गार्गी कॉलेज के सम्बन्ध में जब कॉलेज की छात्राओं से ऑपइंडिया ने बात की तो उन्होंने बताया कि उत्पीड़न वाली बात से मना नहीं किया जा सकता है लेकिन धार्मिक नारे लगाने जैसी बातें एकदम बेबुनियाद है और मीडिया द्वारा इस मुद्दे को दूसरी ही दिशा दी जा रही है।
सोमवार को मंडी हाउस में प्रदर्शनकारियों द्वारा सीएए के विरोध में मार्च निकालने के आह्वान पर दिल्ली पुलिस ने यह कहते हुए पहले ही बड़ी संख्या में पुलिस बल को तैनात कर दिया था कि, यहाँ कोई विरोध-प्रदर्शन या धरना देने का स्थान नहीं है, किसी को धरना देना या विरोध-प्रदर्शन करना है तो वह जंतर-मंतर जाए।
शाहीन बाग़ के उपद्रवियों का कहना है कि अब वो रामलीला मैदान शिफ्ट होने के लिए तैयार हैं क्योंकि सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में टिप्पणी की है। न्यायपालिका के प्रति आस्था का दिखावा करते हुए उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट जैसा कहेगा, वैसा किया जाएगा।
अपनी वीडियो में गुंजा उक्त सभी बातों का उल्लेख करके इसे शाहीन बाग का सच बताती हैं। वे कहती हैं कि जो शाहीन बाग संविधान की कसम लेता है, भारत के संविधान को सर्वोच्च बताता है, वही शाहीन बाग खुलकर कहता है कि उन्हें पुलिस पर भरोसा नहीं है।
केंद्रीय सतर्कता आयोग ने कुछ दिन पहले ये बात सार्वजनिक की थी कि उनके पास मोहल्ला क्लिनिक को लेकर शिकायतें आ रही हैं। जिनमें दावा किया जा रहा है कि मोहल्ला क्लिनिक में काम करने वाले डॉक्टर केवल 4 घंटों में 533 मरीजों को देखते हैं। यानी गणित के मुताबिक जोड़ा जाए तो एक मरीज को केवल 36 सेकेंड दिए जाते हैं।
क्राइम ब्रांच के खुलासे के बाद आम आदमी पार्टी के नेता कुलदीप कुमार ने अपना वो ट्वीट डिलीट कर दिया, जिसमें उनकी पार्टी के दिग्गज नेता कपिल गुर्जर के साथ दिखाई दे रहे थे। और यही प्रमाण है कि वाकई कपिल ने साल 2019 में आम आदमी पार्टी ज्वाइन की थी।
सोशल मीडिया में अटकलों का बाजार फिर गरम हो गया है। सूजे गाल के साथ एक न्यूज चैनल के कार्यक्रम में केजरीवाल पहुॅंचे। उन्होंने इसकी वजह इंफेक्शन बताया। लेकिन, यूजर्स इसे अमानतुल्लाह से जोड़ रहे हैं।
सीएए विरोध के नाम पर बच्चे उकसाए जा रहे हैं। उनसे आजादी के नारे लगवाए जा रहे। कट्टरपंथी उनका ब्रेनवॉश कर रहे हैं। बावजूद इसके बच्चों के अधिकार का हवाला दे मीडिया गिरोह इनकी करतूतों का समर्थन कर रहा है।
शाहीन बाग़ के एक प्रदर्शनकारी ने मृत बच्ची के सम्बन्ध में पूछे गए सवाल के जवाब में कहा- "वो अल्लाह की बच्ची थी, अल्लाह ने उसे बुला लिया।" कितनी आसानी से एक इंसानी ग़लती को उपरवाले के सिर मढ़ दिया गया और कोई मीडिया आउटरेज भी नहीं। उस बच्ची ने क्या अपनी सहमति दी थी कि मुझे सीएए-NRC के विरोध में प्रदर्शन करने ले चलो?