विदेशी पत्रकार डेक्स्टर ने लिखा कि जब वो श्रीनगर हवाई अड्डे पर उतरे, तो राणा अयुब ने उन्हें ‘विदेशियों के लिए पंजीकरण’ डेस्क पर जाने से रोक दिया। हवाई अड्डे पर हंगामा का लाभ उठाते हुए, वे दोनों बिना किसी रोक-टोक के और बिना पंजीकरण करवाए आराम से बाहर निकल गए।
हिन्दुओं की जैसे दुर्दशा सेक्युलर सरकार ने कर रखी है, उसमें हिन्दुओं को 'सेक्युलरिज़्म' की दुहाई वैसे ही है, जैसे नाज़ी यातना शिविर में पड़े यहूदी से प्रार्थना कि वह अपने शोषकों को जिलाए रखने के लिए कुछ कर दे।
जहाँ पूरा देश डॉक्टर रेड्डी के साथ हुई जघन्यता के लिए इंसाफ की माँग कर रहा है, 'द क्विंट' इस बात को लेकर चिंतित है कि अब मुख्य आरोपित मोहम्मद आरिफ के जेल जाने के बाद मुख्य अभियुक्त आरिफ के परिवार का गुजारा कैसे होगा? पूरी रिपोर्ट में उसे 'बेचारा' साबित करने की कोशिश की गई है।
हैदराबाद वाला मामला मजहबी नहीं लगता लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि मजहबी बलात्कार होते ही नहीं! रवीश जैसों की कोशिश यह है कि इस घटना का इस्तेमाल कर उन तमाम 'रेप जिहाद' की खबरों को चर्चा से गायब कर दिया जाए जहाँ बलात्कारी का मकसद मजहबी घृणा ही है, और कुछ नहीं।
"...कमल के निशान पर जो वोट दबाओगे ना, वो नरेंद्र मोदी को मिलने वाला है... ये समझकर दबाना... मुझे 'हाँ हाँ' कर रहे हो, ये 20-25 हजार लोगों से जीत जाएँगे क्या? जीतेंगे क्या?... अरे भाई, क्या 'हाँ' कह रहे हो? मैं भी बनिया हूँ... मुझे मालूम है नहीं जीतेंगे यार..."
शिवसैनिकों ने उनके स्टूडियो में घुस कर उनकी पिटाई की थी। शिवसेना कार्यकर्ताओं ने निखिल वागले के चेहरे पर स्याही पोत दी थी। उस पिटाई के बाद वागले अक्सर शिवसेना की आलोचना करते मिलते थे। बाल ठाकरे ने वागले की पटाई करने वाले शिवसैनिकों की सराहना की थी।
इससे पहले फेसबुक और ट्विटर पर आपत्तिजनक पोस्ट शेयर करने के आरोप में लखनऊ पुलिस ने 8 जून 2019 को स्वतंत्र पत्रकार प्रशांत जगदीश कनौजिया को उसके आवास से गिरफ्तार किया था।
बरखा दत्त ने एक इंटरव्यू में कबूल किया था कि मुंबई हमले के दौरान टीवी चैनलों और उनके पत्रकारों ने जिस तरह की रिपोर्टिंग की उससे सैकड़ों लोगों की जान ख़तरे में आ गई थी। यहॉं तक कि सुरक्षा बलों के जवानों की जान भी ख़तरे में पड़ गई थी।
आजतक और न्यू इंडियन एक्सप्रेस जैसे मुख्यधारा के मीडिया संस्थानों का अलावा नेशनल हेराल्ड जैसे प्रोपेगंडा पोर्टल्स तक, सबने झूठ फैलाया। पत्रकार राजदीप सरदेसाई और कॉन्ग्रेस नेता रणदीप सिंह सुरजेवाला भी नहीं चूके।