प्रीति रेड्डी (बदला हुआ नाम) की स्कूटी पंक्चर होती है... मदद के लिए कुछ लोग आते हैं... बहन को फोन करती है... थोड़ी देर में फोन स्विच ऑफ हो जाता है... अगले दिन आधी जली लाश मिलती है... लाश से 100 मीटर की दूरी पर अंडरवियर मिलता है... इन सारे बिंदुओं का कनेक्शन ढूँढने पर...
कॉन्ग्रेसी विधायक गोवर्धन दांगी ने अपनी मर्दवादी सोच के तहत एक महिला सांसद को धमकी दे डाली - "प्रज्ञा ठाकुर कभी आई तो उसका पुतला नहीं बल्कि उसे पूरा का पूरा जिंदा जला भी देंगे।"
देश के राइट विंग की यही समस्या है कि उसे दीर्घकालिक युद्ध भी लड़ना है, लेफ्ट विंग की स्वीकार्यता भी चाहिए और अपनी नैतिकता भी बचानी है। तुमने न तो संदर्भ देखा, न सुनवाई की, बस विरोधियों के जाल में उलझ कर तुमने साध्वी प्रज्ञा को एक लाइन में नकार दिया। यही सब करना था तो उसे चुनाव क्यों लड़वाया?
कॉन्ग्रेस के वरिष्ठ नेता अहमद पटेल और मल्लिकार्जुन खड़गे एक कार में बैठकर एनसीपी चीफ शरद पवार के घर जाते हैं मीटिंग के लिए। यह कार किसी कॉन्ग्रेसी की नहीं बल्कि एक BJP नेता की होती है। अब सवाल लाजिमी है कि कॉन्ग्रेस नेताओं एक भाजपा नेता ने अपनी कार क्यों दी?
शपथ ग्रहण का समय गठबंधन के अनुकूल नहीं। इस समय वृष आरोही है। शनि, शुक्र और चंद्रमा भी आठवें घर में, जो अंत समय को दर्शाता है। मंगल और बुध भी छठे स्थान पर, जो दुश्मनों का घर है। इसलिए ये गठबंधन उसी समय बिखर जाएगा, जब ये सभी ग्रह राहु-केतु के मध्य आएँगें।
भाजपा को गच्चा देने के बाद अजित पवार अपनी पार्टी में लौट भी गए हैं और ससम्मान स्वीकार भी हो गए हैं। मौजूदा खबरों में भी उनके डिप्टी सीएम बनाए जाने की बात सामने आ रही है।
"संस्कृत पढ़ना कोई कौतूहल की बात नहीं है पर संस्कृत प्रेमी कहना पूर्ण सत्य नहीं है यदि फिरोज संस्कृत प्रेमी होते तो दूसरे के धर्म पर आघात नहीं करते मुझे लगता है ये केवल व्यवसायिक तौर पर ही संस्कृत को पढ़ें है यदि ये तीन पीढ़ी से संस्कृत ही पढ़ रहे हैं, भजन-श्लोक गाने में ही रूचि है तथा वैचारिक रूप से सनातनी ही है तो फिर इन्होंने अबतक सनातन धर्म क्यों नहीं अपना लिया?"
राजीव धवन ने सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान भी अशोभनीय हरकत की थी। उन्होंने अदालत में दस्तावेजी साक्ष्य के रूप में पेश किए गए नक्शे को फाड़ दिया था। उनकी इस हरकत पर सीजेआई ने काफी नाराजगी जताई थी।
राहुल गाँधी और सोनिया गाँधी के पीएम बनने की बात चलती थी तो बालासाहब पूछते थे कि प्रधानमंत्री का पद भिंडी बाजार में रखी कोई कुर्सी है क्या? बाल ठाकरे के ख़ून पसीनों से सींची हुई पार्टी ने उसके नाम पर शपथ ली, जिसके सामने झुकने वालों को वो हिजड़ा मानते थे।
अमित शाह ने कहा कि जनादेश देवेंद्र फडणवीस को मुख्यमंत्री बनाने के लिए था, जिसका शिवसेना ने अपमान किया है। उन्होंने कहा कि अंत में स्थिर सरकार को ही जनता वापस लेकर आती है और महाराष्ट्र में भी ऐसा ही होगा।