2004, 2009 और 2014 के चुनावों में पहले तीन स्थान पर जो पार्टियाँ थीं, 2015 के विधानसभा चुनावों में वामपंथी पार्टी को जितनी सीटें (शून्य) मिलीं, और बेगूसराय के भूमिहारों द्वारा कमल छाप पर मुस्लिम को भी जिताने का पैटर्न, कन्हैया कुमार को तीसरे पोजिशन से आगे नहीं ले जाता दिखता।
भाजपा ने अरुणाचल प्रदेश में वोटिंग से पहले ही तीन विधानसभा सीटों पर निर्विरोध जीत दर्ज कर ली है। खास बात ये है कि पार्टी ने ये सभी सीटें बिना चुनाव लड़े जीती हैं। इनमें से दो सीटें तो 26 मार्च को ही पार्टी के खाते में आ गई थी, वहीं तीसरी सीट उसे गुरुवार (मार्च 28, 2019) को मिली।
राजद की प्रदेश अध्यक्ष और राजद सुप्रीमो की बेहद करीबी अन्नपूर्णा देवी के भाजपा ज्वॉइन करने के बाद अब राजद के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष और वरिष्ठ नेता गिरिनाथ सिंह ने आरजेडी छोड़कर बीजेपी का दामन थाम लिया है।
3 में सें 2 विधायकों ने विधायी शाखा का विलय किया है। इसका अर्थ यह हुआ कि वे दल-बदल विरोधी कानून के दायरे में आने से बच गए हैं। क्योंकि इस कानून के तहत यह अनिवार्य है कि विलय के लिए दो तिहाई सदस्यों की सहमति हो।
कॉन्ग्रेस प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने बीजेपी के वरिष्ठ नेता कलराज मिश्र का एक फर्ज़ी वीडियो ट्वीट करते हुए दावा किया है कि वो जनता को गोली मारने की धमकी दे रहे हैं।
सपा संरक्षक मुलायम सिंह यादव के दामाद और फिरोजाबाद से जिला पंचायत अध्यक्ष अनुजेश यादव रविवार को भाजपा अध्यक्ष अमित शाह की मौजूदगी में पार्टी ज्वॉइन कर ली। जिसकी वजह से कहीं न कहीं सपा को बीजेपी की तरफ से झटका लगा है।
समाजवादी पार्टी ने इस बार कॉन्ग्रेस के साथ गठबंधन करने की बजाए बहुजन समाज पार्टी से गठबंधन किया। 2014 में सपा और बसपा को केवल 5 और 0 सीटें मिली थीं, जबकि भाजपा ने देश में ऐतिहासिक जनादेश हासिल करने के साथ-साथ यूपी की 71 सीटें जीती थीं।
किसानों और मजदूर संगठनों पर मजबूत पकड़ रमेंद्र सिंह राठौड़ के पक्ष में नजर आती दिख रही है। किसान और मजदूर संघर्ष समिति द्वारा चलाए गए आंदोलनों में भी राठौड़ सक्रिय भूमिका में रहे। इस कारण करीब 50,000 मजदूर और डेढ़ लाख किसानों को मिलाकर लगभग 2 लाख मतदाताओं तक इनकी सीधी पकड़ के कारण विरोधियों के लिए इनसे जीत पाना आसान नहीं होगा।
भाजपा में एक साधारण कार्यकर्ता नेता बन सकता है, नेता से क्षत्रप, क्षत्रप से राष्ट्रीय अध्यक्ष और प्रधानमंत्री तक बन सकता है, लेकिन वह चाहकर भी पार्टी को हायजैक नहीं कर सकता है, चाहे वह कितना भी कद्दावर बना रहे।
केंद्रीय मंत्री ने राहुल गाँधी से पूछा, “क्या आपने यूनिटेक से दो संपत्ति खरीदी हैं? भाजपा आज पूछ रही है कि क्या आपने यूनिटेक से दो सम्पत्तियाँ खरीदी हैं।"