मुस्लिम समुदाय के महबूब, आज़ाद, इसराइल, मोनीस और अलानूर को पुलिस ने अपने शिकंजे में लिया। इन लोगों ने देवस्थान में मूर्तियाँ खंडित कर दी थीं, देवी-देवताओं की प्रतिमाएँ उठा कर ले गए थे और वहाँ जम कर उत्पात मचाया था।
निसार घर-घर घूम कर अपनी शादी की बातें करता रहता था। वह अपनी चाची शबनम से भी शादी करने की बातें कहता था, जिसे वह टाल जाती थी। निसार को लगता था कि उसकी शादी...
जाहिद ने मासूम का गला दुपट्टे से दबाया और फिर अपने घर मेंं भूसे की ढेर में छिपा दिया। तीन दिन बाद जब शव से गंध आने लगी तो शव को बाहर लाकर फेंक दिया। पुलिस को बरामद हुआ 'सोनम' का शव पूरी तरह सड़ चुका है।
समुदाय विशेष के लोगों ने ईद होने और नमाज़ का समय हो जाने की बात करते हुए कहा कि अब उनका त्यौहार आ गया है, इसीलिए लाउडस्पीकर पर भजन नहीं होना चाहिए। श्रद्धालुओं का तर्क था कि वे गाँव के बाहर आकर भजन-कीर्तन कर रहे हैं, जबकि नमाज़ गाँव के भीतर पढ़ी जाती है।
तीनों भाइयों ने अपने गुनाह को मान लिया है। इन्होंने बताया है कि उनकी बहन एक गैर-मुस्लिम और शादीशुदा व्यक्ति के साथ संबंध में थी। परिवार इस रिश्ते के ख़िलाफ़ था। इन लोगों ने सलमा को कई बार उस आदमी से दूर रहने के लिए कहा लेकिन...
विदेशी पत्रकार वेर्लेमन ने एक विडियो पोस्ट किया, जिसमें साजिद नाम का मुस्लिम युवक आपबीती सुना रहा है। इसमें वो साफ़-साफ़ कह रहा है कि उसे जेबकतरों ने रोका, लेकिन फिर भी इस विडियो को 'हिन्दुओं द्वारा मुस्लिमों पर हमले' के रूप में प्रचारित किया जा रहा है।
मुजफ्फरपुर शेल्टर होम रेप केस में एक अज्ञात "तोंद वाले अंकल नेताजी" और एक "मूछ वाले अंकल जी" की भूमिका सामने आई है। पीड़ित बच्चियों ने इन दोनों ही अज्ञात 'अंकलों' पर उनका यौन शोषण करने का आरोप लगाया है। CBI ने जाँच के लिए 6 महीने का समय माँगा था लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने 3 महीने का अल्टीमेटम दिया है।
एअरपोर्ट पर जब अतीक अहमद उतरा, तो साथ में पुलिस होने के बावजूद उसके समर्थकों ने उसका स्वागत किसी बड़े नेता की तरह किया। अतीक अहमद की जेब में 2000 रुपए के नोटों की गड्डियाँ साफ़-साफ़ झलक रही थीं। वह शान से फूलों की माला पहन हाथ हिलाता चल रहा था।
बच्ची अपने भाई-बहनों के साथ जन्नति दरवाजे के सामने बैठी थी जहाँ पर तीनों खेल रहे थे। तभी शाम करीब 7 बजे रोजा इफ्तारी के समय 3 साल की छोटी बेटी गायब हो गई। इसके बाद बच्ची की माँ ने दरगाह में मौजूद लोगों की सहायता से गुम हुई बेटी की तलाश शुरू की।
स्थिति को गंभीर समझते हुए रिटायर्ड सीजेआइ लोढ़ा ने एक लाख रुपए तुरंत उस बैंक खाते पर भेज दिए। इसके बाद 30 मई को जब जस्टिस बीपी सिंह से उनकी बात हुई तो पता चला कि उन्होंने ऐसा कोई मेल भेजा ही नहीं था। इसके बाद उन्हें एहसास हुआ कि उनके साथ ठगी हुई है।