आरिफ मीट कारोबारी कुरैशी की हत्या करने के बाद उसके भाई रहीस को मारने के लिए पश्चिमी दिल्ली के पश्चिम विहार के एक निजी अस्पताल में गया था। लेकिन रहीस बच गया, क्योंकि हत्यारे को वो हॉस्पिटल में नहीं मिला।
चश्मदीदों ने बताया कि शाम करीब 7:30 बजे लड़की भोगल मार्केट से होकर मथुरा रोड की ओर जा रही थी कि तभी आरोपित मुनासिर उसके पीछे आया और उसे धक्का देकर जमीन पर गिरा दिया। इसके बाद उसने लड़की पर लगातार चाकू से कई वार किए।
आम आदमी पार्टी की विधायक ने ट्वीट में दिल्ली पुलिस को भी टैग किया। अंदाजा लगाया जा रहा था कि कोई मनचला युवक लाम्बा को फोन कर के परेशान कर रहा है। लेकिन, एक यूजर ने जवाब देते हुए उस नंबर से जुड़ी हैरान करने वाली जानकारी दी।
ईसा खान ठगी के लिए मदद के बहाने ट्रांजैक्शन के दौरान पिन नंबर देख लेता था, और फिर कार्ड चुराकर उसे इस्तेमाल करता था। ईसा खान ठगी करने के लिए पलवल से 80 किलोमीटर की दूरी तय करके दिल्ली आता था और काम पूरा करके दोबारा ईएमयू से वापस लौट जाता था।
"गुजरात दंगों की पृष्ठभूमि पर आधारित एक कहानी 'Manibein alias Bibijaan' में बजरंग दल और RSS से संबंधित संगठनों को बेहद ख़राब भूमिका में दर्शाया गया है। RSS और बजरंग दल को गुजरात दंगों में हमलावर के रूप में दिखाया जा रहा है।"
बात लिखती हैं दिल्ली के ओखला स्थित भारत के सबसे बड़े सीवर ट्रीटमेंट प्लांट की और फोटो लगाती हैं कैलिफोर्निया की! फिर तुलना करती हैं गुजरात के स्टैच्यू ऑफ यूनिटी से! यह किस तरह का प्रोपेगेंडा फैला रहीं हैं मेम साब?
बीते कई सालों से चीन पर आरोप लगते रहे हैं कि वह अपने उत्पादों विशेषकर इलेक्ट्रॉनिक उत्पादों के जरिए अन्य देशों के डाटा को एक्सेस करता है। हाल ही में यूएस एयरफोर्स ने हिकविजन के साथ करार को रद्द कर दिया था। अमेरिकी सरकार ने इस फर्म को एंटिटी लिस्ट में डाला हुआ है। जिसका मतलब यह है कि कोई भी यूएस फर्म हिकविजन को अपना उत्पाद नहीं बेच सकती। अमेरिका ने सुरक्षा के मद्देनजर ये फैसला लिया है।
"जब चुनावों का वक्त आता है तो मस्जिद, कब्रिस्तान जैसे स्ट्रक्चर बनने शुरू हो जाते हैं। मुझे केवल उन जमीनों पर आपत्ति है, जो सरकारी हैं। कुल 54 ऐसी जगह हैं, जिन पर मस्जिद और कब्रिस्तान बने हैं।"
दुर्गा मंदिर में हुए अनुष्ठान में शामिल अविरल शर्मा ने बताया कि यह कार्यक्रम विहिप ने आयोजित किया था और इसके लिए मंदिर में तोड़-फोड़ से आहत पूरी दिल्ली के हिन्दुओं ने दान दिया था।
कई मौकों पर फैक्टचेकर ने जानबूझकर तथ्यों को तोड़ा-मरोड़ा ताकि अपने डेटाबेस में मुस्लिम पीड़ितों की संख्या बढ़ा सके। इसके लिए उसने उन मामलों को भी शामिल किया जहाँ पीड़ित और अपराधी दोनों ही मुस्लिम थे। कुछ ऐसे मामलों को भी हेट क्राइम डेटाबेस में महज इसलिए शामिल कर रखा है, क्यूँकि कथित तौर पर पीड़ित मुस्लिम और गुनहगार हिन्दू थे, जबकि बाद में ये मामले गलत साबित हो चुके हैं।