुओं ने बाबरी मस्जिद को शहीद करने के लिए धावा बोला था तो वहाँ कई मुस्लिम शहीद हो गए थे। उन मुस्लिमों की रूहें आज भी इस मस्जिद में मौजूद हैं, जो अब बाबरी मस्जिद को शहीद होने से रोक रहे हैं।
बीबीसी का कहना था कि शाहीन बाग के प्रदर्शनकारियों के पूर्वजों ने पाकिस्तान को ठुकराया था और भारत को अपनाया था। इसके जवाब में भाजपा के फायरब्रांड नेता योगी ने कहा कि उन लोगों ने पाकिस्तान न जाकर भारत पर कोई एहसान नहीं किया है।
“ये भारतीय छात्र हैं, इन्हें एयरपोर्ट ले जाया जाएगा और वहाँ से फिर इन्हें इनके घर पहुँचाया जाएगा। बांग्लादेश वाले भी चले जाएँगे। एक हम पाकिस्तानी हैं, जो यहाँ पर फँसे हैं। जिनकी सरकार कहती है कि आप मरो या जियो, हम आपको नहीं निकालेंगे। शेम ऑन यू पाकिस्तान, सीखो भारत से कुछ सीखो।”
आईटीबीपी ने संक्रमित भारतीय मरीजों को बुनियादी चिकित्सा सेवा देने के लिए दिल्ली में 600 बिस्तरों वाला अलग केंद्र तैयार किया है। चीन से भारत पहुँचे यात्रियों को दक्षिण पश्चिम दिल्ली के छावला इलाके में 14 दिनों तक डॉक्टरों की निगरानी में रखा जाएगा।
पाकिस्तान ने कहा है कि वह चीन में फँसे अपने नागरिकों को नहीं निकालेगा। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, चीन में फँसे पाकिस्तानियों में मुख्य रूप से छात्र हैं जो वुहान शहर में फँसे हुए हैं। वुहान चीन का वह शहर है जहाँ से यह महामारी चीन के बाकी हिस्सों समेत दुनियाभर के शहरों में पहुँची है।
पाकिस्तानी अखबार डॉन ने पुलिस अधिकारियों के हवाले से बताया कि 15, 13, 13 और 12 साल की उम्र के चारों लड़कों ने अपना अपराध कबूल कर लिया है। उन्होंने मंदिर से पैसे चुराने के लिए वारदात को अंजाम दिया था।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पाकिस्तान में निकले रोजगार के एक विज्ञापन का जिक्र किया। इसमें सफाई के कामों के लिए कर्मचारियों की वैकेंसी निकाली गई थी। इस वैकेंसी में सिर्फ गैर-मुस्लिमों को ही पात्र बताया गया था।
".....लगा कि मुझे तो कोई प्रॉब्लम ही नहीं है, दुनिया बदल गई। यहाँ तक कि वहाँ मौजूद सभी नर्सों में मुझे हूरें नजर आने लगी। मैंने डॉक्टर को दोबारा वही टीका लगाने के लिए कहा, लेकिन उन्होंने मुझे दूसरा पेनकिलर नहीं दिया। यहाँ के डॉक्टर वाकई तारीफ के काबिल हैं।”
यूरोपीय संघ की संसद में CAA के खिलाफ प्रस्ताव लाने के पीछे यूके के सांसद शफ्फाक मोहम्मद का दिमाग है, जो कि मूल रूप से पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (POK) का रहने वाला है। POK में मीरपुर का निवासी शफ्फाक मोहम्मद 2019 से यूरोपियन पार्लियामेंट का सदस्य है।